बाट देखाबैक अछि मिथिलाक दर्शन
प्रोफ़ेसर मनीन्द्र नाथ ठाकुर, जेएनयू
हम तीन गप कहेल चाहैत छी. पहिल गप गांधी क’ ल’ क’ जे गांधी के आय कोना देखैक जरूरत अछि, दोसर गप मिथिलाक ल’ क’ आ मिथिलाक संस्कृतिक ल’ क’ आओर तेसर गप वैदेही क’ ल’ क’. गांधीक जे बात महत्वपूर्ण आजुक तारीखमे अछि से ई नै जे गांधी शांतिक पुजारी छल बल्कि ई जे गांधी शांतिपूर्वक युद्धक पुजारी छल. गांधी संघर्षक पुजारी छल आ हुनकर कहब छल जे संघर्ष शांतिपूर्वक करहि के जरूरत अछि. दोसर गप जे ओ आत्मालोचनाके महत्वपूर्ण मानैत छलाह. ओ लगातार समीक्षा करैत छल जे समाजके, अपना आपके. ई दू गप गांधीजी के सभटा नेतृत्वसं फराक करैत अछि.
अहाँ सब ‘गांधी’ फिल्म देखने होयब. फिल्ममे गांधी दक्खिन अफ्रीकासं जखैन आबैत छथिन, ते बड रास नेता बैसल छैथ आ हुनकर बाट जोहि रहल अछि. जिन्ना साहेब बैसल छैथ, नेहरूजी बैसल छैथ आ गांधीजीक ल’ क’ गप क’ रहल छैथ जे कियो गांधी आयल अछि आ ओ आबय बला अछि. आ ओ आबि जाय ते हम सब गप शुरू करि. गांधी आबैत अछि आध धोतीमे आ पहिल काज ओ करैत अछि जे, जे वेटर ट्रे मे चाह दैक लेल आबैत अछि ओकरा सं ट्रे अप्पन हाथ के ल’ लय छथिन. संगे कहैत छथिन कि जा धरि अपना आ एकरा सबमे बराबरी नै होयत तक धरि हम अंगरेजी सबहक बराबरी नै क’ सकब.
ई हमरा लागैत ये जे गांधीक ये सही स्वरूप अछि. सामाजिक परिवर्तनक लेल मुक्तिके जे बिगुल शांतिपूर्वक संघर्षक लेल ओ बजैने छथिन, यहि गांधीजीक असली रूप अछि. आओर अहि असली रूपक एकटा खास आयाम अछि जे हुनका मिथिलासं जोड़ैत अछि. ओ खास आयाम अछि जे हुनकर आत्मक ल’ क’ जे आयाम अछि.
कोनो लोक राजनीति तौर पर कोना भ’ सकैत अछि जे ओ निराधार सेल्फलेस भ’ जाय. जे लोक राजनीति क’ रहल अछि, हुनका मालूम होयत जे अहाँ आन्दोलन क’ रहल छी ते ई नीक गप अछि, पढ़ा रहल छी ते नीक गप अछि मुदा जहिना अहाँ राजनीतिमे आयलहुं, अहांके सभटा बुराई लोकक आगू आबि जायत. एतेक बेसी कम्पीटीशन अछि, एतेक आब्सेसिव सेन्स अछि जे ई सदिक्खन देखैर अछि जे कत्तो हमर अपमान ते नै भ’ रहल अछि, कत्तो हमर सम्मानमे कमी ते नै भ’ रहल अछि. सभटा मौका पर देखय के कोशिश करैत छै जे पावरक सही बैलेंस बनि रहल अछि की नै.
गांधीजी कोना अहिसं निकल? गांधी के ई बुझा गेल छल जे यात्रा जतेक बाहर अछि, ओतबे अन्दर सेहो अछि. एकर समझ जों पूरा दुनियाक फिलासफीमे कत्तो सं आबैत अछि ते ई मिथिलासं आबैत अछि. आ एतय सं हम अहाँके मिथिला ल’ जायब.
जे नाम वैदेही पडल अछि तकर पाछू विदेहक पूरा खिस्सा अछि. अहाँ जानैत छी जे अष्टावक्र बड कम उम्रक बड पैग फिलासफर छल. हुनकर देह चारि ठामसं मुड़ल छल. ओ विकलांग छल. ओ जनक सं भेंट करय लेल जायत छल ते हुनका गेट पर रोकि देल गेल. ओकरा पाछां नम्हर खिस्सा अछि, जे हम नै कहब.
