विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका · VIDEHA · ISSN 2229-547X

परिचर्चा: परित्यक्ता आ परिस्थिति—मिथिलाक सन्दर्भमे

डॉ. कैलाश कुमार मिश्र · 2018-05-15 · अंक 250

पिर_य`ता आ पिरिaथित : िमिथलाक सMदभ: मे

वैध¯यअिभशाप अिछ आ कोनो मिहला क– पिर_य`ता बनेनाइ महा-दुºकम:। ई दुºकम:िपतृसXा_मक समाज
िनल:Çजता सँ, šूरता सँ ऐितहािसक समय सँ करैत आिबरहल अिछ। aVी शोषणक एिह सँ घृिणत उदाहरण
भेटब दुल:भ। आÆय: तखन होइतअिछ जखन जािह पुrषक कारणे हुनक प¾ी पिर_य`ता बनलिथन ितनका
समाज हुनकरआिथ:क संप¸ता, सामािजक गिरमा (नाम), उ¢च िशा आ ओहदा, ¯यवसायिकसफलता आिदक
कारणे सoमािनत करैत अिछ, मय^दाक चÚिर ओढ़बैत अिछ, व`ता बनबैत अिछ। सबसँ अिधक दुःख तखन
होइत अिछ जखन तथाकिथत आधुिनक मिहला जेपढ़ल-िलखल छिथ, सब बात बुझैत छिथ,नारी aवतंVताक
दoभ भरैत छिथ, नािरवादक झhडा हाथ मे लेने कोनो ऑलयिoपकक धािवका जकƒ सनसन करैत दौड़ैतरहैत
छिथ; लेिकन समय एला पर अपन ¯यि`तगत िहतक कारणे शोषक पुrषक सßदेमए लगैत छिथ। जखन
रके भक भ' जाए त' ककर आश? एिह िवषयक– बुझबाक लेलएकर तह मे घुस'पडत। इितहास सँ
वत:मानक जे बहुत िवशाल दूरी एकपेिड़याउबड़-खाबड़ बाट अिछ तािह पर याVा सहभागी अवलोकनाथµ बिन
करए पड़त। यथाथ:कनजिदक जयबा लेल िलß भेदक भावक– _याग करए पड़त। कागद की लेखी आ
आँखन कीदेखी दुनू साÔय क– बेर-बेर ख़रॲच मार' पड़त। जखन ई सब काज पूण: िनªा आईमानदारी सँ
समय लगाक' क' लेब त' बातक गह मे पहुँच सकैत छी। नारी सँसoबिMधत ई िवषय अिछ तािहं जॱ
िकयोक गुनमित गoभीर मैिथलानी एिह पर काजकरिथ त' सजातीयताक भाव एिह मे aवतः आिब सकैत
अिछ।
हमPीमती अपण^ झाक िज¶ासक िनराकरण अथवा हुनका “ारे ठाढ़ कएल समaया परिवचार करबा लेल एिह
िवषय पर अपन कलम उठाओल अिछ। अपण^ पुछैत छिथ "पिर_य`ता अथवा पथ बाट जोहैत aVी या
gतीारत aVी?
अपण^ झाक कहबाक शैली आ हुनका “ारा उÂिरत कएल िकछु लोकजीवनक घिटत दृ»ाMत हमरा झकझोिड
देलक।
सबसँपिहने ई aथािपत क' ली जे पिर_य`ता िकनका कही? हमरा जनैत आ लोकजीवनकजीवMत उदाहरण
देखैत पिर_य`ता ओहेन aVी भेलीह िजनका िववाहक बादकोनो-ने-कोनो कारणे हुनकर पित _यािग देने छिथन।
बहुत दृ»ाMत मे पितदोसर aVीगण क– घोिषत आ अघोिषत ’प– आिन लैत छिथ। बाट जोहए बालीaVीगण ओ

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होइत छिथ िजनकर पित कतौ गेल छिथन मुदा हुनका निह बूझल छिन जे कतएगेल छिथ, की क' रहल
छिथ। सब िबदेिसया गीत एहेन aVी पर िलखल गेल अिछ।

“परदेिसया क– िचØी िलखै छै बहुिरया
पड़लै अकाल िपया कटै छी अहुिरया”।

या फेरो:
“िकयेक दुईए िदनक छुÐी मे गाम एलयै
भिर िदन घुिमते रहिलयै ने आराम केिलयै”।।

