विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका · VIDEHA · ISSN 2229-547X

काफिया आ बहर

आशीष अनचिन्हार · 2012-09-01 · अंक 113

२.१. उच्चारण निर्देश: (बोल्ड कएल रूप ग्राह्य):-
दन्त न क उच्चारणमे दाँतमे जीह सटत- जेना बाजू नाम , मुदा ण क उच्चारणमे जीह मूर्धामे सटत (नै सटैए तँ उच्चारण दोष अछि)- जेना बाजू गणेश। तालव्य शमे जीह तालुसँ , षमे मूर्धासँ आ दन्त समे दाँतसँ सटत। निशाँ, सभ आ शोषण बाजि कऽ देखू। मैथिलीमे ष केँ वैदिक संस्कृत जकाँ ख सेहो उच्चरित कएल जाइत अछि, जेना वर्षा, दोष। य अनेको स्थानपर ज जकाँ उच्चरित होइत अछि आ ण ड़ जकाँ (यथा संयोग आ गणेश संजोग आ
गड़ेस उच्चरित होइत अछि)। मैथिलीमे व क उच्चारण ब, श क उच्चारण स आ य क उच्चारण ज सेहो होइत अछि।
ओहिना ह्रस्व इ बेशीकाल मैथिलीमे पहिने बाजल जाइत अछि कारण देवनागरीमे आ मिथिलाक्षरमे ह्रस्व इ अक्षरक पहिने लिखलो जाइत आ बाजलो जएबाक चाही। कारण जे हिन्दीमे एकर दोषपूर्ण उच्चारण होइत अछि (लिखल तँ पहिने जाइत अछि मुदा बाजल बादमे जाइत अछि), से शिक्षा पद्धतिक दोषक कारण हम सभ ओकर उच्चारण दोषपूर्ण ढंगसँ कऽ रहल छी।
अछि- अ इ छ ऐछ (उच्चारण)
छथि- छ इ थ – छैथ (उच्चारण)
पहुँचि- प हुँ इ च (उच्चारण)
आब अ आ इ ई ए ऐ ओ औ अं अः ऋ ऐ सभ लेल मात्रा सेहो अछि, मुदा ऐमे ई ऐ ओ औ अं अः ऋ केँ संयुक्ताक्षर रूपमे गलत रूपमे प्रयुक्त आ उच्चरित कएल जाइत अछि। जेना ऋ केँ री रूपमे उच्चरित करब। आ देखियौ- ऐ लेल देखिऔ क प्रयोग अनुचित। मुदा देखिऐ लेल देखियै अनुचित। क् सँ ह् धरि अ सम्मिलित भेलासँ क सँ ह बनैत अछि, मुदा उच्चारण काल हलन्त युक्त शब्दक अन्तक उच्चारणक प्रवृत्ति बढ़ल अछि, मुदा हम जखन मनोजमे ज् अन्तमे बजैत छी, तखनो पुरनका लोककेँ बजैत सुनबन्हि- मनोजऽ, वास्तवमे ओ अ युक्त ज् = ज बजै छथि।
फेर ज्ञ अछि ज् आ ञ क संयुक्त मुदा गलत उच्चारण होइत अछि- ग्य। ओहिना क्ष अछि क् आ ष क संयुक्त मुदा उच्चारण होइत अछि छ। फेर श् आ र क संयुक्त अछि श्र ( जेना श्रमिक) आ स् आ र क संयुक्त अछि स्र (जेना मिस्र)। त्र भेल त+र ।
उच्चारणक ऑडियो फाइल विदेह आर्काइव http://www.videha.co.in/ पर उपलब्ध अछि। फेर केँ / सँ / पर पूर्व अक्षरसँ सटा कऽ लिखू मुदा तँ / कऽ हटा कऽ। ऐमे सँ मे पहिल सटा कऽ लिखू आ बादबला हटा कऽ। अंकक बाद टा लिखू सटा कऽ मुदा अन्य ठाम टा लिखू हटा कऽ– जेना
छहटा मुदा सभ टा। फेर ६अ म सातम लिखू- छठम सातम नै। घरबलामे बला मुदा घरवालीमे वाली प्रयुक्त करू।
रहए-
रहै मुदा सकैए (उच्चारण सकै-ए)।
मुदा कखनो काल रहए आ रहै मे अर्थ भिन्नता सेहो, जेना से कम्मो जगहमे पार्किंग करबाक अभ्यास रहै ओकरा। पुछलापर पता लागल जे ढुनढुन नाम्ना ई ड्राइवर कनाट प्लेसक पार्किंगमे काज करैत रहए।
छलै, छलए मे सेहो ऐ तरहक भेल। छलए क उच्चारण छल-ए सेहो।
संयोगने- (उच्चारण संजोगने)
केँ/ कऽ
केर- क (
केर क प्रयोग गद्यमे नै करू , पद्यमे कऽ सकै छी। )
क (जेना रामक)
–रामक आ संगे (उच्चारण राम के / राम कऽ सेहो)
सँ- सऽ (उच्चारण)
चन्द्रबिन्दु आ अनुस्वार- अनुस्वारमे कंठ धरिक प्रयोग होइत अछि मुदा चन्द्रबिन्दुमे नै। चन्द्रबिन्दुमे कनेक एकारक सेहो उच्चारण होइत अछि- जेना रामसँ- (उच्चारण राम सऽ) रामकेँ- (उच्चारण राम कऽ/ राम के सेहो)।
केँ जेना रामकेँ भेल हिन्दीक को (राम को)- राम को= रामकेँ
क जेना रामक भेल हिन्दीक का ( राम का) राम का= रामक
कऽ जेना जा कऽ भेल हिन्दीक कर ( जा कर) जा कर= जा कऽ
सँ भेल हिन्दीक से (राम से) राम से= रामसँ
सऽ , तऽ , त , केर (गद्यमे) एे चारू शब्द सबहक प्रयोग अवांछित।
के दोसर अर्थेँ प्रयुक्त भऽ सकैए- जेना, के कहलक? विभक्ति “क”क बदला एकर प्रयोग अवांछित।
नञि, नहि, नै, नइ, नँइ, नइँ, नइं ऐ सभक उच्चारण आ लेखन - नै
त्त्व क बदलामे त्व जेना महत्वपूर्ण (महत्त्वपूर्ण नै) जतए अर्थ बदलि जाए ओतहि मात्र तीन अक्षरक संयुक्ताक्षरक प्रयोग उचित। सम्पति- उच्चारण स म्प इ त (सम्पत्ति नै- कारण सही उच्चारण आसानीसँ सम्भव नै)। मुदा सर्वोत्तम (सर्वोतम नै)।
राष्ट्रिय (राष्ट्रीय नै)
सकैए/ सकै (अर्थ परिवर्तन)
पोछैले/ पोछै लेल/ पोछए लेल
पोछैए/ पोछए/ (अर्थ परिवर्तन) पोछए/ पोछै
ओ लोकनि ( हटा कऽ, ओ मे बिकारी नै)
ओइ/ ओहि
ओहिले/
ओहि लेल/ ओही लऽ
जएबेँ/ बैसबेँ
पँचभइयाँ
देखियौक/ (देखिऔक नै- तहिना अ मे ह्रस्व आ दीर्घक मात्राक प्रयोग अनुचित)
जकाँ / जेकाँ
तँइ/ तैँ/
होएत / हएत
नञि/ नहि/ नँइ/ नइँ/ नै
सौँसे/ सौंसे
बड़ /
बड़ी (झोराओल)
गाए (गाइ नहि), मुदा गाइक दूध (गाएक दूध नै।)
रहलेँ/ पहिरतैँ
हमहीं/ अहीं
सब - सभ
सबहक - सभहक
धरि - तक
गप- बात
बूझब - समझब
बुझलौं/ समझलौं/ बुझलहुँ - समझलहुँ
हमरा आर - हम सभ
आकि- आ कि
सकैछ/ करैछ (गद्यमे प्रयोगक आवश्यकता नै)
होइन/ होनि
जाइन (जानि नै, जेना देल जाइन) मुदा जानि-बूझि (अर्थ परिव्र्तन)
पइठ/ जाइठ
आउ/ जाउ/ आऊ/ जाऊ
मे, केँ, सँ, पर (शब्दसँ सटा कऽ) तँ कऽ धऽ दऽ (शब्दसँ हटा कऽ) मुदा दूटा वा बेसी विभक्ति संग रहलापर पहिल विभक्ति टाकेँ सटाऊ। जेना ऐमे सँ ।
एकटा , दूटा (मुदा कए टा)
बिकारीक प्रयोग शब्दक अन्तमे, बीचमे अनावश्यक रूपेँ नै। आकारान्त आ अन्तमे अ क बाद बिकारीक प्रयोग नै (जेना दिअ
, आ/ दिय’ , आ’, आ नै )
अपोस्ट्रोफीक प्रयोग बिकारीक बदलामे करब अनुचित आ मात्र फॉन्टक तकनीकी न्यूनताक परिचायक)- ओना बिकारीक संस्कृत रूप ऽ अवग्रह कहल जाइत अछि आ वर्तनी आ उच्चारण दुनू ठाम एकर लोप रहैत अछि/ रहि सकैत अछि (उच्चारणमे लोप रहिते अछि)। मुदा अपोस्ट्रोफी सेहो अंग्रेजीमे पसेसिव केसमे होइत अछि आ फ्रेंचमे शब्दमे जतए एकर प्रयोग होइत अछि जेना raison d’etre एतए सेहो एकर उच्चारण रैजौन डेटर होइत अछि, माने अपोस्ट्रॉफी अवकाश नै दैत अछि वरन जोड़ैत अछि, से एकर प्रयोग बिकारीक बदला देनाइ तकनीकी रूपेँ सेहो अनुचित)।
अइमे, एहिमे/ ऐमे
जइमे, जाहिमे
एखन/ अखन/ अइखन
केँ (के नहि) मे (अनुस्वार रहित)
भऽ
मे
दऽ
तँ (तऽ, त नै)
सँ ( सऽ स नै)
गाछ तर
गाछ लग
साँझ खन
जो (जो go, करै जो do)
तै/तइ जेना- तै दुआरे/ तइमे/ तइले
जै/जइ जेना- जै कारण/ जइसँ/ जइले
ऐ/अइ जेना- ऐ कारण/ ऐसँ/ अइले/ मुदा एकर एकटा खास प्रयोग- लालति‍ कतेक दि‍नसँ कहैत रहैत अइ
लै/लइ जेना लैसँ/ लइले/ लै दुआरे
लहँ/ लौं
गेलौं/ लेलौं/ लेलँह/ गेलहुँ/ लेलहुँ/ लेलँ
जइ/ जाहि‍/ जै
जहि‍ठाम/ जाहि‍ठाम/ जइठाम/ जैठाम
एहि‍/ अहि‍/
अइ (वाक्यक अंतमे ग्राह्य) / ऐ
अइछ/ अछि‍/ ऐछ
तइ/ तहि‍/ तै/ ताहि‍
ओहि‍/ ओइ
सीखि‍/ सीख
जीवि‍/ जीवी/ जीब
भलेहीं/ भलहि‍ं
तैं/ तँइ/ तँए
जाएब/ जएब
लइ/ लै
छइ/ छै
नहि‍/ नै/ नइ
गइ/ गै
छनि‍/ छन्‍हि‍ ...
समए शब्‍दक संग जखन कोनो वि‍भक्‍ति‍ जुटै छै तखन समै जना समैपर इत्‍यादि‍। असगरमे हृदए आ वि‍भक्‍ति‍ जुटने हृदे जना हृदेसँ, हृदेमे इत्‍यादि‍।
जइ/ जाहि‍/
जै
जहि‍ठाम/ जाहि‍ठाम/ जइठाम/ जैठाम
एहि‍/ अहि‍/ अइ/ ऐ
अइछ/ अछि‍/ ऐछ
तइ/ तहि‍/ तै/ ताहि‍
ओहि‍/ ओइ
सीखि‍/ सीख
जीवि‍/ जीवी/
जीब
भले/ भलेहीं/
भलहि‍ं
तैं/ तँइ/ तँए
जाएब/ जएब
लइ/ लै
छइ/ छै
नहि‍/ नै/ नइ
गइ/
गै
छनि‍/ छन्‍हि‍
चुकल अछि/ गेल गछि
२.२. मैथिलीमे भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम
नीचाँक सूचीमे देल विकल्पमेसँ लैंगुएज एडीटर द्वारा कोन रूप चुनल जेबाक चाही:
बोल्ड कएल रूप ग्राह्य:
१.होयबला/ होबयबला/ होमयबला/ हेब’बला, हेम’बला/ होयबाक/होबएबला /होएबाक
२. आ’/आऽ

