रबीन्द्र नारायण मिश्र
वरिष्ठ नागरिक
सन् २००७ मे भारतवर्षमे माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकक भरण-पोषण एवं कल्याण कानून लागू भेल। ऐ कानूनमे मूलत: निम्नलिखित चारिटा बिन्दुपर धियान राखल गेल अछि-
१. माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकक आवश्यकताक अनुसार गुजाराक जोगार हेतु उपयुक्त बेवस्था माने उपयुक्त सरंजाम।
२. वरिष्ठ नागरिक हेतु वेहतर चिकित्साक बेवस्था।
३. वृद्ध लोकनिक जीवन एवं सम्पैत केर रक्षा हेतु संस्थागत बेवस्था।
४. प्रत्येक जिलामे वृद्धाश्रमक स्थापना।
उपरोक्त कानूनक अनुसार सन्तानक माने वालिग पुत्र, पुत्री, पौत्र, पौत्री अछि। साठि साल वा ओइसँ अधिकक कोनो बेकती विरिष्ठ नागरिककेँ कहल जाएत।
नि:सन्तान वरिष्ठ नागरिकक सम्पैतिक वारिस वा ओकर सम्पैतपर कब्जा रखनिहार वालिग बेकती ओकर सम्बन्धी मानल जेता। गुजारामे भोजन, वस्त्र,आवास एवं चिकित्साक उचित बेवस्था शामिल अछि।
प्रश्न अछि जे उपरोक्त कानूनक आवश्यकता किए भेल? अपन माटि-पानिक संस्करमे वृद्धजनकेँ सदैव आदर-भावसँ देखल जाइत छल। परिवारकेँ हुनकर ज्ञान एवं अनुभवक लाभ तँ भेटिते छल, संगहि सेवा सामान्य रूपसँ होइत रहैत छल। कालक्रमे संयुक्त परिवार टुटैत गेल। लोक गाम-घर छोड़ि कऽ नौकरी-चाकरीक जोगारमे महानागर चल गेल। गाममे वृद्ध असगर भऽ गेला।
शहरी वृद्धक हालत तँ आरो खराप होइत जा रहल अछि, कारण ओइठाम लोक अलग-थलग रहैत अछि। अड़ोस-पड़ोससँ कोनो मतलब नहि रहैत छइ।
उपरोक्त परिस्थितिमे बुढ़ सबहक हालत खराप होइत गेल। जीवनक अन्तिम वर्ष संघर्षमय एवं दुखद भेल जा रहल अछि। परिवारिक भावात्मक लगाउ कम भेल जा रहल अछि। केतेको वृद्ध लोकनिकेँ आमदनीक श्रोत नहि छैन आ परिवार उचित बेवस्था नहि करैत अछि। जिनका अधिक धिया-पुता अछि ओ सभ एक-दोसरपर फेका-फेकी करैत रहै छैथ।
उपरोक्त परिस्थिति निपटक हेतु एवं वृद्धजनक कल्याणक हेतु ई कानून बनल। ऐसँ पूर्व सी.आर.पी.सी.क अधीन राहत हेतु मोकदमा चलि सकैत छल,मुदा ओ बहुत जटिल प्रक्रिया अछि। निपटानमे बहुत समय लागि जाइत अछि।
२०१७ इस्वीसँ लागू उपरोक्त कानून बहुत असरदार अछि। ऐमे तीनसँ चारि महिनामे न्याय भऽ जाइत अछि। कोनो पक्ष वकील नहि राखि सकैत अछि। हरेक जिलामे ऐ हेतु न्यायाधिकरण अछि। न्यायाधिकरण मामलाक सार-संक्षेपमे सुनवाइ कऽ कऽ १० हजार रूपैआ मासिक तकक राहत दिया सकैत अछि। ऐ कानूनमे सभसँ विशेष बात ई अछि जे जँ माता-पिता किंवावरिष्ठ नागरिकक सम्पैत हुनक सन्तान किंवा सम्बन्धी लइ छैथ आ हुनकर पालन-पोषणमे कोताही करै छथिन तँ सम्बन्धित माता-पिता वा वरिष्ठ नागरिक न्यायाधिकरणमे दर्खास्त दऽ सकै छैथ आ न्यायाधिकरण के ओहन सम्पैत हस्तांतरणकेँ निरस्त करि ओइपर माता-पिता वा वरिष्ठ नागरिकक मालिकाना हक आपस दिया सकै छैथ। ऐ न्यायाधिकरणक निर्णयक विरूद्ध कोनो सिविल कोर्टमे सुनवाइ नहि भऽ सकैत अछि। जरूरत पड़लापर अपील जिलाधिकारीक समकक्ष अधिकारीक अध्यक्षतामे गठित अपीलीय न्यायाधिकरण ओइठाम कएल जा सकैत अछि।
