डॉ०अरूण कुमार सिंह, जे० आर० पी०- मैथिली भारतीय भाषाओँ का भाषावैज्ञानिक सांख्यिकी संकाय, भारतीय भाषा संस्थान, मैसूर (कर्नाटक)
अभिकलनात्मक/संगनणात्मक (Computational) मैथिली व्याकरण
प्राचीन कालहिसँ भाषाक सोद्देश्यता पर चिन्तकक नजरि रहल अछि। आइ भाषा-अध्ययनक एहि परम्परापरक स्वरूपमे परिवर्त्तन आएल अछि। एकर अनुसारेँ भाषामे सोद्देश्यता एवं प्रयोजनमूलकताक भाव पूर्वनियोजित रूपेँ पैदा कएल जाए रहल अछि। भाषाक इएह बदलैत भूमिकाक कारणेँ व्याकरणक स्वरूप एवं उद्देश्यमे परिवर्त्तन होएब स्वाभाविके अछि। किछु चुनल शब्द, प्रयोग आओर वाक्यकेँ सूचीबद्ध करबासँ लए कए भाषाक साँगोपाँग गंभीर विवेचन धरि व्याकरणक विस्तार मानल जाए सकैत अछि। कोनो भाषाक प्रयोग-क्षेत्र भनहि सीमीत रहल हुए परंच ओकर उपयोगिताकेँ लए कए कहियो विवाद नहि रहल अछि। आब प्रश्न उठैत अछि जे व्याकरणक उपयोगिता का अछि ? छोट-छोट नेना नान्हिटामे अपन घर-परिवारमे बाजए बला भाषा सीख लैत अछि। जाबत धरि कोनो नेनाकेँ ओकर मातृभाषाक व्याकरणिक औपचारिक जानकारी देल जाएत अछि, ताबत धरि ओ नेना ओहि भाषाक व्यवहारमे दक्ष भए चुकल रहैछ। एहना स्थितिमे ई प्रश्न उठब स्वभाविके अछि जे व्याकरणक आवश्यकता की अछि ? एहि प्रश्नक प्रत्युत्तरमे महर्षि पतंजलि महाभाष्यमे व्याकरणक प्रयोजन बतबैत कहैत छथि-
‘‘ कानि पुनः शबदानुशासनस्य प्रयोजनानि? रक्षोहागमलध्वसंदेहा: प्रयोजनम् ’’ अर्थात् रक्षा, ऊह, आगम, लघु एवं असंदेह यैह पाँचटा व्याकरणक प्रयोजन अछि।
रक्षासँ तात्पर्य अछि- वेदक रक्षा, यथा –
‘‘रक्षार्थ वेदनां – मध्येय व्याकरणं।
लोपागमवर्णविकारज्ञो हि सम्यग् वेदान् परिपालिष्यतीति।’’
अर्थात् लोप, आगम, आदेशक व्याकरणिक प्रक्रियाक जिनका ज्ञान रहैत छन्हि सैह वेदक शुद्ध रूपसँ रक्षा कए सकैत छथि।
संदर्भक अनुसार समुचित शब्दक कल्पना करब एंव तद्नुरूप ओकर व्यवहार करब ऊहक कोटिमे राखल गेल अछि।
आगमक अनुसारेँ मानल गेल अछि जे व्याकरण पद आ पदार्थक ज्ञानक उपरान्त वाक्य आओर पदार्थक ज्ञान प्राप्त करएमे सहायक होइछ। नव-नव वाक्यक उत्पादन एवं प्रयोग आगमक कारणेँ संभव होइत अछि।
लघुसँ तात्पर्य अछि जे किछु सीमित नियमक सहयोगसँ सम्पूर्ण भाषाक ज्ञान प्राप्त कएल जा सकैत अछि। किएकतँ कोनो भाषाक विपुल शब्द-भण्डारकेँ कंटस्थ नहि कएल जाय सकैत अछि। एनामे ई भाषा शिक्षणमे उपयोगी होइछ।
असंदेहसँ तात्पर्य अछि जे भाषाक संरचनागत संदिग्धताक स्थितिमे व्याकरणक ज्ञान ओकर निवारण करैत अछि।