एिह गीत सब मे gतीा छैक। एहेन gतीा जाकर अंत सुखŒत हेतैक। ई एहेन बाट जोहब छैक जािह मे
सब िकछु मधुर-मधुर हेतैक।
मुदाओिह मिहलाक की हेतैक जकर पित ओकरा िववाहक बाद छोिड़ देलिथन, पिर_य`ता बनादेलिथन? जकर
Pृंगार, िटकुली, काजर, पाउडर, गहना, वaV,सब बेकार भ' गेलैक। जकरा पित त' छोिड़ये देलकैक समाज
सेहो नीक भाव सँ निह देखैत छैक।ओकरा सँ नीक त' िवधबा जकरा लेल समाज एक िनिÆत
बात,वaV, खान-पान, ¯यवहार आ आचरण तय करैत ओकरा समाजक मुÈयधारा मे िकछु हद धिर जुड़बाक
अवसरgदान करैत छैक।

िपिVसXा_oक समाज समाजक संरचना मे बहुत चालाकी सँ पिर_य`ताक aथान िनध^िरत करैत अिछ। िवध-
बेभार आ देवता िपतर मे एिह gथा क– जोड़ैत अिछ। एकर उदे´य कहॴ ई त निह जे िaVÉन समाज
मानिशक ’प सँ पिर_य`ता बनबा लेल तैयार भ’ जािथ? चलू लोक परoपरा मे चलैत छी। मधुPावणी कथा
मे एक gसंग सMÃयाक िववाहक अबैत छैक।सMÃया के छिथ? सMÃया िशवानी गौरीक छोट बिहन छिथ।
अपन सु¸िर सािर सMÃया सँ महादेब क– gेम भ’ जाइत छिन। सMÃया सेहो अपन बिहनोई महादेब सँ gेमक
आदान-gदान केनाई शु’ केलिन। पिरणाम ई भेल जे जखन सMÃया िववाह योÉय भेलीह त’ महादेब गौरी सँ
चोराक सMÃया सँ िववाह करबा लेल चल गेलाह। एoहर गौरी महादेब क– तकने िफरिथ मुदा ओ कतहु निह
भेटिथMह। बहुत खोज कएला पर गौरी क– महादेबक िवषय मे जानकारी भेिट गेलिन जे महादेब सMÃया सँ
िववाह करए गेल छिथ। गौरी क– बड़ दुःख भेलिन ओ कानय लगलीह। कनैत-कनैत देह सँ घाम चललिन

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आओर मैल छुटए लगलिन-गौरी मैल छोड़ा कए जमा कएलिन आओर ओकर एकटा सƒप गिढ कए बाट पर
रािख देलिथन-महादेब जखन सMÃया क– िववाह क’ ल’ अनलिन त’ गौरी क– कनैत देखल संगिह बाट पर
मैलक सƒप सेहो।महादेब ओिह सƒप मे gाण दए देलाह ओ लह-लहाए लागल। महादेब आओर सMÃया क–
देिख गौरी कानए आओर गािर-शाप देमए लगलीह:
“की ए हम आहे िशब चोरनी की चटनी
की ए हम कोिखया िवहूत
की हम आहे िशब सेवा मे चुकलहुँ
केलहुँ दोसर िववाह ”

तखन महादेब कहलिथन:
“निह अहƒ आहे गौरी चोरनी चटनी
निह अहƒ कोिखया िवहूत
निह अहƒ आहे गौरी सेवा मे चुकलहुँ
हमरा कर’ परल दोसर िववाह ”

तखन गौरी कहलिन:
“मिरहौ गे सMÃया तोरो जेठ भइया
होएबे मे कोिखया िवहूत ”

तखन महादेब पुनः समझाबैत कहलिन:
“जनु गारी िदअ गौरी अपनो जेठ भइया
जनु किहओ कोिखया िवहूत
तोरिह सन गौरी पातिर िछतिर

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तोरिह सन सुकुमारी
बितसो दƒत िबजुली िछटकिन
सMÃया हुनकर नाम ”

बहुत अिधक िवनÑता स सMÃया कहैत छिथन:
“काित:क गणपित गोद खेलाएब
होएब चेिरया तोहार ”

