विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका · VIDEHA · ISSN 2229-547X

महाराजा पंहिबा: मणिपुर केर गरीब नबाज़

डॉ. कैलाश कुमार मिश्र · 2017-01-15 · अंक 218

महाराजा पंहिबा: मणिपुर केर ग़रीब नबाज़
अजमेर केर हजरत ख़्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती (1141-1236) के ग़ुरबतमे जीवन जिबैत लोकसँ आ जनसाधारणसँ अगाध प्रेमके कारण ग़रीब नबाज़ कहल जाइत छनि। मुग़ल बादशाह अकबर महान (1542-1605) के ग़रीब नबाज़ केर नामसँ जानल जाइत छैक। ओ प्रजावत्सल छला, ग़रीब, दुखी एवं असहाय के मदति करैत छला। "ग़रीब नबाज़" शब्द लोक कंठमे एना बैस गेलैक जे आर त आर महाकवि तुलसीदास (1497-1623) अपन अजेय कृतिरामचरितमानसमे भगवान राम लेल ग़रीब नबाज़ (गरीबनेबाजू) शब्दके प्रयोग करैत एक पद लिख लेला:
गईबहोर गरीबनेबाजू।
सरल सबल साहिब रघुराजू।।
बुधबर नहि हरि जस अस जानी।
करहि पुनीत सुफल निजबानी।।
एकर अर्थ भेल, “प्रभु रघुनाथ हेरायल या हाथसँ चलि गेल वस्तुके फेरसँ आनि सकैत छथि, ग़रीबनबाज़ (दीनबन्धु) , सरलस्वभाव, सर्वशक्तिमान आ सबहक स्वामी छथि। यैह बात बुझि गुणीजन ओहि श्रीहरि केर यशगानसँ अपनवाणीके पवित्र आ उत्तम फल देब' बला बनबैत छथि।”
आश्चर्य तखन भेल जखन पूर्वोत्तर भारतके एकांतमे बसल राज्यमणिपुरमे अपन प्रवासक दौरान हमरा पता चलल जे मणिपुरके गौरवमय इतिहासमे सेहो एक प्रतापी, प्रजापालक, सम्यक, सहिष्णु राजा भेला जिनकर नाम ग़रीब नबाज़ छलनि।
मणिपुर केर कुकी आदिवासी समुदायके डॉ. Leban Serto दिल्लीविश्विद्यालयमे हमर सहपाठी छला। काल्हि हुनकर एक मैसेज देखल जाहिमे ओ लिखने छथि जे दू आदिवासी समूह, नगा आ कुकीके बीच झगड़ाके चलते पूरा मणिपुर अस्त-व्यस्त भेल अछि। नेटवर्क या त बंद छैक अथवा कतौ कतौ बहुत मंथर गतिसँ चलि रहल छैक। लेबानके ई दुःख छनि जे अगर स्थिति अहिना रहलैक त क्रिसमस आ नववर्ष केर शुभकामना संदेश ओ अपन मित्रके नहि द पेताह। ताहि ओ 17 दिसम्बरक एडवांसमे सबके दुनु चीज़क शुभकामना द देलथि। दुर्भाग्यसँ हमरा लोकनि मणिपुर आ पूर्वोत्तर भारतके संबंधमे बहुत बातसँ बंचित छी। हम सब मीडिया द्वारे ई जरूर जनैत छी जे मणिपुरमे सेना आ सामान्य जनताके बीच सौहार्दय नहि छैक, आदिवासी आ गैर आदिवासीके बीच लड़ाई चलैत रहैत छैक, आदिवासी समाजक दू समहू, नगा आर कुकीके बीच युद्ध चलैत रहैत छैक, मारिकाट होइत रहैत छैक, सड़क जाम भ जाइत छैक, पेट्रोल 200 रुपया केर एक लीटर भ गेलैक, आदि-आदि। मुदा एहि राज्यके ऐतिहासिक , सांस्कृतिक, शैक्षणिक गौरव दिस ककर ध्यान जाइत अछि?
