विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका · VIDEHA · ISSN 2229-547X

मिथिलामे सम्मान दैक परंपरा अछि

प्रभात झा · 2016-06-15 · अंक 204

मिथिलामे सम्मान दैक परंपरा अछि
श्री प्रभात झा, वरिष्ठ नेता, भाजपा
जीवनमे संवाद आ प्रवास दुनू हेबाक चाही. लोकके सम्मान देबय चाही. हम भाषण दी या नै दी, हम बाजी या नै बाजी, सबके सम्मान देब मैथिलक संस्कार छियै. ‘अतिथि देवो भव’. पाहूनक जतेक सत्कार मिथिलामे होयत अछि, ओत्ते कोनो देशमे, कोनो राज्यमे, कोनो जाइमे नै होयत छै. पाहून माने भगवान. पइर धोयल जायत छै. एहन नै होयत छै, जखन जाय छै तखनो विदाईयो सेहो देल जाय छै. ई हम सबहके परंपरा छै. जेकरा जीवनमे दोसरके सम्मान देबक स्थान नै बनय छै, समाज ओकरा नै मान्यता नै दैत छै, समाजमे स्वीकृति ओकरे भेटय छे, जे अपना इगोके शांत राखय छै.
गांधीजी क्या बढ़लखिन, हुनका इगो नै रहय. जे आदमी जवाहरलाल नेहरूके झेल लेलखिन, सबसें पैग आदमीक बेटा, ओहि कालक सबसें पैग वकीलक बेटा. जेकर कपड़ा पेरिससं धुलाके आबय छल, ओहि पर कियो नियंत्रण केलक ते ओ गांधीजी छलाह आ हुनकर नैतिक नियंत्रण जवाहरलाल पर छल. आओर समाजमे अहाँ नैतिकवान छी, अहाँके नियंत्रण सदैव रहैत. इन्क्रोच्मेंट नै होयत छै राजनीतिमे आ समाजमे. दिक्कत ई भ’ गेल छै जे गांधीजीके मानय सब छियै मुदा जीवमे उतारयके कोशिश नै करैत छी. गांधीजीक शतांश जों अहाँ किछु जीवनमे ल’ लहूं, सबसं नीक.
हम सीतामढीसं आबय छी. एकटा लड़ाई हम एखन धरि लड़ रहल छी. जों अयोध्यामे रामक पैग मंदिर, ते पुनौरामे जानकी माँक किया नै? आओर अहिके लेल भारतक जतेक जनप्रतिनिधि भेला अछि हम हुनका चिठ्ठी लिखने छी. एखनो बहुत लोकके बुझल नै अछि जे जनकपुरमे हुनकर ब्याह भेलैन, लाल-पालन भेलैन, मुदा जन्म ते पुनौरामे भेलैन, जे भारतमे अछि. आओर अयोध्यामे ते डिस्प्यूट छियै, जमीन पर, जन्म स्थान पर, मुदा सीताजीक पुनौरामे कोनो डिस्प्यूट नै छै. ताहिसं सबके कोशिश करैक चाही, अगर माँके बेटाके संस्कार देबाक अछि ते संस्कारके सबसे बड़का धनी कियो छै ते ओ सीता छैथ. तें पुनौरा धाममे सीताजीक नाम पर भारतक संस्कार राजधानी बनाओल जाय.
अइयो हम जाय छियै हर साल ओतय, ते देखय छियै जे बच्चा सबके कोरामें ल’ जाय छै माय, आ माय ओतय कनि टा माटी अप्पन बच्चाक माथमे लगा दैत छै. ई ओय पावन धराके छियै आ विश्वके कियो महिला धारासं नै आयलै. अग्नि, रक्त सं दूर कियो महिला रहलय ते ओकर नाम छियै माँ जानकी. कतय समा गेलखिन धरतीमे, इहो केकरो नै बुझल अछि. अहि लेल आन्दोलनमे संग दियो.
सीताजी पर बजय छी, गांधीजी पर बजय छी मुदा जों किछु अंश अपनामे नै आनि सकलहूं, ते कष्ट भ’ जायत. आओर अहि लेल धरा जननी के संतति छियै, ओकर वंशज छियै. एकरा सबके लेल अपना सबके प्रार्थना करबाक चाहि. भगवान सब किछु दिये, गरूर नै दिए, घमंड नै दिए.
अप्पन समाज आ संस्कृतिके जे जीवन दर्शन अछि आ ओकरा जीबाक राखयके छै ते गाम जरुर जाऊ. ओतय पढ़यके सुविधा नै छै, नौकरीके सेहो सुविधा नै छै मुदा जाऊ. हम सब सीताजीके संतति छी, गांधजी के विचार मानय छियै ते गाम जरूर जाऊ. समाज चलय छै समाजक जीवन-दर्शन सें आओर अहि लेल सभ दल सं उपर उठिके मा जानकी के दलमे आऊ क्याकि माँ जानकीक दल ते एक्के टा अछि.
