विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका · VIDEHA · ISSN 2229-547X

नेपाल मे मैथिली गीत-संगीतक अवस्था

दिनेश यादव · 2017-01-01 · अंक 217

दिनेश यादव
नेपाल मे“मैथिली गीत-संगीतक अवस्था”
१. उठू यौ मैथिल भेलैय फोर,
चुनमुन चिरैया करैय शोर,
कोशी कमला अमृत जलधारा,
आलस छोडु कहे भुरुकुवा तारा .....
–विनित ठाकुर
२. हम छी मैथिलबाबु, मेड इन मिथिला...
–डिजे मैथिल
३. चल–चल रे अपन देश,
स्वर्ग स सुन्दर अपन मधेश.....
–कालीचरण वैठा
नेपालक मिथिला क्षेत्र गीत-संगीत मे कतेक धनि अछि, तकर प्रमाण थिकैह यी उपर देल गेल तीन रचना । पहिल गीत मे समग्र मिथिलाबासी के उठबाक आग्रह अछि, दोसर मे पहिचान आ तेसर में अपन भूमि के बखान कयल गेल अछि । कोनो आन भाषा-भाषी से ई बेजोड सिर्जना कनिको दुबर नए अछि । ऐहन रचना कएनिहार स“ भरल–पुरल अछि नेपालक मिथिला क्षेत्र । गाम–गाम आ जन–जन के बोली एही“ मे समटल गेल अछि । त“ईयो मिथिला कुहरी काट्बाक बाध्य अछि । एकर कारण बहुतो अए, आ भ“ सकैत छैक ।
मिथिला क्षेत्र मे ‘देवराज’ सभहक कमी, ‘दैत्यराज’ आ ‘दानवराज’ सभ बढि गेला के कारण समस्या अछि । ‘भगवती’ नए ‘अग्गती’ सभ बड बेसी भ“ गेल छन्हिन, मिथिला क्षेत्र में । त“ई हरेक क्षेत्र में सम्पन्न रहितौ मिथिला हुक्कहुक्की ल“ रहल अछि । नेपालक मिथिला क्षेत्र मे टक्का के“ लेल बेसी आ मैथिली गीत-संगीत, साहित्य-संस्कृति आ कला-परम्पराक उन्नति आ प्रगतिक लेल कम काज भ“ रहल छैक । आजू मिथिलाक जन–कोकिलकवि विद्यापति किछु खास वर्ग, जाति आ धर्म विशेषक बैन (तन्खाह) कमेबाक माध्यम बनल अछि । बनिहारी सभ एतेक बेसी भ“ गेल अछि जे हुनका सभ के मात्र बैन चाही, आर किछु नए । एहेन गतिविधि नेपालक मिथिला क्षेत्र मे मात्र नए, भारतक मिथिला क्षेत्र मे सेहो ओतबे भेटत ।
एतेह विद्यापति के नाम पर करोड टाकाके“ अक्षयकोष खडा सरकार केने छए, मुदा नाताबाद, कृपाबाद, गुटबाद आ जातिबाद के कारण कोष स्थापना काले स“ विवाद मे फसल अछि । त“ई आब विद्यापति के नाम पर घोषणा होमेवाला पुरस्कार-पदक मे ग्रहण लागल बुझाएत अछि । पुरस्कार प्राप्त कएनिहार सभ के ‘मन–कोत’ भ“ जाए छन्हि, ओ सभ मन स“ पुरस्कार लेबाक अवस्था मे नए थिकैह । मिथिला रत्न, वरिष्ठ गायक एवं संगीतकार