३. क’ लेने/कऽ लेने/कए लेने/कय लेने/ल’/लऽ/लय/लए
४. भ’ गेल/भऽ गेल/भय गेल/भए
गेल
५. कर’ गेलाह/करऽ
गेलह/करए गेलाह/करय गेलाह
६.
लिअ/दिअ लिय’,दिय’,लिअ’,दिय’/
७. कर’ बला/करऽ बला/ करय बला करैबला/क’र’ बला /
करैवाली
८. बला वला (पुरूष), वाली (स्‍त्री) ९
.
आङ्ल आंग्ल
१०. प्रायः प्रायह
११. दुःख दुख १
२. चलि गेल चल गेल/चैल गेल
१३. देलखिन्ह देलकिन्ह, देलखिन
१४.
देखलन्हि देखलनि/ देखलैन्ह
१५. छथिन्ह/ छलन्हि छथिन/ छलैन/ छलनि
१६. चलैत/दैत चलति/दैति
१७. एखनो
अखनो
१८.
बढ़नि‍ बढ़इन बढ़न्हि
१९. ओ’/ओऽ(सर्वनाम) ओ
२०
. ओ (संयोजक) ओ’/ओऽ
२१. फाँगि/फाङ्गि फाइंग/फाइङ
२२.
जे जे’/जेऽ २३. ना-नुकुर ना-नुकर
२४. केलन्हि/केलनि‍/कयलन्हि
२५. तखनतँ/ तखन तँ
२६. जा
रहल/जाय रहल/जाए रहल
२७. निकलय/निकलए
लागल/ लगल बहराय/ बहराए लागल/ लगल निकल’/बहरै लागल
२८. ओतय/ जतय जत’/ ओत’/ जतए/ ओतए
२९.
की फूरल जे कि फूरल जे
३०. जे जे’/जेऽ
३१. कूदि / यादि(मोन पारब) कूइद/याइद/कूद/याद/
यादि (मोन)
३२. इहो/ ओहो
३३.
हँसए/ हँसय हँसऽ
३४. नौ आकि दस/नौ किंवा दस/ नौ वा दस
३५. सासु-ससुर सास-ससुर
३६. छह/ सात छ/छः/सात
३७.
की की’/ कीऽ (दीर्घीकारान्तमे ऽ वर्जित)
३८. जबाब जवाब
३९. करएताह/ करेताह करयताह
४०. दलान दिशि दलान दिश/दलान दिस
४१
. गेलाह गएलाह/गयलाह
४२. किछु आर/ किछु और/ किछ आर
४३. जाइ छल/ जाइत छल जाति छल/जैत छल
४४. पहुँचि/ भेट जाइत छल/ भेट जाइ छलए पहुँच/ भेटि‍ जाइत छल
४५.
जबान (युवा)/ जवान(फौजी)
४६. लय/ लए क’/ कऽ/ लए कए / लऽ कऽ/ लऽ कए
४७. ल’/लऽ कय/
कए
४८. एखन / एखने / अखन / अखने
४९.
अहींकेँ अहीँकेँ
५०. गहींर गहीँर
५१.
धार पार केनाइ धार पार केनाय/केनाए
५२. जेकाँ जेँकाँ/
जकाँ
५३. तहिना तेहिना
५४. एकर अकर
५५. बहिनउ बहनोइ
५६. बहिन बहिनि
५७. बहिन-बहिनोइ
बहिन-बहनउ
५८. नहि/ नै
५९. करबा / करबाय/ करबाए
६०. तँ/ त ऽ तय/तए
६१. भैयारी मे छोट-भाए/भै/, जेठ-भाय/भाइ,
६२. गि‍नतीमे दू भाइ/भाए/भाँइ
६३. ई पोथी दू भाइक/ भाँइ/ भाए/ लेल। यावत जावत
६४. माय मै / माए मुदा माइक ममता
६५. देन्हि/ दइन दनि‍/ दएन्हि/ दयन्हि दन्हि/ दैन्हि
६६. द’/ दऽ/ दए
६७. ओ (संयोजक) ओऽ (सर्वनाम)
६८. तका कए तकाय तकाए
६९. पैरे (on foot) पएरे कएक/ कैक
७०.
ताहुमे/ ताहूमे
७१.
पुत्रीक
७२.
बजा कय/ कए / कऽ
७३. बननाय/बननाइ
७४. कोला
७५.
दिनुका दिनका
७६.
ततहिसँ
७७. गरबओलन्हि/ गरबौलनि‍/
गरबेलन्हि/ गरबेलनि‍
७८. बालु बालू
७९.
चेन्ह चिन्ह(अशुद्ध)
८०. जे जे’
८१
. से/ के से’/के’
८२. एखुनका अखनुका
८३. भुमिहार भूमिहार
८४. सुग्गर
/ सुगरक/ सूगर
८५. झठहाक झटहाक ८६.
छूबि
८७. करइयो/ओ करैयो ने देलक /करियौ-करइयौ
८८. पुबारि
पुबाइ
८९. झगड़ा-झाँटी
झगड़ा-झाँटि
९०. पएरे-पएरे पैरे-पैरे
९१. खेलएबाक
९२. खेलेबाक
९३. लगा
९४. होए- हो – होअए
९५. बुझल बूझल
९६.
बूझल (संबोधन अर्थमे)
९७. यैह यएह / इएह/ सैह/ सएह
९८. तातिल
९९. अयनाय- अयनाइ/ अएनाइ/ एनाइ
१००. निन्न- निन्द
१०१.
बिनु बिन
१०२. जाए जाइ
१०३.
जाइ (in different sense)-last word of sentence
१०४. छत पर आबि जाइ
१०५.
ने
१०६. खेलाए (play) –खेलाइ
१०७. शिकाइत- शिकायत
१०८.
ढप- ढ़प
१०९
. पढ़- पढ
११०. कनिए/ कनिये कनिञे
१११. राकस- राकश
११२. होए/ होय होइ
११३. अउरदा-
औरदा
११४. बुझेलन्हि (different meaning- got understand)
११५. बुझएलन्हि/बुझेलनि‍/ बुझयलन्हि (understood himself)
११६. चलि- चल/ चलि‍ गेल
११७. खधाइ- खधाय
११८.
मोन पाड़लखिन्ह/ मोन पाड़लखि‍न/ मोन पारलखिन्ह
११९. कैक- कएक- कइएक
१२०.
लग ल’ग
१२१. जरेनाइ
१२२. जरौनाइ जरओनाइ- जरएनाइ/
जरेनाइ
१२३. होइत
१२४.
गरबेलन्हि/ गरबेलनि‍ गरबौलन्हि/ गरबौलनि‍
१२५.
चिखैत- (to test)चिखइत
१२६. करइयो (willing to do) करैयो
१२७. जेकरा- जकरा
१२८. तकरा- तेकरा
१२९.
बिदेसर स्थानेमे/ बिदेसरे स्थानमे
१३०. करबयलहुँ/ करबएलहुँ/ करबेलहुँ करबेलौं
१३१.
हारिक (उच्चारण हाइरक)
१३२. ओजन वजन आफसोच/ अफसोस कागत/ कागच/ कागज
१३३. आधे भाग/ आध-भागे
१३४. पिचा / पिचाय/पिचाए
१३५. नञ/ ने
१३६. बच्चा नञ
(ने) पिचा जाय
१३७. तखन ने (नञ) कहैत अछि। कहै/ सुनै/ देखै छल मुदा कहैत-कहैत/ सुनैत-सुनैत/ देखैत-देखैत
१३८.
कतेक गोटे/ कताक गोटे
१३९. कमाइ-धमाइ/ कमाई- धमाई
१४०
. लग ल’ग
१४१. खेलाइ (for playing)
१४२.
छथिन्ह/ छथिन
१४३.
होइत होइ
१४४. क्यो कियो / केओ
१४५.
केश (hair)
१४६.
केस (court-case)
१४७
. बननाइ/ बननाय/ बननाए
१४८. जरेनाइ
१४९. कुरसी कुर्सी
१५०. चरचा चर्चा
१५१. कर्म करम
१५२. डुबाबए/ डुबाबै/ डुमाबै डुमाबय/ डुमाबए
१५३. एखुनका/
अखुनका
१५४. लए/ लिअए (वाक्यक अंतिम शब्द)- लऽ
१५५. कएलक/
केलक
१५६. गरमी गर्मी
१५७
. वरदी वर्दी
१५८. सुना गेलाह सुना’/सुनाऽ
१५९. एनाइ-गेनाइ
१६०.
तेना ने घेरलन्हि/ तेना ने घेरलनि‍
१६१. नञि / नै
१६२.
डरो ड’रो
१६३. कतहु/ कतौ कहीं
१६४. उमरिगर-उमेरगर उमरगर
१६५. भरिगर
१६६. धोल/धोअल धोएल
१६७. गप/गप्प
१६८.
के के’
१६९. दरबज्जा/ दरबजा
१७०. ठाम
१७१.
धरि तक
१७२.
घूरि लौटि
१७३. थोरबेक
१७४. बड्ड
१७५. तोँ/ तूँ
१७६. तोँहि( पद्यमे ग्राह्य)
१७७. तोँही / तोँहि
१७८.
करबाइए करबाइये
१७९. एकेटा
१८०. करितथि /करतथि
१८१.
पहुँचि/ पहुँच
१८२. राखलन्हि रखलन्हि/ रखलनि‍
१८३.
लगलन्हि/ लगलनि‍ लागलन्हि
१८४.
सुनि (उच्चारण सुइन)
१८५. अछि (उच्चारण अइछ)
१८६. एलथि गेलथि
१८७. बितओने/ बि‍तौने/
बितेने
१८८. करबओलन्हि/ करबौलनि‍/
करेलखिन्ह/ करेलखि‍न
१८९. करएलन्हि/ करेलनि‍
१९०.
आकि/ कि
१९१. पहुँचि/
पहुँच
१९२. बत्ती जराय/ जराए जरा (आगि लगा)
१९३.
से से’
१९४.
हाँ मे हाँ (हाँमे हाँ विभक्त्तिमे हटा कए)
१९५. फेल फैल
१९६. फइल(spacious) फैल
१९७. होयतन्हि/ होएतन्हि/ होएतनि‍/हेतनि‍/ हेतन्हि
१९८. हाथ मटिआएब/ हाथ मटियाबय/हाथ मटियाएब
१९९. फेका फेंका
२००. देखाए देखा
२०१. देखाबए
२०२. सत्तरि सत्तर
२०३.
साहेब साहब
२०४.गेलैन्ह/ गेलन्हि/ गेलनि‍
२०५. हेबाक/ होएबाक
२०६.केलो/ कएलहुँ/केलौं/ केलुँ
२०७. किछु न किछु/
किछु ने किछु
२०८.घुमेलहुँ/ घुमओलहुँ/ घुमेलौं
२०९. एलाक/ अएलाक
२१०. अः/ अह
२११.लय/
लए (अर्थ-परिवर्त्तन) २१२.कनीक/ कनेक
२१३.सबहक/ सभक
२१४.मिलाऽ/ मिला
२१५.कऽ/ क
२१६.जाऽ/
जा
२१७.आऽ/ आ
२१८.भऽ /भ’ (’ फॉन्टक कमीक द्योतक)
२१९.निअम/ नियम
२२०
.हेक्टेअर/ हेक्टेयर
२२१.पहिल अक्षर ढ/ बादक/ बीचक ढ़
२२२.तहिं/तहिँ/ तञि/ तैं
२२३.कहिं/ कहीं
२२४.तँइ/
तैं / तइँ
२२५.नँइ/ नइँ/ नञि/ नहि/नै
२२६.है/ हए / एलीहेँ/
२२७.छञि/ छै/ छैक /छइ
२२८.दृष्टिएँ/ दृष्टियेँ
२२९.आ (come)/ आऽ(conjunction)
२३०.
आ (conjunction)/ आऽ(come)
२३१.कुनो/ कोनो, कोना/केना
२३२.गेलैन्ह-गेलन्हि-गेलनि‍
२३३.हेबाक- होएबाक
२३४.केलौँ- कएलौँ-कएलहुँ/केलौं
२३५.किछु न किछ- किछु ने किछु
२३६.केहेन- केहन
२३७.आऽ (come)-आ (conjunction-and)/आ। आब'-आब' /आबह-आबह
२३८. हएत-हैत
२३९.घुमेलहुँ-घुमएलहुँ- घुमेलाें
२४०.एलाक- अएलाक
२४१.होनि- होइन/ होन्हि/
२४२.ओ-राम ओ श्यामक बीच(conjunction), ओऽ कहलक (he said)/ओ
२४३.की हए/ कोसी अएली हए/ की है। की हइ
२४४.दृष्टिएँ/ दृष्टियेँ
२४५
.शामिल/ सामेल
२४६.तैँ / तँए/ तञि/ तहिं
२४७.जौं
/ ज्योँ/ जँ/
२४८.सभ/ सब
२४९.सभक/ सबहक
२५०.कहिं/ कहीं
२५१.कुनो/ कोनो/ कोनहुँ/
२५२.फारकती भऽ गेल/ भए गेल/ भय गेल
२५३.कोना/ केना/ कन्‍ना/कना
२५४.अः/ अह
२५५.जनै/ जनञ
२५६.गेलनि‍/
गेलाह (अर्थ परिवर्तन)
२५७.केलन्हि/ कएलन्हि/ केलनि‍/
२५८.लय/ लए/ लएह (अर्थ परिवर्तन)
२५९.कनीक/ कनेक/कनी-मनी
२६०.पठेलन्हि‍ पठेलनि‍/ पठेलइन/ पपठओलन्हि/ पठबौलनि‍/
२६१.निअम/ नियम
२६२.हेक्टेअर/ हेक्टेयर
२६३.पहिल अक्षर रहने ढ/ बीचमे रहने ढ़
२६४.आकारान्तमे बिकारीक प्रयोग उचित नै/ अपोस्ट्रोफीक प्रयोग फान्टक तकनीकी न्यूनताक परिचायक ओकर बदला अवग्रह (बिकारी) क प्रयोग उचित
२६५.केर (पद्यमे ग्राह्य) / -क/ कऽ/ के
२६६.छैन्हि- छन्हि
२६७.लगैए/ लगैये
२६८.होएत/ हएत
२६९.जाएत/ जएत/
२७०.आएत/ अएत/ आओत
२७१
.खाएत/ खएत/ खैत
२७२.पिअएबाक/ पिएबाक/पि‍येबाक
२७३.शुरु/ शुरुह
२७४.शुरुहे/ शुरुए
२७५.अएताह/अओताह/ एताह/ औताह
२७६.जाहि/ जाइ/ जइ/ जै/
२७७.जाइत/ जैतए/ जइतए
२७८.आएल/ अएल
२७९.कैक/ कएक
२८०.आयल/ अएल/ आएल
२८१. जाए/ जअए/ जए (लालति‍ जाए लगलीह।)
२८२. नुकएल/ नुकाएल
२८३. कठुआएल/ कठुअएल
२८४. ताहि/ तै/ तइ
२८५. गायब/ गाएब/ गएब
२८६. सकै/ सकए/ सकय
२८७.सेरा/सरा/ सराए (भात सरा गेल)
२८८.कहैत रही/देखैत रही/ कहैत छलौं/ कहै छलौं- अहिना चलैत/ पढ़ैत
(पढ़ै-पढ़ैत अर्थ कखनो काल परिवर्तित) - आर बुझै/ बुझैत (बुझै/ बुझै छी, मुदा बुझैत-बुझैत)/ सकैत/ सकै। करैत/ करै। दै/ दैत। छैक/ छै। बचलै/ बचलैक। रखबा/ रखबाक । बिनु/ बिन। रातिक/ रातुक बुझै आ बुझैत केर अपन-अपन जगहपर प्रयोग समीचीन अछि‍। बुझैत-बुझैत आब बुझलि‍ऐ। हमहूँ बुझै छी।
२८९. दुआरे/ द्वारे
२९०.भेटि/ भेट/ भेँट
२९१.
खन/ खीन/ खुना (भोर खन/ भोर खीन)
२९२.तक/ धरि
२९३.गऽ/ गै (meaning different-जनबै गऽ)
२९४.सऽ/ सँ (मुदा दऽ, लऽ)
२९५.त्त्व,(तीन अक्षरक मेल बदला पुनरुक्तिक एक आ एकटा दोसरक उपयोग) आदिक बदला त्व आदि। महत्त्व/ महत्व/ कर्ता/ कर्त्ता आदिमे त्त संयुक्तक कोनो आवश्यकता मैथिलीमे नै अछि। वक्तव्य
२९६.बेसी/ बेशी
२९७.बाला/वाला बला/ वला (रहैबला)
२९८
.वाली/ (बदलैवाली)
२९९.वार्त्ता/ वार्ता
३००. अन्तर्राष्ट्रिय/ अन्तर्राष्ट्रीय
३०१. लेमए/ लेबए
३०२.लमछुरका, नमछुरका
३०२.लागै/ लगै (
भेटैत/ भेटै)
३०३.लागल/ लगल
३०४.हबा/ हवा
३०५.राखलक/ रखलक
३०६.आ (come)/ आ (and)
३०७. पश्चाताप/ पश्चात्ताप
३०८. ऽ केर व्यवहार शब्दक अन्तमे मात्र, यथासंभव बीचमे नै।
३०९.कहैत/ कहै
३१०.
रहए (छल)/ रहै (छलै) (meaning different)
३११.तागति/ ताकति
३१२.खराप/ खराब
३१३.बोइन/ बोनि/ बोइनि
३१४.जाठि/ जाइठ
३१५.कागज/ कागच/ कागत
३१६.गिरै (meaning different- swallow)/ गिरए (खसए)
३१७.राष्ट्रिय/ राष्ट्रीय
DATE-LIST (year- 2012-13)
(१४२० फसली साल)
Marriage Days:
Nov.2012- 25, 26, 28, 29, 30
Dec.2012- 5,9, 10, 13, 14
January 2013- 16, 17, 18, 23, 24, 31
Feb.2013- 1, 3, 4, 6, 8, 10, 14, 15, 18, 20, 24, 25
April 2013- 21, 22, 24, 26, 29
May 2013- 1,2,3,5,6,9,12,13,17,19,20,22,23,24,26,27,29,30,31
June 2013- 2,3
July 2013- 11, 14, 15
Upanayana Days:
January 2013- 16
February 2013- 14, 15, 20, 21
April 2013- 22
May 2013- 20, 21
Dviragaman Din:
November 2012- 25, 26, 28, 29
December 2012- 2, 3, 14
February 2013- 14, 15, 18, 20, 21, 22, 27, 28
March 2013- 1
April 2013- 18, 22, 24, 26, 28, 29
May 2013- 12, 13
Mundan Din:
November 2012- 26, 30
December 2012- 3
January 2013- 18, 24
February 2013- 1, 14, 15, 20, 28
April 2013- 17
May 2013- 13, 23, 29
June 2013- 13, 19, 26, 27, 28
July 2013- 10, 15
FESTIVALS OF MITHILA (2012-13)
Mauna Panchami-08 July
Madhushravani- 22 July
Nag Panchami- 24 July
Raksha Bandhan- 02 Aug
Krishnastami- 10 August
Kushi Amavasya / Somvari Vrat- 17 August
Vishwakarma Pooja- 17 September
Hartalika Teej- 18 September
ChauthChandra-19 September
Karma Dharma Ekadashi-26 September
Indra Pooja Aarambh- 27 September
Anant Caturdashi- 29 Sep
Agastyarghadaan- 30 Sep
Pitri Paksha begins- 30 Sep
Jimootavahan Vrata/ Jitia-08 October
Matri Navami- 09 October
SomvatiAmavasya Vrat- 15 October
Kalashsthapan- 16 October
Belnauti- 20 October
Patrika Pravesh- 21 October
Mahastami- 22 October
Maha Navami - 23 October
Vijaya Dashami- 24 October
Kojagara- 29 Oct
Dhanteras- 11 November
Diyabati, shyama pooja-13 November
Annakoota/ Govardhana Pooja-14 November
Bhratridwitiya/ Chitragupta Pooja- 15 November
Chhathi -19 November
Devotthan Ekadashi- 24 November
ravivratarambh- 25 November
Navanna parvan- 25 November
KartikPoornima- Sama Visarjan- 28 November
Vivaha Panchmi- 17 December
Makara/ Teela Sankranti-14 Jan
Naraknivaran chaturdashi- 08 February
Basant Panchami/ Saraswati Pooja- 15 February
Achla Saptmi- 17 February
Mahashivaratri-10 March
Holikadahan-Fagua-26 March
Holi- 28 March
Varuni Trayodashi-07 April
Chaiti navaratrarambh- 11 April
Jurishital-15 April
Chaiti Chhathi vrata-16 April
Ram Navami- 19 April
Ravi Brat Ant- 12 May
Akshaya Tritiya-13 May
Janaki Navami- 19 May
Vat Savitri-barasait- 08 June
Ganga Dashhara-18 June
Somavati Amavasya Vrata- 08 July
Jagannath Rath Yatra- 10 July
Hari Sayan Ekadashi- 19 July
Aashadhi Guru Poornima-22 Jul
VIDEHA ARCHIVE
१.विदेह ई-पत्रिकाक सभटा पुरान अंक ब्रेल, तिरहुता आ देवनागरी रूपमे Videha e journal's all old issues in Braille Tirhuta and Devanagari versions
विदेह ई-पत्रिकाक पहिल ५० अंक