आब महादेब िनºकष: दैत बजला: “अहƒ अनेरे कािन रहल छी। अहƒक– ई सƒप बेटी भ’ क’ जMम लेने
अिछ। अही निMहकीरबी क– खेलाएबा लए हम एकटा किनयƒ आिन देल अिछ।
कथा अतिहं अंत भ’ जाइत छैक। आÆय:क बात ई जे गौरीक एिह gÄ आ शंका पर किहयो कोनो aवर
निह उठल। पुrख किथलेल उठेता? aVीगन सब सेहो मौन छिथ। पिर_य`ता एिह कथा मे गौरी आ सMÃया
दुनू छिथ – पाट:टाइम या आंिशक पिर_य`ता। पितक 100 gितशत gेम सँ गौरी आ सMÃया दुनू जेना वंिचत
भ’ जाइत छिथ! पिर_य`ता श द सँ जेना दुनू िवभूिषत भ’ जाइत छिथ।
बात आगा बढ़बैत छी। हमरा लगैत अिछ महिष: गौतमक प¾ी अिहŽया िमिथलाक पिहल पिर_य`ता छिथ।
इMs गौतमक अनुपिaथित मे आिब गेला। हुनका लग चिल गेलीह। फेर तािह लेल अतेक पैघ आ दुद^Mतक
दhड! अपने िववाह केलाक बादो तप, तपaया। प¾ी लेल सभ बMधन? कोना चलत काज? आ फेर ओिह
बMधन अथवा Pाप सँ मु`त के करतिन हुनका? एकर िनण:य सेहो Pाप देमय बला पित ’पक पुrष
करताह। गौतम कहैत छिथन जे जखन राम Vेता युग मे अतए अऒताह तखन िशला मे पिरणत अिहŽया
हुनक चरणक aपश: सँ फेरो मनुख-योिन मे वापस लौटती।
दोसर पिर_य`ता सीता छिथ। सीता अपन प¾ी धम:क पालन करैत राम संगे कत’-कत’ निह जाइत छिथ।
वैह राम गभ:वती सीता क– असगरे जंगल भेज दैत छिथ। मय^दा उXम भ’ जैतिन अगर सीता संगे राम सेहो
फेर सँ जंगल चल जैतिथ? से कहƒ करैत छिथ? आर त आर अ›मेध य¶ काल सेहो हुनका सीता कहƒ
aमरण अबैत छिथन? सोनाक सीता बना य¶-वेदी पर बैस जाइत छिथ। जखन लव-कुश भेट जाइत छिथन
तखन सीताक aमरण अबैत छिन। िवयोग आ दद: सँ छटपटाइत सीता धरतीक कोिख मे िवलीन हेबाक लेल
िनवेदन करैत छिथन – “फाटू हे धरती!” धरती अपन पुVीक बात सुनैत देरी फािटजाइत छिथ आ सीता
ओिह मे िवलीन भ’ जाइत छिथ।