ऐ कानूनकेँ लागू भेला पाँच बर्ख भऽ गेल तथापि गामसँ शहर तक वृद्ध-वृद्धा लोकनिक समस्याक समाधान नहि भऽ सकल। तेकर एकटा प्रमुख कारण ई थिक जे माता-पिता अपने सन्तानक विरूद्ध अवाज नइ उठबै छैथ। लोक लाजक कारणेँ परिवारिक विषयपर चर्चो नहि करए चाहै छैथ। अपवादिक मामलामे आसपासक लोककेँ पता लगैत छइ। थाना, पुलिस, कोर्ट, कचहरी के करत? जीवनक संध्यामे ऐ तरहक फसाद करब संभव नहि बुझाइत अछि। समस्या मात्र आर्थिक नहि अछि। वयोवृद्ध लोकनिकेँ शारिरिक अक्षमता एवं निर्भरता बढ़ैत जाइत छैन। जँ पैसा बैंकमे ऐछो तँ आनत के? जँ कियो आनियोँ देलक तँ रोज-रोज वस्तु-जात केना आएत? आबियो जाएत तँ ओकर उपयोग वा मनोनुकूल कऽ सकता तइ बातकेँ के सुनिश्चित करत? जे बात हृदय एवं श्रद्धासँ भऽ सकैत अछि ओकरा कानून द्वारा लागू केना कएल जाएत? जइ वृद्ध सभकेँ सन्तान नहि अछि, हुनक समस्या आर जटिल रहैत अछि कारण निकट सम्बन्धी हुनकर सम्पैतपर धपाएल रहै छैथ आ सम्पैत कब्जा करिते निपत्ता..!
भारतीय संविधानक चारिम भागक ४१म अनुच्छेदमे वृद्ध लोकनिक हित रक्षा करबाक परामर्श अछि। मुदा ई दिशा निर्देश हेबाक कारणेँ कानूनी अधिकार नहि दैत अछि।
हिन्दू दन्तक ग्रहणसँ भरण-पोषण अधिनियम, १९५६क अधीन पहिल बेर कानूनी तौरपर बेटा एवं बेटीकेँ माता-पिताक पालन-पोषण करबाक जिम्मेदारी देल गेल। अपराधिक प्रक्रिया संहिताक धारा१२५ मे पहिल बेर सन् १९७३ मे बेवस्था कएल गेल जे आर्थिक रूपसँ सक्षम सन्तानकेँ माता-पिताक भरण-पोषण करबाक कानूनी दायित्व अछि। मुदाऐ कानूनकेँ बेवस्थाक अनुसार ज्यादासँ ज्यादा ५०० रूपैआ प्रतिमास माता-पिताकेँ भेट सकैत छैन। उपरोक्त रकम वर्तमान समयमे देखैत हास्यास्पद लगैत अछि। ई कानून सभ धर्मक लोकपर लागू होइत अछि।
वृद्ध लोकनिक भरण-पोषण हेतु सभसँ धारदार कानून माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकक भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम २००७ अछि। वरिष्ठ नागरिकक जीवन संध्यामे आर्थिक कष्टक निवारण हेतु रिभर्स मोर्गेज स्कीम २००८ आनल गेल अछि। ओअपन अर्जित मकानकेँ बैंकक पास बन्धक राखि कऽ ओइ एवजमे आजन्म मासिक आय प्राप्त कऽ सकै छैथ, संगे मासिक आय प्राप्त कऽ सकै छैथ, संगहि ओइ मकानमे रहियो सकै छैथ।हुनकर मृत्युक पछाइत हुनकर उत्तराधिकारी बैंकक ऋृण सूद सहित अदा कऽ मकान आपस अपना नामे करा सकै छैथ अन्यथा बैंक ओइ मकानकेँ बेचि कर्जक रकम चुकता कऽ सकैत अछि।
