सुजीतक गन्ध सुगन्ध छोड़ि रहल (पुस्तक समीक्षा)
साहित्य क्षेत्रमे पत्रकार सुजीत कुमार झा एकटा सशक्त कथाकारक रुपमे उभरि कऽ अएलाह अछि । दू अढाई वर्षमे हिनक पाँचम कृति सार्वजनिक भऽ चुकल अछि । जाहिमे चारिटा कथा संग्रह अछि ।
हम पाँचो किताब पढने छी । मुदा गन्ध तऽ गन्धे अछि । एहि पुस्तकमे संग्रहित सभ कथा एकसँ एक अछि । मानव मोनक सुक्ष्मतम सम्बेदनाकेँ छुने अछि । कोनहुँ सामान्यहुँ घटनाकेँ विलक्षण कथाक रुपमे सुजीत प्रस्तुत कएने छथि ।
हिनका कल्पनाशीलता अदभूत अछि एकर उदाहरण हिनक पाँचो पुस्तक पढलासँ लगैत अछि । फेर गन्धक तऽ जोड़ा नहि ।
नेपाली मैथिली साहित्यमे ओहँुना बहुत कथाकार नहि छथि जे छथिओ से पुस्तक निकालए पर ओतेक ध्यान नहि दैत छथि । मुदा सुजीत जाहि गतिसँ पुस्तक निकालि रहल छथि आ गुणवत्ताक सिढी चढि रहल छथि ओ लाजबाब अछि ।
बारहो कथामे चेचक दागबला, गन्ध, मीना कुमारी, दर्दक कथा, अनार वा ई कही कोन बढिया अछि वा खराप छुटिआएब कठीन लगैत अछि । कथा पढलापर अन्तमे तेहन अदभूत घटना वा परिवर्तन देखा दैत छथि जे हृदय आ मोनमस्तिष्ककेँ हिला दैत अछि ।
चेचक दागबलामे रेखा नामक एकटा चर्चित कलाकारक जीवनमे एकटा दर्शक अबैत अछि आ ओ दर्शक आ कलाकार बीचक उहापोह स्थितिक वर्णन एहिमे देखएमे अबैत अछि । जखन चेचक दागबला दर्शक अबैत छथि तऽ रेखा डेरा जाइत छथि आ नहि अएलापर प्रतीक्षा करैत रहैत छथि ।
आश्चर्य सन हालत रेखाकेँ रहैत अछि जकरा ओ पसिन नहि करैत छथि जकर बात हुनका आकर्षित नहि करैत जे पति सन सुन्दर चेहरा आ शरीरक मालिक नहि अछि ओ ओकर विषयमे किए सोचि रहल छथि । ओ गलत तऽ नहि छथि ? ओ टुटल भावनात्मक सम्बन्धक शिकार तऽ नहि छथि ? हुनका कोनो परेशानी आ दुःख सेहो नहि, फेर रातिमे जखन चारु दिस अन्हार पसरि जाइत अछि तऽ कोनो छोटका सन भगजोगनी हुनकर बन्द खिड़की आ गेटक भीतर रुपमे कोना आबि भुकभुकाए लगैत अछि ई बात रेखा सन प्रगतिशील आ बुधिआरि महिलाक बुझबसँ बाहर अछि ।
गन्ध कथामे मनोहर बाबू एकटा नाम चलल राजनीतिज्ञ छथि । ओ आजिवन कुमारे रहि पार्टी चलाबएकेँ सपथ लेने छथि । हुनकर जीवनमे पार्टीक कार्यकर्तासँग भेटघाटसँ लऽ कऽ संगठन विस्तार आ विकासक काज बढाएबमे लागल रहैत छथि । ४५ वर्षक उमेरमे एका एक हुनका विवाह करबाक इच्छा जगैत छन्हि । एकरे सुजीत बहुत बेजोड़ ढंगसँ कथा बनौने छथि । नव स्वाद एहि कथामे भेटैत अछि ।
मीना कुमारी गन्ध कथा संग्रहक तेसर कथा अछि । एकटा कलाकारकेँ जीवन पर आधारित कथा अछि । एकटा सामान्य व्यक्ति फेकनसँ चर्चित कलकार मीना कुमारी धरिक यात्राक बृतान्त एहि कथामे उल्लेख रहल अछि । डा. राजेन्द्र विमल तऽ नेपालक श्रेष्ठ कथामेसँ एक मीना कुमारीकेँ मानैत छथि ।
सुलेखा दीदी कथामे एकटा वच्चाक कल्पना पर आधारितसँ बेसी वच्चाकेँ सँग टोलक पिसीक काजक अनुभव एहिमे देखाओल गेल अछि ।
कोना सुलेखाकेँ एकटा लाइट म्यानसँ प्रेम होइत अछि, फेर लाइट म्यानकेँ हत्या । एकरबाद सुलेखाकेँ विवाह आ फेर दहेज उत्पीडनक नाम पर सुलेखाक हत्या ।
