विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका · VIDEHA · ISSN 2229-547X

बाँटल गेल मैथिली: बरत मिथिला

नवेन्दु कुमार झा · 2013-04-15 · अंक 128

बाँटल गेल मैथिली: बरत मिथिला
बिहार मे न्यायक संग विकासक दावा करएबला नीतीश सरकारक टेढ़ नजरि मिथिला आ मैथिलीपर लागि गेल अछि। विकासक पिटा रहल ढोलक संगहि प्रदेशमे विकासक बाट खूजल अछि, मुदा विकासक सीमाकेँ बान्हि देल गेल अछि। ओना तँ विकासक धार पूरा प्रदेशमे बहि रहल अछि मुदा विकासक जे परिभाषा नालंदा जिला आ मगध क्षेत्रमे लागू भऽ रहल अछि ओइसँ शेष बिहार विशेष कऽ मिथिला अवश्य वंचित अछि। कुशासनक मारि सहल बिहारमे सुशासनक जे बाट देखाओल गेल अछि ऐमे मिथिला आ मैथिलीक परिभाषा बदलि गेल। केन्द्रक सरकार हुअए कि प्रदेशक सरकार, दूनू मिथिला आ मैथिलीक उपेक्षा कऽ रहल अछि। केन्द्रीय रेल बजटक संगहि बिहारक आम बजटमे मिथिलाकेँ तकैत रहि जाएब। ज्यों केन्द्र उपेक्षा कऽ रहल अछि तँ ओकर कारण सेहो वाजिब अछि। सत्ता प्राप्तिक लेल वोटक राजनीति होइत अछि। ओना संवैधानिक रूपे देशमे लोक कल्याणकारी शासन व्यवस्था मुदा विशेष लाभ ओइ क्षेत्र अथवा सरकार समर्थक दलकेँ होइत अछि जकर सहारासॅ सरकार बनैत अछि। ऐ फार्मूलामे मिथिला असफल अछि। केन्द्रमे सतारूढ़ दलकेँ मिथिलांचलसँ खरड़ि कऽ बाहर कऽ देल गेल अछि। प्रदेशमे सतारूढ़ गठबंधककेँ अपार समर्थन देब सेहो मिथिलापर भारी पड़ि रहल अछि। निरंकुश भेल सरकार अब मिथिलाक आ मैथिलीक पहचान भिरबऽ पर लागि गेल अछि। जगत जननी माता सीताक भाषा मैथिलीपर तलवार चलि गेल अछि आ जगत जननीक मातृभूमि मिथिलापर संकटक तलवार लटकि रहल अछि।
खएर, ई सभ तँ सत्ताक खेल अछि। सत्ता अपन हिसाबसँ रणनीति बना शासनक संचालन करैत अछि। बिहारक वर्तमान नीतीश सरकार जइ रणनीतिपर शासन चला रहल अछि तकर सोझ नोकसान मैथिली केँ भेल अछि आ मिथिलाक नोकसानक बाट धऽ लेने अछि। मिथिलाक जनता अपन मांगक लेल संघर्ष कऽ रहल अछि। ऐ क्रममे फराक प्रदेशक मांग सेहो उठैत रहैत अछि। सरकारकेँ मिथिलाक आवाज नै सुनाइ पड़ि रहल अछि। मिथिलाक लड़ाइकेँ कमजोर करबाक लेल सरकार साजिश कऽ रहल अछि। ई साजिश आब हमरा सभक सोझाँ अबि गेल अछि। जगत जननीक मातृभाषा मैथिलीकेँ बॉटि मैथिलीक हक लेल चलि रहल संघर्षकेँ कमजोर कएल गेल अछि। प्राथमिक स्तरसँ मैथिली भाषामे पढ़ाइ हुअए, ऐ लेल कतेको वर्षसँ संघर्ष चलि रहल अछि। कांग्रेसक शासन कालमे ऐ लेल मैथिली भाषामे पोथी सेहो प्रकाशित कएल गेल छल। मुदा ओ मात्र कागज धरि सीमित रहल, ऐसँ मैथिलीकेँ कोनो लाभ नै भेल तँ नोकसान सेहो नै भेल। नीतीश सरकार प्राथमिक स्तरसँ मातृभाषामे पढ़ाइ प्रारंभ कएलक अछि। ऐमे बिहारक क्षेत्रीय भाषा मैथिली आ भोजपुरीक संग अंगिका आ बज्जिकाकेँ जगह दऽ मैथिली भाषाक बँटवारा कऽ मैथिली भाषाक अस्तित्वपर प्रश्न चिन्ह ठाढ़ कऽ देलक अछि। मैथिली, भोजपुरी भाषाक पोथीक संगहि अंगिका आ बज्जिका