जीवन में सतत सक्रियता, पुरुषार्थके जगेनाय, प्रीतीसं जोड़नाय, ई अपना जीवनके संबंध हेबाक चाहि. नीक बाजय में की लागय छै? आय अहाँ केकरो कना नै सकय छियै ते हंसाऊ. नाभि सं हँसब दूर भ’ गेल. हमरा कतय एकटा ‘खां’ छैथ, एडीजी अनुराधा शंकर खां, रामचंद्र खांक बेटी. हमरा सबके बड मानैत छैथ. कत्तो जाय छथिन ओ मैथिली में बजैत छथिन. एडीजी बहुत स्मार्ट, जेकरा लोग तगड़ा कहैत छैथ. विदिशा के एसपी. शिवराजजी (मध्यप्रदेशक मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान) के जिन्दगी बांचल छैन, राखी बान्हे छै. एक बेर एक्सीडेंट भेलय ते ओ अपना कोरामे शिवराजजी के उठाके इलाज करयलखिन.ई छियै सीताजीके दायित्व, मिथिलाके दायित्व. आओर अहि लेल हम कहैत छी, हम काहियो अहाँ सब लेल ठार होयत छी ते हम सब अप्पन जीवनके सफल करैत छी, अहाँ के जीवन के सफल नै बनबैत छी.
आओर मनुष्य जीवनके सफल बनाबयक मुख्य कारण छियै जे हमसब धर्मराजक उपासक छी, भगवतीक उपासक छी. उच्चैठ में कालीदासके ज्ञान भ’ गेलय, जन्म उज्जैनमे भेल छल आ हमरा सबके ज्ञान नै भ’ रहल अछि, जतय हम सब पैदा भेल छी. ई ते बड कष्टक गप छियै नै. कालीदास जेकरा घर बाली भगा देलकय, तकरा ज्ञान भ’ गेलय अ चारि टा महाकाव्य भ’ लिख देलक. अहाँ जखैन उच्चैठ जेबय, नदी किनारे छै आ संस्कृत विद्यालय छै अहि ठाम.
हम पूरा सांस्कृतिक घुमल छी, विद्यापतिक गाम बिस्फी सेहो गेल छी, हुनकर जे स्थान छै ओतय गेल छी. मंडन मिश्रजी के गाम गेल छी, जाहि गामसं सत्तर-अस्सी टा आईएएस-आईपीएस निकलले, ओहि गामक माटी देखय लेल गेलहुं, जे केहन ओ माटी छै जे खाली आईएएस-आईपीएस निकालैत छै. भारतमे जों सबसे पैग सांस्कृतिक धरोहर छै कत्तो, ते ओकर नाम छै मिथिलांचल. ओहि धरोहरके लेल जे ‘वैदेही’ संस्था बनाके काज क’ रहल छी, बहुत-बहुत बधाई.
गांधी जेहन समाज में मैसेज दय बला, भारते टा नै विश्वमे कियो नै भेलाह. हम अहाँ गाय-महीसक दूध पीय छी, गांधीजी बकरक दूध पिबय रहथिन. क्या? गरीबक घरमे बकरी रहैथ छै. प्रचार करयके काज नै रहय हुनका. अहिना प्रचार भ’ गेल. जे बकरी बला रहय, ‘गांधीजी’, ‘गांधीजी’ करय लगलाह. हम अहाँ हाथमे घड़ी पहिरय छी, ओ डारमे घड़ी पहिरय रहथिन. गांधीजी डोराक चश्मा पहिनय रहथिन. गांधी जतय जाथिन ते हरिजन कतय भोजन करथिन. ‘मासेज’ में ‘मैसेज’ देत रहथिन. दांडी यात्रामे सबके हाथमे डंडा छल, ओ आन्दोलनक संकेत देलखिन. नमक आन्दोलन जे हर घरमे खायल जायत अछि, थोक में मैसेज देनायके काज करलखिन शांतिपूर्वक.
ओ गोलमेज सम्मलेनमे आधा धोती पहिनके गेलखिन आ लोक देखय लागल, जे गांधी ये छैथ. समाज एखनो ईमानदारीके इज्जत देत छै. अहाँ दूटा आंखि से दुनिया देखय लेल चाहैत छी मुदा दुनिया अहाँके हजारों आंखि से देखय ये. आब अहाँके कोनो चीज नुकायल नै रहत, अपना जीवनके केहन संस्कारमे राखयके ये, ई दायित्व स्वयं अहाँके छी. जेखन अहाँके संस्कारित जीवन रहत ते अगल-बगलके लोगमे सेहो संस्कार रहत. हमरा लागय ये जे हम सब मैथिल छी, मिथिला सं छी, जानकीके छी, अप्पन संस्कारके जीबैत राखैत, जीवन-दर्शनके जीबैत राखैत, गांधीके आदर्श पर चलब, भेदभाव मिटाके. कियो आदमी ऊपर-नीचां नै होय छै, भगवान राखैत छै. लक्ष्मी चंचला होयत छै.
मैथिल मतलब जूनून. हम सब बाहर जायत छी. खूब काज करैत छी. गाममे दू-चारि बीघा जमीन भ’ जाइत छै ते कहैत छी, के काज करत? माटीके सेवा केनाय बिसुरी नै. छैठके पूजा बिसुरी नै. गामके पोखैरके आनंद कत्तो नै भेटत. गाम जरूर जाऊ, एहन प्लानिंग करू जे दस आदमीके काज जरूर दियो. बुद्धि बाजारमे नै बिकायत छै, भगवान देत छथिन.

Suggested citation: प्रभात झा. “मिथिलामे सम्मान दैक परंपरा अछि.” Videha — First Maithili Fortnightly eJournal, issue 204, 2016-06-15. https://www.videha.co.in/research/2016/204/मिथिलामे-सम्मान-दैक-परंपरा-अछि.htm

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