ओ अष्टावक्र क्या भेल छलाह? जखैन ओ अप्पन माँक पेटमे छल तखन हुनकर माँ वेदक आलोचना करैत छल. तब हुनकर पिता बाजलखिन जे अहाँ के भीतर जे अहाँक बेटा अछि, ओ अहाँक संग गड़बड़ क’ रहल अछि. ते ओ हुनका शाप द’ देलखिन आ ओ अष्टावक्र भ’ गेलखिन. एकर मतलब ई जे ओहि कालमे वेदक आलोचना संभव छल.
जखन ओ जनकक दरबारमे पहुँचलाह ते पहिने ते बहार सं भीतर नै आबय देलक. सब बाजय लागल जे ई नेना अछि, अन्दर कोना जायत. तखन ओ एकटा श्लोक पढलक ते लोक के लागल जे ई कोन लोक छियै? प्रवेश भेटल. अन्दर गेल ते दरबारी सब हुनकर शरीरके देखिके हँसैत लागल. ओ बाजलखिन जे हम ते सोचने छलहुं जे एतय विद्वान लोक बैसल अछि मुदा एतय ते चर्मकार लोक बैसल अछि आ देखि रहल अछि जे हमर चर्म उपयोगमे आबि सकैत छै या नै. फेर ते हंगामा मचि गेल.
ओ ओत्ते क्या गेल छल, ओकरो एकटा खिस्सा अछि. ओ दरबारमे बाजलखिन जे हम ओहि लोकसं भेंट करय लेल आयल छी जे अपना आपके विदेह कहैत अछि. विदेहक मतलब होयत अछि जेकरा अप्पन देहक सुध नै हुए. ओ देखलखिन जे राजा जनक दू स्त्रीगनक अर्धनग्न देह पर हाथ राखने अछि, ते हुनका आओर तामस चढ़ल.
मुदा ता धरि ओ देखलखिन जे नीचां आगि जलि रहल अछि आ पइर आगक उपर अछि. तकर बाद राजा जनक आ अष्टावक्रक बीच संवाद होयत अछि, जेकरा अष्टावक्र गीता कहल जायत अछि. अष्टावक्र गीताक ल’ क’ लोक कहैत छथिन जे माइंड आ बॉडी रिलेशनक ल’ क’ ई दुनियाक सबसं पावरफुल टेक्स्ट अछि. माइंड आओर बॉडी रिलेशनक प्रॉब्लम पश्चिमी देशमे भेल, जतय शरीर आ मनके अलग-अलग करल गेल आ कहल गेल जे शरीरक विज्ञान पूरा विकसित भ’ गेल अछि मुदा मन क’ ल’ क’ हुनका सबके किछु बुझयमे नै आयल.
ताहि सं सविताजी कहि रहल रहथिन जे एहन फेमिनिज्म विकसित भेल जाहिमे महिलाके सिर्फ देहक रूपमे देखला जा रहा अछि. ई नै बुझल जा रहल अछि जे ओकर पूर्णता की अछि? अष्टावक्रमे ओ डिबेट बड पावरफुल तरीकासं आयल अछि. आ हम ई मानैत छी जे कोनो डिबेट ता धरि नै होयत अछि जा धरि समाजक अन्दर डिबेट नै होयत अछ्ही. निश्चित रूपसं मिथिलाक समाजमे अहि तरहक डिबेट चलि रहल होयत, एकर कतेक रास उदाहरण अछि.
याज्ञवल्क्य जखन अप्पन पत्नी सं बाजल जे हम संन्यास पर जा रहल छी आ आब सभटा संपत्ति अहाँके अछि. अहाँ एतय आराम करू ते ओ की बाजल रहथिन. ओ कहलखिन छल जे अहाँ ई कोन गप क’ रहल छी. हम संपत्ति ल’ क’ की करब? की हमरा सन्यास लेबाक अधिकार नै अछि? की हमरा मुक्त हेबाक अधिकार नै अछि? पूरा तरहे माइंड आ बॉडी रिलेशन पर ई डिबेट चलैत अछि जे कोंसेसनेसक कोन लेवल पर मुक्त भ’ सकैत छी. चेतनक स्तर पर हम कोना मुक्त भ’ सकैत छी.
गांधी हमर ख्यालसं चेतनाक लेवल पर मुक्त हयके गप करय छथिन, जेकरा बादमे कतेक मार्क्सवादी चिन्तक सेहो कहने अछि. ओ काउंट हेजेमोनीक गप करैत छथिन. ओ कहैत छथिन जे पहिने अहाँ अप्पन अन्दर सोचू जे अहाँ मुक्त भ’ गेल छी. जों अहाँ अपना अन्दर सोचि लेलहुं जे अहाँ मुक्त छी ते बाहरसं अहाँके कियो गुलाम नै बना सकैत अछि. आ ई सोचय बला गप अछि जे ई अप्पन चेतनाक अन्दर पहुंच सकैत अछि की नै? की हम सामाजिक तौर पर गुलाम भेलाहक बादो मानसिक तौर पर मुक्त भ’ जाय.
