विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका · VIDEHA · ISSN 2229-547X

रायपुरक मिथिला महोत्सव: उत्साहक बाढ़ि आ मनीष झा

रामभरोस कापड़ि ‘भ्रमर’ · 2013-03-15 · अंक 126

रायपुरक मिथिला महोत्सबः उत्साहक बाढि आ मनीष झा

हम दू मास पूर्व इन्टरनेटपर रायपुर (छतिसगढ़, भारत)क मैथिली प्रवाहिका (मासिक पत्रिका)क आयोजनमे होबयबला अखिल भारतीय मिथिला महोत्सवक सूचना पढने रही । हिन्दीमे । किछु अनसोहाँत लागल रहय । किछु गोटे अपन प्रतिक्रियामे ई बात लिखबो कएने रहथि । जे से हम एकरा बिसरि गेल रही । मुदा एक दिन जखन दरभंगासँ गप्प करैत काल भाई चन्द्रेशक हडबडी शैलीमे ई सूचना भेटल जे हमरा रायपुर जएबाक अछि आ ओत्तय ओसभ हमरा सम्मानित करता तऽ जिज्ञाशा बढल । चिट्ठीक खोजबिन कएल । चिट्ठी राजविराज चल गेल बताओल गेल । जे सत्य नहि छल । तखन हम जिज्ञाशा कएल तऽ ओम्हरसँ एकटा हडबडाएल सन अध खिच्चडि भाषा मैथिली आ हिन्दीमे एकटा स्वर सुनि पडल –‘हम पठा देने छी, नहि भेटल अछि तऽ तुरन्त पठा रहलल छी ।’ कहबाक जरुरति नहि ई श्वर महोत्सवक संयोजक मनीष कुमार झाक रहनि , मैथिली प्रवाहिकाक सम्पादक । स्वरसं किछु बेशी व्यस्त, धडफडाएल आ उत्साही लोक लागल छलाह । एहिसं बेसी हमरा किछु जानल बुझल नहि छल ।
हम जाएब तएँ पटनामे जमायकेँ कहि दू गोट थर्ड एसीक टिकट बनबा लेने रही । अन्ततः पत्र हमरा मेलमे आएल आ हम सभ औपचारिकता पूरा कऽ रायपुर गेलहुँ । रायपुरमे होइत कार्यक्रम हमर जिज्ञाशा केन्द्रमे तऽ रहबे करे , एहि प्रवासमे जाहि उत्साहसँ एतेक भव्य आ पैघ कार्यक्रम करबाक साहस कएनिहार ई मनिष जी के छथि , ई हमर सभसँ बेसी जिज्ञाशाक विषय रहय ।
चौबीस घण्टाक रेल यात्रामे भागलपुरक डा. केष्कर ठाकुर जीक सानिध्यमे किछु बात बुझबो कएने रही जकरा आओर फरिछौलनि भाई योगानन्द झा जी । ई लोकनि रायपुर घुरि आएल रहथि वा मनिषसँ सम्पर्कमे रहथि । ओना तऽ डा. बुचरु बाबु सेहो मनीषक मनुसत्वक दर्शन कऽ चुकल रहथि आ ओहो हमर आगमनक समाद निरन्तर मनीष जी लग प्रवाहित करैत छलाह ।
जे से फागनु ११ गते (फरवरी २२ तारिख कऽ) ८ बजे राति कऽ जखन रायपुर रेलवे स्टेशनपर उतरलहुँ आ आन सहयात्री मित्र सभक प्रतिक्षा करैत छलहुँ तऽ डा. केष्कर ठाकुर जी हमरा दिश संकेत करैत एकटा पुष्ट देहयष्टिक छोटेकाँट–छाँटक व्यक्तिकेँ देखौलकनि–इएह छथि कापडि जी ! हम पलटलहुँ, आँखि मिलल , ओ व्यक्ति हाथमे राखल बडका बुकी( गुलदस्ता) हमरा दैत लगभग पैरपर झुकैत प्रमाण कएलक । डा. ठाकुरकेँ हुनक परिचय देबासँ पहिने हम बुझि गेलहुँ , ई हो न हो, मनीषेजी हएताह ।