गुरुदेव कामत एहीं विषय पर निक प्रतिक्रिया देने छन्छि । ओ कहैथ छन्हि, ‘महाकवि विद्यापति के प्रख्याति आ बेजोड चिनारी गायन-गायक क्षेत्र स“ भेल रहैए । गायक सभ हुनक गीत गाबी–गाबी के हुनका चर्चा मे अनने रहन्हि । हुनक नाम मे स्थापना भेल पुरस्कार अखनधरि गायक आ संगीतकार के नय, साहित्यकार आ अनुवादक के मात्र भेटलइए । ई दुखद बात थिक ।’ कामत कहैथि छन्हि, ‘पा“च विद्या मे ७ वर्ष स प्रदान कयल जा रहल इ पुरस्कार स्थापना काल स विवाद मे अछि । हम सभ सक्रिय रुप स“ एही क्षेत्र मे वर्षौ स लागल छि , नए भेटल त नया“ पीढी के इ पुरस्कार भेटनाए मुस्किल अए ।’ विद्यापति के नाम भजेनाए असल मिथिलाप्रेमी के आब बन्द करै पडत । कम स कम आबो मिथिला गीत-संगीत मे दशकों लागत आ सक्रिय लोकन्हि के खोजि होबाक पक्ष मे ओ छथि । वरिष्ठ गायक कामत आगा कहैथि छन्हि जे किछु लोक पोखरी मे जन्मल जलकुम्भी जका बनि बसल अछि । कनिको हावा बहल त एही महार कात स ओही महार कात चलि जाएत अछि । एहा“ दुखद बात अछि । हुनक बात किनको बेजाय लागि सकैत छन्हि । मुदा वास्तम मे मिथिला क्षेत्र मे पाछा स“ पैर(खुट्टा) खिचनिहार सभहक कारण मैथिली गीत-संगीत के जतेक प्रगति होबाक चाही से नए भ रहल अछि । किछु स्वनामधारी ‘कलाकार’ सभ वर्षौवर्ष अही क्षेत्र मे लागल लोकन्हि सभ के छुत जका व्यवहार क“ रहल छन्हि । एहेन अवस्था मे बहुतो के मन खिन्न होनाए स्वाभाविक छए ।
एतह के मैथिली गीत-संगीत क्षेत्र मे मुठ्ठीभरी लोकनिक हालीमुहाली छए, ओ सभ के गरिब, दरिद्र आ कलुषित एवं संकिर्ण मानसिकताक कारण ‘कार्टेलिङ’ के स्थिति देखबा मे आबि गेल अछि । एक–दोसर के सम्मान त दुरक बात, पुछोताछो होनाए बर्जित जका भ गेल छैक । युवा पीढि सभ फेसनक लेल अहीं क्षेत्र के प्रवेश क“ रहल अछि , व्यवसायिक दिस किनको चिन्ता नए । सभ के सभ मैथिली भाषाक नाम पर अपन–अपन खेति मे लागल अछि । त“ई कोनो लोकविशेष बेसी काल धरि एही मे टिकबाक हिम्मत नए जुटा पाबि रहल अछि । अपना के ‘सुपरमेसी’ मानएवला लोकन्हि सभ के कारण यी क्षेत्र दिनानुदिन दरिद्र, निसहाय आ मसोमात आ मुहदुब्बरा के श्रेणी मे पहु“चल जा रहल अछि । एक कहबी अछि जे अपन सिर्जना के टक्का स“ तौलबाक प्रयास नए होबाक चाही । मुदा ई बात बुझत के ?