दर्दक कथा एहि संग्रहक पाँचम कथा अछि । जहिना नामसँ दर्द अछि पढलाक बाद आँखिसँ नोर खसा दैत अछि । प्रेमक उत्कृष्ट जादुगरी एहि कथामे देखल जाइत अछि ।
काठमाण्डूमे काज करएकेँ क्रममे एकटा मैथिल युवककेँ एकटा गुरुङ्ग महिलासँ भेट होइत अछि आ फेर प्रेम एकर बाद विछोड़ फेर ओ युवककेँ वेलायतमे एक महिला संग विवाह । फेर वर्षो बाद जखन सुमित नामक ओ युवक काठमाण्डू घुरैत छथि तऽ फेरसँ नगिना नामक महिलाक खोजी करैत छथि जकरासँग विचोड़ भऽ बेलायत चलि गेल छलथि ।
कथाक अन्तमे लिखल अछि म्यानेजर बुझए चाहैत छल नगिना केँ अछि ? आ सुमितकेँ हुनका सँग की सम्बन्ध छल ? भड़ल आँखि सँ म्यानेजरकेँ विदा लैत सुमित कहलन्हि,‘ की करब ई बुझि कऽ ई हमर दर्दक कथा अछि जे हमरे सँग जाएत ।’
अन्तिम साँझ कथा एक परिवारक कथा अछि । जाहिमे एक पति पत्नी छथि, हुनका एकटा लड़का आ लड़की अछि । माय सेहो अछि । एकटा परिवारकेँ जीवनमे आएब जटिलताक विषयमे बहुत सुन्दर सन प्रस्तुती एहिमे भेटैत अछि ।
पोष्टमार्टम कथामे एकटा पत्रकार महिलाक उच्च आकंक्षा आ एकर परिणामकेँ पोष्टमार्टम कएल गेल अछि ।
वर्तमान समयमे एहन घटना बराबर देखएमे अबैत अछि । कथ्यक दृष्टिसँ कोनो नव नहि मुदा प्रस्तुती दोसर कथाकारसँ एकरा फरक बना देने अछि ।
अनार कथा लाजबाब बनल अछि । एकटा महिलाक पीड़ा एहिमे देखाएल अछि । एकटा गरीबिकेँ बढिया जेकाँ अनुभव एकरा माध्यमसँ कहल गेल अछि ।
इम्हर गाछ बढि रहल अछि उम्हर गर्वमे कोनो आकार लऽ रहल अछि । दुलरी सतर्कता अपनारहल छथि । शिशु सकुशल अपन गर्वकाल पूरा करए आ अनार खुब फल लगए । एहि कथाक अन्तमे एकटा बात उल्लेख अछि जे देहकेँ सिहरा दैत अछि । जखन दुलरीकेँ अनार मालिकक बेटा तोड़ि दैत अछि तऽ फुसलाबए लेल मलिकानि दोसर अनार दैत छथि मुदा दुलरी लेब स्वकार नहि करैत छथि । हुनका मोनमे अबैत अछि कुरुपे सही, अपन वच्चा कोनो माय अन्य सुन्दर वच्चासँ नहि बदलैत अछि । सर्वनाशक दर्द लऽ दुलरी अपन घरमे चलि अबैत छथि ।
बोझ कथामे वृद्धावस्थामे माय बाप कोना बोझ होइत अछि एकर बहुत मार्मिक ढंगसँ चित्रण कएने छथि ।
अपन सिन्धुली कथा माओवादी जनयुद्धकालक अवस्था मोन पाड़ि दैत अछि । जनकपुरसँ सटले रहल जिल्ला सिन्धुली माओवादी जनयुद्धकालमे केहन बनि गेल छल तकर बहुत सुन्दर वर्णन अछि ।
एगारहम कथा परिवर्तन अछि । महिलाक आगा बढएमे आबएबला अड़चनसभकेँ एहिमे देखाओल गेल अछि । एहि कथाक अन्त संयोगान्त भेल अछि । हरेक समय बाधक बनल डाक्टर शिव नारायण अन्तमे पत्नीक आगु हारि मानि लैत छथि ।
ओ सुष्मा दिस एना तकलथि जेना आब पुरान राग द्वेषसभ धोआ गेल हुए ।
शायद सुषमो इहे चाहैत छलथि ।
संग्रहक अन्तिम कथा बादल अछि । इहो परिवारक स्थितिक वा ई कही समस्याक रेखांकित करैत अछि ।
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जगदानन्द झा ‘मनु’- ग्राम पोस्ट – हरिपुर डीहटोल, मधुबनी
अनमोल झा जीक पोथी “