विदेह ई-पत्रिकाक ५०म सँ आगाँक अंक
२.मैथिली पोथी डाउनलोड Maithili Books Download
३.मैथिली ऑडियो संकलन Maithili Audio Downloads
४.मैथिली वीडियोक संकलन Maithili Videos
५.मिथिला चित्रकला/ आधुनिक चित्रकला आ चित्र Mithila Painting/ Modern Art and Photos
"विदेह"क एहि सभ सहयोगी लिंकपर सेहो एक बेर जाउ।
६.विदेह मैथिली क्विज :
http://videhaquiz.blogspot.com/
७.विदेह मैथिली जालवृत्त एग्रीगेटर :
http://videha-aggregator.blogspot.com/
८.विदेह मैथिली साहित्य अंग्रेजीमे अनूदित
http://madhubani-art.blogspot.com/
९.विदेहक पूर्व-रूप "भालसरिक गाछ" :
http://gajendrathakur.blogspot.com/
१०.विदेह इंडेक्स :
http://videha123.blogspot.com/
११.विदेह फाइल :
http://videha123.wordpress.com/
१२. विदेह: सदेह : पहिल तिरहुता (मिथिला़क्षर) जालवृत्त (ब्लॉग)
http://videha-sadeha.blogspot.com/
१३. विदेह:ब्रेल: मैथिली ब्रेलमे: पहिल बेर विदेह द्वारा
http://videha-braille.blogspot.com/
१४.VIDEHA IST MAITHILI FORTNIGHTLY EJOURNAL ARCHIVE
http://videha-archive.blogspot.com/
१५. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका मैथिली पोथीक आर्काइव
http://videha-pothi.blogspot.com/
१६. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका ऑडियो आर्काइव
http://videha-audio.blogspot.com/
१७. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका वीडियो आर्काइव
http://videha-video.blogspot.com/
१८. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका मिथिला चित्रकला, आधुनिक कला आ चित्रकला
http://videha-paintings-photos.blogspot.com/
१९. मैथिल आर मिथिला (मैथिलीक सभसँ लोकप्रिय जालवृत्त)
http://maithilaurmithila.blogspot.com/
२०.श्रुति प्रकाशन
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२७. Join official Videha facebook group.
२८. विदेह मैथिली नाट्य उत्सव
http://maithili-drama.blogspot.com/
२९.समदिया
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३०. मैथिली फिल्म्स
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३१.अनचिन्हार आखर
http://anchinharakharkolkata.blogspot.com/
३२. मैथिली हाइकू
http://maithili-haiku.blogspot.com/
३३. मानक मैथिली
http://manak-maithili.blogspot.com/
३४. विहनि कथा
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३५. मैथिली कविता
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३६. मैथिली कथा
http://maithili-katha.blogspot.in/
३७.मैथिली समालोचना
http://maithili-samalochna.blogspot.in/
महत्त्वपूर्ण सूचना:(१) 'विदेह' द्वारा धारावाहिक रूपे ई-प्रकाशित कएल गेल गजेन्द्र ठाकुरक निबन्ध-प्रबन्ध-समीक्षा, उपन्यास (सहस्रबाढ़नि) , पद्य-संग्रह (सहस्राब्दीक चौपड़पर), कथा-गल्प (गल्प-गुच्छ), नाटक(संकर्षण), महाकाव्य (त्वञ्चाहञ्च आ असञ्जाति मन) आ बाल-किशोर साहित्य विदेहमे संपूर्ण ई-प्रकाशनक बाद प्रिंट फॉर्ममे। कुरुक्षेत्रम्–अन्तर्मनक खण्ड-१ सँ ७ Combined ISBN No.978-81-907729-7-6 विवरण एहि पृष्ठपर नीचाँमे आ प्रकाशकक साइट http://www.shruti-publication.com/ पर ।
महत्त्वपूर्ण सूचना (२):सूचना: विदेहक मैथिली-अंग्रेजी आ अंग्रेजी मैथिली कोष (इंटरनेटपर पहिल बेर सर्च-डिक्शनरी) एम.एस. एस.क्यू.एल. सर्वर आधारित -Based on ms-sql server Maithili-English and English-Maithili Dictionary. विदेहक भाषापाक- रचनालेखन स्तंभमे।
कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक- गजेन्द्र ठाकुर
गजेन्द्र ठाकुरक निबन्ध-प्रबन्ध-समीक्षा, उपन्यास (सहस्रबाढ़नि) , पद्य-संग्रह (सहस्राब्दीक चौपड़पर), कथा-गल्प (गल्प गुच्छ), नाटक(संकर्षण), महाकाव्य (त्वञ्चाहञ्च आ असञ्जाति मन) आ बालमंडली-किशोरजगत विदेहमे संपूर्ण ई-प्रकाशनक बाद प्रिंट फॉर्ममे। कुरुक्षेत्रम्–अन्तर्मनक, खण्ड-१ सँ ७
Ist edition 2009 of Gajendra Thakur’s KuruKshetram-Antarmanak (Vol. I to VII)- essay-paper-criticism, novel, poems, story, play, epics and Children-grown-ups literature in single binding:
Language:Maithili
६९२ पृष्ठ : मूल्य भा. रु. 100/-(for individual buyers inside india)
(add courier charges Rs.50/-per copy for Delhi/NCR and Rs.100/- per copy for outside Delhi)