एहनो वृद्ध छैथ जिनका ने सन्तान अछि आ ने सम्पैत। ओ की करता? कानूनसँ हुनका कोनो मदैत संभव नहि? बहुत रास वृद्धक सन्तान परदेशमे नौकरी आकि बेवसाय करै छथिन। एहेन बुढ़ सभ मजबूरीमे शहर अपन सन्तान लग चलि जाइ छैथ मुदा ओइठाम हुनका मन नइ लगै छैन। गाम-घर छुटबाक दरेग हरदम मनमे कचोटैत रहै छैन। सारांश जे वृद्धजनक जीवन-यापन एवं समुचित बेवस्था एकटा गम्भीर समस्या भऽ गेल अछि चाहे ओ गाम हो, शहर हो,धनीक हो वा गरीब। सभ ऐ समस्याक शिकार छैथ। सभकेँ एक दिन ऐ परिस्थितिसँ गुजरबाक छइ। जे आइ युवक अछि, काल्हि ओहो वृद्ध हएत। समाजिक परिस्थिति क्रमश: बिगैड़ते जा रहल अछि। धिया-पुता जे देखत सएह ने आगू करत। ई बात सभ सोचैत अछि मुदा किछु मजबूरीमे आ किछु लापरवाहीमे घरक बुढ़केँ काहि काटक हेतु विवश छोड़ि दइ छैथ।
बुढ़ चाहे वयोवृद्ध लोकनिसँ जुड़ल एक-सँ-एक घटना नित्यप्रति समाचार पत्र, रेडियो, दुरदर्शनपर अबैत रहैत अछि। एकटा एहने घटना किछु दिन पूर्व दिल्लीमे घटल।
एक वृद्ध महिलाक पतिक मृत्यु भऽ गेल छेलैन। दिल्लीमे हुनका आलीशान भवन छेलैन। पुत्र अमेरिकामे काज करैत रहथिन। बहुत दिनपर पुत्र दिल्ली एला आ माएकेँ अपना संगे चलबाक प्रस्ताव केलखिन।
बेटाक बातसँ माए बहुत प्रसन्न भेली। दिल्लीक एकाकी जीवनसँ ओ तंग भऽ गेल छेली। बेटा कहलखिन जे जखन सभ गोरे अमेरिकामे रहब तँ दिल्लीक घरक की हएत? से नइ तँ एकरा बेचि लेनाइए ठीक रहत।
माए सहर्ष ई प्रस्ताव मानि लेलैथ। दिल्लीक मकान बेचि देल गेल। सभटा रूपैआ बेटाक एकाउन्टमे जमा भेल। तेकर बाद सभ कियो दिल्ली हवाई अड्डा पहुँचला। अमेरिकाक यात्राक क्रममे। माएकेँ बाहर बैसा देलखिन, ई कहि कऽ जे टिकट कटा कऽ आबि रहल छैथ। माए बाहर प्रतीक्षा करैत रहली आ ओ कथीले आपस एता। जखन बहुत समय गुजैर गेल तँ पुलिस ओइ वृद्धा लग आएल आ ओकर बात बुझलक।
तखन हठात् पुलिस कहलकै जे अमेरिकाक जहाज उड़ला तँ घण्टो भऽ गेलइ। ओकर बटा माएकेँ छोड़ि कऽ अमेरिका चल गेल। बुढ़िया असगर कनैत रहल...।
ई बात ओकर मकान कीननिहारकेँ सेहो पता लगलैक। बुढ़ियाकेँ अपन घरमे एकटा छोटसन जगह देलकै। बेटा घुरि कऽ कहियो हाल-चाल लेबए नहि आएल।
अपन सन्तान लोककेँ केतेक धोखा दऽ सकैए तेकर ई उदाहरण अछि।
दिल्ली विश्वविद्यालयक विधि विभागक प्रोफेसर लोतिका सरकारक खिस्सा लोमहर्षक अछि। दिल्लीक K-१/१० हौजखास इनक्लेभमे हुनकर घर छल जेकरा हुनकर परिवारिक मित्र हथिया लेने छला। घटनाक्रम तेहेन भेल जे हुनका अपनहि घरसँ बाहर होमए पड़ल। तखन हुनकर इष्ट-मित्र सभकेँ ऐ बातक जानकारी भेटल।
