संघीयतामे मैथिली भाषा, सांस्कृतिक असल पहिचान आ स्वायत्तताक वोध होएबे करत तएँ तकर दोसर विकल्प खोजब भूत खेलाएब अछि ।
मैथिली भाषा अभिव्यक्तिक माध्यम मात्र नहि भऽ मैथिली भाषामे लौकिकता, सांस्कृतिकता, कला, साहित्यसभकेँ स्पष्ट आ अनिवार्य छाही देखल जाइछ प्राध्यापक कापड़िक कहब छन्हि । ओ कहैत छथि मैथिला भाषामे सांस्कृतिक निजत्व छैक जकर संप्रेशन आन भाषामे नहिए भऽ सकैत अछि । जकर उदाहरण मैथिली भाषाक होरी, छठि, सामा, जटजटिन, लगनी, सोहर, समदाउन, लोकगाथा, लोक गीत रहल ओ उल्लेख कएलन्हि । ओ कहलन्हि एहिसभकेँ मैथिली बाहेक आन भाषामे अुवाद नहि भऽ सकैत अछि ।
प्रजातन्त्र गणतन्त्र सँ बेसी एखन देशमे संघीयता चाही कहैत ओ कहलन्हि संघीयता सँ अस्मिताकेँ पहिचान आ स्वात्तताक वोध होइत
अछि । संघीयतामे भाषिकता, जातियता, क्षेत्रीयता, ऐतिहासिकता आ पौराणिकताकेँ प्राकृत रुप सँ देखाइ दैत अछि । भाषाक मामलामे मैथिलीकेँ सर्वसत्तावादिता नहि एतुका सभ भाषा आ संस्कृतिककेँ संगहि एकर समायोजित स्वायत्तता मिच्छुन्नताक पक्षधर रहल
अछि । मैथिली भाषा भाषी नेपालमे एखन मोरङ्ग सँ लऽ कऽ रौतहट धरि रहल अछि । ओना मैथिली भाषाक बात करी तऽ धनुषा, महोत्तरी, सिरहा, सप्तरी, मोरङ्ग, सुनसरी, रौतहट, सलार्ही सहितक जिल्लामे बेसी प्रभाव देखल गेल अछि । तहिना मिथिला क्षेत्रक बात करी तऽ पूर्वमे मोरंग सँ लऽ पश्चिममे बाराक सिम्ररौनगढधरि मान जाइत अछि । मैथिली भाषा किछु वर्ष इम्हर सँ गती लेवएमे पाछा पड़ल देख गेल मुदा पहिचानक बात उठि रहल समयमे आ संचारक्षेत्रक विकास भेलाकबाद मैथिली भाषाक विकास पुनः गती लेलक अछि । मैथिली भाषापर अन्य भाषासभ लादल नहि गेल तऽ स्वतः मैथिली आ मिथलाक विकास हएत । समय समयमे मैथिली भाषाकेँ कमजोर करय लेल मैथिलीएकेँ मगही कहि कऽ प्रचार कएल जाएत अछि । ओना भाषा विद योगेन्द्र प्रसाद यादव मगही संक्रिर्णताक उपजकेँ संज्ञा देने छथि तऽ प्राध्यापक परमेश्वर कापड़ि मगहि भाषा राजनीतिक विषपाद रहल बतौने छथि । चाहे जे से मगहि कए नहि प्रचार कएल जाएत ओ मैथिलीए भाषा रहल सभ स्वीकार करैत छथि । तहिना भोजपुरी भाषा मैथिलीपर सेहो भाड़ी भेल जा रहल अछि । मैथिलीक अगिंकाक रुपमे रहल कहल जाएबला भोजपुरी भाषामे अश्लिलताक प्रभाव सँ मैथिलीपर भाड़ी पड़ि रहलाक बादो मैथिलीक अस्तित्व अखनो बाचय सफल भेल अछि । मैथिली भाषाकेँ शासन प्रशासन, लोकसेवा आ अदालतक संगहि संचारी भाषाक रुपमे प्रयोग भेलाक बाद मैथिली भाषाक प्रभाव क्षेत्र बहुत व्यापक होएबाक सम्भावना अछि । आ एना भेलापर मैथिली भाषाकेँ विकास करय नहि पड़त स्वत भऽ जाएत । मैथिली भाषाकेँ राज्य स्तर सँ दू भावनामे नहि राखल जाए तऽ एकर प्रभाव काठमाण्डू सहित अन्य भाषाभाषाीमे सेहो लोकप्रिय
अछि । मैथिली भाषाकेँ अपन लिपी होएबाक संगहि एकर अपन निजत्व अछि ।
२.
अतुलेश्वर