हमरा लोकनि बिसरि जाइत छी जे यूनान आ चीनके मध्य मणिपुर सिल्करूटसँ जुडैत अछि। समस्त पूर्वोत्तर भारतमे मात्र दू राज्य अछि जतयसँ सिल्करूट जाइत छैक, जाहिमे एकटा राज्य मणिपुर सेहो अछि। ईराज्य 32 आदिवासी जे मूलतः नगा आ कुकी ग्रुपमे बॉटल अछि केर अतिरिक्त मैती समाजक गढ़ अछि। अतै केर तीन हिस्सा धरती पहाड़ आ एक हिस्सा मैदान छैक। अतै केर लोक अति प्राचीन समयसँ युद्धकला, संगीतकला, घुड़सवारी, मल्लयुद्ध, मार्शलआर्ट, नृत्य, नाटक, गायन, चित्रांकन आदिमे प्रबुद्ध रहल छथि।
कहब त दंतककथा लागत मुदा ई शुद्ध ऐतिहासिक तथ्य छैक जे इसामसीहके जन्मसँ 33 वर्ष पूर्व मणिपुरके लिखीत इतिहास केर दस्तावेज उपलब्ध छैक। कहबाक तात्पर्य ई की जखन भारतके बहुत तथाकथित विकसित प्रान्त सबमे कुनो लिखित इतिहासके प्रथा नहि छल मणिपुरमे लिखित आ क्रमबद्ध लिखित इतिहास केर परंपरा रहल अछि। अतै बहुत राजा, राजकीय व्यवस्था, वंशावली आदि भेटत जे अहाँके मानय लेल बाध्य करत जे मणिपुर कुनो सामान्य राज्य नहि अछि। छोट छैक त की भेल, बहुत गौरवपूर्ण इतिहास आ परंपराके समेटने अछि।
चलु बात करैत छी मणिपुर केर महाराजा ग़रीबनबाज़ केर सम्बन्धमे। ग़रीबनबाज़ के बात करैत छी त एक बात आरो स्मरण आबि गेल। एक संगोष्टीमे हम मणिपुर केर राजधानी इम्फालमे भाषण दैत रही। हमरा संगे पद्म श्री आर. के. जिलाजित सिंह बैसल छला। बिलकुल मैथिल पंडित जकाँ धोती कुर्ता पहिरने, कपारमे गोल ठोप लगेने, कान्हपर गमछा धारण केने। जखन हमर भाषण समाप्त भेल त ओ कहलनि: "अहाँ विद्यापति केर भूमिसँ छी। अहाँसँ नीक बात सुनबाक आकांक्षा छल। अहाँ आकांक्षाके पूरा केलौं। मणिपुर केर सेहो मिथिला जकाँ बौद्धिक, सांस्कृतिक गौरवपूर्ण इतिहास छैक। एकर सामरिक इतिहास, युद्धकौशल केर इतिहास बहुतों प्रदेशसँ उत्तम छैक। अतै एक राजा छला जिनका हमरा लोकनि ग़रीब नबाज़के नामसँ जनैत छी। अगर अहाँ संगे बैसब त निश्चिन्तसँ हुनकर सम्बन्धमे चर्चा करब।"
अहि तरहेँ पद्मश्री जिलाजित सिंह हमरा मोनमे ई अद्भुत इतिहास जनबाक इच्छा जागृत क देलनि। बादमे कतेक दिन हुनकासँ आ आनो लोक सबसँ ग़रीब नबाज़पर चर्चा भेल। ई बात 2006 ईस्वीके अछि। सुनल इतिहासके जे बात सब स्मरण अछि तकरा आई यथावत लिखबाक प्रयास क रहल छी। हमर लेखनी संगे यात्रा करु बहुत आनंदित हैब। नव बात सुनब। भारतक संस्कृति केर एक क्षेत्र केर महानता सुनि समग्रतामे भारतपर गर्वक अनुभूति हैत।
त इतिहासक एक कथा प्रारम्भ करैत छी।ग़रीब नबाज़ मणिपुरमे 1709 सँ 1748 ईस्वी धरि अर्थात क़रीब 4 दशक धरि राज केलनि। हिनकर पिताक नाम छलनि महाराजा चेराई सोंगबा। ग़रीबनबाज़ मणिपुरी नाम कुनो दृष्टिकोणसँ नहि बुझना जाइत अछि। लोक सब कहलक जे मणिपुरी सब हिनका पंहिबा कहैत छलनि। यद्यपि ई समस्त ग़रीब नबाज़के रूपमे ख्याति पौने छथि। ई पूर्णतः मुसलमानी नाम छैक जे कदाचित असममे मुस्लमानके आबि जेबाक कारणे मणिपुरमे एहि तरहक शब्द अपन वैशिष्यके कारण प्रचलनमे आबि गेल होइक। अहि बातपर सेहो इतिहास आ मानवशास्त्र केर विद्वान शोध क सकैत छथि।