८७ वर्षीय प्रो. लोतिका सरकारक तरफसँ समाजिक संगठन वरिष्ठ नागरिक ट्राइवूनलमे केस केलक। तमाम पूछ-ताछक पछाइत उपरोक्त ट्राइवूनल लोतिका सरकार द्वारा कथित उपहारमे देल गेल अनुबन्धक रक्षक हुनकर घर हुनका आपस दियौलक।
लोतिका सरकारक सम्पैत हरपनिहार एक उच्च पदस्थ पुलिस अधिकारी छला जे हुनकासँ दोस्तीक स्वांग करैत-करैत हुनकर कीमती घरकेँ कब्जिया लेला।
जँ दिल्लीक संभ्रान्त समाजक मदैत नहि उठाबैत तँ प्रो. लोतिका सरकारक अपन सर्वत्र लूटा गेल छल। सेहो केहेन बेकती द्वारा जे स्वयं अति शिक्षित उच्च पदस्थ पुलिस अधिकारी छला। रक्षको पक्ष भक्षक सावित भऽ रहल छल।
होमपेज इण्डिया द्वारा कएल गेल एकटा सर्वेक्षणक मुताबिक प्रत्येक तीनमे सँ एक वृद्धकेँ परिवारिक लोक द्वारा प्रतारणाक सामना करए पड़ैत छैन। ५६ प्रतिशत एहेन मामलाक हेतु पुत्र एवं २५ प्रतिशत मामलामे पुत्रवधु जिम्मेदार होइ छैथ। ऐमे सँ आधासँ अधिक वृद्ध एहेन घटनाक बारेमे मूलत: परिवारिक प्रतिष्ठाकेँ धियानमे रखैत केकरो नहि कहैत छैथ। एहेन घटना मध्य प्रदेशमे सभसँ अधिक (४७.९२ प्रतिशत) आ राजस्थानमे सभसँ कम (१.६७ प्रतिशत) भेल। अधिकांश वृद्धक धारणा अछि जे वृद्ध लोकनिक दुर्दशा रोकबाक हेतु धिया-पुताकेँ सचेष्टकरब जरूरी अछि। वृद्ध एवं बच्चाकेँ आपसी सिनेह एवं सामंजस बढ़ाएब जरूरी अछि। अर्जित आत्म निर्भरता सेहो जरूरी अछि। वृद्धजनकेँ संयुक्त परिवारमे रहबाक बेवस्थाकेँ उत्साहित करबाक हेतु राष्ट्रीय नीति बनक चाही एवं ओहन लोक सभकेँ टैक्स एवं सरकारी नौकरीमे विशेष सुविधा देबाक चाही।
एक अन्य प्रतिवेदनक अनुसार सन् २००० सँ २०५० क बीचमे भारतक जनसंख्या ६० प्रतिशत बढ़ि जाएत। ऐ अवधिक बीच वरिष्ठ नागरिकक संख्या ३६ प्रतिशत बढ़ि जाएत जे तत्काल आवादीक २० प्रतिशत हएत। ईहो कहल गेल अछि जे विश्वमे २०५० इस्वी तक महिला वरिष्ठ नागरिकक संख्या पुरुखसँ अधिक भऽ जाएत। समाजमे महिलाक स्थिति ओहिना संघर्षपूर्ण रहैत अछि। ८० बर्खसँ ऊपर पुरुखक तुलनामे महिला अधिक दिन जीबै छैथ। जइमे अधिकांश विधवा भऽ गेल रहै छैथ। सर्वेक अनुसार ८० बर्खसँ बेसी आयुवर्गमे ७० प्रतिशत विधवा एवं २९ प्रतिशत विधुर छैथ।
समाजक उपेक्षा एवं लिंग आधारित भेदभावक कारण विधवा वृद्धाक जीवन अपेक्षाकृत बेसी कष्टकर भऽ जाइत अछि। शिक्षा एवं जगरुकताक अभावमे ओ सरकारी सहायताक लाभ नीकसँ नहि उठा पबै छैथ। कएक बेर हुनकर सम्पैतकेँ हरैप लेल जाइत अछि एवं नाना प्रकारक प्रतारणाक शिकार सेहो होमए पड़ैत अछि।