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िमिथलाक तेसर पिर_य`ता भामती छिथ. उÕट िव“ान आचाय: वाचaपित अपन गहन ¶ान, पिरPमक मता
आ हठयोगक कारणे उXर सं दिण धिर Èयाित अिज:त कएने रहिथ। आचाय: gवर अनेक uंथक रचना
कएलिन तािहमे gमुख अिछ: (1) Mयायिणका, (2) ²Óत_व समीा, (3) त_व िवMदु, (4) Mयायवाित:का ता_पय:
टीका, (5) Mयायसूची िनबंध, (6) सŒÈयत_व कौमदी, (7) त_ववैशारदी। एकरा अितिर`त त_कालीन पाचम
नवम शता दी मे शंकराचाय:क आuह पर “अठारह वष: aवगृह मे साधनारत भए सŒसािरक सुख _यािग 6
भागमे मंडन िमPक ²ÓसूVक शंकरभाºयक टीकाक रचना कएलिन। आ तािह मे भामती मूक योगदान दैत
रहलिथन। तैँ हेतु तािह मूक अवदान क– अमर करए लए टीकाक नाम भामती सं¶ा सँ जोिड़ देलिन। ई
मूक अवदान बÙड किठन श द अिछ। अगर वाचaपित क– साधने करक छलिन त’ िववाह किथलेल केलाह?
एिह लेल जे प¾ी ’प मे भामती िबना ढउआ क– आ िबना भावनाक संचार क– सेिवका बनल रहिथ?
वाचाaपितक िव“ताक– नमन मुदा भामतीक gित हुनक gयोग हुनका “ारे जािन-बुिझ क’ भामती क– पिर_य`ता
बनाएब िथक।
मैिथली लोक ¯यवहारक गीत मे अनेक गीत भेटत जािह मे सौितन श दक gयोग अिछ। सौितन लेल कुबजो,
कु जा श दक gयोग अिछ जे हमरा जानैत घृणा सूचक अिछ।
बात पिर_य`ताक क रहल छी त’ उदाहरण समाज स लेमए पड़त। समाज िदस आँिख उठाबय पड़त।
समाज क– िनहारए पड़त। नारी मनोदशा आ दद:क, टीसक अनुभूित करए पड़त।
एक बहुत aथािपत सािह_यकार अपन इ¢छा सँ िबपरीत माता-िपता क– मन आ मान रखबाक च³र मे एहेन
परoपरागत आ अित सामाMय लड़की सँिववाह क’ लेलाह जे कोनो ’प सँ हुनका संग साoय निह रखैत छिल
– निह दैिहक सौMदय: मे आ ने िवFा मे। िव“ान आ दैिहक सौMदय: आ सौªव सँ पिरपूण: सािह_यकार मन
बना लेलाह जे िववाह क’ लेताह मुदा ओिह लड़की सँ कोनो तरहक कोनो सoबMध निह रखता। सैह भेल।
िववाह भ’गेलिन। चतुथµ धिर सासुर मे रहला। संप¸ सासुरक लोक पाहुनक aवागत मे कोनो कमी निह
रखलक। उपर सँ िबधकरी अित चातुिर। नीत-नूतन बात कहिन। सृंगार, मनुहार, gेमक बात मे ओझराबए
लगलिथन। िदयासलाई आ काठी एक ठाम रहतैक त’ आिग लगबे करतैक। सैह भेलैक। जािह प¾ी सँ
किहयो कोनो सoबMध निह रखबाक उदे´य सँ िववाह केने छलाह ओकर gेम मे फँिस गेलाह। मन भले निह
िमलल होिन देह िमल गेलिन।15 िदन रहला। बहुत रंगक बात भेलिन। कतेक बेर केिल केला। 15 िदनक
बाद घर आिब गेला।
घर वापस अएला पर पुनः अपन वैदु´य आ सौMदय: पर दंभ भेलिन। भेलिन, आिह रे बाप, िववाह त’ गलत
पिरवेश, गलत पिरवार आ गलत लड़की सँ भ’ गेल। अिवकिसत, बैकवड: सँ भ’ गेल! आब की हो? निह-
निह, एहेन लड़की संग जीवन कोना कटत? असंभव। महानगरक सâय समाज लग कोना रहब? मय^दा आ
इÇजत नीलाम भ’ जाएत। फेर की उपाय? यैह जे _यािग दी। पिर_याग करी। पिर_य`ता बना दी।
पिर_य`ता कोना बनत? अपमान सँ, शोषण सँ, दैिहक-मानिशक उ_पीड़न देला सँ। से क– देत? हम aवयम
देब। ई िनण:य अिMतम? एकदम अिMतम। िबना एकर दोसर कोन उपाय?” यैह सब सोचैत भिवºयक महान
सािह_यकार आ कलामा नारी उ_पीड़नक ठीका ल’ लेलाह। एक दुखद, तक:हीन, अनग:ल आ अमानवीय

