विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका · VIDEHA · ISSN 2229-547X

मधुपक गीत अमर, मिथिलामे

जगदीश चन्द्र ठाकुर ‘अनिल’ · 2015-01-01 · अंक 169

जगदीश चन्द्र ठाकुर ‘अनिल’
मधुपक गीत अमर,मिथिलामे
‘मधुप’जीक नाम सुनिते मोन पडि अबैत अछि हुनका द्वारा लिखल कतेक पांती सभ :
‘ओ घसल अठन्नी बाजि उठल हम कत’ जाउ....’
‘सुरुज डुबैत भैया केर ताकि बटिया
बहि गेल कमला बलान हे...’
‘हम जेबै कुसेसर भोर, रंगि क’ ठोर....’
‘कलबल कें भोरे-भोरे ई कोमलांगी औंघेले एली
चौंकि चुप्पे...’
मधुपजीक साहित्य-संसारक एक अवयव गीत मात्रपर एखन चर्च क’रहल छी ।
सिनेमाक गीतक भासपर मधुपजीक गीत सभ ‘टटका जिलेबी’ आ ‘अपूर्व रसगुल्ला’नामक पुस्तिका मे प्रकाशित होइत छल । बादमे ‘चौंकि चुप्पे’ नामकसंकलन-पोथीमे बहुत रास गीत सभ आएल। ई गीत सभ बहुत लोकप्रिय भेल । पढल-लिखल लोक आ अनपढो लोक सभ गायक लोकनिसं फरमाइस क’क’मधुपजीक गीत सुनैत छलाह आ आनन्दित होइत छलाह ।
मधुपजीक श्रृंगारोक गीत सभ स्तरीय रहैत छलनि ।
मैथिल युवा-युवतीवर्गमे सिनेमाक गीतक प्रभावक विरुद्ध मधुपजीक गीत सभ एकटा सशक्त हस्तक्षेप छल । सिनेमाक गीतक धुन केहनो हो ओकर भासपर मैथिलीमे गीत लीखि देब मधुपजी लेल सहज आ स्वाभाविक होइत छलनि। मधुपजी एहि तरहक गीतक रचना कए मैथिलीक लोकप्रियता बढौलनि। गीतमे बिम्ब मौलिक रहबाक कारण गीतक अपन आकर्षण होइत छलैक जे जन-सामान्यक कण्ठमे स्थापित भ’ जाइत छल। एकर अतिरिक्त सोहर,समदाउन, लगनी, उदासी आदिक भासपर सेहो नव गीत लीखि ओहि भास सभमे नवजीवन,नव उर्जा भरलनि ।
मधुपजी डेढ हजारसं बेसी विविध गीतक रचना केने छथि ।
ई गीत सभ निम्नलिखित छोट-पैघ आठ टा पुस्तकमे प्रकाशित भेल अछि :
1.अपूर्व रसगुल्ला
2.टटका जिलेबी
3.पचमेर
4.गीत मंजरी
5.चौंकि चुप्पे
6.बटसावित्री
7.बिदा गीत
8.बोल बम
गीतक अप्रकाशित पोथी सभ निम्नलिखित अछि :
1.विनयांजलि
2.दुलहा रे नंगटे नाचय
3.गंगा गीतामृत
एकर अतिरिक्त दुर्गा सप्तसतीक अनुवादक पोथी ‘दुर्गा सप्तसती मैथिली सुधा’मे तेरहो अघ्यायक आरम्भमे एक-एकटा घ्यान गीत छनि।
मधुपजी अपन आत्मगीतक शीर्षक रखलनि ‘मधुचक्र’जाहिमे करुणाक प्रवाह अनुपम अछि ।
गीत सबहक वर्गीकरण मुख्यतः 4 भागमे क’ सकैत छी :
1.श्रृंगार
2.करुणा
3.भक्ति
4.अन्य-सामाजिक सरोकारक गीत ।
मधुपजी सभ देवी-देवता पर गीतक रचना केने छथि जकर संख्या 500 सं कम नहि छनि । सभसं बेसी गीत शिव पर छनि ।
26 टा गीत राम पर छनि ।
सामाजिक विषमता पर लिखल गीतक संख्या सेहो बहुत छनि ।
मधुपजीक गीतक सम्बन्धमे किछु समीक्षक लोकनिक मत एहि प्रकारें व्यक्त कएल गेल अछि :