व्याकरणक एहि प्रयोजनकेँ देखल जायतँ एहिमे व्याकरणकेँ एकटा साधनक रूपमे देखल गेल अछि। एकटा तथ्य इहो स्वीकारब आवश्यक अछि जे महाभाष्यमे वर्णित स्थित सँ आजुक भाषिक परिवेश बड्ड बेसी भिन्न भए गेल अछि। एकरे परिणाम अछि जे वर्त्तमान समयमे अभिकलानात्मक व्याकरणक संकल्पना प्रासांगिक अछि।
जँ भाषाकेँ एकगोट व्यवस्थाक रूपमे अभिहित कएल गेल अछि तँ निश्चित रूपसँ व्याकरणे ओहि भाषिक व्यवस्थाक तार्किक आधार गढ़ैत अछि। कोनो भाषा अपन विकाश-क्रममे निरन्तर परिवर्त्तनशील रहैत अछि। संभव अछि जे एहि परिवर्तनक गति कम हो, परंच भाषामे आएल आंशिक बदलाव स्वयं भाषाक सजीवता लेल अपरिहार्य होइछ। भाषामे व्याप्त एहि विकासक गतिशीलताक स्वभावक बादो एक आदर्श व्याकरणसँ अपेक्षा कएल जाइत अछि जे ओ ओहि भाषाकेँ समग्र रूपेँ विश्लेषित एवं निरूपित कए सकय। अभिकलानात्मक व्याकरणक लेल मानवक भाषाई अनुप्रयोगक स्वरूप, भाषिक समाजक विकासक गत्यात्मक रूप तथा भाषाक प्रायोगिक स्तरक मूल स्थिति पर नव रूपेँ विचार करब प्रासांगिक भए जाइत अछि। आजुक सामाजिक परिवेश औद्योगिक-क्रांति एवं सूचनाक्रांतिक बीचक स्थितिक साक्षी बनल अछि। एहि स्थितिक दबाबस्वरूप जे भाषा मानव एवं मानवक बीच संवादक माध्यम अछि वैह भाषा आइ मानव एवं कम्प्यूटरक बीच संवाद स्थापित करबाक लेल तत्पर अछि। दरअसल यैह ओ स्थिति अछि जाहिमे अभिकलनात्मक व्याकरणक पृष्ठभूमि तैयार कए रहल अछि।
अभिकलानात्मक व्याकरणक आशय ओहि व्याकरणसँ अछि जकरा माध्यमे प्राकृतिक भाषाकेँ कम्प्यूटरक माध्यमसँ बुझल जा सकैछ। एकरा संगहि व्याकरण होएबाक कारणेँ एकरासँ इहो अपेक्षा कएल जाइत अछि जे ई एतबा वैज्ञानिक एवं परिपूर्ण हो जे एकर नियमक द्वारा कम्प्यूटरक माध्यमसँ प्राकृतिक भाषाक नव-नव वाक्यक सृजन कएल जाए सकय। फलस्वरूप ई व्याकरण मानव-मशीन अंतरापृष्ठक समय अपन भूमिकाक निर्वहन कए सकय। भाषा-कम्प्यूटिंगक लेल ई आदर्श स्थिति होएत जे एहन अभिकलानात्मक व्याकरणक विकास कएल जाए सकय जे प्राकृतिक भाषाक सभ संरचनाक तार्किक विश्लेषण प्रस्तुत कए सकय। एकर तात्कालिक लाभ ई होएत जे भाषा-प्रौद्योगिकीक विभिन्न अनुप्रयोग जेना- मशीनी अनुवाद, सूचना-प्रत्यानयन, सूचना- संचयन, व्याकरण जाँचक, पाठ-विश्लेषण आदिक विकासमे दीर्घकालिक समाधान उपलब्ध भए सकय। एहि क्षेत्रमे भए रहल शोधक लक्ष्य सेहो यैह अछि ; मुदा वर्त्तमान समयमे भाषाक छोट-छोट संरचने पर शोधार्थीसभक ध्यान केन्द्रित अछि। एहि कारणेँ रूप-विश्लेषण (Morph Analysis), टैगिंग (Tagging), आ पदानिरूपण (Parsing)क स्तरे धरि ध्यान केन्द्रित भए सकल अछि आओर एहिमे सफलता सेहो भेटल अछि। आवश्यकता एहि बातक अछि जे प्राकृतिक भाषाकेँ आधार बना कए एहन नियम विकसित कएल जाय जे नहि तँ मात्र कम्प्यूटरमे सहज स्वीकार्य हो, बल्कि प्राकृतिक भाषा पर केन्द्रित भाषा-प्रौद्योगिकीय लक्ष्यकेँ सेहो प्राप्त कएल जा सकय।