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घटनाक बीया बाउग़ भ’ गेल छल। ओ अपन वीभ_स ’प लेल तैयार छल।एक िव“ान एक चŒडाल बिन गेल
छल।
सािह_यकार महोदय क– सासुर सँ अएबाक हेतु बेर-बेर समाद अबिन। ई एहेन िनªुर जे जेबे ने करिथ।
सासुरक लोक िहनक lलाट सँ अनजान। अंत मे ससुर महोदय aवयम िहनकर दरबÇजा पर आिब गेिŽथन।
आब की करताह? कोनो उपाय निह बचलिन। लाचार भय सासुर गेला। खूब मान-दान भेलिन। नाना तरहक
सचार लागल। खूब मन सँ भोजन केलाह। राित मे प¾ी एिŽथन। आिबते कािमनी मािननी बनैत कहलिथन:
“जाऊ! कतेक िनªुर लोक छी अहƒ? निहअएलहुँ आ ने िचिØयो भेजलहुँ? एहेन कतॱ मनुख भेलैक अिछ?
हम rसल छी अहƒ स।” से कहैत किनया मुँह िबपरीत अवaथा मे करैत झुØे सुतबाक भगल केलिन।
िव“ान सािह_यकार चुप रहला। गंभीर रहला। िकछु निह बजला। की बिजतिथ? मन त कोनो धराने अपन
¯याहत धम:प¾ी सँ मुि`तक कामना आ यॲत मे बाझल छलिन।प¾ी िदस देखबो ने केलिन।
तुरते प¾ी क– बुझा गेलिन जे िकछु त’ गडबड अिछ। झट दिन िवचार केलिन: “आिखर ई िकछु gितिšया
िकयैक निह देला? हे भगबती! िकछु अिन» बुझना जा रहल अिछ हमरा। कहॴ कोनो िनद:य मनुखक संग
त’ हमर हाथ िवधाता निह लगा देलिन? की करी? ककरा पर मािननी बनी हम? जे मनुहार करत से त’
कोनो Ãयाने-बात निह द’ रहल अिछ। फेर की करी? अिहना सुित रही? से कोना हएत? भले बाबा िबFापित
किह गेला ‘पुrखक निह िबaवासे’। कोनो िaथित मे पुrख पर िव›ास निह करी। फेर की करी? एिह
äदयिहन पुrख क– äदय-वान पुrख बनाबी। से कोना? एकरा अपन gेमक जाल मे गछानी।” यैह सब
सोचैत बेचारी नव याहल किनया अपन जीवनक नैया क– डूबए सँ बचेबाक उि`त सोचय लगलीह। करबट
अपन पित महोदय िदस बदलैत बजलिन: “की बात पाहुन! rसल छी की? िकछु गलती भ’ गेल हमरा सँ
की? अगर गलती भेल त’ कहू। हम माफ़ी मŒिग लैत छी”।
अतेक बात किनया कहलिथन मुदा पाहुन पर कोनो gभाव निह परलिन। गुम-सुम-गंभीर बनल रहलाह।
किनया क– अशुभक अशंका भेलिन। िहनकर आँिख मे किन िबकराल, िबकट aवrप देखली। किन कसाई
किन िनद:यातक भाव लगलिन। किन ¶ानक ¯यथ: घमhडक अनुभूित भेलिन।लेिकन दोसर कोन उपाय? पैघ
जाित आ कुलक मय^दा सँ छेकएल छी। दोसर िववाह त’ आब सपनो मे निह देखल जा सकैत अिछ।
तखन की करक चाही? िकछु निह अतबे जे येन-केन-gभावेन िहनका मना ली। से कोना मनाबी? gेम सँ आ
अपन मनुहार सँ। देखैत छी, भगबती सफलता दैत छिथ की निह? अिह तरहक अंत“:ंद सँ जुझैत किनयƒ
पाहूनक– अपना छाती सँ जकरबाक य¾ शु’ केलिन। आिह रे बा! ई की? पाहुन त’ एक ण मे बæ उu
भ’ गेलाह।हाथ झकझोिर देलिथन। अपन बलक gदश:न करैत कक:श Ãविन मे बजला: “खबरदार जे आई
के बाद हमरा सँ कोनो तरहक सoबMध रखलहुँ। हमरा अहƒ सँ कोनो तरहक सoबMध निह रखबाक अिछ।
हम आई सँ अहƒक शरीर निह छुब। अहुँ अपन मय^दा मे रहू। अगर से मय^दा क– तोरबाक चे»ा करब त’
हमरा सन खराप लोक निह भेटत”।

