विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका · VIDEHA · ISSN 2229-547X

मैथिली कथा-संग्रह ‘जिद्दी’ पढ़लापर

खुशबू झा · 2012-10-15 · अंक 116

मैथिली कथा संग्रह जिद्दी पढलापर

साहित्यमे किछु पढबाक मोन भेल तऽ हम कथे पढैत छी । कखनो काल समाचार बनबैत–बनबैत थाकि गेलहुँ तऽ नेटपर कोनो कथा खोजए लगैत छी । युवा पत्रकार सुजीत कुमार झाक कथा संग्रह जिद्दी जखन हमरा भेटल एमएकेँ परीक्षा चलैत समयमे पढि लेलहुँ । सुजीतक पहिल कथा संग्रह चिड़ै आ दोसर कृति रिपोर्टर डायरी हम एहि सँ पहिने पढि लेने छी । कथ्यक हिसाव सँ चिडै आ जिद्दीमे खासे अन्तर नहि लागल । मुदा क्रमशः उचाई धऽ रहल छथि से पढबाक क्रममे हमरा भेटल । कोनो व्यक्तिकेँ एक वर्षमे ३ टा पुस्तक आएब साहित्यकेँ प्रति सुजीत कतेक समर्पित छथि तकर एहि सँ बडका उदाहरण दोसर नहि भऽ सकैत अछि । फेर जाहि रुप सँ हिनकर पुस्तक चर्चामे आबि रहल अछि हिनका लेल मात्र नहि मैथिली साहित्यक लेल सेहो उपलब्धीक बात अछि । जिद्दी एहि पुस्तककेँ नाम एकटा कथाक कारण पड़ल से हमरा नहि लगैत अछि । जिद्दीक वारहो कथामे जिद्द भडल अछि । जँ ओ जिद्दी नाम सँ कथा नहि लिख कितावक नाम मात्र लिख देने रहितथि तैयो फरक नहि पडैत ।

१ सय १४ पृष्ठक एहि कथा संग्रहमे १२ टा कथा अछि । पहिल कथा ‘फूल फुलाइएकऽ रहल’ संग्रहक नाम सँग पुरा वष्तुनिष्ट बुझाइत अछि । अहुँमे जिद्द अछि । कथामे पिंकी अपन अधुरा सपनाके टुटैत नहि छोडि एकटा दृढ विश्वासक सँग पुरा कऽ एकटा सच्चा आ कर्तव्यनिष्ट पत्निक रुपमे ठाढ़ भेल छथि ।
तहिना ‘नव व्यपारमे’ साधना उपर आधुनिकताक प्रभाव देखाओल गेल अछि जे अपन पति आ घर दुआरक जिम्मेवारीकँे बिसरि क्लब आ राजनीतिक हिस्सा बनल छथि । ‘खाली घर’, ‘लाल डायरी’, ‘जिद्दी’, ‘जादु’, ‘आदर्श’, ‘अर्थहिन यात्रा’ आ ‘व्यर्थक उडान’ ई सभ कथामे महिलाक मनोविज्ञानके चित्रण बहुत सुन्दर ढंग सँ कएल गेल अछि । तहिना ‘निष्ठा कि देखावा’ मे अपन कर्तव्यके समाजक लेल मात्र निर्वाह करय बला औपचारिकता बुझि पतिक सेवा करय बाली नकारात्मक विचारधाराक महिलाक चित्रण कएल गेल अछि । ‘केहन सजाय ?’ नामक कथामे कामनी मैडम जेहन जुझारु महिला जे अवलाके सवला बनैत देखि खुश होइत छली । ओहन सकारात्मक विचारधाराक महिलाक प्रस्तुत कएल गेल अछि तऽ ओ कथामे पुत्र भेलापर गोद लेल वच्चाकेँ छोड़ि देबएबला घटना पढि रोइया ठाढ कऽ दैत अछि । ‘मेनका’मे एकटा एहन महिलाक चित्रण अछि जे एकटा बेरंगक जीवन बिता रहल छली मुदा जखन रंग भड़य बला भेटल तऽ ओ अपन रंग उजारय बाली जेहन नहि बनबाक प्रण कएलन्हि आ अपन बेरंग जिनगीक दोसर यात्रा तय कएलन्हि । अर्थात महिलाद्वारा पीडित महिला दोसरकँे पीडा नहि देबए चाहलथि ।
अर्थात पुरा कथा संग्रह महिला आ महिलाक आचरण पर केन्द्रीत अछि जे एहि समाजक सत्यताक उजागर करैत अछि ।
एहिमे प्रस्तुत सभ महिलाक मोनमे एकटा अलग द्वन्द्व प्रस्तुत कएल गेल जे एहि पुरुषबादी समाजक देन अछि । आ ई काल्पनिक कथा होइतो एकटा कटु सत्य बातक पोल खोलि दैत अछि । एहि संग्रहक मोलिकते इएह अछि । हम चाहब सुजीतक नयाँ पुस्तक जल्दि आबए । खास कऽ महिला सँ जुड़ल समस्यासभकेँ आओर गम्भीरता संग उठैक एकर अपेक्षा हमरा तऽ अछिए । मैथिलीके पुस्तक प्रकाशन काज दुरुह भेलाक बादो आफन्त नेपाल जिद्दी पुस्तक छापयके प्रयत्न कएलक अछि । एहिके लेल आफन्तोके धन्यबाद देबहे पडत ।
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पूनम मण्डल
वि‍देह वि‍चार गोष्‍ठी एक झलक-

Suggested citation: खुशबू झा. “मैथिली कथा-संग्रह ‘जिद्दी’ पढ़लापर.” Videha — First Maithili Fortnightly eJournal, issue 116, 2012-10-15. https://www.videha.co.in/research/2012/116/मैथिली-कथा-संग्रह-जिद्दी-पढ़लापर.htm

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