For Libraries and overseas buyers $40 US (including postage)

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website: http://www.shruti-publication.com/
or you may write to
e-mail:shruti.publication@shruti-publication.com
विदेह: सदेह : १: २: ३: ४ तिरहुता : देवनागरी "विदेह" क, प्रिंट संस्करण :विदेह-ई-पत्रिका (http://www.videha.co.in/) क चुनल रचना सम्मिलित।
विदेह:सदेह:१: २: ३: ४
सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर।
Details for purchase available at print-version publishers's site http://www.shruti-publication.com or you may write to shruti.publication@shruti-publication.com
२. संदेश-
[ विदेह ई-पत्रिका, विदेह:सदेह मिथिलाक्षर आ देवनागरी आ गजेन्द्र ठाकुरक सात खण्डक- निबन्ध-प्रबन्ध-समीक्षा,उपन्यास (सहस्रबाढ़नि) , पद्य-संग्रह (सहस्राब्दीक चौपड़पर), कथा-गल्प (गल्प गुच्छ), नाटक (संकर्षण), महाकाव्य (त्वञ्चाहञ्च आ असञ्जाति मन) आ बाल-मंडली-किशोर जगत- संग्रह कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक मादेँ। ]
१.श्री गोविन्द झा- विदेहकेँ तरंगजालपर उतारि विश्वभरिमे मातृभाषा मैथिलीक लहरि जगाओल, खेद जे अपनेक एहि महाभियानमे हम एखन धरि संग नहि दए सकलहुँ। सुनैत छी अपनेकेँ सुझाओ आ रचनात्मक आलोचना प्रिय लगैत अछि तेँ किछु लिखक मोन भेल। हमर सहायता आ सहयोग अपनेकेँ सदा उपलब्ध रहत।
२.श्री रमानन्द रेणु- मैथिलीमे ई-पत्रिका पाक्षिक रूपेँ चला कऽ जे अपन मातृभाषाक प्रचार कऽ रहल छी, से धन्यवाद । आगाँ अपनेक समस्त मैथिलीक कार्यक हेतु हम हृदयसँ शुभकामना दऽ रहल छी।
३.श्री विद्यानाथ झा "विदित"- संचार आ प्रौद्योगिकीक एहि प्रतिस्पर्धी ग्लोबल युगमे अपन महिमामय "विदेह"केँ अपना देहमे प्रकट देखि जतबा प्रसन्नता आ संतोष भेल, तकरा कोनो उपलब्ध "मीटर"सँ नहि नापल जा सकैछ? ..एकर ऐतिहासिक मूल्यांकन आ सांस्कृतिक प्रतिफलन एहि शताब्दीक अंत धरि लोकक नजरिमे आश्चर्यजनक रूपसँ प्रकट हैत।
४. प्रो. उदय नारायण सिंह "नचिकेता"- जे काज अहाँ कए रहल छी तकर चरचा एक दिन मैथिली भाषाक इतिहासमे होएत। आनन्द भए रहल अछि, ई जानि कए जे एतेक गोट मैथिल "विदेह" ई जर्नलकेँ पढ़ि रहल छथि।...विदेहक चालीसम अंक पुरबाक लेल अभिनन्दन।
५. डॉ. गंगेश गुंजन- एहि विदेह-कर्ममे लागि रहल अहाँक सम्वेदनशील मन, मैथिलीक प्रति समर्पित मेहनतिक अमृत रंग, इतिहास मे एक टा विशिष्ट फराक अध्याय आरंभ करत, हमरा विश्वास अछि। अशेष शुभकामना आ बधाइक सङ्ग, सस्नेह...अहाँक पोथी कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक प्रथम दृष्टया बहुत भव्य तथा उपयोगी बुझाइछ। मैथिलीमे तँ अपना स्वरूपक प्रायः ई पहिले एहन भव्य अवतारक पोथी थिक। हर्षपूर्ण हमर हार्दिक बधाई स्वीकार करी।
६. श्री रामाश्रय झा "रामरंग"(आब स्वर्गीय)- "अपना" मिथिलासँ संबंधित...विषय वस्तुसँ अवगत भेलहुँ।...शेष सभ कुशल अछि।
७. श्री ब्रजेन्द्र त्रिपाठी- साहित्य अकादमी- इंटरनेट पर प्रथम मैथिली पाक्षिक पत्रिका "विदेह" केर लेल बधाई आ शुभकामना स्वीकार करू।
८. श्री प्रफुल्लकुमार सिंह "मौन"- प्रथम मैथिली पाक्षिक पत्रिका "विदेह" क प्रकाशनक समाचार जानि कनेक चकित मुदा बेसी आह्लादित भेलहुँ। कालचक्रकेँ पकड़ि जाहि दूरदृष्टिक परिचय देलहुँ, ओहि लेल हमर मंगलकामना।
९.डॉ. शिवप्रसाद यादव- ई जानि अपार हर्ष भए रहल अछि, जे नव सूचना-क्रान्तिक क्षेत्रमे मैथिली पत्रकारिताकेँ प्रवेश दिअएबाक साहसिक कदम उठाओल अछि। पत्रकारितामे एहि प्रकारक नव प्रयोगक हम स्वागत करैत छी, संगहि "विदेह"क सफलताक शुभकामना।
१०. श्री आद्याचरण झा- कोनो पत्र-पत्रिकाक प्रकाशन- ताहूमे मैथिली पत्रिकाक प्रकाशनमे के कतेक सहयोग करताह- ई तऽ भविष्य कहत। ई हमर ८८ वर्षमे ७५ वर्षक अनुभव रहल। एतेक पैघ महान यज्ञमे हमर श्रद्धापूर्ण आहुति प्राप्त होयत- यावत ठीक-ठाक छी/ रहब।
११. श्री विजय ठाकुर- मिशिगन विश्वविद्यालय- "विदेह" पत्रिकाक अंक देखलहुँ, सम्पूर्ण टीम बधाईक पात्र अछि। पत्रिकाक मंगल भविष्य हेतु हमर शुभकामना स्वीकार कएल जाओ।
१२. श्री सुभाषचन्द्र यादव- ई-पत्रिका "विदेह" क बारेमे जानि प्रसन्नता भेल। ’विदेह’ निरन्तर पल्लवित-पुष्पित हो आ चतुर्दिक अपन सुगंध पसारय से कामना अछि।
१३. श्री मैथिलीपुत्र प्रदीप- ई-पत्रिका "विदेह" केर सफलताक भगवतीसँ कामना। हमर पूर्ण सहयोग रहत।
१४. डॉ. श्री भीमनाथ झा- "विदेह" इन्टरनेट पर अछि तेँ "विदेह" नाम उचित आर कतेक रूपेँ एकर विवरण भए सकैत अछि। आइ-काल्हि मोनमे उद्वेग रहैत अछि, मुदा शीघ्र पूर्ण सहयोग देब।कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक देखि अति प्रसन्नता भेल। मैथिलीक लेल ई घटना छी।
१५. श्री रामभरोस कापड़ि "भ्रमर"- जनकपुरधाम- "विदेह" ऑनलाइन देखि रहल छी। मैथिलीकेँ अन्तर्राष्ट्रीय जगतमे पहुँचेलहुँ तकरा लेल हार्दिक बधाई। मिथिला रत्न सभक संकलन अपूर्व। नेपालोक सहयोग भेटत, से विश्वास करी।
१६. श्री राजनन्दन लालदास- "विदेह" ई-पत्रिकाक माध्यमसँ बड़ नीक काज कए रहल छी, नातिक अहिठाम देखलहुँ। एकर वार्षिक अ‍ंक जखन प्रिं‍ट निकालब तँ हमरा पठायब। कलकत्तामे बहुत गोटेकेँ हम साइटक पता लिखाए देने छियन्हि। मोन तँ होइत अछि जे दिल्ली आबि कए आशीर्वाद दैतहुँ, मुदा उमर आब बेशी भए गेल। शुभकामना देश-विदेशक मैथिलकेँ जोड़बाक लेल।.. उत्कृष्ट प्रकाशन कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक लेल बधाइ। अद्भुत काज कएल अछि, नीक प्रस्तुति अछि सात खण्डमे। मुदा अहाँक सेवा आ से निःस्वार्थ तखन बूझल जाइत जँ अहाँ द्वारा प्रकाशित पोथी सभपर दाम लिखल नहि रहितैक। ओहिना सभकेँ विलहि देल जइतैक। (स्पष्टीकरण- श्रीमान्, अहाँक सूचनार्थ विदेह द्वारा ई-प्रकाशित कएल सभटा सामग्री आर्काइवमे https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/ पर बिना मूल्यक डाउनलोड लेल उपलब्ध छै आ भविष्यमे सेहो रहतैक। एहि आर्काइवकेँ जे कियो प्रकाशक अनुमति लऽ कऽ प्रिंट रूपमे प्रकाशित कएने छथि आ तकर ओ दाम रखने छथि ताहिपर हमर कोनो नियंत्रण नहि अछि।- गजेन्द्र ठाकुर)... अहाँक प्रति अशेष शुभकामनाक संग।
१७. डॉ. प्रेमशंकर सिंह- अहाँ मैथिलीमे इंटरनेटपर पहिल पत्रिका "विदेह" प्रकाशित कए अपन अद्भुत मातृभाषानुरागक परिचय देल अछि, अहाँक निःस्वार्थ मातृभाषानुरागसँ प्रेरित छी, एकर निमित्त जे हमर सेवाक प्रयोजन हो, तँ सूचित करी। इंटरनेटपर आद्योपांत पत्रिका देखल, मन प्रफुल्लित भऽ गेल।
१८.श्रीमती शेफालिका वर्मा- विदेह ई-पत्रिका देखि मोन उल्लाससँ भरि गेल। विज्ञान कतेक प्रगति कऽ रहल अछि...अहाँ सभ अनन्त आकाशकेँ भेदि दियौ, समस्त विस्तारक रहस्यकेँ तार-तार कऽ दियौक...। अपनेक अद्भुत पुस्तक कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक विषयवस्तुक दृष्टिसँ गागरमे सागर अछि। बधाई।
१९.श्री हेतुकर झा, पटना-जाहि समर्पण भावसँ अपने मिथिला-मैथिलीक सेवामे तत्पर छी से स्तुत्य अछि। देशक राजधानीसँ भय रहल मैथिलीक शंखनाद मिथिलाक गाम-गाममे मैथिली चेतनाक विकास अवश्य करत।
२०. श्री योगानन्द झा, कबिलपुर, लहेरियासराय- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पोथीकेँ निकटसँ देखबाक अवसर भेटल अछि आ मैथिली जगतक एकटा उद्भट ओ समसामयिक दृष्टिसम्पन्न हस्ताक्षरक कलमबन्द परिचयसँ आह्लादित छी। "विदेह"क देवनागरी सँस्करण पटनामे रु. 80/- मे उपलब्ध भऽ सकल जे विभिन्न लेखक लोकनिक छायाचित्र, परिचय पत्रक ओ रचनावलीक सम्यक प्रकाशनसँ ऐतिहासिक कहल जा सकैछ।
२१. श्री किशोरीकान्त मिश्र- कोलकाता- जय मैथिली, विदेहमे बहुत रास कविता, कथा, रिपोर्ट आदिक सचित्र संग्रह देखि आ आर अधिक प्रसन्नता मिथिलाक्षर देखि- बधाई स्वीकार कएल जाओ।
२२.श्री जीवकान्त- विदेहक मुद्रित अंक पढ़ल- अद्भुत मेहनति। चाबस-चाबस। किछु समालोचना मरखाह..मुदा सत्य।
२३. श्री भालचन्द्र झा- अपनेक कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक देखि बुझाएल जेना हम अपने छपलहुँ अछि। एकर विशालकाय आकृति अपनेक सर्वसमावेशताक परिचायक अछि। अपनेक रचना सामर्थ्यमे उत्तरोत्तर वृद्धि हो, एहि शुभकामनाक संग हार्दिक बधाई।
२४.श्रीमती डॉ नीता झा- अहाँक कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पढ़लहुँ। ज्योतिरीश्वर शब्दावली, कृषि मत्स्य शब्दावली आ सीत बसन्त आ सभ कथा, कविता, उपन्यास, बाल-किशोर साहित्य सभ उत्तम छल। मैथिलीक उत्तरोत्तर विकासक लक्ष्य दृष्टिगोचर होइत अछि।
२५.श्री मायानन्द मिश्र- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक मे हमर उपन्यास स्त्रीधनक जे विरोध कएल गेल अछि तकर हम विरोध करैत छी।... कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पोथीक लेल शुभकामना।(श्रीमान् समालोचनाकेँ विरोधक रूपमे नहि लेल जाए।-गजेन्द्र ठाकुर)
२६.श्री महेन्द्र हजारी- सम्पादक श्रीमिथिला- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पढ़ि मोन हर्षित भऽ गेल..एखन पूरा पढ़यमे बहुत समय लागत, मुदा जतेक पढ़लहुँ से आह्लादित कएलक।
२७.श्री केदारनाथ चौधरी- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक अद्भुत लागल, मैथिली साहित्य लेल ई पोथी एकटा प्रतिमान बनत।
२८.श्री सत्यानन्द पाठक- विदेहक हम नियमित पाठक छी। ओकर स्वरूपक प्रशंसक छलहुँ। एम्हर अहाँक लिखल - कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक देखलहुँ। मोन आह्लादित भऽ उठल। कोनो रचना तरा-उपरी।
२९.श्रीमती रमा झा-सम्पादक मिथिला दर्पण। कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक प्रिंट फॉर्म पढ़ि आ एकर गुणवत्ता देखि मोन प्रसन्न भऽ गेल, अद्भुत शब्द एकरा लेल प्रयुक्त कऽ रहल छी। विदेहक उत्तरोत्तर प्रगतिक शुभकामना।
३०.श्री नरेन्द्र झा, पटना- विदेह नियमित देखैत रहैत छी। मैथिली लेल अद्भुत काज कऽ रहल छी।
३१.श्री रामलोचन ठाकुर- कोलकाता- मिथिलाक्षर विदेह देखि मोन प्रसन्नतासँ भरि उठल, अंकक विशाल परिदृश्य आस्वस्तकारी अछि।
३२.श्री तारानन्द वियोगी- विदेह आ कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक देखि चकबिदोर लागि गेल। आश्चर्य। शुभकामना आ बधाई।
३३.श्रीमती प्रेमलता मिश्र “प्रेम”- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पढ़लहुँ। सभ रचना उच्चकोटिक लागल। बधाई।
३४.श्री कीर्तिनारायण मिश्र- बेगूसराय- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक बड्ड नीक लागल, आगांक सभ काज लेल बधाई।
३५.श्री महाप्रकाश-सहरसा- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक नीक लागल, विशालकाय संगहि उत्तमकोटिक।
३६.श्री अग्निपुष्प- मिथिलाक्षर आ देवाक्षर विदेह पढ़ल..ई प्रथम तँ अछि एकरा प्रशंसामे मुदा हम एकरा दुस्साहसिक कहब। मिथिला चित्रकलाक स्तम्भकेँ मुदा अगिला अंकमे आर विस्तृत बनाऊ।
३७.श्री मंजर सुलेमान-दरभंगा- विदेहक जतेक प्रशंसा कएल जाए कम होएत। सभ चीज उत्तम।
३८.श्रीमती प्रोफेसर वीणा ठाकुर- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक उत्तम, पठनीय, विचारनीय। जे क्यो देखैत छथि पोथी प्राप्त करबाक उपाय पुछैत छथि। शुभकामना।
३९.श्री छत्रानन्द सिंह झा- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पढ़लहुँ, बड्ड नीक सभ तरहेँ।
४०.श्री ताराकान्त झा- सम्पादक मैथिली दैनिक मिथिला समाद- विदेह तँ कन्टेन्ट प्रोवाइडरक काज कऽ रहल अछि। कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक अद्भुत लागल।