प्रो. रमानाथ झाक अनुसार :
‘मधुपजीकें गीत रचनामे प्रकृष्टता प्राप्त छैन्हि,किन्तु हिनक गीतक लोकप्रियता भाव-भाषाक सरलता ओ स्वाभाविकतापर आधारित नहि अछि, लोकप्रियताक कारण थिक ओकर संगीतात्मकता एवं िचत्रात्मक होएब। ई नव-नव लय, नव-नव तर्ज पर रचना करैत रहैत छथि जे हिनक रचनामे अन्तर्भूत कृत्रिम भाव-विन्यासक आवरणक कार्य करैत अछि,दोषकें झांपि दैत अछि।’
रमानाथ बाबू आगां लिखैत छथि : ‘लोकगीतक पहिल धर्म थिक सहजता ओ स्वाभाविकता। से रहनहि साधारण जनताक बीच ओकर प्रवेश भ’ सकैछ। आ ई तत्व मधुप प्रणीत लोकगीतमे प्रचुरतासं प्राप्त अछि।’
मधुपजीक शिव विषयक लोकगीतक प्रसंगमे शैव साहित्यक समर्थ समीक्षक डा.श्री रामदेव झा कहैत छथि :
‘मधुपजी नवीन-नवीन लय, छन्द ओ भावखण्डकें आधार बनाय शिवगीतक रचना करैत रहलाह अछि ।.....कीर्तनक हेतु उपयुक्त ढोल-झालिपर गेय धुनि सभक पद्धतिपर बहुतो शिवगीतक रचना कयलनि अछि। महिला कण्ठमे, गाम-गामक कीर्तन मण्डलीमे, गायक ओ नटुआ सभमे, ग्रामीण नाटकक रंगमंचपर, स्कूल कालेजक छात्रगण द्वारा आयोजित सांस्कृतिक समारोहमे मधुपजीक शिवगीत सुनल जा सकैत अछि ।’
मैथिली साहित्यक इतिहास लेखक डा.दुर्गानाथ झा ‘श्रीश’क अनुसार :
‘शिल्पक क्षेत्रमे मधुपजी लोकगीत काव्यक सरल भाषा शैलीक अतिरिक्त चमत्कारपूर्ण आलंकारिक भाषा शैलीक सेहो प्रयोग कएल जाहिमे मुख्यतःचमत्कारपूर्ण अनुप्रास ओ यमकक पाण्डित्यपूर्ण शब्द विन्यासक छटा दिस कविक विशेष ध्यान अछि। किन्तु मधुपक सर्वश्रेष्ठ ओएह रचना थिक जे सरल सहज भाषामे लिखल गेल अछि ।’
डा. व्रज किशोर वर्मा ‘मणिपद्म’ लिखैत छथि :
‘मधुपजीक अन्तर-वीणा मने कोनो नीक धुन सुनितहि झंकृत भ’ उठैत छनि्। ओइ झंकारकें ओ तखनहि मैथिलीक गीतपंक्तिमे बान्हि दैत छथिन ।.....ओना धुन जे अरबधि क’ मांगल-चांगल होइ, किन्तु गीतक बिम्ब रहैत छैक मौलिक। ई लोक जीवनक क्षणकें साकार क’ दैत छैक आ नटुआ-सुलभ छैक। एहेन गीत सभमे जेना मधुपजी पुरान धारक मैथिली-चिन्तनक तटपर साधना कयने होथि।’
डा.प्रेम शंकर सिंहक अनुसार :
‘कविचूडामणि मधुप नवगीतकारक आदि गुरु कहल जा सकैत छथि। आधुनिक तर्जपर लिखल मधुपजीक गीत विद्यापतिक उपरान्त सर्वाधिक लोकरंजन कयलक।’
श्री कुलानन्द मिश्रक मत छनि :
‘निश्चित रुपसं गीतकारक रुपमे मधुपजी सभसं अधिक सफल भेल छथि। मधुपजीक गीतकार हुनक कविक स्थापनामे सहायक भेलनि ।.....ई स्पष्ट थीक जे जं हुनक गीत रचना सभ लोकप्रिय नहि भेल रहितनि तं हुनक कवि व्यक्तित्वो एतेक आदरणीय किंवा व्यापक नहि भेल रहितनि।’
