विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका · VIDEHA · ISSN 2229-547X

राजस्थान केर मंडोवरमे रावण आ मंदोदरीक विवाह: लोक इतिहास केर मूर्त आ अमूर्त प्रमाण

डॊ कैलाश कुमार मिश्र · 2016-12-15 · अंक 216

२.२.जगदीश प्रसाद मंडल- जीवन-मरण (उपन्यास- तेसर संस्करण)
२.३.जगदीश प्रसाद मंडल- जीवन संघर्ष (उपन्यास- तेसर संस्करण)
२.४.जगदीश प्रसाद मंडल- नै धाड़ैए (बाल उपन्यास- तेसर संस्करण)
डॉ. कैलाश कुमार मिश्र
राजस्थान केर मंडोवरमे रावण आ मंदोदरीक विवाह: लोक इतिहास केर मूर्त आ अमूर्त प्रमाण
डॉ. कल्याण कुमार चक्रवर्ती इतिहासक पैघ विद्वान छथि। कला इतिहासमे हिनकर PhD हार्वर्ड विश्विद्यालयसँ ओम्कारेश्वरपर छनि। ओरछा आ अनेको आर्कियोलॉजिकल साइटपर बहुत महत्वपूर्ण काज केने छथि। सफल आई.ए. एस. अधिकारी रहल छथि। भारत सरकारसँ सचिव केर पदसँ रिटायर केने छथि। अपन कला प्रेम आ विद्वताक कारण डॉ. चक्रवर्ती इंदिरा गांधी मानव संग्रहालय भोपाल केर निदेशक; इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र, दिल्ली केर सदस्य सचिव; नेशनल म्यूजियम, दिल्ली केर महानिदेशक आ नेशनल म्यूजियम इंस्टिट्यूट ऑफ़ आर्ट हिस्टीरी, म्युजियोलॉजी ,आ कॉन्सेर्वशन केर वाईस चांसलर ; NEUPA केर वाईस चांसलर; दिल्ली विरासत संसथान, दिल्ली केर चीफ; आ ललित कला अकादमी केर अध्यक्ष पदके सुशोभित क चुकल छथि। डॉ. चक्रवर्ती सौम्य, मृदु आ सहज लोक छथि। ई अपना आपके विद्वान मानैत छथि प्रशासक नहि। गुफा चित्रकलाके वैज्ञानिकता, उद्भव, विकास, खोज, शोध आदिपर बहुत गंभीर आ विस्तृत काज केने छथि। लोक आ जनजातीय कलाके सब पक्षपर काज करबाक प्रबल इच्छा छनि।
हमरा हिनका संगे बहुत काज करबाक अवसर भेटल अछि। हिनका संगे नालंदा, छत्तीसगढ़, असम, अरुणाचल, मणिपुर, सिक्किम, मिजोरम, मेघालय, नागालैंड, त्रिपुरा, महाराष्ट्र, बंगाल, आदि शोध कारणे रहबाक आ भ्रमण करबाक मौका भेटल अछि। हिनकर जिज्ञासा अनंत छनि। हमेशा अपन डायरीमे जानकारी लेत रहैत छथि। कहैत रहैत छथि जे भाव इतिहास, भाव भूगोल, लोक इतिहासके बिना भारतके नहि बुझल जा सकैत अछि। हिनका संगे कतेक सै सेमिनार, वर्कशॉप आदिके आयोजन केने छी सेहो पूर्ण बौद्धिक स्वतंत्रताके संग।