दोसर बात, विवादास्पद व्यक्ति सभ स“ नेपालक मैथिली गीत-संगीत जकरल अछि । त“ई एकर उथान आ प्रगतिक धरातल कमजोर भ“ गेल छैक । एकेटा मनुस जे ‘जेटिए’ पद मे रही सरकारी सेवा क“ रहल छन्हि आ गीतकार, संगीतकार, नाटककार, विज्ञापनकार, गायक, पत्रकार, रेडियोकर्मी, लेखक, विश्लेषक, अधिकारकर्मी, अभियानकर्मी, संस्कृतिकर्मी, राजनीतिकर्मी, भाषाकर्मी, एनजीओकर्मी.......बनि मिथिलाक के नाम पर बनियागिरी क“ रहल अछि । अहिठाम ई कही दिई जे ओ हुनक बहुआयामिक प्रतिभा भ सकैत छन्हि , मुदा हुनक ‘सिन्डीकेट प्रथा’ अहिठाम बर्जित होनाए अति आवश्यक अछि । किएत त हुनक ई ‘दुलर्भ प्रतिभा’ मिथिला के गीत-संगीत के क्षय दिश उन्मुख क रहल छैक । मिथिला के ऐतिहासिक गौरव गाथा आ प्रतिष्ठा मे आ“च पहु“चा रहल छैक । प्रचार के लेल प्रचार मे जुटल लोक सभ ‘अलकत गगरी छलकत जाय’ से उपर नए उठि सकैति छैन्हि । त“ई आब कम से कम ई बनियागिरीक अन्त्य होमाक चाही । रेडियो मे अपने प्रस्तोता,अपने गायक आ अपने गीत बजोनाए जौ बन्द भ जाए त मिथिला सटसिन आ सुहगनगर रुप से उपर उठि जाएत ।
नेपालक मिथिला क्षेत्र सप्तरी मे जन्मनिहार उदितनारायण झा मैथिली गीत-संगीत स“ बेसी भारत मे हिन्दी गायक के रुप मे परिचित अछि । सिरहा के मुरलीधर मैथिलीक धरोहर थिकैह, मैथिली गीत-संगीत मे हुनक योगदान अतुलनीय छैक । मैथिली फिल्म स“ ल“के मिथिला कला-संस्कृति के जगेर्ना मे हुनक जोडा नए । मुदा ओहो मिथिला क्षेत्र मे पिछला समय देखल जा रहल गलत परिपाटी स दुखित छन्हि । किछु वर्ष पहिले काठमाण्डू के एक बेर भेट मे ओ कहने छलाह, ‘अपन माटीपानी के मौलिक पहिचान आ बोली जाधरि मिथिलाकर्मीक जूनुन नए बनत, मैथिली के विकास, प्रर्वधन, उन्नति आ प्रगति असम्भव अए । मिथिला मे नटवरलाल सभ बढि रहल अछि, एकरा रोकबाक दिस पहल जरुरी भ चुकल अछि ।’ एही बेरक विद्यापति पुरस्कारक लेल हुनकर नाम सेहो सिफारिस भेल । मुदा जे विद्या मे ओ कहियो काज नए केने रहन्हि ओई के लेल हुनका पुरस्कार देबाक निर्णय भेल । भाषा अनुवादक लेल हुनक नामक चयन कएल गेल । मुदा मुरलीधर मात्र एहन मिथिलापुत्र आ योद्धा निकलल जे लाख टका के ओ पुरस्कार प्रदान कएनिहार सभ के विरोध केलन्हि ।
अहिपारक मैथिली गीत-संगीत मे महत्वपूर्ण योगदान कएनिहार मे गुरुदेव कामत के नाम सबसे उपर अछि । ओ नेपालक शास्त्रिय संगीतक एक धरोहर थिकैह । मिथिला क्षेत्र के दुर दराज गाम मे जन्मि के नेपालक राजधानी मे अखन एक स्थापित कलाकार बनल अछि । बहुतो मिथिलाबासी के ओ अपन शिष्य बना के“ मैथिली गीत-संगीतक उथ्थान आ प्रगतिके अभियान मे जुट छन्हि । कामत काठमाण्डू मे गुरुकूल संगीत महाविद्यालय