बातो सएह रहैक । मनीष जी अपन दुलकी चालिमे अगिला डिब्बा दिस बढलाह आ एकटा छोटछिन गुलदस्ता एकटा महिलाकेँ धरबैत हमरा सभ लग आनि परिचय करौलनि । ओ जमशेदपुरसँ आएल रहथि । तखन हमरा सभकेँ स्टेसनसँ बाहर लऽ गेलाह आ सभकेँ गाडीसँ होटल पहुँचाओल गेल । हमराले छतिसगढ प्रशासनक न्यू सर्किट हाँउसमे आवासक व्यवस्था कएल गेल रहय । बीस पचिस मिनट पैदल आ १० मिनेट गाडीसँ जएबाक ठाममे । ई हमरा लेल दोसर सम्मान छल । एक मन भेल संगीसभक संग होटलमे बैसी, मुदा मनीष जीक आग्रह जे राज्य सरकारसँ हमरा लेल छुटिआयोल गेल आवासमे जाएब जरुरी । हमर खानपीनक व्यवस्था सभ ओतहि छल । मुदा हमर ई शर्त रहए , हम दिन भरि खानपीनक संग संगीसभक संग होटेलेमे बिताएब । सुविधा इहो जे ओतहि खानपीन आ कार्यक्रम स्थल सेहो ।
हम सर्किट हाउसमे गेला पर देखलहुँ –पाँच सितारा होटलक सभ सुविधा ओतय रहैक । मनीष जीक इन्तजाम पर हम फेर मुग्ध भेलहुँ । चारि दिन चारि राति हम ओत्तय बितौलहुँ । एकोरति आन ठामक आभास नहि भेल । कार्यक्रमसँ आयोजन धरि मनीष जी मात्र मनीष जी । एकटा बात खटकल–( ई एसगरिए किए कऽ रहल छथि । फेर भेल अपने दिल से जानीए पराए दिलका हाल , काज करैत काल एहिना काज कर पडैत छैक । मुदा से सभ क्षेत्रमे एहि तरहे दृष्टि दौडबैत हिनक सामथ्र्यपर हमरो मन हारि मानि लैत अछि । सभक ख्याल, सभक चिन्ता । वाह मनीष जी ।
हमरा लेल तेसर सम्मानकेँ अवसर तखन आएल जखन १२ गते कऽ अर्थात २३ तारिख कऽ भिन्सर ११ः३० बजे उदघाटन सत्र प्रारम्भ भेल । रायपुर क्षेत्रक संगहि मध्य प्रदेश, विहार, झारखण्डसँ एक सँ एक विद्वान, भाषा सेवी, मैथिल सभक वृहत उपस्थितिमे जखन कार्यक्रम शुरु भेल तऽ मंच संचालक डा. अशोक अबिचल हमरा अध्यक्षता करबाक लेल बजौलनि । मंचपर विहार सरकारक पूर्व संयुक्त सचिव डा. विद्यानन्द झा, विहार सरकारक बाल संरक्षण आयोगक अध्यक्ष श्रीमती निशा झा, मैथिली हिन्दी सुप्रसिद्ध गीतकार डा. बुद्धिनाथ मिश्र, टाटा मोटरक पूर्व वरिष्ठ सहायक मैनेजर , सेवानिवृत प्रो. चन्द्रशेखर खान , अन्तर्राष्टिूय मैथिली परिषद, उत्तर प्रदेशक प्रान्तिय अध्यक्ष पं. जगदिश चन्द्र शर्मा , मिश्र इस्पात प्रालिक अध्यक्ष राजेश्वर मिश्र,छत्तीसगढ पर्जटन मंडलके अध्यक्ष कृष्ण कुमार राय,विख्यात शिक्षा शास्त्री व इतिहासविद् डा.कृष्ण कुमार झा,ईन्दिरा गांधी राष्टीय कला केन्द्र नई दिल्लीके साउथ–ईस्ट एशिया हेड डा. वच्चन कुमार,बख्शी सृजन पीठ छत्तीसगढके अध्यक्ष डा. रमेन्द्रनाथ मिश्र सन सन दिग्गज व्यक्तित्व विराजमान छलाह । हम तखन आओर अचम्भित भऽ गेलहुँ जखन ओहि महत्ता समारोहक उदघाटन करबाक लेल हमरा आग्रह कएल गेल । ई सभ कार्यक्रम पूर्व निर्धारित छल , ई बात एकटा स्थानीय दैनिकमे छपल विज्ञापन देखलाक बाद ज्ञात भेल छल ।