४१.डॉ रवीन्द्र कुमार चौधरी- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक बहुत नीक, बहुत मेहनतिक परिणाम। बधाई।
४२.श्री अमरनाथ- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक आ विदेह दुनू स्मरणीय घटना अछि, मैथिली साहित्य मध्य।
४३.श्री पंचानन मिश्र- विदेहक वैविध्य आ निरन्तरता प्रभावित करैत अछि, शुभकामना।
४४.श्री केदार कानन- कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक लेल अनेक धन्यवाद, शुभकामना आ बधाइ स्वीकार करी। आ नचिकेताक भूमिका पढ़लहुँ। शुरूमे तँ लागल जेना कोनो उपन्यास अहाँ द्वारा सृजित भेल अछि मुदा पोथी उनटौला पर ज्ञात भेल जे एहिमे तँ सभ विधा समाहित अछि।
४५.श्री धनाकर ठाकुर- अहाँ नीक काज कऽ रहल छी। फोटो गैलरीमे चित्र एहि शताब्दीक जन्मतिथिक अनुसार रहैत तऽ नीक।
४६.श्री आशीष झा- अहाँक पुस्तकक संबंधमे एतबा लिखबा सँ अपना कए नहि रोकि सकलहुँ जे ई किताब मात्र किताब नहि थीक, ई एकटा उम्मीद छी जे मैथिली अहाँ सन पुत्रक सेवा सँ निरंतर समृद्ध होइत चिरजीवन कए प्राप्त करत।
४७.श्री शम्भु कुमार सिंह- विदेहक तत्परता आ क्रियाशीलता देखि आह्लादित भऽ रहल छी। निश्चितरूपेण कहल जा सकैछ जे समकालीन मैथिली पत्रिकाक इतिहासमे विदेहक नाम स्वर्णाक्षरमे लिखल जाएत। ओहि कुरुक्षेत्रक घटना सभ तँ अठारहे दिनमे खतम भऽ गेल रहए मुदा अहाँक कुरुक्षेत्रम् तँ अशेष अछि।
४८.डॉ. अजीत मिश्र- अपनेक प्रयासक कतबो प्रश‍ंसा कएल जाए कमे होएतैक। मैथिली साहित्यमे अहाँ द्वारा कएल गेल काज युग-युगान्तर धरि पूजनीय रहत।
४९.श्री बीरेन्द्र मल्लिक- अहाँक कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक आ विदेह:सदेह पढ़ि अति प्रसन्नता भेल। अहाँक स्वास्थ्य ठीक रहए आ उत्साह बनल रहए से कामना।
५०.श्री कुमार राधारमण- अहाँक दिशा-निर्देशमे विदेह पहिल मैथिली ई-जर्नल देखि अति प्रसन्नता भेल। हमर शुभकामना।
५१.श्री फूलचन्द्र झा प्रवीण-विदेह:सदेह पढ़ने रही मुदा कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक देखि बढ़ाई देबा लेल बाध्य भऽ गेलहुँ। आब विश्वास भऽ गेल जे मैथिली नहि मरत। अशेष शुभकामना।
५२.श्री विभूति आनन्द- विदेह:सदेह देखि, ओकर विस्तार देखि अति प्रसन्नता भेल।
५३.श्री मानेश्वर मनुज-कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक एकर भव्यता देखि अति प्रसन्नता भेल, एतेक विशाल ग्रन्थ मैथिलीमे आइ धरि नहि देखने रही। एहिना भविष्यमे काज करैत रही, शुभकामना।
५४.श्री विद्यानन्द झा- आइ.आइ.एम.कोलकाता- कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक विस्तार, छपाईक संग गुणवत्ता देखि अति प्रसन्नता भेल। अहाँक अनेक धन्यवाद; कतेक बरखसँ हम नेयारैत छलहुँ जे सभ पैघ शहरमे मैथिली लाइब्रेरीक स्थापना होअए, अहाँ ओकरा वेबपर कऽ रहल छी, अनेक धन्यवाद।
५५.श्री अरविन्द ठाकुर-कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक मैथिली साहित्यमे कएल गेल एहि तरहक पहिल प्रयोग अछि, शुभकामना।
५६.श्री कुमार पवन-कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक पढ़ि रहल छी। किछु लघुकथा पढ़ल अछि, बहुत मार्मिक छल।
५७. श्री प्रदीप बिहारी-कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक देखल, बधाई।
५८.डॉ मणिकान्त ठाकुर-कैलिफोर्निया- अपन विलक्षण नियमित सेवासँ हमरा लोकनिक हृदयमे विदेह सदेह भऽ गेल अछि।
५९.श्री धीरेन्द्र प्रेमर्षि- अहाँक समस्त प्रयास सराहनीय। दुख होइत अछि जखन अहाँक प्रयासमे अपेक्षित सहयोग नहि कऽ पबैत छी।
६०.श्री देवशंकर नवीन- विदेहक निरन्तरता आ विशाल स्वरूप- विशाल पाठक वर्ग, एकरा ऐतिहासिक बनबैत अछि।
६१.श्री मोहन भारद्वाज- अहाँक समस्त कार्य देखल, बहुत नीक। एखन किछु परेशानीमे छी, मुदा शीघ्र सहयोग देब।
६२.श्री फजलुर रहमान हाशमी-कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक मे एतेक मेहनतक लेल अहाँ साधुवादक अधिकारी छी।
६३.श्री लक्ष्मण झा "सागर"- मैथिलीमे चमत्कारिक रूपेँ अहाँक प्रवेश आह्लादकारी अछि।..अहाँकेँ एखन आर..दूर..बहुत दूरधरि जेबाक अछि। स्वस्थ आ प्रसन्न रही।
६४.श्री जगदीश प्रसाद मंडल-कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक पढ़लहुँ । कथा सभ आ उपन्यास सहस्रबाढ़नि पूर्णरूपेँ पढ़ि गेल छी। गाम-घरक भौगोलिक विवरणक जे सूक्ष्म वर्णन सहस्रबाढ़निमे अछि, से चकित कएलक, एहि संग्रहक कथा-उपन्यास मैथिली लेखनमे विविधता अनलक अछि। समालोचना शास्त्रमे अहाँक दृष्टि वैयक्तिक नहि वरन् सामाजिक आ कल्याणकारी अछि, से प्रशंसनीय।
६५.श्री अशोक झा-अध्यक्ष मिथिला विकास परिषद- कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक लेल बधाई आ आगाँ लेल शुभकामना।
६६.श्री ठाकुर प्रसाद मुर्मु- अद्भुत प्रयास। धन्यवादक संग प्रार्थना जे अपन माटि-पानिकेँ ध्यानमे राखि अंकक समायोजन कएल जाए। नव अंक धरि प्रयास सराहनीय। विदेहकेँ बहुत-बहुत धन्यवाद जे एहेन सुन्दर-सुन्दर सचार (आलेख) लगा रहल छथि। सभटा ग्रहणीय- पठनीय।
६७.बुद्धिनाथ मिश्र- प्रिय गजेन्द्र जी,अहाँक सम्पादन मे प्रकाशित ‘विदेह’आ ‘कुरुक्षेत्रम्‌ अंतर्मनक’ विलक्षण पत्रिका आ विलक्षण पोथी! की नहि अछि अहाँक सम्पादनमे? एहि प्रयत्न सँ मैथिली क विकास होयत,निस्संदेह।
६८.श्री बृखेश चन्द्र लाल- गजेन्द्रजी, अपनेक पुस्तक कुरुक्षेत्रम्‌ अंतर्मनक पढ़ि मोन गदगद भय गेल , हृदयसँ अनुगृहित छी । हार्दिक शुभकामना ।
६९.श्री परमेश्वर कापड़ि - श्री गजेन्द्र जी । कुरुक्षेत्रम्‌ अंतर्मनक पढ़ि गदगद आ नेहाल भेलहुँ।
७०.श्री रवीन्द्रनाथ ठाकुर- विदेह पढ़ैत रहैत छी। धीरेन्द्र प्रेमर्षिक मैथिली गजलपर आलेख पढ़लहुँ। मैथिली गजल कत्तऽ सँ कत्तऽ चलि गेलैक आ ओ अपन आलेखमे मात्र अपन जानल-पहिचानल लोकक चर्च कएने छथि। जेना मैथिलीमे मठक परम्परा रहल अछि। (स्पष्टीकरण- श्रीमान्, प्रेमर्षि जी ओहि आलेखमे ई स्पष्ट लिखने छथि जे किनको नाम जे छुटि गेल छन्हि तँ से मात्र आलेखक लेखकक जानकारी नहि रहबाक द्वारे, एहिमे आन कोनो कारण नहि देखल जाय। अहाँसँ एहि विषयपर विस्तृत आलेख सादर आमंत्रित अछि।-सम्पादक)
७१.श्री मंत्रेश्वर झा- विदेह पढ़ल आ संगहि अहाँक मैगनम ओपस कुरुक्षेत्रम्‌ अंतर्मनक सेहो, अति उत्तम। मैथिलीक लेल कएल जा रहल अहाँक समस्त कार्य अतुलनीय अछि।
७२. श्री हरेकृष्ण झा- कुरुक्षेत्रम्‌ अंतर्मनक मैथिलीमे अपन तरहक एकमात्र ग्रन्थ अछि, एहिमे लेखकक समग्र दृष्टि आ रचना कौशल देखबामे आएल जे लेखकक फील्डवर्कसँ जुड़ल रहबाक कारणसँ अछि।
७३.श्री सुकान्त सोम- कुरुक्षेत्रम्‌ अंतर्मनक मे समाजक इतिहास आ वर्तमानसँ अहाँक जुड़ाव बड्ड नीक लागल, अहाँ एहि क्षेत्रमे आर आगाँ काज करब से आशा अछि।
७४.प्रोफेसर मदन मिश्र- कुरुक्षेत्रम्‌ अंतर्मनक सन किताब मैथिलीमे पहिले अछि आ एतेक विशाल संग्रहपर शोध कएल जा सकैत अछि। भविष्यक लेल शुभकामना।
७५.प्रोफेसर कमला चौधरी- मैथिलीमे कुरुक्षेत्रम्‌ अंतर्मनक सन पोथी आबए जे गुण आ रूप दुनूमे निस्सन होअए, से बहुत दिनसँ आकांक्षा छल, ओ आब जा कऽ पूर्ण भेल। पोथी एक हाथसँ दोसर हाथ घुमि रहल अछि, एहिना आगाँ सेहो अहाँसँ आशा अछि।
७६.श्री उदय चन्द्र झा "विनोद": गजेन्द्रजी, अहाँ जतेक काज कएलहुँ अछि से मैथिलीमे आइ धरि कियो नहि कएने छल। शुभकामना। अहाँकेँ एखन बहुत काज आर करबाक अछि।
७७.श्री कृष्ण कुमार कश्यप: गजेन्द्र ठाकुरजी, अहाँसँ भेँट एकटा स्मरणीय क्षण बनि गेल। अहाँ जतेक काज एहि बएसमे कऽ गेल छी ताहिसँ हजार गुणा आर बेशीक आशा अछि।
७८.श्री मणिकान्त दास: अहाँक मैथिलीक कार्यक प्रशंसा लेल शब्द नहि भेटैत अछि। अहाँक कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक सम्पूर्ण रूपेँ पढ़ि गेलहुँ। त्वञ्चाहञ्च बड्ड नीक लागल।
७९. श्री हीरेन्द्र कुमार झा- विदेह ई-पत्रिकाक सभ अंक ई-पत्रसँ भेटैत रहैत अछि। मैथिलीक ई-पत्रिका छैक एहि बातक गर्व होइत अछि। अहाँ आ अहाँक सभ सहयोगीकेँ हार्दिक शुभकामना।
विदेह
मैथिली साहित्य आन्दोलन
(c)२००४-१२. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतए लेखकक नाम नहि अछि ततए संपादकाधीन। विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। सह-सम्पादक: उमेश मंडल। सहायक सम्पादक: शिव कुमार झा आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण)। भाषा-सम्पादन: नागेन्द्र कुमार झा आ पञ्जीकार विद्यानन्द झा। कला-सम्पादन: ज्योति झा चौधरी आ रश्मि रेखा सिन्हा। सम्पादक-शोध-अन्वेषण: डॉ. जया वर्मा आ डॉ. राजीव कुमार वर्मा। सम्पादक- नाटक-रंगमंच-चलचित्र- बेचन ठाकुर। सम्पादक- सूचना-सम्पर्क-समाद- पूनम मंडल आ प्रियंका झा। सम्पादक- अनुवाद विभाग- विनीत उत्पल।
रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि) ggajendra@videha.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकैत छथि। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। ’विदेह' प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका अछि आ एहिमे मैथिली, संस्कृत आ अंग्रेजीमे मिथिला आ मैथिलीसँ संबंधित रचना प्रकाशित कएल जाइत अछि। एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि।
(c) 2004-12 सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। रचनाक अनुवाद आ पुनः प्रकाशन किंवा आर्काइवक उपयोगक अधिकार किनबाक हेतु ggajendra@videha.co.in पर संपर्क करू। एहि साइटकेँ प्रीति झा ठाकुर, मधूलिका चौधरी आ रश्मि प्रिया द्वारा डिजाइन कएल गेल।
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वि दे ह विदेह Videha বিদেহ www.videha.co.in www.videha.com विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका 'विदेह' ११३ म अंक ०१ सितम्बर २०१२ (वर्ष ५ मास ५७ अंक ११३) मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA
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FJ : आनन्द Chaily झा ON युवा TOI | 'एहिए वर्ष सँ प्रारंभ साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार युवा नाटककार आनन्द कुमार झा के देल गेल अछि। मेहथ (झंझारपुर) निवासी आनन्दजी जखन उच्चस्तरीय अध्ययन हेतु कोलकाता गेलाहं त' ओतय ओ | रंगमंच सँ जुड़ गेलाह आ कोकिल मंचक श्रीगंगा झाक निर्देशन मे हिनकर लिखल नाटक सब मंचित होमय arma किछुए दिन पछाति पुनः हिनका अपना गाममे tea पड़ि गेलनि। आनंदजी झंझारपुर में एकटा पुस्तक | केन्द्र स्थापित कए अपना व्यवंसायक संग AMIS मे लागल रहलाह। एमहर किछु दिन ओ फारबिसगंज में | सेहों अपन सेवावधि बिताओल मुदा किछुए दिन पछाति ओ पुन: गाम ध' dere) सम्प्रति आनंदजी दिल्‍ली | में निवास क' रहल छथि। हिनक पुस्तक ‘sar परिवर्तन (नाटक ) कँ साहित्य अकादमी पुरस्कृत कएलक अछि। यद्यपि पुरस्कृत करबाक प्रक्रिया पर मारिते रास प्रश्न चिहन लंगाओल गेल अछि तकरा रहितो नाटक | को पुरस्कार fear युवा रंगकर्मी के पुरस्कार अवश्ये उत्साहजनक कहल जाय। हिनक लिखल किछु प्रमुख | > नाटक अछि - राकाक मोल, कलह, बदलैत समाज, धधाइत नबकी कनियाँक लहास, हठात परिवर्तन आदि। हिनक किछु अप्रकाशित नाटक मंचनक oe जोहि रहल अछि। पारिवारिक परिस्थितिक चोरानुकी आ तकर वैषम्यक संग निरन्तर संघर्ष करैत आनंदजी आइयो नाट्यलेखन में सक्रिय छथि। एहिं युवा नाटककार कँ aE अशेष बधाइ। न -सम्पादक FC, जुलाई-सितम्बर, 20I2 —