हालाँकि किछु विद्वानके मानव छनि जे सांस्कृतिक विस्तारवादके कारण भारतक लोक शायद हिनका ई नाम देलथिन जाहिसँ मणिपुरके सेहो भारतीय पुरातन आ समग्र परंपराके हिस्सा बुझल जा सकै। भइयो सकैत अछि जे मुग़ल अपन विस्तारवादी नीतिके कारण किछु एहेन केने हो। भ किछु सकैत अछि। पियाऊज केर छिलकाके परत त उखारब तखने पता चलत जे यथार्थ आखिर की छैक? खैर! अंगरेज सबके मानब छनि जे ग़रीब नबाज़ आदिवासी समाजसँ छला। लेकिन मणिपुरकेर अधिकांश लोक आ जिलाजित सिंहके मानव छनि जे गरीब नबाज़ ओतै केर राजाक पुत्र छला। से कोना? एहेन मान्यता छैक जे ई अर्थात ग़रीब नबाज़ राजा केर दोसर पत्नीके पुत्र छला। रानी हिनका जन्मिते एक आदिवासी परिवारमे गुप्त रूपसँ पठा देलथिन। ओतए हिनकर लालन पालन होमय लगलनि। ई बहुत तेज आ बलशाली नेनेसँ छला। कहल जाइत अछि जे जंगल केर बाघ, शेर आ तमाम हिंसक जानवर हिनका संगे खेल खेलैत छल। ई निर्भीक भावसँ सब संगे रहैत छला। तीरधनुष आ अन्य जंगली युद्धविद्यामे माहिर भ गेल रहथि। मुदा हिनक पिताके एहि सम्बन्धमे कोनो जानकारी नहि छलनि।
महाराजा चेराई सोंगबाके पहिल रानीसँ कोनो संतान नहि छलनि। बल्कि हुनका हिसाबे कोनो रानीसँ हुनका पुत्र नहि छलनि। बूढ़ होब लागल छला। चिंतित छला जे हुनकर बाद राज सिंहासनपर के बैसतनि। एक दिन किछु सोचैत अपन सब रानीके बजेलनि आ कहलथिन: “देखु, हम आब बूढ़ भेल जा रहल छी। संतान होबाक उम्र समाप्त भ गेल। चिंता एहि बातक अछि जे हमरा बाद एहि राजगद्दीपर के बैसत। अगर अहाँ सबमे किनको पुत्र अछि जे हमरा ज्ञात नहि हो त हमरा सूचित करी अन्यथा हम अपन अधिकारी केर चुनाव आम जनतासँ कुनो पराक्रमी आ होनहार युवकके देखि करब।”
महाराज चेराई सोंगबाके एहि बातपर सब रानी चुप रहली। मुदा कनि कालमे शांतिके भंग करैत दोसर महारानी बजली: “महाराज, हमरा माफ़ कैल जाओ। हमरा एक पुत्र भेल छल। ओहि समयमे हम नैहरमे रही। चूँकि परंपराके हिसाबे पहिल रानीके पुत्र राजगद्दीके सम्हारैत छैक से सोचि हम अपन पुत्रके एक आदिवासी लग गुप्त रूपेँ भेज देल। ओ ओतहि रहि रहल छथि। बली छथि। पराक्रमी छथि। शारीरिक सौष्ठवमे विलक्षण छथि। राजपुत्र छथि। चूँकि आब एहि वंशके वारिश चाही त हमरा हिसाबे आ यदि सब रानी आ अपनेक अनुमति हो त हम हुनका बजा दैत छी। ओ अहाँक प्राकृतिक उत्तराधिकारी छथि।”
राजाक सँग सब रानी दोसर रानी केर एहि हर्षमय रहस्योद्घाटनसँ गदगद भ गेली। तुरंत आदमी भेजि ओहि पुत्रके राजमहलमे बजैल गेल। वैह युवक छला ग़रीब नबाज़।
ग़रीब नबाज़ राजाके रूपमे समदर्शी छला। प्रजा पालक छला। आदिवासी आ मैतीके बीच नीक आ सहिष्णु छला। सर्वप्रिय छला।पहिने मणिपुरमे चंनामाई संस्कृति छलैक मुदा धीरे धीरे वैष्णव संस्कृतिके प्रचार होमय लगलैक। ओ सांस्कृतिक, धार्मिक एकतामे विस्वास राखैत छला। आर त आर पडोसी वर्माके राजा के सेहो जित लेलनि आ वर्मा (आजुक म्यंमार) मे अपन सुधारक कार्यक्रम चलौलनि। मणिपुरके सीमा विस्तार करैत रहला। एक दिस वर्मा त दोसर दिस असम धरि आबि गेला। ई बहुत मजबूत आ कुशल प्रशासक छला।
