जानकी आजुक जरूरत
डा. राजेश झा, दिल्ली विश्वविद्यालय
एकटा फिल्म आयल छल ‘लगे रहे मुन्नाभाई’. हमर बेटी ओकरा डीवीडी पर बार-बार देखय. महात्मा गांधीके ल’ क’ हम एकेडमिशियन सब सेहो पढैत छियै, पढ़बैत छियै, ढेर रास किताब सेहो आबि गेल छै. मुदा, गांधीजीक मूल भावनाके ई फिल्म नीक जेना राखैत छै. जेना संवाद करलक ताहिसं छोट-छोट बाल-बच्चा ओकरा बार-बार देखैत अछि. तहिना हमरा लागयये जे जानकी जेकरा सिम्बोलायिज करय छथिन, रिप्रेसेन्ट करय छथिन, जानकीके आयके मिथिलामे जरूरत अछि.
हम मानिके चलैत छी जे स्त्री सशक्तिकरणके मतलब छै जे डिसीजन मेकिंगक पावर ((निर्णय लेबक क्षमता) होबाक चाहि, ओटोनोमी होबाक चाहि आओर एकटा वर्किंग. जे गांधीक करीब भ’ सकैत छै जे परिभाषा, ओ यहि भ’ सकैत छै, जे महिलाक जे अधिकार छै, ओटोनोमी छै, ऊ ओकरा हैण्ड ओवर कायल जाय. ई होयत स्त्री सशक्तिकरण.
बहुत लोक कहैत छै जे अहाँ सभ भारतमे सरस्वतीक पूजा करैत छी मुदा अहाँ पुरुषक तुलनामे स्त्रिगनक लिट्रेसी रेट (शिक्षा दर) देखियो, तहिना लक्ष्मीक देखियो, जे धनक देवी छै, मुदा धनक अधिकार नै छै. ते ई बहुत रास बहस सोशल साइंसमे अछि. जों हम सब देवीक पूजा करैत छी ते ओकर आम महिलाक दैनिक जीवन पर की प्रभाव छै. ओकरा की भ’ रहल अछि या इम्पावरमेंट की भ’ रहल अछि. दुनू तरहक विचार अछि अहिमे. कतेक लोग कहैत अछि जे अहाँक देवीक स्वरूप द’ क’ हुनकर इम्पावरमेंट नै क’ देल जाहि रहल अछि, मुदा हुनका धोखा देल जा रहल अछि. ओतय दोसरो ग्रुप अछि जे मानैत छैथ जे ई मीथोलोजिकल स्टोरी छै या देवीक स्वरूपमे जखन पूजा क’ रहल छियै, जे हिन्दू धर्ममे एकटा ट्रेडिशन छै, देवता आ मनुष्यक बीचक दूरी काफी कम रहय छै, ओहि कंटेस्ट में कत्तो नै कत्तो सकारात्मक असर करैत छै.
हाल-फिलहाल कत्ते आन्दोलन भेल अछि जे देवीक ल’ क’ मोवलाइज करैक कोशिश कायल गेल अछि. जेना महाराष्ट्रमे शेतकारी संगठन करलक किसान आन्दोलन में. ओहि ठाम सीताक या लक्ष्मीक इमेजनरीक यूज करैत लोगके मोवलाइज केल गेल आ मांग करल गेल जे ई खेत, ई माइट, महिलाक नाम पर ट्रांसफर भ’ जाय.
गांधी के अहाँ अहिमे कतय लोकेट करब. गांधी के देखय लेल अहाँके ई समझय पडत जे ओ सोशल रिफार्मर (सामाजिक सुधारक) रहथिन. हुनका समाजके ल’ क’ की विचार रहैन. सोशल रिफार्मक ल’ क’ की विचार रहैन. इंडीविजुवलक ल’ क’ की विचार रहैन आओर कम्युनिटी क’ ल’ क’ की विचार रहै. गांधी बहुत रचनात्मक सुधारक रहथिन.