ई सर्वविदित तथ्य अछि जे कम्प्यूटरक प्रचालन-व्यवस्था मूलतः द्वयंक प्रणाली (Binary System : 0 & 1) पर निर्भर अछि आ ठीक एकर विपरीत मानवीय भाषामे असंख्य शब्द-संपदा एवं अनेक तरहक वाक्य संरचना अछि। आब प्रश्न उठैछ जे मानव-कम्प्यूटरमे संवाद कोना संभव होएत? इएह महत्वाकांक्षा मानवकेँ कृत्रिम मेधा (Artificial Intelligence)क क्षेत्रक अंतर्गत शोधक लेल प्रेरित करैत अछि। एहिमे मूल समस्या ई अछि जे मानव-मशीन अंतरापृष्ठ (Interface)मे एक दिस मानव होइछ जे अपन असीम शब्द-संपदा एवं भावना, चेतना सदृश अनेक मानवीय गुणसँ भरल होइछ तँ ओहिठाम दोसर दिस मशीन होइछ जे एकटा स्थल उपकरण मात्र अछि। एहन स्थितिमे मानवीय भाषासँ संवाद बैसा पायब कठिन बुझन’ जा रहल अछि। तथापि वर्त्तमानमे भए रहल शोध भविष्यमे की रंग लायत एहि पर आशातीत दृष्टि राखब सैह ठीक रहत। बरहाल यैह ओ स्थिति अछि, जकर कारण अभिकलानात्मक व्याकरणक आवश्यकता महसूस कएल जाए रहल अछि।
अभिकलानात्मक व्याकरणक संकल्पना नव अछि एवं अखन धरि कोनो सटीक अभिकलानात्मक व्याकरणक विकास नहि कएल जाए सकल अछि। मुदा सामान्य व्याकरण एवं अभिकलानात्मक व्याकरणमे व्याप्त अंतरकेँ संकल्पनात्मक रूपसँ एतय उद्घाटित कएल जाए रहल अछि। यथा- सामान्य व्याकरण मानवीय व्यवहारक लेल होइत अछि। अभिकलानात्मक व्याकरण कम्प्यूटरक माध्यमसँ मानवीय व्यवहारक लेल होइत अछि। सामान्य व्याकरण प्राकृतिक भाषा की अछि? कियैक अछि? सदृश प्रश्नक पड़ताल करैत अछि। अभिकलानात्मक व्याकरण प्राकृतिक भाषा कोना काज करैत अछि? सदृश प्रश्नक जाँच-पड़ताल करैत अछि। सामान्य व्याकरण सहज एवं मौलिक होइत अछि। अभिकलानात्मक व्याकरण ‘सामान्य व्याकरण’ सँ उर्जा ग्रहण करैत नितांत कृत्रिम होएत। सामान्य व्याकरण अपन स्वरूपमे व्यापक भए सकैछ। अभिकलानात्मक व्याकरण स्पष्ट, एकनिष्ट एवं लक्ष्य केन्द्रित होएत। सामान्य व्याकरणक उद्देश्य मूल रूपसँ मानवकेँ लाभ पहुँचाएब होइत अछि। अभिकलानात्मक व्याकरणक उद्देश्य अपन विभिन्न उत्पादक माध्यमसँ मानवकेँ लाभ पहुँचाएब होइत अछि। सामान्य व्याकरण प्रस्तुतीकरणमे ई सहज होइत अछि। अभिकलानात्मक व्याकरणक प्रस्तुतीकरणमे गणितीय होइत अछि, जकरा कम्प्यूटर स्वीकार कए सकए।