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किनया आब पूण: साकŒ भ’ गेल छलीह। भेलिन सािह_यकारक नाम पर रास सँ िववाह भ’ गेल। आब की
करी? किन दृढ़ भेलीह। कहलिथन: “देखू, हम अहƒक ¯याहता छी। हमर सoबMध मे हमर िपता अपनेक
िपता सँ सब िकछु aप» क’ देने छलाह। अहेन समaया छल त’ निह किह िदतहुँ? हम आब कत’ जा
सकैत छी? अहॴ कहू? आ फेर िववाहक याVा मे त’ अहƒ हमरा संग सब िकछु कएल जे एक aVी-पुrष
करैत अिछ?”
अिह बात सँ बेिफ़š मद मे चूर सािह_यकार अपन राग अलापैत रहला: “हमरा से सब िकछु ने बुझल
अिछ। हमरा अहƒ सन जािहल aVी संग कोनो सoबMध निह राखक अिछ। अहƒक रaता अलग, हमर रaता
अलग। नदीक दू aवतMV कछेड़। ककरो सँ ककरो िमलन संभव निह अिछ। ख़बरदार जे हमर देह मे
सटबो केलहुँ।”
प¾ी पाछा कोना होइतिथ? लागल रहली। िकछु मनुहार, िकछु šंदन, िकछु नोरक धार चुएलिन। िकछु
अपन माता-िपताक िववशताक भान करेलिन। किन िगदरभभकी सेहो देलिथन। मुदा सािह_यकार महोदय त’
अिडग रहला। अपना क– लंठ-सािह_यकार मानैत छला। एिह प¾ी सँ कोनो सoबMध निह रखता से ²Óवा`य
छलिन।
तथािप प¾ी िहoमत करैत अध: वaV मे एकबेर सािह_यकार महोदय क– अपन बाहुपाश मे लेबाक gयाश
केली। एिह बेर šोध सँ बताह भेल सािह_यकार अपन प¾ी क– उपर gहार क’ देलाह। बेचारी लाचार भेल
मािर खाइत रहली। बंद घर मे िविचV aवर सुिन लड़कीक माए आ भाऊज जािग गेिŽथन। घर खोलबाक
आदेश देलिथन। लड़की घर खोलैत माएक– गर लािग कानए लागली। कनैत रहली आ बजैत रहली: “सब
अनथ: भ’ गेल। हमर कपार फुिट गेल। मनुखक बदला हैवानक संग भ’ गेल।”
माए आ भाऊज पुछैत रिçŽथन: “की भेल बु¢ची?” मुदा िहनकर मुँह सँ बकारे ने िनकलिन। कतेक काल
धिर कनैत रहली। लोक सब बोसैत रèिन। उoहर सािह_यकार महोदय काल-नाग आ यमक अवतार बनल
šोध मे मातल घर मे šोधक Çवाला मे धू-धू जिर रहल छला। हुनका सँ लोक पुछिन: “पाहुन! की भेलैक?
िकछु बकझक भेलिन की?” पाहुन पिहने त’ चुप रहला। फेर कक:श aवर मे उXर देलाह: “हमरा की पुछैत
छी? अपन बेटी के पुछू। ओ जे कहती हमहुँ सैह कहब।” बहुत देर धिर वातावरण शŒत रहल।
जखन किनयƒ भिर इ¢छे कािन अपन मनक दद:बहा लेलिथ त' कहलिन: "िहनका हमरा सँ कोनो िसनेह निह
छिन। ई माता-िपताकइÇजत हेतु िववाहक aवŒग केने छिथ। िहनका हमरा सन सामाMय निह आधुिनकाचाही
जे िहनका सँग महानगर मे हाथ-मे-हाथ थामने aव¢छMद घुिम सकए। ई हमरासँ कोनो तरहक सoबMध निह
राखय चाहैत छिथ। उलटे हमरा सँ जतेक जŽदी होमुि`त पाबै चाहैत छिथ। वेदमंVक उ¢चारण सँग जेप¾ी
बनेलिन तकरा पालन करैत अपन अिधकारक भाव जगबैत हम िकछुए ण पूव:िहनका देह िदस जएबाक
अनग:ल gयास कएल तकर पिरणाम देखू।" ई कहैत अपन छातीकओ िहaसा देखा देलिथन जतए आदरणीय
सािह_यकार अपन घुसाक िनद:य gहार केनेछलाह। िनलाह-aयाह ओिहना देखा रहल छलिन। एक ण मे
सािह_यकार महोदयकअसली ’प बाहर आिब गेल छलिन। ओतय उपिaथत मिहला सभक हृदय कƒिप

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गेलिन।अनथ: भ' चुकल éल। एकर कतेक िबकट rप भ' सकैत अिछ एिह पर िकयोक िनिÆतनिह
छली।
अंत मे कMयाक माए थोड़ेक गoभीर होइत अपन जमाय लग नहुँ-नहुँ गेिलह। िaथरे सँ कान लग फुसफुसा
क' बाजय लगली:
"पाहुन!सब िकछु ठीक ने? ई छौरी कोनो गलत बात त' निह किह देलकिMह? चािर भाई मेअसगिर छैक
ने, तािहं किन िछिड़या गेल छैक। ओना मनक बड़ शुÂ छैक। जे रहल सेमुहँ पर किह दैत छैक।"
सािह_यकार िनराकार भेल सबबात सुनैत रहला। अंत मे सासु पुछलिथन: "अगर कोनो Vुिट छिन
त' बाजिथ? हमसब िहनकर सब मƒगक पूित: अपन हैिसयत िहसाबे करक gयास करबिन।"
गहीर सŒस लैत सािह_यकार ठाê-पठाê बजला:
"देखू! ई िववाह निह चलत। िहनका सँग निह हम खुश रिह सकैत छी आ ने यैह रिह सकैत छिथ।
िहनकर सोच आ हमर सोच मे कोनो साoय निह अिछ"।
सब बात जेना एकिहं सŒस मे सािह_यकार महोदय बािज गेलाह।