भाषामे सेहो छपलक अछि। मातृभाषा बँटि गेल। मातृभूमिमे बँटबाक साजिश भऽ रहल अछि। मिथिला आ मैथिलीक नामपर राजनीति कऽ रहल राजनेता आ मैथिल विद्वान मौन धारण कएने छथि। सत्तारूढ़ दलक अंग प्रदेशक एकटा नेताक इशारापर मैथिलीक महत्वकेँ कम करबाक लेल अंगिकाकेँ महत्व देल गेल अछि। दोसर दिस अंगिकाकेँ सेहो आगाँ कएल गेल अछि। ई जनतब अछि जे प्रति पाँच कोसपर भाषाक स्वरूप बदलि जाइत अछि। अंगिका आ बज्जिका मैथिली भाषाक बहिन अछि। क्षुद्र राजनीतिक लाभक लेल मैथिली प्रेमक नौटंकी करएबला राजनेता मैथिली भाषाकेँ बाँटि चैनक बासुरी बजा रहल छथि। हमरा सभ एतेक पैघ बेवकूफ छी जे ओइ राजनेताकेँ माथपर बैसबैत छी जे भाषाक विरूद्ध साजिश करैत अछि। अंगिका आ बज्जिका फराक भाषाक रूपमे कोनो एक दिन अस्तित्वमे नै आबि गेल अछि। ऐमे सत्ताक शीर्ष नेतृत्वक हाथ अवश्य रहल हएत। मिथिला आ मैथिलीक पहरूआ कहएबला राजनेता सभकेँ एकर जनतब नै भेल हएत ई मानऽबला गप नै अछि। दरअसल मजगूत सत्ताक आगाँ मिथिलाक वर्तमान राजनेता असहज छथि। स्वतंत्राक ६४ वर्षक बादो मिथिला आ मैथिली पिछड़ल अछि। बावजूद एकर मिथिलावासी अपन हिसाबे जीवनक गति आगाँ बढ़ा रहल छथि। मिथिलाक भूमि शांतिक केन्द्र अछि, ऐठाम उग्रताक कोनो जगह नै अछि। देशमे भाषा आ प्रदेशक लेल कतेको उग्र आंदोलन भेल अछि जइमे किछु सफल सेहो भेल। ई जनैत जे सरकार उग्रताक भाषा बुझैत अछि मिथिलावासी अपन हिसाबे आंदोलन आ राजनीति करैत छथि। संगहि राजनीतिक महत्व सेहो अछि। बिहारक बँटवारा उग्र आंदोलनक परिणाम आ तात्कालिक सत्ताक कुर्सी बचैबाक लेल ओकर महत्वक परिणाम अछि। आंदोलनक मिथिला प्रतीक्षा कऽ रहल अछि। क्षुद्र राजनीतिक लाभक लेल मैथिलीक अस्तित्वपर जे प्रश्न ठाढ़ कएल गेल अछि ओकर मुँह तोड़ उत्तर देबाक लेल हमरा सभकेँ सजग होमए पड़त।
मातृभाषाकेँ सरकार बाँटि देलक अछि तँ मातृभूमि मिथिलाक कपारपर संकट अछि। जिलामे पसरल मिथिला अंग, बज्जिकांचल, सीमांचल आ सुरजापुरीक रूपमे बाँटल जा रहल अछि। एक समए छल जखन मिथिला किछु वर्षक लेल प्राकृतिक कारणसँ दू क्षेत्रमे बँटि गेल छल। कोसीपर पुलक अभावमे मिथिला फराक भऽ गेेल छल। केन्द्रमे अटल बिहारी वाजपेयीक नेतृत्वबला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार कोसीक महासेतुक जे उपहार देलक ओइसँ मिथिला एक अवश्य भेल मुदा बिहारक राजग सरकार वाजपेयीक ऐ उपहारक हिसाब मैथिलीक आ मिथिलाकेँ बाँटि चुकता करबापर लागल अछि। मिथिलावासी अपन अधिकारक प्रति सजग भऽ जाथि ऐसँ पहिनहि नीतीश सरकार ओकर धरती पकड़ैबाक लेल तैयार अछि। कोनो संस्कृतिकेँ नष्ट करबाक लेल आवश्यक अछि जे पहिने ओकर भाषाकेँ नष्ट कऽ देल जाए। ज्यों भाषा मरि जाएत तँ ओकर भू-भाग मेटाय मे कोनो समय नै लागत, से नीतीश सरकार पूरा मनोयोगसँ कऽ रहल अछि। भारतीय संस्कृतिक रक्षा करबाक दाबा करएबला राजनीतिक दल आ संगठन सेहो नीतीश सरकारक ऐमे डेगसँ डेग मिला कऽ चलि रहल अछि। श्री रामक जन्म भूमिक लेल पूरा देशकेँ अपना माथपर उठबऽ बला दल आ संगठन जगत जननी सीताक मातृभूमि बँटैत देखि रहल छथि। वोटक राजनीतिक भेट चढ़ि गेल अछि जगत जननीक मातृभूमि आ मातृभाषा। आ राष्ट्रवादी सांस्कृतिवादी सभ आँखि पर पट्टी बान्हि निश्चिंत छथि।