सुधार दू तरीक सं भ’ सकैत छै. अहाँ अस्तित्व बला परंपराके गारि दियो. ओहिमे अहाँके कतेक क्रेडिबिलिटी बनत, कतेक एक्सेप्टबिलिटी बनत, ई प्रश्नक विषय वस्तु छै. गांधी महसूस केलखिन जे जों अहाँ भारतमे सामाजिक परिवर्तन आनैल चाहैत छी, सामाजिक सुधर आनैल चाहैत छी, ते एकटा विख्यात कोट छैन गांधीजीके ‘इट इस बेटर टू स्वीम थ्रू द ट्रेडिशनल, इफ यू डाउन द ट्रेडिशन, यू विल डाई’.
अहाँ परंपराके मार्गदर्शन करब ते अहाँ नीक परिणाम पायब. हुनकर जे पूरा संगठन छै सुधारक उपर, हुनकर जे अप्रोच छै ट्रेडिशन के उपर, केना इस्तेमाल कएल जाय सामाजिक सुधारमे, अहिमे गांधीजी के ओहि परिदृश्यमे हमरा सबके देखय के जरूरत छै.
एकटा किताब छै, ‘थ्री हंड्रेड रामायनाज’. दिल्ली विश्वविद्यालयक इतिहास विषयमे सजेस्टेड रीडिंग में ओ छल. कोनो संगठन ओकरा पर केस करलक जे ‘थ्री हंड्रेड रामायनाज’ मे सीताजीक ल’ क’ किछु आपतिजनक गप कहल गेल अछि, ते ओकरा ओहि ठामसं हटा देल जाय. आओर सुप्रीम कोर्ट एकेडमिक काउन्सिलमे ओहि गके रिकोमेंड कएलकय जे ओहि बारेमे बताऊ जे हमरा की करबाक अछि. छह-सात घंटा ओहि पर बहस भेलय आओर जे डिसीजन भेल ओहि में ई भेल जे विभिन्न विचार-विमर्श हेबाक चाहि. मिथिलाक रामायणक सेहो दू-तीनटा वर्जन छै. जे सीताक वर्जन हम सब पढैत छी या सुनय छी, ओ एक वर्जन छै, कई आओर सेहो वर्जन छै.
हमरा बुझाबय ये जे गांधीजीक लेल सीताके एकटा रोल माडलक तरहे रहय. गांधीजी आओर रामायणक संबंध छै. गांधीजी अप्पन ओटोबायोग्राफीमे लिखने छथिन. ओ बचपनमे बड डरपोक रहथिन, भूत-प्रेत सं डरय रथिन जेना कोनो आम बच्चाके लागैत छै. हुनका कतय एकटा महिला काजवाली रहय, ओ हुनका की कहलक. गांधीजीक जीवनमे, महिलाक ल’ क’ जे हुनकर अप्रोच रहय, हुनकर जिन्दगी अहि सं बड रास प्रभावित छल.
गांधी जीक ल’ क’ ई देखय पडत. एकते हुनकर माँ, दोसर हुनकर पत्नी, पत्नीक संग जे हुनकर संबंध रहय, ओ बहुत ट्रांसफॉर्म भेलय, समयक संग. तेसर रामायण या रामनामासं जे हुनकर लिंक रहेन. महिला काजवाली रहय, जिनकासं हुनका बेसी प्रेम रहल. ओ कहलखिन जे अहाँके डर लागय ये ते अहाँ रामनामा का पाठ करू. ओहि सं हुनकर रामायणसं लिंक शुरू होयत छै. ओ मानैत छथिन जे तुलसीदास द्वारा रचित जे रामचरितमानस अछि, भक्ति के जे लिटरेचर छै. ओहि में सर्वोत्तम छै. एकटा खास ट्रेडिशन के प्रति, एक खास इंटरप्रेटेशन के प्रति, गांधीजीक आयडिया रहैथ. सीतजसं हमू सब पर्सनली लिंक छी. सीतक कहानी हम सब नेनासं सुनैत छी, हुनकर अपील जे छै, त्याग जे छै, पवित्रता जे छै तकर बादो अइयो मिथिला मे सेक्स निर्धारण होयत छै, ई बंद हेबाक चाहि. तखने गांधी और सीताजीक ख्याल पारब सत होयत.