एक बेर एहने प्रयोजनसँ 2001 मे जोधपुर गेल रही। ओत एक एहेन स्थान भेटल आ एहेन जानकारी भेटल जे एक बेर लोकमे कुनो मूर्त संरचनापर कतेक अमूर्त कथा एवं लोकइतिहास केर परत बनि जाइत छैक सेहो विलक्षण ताहिपर सोचबाक लेल बाध्य केलक। अगर हम कही जे हमरा संगे लंकापति रावण केर सासुर आ मंदोदरी केर नैहर चलु, हुनकर विवाहमण्डपके देखु, कुलदेवीके दर्शन कए धन्य होउ त केहेन लागत? दिनमे सपना जकाँ ने? मुदा दृष्टान्त किछु एहने सन अछि। प्रामाणिक आ अप्रमाणिक अलग बात छैक, कनि लोक इतिहास आ आख्यान केर जाल केर निर्माण देखु। एक संगे राम आ कृष्णके एकहि वेदीपर अलग अलग कालखण्डमे विवाह केर कथा आ किम्बदन्ति देखू। हमरा लेखनी संगे अहुँ यात्रा करु। नीक लागत।
घुमबाक आ जानकारी विशेषरूपसँ लोक इतिहास केर संकलनके दृष्टिकोणसँ अनेक बेर राजस्थान जाइत रहैत छी।
राजस्थान जेबाक अर्थ भेल सांस्कृतिक विरासत केर गर्भमे जेनाइ। एहि धरा केर मूर्त आ अमूर्त दुनू सांस्कृतिक सम्पदा प्रदेश केर गौरवपूर्ण इतिहास केर साक्षी अछि। चप्पा-चप्पा धरती वीर पुत्र आ वीरांगना केर पदचापसँ अभिमंत्रित अछि। राजा आ प्रजाकेर मध्य नीक आ अधलाह अनेक कथा जिवंत अछि। ई मीरा, महाराणा प्रताप, बिक्रम आ नेरा केर धरती अछि। ई ओ धरा अछि जतय केर क्षत्राणी आ अन्य महिला अपन इज्जत आ आन, बान आ शान केर रक्षाक हेतु सै सै केर संख्यामे आत्मदाह अथवा सामूहिक जौहर क लेलथि। अपना आपके जिबैत अग्निमे समर्पित केलि मुदा आक्रांताके अपन शारीर तकके हाथ नहि स्पर्श कर देलनि।
राजस्थानके कुनो भागमे जाऊ, किछु ने किछु महत्वपूर्ण इतिहास, परंपरा, केर भान भेटत, गढ़ आ गढ़ैया भेटत, ढ़नमनायल हवेली भेटत, राजाक कथा भेटत: कतौ प्रजावत्सलताके त कतौ निरंकुशताके। मुदा भेटत जरूर।
जोधपुरके बागलमे मंडोवर नामक एक बहुत पैघ प्राचीन नगर छलैक। बिखरल खंडहर, प्रस्तर अवशेष एहि बातके साक्षी छैक। अगर स्थानीय लोकक बातके विश्वास करी त 24 कोसमे ई नगर व्याप्त छल। कतेक महल उल्टा लटकल जकाँ लागत। अगर ध्यानसँ देखब त ऐना बुझना जैत जेना कियोक पूराके पूरा नगरके उलटा लटका देने होइक। पहिने प्रवेशमे बुझा जैत जे जरूर बहुत रहस्यसँ भरल नगर छल हैत ई खँडहर। पूरा खण्डहर जेना बहुत पैघ रहस्य अपना गर्तमे नुका क रखने हो? खैर! एक बहुत बुजुर्ग महिलासँ भेट भेल। ओ कहली : "बेटा, कांई फोटू लेवे है , आखी नगरी ही उलटी पड़ी है।" (बेटा, की कोनो फोटो ल रहल छी? ई त समस्त नगरी उलटा छैक"।)
बात बहुत बिचित्र रहैक। ऐना मोनमे जिज्ञासा भेल जे जौं कियोक स्थानीय आदमी एहिपर किछु कहैत। एक युवक भेट भेल। ओ कहलक कुनो खास बात नहि छैक। अर्चेयोलॉजिस्ट्स आ प्रागइतिहास एहिपर मौन अछि। शायद कियोक स्थानीय लोक किछु बता पबथि। एतबेमे एक बुजुर्ग एला। करीब 80 वर्षक। पातर देह। गोर धप-धप। जिज्ञासाके देखैत कहला:
"हमर पितामह किछु एहि शांत आ ढ़नमनयाल खण्डहरके गूढ़ रहस्य आ इतिहासके बारेमे कहने छला।अगर अहाँ लग समय हो आ सुनबाक धैर्य हो त हम बता सकैत छी।" हमरा ऐना लागल जेना सब किछु भेट गेल। हम झट दनि कहलियनि : "जरूर, अपने कहल जाओ। हम अपने सनहक़ लोकक तलाश करैत रही।" आब बूढ़ा एक पाथरपर बैस कहनाय प्रारम्भ केला:
आईसँ सात हज़ार पाँच सै वर्ष पूर्व लंकापति रावण अही स्थानपर आबि मंदोदरीसँ विवाह केला। मन्दोदरीके स्थानीय लोक मंदोधरी कहैत छनि। हिनक पिताक नाम छल निमंदूजी। ओही नामसँ एहि स्थानक नाम मंडोवर पड़लैक। एकटा 10 खंभाके चँवर दिश इशारा करैत ओ बुजुर्ग कहलनि "यैह थिक ओ स्थान जतय रावण आ मंदोदरी केर विवाह मंडप केर वेदी छलैक।" ठीक ओकर बगलमे पाथरक कलात्मक भव्य आ उत्कीर्ण तोरण रहैक जे आब खण्ड-खण्ड भेल छैक। हालाँकि एक बेर एकरा देखलासँ सुधिजन सहजहि अनुमान लगा सकैत छथि जे ई विवाह कतेक शाही ठाठसँ भेल हेतैक आ ऐश्वर्यके प्रतीक छल हेतैक। कतेक कारिगर आ कलाकार राति-दिन एकर निर्माणमे लागल हेतैक। बेजुवान पाथर जेना अपन इतिहास केर गाथा सुनबैत हो।
आब हमहु बुजुर्ग व्यक्तिके कहल सब बात के पाथर संगे जोड़ै लगलौं। अद्भुत अनुभव। अद्भुत सिनेह। राजस्थानके इंच इंच धरतीसँ पुनः आत्मिक लगाव होम लागल।
आब बुजुर्ग एक ऊंच महलपर ल गेला। कहलनि जे ई ध्वस्त महल 24 खण्ड केर छलैक। दूमहलमे विभक्त, 12 खण्ड ऊपर आ 12 खण्ड निचा। निचा खण्ड केर तलघर एखनो बाँचल छैक आ सुरक्षित छैक।
समस्त भवन आ दुनु खण्ड केर हरेक हिस्सामे सुरुज केर धुप इजोतक संग वसातआर्थत क्रॉसवेंटिलेशन केर गजब व्यवस्था छलैक। निचाके तहलखानामे गुप्त स्थानपर खजाना सेहो बनल रहैक। एक तहलखानामे त पूराके पूरा मंदिर दबल रहैक। मंदिर केर देबारपर रंगविरंगक उत्कीर्ण आकृति एखनो मनोहारी लागि रहल छलैक।
तत्पश्चात ओहि स्थान लग गेलहुँ जतय राजघराना केर पुरुष रहैत छला, स्त्रीगण रहैत छलि। कुलदेवीकेर डीह केर दर्शन भेल। बिना कुलदेवीके विधिवत पूजा अर्चनाके घरक कोनो स्त्रीगण अथवा पुरुष भोजन नहि करैत छल। मंदोदरी केर महल देखल। बुजुर्ग सब स्थानक एक टूरिस्ट गाइड जकाँ विस्तारसँ जानकारी द रहल छलाह। एक एक शब्द नापल – ने कम ने अधिक। पूरा संतुलित। बुझना ऐना जाइत छल जेना रावण आ मंदोदरीके विवाहक पुजेगड़ी यैह होथि!