मैथिली प्रदेशक एकमात्र भाषा अछि जकरा संविधानक अष्टम् अनुसूचीमे स्थान भेटल अछि। ई भाषा सरकारक संरक्षकक अधिकारी अछि। आन प्रदेशमे कामकाजमे क्षेत्रीय भाषाक महत्व अछि। संविधानक अनुसूचिमे स्थान प्राप्त ऐ भाषाकेँ सरकार संरक्षण दऽ देबऽ मे असफल रहल आ एकर महलकेँ कम करबामे कोनो कसरि नै छोड़लक अछि। सरकारक लाभसँ ई भाषा वंचित अछि। कोनो मैथिली पत्र-पत्रिका सरकारक विज्ञापनक लाभ नै उठा सकैत अछि। कि एक तँ सरकारक विज्ञापन नीितमे मैथिली भाषाक कोनो स्थान नै, ज्यों सरकार भाषाकेँ संरक्षण नै दऽ सकैत अछि तँ ओकरा खंडित करबाक सेहो ओकरा कोनो अधिकार नै छै।
हमरा जनैत एखनो बहुसंख्यक मैथिली भाषाीकेँ ऐ तथ्यक जनतब नै अछि जे हमर भाषाकेँ बॉटि देल गेल अछि। ऐमे दोष हमर सभक सेहो अछि। हमरा सभ अपन मातृभूमिक संगहि मातृभाषासँ दूर भऽ रहल छी। उच्चस्थल भेलाक बाद मैथिली भाषामे गप नै करब हमरा सभक पिछड़ल हेबाक हीन भावना प्रदर्शित करैत अछि। ज्यों स्वयं सजग नै रहब तँ एकर लाभ दोसर अवश्य उठाओत। दोसर मैथिलीक राजनीति कएनिहारक जे अछि ऐसँ ऐ भाषापर एक खास वर्गक भाषा हेबाक मोहर लागि रहल अछि। हमरा सभमे अपन भाषाक प्रति समर्पणक भावनाक अभाव आबि गेल अछि आ भाषाक माध्यमसँ मात्र सरकारी लाभ आ पुरस्कार लेबऽ मे अपन सभटा विद्वता खर्च कऽ रहल छी। एकर लाभ दिग्भ्रमित क्षेत्रीय विद्यान उठा, राजनेताक लेल राजनीतिक अवसर उपलब्ध करा रहल छथि। मिथिला बरि रहल अछि, मैथिली बँटि गेल, हमरा सभ मौन छी। मिथिला नाम जाप कऽ राजनीति कएनिहार राजनेता, भाषाक विद्वान होएब आ ऐ भाषाक सहारा लऽ जीवन यापन कऽ रहल विद्वत समूहक कानपर ढील धरि नै चलि रहल अछि। स्वार्थक राजनीतिमे जगत जननीक मातृभूमि आ मातृभाषा बिहारक नीतीश सरकारक बलि चढ़ि गेल अछि। शांत पड़ल मिथिलामे अन्हरक कोनो संकेत नै भेटि रहल अछि। सरकारक गौण एजेंडा आब सभक सोझाँ आबि गेल अछि। भाषा बटल, क्षेत्र बटल, गाम बटल, घर बटल। की ऐ बँटवाराकेँ अपन नियति मानि हमरा सभ चुप्प रहब, समए अछि जागू हे मिथिला पुत्र। अहाँक प्रतीक्षा अहाँक मातृभूमि आ मातृभाषा कऽ रहल अछि। ज्यों से नै भेल तँ देश आ प्रदेशक मानचित्रपर हमरा सभ दूरबीन लगा तकैत रहब मिथिला आ मैथिली।
ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ।

Suggested citation: नवेन्दु कुमार झा. “बाँटल गेल मैथिली: बरत मिथिला.” Videha — First Maithili Fortnightly eJournal, issue 128, 2013-04-15. https://www.videha.co.in/research/2013/128/बाँटल-गेल-मैथिली-बरत-मिथिला.htm

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