हमरा लागैत अछि जे ई मिथिलाक संस्कृतिक एकटा पार्ट रहल होयत. हम किछु आओर शोध क’ रहल छी आया ओकर बाद हम ठीकसं अहाँ के कहि सकब जे आब ओ चेतना ओतय अछि या नै. मुदा निश्चित रूपसं ई संस्कृतिक पार्ट रहल होयत.
अहि तरहक संस्कृतिमे स्त्री विमर्शक गप भ’ सकैत अछि. हमरा लागैत अछि जे गांधी ओहिसं प्रभावित छल. निश्चित रूप सं कहब कठिन अछि मुदा गांधीक जों हम देखी, जे गप राजेशजी सेहो कहने अछि जे गांधी के अहि गपक क्रेडिट देबाक जरूरी अछि जे ओ बड पैमाना पर स्त्री के घरसं निकलि के राजनीतिक बना देने छल. ओहि काल हुनका सभके राजनीतिक बना देलक जखन भारतीय समाज अलग-अलग प्रथासं मुक्त भेल छल. ओहि काल ओ बड पैमाना पर महिला सभके घरसं बाहर निकललक आ ई डिबेट ओहि काल जरूर चलैत होयत जे हुनकर चरित्र की अछि. महिला पहिल बेर घरसं बाहर निकलि रहल छल ते हुनका दोसर पुरुख सं संपर्क होयत ते संबंध केहन बनि रहल अछि. गांधी अहि सब चीजसं वाकिफ होयत ताहि सं गांधी ओहि मूल्य दिस ध्यान द’ रहल होयत, जाहि मूल्यक ल’ क’ रेडिकल फेमिनिस्ट कहैत अछि जे ई गांधी कंजर्वेटिव छथिन आ एंटी-वुमेन छथिन.
हमरा ख्यालसं गांधी मिथिला संस्कृतिसं एकटा अल्टरनेटिव फेमिनिज्म ल’ क’ आबै छथिन. जे क्रांतिकारी अछि, मुदा श्रेष्ट अछि. जे तर्कपूर्ण अछि, जे चीजके आसानीसं नै मानैत अछि, मुदा संबंधके सम्मान करैत अछि. ओ फेमिनिज्मके बुझैत अछि जे ओहि में शायद पावर रिलेशनशिप अछि, शायद हमरा इन्फेरियर बुझल जा रहल अछि तकर बादो हम अहि संबंधके माथ पर राखैत छी. मिथिलामे फिलोसिफिकल ट्रेडिशनक पार्ट रहल होयत. गांधी ओकरासं बड रास चीज सीखैत छल.
गांधीक सीखैक टेक्सचुअल प्रमाण खोजब ते पोलिटिकल साइंसटिस्टक तरहे ई भेटब बड कठिन होयत. गांधीजी कुरआन सं बड किछु लेने अछि मुदा ई भेटब बड मुश्किल अछि. जों अहाँ गांधी आ कुरआनके पढब ते लागत जे गांधी ते कुरआनक नीक अध्येता अछि. बाइबिलसं सेहो ओ बड किछु लेने अछि.
ओना गांधी जे ज्ञान यात्रा भारतमे केने अछि, हमरा सभके समाजके बुझैक लेल ई ज्ञान यात्रा करबाक चाहि. गांधी जे ज्ञान यात्रा केने छल, जाहि संस्कृतिके पकडैक कोशिश केने छल, हमरा लागैत अछि जे ओहिमे मिथिलाक अहि तथ्यके ओ राखने छल.
जे वैदेहीक संस्कृति छल, जेना पंकज मिश्रजी कहलक जे ओना देखयमे लागैत अछि जे ई केहन महिला अछि, जे सबटा गप मानि लैत अछि, चलि गेल वनवास, घुरिके आयल, ओकरा निकालि देल गेल, बाहर चलि गेल, धरतीमे समा गेल. ई जे ‘हाईट ऑफ़ सबमिशन’ अछि, ‘हाईट ऑफ़ पेट्ररिकल ओपरेशन’ अछि, हमरा लागैत अछि जे एकर बादो कोनो बेर वैदेही तर्कके नै छोड़लक आया क्षमा के ते आओर नै छोड़लक. रामके सदिक्खन क्षमा करैत रहल. संबंधक मर्यादाके बुझैत रहल मुदा बताबैत रहल जे अहिमे किछु नै किछु गड़बड़ चलि रहल अछि.