चामस्की व्याकरणकेँ ‘भाषाक तर्कशास्त्र’ कहलन्हि अछि। व्याकरणक उद्देश्यकेँ स्पष्ट करैत चामस्की कहलनि अछि जे ‘व्याकरण ओएह होएबाक चाही जकरा द्वारा भाषाक सभ वाक्यक वर्णन आओर सृजन कएल जाए सकय।’ आब एतय अभिकलानात्मक व्याकरणमे जे नव प्रसंग जुड़ैत अछि ओ एकर कम्प्यूटरापेक्षी होएब अछि। अभिकलानात्मक व्याकरणक उद्देश्य मूलतः ‘प्राकृतिक भाषासंसाधन’क संकल्पनाकेँ सार्थक एवं सफल बनाएब अछि आओर एहिमे अभिकलानात्मक व्याकरण साधनक रूपमे प्रयुक्त होइछ। जखनकि एकर साध्यतँ परोक्ष रूपसँ ‘प्राकृतिक भाषा संसाधने’ अछि। एहने स्वरूपमे अभिकलानात्मक व्याकरणसँ अपेक्षा कएल जाइत अछि जे ओ भाषाकेँ वैज्ञानिक ढ़ंगसँ विश्लेषित एवं सर्जित कए सकय, जे कम्प्यूटरापेक्षी हो। आब विचारणीय ई अछि जे ‘प्राकृतिक भाषा संसाधन’क संकल्पना स्वयंमे एक व्यापक संकल्पना अछि आओर दोसर जे एहिमे प्रयुक्त व्याकरण सेहो अपन स्वरूपमे व्यापके होएत। कियैक तँ आइ कोष निर्माणसँ लए कए पाठ-निर्माण धरि सबमे प्राकृतिक भाषाक कोडीकरणक आवश्यकता पड़ैत अछि। एहि सबकेँ कम्प्युटेशनल व्याकरण कहब सैह उचित होएत। एहि स्थितिमे अभिकलानात्मक व्याकरणक मूल उद्देश्य तँ प्राकृतिक भाषाकेँ एहि तरहेँ सूत्रबद्ध (Formulized) करबाक अछि जाहिसँ कम्प्यूटर एकरा स्वीकार कए सकय। एकर परिणामस्वरूप ‘प्राकृतिक भाषा संसाधन’क क्षेत्रक विभिन्न लक्ष्य मशीनी अनुवाद ( Machine Translation), सूचना प्रत्यानयन (Information RetrievalInformationRetrie) वाक्-संश्लेषण (Speech Synthesis), शब्द-संसाधन (Word Processing), दृश्य-संसाधन (Visual Processing) तथा ज्ञान-निरूपण (Knowledge Representation) आदि मुख्य बिन्दु अध्ययनक लेल सोझमे आबि रहल अछि जकर मुख्य उद्देश्य कम्प्यूटरक सापेक्ष भाषा-प्रजनन करब तथा मानव-मस्तिष्कक सापेक्ष भाषा-बोध कराएब अछि। एहि व्याकरणमे इहो पायल गेल अछि जे भिन्न-भिन्न उपकरणसभमे एके तथ्यकेँ अलग-अलग ढंगसँ केन्द्रीकृत कएल जाइत अछि। जेना- मशीनी अनुवाद प्रणालीमे लक्ष्य-भाषा पदनिरूपण (Parsing) तथा श्रोत-भाषाकेँ सर्जित(Generation) कएल जाइत अछि। एहिमे एकेटा नियम- ‘वाक्य= संज्ञापदबंध+ क्रियापदबंध’क उद्देश्य लक्ष्य भाषाकेँ विश्लेषित करब होइत अछि। जखनकि श्रोत भाषाक एकर समतुल्य निर्माण करब होइत अछि। एहि सूचना-प्रत्यानयनमे पदनिरूपणक आधार ‘मूल पद’ होइत अछि। एकर आधार पर प्रणालीकेँ सूचीकृति सूचनाक सटीक मिलान करब होइत अछि। एकर व्याकरणक स्वरूप मशीनी अनुवादमे पदनिरूपणक नियमसँ भिन्न होएत। एहि तरहेँ अन्य उपकरण सभमे अलग-अलग प्रक्रियाक तहत एकर उद्देश्य भिन्न वा एकरा कोडीकृत करबाक तरीका भिन्न भए सकैत अछि।