[ we मनुवादी, आ आब पाश्चात्यमार्गी, बनयबाक क्रम में. से पुरना जमानाक बात दोसर Bell अपना सभक पुरखा आदिवासीक धर्म-कर्म तथा जीवनशैली क' हेय दृष्टि सँ लोकनि बीछि-बीछि क' तेहने om बसलाह जे ठाम 4 देखेत छथि। stows तथ्य क' बिंसरबाक प्रयास ata रतीक तडर मे खान छल आ ऊपर मे जंगल। पुरना जमाना : छथि जे हमरा सभक मूलग्राम एक अछि, हमसभ समाजी मे जे हालत रहल हो से हम ने जनै छी, लेकिन एखनुका ot, ओ हमर ae छथि। जमाना मे खान आ जंगल दुनूक मालिक स्वयं सरकार भ' डॉ0 विद्यानाथ झा 'विदित' एही विषक ow ‘fact गेल अछि en हमसभ ओहि कीमती सम्पत्तिक बिना बेसरा' में उजागर . कयलनि अछि। ई उपन्यास waa खेबा-खर्चक मंगनीक ओगरबाह बनल छी।' जेना होइत . नामक आदिम समुदाय पर केन्द्रित अछि। संताल मे बारहटा. SH, माय-बापक ममता पछुआ गेलैक। धौनाक fae कुल tha छैक। ताही मे एकटा गोत्र अछि बेसरा। प्रस्तुत. आगाँ बढ़ि गेलैक। घौना आसाम पहुँच गेल। मुदा, पचगछिया उपन्यास बेसरा गोत्रक लोकक शील-स्वभाव, राग-विराग. eR पहुँचबाक रास्ता मे, बस में, बाँसुरी सनक an रीति-नीति सँ परिचित करबैत अछि। ada सहयात्रीक जे मनगर निकटताक अनुभव भेल रहैक से समय-सालक संग ओकर आचार-विचार मे आयल परिंवर्चन बेर-बेर मोन SH संयोगवश गौरी सँ पहिले दिन भेंट पर सेहो ध्यान राखल गेल अछि। सभ सँ पैघ बात date भ' गेलैक on बाँसुरीक प्रति जागल उत्कण्ठा गौरीक जे दुतकारल-कतिआयल एहि पारिवारिक सदस्य क.. खिस्सा सुनबाक. इच्छा क' आतुर क' देलकैक। ः जगयबाक, जागल क' संघर्ष चेतनाक पाटि पकड़्यबाक ae fae शुरू ta अछि पाँचम अध्याय जे am we में कयल गेल अछि से मैथिली साहित्यक | सँ-गौरीक माय-बापक प्रसंग a बीच-बीच मे आदिवासी नव आयाम अछि। मैथिली मे आदिवासी जनजीवन पर. जीवनक अनेक उपकथा अबेत अछि। जेना, लालबाबाक कथा अछि, कवितो मे प्रसंगवश उल्लेख अछि, yer इमानदारी आ नैतिकताक कथा। पाथरपाड़ाक सरदार आ औपन्यासिक विस्तारक संग ई पहिल कृति थिक। कुली पाड़ाक मजदूरक कथा। चायबगानक मालिक-मैनेजर ue कृति क' रचनाकार उपन्यास कहलनि ats! आ.ओहिठामक कर्मचारीक sedan कथा। ई संभ क्षेपक किन्तु, कथा-संयोजनक दृष्टिएँ एकर ठाठ किछु दोसर . कथा आदिवासी जीवनक कटु-मधु दृश्य क ' प्रस्तुत करैत प्रकारक अछि। गुजराती मे उपन्यास क' नवलकथा कहल otf एहि सँ पूँजीपति मालिकक राजनीति आ बामपंथी जाइत छैक। 'विप्लबी बेसरा' sea: नवल कथा थिक। मजदूर नेता मोहरी लालक हत्याक रहस्य बुझबा में अबैत दादी-नानीक खिस्साक शैली मे, अनेक खण्ड में, wre अछि। मोहरीलाल on ओकर पत्नी रमियाक मृत्युक are ad कथा कहल गेल अछि। de ढंग, ae बान्ह॑-काट, . गौरीक कथा शुरू होइत अछि। ated रोचकता। पंचगछिया गाम। सोहराय पावनि। सुफलक ताधरि उपन्यासक उत्तरार्ध आबि जाइत अछि एगारहम पत्नी फूलमनि घर-आँगन कँ सजा रहल STS! बेटा धौना _ अध्याय। आदिवासी जीवन प्रणालीक अनुरूप उपन्यासक बहिनक विदागरी ara’ गेल Se आसामक चायबगान मे. नायिका प्रधान बनायब आवश्यक छल, त. एकैसम अध्याय काज करयवला संगी टेकलाल सँ भेंट होइत छैक। tear «sata अन्त धरि मोहरी लालक बेटी, विपलवी बेसरा हर daw अपना संग आसाम a’ जाय चाहैत ote. बनल साफाहोड़क नतिनी, गौरीक खिस्सा विस्तार 4 : माय-बापक स्नेह नाकर-नुकुर करैत छैक। धौना आदिवासी कहल जाइत अछि। धौना अपने & पढ़िए लैत अछि, गौरी जीवनक गतिमति क' फरिछबैत अछि-' अहाँ जे कहैत छी . क' सेहो पढ़ा दैत अछि a पास धौना aw facie में

ea समीक्षा विप्लवी बेसरा : विषय आ विचार - श्री मोहन भारद्वाज मेथिल मनीषी याज्ञवल्क्य आ हुनक कृति शतपथ मिथिला की झारखण्ड की बिहारक आर्यीकरण संभव ब्राह्मण wf प्रमाण मानी ¢ मिथिलाक आदिवासी अनार्य. भेल। आर्यीकरणक एहि प्रक्रिया मे जे छूटि गेलाह से <.. रहथि। मिथिला जंगली क्षेत्र छल। वैश्वानर सरस्वती सँ.. आइयो आदिवासी कहबैत छथि। अन्य अपना SAAT पूब दिस बढ़ेत गेलाह आ सदानीरा धरिक भूभाग au do फराक, cea सभ्य, cared श्रेष्ठ gad छथि। क' आर्यक प्रवेश क' सुगम बनौलनि। तकरा are आजुक एतबे नहि, एहि प्रकारक सभ्य लोकनि अपन आचार-विचार ः aD 4