निरंतर बढ़ैत वृद्धक जनसंख्या आ लड़खड़ाइत परिवारिक संरचना वरिष्ठ नागरिक सबहक समस्याकेँ जटिल केने जा रहल अछि। पूर्वमे किछु कानूनी बेवस्थाक चर्चा भेल मुदा समस्या अछि जेअपने सन्तानक विरूद्ध न्यायक मांग कऽ आगू बढ़ैबला हजारमे कियो एक बेकती होइ छैथ, शेष लोक यंत्रनापूर्ण जीवन बीतबैत स्वर्ग सीधारि जाइ छैथ।
आइसँ करीब २९ बर्ख पूर्व दिल्लीमे स्कूटरक पाछाँ एकटा बुढ़केँ उघारे देहे आ एकटा हाथ ऊपर उठेने जाइत देखने रहिऐक। पुछलिऐ जे ई एना किए छैथ? तँ आसपासक लोक सभ कहलक जे किछु साल पर्व हुनका अपन बेटाक संगे किछु विवाद भऽ गेल रहैन आ ओ हुनकर अँगा फाड़ि देलखिन। तहियासँ ओ बुड़हा अँगा पहिरब छोड़ि देलखिन आ विरोध-स्वरूप एकटा हाथ हमेशा अकास दिस केने रहै छैथ।
..सोचल जा सकैए जे ओइ पिताकेँ केतेकआन्तरिक कष्ठ भेलैन जे एहेन रूप धऽ लेलक।
समस्या तँ ई अछि जे घर-परिवारसँ अनादृत, उपेक्षित होइतो वृद्ध लोकनि जाथि तँ केतए जाथि? कोनो दोसर विकल्प नहि बुझाइत अछि? नौकर-चाकरपर निर्भरता केतेको बेर जानलेबा साबित होइत अछि। घरमे असगर रहनिहार बुढ़क समस्या तँ आर जटिल भऽ गेल अछि।
सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्था द्वारा विरष्ठ नागरिकक हेतु आवाससहित रखरखाउ लेल आन बेवस्था सभ सेहो कएल गेल अछि मुदा ओ अपर्याप्त अछि। दिल्ली, फरीदावाद, नोएडामे एहेन केतेको आवास (ओल्ड एज होम) अछि। परन्तु ऐ सभठाम रहनिहार वृद्ध लोकनिक हालत कोनो नीक नहि कहल जा सकैत अछि। कलकत्तामे डीगनीटी फाउण्डेसन, प्रोग्राम आदि नाओंसँ केतेको एहेन संस्था सभ ऐ क्षेत्रमे काज कऽ रहल अछि। मुदा वृद्ध लोकनिक संख्या देखैत एहेन सुविधा नगण्य अछि। फेर अधिकांश बुढ़ तँ ग्रामीण क्षेत्रमे रहि रहल छैथ। जैठाम परिवारक अतिरिक्त कोनो प्रकारक सहायताक संभावना नहि अछि।
सरकार वरिष्ठ नागरिक लोकनि लेल कएटा सुविधा सभ दैत अछि, जेना- रेल टिकटमे छूट, अस्पतालमे अलग काउन्टर, पोस्ट ऑफिस, बैंक आदि सन सार्वजनिक जगहपर अतिरिक्त सुविधा मुदा बेवहारमे ई सुविधा सभ पर्याप्त नहि होइत अछि। अक्सर वृद्ध लोकनिकेँ झगड़ा करैपर मजबूर होमए पड़ै छैन। ऐ मामलामे दिल्लीक मेट्रोमे निश्चय बेहतर बेवस्था अछि। वरिष्ठ नागरिककेँ आसानीसँ आरक्षित जगहपर बैसए देल जाइत अछि।
दिल्ली लोदी गार्डेनमे भोरू-पहरमे टहलैबला सबहक हुजुम रहैत अछि। ओइमे कएटा संगठित समूह बनि गेल अछि जइमे अधिकांश वरिष्ठ नागरिक लोकनि छैथ। ओ सभ भोरकेँ टहलै तँ छैथे संगे आपसमे भेँट-घाँट आ गप-सप्प सेहो करैत रहै छैथ। श्री भूटेलाल ठाकुर (सेवा निवृत्त आइ.ए.