अभिकलानात्मक व्याकरणक स्थिति एवं महत्त्वकेँ देखैत जँ गंभीरतासँ विचार कएल जाय तँ स्पष्ट होइत जे संदर्भक अनुसार छोट-छोट नियमसँ काज निकालल जा रहल अछि। जाहिमे सर्वप्रथम रूपकेँ चिन्हब आओर एकर विश्लेषण कएल जाइत अछि। एहि क्रममे पदक व्याकरणिक कोटिक निर्धारण कएल जाइत अछि, जकरा टैगिंग (Tagging) कहल जाइत अछि। एकरा लेल आवश्यक होइत अछि जे व्याकरणक कोटि एवं ओकर गुण (Attributes)क आधार पर एकटा पहिनहिसँ तैयार टैग-सेट (Tag-Set) हो। मैथिलीक लेल एतय एकटा टैग-सेट (Tag-Set) देल जा रहल अछि जकर स्रोत LDC-IL, CIIL, Mysoreमे हमरा द्वारा कएल जाए रहल काजक अछि।
Sl. No
Category
Label
Examples
Remarks
Main Category
Sub Category
1
Noun
N
1.1
Common
NN
पोथी, कलम, पंडित, खवास
1.2
Proper
NNP
रंजन, दिनेश, अतुल
1.3
Nloc
NST
आगू, पीछू, ऊपर, नीचा
2
Pronoun
PR
2.1
Personal
PRP
तोँ, हम, ई, ओ
2.2
Reflexive
PRF
अपना, अपने, स्वयं
2.3
Relative
PRL
जे, जिनका, जिनकर, जकरा
2.4
Reciprocal
PRC
एक-दोसरकेँ, आपस, परस्पर
2.5
Wh-word
PRQ
के,की, कथी ककर
2.6
Indefinite
PRI
केओ, किछु/ किउछ
3
Demonstrative
DM
3.1
Deictic
DMD
ई,ओ,अहाँ,हम
3.2
Relative
DMR
जे, जाहि
3.3
Wh-word
DMQ
के,की,कोन
3.4
Indefinite
DMI
केओ, किछु/ किउछ, कोनो
4
Verb
VM
4.1
Main
VM
देख, पढ़, पी, गा, ले, उठ, खा
4.2
Auxiliary
VAUX
अछि,छी,छल,छथि,छलाह,रहत,होएब,थिक
4.3
Gerund
VGN
धोएब, पीटब, दौरब, नहाएब
4.4
Causative Verb
VCT
मरबाएब, छरबाएब, लदबाएब, लिखबाएब, दुहबाएब
4.5
Compound Verb
CVP
मारब-पीटब, काट-छाँट, कानब-खीजब, धर-पकर
5
Adjective
Adj
नीक, मोटका, ललकी,
6
Adverb
Adv
भने, अनायास, क्रमश:, एकाएक, एहन
7
Postposition
PSP
सँ, केँ, लेल
8
Conjunction
CC
8.1
Co-ordinator
CCD
आओर, परंच, मुदा, वा, आ
8.2
Subordinator
CCS
जँ, तँ, जे
9
Particles
RP
9.1
Default
RPD
भरि, यौ, हौ, रौ
9.2
Classifier
CL
टा, गोट, गो, ठो
9.3
Interjection
INJ
ओह-ओ, अहा, वाह, हा
9.4
Intensifier
INTF
बहुत, बेसी, सबसँ
9.5
Negation
NEG
नहि, ऊहुँ, न
10
Quantifiers
QT
10.1
General
QTF
कनेक, बहुत, किछु
10.2
Cardinals
QTC
एक, एकटा, दुई, बीसगोट, तीन, चारि
10.3
Ordinals
QTO
पहिल, दोसर, तेसर, चारिम
11
Residuals
RD
11.1
Foreign word
RDF
A word written in script other than the script of the original text
11.2
Symbol
SYM
$, , *, (, )
For symbols such as $, & etc
11.3
Punctuation
PUNC
., : ;
Only for punctuations
11.4