ई हमरा लागैत अछि जे गांधीक शांतिपूर्ण परिवर्तनक लेल ई जरूरी आयाम छल. ई सरेंडर नै छल. जखन गांधी अहाँकक गपके मानैत छथिन, बहस करैत छथिन, अहाँसं बहसक लेल तैयार छथिन, ते ई सरेंडर नै अछि. ई आमंत्रण अछि डायलागक लेल. आओर जाहि डायलोग क’ ल’ क’ ओ परिवर्तनक गप करैत छथिन, ओ सत्याग्रह. आग्रह अछि. दुराग्रह नै अछि सत्याग्रह. जे सत्याग्रहक पूरा गप अछि ओ वैदेहीक संस्कृतिक पार्ट रहल अछि. एकरा गंभीरतासं बुझैक गप अछि आ बौद्धिक जगतके अहिमे जायके जरुरत अछि जे कोना हम अहि दिस जाय.
एकटा आखिरी गप कहै लेल चाहब, जे प्रयोग गांधीजी केलखिन, ओ सेवाक प्रयोग छल. महिलाके आन्दोलनमे ठाड़ केलखिन. जे महिला घरसं बाहर निकलि के आयल, बड परेशान रहैत होयत. कतेक महिलाके पति छोडि देने होयत. कतेक महिलाक पति आंदोलनक काल मारल गेल होयत. तखन गांधीक आगू एकता सवाल छल जे की करब? ताहि सं गांधी एकटा संगठन बनैलखिन. सेल्फ इम्प्लायड बनैलखिन आ ओ संघठन आय धरि सबसें सफल संगठन अछि, एकटा मॉडल अछि इंडस्ट्रीक.
ई अहि वैदेही संस्कृतिक पार्ट अछि, जाहि वैदेही संस्कृतिमे लोकगीत, पेंटिंग, आर्ट एंड क्राफ्ट ओकर हिस्सा अछि, जेकर कोनो ट्रेनिग नै अछि, स्कूल नै अछि, कॉलेज नै अछि, मुदा ओकर एकटा हिस्सा अछि, जीवन अछि आ अहि जीवनक हिस्सा ओतय सं बाहर निकलि के आबैत अछि. ओकर प्रतिभा बाहर निकलिके आबैत अछि. हमरा लागैत अछि जे ताहिसं वैदेही संस्कृति क’ ल’ क’ गप महत्वपूर्ण अछि जे हम मिथिलाक संस्कृतिक गप करि.
संस्कृतिक ल’ क’ अहाँ जखन ऊंच गप करैत छी ते ओ ई अहि बातक परिचायक अछि जे अहाँ कत्तो नै कत्तो डिप्रेस्ड छी. अहाँ अप्पन संस्कृति क’ ल’ क’ कत्तो नै कत्तो डिप्रेस्ड छी. अहाँ तखने ओकरा ल’ क’ ऊँच गप करब जखन अहाँके लागत जे ओकरा सही मान्यता नै भेटल अछि. ई सत अछि.
आजुक तारीखमे मिथिलामे सेक्स अनुपात कम भ’ गेल अछि. कनि दिन पहिने एकटा महिला ओतुका पंचायतसा आयल छल आया बतोलक जे भ्रूण हत्या ओतय हर दिन भ’ रहल अछि. तें ओतय परिवर्तनक आगाज करैक लेल अपना सबके संस्कृतिक रक्षा करबी जरूरी अछि. जों हम अप्पन गुणगान टामे लागल रहब ते शायद परिवर्तन नै भ’ सकैत अछि. ओतय भारी आन्दोलन जरूरत अछि.
हमर एकटा फिलोसफी (दर्शन) छल. हम फिलोसफीमे सबसं पैग सेंटर हैत छलहुं. ओतय सं एत्ते अबी गेलहुं ते दर्शन सेहो ख़त्म भ गेल. रिचुवल्स बचि गेल अछि. हम रिचुवल्समे फंसके रहि गेल छी. हमर एकटा मित्रक स्त्री मिथिलाक अछि. ओ सामा-चकेवा पर काज क’ रहल अछि. ओ कहैत छथिन जे मिथिलामे सबसं पैग परेशानी ई अछि जे हम सब जे कमाबैत छी, ओकर सबसं बेसी भाग रिचुवल्स पर ख़त्म भ’ जाइत अछि. हम सब पाय बचा नै सकैत छी. माता-पिताक मरलाह के बाद कतेक बरख धरि हमलोग हुनकर रिचुवलमे लागल रहैत छी. सभटा कमाय ओहिमे जा रहल अछि. ओतय पूंजीक ल’ क’ कोनो काज नै भ’ रहल अछि. ई कोना बदलत? अहि दिस सोचबाक चाहि. ‘वैदेही’ सामाजिक परिवर्तनक दिस जाए तखन ई गांधीक बाट होयत.