भवन निर्माण कला उत्तम बुझना गेल। ओहि समयमे आर्किटेक्चर केर सम्बन्धमे ओतेक जानकारी नहि छल ताहि कोनो स्कूल अथवा स्टाइलसँ जोड़बामे असमर्थ रही। फ़ोटो बहुत सुन्नर नहि छल। जे छलो से समाप्त भ गेल। स्मरण शेष अछि। वैह लिख रहल छी। गढ़ल मुदा टूटल आ छत विछत पाथर केर हरेक भाग जेना किछु कहैत छल? पहिल बेर भेल जेना पाथर बजैत हो। मुदा जोरसँ नहि, कानमे नहु-नहु। फेर भेल, जे जकर विखण्डित पाथर केर ढ़ेर अतेक बजैत छैक ओकर साक्षात स्वरुप केहेन हेतैक? मोन त करैत छल जे इतिहासके कान पकड़ि पाछा क ली आ सब बात देख ली, छू ली, बुझि ली, आ लिख ली, एक साक्षात प्रत्यक्षदर्शीके रूपमे! मुदा इहो बुझल अछि जे ई सपनेटामे संभव अछि।
बुजुर्ग देखेबो करथि आ विशद वर्णन सेहो केने जाथि। हुनकासँ इहो ज्ञात भेल जे रावण जतेक वलशाली छल ओतबे घमण्डी सेहो। रावण समस्त संसारके अपनामे समेट लेबाक प्रण केने छल। अहंकार ओकर अपन सीमा लाँघि लेलकैक। अतेक जे रावण अपन ससुर मेदूजीके सेहो कहि देलकनि जे ओहो ओकर अधिनस्त भ जाथि। जाति कुलसँ श्रेष्ठ मेदूजी भला एहि प्रस्तावके कोना स्वीकार क सकैत छला? अपन जमाय रावणके सम्मानपूर्वक मना क देलथिन। रावण छल धैर्यहीन। क्रोधसँ काँपे लागल। कुपित भेल तुरंत अपन भाय कुम्भकरण आ पुत्र मेघनादके बजा पूरा नगरके उलटि देलक। ध्वस्त क देलक। ताहिं आई ओई खण्डहर उलटा अछि। चँवरी लग रानीमहल, जनाना महल आदिक जीर्ण अवशेष देखल। किछु घर केर कमरा सब एखनो अनेक तरहक कलाकारी केर बेजोड़ गाथा कहैत छैक। रंग आ रूपविन्यास आईओ ओहिना छैक।
संयोग नीक छल। हमर सूचनादाता बुजुर्ग संस्कृत आ इतिहासक नीक ज्ञाता छला। हुनकर ई मानब छलनि जे जनमानसमे प्राचीन इतिहासके सटीक ज्ञान नहि हेबाक कारण बहुत अनर्थ भ रहल अछि। हरेक बातक विवरण इतिहासमे नहि अंकित अछि। कुनो राजकीय सुखसँ संपोषित इतिहासकार मंडोवर केर इतिहास कियैक लिखैत? इतिहासकारके लिखक हेतु के पैसा देतैक? के ओकरा भग्नावशेष केरगर्तमे धसल इतिहासके पोर-पोर खोइंछा छोड़ा क कहतै? ताहिं बहुत रास बात, रहस्य, आदि कालके गालमे अथवा मंडोवर केर विशालकाय चट्टान्नमे धंसि क समाप्त जकाँ भ गेलैक। कतेक दबल अहि आशमे छैक जे उत्खनन कए कियोक तथ्यके उजागर करता। मुदा कहि नहि कहियों ई रहस्यसँ समाज आ विद्वान वर्ग लाभान्वित हैबो करता की नहि???