Unknown
UNK
A word written in script other than the script of the original text
11.5
Echo words
ECH
जलखे- (तलखे), मोंट-(सोंट)
This POS tag set for Maithili Prepared by: Dr. Arun Kumar Singh,JRP,Maithili, LDC-IL,CIIL
अपन योजनाक अनुरूप टैग-सेटक निर्माण कएल जाइत अछि। टैग-सेटक लेल प्राथमिकता होइत अछि जे ई वैज्ञानिक, विस्तृत, योजना-केन्द्रितक संग-संग अनुप्रयोग विशेषक तैयारीक अनुकूल सेहो हो। रूपक आधार पर टैगिंग सर्वाधिक लोकप्रिय प्रक्रिया अछि, मुदा योजनाक अनुरूप पदबंध एवं वाक्यक सेहो आब टैगिंग होइत अछि। एकरा संग-संग प्रोक्तिक सेहो आब टैगिंग होमए लागल अछि।
अभिकलनात्मक व्याकरणक निर्माणक चरणमे पदनिरूपण(Parsing) एकगोट महत्वपूर्ण पड़ाव होइत अछि। एहिमे पदक अंतिम व्यवहार्यताक अनुसार वाक्यक विश्लेषण होइत अछि। प्राय: एकर बादक विश्लेषणकेँ वृक्षारेखक दृष्टिसँ निर्धारित कए देल जाइत अछि। एकरा नियमबद्ध करबाक लेल कोनो रूपवादक आधार लेल जाइत अछि किएकतँ विश्लेषण चरणबद्ध एवं वैज्ञानिक भए सकए। पदनिरूपण अनेक स्तर पर शुरु होइत अछि आ एकरे अनुरूप एकर वर्गीकरण कएल जाइत अछि। ई कखनो बामसँ शुरू भए कए दहिन दिस तँ कखनो दहिनसँ बाम दिस जाइत अछि। एकरे समानान्तर ई उपरसँ नीचा एवं नीचासँ उपर दिस काज करैत अछि। ई बहुत किछु भाषाक प्रकृति पर निर्भर होइत अछि। मैथिली सदृश क्रिया केन्द्रित भाषामे पदनिरूपणक प्रक्रिया प्राय: क्रियेसँ शुरु होइत अछि। ई सुविधाजनक अछि किएकतँ क्रियापदमे अधिकतम व्याकरणिक सूचना भेटि जाइत अछि, जकर आधार पर एक सक्षम पदनिरुपण प्रणालीक विकास कएल जाए सकैत अछि।
अभिकलनात्मक व्याकरणमे पूर्वनिर्धारित टैगसँ पदकें चिह्नित कएल जाइत अछि, तत्पश्चात ओकर भाषा-संरचनाक अनुरूप प्राय: वाक्य केन्द्रित विश्लेषण कएल जाइत अछि। एहि आधार पर प्रयास कएल जाइत अछि जे एहन व्याकरणिक नियम तैयार कएल जाय जाहिसँ सम्पूर्ण संरचनाक विश्लेषण भए सकय। व्यवहारमे पदनिरूपणक प्रक्रिया एक एहन चरणक रूपमे अबैत अछि जतए एहि नियमक परीक्षण होइत जाइत अछि। जँ बनल नियमसँ वाक्यक पदनिरूपण सही भेल अछि तँ ई एहि बातक द्योतक अछि जे एहि स्तर धरिक नियम तैयार भए गेल अछि। एही प्रकारें सम्पूर्ण भाषाक विश्लेषण आओर ओकर अनुरुप नियमक गुच्छ बनैबाक प्रक्रिये अभिकलनात्मक व्याकरणमक निर्माणक प्रक्रिया होएत।
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संदर्भिका
मैथिली
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हिंदी
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