सासुअपन मायक मम_वक कारणे गुम सधने रहली। फेर बजनाई शु’ केलिन: "देखथुपाहुन! ई ²ाÓणक बेटी
छैक। एना कोना हेतिन? िववाह एक क– कहैत अिछसात-सात जMमक सoबMध छैक। उठथु आ दुनू िमल
क' रहथु।"
बेटीिदस तकैत माए बजली: "सोना, एना निह चलैत छैक जीवन। दुनू गोटे िहल-िमल रहू।सब चीज़ नीक
रहत। जाउ घर।" ई कहैत माय बलपूव:क बेटी क– पाहुन सßे घरिदस ल' गेिलह। आब सब िकछु सामाMय
भ' चुकल éल। घर मे आिग आ घी केर सिमधाएकिVत éल। केवल होम करबाक मंV फुकक gयोजन
éल। ई gयोजन कMयाक माएपूरा केलिन। अिÉन सुगंिधत भ' धू-धू पजरए लागल। दू देह एक
भ' गेल।सािह_यकार महोदय क– एिह ¯याहता मे आधुिनका देखाय लगलिन। दुनू मaत भ' गेलाह। ओिह िदन
एक आर बात भेल। gेमक अिÉन ततेक gबल छलिन दुनूक जे ओहीराित आ ण नाियका क– गभ: ठहिर
गेलिन। िववाहक, अिह तरह– एक उÚे´यपूरा भ' गेलिन।

सोझे सालि“रागमन भ' गेलिन। जिहया सँ नाियका अपन सासुर अएिलह तिहया सँ सािह_यकारफेरो अपन
उu ’प मे आिब गेलाह। मािर-िपट शु’ भेल। कखनो डंडा सँ त कखनोबेŽट सँ। किहयो-किहयॲ आनो
चीज़ सँ gहार करैत रहला। संगित साफे बMद।पूण: िवराम। यातना अबाध गित सँ चलैत रहलिन। एक
सािह_यकार अपन कुकृ_य सँदोसर सािह_यकार लेल सामuीक ओिरओन करैत रहला। नारीक शोषण होइत

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रहल।शोिषताक गभ: मे शोिषतक बीज पनपैत रहल। िवनाशक िšया मे िनम^णकgिšया अपन aव’प पकरैत
रहल।
कोनहुना अपन सासुरमे रहैत नाियका एक पुVीक जMम देलीह। पित सँग िaथित नक: जकƒ भ' गेलिन।बहुत
य¾ केलीह मुदा असफलता हाथ लगलिन। यातना सहैत-सहैत तन -मन जबाब द' देलकिन। सासुर सँ नैहर
आिब गेलीह। केश चललैक।
अिहबीच सािह_यकार अपना सँ 18 वष:क छोट लड़की सँ चुपे-चाप िववाह क' लेलाह।ककरो कानो ने लागय
देलाह। डर छलिन नौकरी चिल जेतिन। नाम बदनाम भ' जेतिन।

बादमे िविधवत तलाक भ' गेलिन। आर जे केला से केलाह। एक नीक काज ज’र केलिन जेअपन जMमल
बेटीक िववाह अपन अरजल पाई सँ नीक जकƒ करा देलिथन।

हुनकप¾ी सेहो अपन जीवन अपने जकƒ िजबक कोिशश करैत छिथ त’ लोक हुनका नीक-अधलाहकहैत
छिन। यैह िथक सामािजक मय^दा। यैह िथक महानता। सािह_यकार महान भेलछिथ। नारी चेतना, सािह_य
आ सृंगार केर बात करैत छिथ। एक दू आधुिनक आतथाकिथत िवदुिष हुनकर सब कृ_य आ कुकृ_य बुझैतो
हुनका हँ मे हँ िमलबैतछिथ। विरª सािह_यकार लोकिन िणक लोभे हुनका सßे घुमरैत रहैत छिथ।हुनक
यशक झंडा फहरबैत रहैत छिथ।

हालिहंमे एक नवोिदत सािह_यकार क– एिह तथाकिथत महान सािह_यकारक पूव: प¾ी जेआब तलाक शुदा आ
पिर_य`ताक टैग सँ जानल जाइत छिथ,भेटलिथMह। नवोिदतसािह_यकार हुनका लग गेलाह। अपन पिरचय
एक सािह_यकारक ’प मे देलिन। पिर_य`ताक दद: सािह_यकारक gित घृणा बिन Çवार-भटा जकƒ फुइट
पड़लिन।अपन लाउज खोिल एक-एक दागक gदश:न करैत बजली: "कहॴ एहेन सािह_यकार त' निह छी अहुँ
जे अपन प¾ी सँग जलाल जकƒ ¯यवहार करैत छी।" जखन Çवालाफ़ुटले रहिन त’ अनेक तरहक नीक
अधलाह बात सेहो किह देलिथन, जे कोनो नाजायज निहरहैक।

बात एतहुँ कहƒसमाlत होइत अिछ। सािह_यकार अपन दोसर प¾ी क– सेहो यातना मे रखने रहैतछिथ।
मारैत-पीटैत छिथ। आधुिनका सब सßे घुमरैत छिथ। खूब सािह_य िलखैतछिथ, खूब भाषण करैत छिथ।
समाजक एक तबका एिह महापिततक– आइकॉन बना रखने अिछ। हुनक gथम प¾ी क– पिर_य`ता आ
कुलणा कहैतअिछ। एकरा की कही? ई बात पाठक पर छोिड़ दैत छी।

