विद्यापति आ जानकी हमर सबहक साइनेज छथिन
डॉ. सविता खान, दिल्ली विश्वविद्यालय
कोनो स्त्रीक ख़ासके बड महिमामंडित होबय लागैत छै ते ऊ बड डराय बला चीज होयत छै. जखन अमरनाथ झा जी सीता नवमीक गप कहलखिन ते हमर रोमांस आओर रोमांच दुनू शुरू भेल. जे आय धरि हमसब रामनवमी या मैस्कुलीन (पुरुष) नवमीक गप सुनय रहिये. जे राम प्रतीक छथिन. एवरी टू डू विद मैस्कुलिनीटी (सब किछु पुरुषत्वक संग होयत अछि). तखन हम राष्ट्रीय राजधानीमे फेमिनिज्म (नारीवादी) के एकटा कार्यक्रमक ल’ क’ आओर ओकर नवमीक सेलिब्रेट क’ सकी, ई बिलकुल नव गप छल आ आओर बेसी उत्सुकता सेहो भेल. उत्सुकताक बाद दोसर कड़ी आबय छय, जखन अवलोकन करय लागय छी जे ओकर स्वरूप की हेतय. एकर सबसं महत्वपूर्ण गप ई जे एकर अर्थ की हेतय. जानकी नवमीक अर्थ की छै आ एकरा हम दूटा खंड में देखय लैक चाहैत छी.
मिथिलाक सिंबलक तौर पर हरेक समुदायके, हरेक प्रान्तके, हरेक देश के, किछु-किछु प्रतीकक जरूरत होयत छै. ओय प्रतीकक जरूरत ते होयत छै, जे ओ प्रतीक के बल पर ओ समुदाय अपनाक एक गंतव्यक दिस कनि-कनि ल’ जायत छै, ताहिमे विद्यापति आ जानकी जी छै. साइनेज के तौर पर इस्तेमाल कएल जायत छैथ. जना अहाँ के जीएसडीएस (गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति) पहुचैक छल ते बहुत ठाम साइनेज छल जे कार्यक्रम ओतय भ’ रहल छै, तहिना विद्यापति या जानकी हमरा सबहक लेल साइनेज छथिन. ओ साइनेज जेकरामे हम सब बहुत गर्वक संग ई उदगार क’ सकैत छी जे विद्यापति हमर, जानकी हमर. ई ठीक अछि मुदा ओकर बाद की? कतेक लोक अहि सभागारमे बैसल या फेर शहर-दर-शहर विद्यापति पर्व मनाबैत छथिन, ओ विद्यापति के अर्थ कतेक बुझय छथिन-अहि विषय पर हमर खास दिलचस्पी अछि. ओहू पर हमरा दिलचस्पी ये जे जानकी नवमी जे सब गोटे एतय सेलिब्रेट क’ रहल छी, जुटल छी या सन्देश दैक कोशिश क’ रहल छी, एकटा खास समुदाय के या राष्ट्रीय राजधानी में क’ रहल छी ते एक जगह लिमिटेड नै रहतय, ई सन्देश सब जगह जतय. ओय सन्देशमे हम सब स्वयं कतेक विश्वास करैत छी?
सैद्धांतिक महिमामंडित दिस हम नीकसं बढ़य लागैत छी, लेकिन जे ग्राउंड रियलिटी छै, वास्तिवकता छै, मिथिला, मैथिली, जानकी, सीता सबके, ओहिमे बहुत गैप छै. हमरा लगय ये जे जानकी नवमीके मनाबैक जे पहिल सफलता या ओकर सबसे पैग अर्थ होयत, ओ गैपके एड्रेस करयमे होयत. जतय सिद्धांतमे हम किछु आओर बाजैत छी सैद्धांतिकमे किछु आओर बाजैत छी. आवरण किछु आओर ओढेत छी, वास्तविकता हमर सबके किछु आओर अछि.
बहरहाल, सबसं पैग कनेक्ट मिथिला क’ ल’ क’ दूटा जे साइनेजक ल’ क’ गप केने रहि, पहिल विद्यापति आ दोसर जानकी. हमरा मोताबिक जों कोनो भी संस्कृति के आगू बढ़ाबे चाहैत छी ते एहन-एहन सूत्रके अहाँके खोजय पडत. सूत्र के खोजिके निकालय पडत, जे समाजक तमाम वर्णके, तमाम वर्गके एकसूत्रमे बान्हि सकय. अहि लेल मिथिला में ओ चिन्हे पडत, जे एहन कोन-कोन सूत्र अछि जे अहाँ के कम्युनलिटी दिस ल’ ज’ सकय.