मनीष लोककेँ बजबऽ मात्र नहि जनैत छथि । ओकर सम्मान करय सेहो जनैत छथि ई बात सभकेँ बुझयमे आबि गेल छलै । दरभंगाक डा. बैजु चौधरी सेहो एहने सन आयोजन करैत छथि मुदा गुणवत्तामे एकर चारियो अना नहि भऽ पबैत अछि । एसकरे ओहो , एसकरे इहो । दूनुमे बहुत अन्तर छैक । राजनीतिसँ बेसी विद्वतजनकेँ सम्मान रायपुरमे होइत देखल गेल यद्यपि मनीष जी सेहो राजनीतिक लोक छथि । छतिसगढक मुख्यमन्त्री डा. रमण सिंह लग पहुँच छनि । इहो कार्यक्रम छत्तिसगढ शासनक संस्कृत मन्त्रालयक सहकार्यमे भऽ रहल छनि । सभ किछु व्यवस्थित–आवास भोजन, आ कार्यक्रम स्थल । हँ कनेक त्रुटि कएलनि कार्यक्रमक रुपरेखा निर्धारित करैत काल समयक ठेकान नहि रखलनि । सम्मान करबाक क्रम निरन्तर जारी रहने निर्धारित कार्यक्रम बाधित होइत रहल । आ पहिल दिनक कार्यक्रम तऽ जेना तेना ठिके रहल । दोसर दिनक कार्यक्रममे बेसी कठिनाई भऽ गेलै । बारह घण्टाक बैसार । विचार गोष्ठी आ कार्यपत्रक बीच सम्मानक कार्यक्रम । डा. बुद्धिनाथ मिश्र खिसिआ गेलाह –एहना स्थितिमे हम नहि आएब । मनीष जी चुपचाप सहैत रहला , निर्मिमेष भावें ।
उदघाटनक बाद सम्मानक अवसर आएल । आयोजनक दोसर स्तम्भ अशोक चौधरीक हाथें मिथिला विभूति सम्मानसँ हमरा सम्मानित कएल गेल । निरन्तर फोनपर बनल मनीष जी एको क्षण मञ्चपर नहि बसि पौलाह । एम्हर सँ ओम्हर दौडैत । सभकेँ चित्त भरैत ।
आ से आबहु कालमे ककरो दुखी नहि कएलखिन्ह । आन कार्यक्रमसभ जकाँ अतिथिकेँ विदाई काल हर हर खट खट नहि भेल । सभ प्रसन्न भऽ घुरलाह – मनीष जीक सक्रियता, व्यवस्था आ उदार हृदयक प्रशंसा करैत ।
हुनक आग्रह जे काठमाण्डूमे हम हुनका अएबाक संयोग जुड़बियनि, हमरा पर भार अछि , देखी कहिया ई अवसर अबैत अछि ।
ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ।
रमेश रञ्जन

Suggested citation: रामभरोस कापड़ि ‘भ्रमर’. “रायपुरक मिथिला महोत्सव: उत्साहक बाढ़ि आ मनीष झा.” Videha — First Maithili Fortnightly eJournal, issue 126, 2013-03-15. https://www.videha.co.in/research/2013/126/रायपुरक-मिथिला-महोत्सव-उत्साहक-बाढ़ि-आ-मनीष-झा.htm

मूल विदेह अंक / Original issue