| = ro ee a | re * सुभाषचन्द्र Wet | - Se Ca we मोनोग्राफक बारे में ee ip re राजकमल चौधरी at जायत' । मीटिंगक बाद सुरेश्वर झा आ रामदेव झा इलाहाबाद : qi 7 i So) मोनोग्राफ लिखबाक काज | जयकांत flor भेंट aes चल गेलाह- साहित्य अकादेमीक अगिला =e a «Bae 993 ई:क अंतमे मैथिली संयोजक बनबाक पैरवीमे । डी Same tea छल | सुनलहूँ जे. मोहन भारद्वाज पॉडुलिपि पढ़िक५ रामदेवे झाक लाइन पकड़ि लेलनि । | |... dts यादव | wige अकादेमीक एहि idl wes लगलाह जे मैथिली साहित्यवला खंड कने और पैघ ws | frofad एहन wdat feel; राजकमलक यौन जीवनक ईं अंश हटा 'दिऔ, ओ अंश हटा | व्यक्ति खिसिया गेलाह, जिनका art ने कोनो कारणे .ई विश्वास feat आदि । राजमोहन झा आ aad’ ओ अपना ढंगे बुझा-सुझा | छलनि जे राजकमल पर मोनोग्राफ लिखबाक लेल Se सर्वाधिक उपयुक्त . कड तेना तैयार HS लेलनि जे आब हुनका बदलामे Be sy हमर } an योग्य छथि । मैथिलीमे निस्संदेह अनेक योग्य व्यक्ति छथि on go पांडुलिपिकें अयोग्य घोषित ars लगलाह महाप्रकाश एहि बात काज किनको देल जा सकैत छल । लेकिन मैथिली परामर्श मंडलक sas सुकांतक फज्झैतो कयलथि । पांडुलिपिक प्रकाशनक चिंताक wife बैसारमे ई निर्णय भेल ताहिमे कोनो दोसर नाम नहि छल । देवकान्त .. कारण हम ओहिमे few जोड़बाक आ ओकरा संपादित करबाक झा प्रस्ताव देलनि आ att स्वीकृत भड गेल । ae तैयार भड Teg | लेकिन ई जोड़-घटाव बहुत मामूली छल । मोनोग्राफ लिखबामे हमरा बहुत विलम्ब भेल । ओकर पांडुलिपि हम. पांडुलिपि मोहन भारद्वाज के घुरा देलियनि । fee दिनक बाद ओ 996 ई.क अप्रैलमे कलकत्तामे भेल बोर्डक मीटिंगमे जमा कयलहूँ | wes लगलाह आहाँ जे fae कहलिऐक अछि से निष्कर्ष रूपमे Wet मे पांडुलिपि रामदेव झाके समीक्षा हेतु द५ देल गेलनि । ई बात. अलगसँ लिखि ws es दिऔ । मोनोग्राफके पी-एच.डी. थीसिस बना ठीक नहि भेल, से मीटिंगक ae तखन बुझायल जखन मोहन. tare हमर कोना इच्छा नहि छल | निष्कर्ष Act हम. एकदम तैयार भारद्वाज एहिं दिस ध्यान दिऔलनि i मीटिंगमे हम रामदेव झाक . नहि भेलहूँ । ताथरि ई तय as गेल छलैक जे साहित्य अकादेमीक *पसीझैत पाथर 'क प्रस्तावित अंगरेजी अनुवादक विरोध कयने छलिऐक। अगिला मैथिली संयोजक रामदेव झा dae | मोहन भारद्वाजक पाँच-छह मास गुजरि गेलाक बादो जखन रामदेव झा अपन समीक्षात्मक . परामर्श मंडलक सदस्य बनबाक रहनि आ से हुनका रामदेवे झा बना रिपोर्ट नहि पठौलथिन as विश्वास भड गेल जे ओ हमरा विरोध सकैत छलनि; बनाइयो देलथिन । पता चलल हमर मोनोग्राफके' ओ करबाक मजा चखा रहल छथि I रिजेक्ट as देलनि । कारण ई जे विनिबंध लेखक पांडुलिपिमे | Wed: साहित्य अकादेमीकें हम पत्र लिखलिऐक जे समीक्षक्सँ रिपोर्ट _ अपेक्षित संशोधन आ परिवर्तन लेल तैयार नहि भेलाह । अविलम्ब मंगाओल जाय | अंततः आठ महीनाक बाद जनवरी 9978 _ हमरा लेल ई बड़ पैघ आघात आ चुनौती छल | हम ओकर हिन्दी रामदेव झा रिपोर्ट जमा sacs । पांडुलिपिके” ओ अस्वीकृत कड देने amare करब आरंभ कयलहूँ । we प्रसंगमे हमरा केदार काननक pore । हुनक रिपोर्ट ‘ars का प्रतिवेदन ' प्रकाशित कयल जा रहल.. अविस्मरणीय सहयोग भेटल । मोनोग्राफक प्रतिलिपि तैयार करबाक आ अछि । ओहि रिपोर्टक जवाब, जे हम साहित्य अकादेमीके पठौने छलिऐक, .. ज्ञानरंजनसँ ओकर प्रकाशन संबंधी गप्प करबाक श्रेय Harts छनि gs सेहो *वाचक का प्रतिवेदन 'क तुरंत बाद छापल जा रहल अछि। मोनोग्राफ़ पहिने i998 ई.मे पहल पुस्तिका रूपमे छपल आ 20077 रामदेव झा द्वारा रिपोर्ट जमा करबा सँ पहिने मोहन भारद्वाज दिल्‍ली गेल... सारांश प्रकृॉशिनसँ किताब रूपमे । आब ओ मैथिलीमे छपि रहल अछि । छलाह तँँ हमरे कहला पर ओ साहित्य अकादेमीक उपसचिव रमेश एहि मैथिली रूपमे किछु एहनो चीज अछि जे हिन्दीमे,नहिं अछि । । भसीन सँ गप्प कयने छलथि । तकर सूचना दैत ओ लिखने छलाह- ue मोनोग्राफक fede बहुत प्रशंसा Ae । प्रकाश मनु आ लीलाधर ‘onda d अहाँक पत्रक प्रसंग गप्प भेल । ओ कहलनि जे अन्यथा रिपोर्ट. मांडलॉईक प्रशंसात्मक समीक्षा हिन्दीक पैघ आ प्रतिष्ठित पत्रिकामे अयला पर पुन: दोसर ted रिभ्यू कराओल जयतैक । पोथी wade, छपल | हमरा लग प्रशंसाक अनेक पत्र आयल | बहुत Tice चिट्ठी कने-मने संशोधन Sts पड़य से संभव । अहाँ निशिचंत रहू ।' fafams ओकर खोज करैत रहल | बहुत Ties राज्कमलक बारेमे पांडुलिपि अस्वीकुत हेबाक आशंका तैँ रहबे करय । रच्छ ई छल जे. अपन संस्मरण लिखि ws पठौलक | मैथिली जगतमे एकरा रिजेक्ट परामर्श मंडलक एकटठा और मीटिंग, जे ओकर आखिरी मीटिंग होड़त, 9 करबाक बहुत विरोध आ आलोचना भेल । पत्रिकामे उतरा-चौरी, अप्रैलमे निर्धारित छल, जाहिमे सदस्यक रूपमे उपस्थित रहि हम अपन _ उकटा-पैंची आ विवाद चलल । एहिमे सर्वाधिक मुखर रमेश छलाह । पांडुलिपिके बचेबाक प्रयास HS सकैत छलहूँ । दिल्‍लीमे मीटिंगसँ _ मैथिली-हिन्दीक रचनाकार डॉ० 'सुवास कुमार, जे हैदराबाद पहिने भसीन कहलनि जाहि नाम पर आपत्ति हो, तकर विरोध अहाँ विश्वविद्यालयमे हिन्दीक प्रोफेसर आ अध्यक्ष आ वेस्ट इंडीजमे कैक मीटिंगेमे. करब । मीटिंगमे निर्णय भेल जे पांडुलिपिक समीक्षा wre साल भिजिटिंग प्रोफेसर were, एहि मोनोग्राफक ata लिखने रहथि कराओल जाय | ककरा देल॑ जाय ? सभ चुप छल । सुझाव रामदेवे .. : उलटाने लगा तो खत्म किये बिना चैन न पड़ा । पूरा पढ़ गया- जिसे झा feed आयल- मोहन भारद्वाज । हमरा भसीनक सलाह HA कहते हैं, एक ही साँसमे | बड़ा मनोयोग पूर्वक लिखा है आपने, और पड़ल, लेकिन ई नहिं खटकल जे रामदेव झा किएक मोहन भारद्वाजक बड़ा ही संयत होकर । राजकमल पर इससे बेहतर कोई रचना मैंने नहीं | é नाम सुझा रहल छथि । हमरा मोहन भारद्वाज पर अविश्वास नहि रहय देखी है । जानकारी और विश्लेषण दोनों ही दृष्टियों से अत्यंत उत्कृष्ट आ हम चुप रहि Fee | बादमे मोहन. भारद्वाज कहलथि- ate) और समृद्ध है यह पुस्तिका । खुशी की बात है कि सारांश प्रकाशन से अहाँक मोनोग्राफ बचि गेल । हमरो लागल जे ठीके. आब ओ oft | seer Golan होने वाला है । oS ————— re का FR 05-0650 5 नाना न ८ = % लि

अछि | आवश्यकता अछि अपन परम्परा के जनवाक, ओहि & परिचित होयबाक | दरभंगा जिला गजेटियर (2964) क A! श्री रमानाथ झा AST मे | ( एहि दृष्टिकोण सँ रमानाथ झा मिथिलाक सांस्कृतिक उत्कर्ष तथा सारस्वत साधनाक + विद्यानाथ झा लिखित श्री रमानाथ झाक साहित्यिक कृतिक विवरण में लिखल " विभिन्‍न पक्ष पर प्रकाश देलनि अछि ule मे प्रमुख अछि स्थान-गौरव । मिथिला अछि जे दरभंगा जिला गजेटियर मे मेन ऐण्ड aad हिनके रचना थिक | गजेटियरक | 4 जनपदक अनेक परिसर अपन विशिष्टताक कारणे महत्वपूर्ण अछि | ओकर गुणवत्ता भूमिका में पी. सी. रायचौधुरी सेहो सहयोगक लेल रमानाथ झा के धन्यवाद देने | 4 आ महत्ता B तखने जानल जा सकैत अछि जखन ओकर भूगोल आ इतिहास छथिन | Fer, गजेटियर मे मेन ऐन्ड मैनर्स नामक ST शीर्षक वा उप-शीर्षक ae * a अवगत भेल जाय। मधुवनी, सरिसब, बहेड़ा आदि किछु स्थानक भौगोलिक आ dea) उन्ततः डॉ. प्रभाकर झा सँँ सम्पर्क mame | ओ गजेटियरक तेसर Se | ऐतिहासिक विवरण ta रमानाथ झा ओहि क्षेत्रक सांस्कृतिक महिमा, साहित्यिक यायक चारिटा उप-शीर्षकक लेखन के" रमानाथ झाक रचनाक रूप मे चिन्हित गरिमाक विवेचन कयलनि अछि । ई उदाहरण मात्र Pen मिधिलाक एहन सभ कयलनि। तदनुसार रचनावली मे ओ चारू अंश उप-शीर्षकक संग समाविष्ट स्थानक, परिसर-विशेषक अध्ययन अपेक्षित अछि। अछि | ला मिथिला & परिचितिक दोसर आयाम अछि एहिठामक विदत-परम्परा कँ -मोहन “भारदाज जानब। मिथिला मे धीमानक अभाव कहियो नहि भेल। बौद्धिक चिन्तन-मनन मे शिवपुरी; पटना । मिथिला सर्वदा अग्रणी रहल अछि | एहिठामक सारस्वत साधना केँ सर्वत्र आदरक 2 ais, शाप दृष्टि & tea गेल अछि। किन्तु आजुक मैथिल अपन ओहि इतिहास केँ नहि | P जानि रहल अछि। जिज्ञासु लोक & सेहो जनबाक आधार नहि भेटैत छैक। | रमानाथ झा fe मैथिल अक्षर-पुरुषक परिचय-पत्र प्रस्तुत a wie दिशा मे i श्लाघनीय काज कयलनि अछि | परमगुरु गंगेश्वर आ वाचस्पति मिश्र सैँ पदूमविभूषण | [प्र डा. अमरनाथ झा, ज्योतिरीश्वर आ परमहंस विष्णुपुरी सँ कुमार गंगानन्द सिंह एवं सरसकवि ईशनाथ झा afte व्यक्तित्व-प्रकाशन a मिथिलाक सारस्वत प्रतिभा के . , जनबाक आधार आ दृष्टि Fea अछि। एहि प्रसंग पंजी-व्यवस्थाक सेहो उपयोग ' मी मेल अछि। dot सँ मिथिलाक इतिहास संकलित करबाक पहिल सार्थक प्रयास | रमानाथ झा द्वारा कयल गेल अछि। परिचेताक रूप मे कार्य करबाक इच्छुक अन्वेषक-समीक्षक के पंजी व्यवस्थाक स्वरूप ot महत्वक ज्ञान, ओकर उपयोग- है | प्रणात्लीक जनतब रमानाथ झाक एतदूसम्बन्धी Perr सँ होइत अछि। ry रमानाथ झा एकठाम लिखने छथि जे साहित्यक शरीर थिक भाषा | मैथिली ri भाषाक छवि-छटा, ओकर मधुरता मिथिलाक साहित्य केँ उत्कृष्ट बनौलक अछि। | area व्यापकता देलक अछि। किन्तु, आइ मैथिली भाषा संकटापनन अछि। ः मैथिलीक. प्रश्न पर आन्दोलन करबाक प्रयोजन भड wea अछि। रमानाथ झा i { मैथिलीक वर्तमान समस्या पर गम्भीरता &, विस्तार a विचार कयलनि अछि | ae j प्रसंग लिखित Farr सभ हुनक सुविचारित मान्यता Sf अवगत होयबाक अवसर ai de जछि। मैथिलीक वाचिक आ लिखित, साहित्यिक आ साहित्येतर स्वरूप एवं i; i feat) पर ऐतिहासिक oer मे कयल गेल हुनक विचार-विमर्श तथ्यक उपस्थापन है, He हि teen, aera पर चलबाक तर्जनी-संकेत सेहो थिक | id jie of creer अन्तिम Pare अछि-द पीपुल ऑफ मिथिला | है भ YP Wien one शारि उप-शीर्षक मे विभाजित अछि पी.सी.राय चौधुरीक (0. आता erent का ससतावती os प्राक्कथन : I5 ७ | दर ही é