एतबे नहि, महाराज ग़रीब नबाज़ बहुत तरहक चीज़ आ यंत्रके विकास केलनि। पहिल बेर टाइम मशीन केर निर्माण हिनका समयमे भेल। ई मशीन पानि आ किछु फेनेल केर एहेन युग्मसँ बनल छलैक जे सटीक टाइम देबामे सक्षम छलैक।
ग़रीब नबाज़ केर दोसर खोज अथवा विकास छलनि अरामबाई। ई अरामबाई की भेल? ई बहुत खतरनाक आ प्रलयंकारी अस्त्र थिक। एकरा महाराजा ग़रीब नबाज़ बिना ककरो मदतिके अपने हाथे निर्माण केला। ओहि समय केर ई सबसँ खतरनाक अस्त्र छल। घोड़सवार एकरा अपना डाँर लग बहुत सावधानीसँ रक्षाकवचके रूपमे राखैत छल। हुनका समयमे मणिपुरके सैनिक आ योद्धा घोड़सवारी, घोडाके नियंत्रण, अश्वयुद्ध केर सञ्चालन, भाँति भाँतिके घोडाके पालन आ ओकर प्रशिक्षणमे माहिर छल। बतबैत चली जे पोलो खेलके जन्मदाता मणिपुर रहल अछि। पोलोके कतेक धुरंधर एहि धरापर भेल छथि। एखनो इम्फाल शहर केर पोलो ग्राउंड जेना अपन गौरवमय इतिहास केर गाथा गबैत हो। घोडापर चढ़ल घोड़सवार सैनिक रणकौशलमे अतेक माहिर छल जे घोडाके एकदिशामे अर्थात पांज लग आबि दौड़ैत अवस्थामे सेहो घोडापर चढ़ल एक हाथे घोडाके लगाम आ दोसर हाथे तीर धनुष अथवा आरो कुनो दुर्दांतक अस्त्रसँ दुश्मनके ध्वस्त क सकैत छल। ओ आगासँ, पाछासँ, कातसँ आ घोड़ाक पांजर लगसँ कतौसँ अपन सस्त्र चला सकैत छल। शत्रुके स्वाहा क सकैत छल। सबसँ प्रमुख बात ई जे राजा ग़रीब नबाज़ सब बात अपन नेतृत्वमे करैत छला। अरामबाई बहुत प्रलयंकारी आ कुनो सैनिक हेतु अमोघ अस्त्र छल। आर त आर अंग्रेज सब सेहो एहि अस्त्रसँ प्रभावित छल। आ एकरा सम्बन्धमे बहुत रास बात अपन डायरीमे लिखने छथि। कारण ओहि समयमे अंग्रेज लग अहि तरहक कुनो अस्त्र नहि छलैक। आई काल्हि अरामबाईके भारतीय राष्ट्रीय खेलमे शामिल क लेल गेल छैक।
अहि तरहेँ महाराजा ग़रीब नबाज़ एक सर्वगुण संपन्न राजा छला। एक सफल राजा, सफल योद्धा, सफल सेनापति, अग्रचेति, दूरद्रष्टा, सफल प्रजापालक। मणिपुर केर सीमाके वर्माके ऊपरी भागसँ असमके सीमावर्ती क्षेत्र धरि विस्तार केलनि।
मणिपुर केर लोक, ओतै केर वस्त्र विन्यास, महिला द्वारे वस्त्र बुनबाक परंपरा, ओतय केर नृत्य, प्राकृतिक छटा, खानपान, आ स्वर्णिम इतिहास अहाँके अपना दिस आकर्षित करत। कनि हमर बात मानि थोरेक दिन भ आउ ने मणिपुरसँ!
ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ।

Suggested citation: डॉ. कैलाश कुमार मिश्र. “महाराजा पंहिबा: मणिपुर केर गरीब नबाज़.” Videha — First Maithili Fortnightly eJournal, issue 218, 2017-01-15. https://www.videha.co.in/research/2017/218/महाराजा-पंहिबा-मणिपुर-केर-गरीब-नबाज़.htm

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