हमरा लेल दूटा सूत्र छै विद्यापति आ जानकी. जानकी ते नै, जे ओ महिमामंडित देवी छल, तं जे ओ मिथिलाक बेटी छैथ. बेटी जे होयत अछि तकरा हम बेटीयेटा नै कहैत छिये. राम राजा की पत्नी सीता नै होय छथिन, जनक के बेटी जानकी होयत छथिन. ओ बेटी जेकरा हरेक गाम में कह्य छथिन जे ओ गामक बेटी छथिन, मिथिला के बेटी छथिन, ते ओ हमरा प्रिय छैथ. ते हमरा लेल अद्भुत छ्ल, ते हमरा लेल स्मरणीय छैथ, ते हमरा लेल ओ वन्दनीय छैथ. क्याकि ओ बेटी छथिन.
आब प्रश्न उठैत छै जे ओ बेटीसं अपना सबहक एक्सपेक्टेशन की अछि. बेटी के हमसब कतय-कतय ल’ जायत चाहैत छियै. मिथिलाक बेटी संगे कतय-कतय ट्रेवल करैत छियै. जे हमर आय धरि पर्सनल अनुभव रहल अछि, जे हम देखलहुं ये, बेटीक भेला पर मिथिला, जे जानकी के धरती छैन, बेटीक खुशी अनुभव, या चेहरा पर खुशी जे हमरा बेटी भेलय, आय धरि हम नै देखने छी. हमरा नै लगय ये जे वास्तविक तौर पर जानकीके वंदना मिथिला एखन धरि क’ सकलय ये. हमरा नै बुझि पड़य ये. खैर, तखन जानकी आ विद्यापति कोन एहन सूत्रमे सब वर्ग आ वर्णके बान्हैत छथिन, विद्यापति के बारे में किछु ख़ास चर्चा शुरू करब आ ओकरा जानकी के तरफ ल’ जायब.
विद्यापति हमरा ख्याल सं प्रथम कवि छथिन, जे ‘देसिल बयना सबजन मिट्ठा’ से शुरू करय छथिन, जतय ऊ बोली के, भाषा के, निज भाषा के आओर निजता के गौरव दिस ध्यान दियाबैत छथिन. हरिश्चंद्रसं बहुत पहिने जखन ओ कहैत छथिन ओ आम लोकक तरफ, गाँवक तरफ, ग्वालिनक तरफ, पनिहारिनक तरफ, जे पुरुषार्थक परिभाषित करैक जे विद्यापति के परिभाषा छल, अहाँ ओहि पुरुषार्थ के रिलाइज करय छिये, जखन अहाँ ओहि प्रेम भक्ति भाव सं गुजरै छी. कोनो प्रेम भक्ति भावनासं गुजरयके जे पद्धति छल, ओ एलिट पद्धति नै छल, ओ बहुत ही बहुत सबअल्टरन, बहुत ही कॉमन, सबजक भाषामे, मैथिली भाषामे, जकरा पटगमनीमे, चैतीमे, परातमे, साँझमे आ हरेक स्त्री स्वावलंबी भ’ क’ गायब सकय, बुझि सकय, ओकरा व्यवहारमे उतरि सकय. क्याकि हम सब गोटे जानैत छी, याज्ञवलक्य जे मिथिलेमे भेला आ हुनका स्पष्ट कहल छैन आ हुनकर स्पष्ट लाइन छैन, ‘धर्मस्य निर्णयो ज्ञयो मिथिला व्यवहारतः’ एकर अर्थ अछि जे जों अहाँक धर्मक निर्णय बुझय के अछि ते अहाँ मिथिलाक व्यवहार के देखू. ओ मिथिलाक व्यवहारक वाहिनीक, मिथिलाक बेटी, मिथिलाक स्त्रीमे भेटत. मिथिलाक एक-एक स्त्री ओ व्यवहारक पालन करैत आ कायम करैत छै जे मिथिला के ओ हायर स्टेज धरि ल’ जायत छथिन, जे हमर सबके एकटा गंतव्य ये. हम सब ओ साइनेज लगा के जे छिये, फाइनली ओ अल्टीमेट रियलिटी तरफ रिलायिज करय चाहैत छी. तें विद्यापति पुरुषार्थ के ओय स्टेज तक ल’ गेलखिन, ओ स्तर तक ल’ गेलखिन, जतय बोली आ भाषा अछि. एक गप दिस ध्यान करायब चाहैत छी जे मैथिली कोनो भाषा नै छै, अहाँ जानकी के सेहो मैथिली कहैत छी. ते देवी जानकी आ भाषा इंटरक्वाइंड भ’ गेल छै, मिल गेल छै. तें ई आइडेंटीफाई करब मुश्किल छै जे हम मैथिलीक प्रैक्टिस क’ रहल छी, देवीक पूजा क’ रहल छी या अहाँ भाषाक प्रक्टिस क’ रहल छी. भाषा आ मैथिलीक एहन सुन्दर समन्वय जे छै ओ मिथिलामे देखय लेल भेटय ये. ताहिमे जानकी जे छै, ओ बहुत पैग माध्यमक तौर पर आबैत ये.