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जी . एकटा “आरो कारण wa झारखण्ड मे परदेसीक विभाजनक समय मे झारखण्डक प्रतिव्यक्ति आय जतेक आगमनक। एहिठामक राजाकेँ जनता सँ अनाज आ जंगली छल ताहि मे हास भेल अछि। आइ सम्पूर्ण भारत में खाद्य-पदार्थ भेंट-स्वरूप जखन-तखन प्राप्त होइन। ule साक्षरताक न्यूनतम दर बिहार मे अछि, आ तकरा बाद रेवाज मे गड़बड़ी भेलाक बाद राजा स्वैच्छिक सोगाइत we झारखण्डेक स्थान छैक। कानूनी लगान बना देलनि। आदिवासी जनता एकर विरोध आवश्यकता अछि स्थिति क' ओकर पूर्ण व्याप्त मे कयलक। छोटानागपुरक राजा स्थिति क' अपन अनुकुल देखबाक , समस्या aw गंभीरताँ सँ लेबाक। बहरिया लोकक बनयबाक लेल बाहरी लोक क' मुख्यत: उत्तर बिहार तथा. प्रति आक्रोश क' आन्दोलन मे बदलबाक प्रयास पहिनहु ः उत्तर प्रदेशक बासी a बजौलनि। हुनका सभ क' लगान मेल छल। उनैसम शताब्दीक अन्त मे, टाना भगतक वसूलबाक लेल गामक सम्पदाक ठीकेदारी आ पट्टोदारी द' . प्रादुर्भाव सँ पहिंने, झारखण्डक महान जननेता बिरसा देलथिन। आदिवासीक सम्पर्क हिन्दू सँ बढलनि। परिणाम. मुंडाक आन्दोलन भेल रहय। यद्यपि ओ आन्दोलन धार्मिक मेल जे एहिठामक आदिवासी राजा सिंहभूमिक राजपूत छल, मुदा ओहि, सँ दिकूक विरोध मे एकटा वातावरण परिवार मे बिआह aw’ लेलनि। आदिवासी सँ हिन्दू ara तैयार भेल weal ओकर प्रभाव स्थायी नहि भ' सकल। परिवारक अपेक्षितारय परदेसी सभ सँ बढ़' ame आइ सँ . आब जे स्थिति अछि ताहि मे झारखण्ड, ओहि ठामक लगभग चारि wa वर्ष पहिने छोटानागपुरक राजा छप्पन at आदिवासीक शोषण लेल दिक्कू बनब जरूरी afe छेक। राजपूत परिवार aw मध्य प्रदेश सँ आनि अपन सेना मे. भू-दखलीकरण आ बाजारवादक अस्त्र art भाला-बर्छी शामिल कयलनि। एहिना बाहर सँ आयल HTH आदर सँ बेसी असरदार अछि। a भ्रष्टाचारी आ अत्याचारी a मे राजा सँ उपाधि भेटलनि। एहने उपाधि थिक नारायण, dea पहिल काज थिक। ओ ferry आ आदिवासी-कोनों ax आ राम। राँचीक बॉरैया आ रातू थाना क्षेत्र मे नारायण. देह धारण कयने fe सकैत अछि। आँखि साफ रहय, आ राम तथा माण्डर मेन्द ओहिठामक लोकक नाम मे. ठीक सँ देखेत रही तँ ae सँ भरल रस्ता क' सेहो आइयो yea अछि। झारखण्डक अधिकांश भाग मे जे. आसानी सै पार कयल जा सकैत of. कुम्हार, बरही, सोनार, तेली , जोलहा आदि छथि से wet किन्तु, प्रस्तुत उपन्यासक अन्त ue ate होइत | आगमनक देन थिक। कारीगर आ मजदूरे नहि, aq oan अछि। विविधता भारतक गौरव थिक। एहिठाम विभिन्‍न पुजारी Bel बाहरेक छथि। रामगढ़क घटवार लोकनि समुदायक बास अछि। तखन जे fra में एकसूत्रता छैक लगभग तीन wa वर्ष पहिने बंगाल सँ तीन wa घोषाल . सैह थिक भारतीय संस्कृति। भारतक एहिं सामाजिक प्रकृति ब्राह्मण क' रजरप्पाक fee देवीक पूजा aH क' बुझेत। amit बढ़बाक अछि। .विदितजी अपन प्रसिद्ध aa अनलनि आ हुनका पण्डा बना क' ओहिठामक . पुस्तक - संताली मैथिली ओ मे कहेत छथि जे हम जागिरदारी द' देलनि। ः संभगोटे भारतक मूलवासी छी। आदिवासी आ गैर आदिवासी, एहिं प्रकार' आजुक झारखण्ड मे आदिवासी क'. आनार्य on आर्यक भेद अवसरक असमानताक देन अछि। फुटकायब कठिन अछि। तखन एतेक अवश्य जे of विकासक सुविधा-असुविधाक परिणाम अछि। विप्लबी अहलादि क' आनल लोक क' काल बेसाहब बूझल जाइत . बेसरा एहि मान्यताक भौतिक सत्यापन थिक। विसंगति ch” | अछि। बिहार सँ woe भेलाक बादक झारखण्ड मे. संगति देबाक मुखर आह्वान थिक। आदिवासीक संख्या मात्र 28 प्रतिशत अछि। बिहार-झारखण्ड शांति निकेतन, पी. पी. ठाकुर पथ शिवपूरी पर्व, पटना-23 न

नौकरी भ जाइत de a मोहरीलालक आत्मीय कम्पाउन्डरक ANT गूँजि. उठल। उपन्यासक समाप्ति जाहि पड़ाओ पर मदति सँ गौरी सेहो नर्स बनि जाइत अछि। गौरी कम्पाउन्डरेक tied अछि de एकरा. वैचारिकता. प्रदान करैत अछि। ओहिठाम FHSS मे ted अछि। कम्पाउन्ठरक बहिन विचारबाक बात ई अछि जे की झारखण्डक गौरीक एहिना ः बाँसुरी आ गौरी मे घुद़ी-सोहार हेम-छेम अछि। ई de हत्या होइत रहत? ई. हत्या गौरीक ate, एकटा सपना, बाँसुरी अछि जे धौना क' आसाम अबैत काल ट्रेन मे. एकटा मनोरथक हत्या. थिक। आदिवासी जन-जीवनक मेटल रहैक। से जखन धौना गौरी dee we कोकडाझाड़ सुख-समृद्धिक हत्या थिक। एहिं अत्याचार & अविलम्ब अबैत अछि तखन ओकरा बाँसुरी सँ सेहो भेंट होइत Sal रोकल जाय से आवश्यक AT, प्रश्न अछि जे कोना प्रेमलीलाक त्रिकोण aia अछि। प्रेमाख्यान आ ओहि मे रोकल जाय, के रोकत? उपन्यास मे एकर एक्केटा उत्तर त्रिकोणक समावेश सँ उपन्यास मे रोचकता add छेक। . देल गेल अछि। साधु dard 'बनला सँ काज नहि चलत, एकरा बाद कथा बड़ तेजी सँ बढ़ैत अछि। स्थान, तीर-धनुष आ हथियार ल क' लड़ाई कर' पड़त। समय, घटना-सभटा बदलि जाइत अछि। गौरी आसाम सँ उपन्यासक कथा एही समस्या तथा समाधान पर झारखण्ड sad अछि। बिहार सँ फराक da wre समाप्त eed अछि। किन्तु, उपन्यासक विषय एतहि खतम राज्य-झारखण्ड। आदिवासीक झारखण्ड। अपन झारखण्ड। * नहि होइत अछि। st amit seq अछि। बहुत-किछु मुदा, प्रश्न अछि- कोना अपन? कतेक अपन? de tga on सोचबाक da कहेत अछि। झारखण्ड राज्य विचार-बिन्दु अछि जत' उपन्यासकार पाठक क' पहुँचाबय a 2000 go में बनल हो, आदिवासी क्षेत्रक रूप में चाहैत छथि गौरी अपन। नानाक संग भुईटिकडी otf एकर-इतिहास बड़ पुरान अछि। एन्थ्रोपोलिजिकल सर्वे ह जाइत fs झारखण्ड बनिए गेल अछि, आब wat ऑफ इन्डियाक पीपुल site shear नामक पोथी (खण्ड आसाम, बंगाल वां मुंबई जेबाक कोन काज'-नाना मनेमन . सोलह) मे कहल गेल अछि जे झारखण्ड क्षेत्र मे बसनिहार aida छथि। गौरी भुईंटिकरी आयल ds नानाक अपेक्षित . पहिल समुदाय मुण्डारी भाषाभाषी छल जे तीस हजार वर्ष सरमाजीक सक्रिय सहयोग सँ राँचीक अस्पताल मे नौकरियों. पहिने एतय आयल Teal तकरा बाद विभिन्‍न समय मे af गेलैक। सरमाजी भुईटिकरीक कोयला ware लीज विभिन्‍न भाषा आ संस्कृतिक लोक एतय अबैत रहलाह। ई लेबयवला मालिकक मैनेजर छलाह। गौरी हुनका wT स्थिति आजुक झारखण्ड आ बिहारेक नहि सम्पूर्ण पूर्वी L मोटर साइकिल पर आबाजाही कर' लागल। राँचीक SP भारतक अछि। एक समय Wd जखन झारखण्डक क्षेत्रीय ; रीसोर्टक टेबुल पर डोसा खयलक। Tele स्थान पर परिंचिति पूर्वी मध्यप्रदेश सँ राजमहलक पहाड़ी आ गंगा ‘ सरमाजीक कीनल जीन्स सर्ट on सलवार-सूट view af व्याप्त od ई क्षेत्र बनिया-व्यवसांयी Wows कॉँ लागल। आ, एक राति जखन सरमाजीक पुरूषार्थक प्रत्यक्ष खनिजक व्यापारी तथा तीर्थाटन करयवला धर्मत्माक अनुभव कयलक तखन बाँसुरी क' fata देलकैक जे आकर्षणक केन्द्र रहल अछि। उपन्यास में मैनेजर सरमाजी घौना सन gist पैरूषवला सँ ओ बिआह नहि करत। मुद्दा, अपन परिचय wa देलनि अछि- ' हमर माय मिथिलाक aa सोचैत छलीह से भेलनि नहिं। कोयला खदानक Sel ओकर नैहर रहैक बीना। हम तँँ कहियो मातृकक _.... मालिकक वासनापूर्ति ओ नहि कयलथिन? तैँ ओकरे qa नहि देखलहूँ। सुनै छी जे एखनुका सुपौल जिला मे गोली सँ ae गेलीह। नाना साधु-संन्यासीक जीवन Bo चकला निर्मली अछि, तकरे लग में ओ गाम अछि। हमर त्यागि फेर विप्लवी बेसरा बनि गेलाह। जय झारखण्डक माय मैथिली ada छलि। हमर बाप संताली भाषी रहथि

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Suggested citation: आशीष अनचिन्हार. “काफिया आ बहर.” Videha — First Maithili Fortnightly eJournal, issue 113, 2012-09-01. https://www.videha.co.in/research/2012/113/काफिया-आ-बहर.htm

मूल विदेह अंक / Original issue