हमरा लोक निराई-आँगन, सभा मंडप हथिसार, घोड़सार, दासीगृह, आदि सब किछुके अपना आँखि आ बुजुर्ग केर ऐतिहासिक दिव्य आँखिसँ देखल, हुनकर अभूतपूर्व वाणीसँ सुनल।
जिज्ञासा भेल जे बुजुर्गसँ रावणके संबंधमे आ लंकाके बारेमे जानकारी प्राप्त करी। पुछलापर कहलनि: "असली लंका त अथाह समुद्रमे डूबल अछि। ओहि लंका केर एक कोण तिरुपति बालाजी छथि। लंकापुरीमे राम 100 योजन केर बान्ह बनने छला। तिरुपति वैह स्थान अछि जतय राम आ विभीषण केर भेट पहिल बेर भेल छलनि। एहि मंडोवरमे निचामे 3 सुरंग छैक। एक अयोध्या, दोसर लंका आ तेसर द्वारका जाइत छैक।
बुजुर्ग एक मारक बात कहलथि: "श्रीमान, ककर ध्यान छैक अहि पुरातन धरोहर दिस? सब विनाश केर प्रक्रियामे मग्न अछि। आ ई जे जोधपुर नगर देख रहल छी ओकर बहुत भागक निर्माण एतहि केर अवशेषसँ भेल अछि। नव्निर्माण लेल पुरातनके सब संहार क रहल अछि।"
एक बात बुजुर्ग जे कहलनि से थोरेक चिंता आ शंशय दुनुके जन्म द देलक। ओ बात ई रहैक जे बुजुर्गक हिसाबे आईसँ करीब 3000 वर्ष पूर्व श्रीकृष्ण सेहो अतै आबि अपन विवाह केने छला। से कोना? ई विवाह भेल छलनि कृष्ण आ जामवंतीके बीच। दरअसल ई विवाह ओतेक योजनावद्ध तरीकासँ नहि संपन्न भेल रहैक जेना रावण आ मंदोदरीके समयमे भेल रहैक। अर्जुन संग कृष्ण मणि तकैत-तकैत एते आबि गेल छला कारण जे ओ मणि जामवंती लग छलनि। जामवंती मणिके महत्त्वसँ अनजान छली आ ओकरा कैंचा बुझि खेल खेला रहल छली। कृष्ण जामवंतीसँ ओ मणि मांगला। एहि बातपर जामवंती केर पिता गम्भीर होइत कहलथिन: "हे केशव, हम ई मणि अहाँके द देब' चाहैत छी, मुदा एक शर्त अछि? अगर अपने एहि शर्तके स्वीकार क ली त मणि तुरत भेट जैत." कृष्ण कहलथिन: "अहाँ अपन शर्त कहु। हम स्वीकार करब।"
कृष्णसँ अस्वासन पाबि जामवंती केर पिता बजला: "मणि त हम तुरत्तेद' देब परंतु मणि सँग अपन पुत्री जामवंती केर हाथ सेहो अहाँके हाथमे सुपुर्द कर चाहैत छी अहाँक अर्धांगिनीके रूपमे।"
कृष्ण तुरंत जामवंती केर पिताक निवेदनके स्वीकारि लेलनि आ अहि तरहेँ ओही दिन ओही स्थलपर कृष्ण सङ्गे जामवंती केर विवाह भ गेलनि।
अतेक जानकारी प्राप्त करैत-करैत 2 घंटा लागि गेल। पता नहि चलल जे समय कोना बीत गेल। सब जानकारी रुचिकारक आ बहुत हद धरि प्रामाणिक सेहो भेटल। अंतहीन प्रश्न जे मोनके परेशान केने अछि ओ ई थिक जे एहि टूटल पाथर, भवन, अट्टलिका, आ स्थानके रहस्य कोना खुजत????
ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ।
जीवन-मरण- उपन्‍यास-जगदीश प्रसाद मण्डल
पोथीकेँ (तेसर संस्करण) तत्‍खनात् व्‍यक्तिगत रूपे सोझहा आनल जा रहल अछि...।
-लेखक
समर्पण
मिथिलाक वृन्‍दावनसँ लऽ कऽ बालुक
ढेरपर बैसल फुलवाड़ी लगौनिहार
संगे नव विहान अननिहारकेँ

Suggested citation: डॊ कैलाश कुमार मिश्र. “राजस्थान केर मंडोवरमे रावण आ मंदोदरीक विवाह: लोक इतिहास केर मूर्त आ अमूर्त प्रमाण.” Videha — First Maithili Fortnightly eJournal, issue 216, 2016-12-15. https://www.videha.co.in/research/2016/216/राजस्थान-केर-मंडोवरमे-रावण-आ-मंदोदरीक-विवाह-लोक-इतिहास-केर-म-976f0766fa.htm

मूल विदेह अंक / Original issue