एस.) द्वारा ट्रस्ट सेहो ओइठाम बहुत सक्रिय अछि। वृहस्पति दिनकेँ नि:शुल्क चाहक बेवस्था ओतए रहैत अछि। टहलला पछाइत सभ ओतए एकट्ठा होइ छैत, चाह पीबै छैथ आ आपसमे अपन-अपन नीक-बेजाइक चर्च-बर्च करैत, हाँ-हाँ–हीं-ही करैत सभ कियो घर घुमै छैथ। ऐ सम्पर्कक प्रभावसँ कएटा वृद्धकेँ घोर विपत्तिसँ उबड़ैत पुनश्च नव उत्साहक संग जीबैत देखलौं। श्री ठाकुर द्वारा ट्रस्ट एकटा गैर-सरकारी संगठन अछि जे केतेको तरहक सेवा कार्य करैत अछि। कोसीक जखन बाढ़ि आएल छल तँ अहू ट्रस्ट द्वारा ट्रक भरि सहायता-सामग्री लऽ कऽ लोक सभ ओतए जरूरतमन्द लोकनिकेँ बीच वितरित केलैन। लोदी गार्डेनमे सेहो समय-समयपर अनेको कार्यक्रम ई सभ आयोजित करैत रहै छैथ।
हौज खास, दिल्ली स्थित डियर पार्कमे सिनियर सिटिजन कॉसिल, दिल्लीक नामक एकटा संस्था अछि जे वरिष्ठ नागरिकक सुख-सुविधा आ मनोरंजनक लेल बेवस्थामे लागल रहैत अछि। समय-समयपर ओ सभ निवेश भ्रमणपर सेहो जाइत रहै छैथ। भोरमे ७ बजेसँ ८:३० बजे धरि नित्य ‘योग व्यायाम’ सहित अन्यान्य सांस्कृतिककार्यक्रमक आयोजन कएल जाइत अछि। पाँच साएसँ अधिक नागरिक ऐ संस्थाक सक्रिय सदस्य छैथ।
किछु दिन पूर्व केन्द्र सरकार गरीबी रेखासँ निच्चाँबला वरिष्ठ नागरिकक हेतु मुफ्तमे छड़ी, चश्मा आ कानमे लगबैबला उपकरण देबाक घोषणा केलक अछि। जिलाक कलक्टरक अधीन गठित एकटा समिति एहेन लाभार्थीक पहचान करत। उपरोक्त समिति कानमे लगबैबला मशीन, चश्मा आ नकली दाँत इत्यादि वरिष्ठ नागरिकक हेतु बनेबाक लेल मूलभूत मेडिकल परीक्षण सेहो करौत। जनवरी २०१७ इस्वीसँ मार्च २०१७ इस्वीक बीच हर जिलामे १००० वरिष्ठ नागरिककेँ ई सुविधा देल जाएत।
एवम् प्रकारेण सरकार ओ समाज सेवी लोकनि वरिष्ठ नागरिकक कल्याण हेतु बहुविध प्रयास कऽ रहल छैथ। मुदा ई समस्त प्रयास मिलियो कऽ परिवारक दायित्वक स्थान नहि लऽ सकैत अछि। अस्तु जरूरी अछि जे आधुनिकता एवम् वैश्वीकरणक प्रवाहमे हमरा लोकनि अपन संस्कारकेँ नहि बिसरी। माता-पिता, एवम् अन्य वरिष्ठ नागरिकक प्रति अपन दायित्व निर्वाह आनन्दपूर्वक करी जइसँ ओ गर्वसँ जीबैथ आ शान्तिसँ अपन जीवनक यात्रा पूर्ण करैथ,स्वर्गारोहण करैथ।
समाजमे एहेन लोककेँ उत्साहित करक चाही जइसँ अधिकांश लोक अपन माता-पिताक सेवा कानूनक भयसँ नहि अपितु कर्तव्यक भावनासँ करै छैथ। ऐ उद्देश्यसँ पटना स्थित आचार्य किशोर कुणालजी द्वारा स्थापित महावीर मन्दिर ट्रस्ट द्वारा श्रवण कुमार पुरस्कार पुत्र द्वारा माता-पिता आ पुतोहु द्वारा ससुरक सेवा केनिहारकेँ देल जाइत अछि। समाजमे विरिष्ठ नागरिकक जीवन पुत्र सुगम करबामे ऐ तरहक प्रयास निश्चय प्रेरणादायी भऽ सकैत अछि।
अस्तु समाजमे वृद्ध लोकनिक आदर, सम्मान ओ सेवा बढ़य से संस्कार बच्चेसँ धिया-पुताकेँ देल जाए, ऐमे सबहक कल्याण अछि।
अभिवादनशीलस्य नित्यं वृद्धोपसेविन:
चत्वारि तस्य वर्धन्ते आयुर्विधा यशोवालम्।
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