विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका · VIDEHA · ISSN 2229-547X

मैथिलीक किछु समकालीन उपन्यासक विविध स्वरूप

रतन झा · 2015-12-15 · अंक 192

मैथिलीक किछु समकालीन उपन्‍यासक विविध स्‍वरूप
:: रतन झा
समकालिन मैथिली उपन्‍यासक विषयमे चर्चासँ पहिने समकालिन शब्‍दक अर्थ स्‍पष्‍ट करब आवश्‍यक अछि। समकालीनक अर्थ होइत अछि ई-काल अथवा वर्तमान-काल। मुदा ई कालखण्‍ड तँ सवयं परिवर्तनशील अछि ई सतत् आगू दिस घुसकैत रहैत अछि। ई-कालखण्‍डक अन्‍तिम क्षणकेँ तँ अखुनका क्षण सेहो कहि सकै छी अर्थात कहबाक तात्‍पर्य ई जे आब अखन जे उपन्‍यास लिखल गेल अछि, मोटा-मोटी वएह समकालीन उपन्‍यास छी।
मुदा प्रश्‍न उठैत अछि जे ऐसँ पहिने उपन्‍यास लिखल गेल, ओहो तँ ओइ समैयक समकालीन उपन्‍यास छल। अर्थात् प्रत्‍येक युगक उपन्‍यास ओइ युगक समकालीन उपन्‍यास छी।
मैथिली साहित्‍यमे उपन्‍यास विधाकेँ समृद्ध करबामे अनेक उपन्‍यासकार शिल्‍प, शैली एवं कथानक व वातावरण आ तथा सामाजिक परिवेशक वर्णनमे सफल भेल छैथ।
डा. विदित एकटा प्रयोगधर्मी उपन्‍यास ‘मानवकल्‍प’ 2008 ई.मे प्रकाशित करौलैन। मैथिली उपनरूास लेखनक पारम्‍परिक प्रवृतिसँ भिन्न ऐ उपन्‍यासमे एकटा गामकेँ पात्र बनौल गेल अछि। आन उपन्‍यासक नायकक उमेरसँ बहुत बेसी उमेर ऐ उपन्‍यासक नायक अछि। ऐ उपन्‍यासक नायकक उमेर तीन सए पचास बर्ख अछि।
बनवासी जनजीवनपर लिखल मैथिलीक प्रथम उपन्‍यास ‘विप्‍लवी बसेरा’ छी तँए मिथिलाक द्रविड समुदायक उत्‍थानक कथा ‘कोसिलिया’ उपन्‍यासमे अछि। एकटा अनाथ कन्‍याक संघर्ष ओ ओकर आत्‍मबलक चित्रण ‘करपुरिया’ उपन्‍यासमे केने छैथ। संयोग आ चमत्‍कारक अपूर्व समन्‍वय विदितजी ‘विधकरी’ उपन्‍यासमे देखेने छैथ। साहित्‍य ओ समाजक बीच जे खाधि बनल अछि तेकरा भरबाक लेल एकटा समाधान प्रस्‍तुत केने छैथ ‘परिक्रमा’ उपन्‍यासमे माए-बापक पीड़ाकेँ नीक जकॉं उभारि ओकर एकटा समाधान प्रस्‍तुत केने छैथ- ‘केकरो कहबै नहि’ उपन्‍यासमे।
वीणा ठाकुरक 2009 इस्‍वीमे प्रकाशित उपन्‍यास ‘भारती’ अछि। मंडन मिश्रक पत्‍नी ओ कुारिल भट्टक बहिन भारतीसँ सम्‍बद्ध अनेको किंवदति आइयो मिथिलामे सुनल जाइत अछि। वीणा ठाकुर ओइ विद्धान दम्‍पतिमे सुनल जाइत अछि। वीणा ठाकुर ओइ विद्वान दम्‍पतिक आधारपर बनल आलोच्‍च उपन्‍यासक लेखन केलैन अछि। ऐ उपन्‍यासमे ऐतिहासिक तथ्‍यकेँ गौण राखि अपन कल्‍पनाकेँ आधार बनौलैन अछि। मुदा उपन्‍यासक लेले जे तदनुकूल वातावरण चाही तेकर निर्माण दिस लेखिका सचेष्‍ट छैथ आ उपन्‍यासक भाषा,शब्‍दक चयन ओ ठाम-ठाम दार्शनिक मंथन युक्‍त व्‍याख्‍या सभ ऐमे सहायक भेल अछि। एकरा दार्शनिक दम्‍पतिपर केन्‍द्रित उपन्‍यासमे दर्शनक झॉंस रहब स्‍वभाविक अछि।