युवा वर्गक बीच मैथिलीक आकर्षणमे निरन्तर वृद्धि करैत रहबाक लेल मधुपजी फिल्मी गीतक धुनपर गीत लीखि क’ छोट-छोट संकलनमे कम पाइमे गायक,पाठक आ मैथिली प्रेमी लोकनिक बीच उपलब्ध करयबाक प्रयासमे लागल रहलाह। ओ एकर चिन्ता नहि केलनि जे एहि लेल विद्वान लोकनिक प्रतिक्रिया केहेन हेतनि ।
मधुपजी गीतक अतिरिक्त मुक्तक काव्य, कथा काव्य, प्रबन्ध काव्य, संस्मरणात्मक काव्य, प्रशस्ति काव्य, शोक काव्य,अनुवाद आदिसं मैथिली साहित्यक भण्डार भरलनि जाहि लेल विभिन्न संस्था द्वारा प्रशंसित आ पुरस्कृत सेहो कएल गेलाह । मुदा जं मात्र गीते लिखने रहितथि तइयो मिथिलाक जनमानसमे आ जन सामान्यक कण्ठमे अमर रहितथि ।
हमरा आदरणीय श्री ‘अमर’जीक निम्नलिखित कथन नीक लगैत अछि ‘
‘.....यद्यपि गोविन्द दास झा तथा चन्दा झाक गीत सेहो जनकण्ठमे प्रचुरतासं प्रचार पौलकनि, किन्तु विद्यापति जकां जनसामान्यक कण्ठहार नहि बनि सकलनि । ताहि दृष्टिएं मधुपजीक पदकें जे लोकप्रियता प्राप्त भेलनि से हिनका ‘अभिनव विद्यापति ’ कहयबाक उपयुक्त सिद्ध करैत छनि ।
मधुपजीक मुहें हुनक गीत ‘बातरससं छी तबाह, नहि बातक रस अछि...’ सुनबाक सुअवसर प्राप्त भेल अछि कोइलखमे विद्यापति स्मृति पर्वक अवसरपर ।
ओहि अवसरपर हुनक मैथिली-प्रेमक अनुभवक स्मृति एखनहु हुनका प्रति असीम श्रद्धासं भरि दैत अछि ।
हृदयसं निकलैत अछि :
‘ कत तोर करब बडाई..’
सन्दर्भ पोथी : श्री काशीकान्त मिश्र ‘मधुप ’ पर श्री चन्द्रनाथ मिश्र ‘अमर’ द्वारा लिखित आ साहित्य अकादमी द्वारा 1994 मे प्रकाशित पोथी ।

आशीष अनचिन्हार
व्यंग निबंध
“प्र.म”
जेना जीव-जंतुक अनेक योनि होइत छै। तेनाहिते मंत्री-संत्रीक सेहो अनेक योनि होइत छै। मनुख सेहो जन्म आ मरणक चक्रमे फँसैत अछि तँ मंत्री सभज्वाइन आ रिजाइन केर चक्रमे। जेना मनुखक बहुत रास नाम होइत छै तेनाहिते मंत्रीक सेहो बहुत्ते नाम होइत छै। किछु नाम काजक अधारपर होइत छै तँकिछु शारीरिक लक्षणपर तँ किछु नाम किछुपर। प्राचीन कालमे जेना-जेना संस्कृत पसरैत गेल तेनाहिते-तेनाहिते ओकरा सम्हारब कठिन भऽ गेल। ठीक तेहनेहालति मंत्री-संत्रीक नामावलीक भऽ गेल अछि।
प्राचीन कालमे पाणिनी सूत्र रूपमे संस्कृतकेँ बान्हि देला तेनहिते आधुनकि कालमे हम अपनाकेँ नव पाणिनी मानि आइ-काल्हि मंत्री-संत्रीक नामावली प्रस्तुतकेलहुँ। आब चूँकि एखनुक समयमे केकरो लग फुरसति नै छै जे ओ सूत्रक टीका-भाष्य करत। तँए ऐठाम हम अपने टीका ओ भाष्य प्रस्तुत कऽ रहल छी(ओना सूत्र भाष्यमे बहुत रास केटेगरी छूटि जाएत जेना प्रमेह मंत्री, प्रसिद्ध मंत्री, प्रबंध मंत्री आदि तँइ आब हम अति महत्वपूर्ण नामावली सभहँक दर्शनकराबी....) ---