दोसर गप जे गांधी, विद्यापति आ जानकीक बीच परस्पर कोन सूत्र भ’ सकैत छैन? ओ परस्पर सूत्र छैन जे आय धरि वेस्टर्न सोचक एकटा समस्या रहलय ये. ओ जखन स्त्रीक देखत त्याग करैत, स्त्रीक देखत बलिदान करैत, स्त्रीक देखत एक ख़ास ढांचामे जेना साड़ी पहिरने छै, मुडी झुकैने छै सदिक्खन, पुरुषक संग जेना सीताक फोटो या वंदना रामक बिना नै देखय छैयेन, ते एकटा लेबल लगा देत छै, जे नै-नै ई स्त्री सशक्तिकरण नै छै. ई ते बहुत कमजोर छै. ई ते अबला नारी छै. एकरा स्त्री सशक्तिकरणक जरुरत छै.
गांधी ओहि सशक्तिकरण के पलटि देलखिन. स्त्री के या सीता के जे अबलाकरण भ’ रहल छै, ओकरा ओ सबला बना देलखिन. क्या की ओ त्याग के, बलिदान के, चाहे कोनो बेटी, स्त्री होथिन, ओकरा ओ कहलखिन जे सशक्त टा त्याग क’ सकैत छै. जे कमजोर रहते, अबला रहते, ओ त्याग कखनो नै करतय. तें गांधी के जे बहुत इम्पोर्टेंस छैन, जतय ओ व्यस्कक सोचक कमी छल, त्यागक, बलिदानक जे एकटा नीचां स्तर पर राखि रहल छल, गांधी ओकरा अकस्मात टर्न क’ देलखिन आ बतओल्खिन जे त्याग आ बलिदान की छै?
मुदा हमर प्रश्न त्याग, बलिदान, जानकी सं आगू के अछि. मिथिला या दोसरे जगहक बेटी त्याग त’ क’ देलखिन मगर हुनका वापस की भेटल? हमरा नै लागय ये जे किछु भेटल. यू ट्यूब पर जखन अहाँ जानकी वंदनाके टाइप करबै, एक्को टा सिंगल, पोपुलर कल्चरमे जानकी वंदना कत्तो नै देखाह पडत. ई हमर एकटा अनुभव रहल. अतय जानकी वंदना एकटा लोग गाबि रहल छल आ जानकी वंदना सेहो होयत अछि, हमरा लेल ई एकटा खबर छल. पोपुलर कल्चर में जखन अहाँ जानकी वंदना के ट्रेस करय लेल चाहबै ते ओ अहाँ के कत्तो नै भेटत. राम वन्दना अहाके ढेर सारा भेटत.
तेखन प्रश्न ई छै जे जानकके स्त्री सशक्तिकरणक रूपमे, उत्सवक रूपमे देखिके संगे बहुत सारा एट्रिब्युट्स के, वेल्युके लगाके आखिरकार हमरा सबके भेट की रहल अछि? हमरा सबके संग जानकी सबके भेंट की रहल अछि? हमरा ख्याल सं बहुत कम, बहुत ही आवरण के तौर पर. जतेक एक्टिविटी छै, जतेक एक तरहेसं टोकेनिज्म जेकरा कहैत छियै हमसब, टोकेनिज्म के तौर पर सारा कार्यक्रम, सारा हाव-भाव, बेसी सं बेसी टोकेनिज्म के तरफ ल’ जा रहल छै. वास्तविक परिवर्तन कतय भ’ रहल ये, कोना भ’ रहल ये, भ’ रहल ये या नै भ’ रहल ये, हमरा बुझने ई बात के सोचनाय, एक-एक आदमी के मानस में बैसेनाय बहुत जरूरी ये. नै ते जानकीक उत्सव मनेनैआय, जानकीक गप केनाय, हुनकर वंदना केनाय, हुनकर फोटो बनेनाय, हमरा लागय ये एकरासं किछु नै भ’ सकय ये.