विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका · VIDEHA · ISSN 2229-547X

मायानंद मिश्रक ‘मैथिली साहित्यिक इतिहास’

आशीष अनचिन्हार · 2014-11-01 · अंक 165

मायानंद मिश्रक "मैथिली साहित्यिक इतिहास"
स्व. मायानंद मिश्रजीक लिखल पोथी "मैथिली साहित्यिक इतिहास" जे की 2014मे प्रकाशित भेल अछि तकर पृष्ठ 243पर लिखल अछि--" अभिव्यंजनावादी काव्यक उत्तरार्धमे एकटा नवीन गीत प्रवृतिक जन्म भेल अछि जे अछि गीतलक परम्परा जकरा भ्रमे गजल कहल जाइछ जकर जन्मदाता मैथिलीमे जीवन झा छथि-----। एहि धाराक मुख्य कवि गीतकार छथि मायानंद मिश्र, रवीन्द्रनाथ ठाकुर, कलानंद भट्ट, डा. महेन्द्र, सरस आदि"। हमरा जनैत एहि पाँतिक लेखक मायानंद मिश्रजी नै छथि कारण पृष्ठ संख्या 206पर माया बाबू जीवन झाजीक प्रसंगे लिखने छथि " ई महेशवाणी ओ भास गीतक संगहि प्रथम-प्रथम गजल रचना कयल"। प्रश्न छै जे पृष्ठ 206पर जे गजल कहा सकैए से पृष्ठ243पर किएक नै ? ई भ्रमक उल्लेख पृष्ठ 206पर हेबाक चाही छल। ओना बहुत आदमी कहि सकै छथि जे माया बाबू अपन पूर्वमतक खंडन केलाह अछि। कहब बहुत सोंझ होइत छै कारण भारतमे लोकतंत्र छै मुदा साबित केनाइ बहुत कठिन कारण ओइमे मेहनति लागै छै। ओनाहुतो जे गजल ओ कथित गजलक अध्येता छथि से जानै छथि जे ऐ पोथीसँ पूर्व माया बाबू एहन कोनो लिस्ट वा चर्चा नै केने छथि। ई लिस्ट पहिले पहिल ऐ पोथीमे आएल अछि हमरा जनैत ( जँ हम गलत छी लेख अवश्य उद्धृत कएल जाए)। आब कने 9 फरवरी 2014मे दरभंगासँ प्रकाशित दैनिक मिथिला अवाजमे आशीष अनचिन्हारक गजल संबंधी आलेख " मैथिली गजलमे लोथ गजलकारक भूमिका देखल"जाए। ओहि आलेखमे स्पष्ट रूपें साबित कएल गेल छै जे माया गुट ओ सरस गुट केर कथित रचना गजल नै गीतल श्रणीमे अबैए। ऐ लेखसँ पहिने सरस गुट केर सभ कथित गजलकारक रचनाकेँ गजल मानल गेल अछि। मुदा प्रथमतः 9 फरवरी 2014मे ऐ भ्रमकेँ तोड़ल गेल। आब कने ऐ पोथीमे देल गेल भूमिकाकेँ देखू जे की भीमनाथजी द्वारा लिखल गेल अछि आ 23 फरवरी 2014केँ लिखल गेल अछि। आब ईप्रश्न उठैत अछि जे जँ पृष्ठ संख्या 243परहँक अंश माया बाबूक लिखल नै छनि तँ किनकर लिखल छनि। उत्तर अनिर्णीत अछि मुदा जँ 9फरवरी 2014मे प्रकाशित आशीष अनचिन्हारक लेख ओ माया बबू किताबक उक्त पोथीमे देल तथ्यकेँ मिला कऽ अनुमान कएल जाए तँ कहल जा सकैए जे भीमनाथ झा जी ओइ अंशकेँ लिखने छथि संगे-संग ऐ पोथीक आर बहुत रास तथ्यमे संशोधन केने छथि। जखन कोनो अपराधी अपराध करै छै तखन ओ सबूत मेटेबाक प्रयास करै छै जैमे ओ मात्र 99 प्रतिशत सफल होइ छै। भीमनाथ जी संशोधन केलाक बाद अपन भूमिकामे पृष्ठ 6-7पर लिखै छथि जे--" लेखक ऐहि ग्रंथकेँ सम्पन्न कयलनि 1990 ई.मे।------- ठाम ठीम परिशोधनक सेहो इच्छा रहल होनि। मुदा ओहि लेल पलखति नहि भेटलनि।