1) दिनक गरीब आ रातुक धनिक जकर असीमित प्रवचनसँ तृप्त होइत छथि, अथवा खाली पेट जकर परम पवित्र शब्द, धातु, अलंकार आदिसँ भरि जाएअथवा, जकर मूँहक शब्देसँ सभ समस्याक समाधान भऽ जाए से प्रवचन मंत्री भेल।
2) जे लोक समाजक नामपर अपन ओ अपन गोंतिया आदिक विकास करए, अथवा जकर शासन कालमे समाजक विकास ओ प्रगति रुकि जाए अथवादुराचारी सभहँक प्रगति हुअए से प्रगति मंत्री छथि।
3) ओहन लोक जे अपन प्रतिमा मू्र्तिकेँ बाग-बगैचा, चौराहा, आदिपर लगाबथि। अथवा, ओहन लोक जे समाजक विकासकेँ नकारि प्रतिमा आदिक निर्माणपरव्यय करए से प्रतिमा मंत्री भेल।
4) प्रति शब्दसँ सजल आन शब्दक मालिक सेहो मंत्रीक काबिल होइत छथि जेना जे लोक छाँह जकाँ मुख्यमंत्री पदक मर्यादा तेयागि कोनो युवा लड़कीक छाँहजकाँ जासूसी कराबथि से प्रतिछाया मंत्री छथि। जे लोक सदिखन प्रतिवादे टा कऽ अपन वा अपन लोकक विकास करथि से प्रतिवाद मंत्री छथि, प्रतिरोधमंत्री सेहो कहि सकै छिऐ कहबाक लेल प्रतिक्रिया मंत्री सेहो कहि सकै छिऐ। जे लोक खाली प्रतिशोध लेल बैसल रहथि से प्रतिशोध मंत्री छथि, अथवापहिलुक सोधल पद ओ खजानाकेँ फेरसँ सोधि लेथि से प्रतिशोध मंत्री छथि। ऐ खंडमे बहुत रास संभावना छै जेना प्रतिदेह मंत्री, प्रतिदान मंत्री, प्रतिदिन मंत्री,प्रतिरास मंत्री आदि-आदि। ऐठाम सभहँक भाष्य संभव नै। ओना ऐ खंडक सभसँ शक्तिशाली "प्रतिफल मंत्री" छथि। भोटक रिज्लटक बाद जनताकेँ सेहो आसत्ता-विपक्षीकेँ सेहो सभकेँ अपन-अपन कर्मक प्रतिफल भेटि जाइत छै। कियो ऐ मंत्रीक प्रकोपसँ बचि नै पाबैए आ जे बचि जाइए तकरा लेल तँ भगवान 5बर्ख देने छथिन। ऐ खंडमे प्रतिबिंब नामक मंत्री पद सेहो महत्वपूर्ण अछि। जे लोक चुनावसँ पहिने आ चुनावक बाद बिंब निर्धारणमे निपुण छथि से ऐ मंत्रीपदक अधिकारी छथि।
6) जे लोक विदेश भ्रमण कऽ खाली प्रपोज करथि आ देशकेँ रिज्लट सुन्ना भेटै से प्रपोज मंत्री बनि सकै छथि। एकरा प्रस्ताव मंत्री कहि कऽ भारतीयकरणकऽ सकै छी।
7) लोक सभा ओ विधान सभामे जे उत्तर देबाक बदला जे जनतासँ प्रश्न पूछथि आ जनताक मूँह बंध कऽ देथि से प्रश्न मंत्री छथि।
8) जे लोक जनताक बीच योजना सभहँक लाभ प्रसाद रूपें बाँटि सकथि आ अंतमे अपने ओकर पूर्ण भोग करथि से प्रसाद मंत्री छथि।
9) जे खाली प्रथम-प्रथम मने इतिहासमे अपना-आपकेँ पहिल घोषित करऽ से प्रथम मंत्री बनि सकैए। ओना ऐ मंत्री पद लेल कम्पीटीशन बहुत कड़गर छै आऐ लेल बहुत रास कोंचिग सेन्टर सेहो खुलल छै। बहुत रास लोक ऐमे सफल होइए मुदा जे पहिनेसँ साहित्यकार अछि से ऐ मंत्री पदककेँ एकै बेरक परीक्षामेपाबि लैए।