खोली बहुतो के संगीत आ गायन क्षेत्र मे अएबाक लेल निपुण बनबति दिक्षित केने अछि । हरेक वर्ष आ हरेक कार्यक्रम मे अपन माय के बोली मैथिली मे ओ गीत गेबेटा करैति छथि । तहिना नेपाली गीत-संगीत स“ अपना के स्थापित कएनिहार वरिष्ठ गायक रामा मण्डल के मैथिली भाषाक गायन मे बड बेसी योगदान अछि । हुनक हमेसा प्रयास रहैत छैक जे मैथिली गीत-संगीत आगा बढए, मुदा किछु मिथिला अभियान हुनका साथ छुत के व्यवहार करैति छन्हि । आधा दर्जन स बेसी मैथिली सिडी-एलबम मे हुनक आबाज लोकप्रिय मात्र नए संग्रहणीय छन्हि । उपर उल्लेख कयल गेल लोकन्हि सभ व्यावसायिक रुप स एही क्षेत्र मे लागि अपन मु“हक लेल माड(रोटी) जुटा रहल अछि । अहीं पार मैथिली गीत-संगीतक श्रीबृद्धि करबा मे गायक हरिशंकर चौधरी, कमल मण्डल, सन्तोष कुमार, अभास लाभक योगदानक चर्चा नय केनाए अन्याय होइत । एही क्षेत्र मे नवप्रवेशी सभ सेहो पंक्तिबद्ध भ टाड अछि । भागवत मण्डल, कैलाश झा, अन्जू यादव, अन्जली पटेल, रञ्जित शर्मा, संजय यादव, अरुण बिजया, तनुजा चौरसिया, वीरेन्द्र झा सनक गायक सभ नेपालक मैथिली गीत-संगीत क्षेत्र मे बेजोड योगदान क रहल अछि । ओना त धिरेन्द्र आ रुपा सेहो गायन क्षेत्र मे अए, मुदा हुनक गायन ‘स्वप्रचार’ अभियानक कारण मात्र चर्चा मे अछि । पुरान लोक होइतो ई दुइ गोटा के गीत-संगीत घर–घर के नए बनि सकल अछि । हेल्लो मिथिला कार्यक्रम आ हुनक चिनह जानल लोकन्हि के एफएम बाहेक मे हिनका सभहक गीत नहिए के बराबर बजाओल जाएत छैक ।
अही पारक मैथिली गीत-संगीत के विषय मे चर्चित गीत एवं संगीतकार कमल मण्डल के कहबी अए जे ई क्षेत्र स्थिति सन्तोषजन नए छैक । नवप्रवेशी के प्रोत्साहन कएनिहार लोकन्हि के बड अभाव छैक । गीत-संगीत के नशा लागल लोक सभ कोनो धरानी एही क्षेत्र मे प्रवेश त करैत छैक मुदा बेसी दिन टिक नए पायब रहल अछि । कारण रेडियो-टेलिभिजनलगायतक के संचार माध्यम मे स्थानीय कलाकार सभ प्रस्तोता के रुप मे रहला स ओ सभ अपन आ चिन्ह्ल लोकन्हि के मात्र स्थान दैति छथि । ओ कहथि छन्हि, ‘मैथिली भाषा क्षेत्र मे धमाधम रेकर्डिङ स्टुडियो सभ खुजि रहल अछि । एकरा सकारात्मक रुपमा ल सकैत छि । अही“ क्षेत्रक भविष्य इजोत अछि ।
नेपालक मिथिला भूमि मे“ मैथिली साहित्यकार, गीतकारक सेहो कमी नए अछि । हुनका सभक योगदान मिथिलाक अनुपम पु“जि कही सकैत छि । कालिकान्त झा ‘तृषित’, विनित ठाकुर, सागरवीर कडारी, अर्जून गुप्ता, डिजे मैथिल,जेएन झा, कालीचरण वैठा सभ के मैथिली गीत रचनामे अतुलनीय योगदान रहलैए आ अइछे । हिनका सभहक गीत में जन–जन के जिभक आबाज सुनल जाएत छैक । ओना त मैथिली गीतकार मे आन लोक सेहो छैथि । ओही मे प्रमुख नाम राजेन्द्र विमल, अशोक दत्त, सुनिल मल्लिक आ धिरेन्द्र प्रेमर्षी के ल“ सकैत छि । मुदा ओ सभ मैथिली भाषी के लेल कम सरकारी आ गैरसरकारी संस्था के लेल बड बेसी गीत लिखैत छन्हि । ‘पैसा फेकु आ तमासा देखु’ बला भूमिका मे अही मे स“ किछु गोटा के ल सकैत छि । अही म स एकटा मान्यवर मिथिला क्षेत्र मे रही के नेपाली भाषा-साहित्यक मे योगदान करबाक लेल लाख टका के पुरस्कार सेहो ग्रहण क चुलक अछि । रेडियो मे हिनका सभहक पकड भेला के कारण हुन सभक बजाओल जायत अछि मुदा मैथिलीजन के मन स“ गुनगुनाय के कोटी मे नए रहैत छैक ।
युवा गीतकार विनित ठाकुर मिथिला क्षेत्रक एक संभावनायुक्त आ प्रतिभाशाली हस्ताक्षर अए । हुनक गीत सभ ‘इभर ग्रीन’ आ मन के झक्झोरै बाला कोटी मे रहैत छन्हि । हुनक कहब अछि जे नव–नव गायक सभ के इन्ट्री के बाबजूदो नेपाल मे मैथिली गीत-संगीतक अवस्था सन्तोषजनक नए छैक । किएक त बिना प्रशिक्षण के ओ सभ अहीं क्षेत्र मे प्रवेश कर रहल छन्हि । विचौलिया सभ स नवप्रवेशी तंग भरहल अछि, कम पाई मे एलबम आ गीत-संगीत उपलब्ध करा देब कही के ठगि सेहो भ रहल छैक । त“ई नव शब्द आ गीतक विन्यास मे कमजोरी भेला के कारण अश्लिल सब्द सभ सेहो पसरल जा रहल अछि । मैथिली गीत-संगीतक मौलिक टेस्ट आ फ्लेभर मे हिन्दी, भोजपुरी आ अंग्रेजी भाषा के प्रभाव सेहो बहुत बढी गेल छैक । त“ई मैथिली गीत-संगीत संक्रमण अवस्था मे छैक ।
ठाकुर आगा कहैथि छन्नि, ‘उपर उठेबाक लेल मिडिया के महत्वपूर्ण हात होयत छैक । मुदा मिडिया मे मैथिली के नाम पर किछु गलत व्यक्ति के पहु“च भेला स“ समस्या मे पडल अछि । व्यक्तिबादी सोच हाबी भेला के कारण अपने गीत-संगीत के प्रचार मे किछु मनुस लागल रहैत छैक । एफएम और केन्द्रिय रेडियो मे काज कएनिहार सभ ‘हमही सबा सेर छी, अउर सभ किछु नए’ तेहेन अभियान मे छथि । केन्द्रक ई रोग नेपालक तराई–मधेस मे संचालन भ“ रहल रेडियो सभ मे से हो पैसरी गेल अछि, देखल जा रहल अछि । अधिकांश स्थानीय एफएम रेडियोमे ओतएह के गायक सभ प्रस्तोता भेला के कारण अपन गीत-संगीत बाहेक दोसर के बजेनाए मुनासिब नए मानैत छैक ।’ एक मुखी हैकम के कारण मैथिली गीत-संगीत के विकास मे समस्या छैक । त“ई एकरा तोडबाक दिस सबगोटा अग्रसर हउ ।
ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ।

Suggested citation: दिनेश यादव. “नेपाल मे मैथिली गीत-संगीतक अवस्था.” Videha — First Maithili Fortnightly eJournal, issue 217, 2017-01-01. https://www.videha.co.in/research/2017/217/नेपाल-मे-मैथिली-गीत-संगीतक-अवस्था.htm

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