मुरारि मधुसूदन ठाकुरक ‘देवव्रतक आत्‍मकथा’ 2010 इस्‍वीमे प्रकाशित भेल। ऐ उपन्‍यासक नायक भीष्‍म पितामह छैथ, जिनकर आदि देवव्रत छेलैन। आत्‍म कथात्‍कक शैलीमे लिखित ऐ उपन्‍याससँ एकर लेखकक गहन अध्‍ययन ओ विद्वत सहजे परिलक्षित भऽ जाइत अछि। महाभारतक गम्‍भीर अध्‍ययनक पश्चात लिखित ऐ उपन्‍यासमे लेखक वातावरणक निर्माण ओयुगक अनुकूल पत्रोचित भाषाक प्रयोगमे अत्‍यन्‍त सफल भेल छैथ। देवव्रत अर्थात द्वापरयुगीन महाभारतक एक आबाल ब्रह्मचारी जे अपन पितृ भक्तिमे आजीवन ब्रह्मचारी रहबाक तथा हस्‍तिनापुरक चक्रवर्ती सम्राटक पदपर नहि बैसबाक भीषण प्रतिज्ञा करबाक कारण महामना भीष्‍म नामसँ विख्‍यात भेला। अविवाहित रहबाक कारणें पुत्र प्राप्‍तिक सम्‍भावनो केना होइतैन। तथापि ओ भीष्‍म पितामह संज्ञासँ आइयो इतिहासमे प्रसिद्ध छैथ। ओहन भीषण प्रतिज्ञाक प्रतिफल की भेटलैन एक जन्‍मेसँ आन्‍हर, दोसर पुत्रक मोहमे विवेको ऑंखिसँ अन्‍ध अपन एक भातिजकेँ राजगदीपर बैसा ओकर अन्न खाइत रहलाक दुआरे उद्वण्‍ड दुर्योधन, दुश्‍शासन सदृस पौत्र सबहक द्वारा होइत अनीति-अत्‍याचारकेँ ऑंखि मुनि सहैत रहबाक लेल बाध्‍य होमए पड़लैन। की भीष्‍मक प्रतिज्ञा करब उचित छेलैन? की प्रतिज्ञा करबाक समए भविष्‍यक प्रति जे सुख-समृद्धि मानसिक शान्‍ति प्राप्‍तिक कल्‍पना छेलैन से फलीभूत भेलैन?
मधुकान्‍त झाक ‘स्‍वेदजीवी’ 2008 इस्‍वीमे प्रकाशित भेल। स्‍वेदजीवी वस्‍तुत: मील मजदूर समुदायक जीवन,ओकर सामाजिक परिदृश्‍य, चिन्‍ता–समस्‍या,ओकर राग-विराग,ओकर अपेक्षा-उपेक्षाक कथा कहैत अछि। मार्क्‍स जइ श्रमिक वर्गक अधिकार लेल अबाज उठौने रहैथ आ तकर बाद ‘दुनियॉंक मजदूरएक हौउ’क जे विश्वव्‍यापी नारा पड़ल छल ताइ परिपेक्ष्‍यमे कार्य केनिहार प्रवासी मैथिल श्रमिक वर्गक जीवनक आरोह-अवरोहक तानी-भरनीसँई उपन्‍यास-कथा बूनल गेल अछि। आ स्‍वेदक अमूल्‍यता स्‍थापित कएल गेल अछि। अपन विषय-वस्‍तु, विस्‍तृत फलक एवं संवेदनापूर्ण लेखकीय दृष्‍टिक संगे एकर भाषा, शिल्‍प, अभिव्‍क्‍ति कौशल प्रवाहपूर्ण गद्य और सम्‍प्रेषणीयता एकरा हृदयग्राही आ चिर स्‍मरणीय बना दइ छै।
अन्‍तमे कहि सकै छी जे जहियासँ समकालीन इतिहास अस्‍तित्‍वमे आएल अछि तहियासँ प्रत्‍येक उपन्‍यासकेँ ऐतिहासिक उपन्‍यास कहल जा सकैत अछि। कारण कोनो नीक उपन्‍रूासमे सामाजिकता आ समकालीनता दुनू रहै छै।
सन्‍दर्भ सूची :-
1. झा विद्यानाथ ‘विदित’ मानव-कल्‍प, प्रस्‍तुति प्रकाशन दुमका- 2008
2. झा विद्यानाथ ‘विदित’ विप्‍लवी बसेरा, दुमका- 2009
3. झा विद्यानाथ ‘विदित’ करपुरिया, प्रस्‍तुति प्रकाशन दुमका- 2009
4. ठाकुर वीणा, भारती, मिथिला रिसर्च सोसाइटी कविलपुर, दरभंगा- 2009
5. ठाकुर मुरारि मधुसूदन, देवव्रतक आत्‍मकथा, नवरत्न गोष्‍ठी दरभंगा- 2010
सम्‍पर्क :
पति- श्री विकास कुमार झा
गाम : घोघरडीहा
पत्रालय : घोघरडीहा
जिला : मधुबनी
ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ।
१.कामिनी कामायनी- लघुकथा-भागमंती २.ललन कुमार कामत- किछु विहनि आ लघु कथा

Suggested citation: रतन झा. “मैथिलीक किछु समकालीन उपन्यासक विविध स्वरूप.” Videha — First Maithili Fortnightly eJournal, issue 192, 2015-12-15. https://www.videha.co.in/research/2015/192/मैथिलीक-किछु-समकालीन-उपन्यासक-विविध-स्वरूप.htm

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