तँइ सभ क्षेत्रक अलावे साहित्यमे ऐ मंत्री पदक बहुत डिमांड छै। एकटा खिस्सा लिअ-- एकटा गाम रहै जैमे सभ साहित्यकारे रहै। मर्दसँ जनानी धरि सभसाहित्यकार। बच्चासँ बुढ़बा धरि सभ कियो साहित्यकार। ओइ गाममे सभ कम्पीटीशन लेल मरै। ओइ गाममे कियो कोनो कहियो 3 बजे भोरसँ पहिने दिसामैदान नै गेल रहै... बस एकटा बुढ़बा चारि दिन उपास कऽ कऽ पाँचम दिन भुज्जा फाँकि लेलक। आ दू बजे लोटा लऽ कऽ विदा भऽ गेल। भोरे-भोर सौंसेहल्ला भऽ गेलै जे ऐ गामक इतिहासमे फल्लाँ महाकवि पहिल बेर दू बजे दिसा-मैदान गेला।
हाले-फिलहालमे एकटा संगोष्ठी भेल जकरा कहल गेल जे मैथिलीक इतिहासमे पहिल बेर "सेब संगोष्ठी" भेल अछि। हुनके मोताबिक ऐ संगोष्ठीमे भाग लेनिहारसभ प्रतिभागी कहियो सेब नै देखने रहथिन। सभकेँ सेब देखाओल गेलै। बताएल गेलै जे सेबपर छूरी कोना चलाओल जाइत छै। कोना फाँक काँटल जाइतछै। फेर हुनके मोताबिक प्रतिभागी लोकनि पहिल-पहिल बेर सेब खेलथि। एहन- एहन बहुत उदाहरण अछि। एकटा लोकक ई बेमारी तँ बहुत उपर चलि गेलछनि। हुनका इंटरनेटपर पहिल हेबाक बेमारी छनि। आँखिक सोंझा देल सभ सबूतकेँ ओ इग्नोर कऽ दै छथि। हुनका मोताबिक ओइ समयमे हम ई नै देखनेरहिऐ तँए ई पहिल नै हएत। आब हुनका के कहतनि जे सरकार ई अहाँक आँखि आ दिमागक कमजोरी अछि। अस्तु किछु गोटेक ईहो दाबी करै छथि जेराजकमल चौधरीकेँ पहिले-पहिल हमहीं दारू पिएलियै। कियो ईहो कहै छथि जे प्रो. हरिमोहन झाकेँ पहिले-पहिल हमहीं पेशाब करैत देखलिऐ आ तखने पहिलबेर कहिलिऐ जे ई बच्चा आगू बढ़त। ई पहिल हेबाक चक्करे तेहन छै जे एकटा बालक 2009मे बनाएल ब्लागकेँ डी-एक्टिभेट कऽ कऽ घोषणा केला जे हम2007मे ब्लाग बनेने रही। औ महराज जँ बनेने रही तँ कमसँ कम लोककेँ देखबाक लेल लिंक तँ छोड़ि दितिऐ ने। कतेक कहू ओना टटका-टटकी एखनेपता चलल अछि जे एकटा युवा साहित्यकार घोषणा केला अछि जे मैथिली साहित्यमे पहिले-पहिल हमहीं अंडा देलिऐ।
हेबाक लेल तँ आरो भऽ सकै छथि मुदा जे ऐ सभहँक जे प्रधान होथि से................. ईहो लिखनाइ जरूरी छै की?
ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ।
1.डॉ. अरुण कुमार सिंह -

Suggested citation: जगदीश चन्द्र ठाकुर ‘अनिल’. “मधुपक गीत अमर, मिथिलामे.” Videha — First Maithili Fortnightly eJournal, issue 169, 2015-01-01. https://www.videha.co.in/research/2015/169/मधुपक-गीत-अमर-मिथिलामे.htm

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