--------- तें ई ग्रंथ ठीक ताही रूपमे आयल अछि जाहि रूपमे प्रथम लेखन कऽ लेखक राखि देने रहथिन"।---- एकर मतलब जे ई पोथी 1990मे सम्पन्न भेल आ बिना कोनो संशोधनकेँ 2014मे प्रकाशित भेल। मुदा आदरणीय भीमनाथजीक उपरक मंतव्यक खंडन ऐ पोथीमे जत्र-कुत्र छिड़िआएल अछि। विशेष नै कहि पृष्ठ 286पर चली जतऽ 1991मे डा. रामदेव झाजीकेँ साहित्य पुरस्कार भेटबाक वर्णन अछि। जँ 1990 आ 1991केँ सम मानी तैयो ओही पृष्ठपर रामदेवजीकेँ सेवानिवृति घोषित कएल गेल अछि जे 1990
के बहुत बादक घटना अछि विशेषतः 1996-1998 लगीचक। तेनाहिते पृष्ठ 287पर प्रभाष कुमार चौधरीजीक मृत्युक सूचना अछि। आब ई कहू जे 1990मे प्रभाषजी कोना मरि गेलाह। हुनक मृत्यु तँ 1998मे भेल छनि। उपरक ऐ बहुत रास महत्वपूर्ण संशोधन सभसँ ई साबित भऽ जाइए जे माया बाबूक मृत्युक बाद आ ऐ पोथीक प्रकाशित हेबासँ पहिने बहुत रास मन इच्छित संशोधन कएल गेल छै आ से संभवतः भीमनाथजी केने छथि। आब दू टा प्रश्न उठैए पहिल जे भीमनाथजी ई संशोधन किएक केलाह आ दोसर जे हुनकासँ ई गलती कोना छुटलनि। पहिल प्रश्नक उत्तर सद्यः अछि जे ई संशोधन माया बाबूक गजल संबंधी अक्षमताकेँ झपबाक लेल कएल गेल अछि। चूँकि वर्तमान
समयमे गजल संबंधी सभ निष्कर्ष सभकेँ बूझल छनि तद्अनुरूप माया बाबूक नीक छवि बनेबाक लेल ई काज कएल गेल। एकर सबूत पोथीक पाछू बला कवरमे मायाबाबूक परिचयसँ भेटत। उक्त परिचयमे "अवान्तर"केँ कविता संग्रह घोषित कएल गेल छै जखन की माया बाबू अपने एकरा गीतल बाहुल्यक कारणें "गीतल संग्रह" कहने छथिन्ह। हमरा बुझने सायास आ सुनियोजित ढ़ंगे ऐ पोथीमे संशोधन कएल गलै जकर उद्येश्य छल माया बाबूक गजल संबंधी अक्षमताकेँ झाँपब जे की अंततः सफल नै भेल। आब दोसर प्रश्नपर चली मूलतः ई भीमनाथजी जानि बूझि कऽ कएल गेल गलती नै अछि बल्कि ई तँ हुनक बिनु पढ़ने किछु लीखि देबाक हिस्सक बुझाइत अछि। हमर देल गेल तथ्यसँ ई स्पष्ट होइत अछि जे माया बाबू ऐ पोथीकेँ 1998-99सँ शुरू कऽ मृत्यु धरि लिखला मुदा भीमनाथजी अपन हिस्सकक अनुसार ऐ पोथीकेँ नै पढ़ला जकर परिणाम भूमिकामे स्पष्ट अछि। माया बाबूक ऐ पोथीक बहन्ने भीमनाथजी द्वारा लिखल सभ भूमिका, आलोचना, समालोचना,समीक्षा केर अध्य्यन हेबाक चाही आ देखबाक चाही जे कहीं ईहो सभ बिनु पढ़ने तँ नै लिखल गेल अछि।
ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ।
डॉ. शिव कुमार प्रसाद-

Suggested citation: आशीष अनचिन्हार. “मायानंद मिश्रक ‘मैथिली साहित्यिक इतिहास’.” Videha — First Maithili Fortnightly eJournal, issue 165, 2014-11-01. https://www.videha.co.in/research/2014/165/मायानंद-मिश्रक-मैथिली-साहित्यिक-इतिहास.htm

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