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पिर_य`ताकिलखल आ ऐितहािसक aव’पक की बात करी, अपन आँिख सँ अनेक aव’प देखने छी।कतौ
पिर_य`ता सoबMधी रहिल छिथ त' कतौ पिर_य`ता बनबै बला। कतौपिर_य`ता त' कतौ दुदìवक मारिल
पिर_य`ता।

एकउदाहरण िविचV अिछ जे समाजक मानिशकता क– आईना देखबैत अिछ। से की? ई कथाgारoभ होइत
अिछ एक अित सामाMय पिरवारक युवक सँ जे अपन माता-िपताक एसगरसंतान छला। B. Com करैत देरी
दिण मे कतौ चाय बागान मे डेlयुटी मैनेजर'कनौकरी लािग गेलिन।
हुनका गामक बगले क– गामक एककMयागत िजनका 4 लड़की माV छलिन, नीक पैसा दहेज दए अपन जेठ
बेटी सँ िववाहकरा देलिथन। कMयागत िकछु निह अिपतु बहुत रास फुइस बाजल छला। लड़की पढ़िलनिहये
जकƒ रहैक। साकŒ सेहो निह, बिŽक किन अकान जकƒ। देखबा सुनबा मेमुदा अपूव:। रंग-िवरंगक
गहना, वaV, gसाधन सँ सजिल। बर कािनयƒ क–देखैत दंग। चतुथµ कोना िबतलै से बुझबे निह केलाह।
चतुथµ gात अपनेसßे कोयंबटूर हनीमून लेल िबदा भेला। जखन ओतए गेलाह त' ¶ात भेलिन जेलड़की साफे
साकŒ निह छैक। िन_यकम: तक करबाक नीक सँ चे»ा निह छैक। आब कीहो? तेसरे िदन वापस आिब
गेलाह। सासुर आिब सासु आ ससुर क– सब खेरहाकहलिथMह। ससुर उXर देलिथMह: "अपने उदास निह
होउ पाहुन, अहƒक सासु सबबात बुझा देतीह।" ई कहैत ससुर दरबÇजा िदस चिल गेलाह।
सासुलग अबैत नहुँ-नहुँ कहलिथMह: "पाहुन! ई मन छोट निह करथु। हम सब िहनकरिववाह अपन दोसर बेटी
सँ करा देबिन। दोसर एकरा सँ 2 बरखक छोट अिछ।सव:गुणसoप¸ छिन िहनकर सािर।

Pीमानमैनेजर साहेबक चानी। िदने सँ सािर पाहुन लग आिब गेिलह। सब िकछु नाम:ल।बिहनोई सँग सब
िकछु करए लगिल जे एक पित-प¾ीक बीच बMद घर मे अMहार मेहोइत छैक। अिह šम मे 7 मास बीत
गेल। 7 मास मे सोझे साल ि“रागमन भेलिन।ि“रागमन मे सािर कोना अिबतिथन? उपाय निह छलिन। तािहं
प¾ी एलिथन। गामअिबते देरी नव पुतोहुक असिलयत सबक– लािग गेलैक। आब की हौक?
पिरवारेमे िकनको सरबेटी गरीब मुदा अतीव सु¸िर। तुरत लड़कीक िपता िववाहक िनवेदनभेज देलिथन।
Pीमान मैनेजर साहेब िबसिर गेलाह जे ओ सात मास धिर अपन सािरसँग गुलछर^ उड़ेने छला। सब वचन
िबसिर गेला। सब मय^दा धो-पोिछक चािटगेलाह। अपन दुखड़ा गबैत रहला। माए-िपितयाइन सब अतबे
कहिथMह: "धन कही एकराजे सात मास धिर एिह अकान आ बकलेल कािनयƒ सँग कोना िबतेलक! एकरा
आब शीíअिह जंजाल सँ मुि`त भेटक चाही।"

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अपना gित एिह तरहकसहानुभूित पािब Pीमान मैनेजर साहेब मने-मन गदगद छलाह। िववाह तय भ' गेलिन।
gथम प¾ीक सब सामान, वaV, गहना, s¯य-जात रािख राते-रातीमािर पीट क' सासु भगा देलिथMह। कािनयƒ
थोड़ेक िनवेदन अव´य केिŽथन जेहुनको रह' देल जािन। मुदा क– सुनैत अिछ?

आबPीमान मैनेजर साहेबक दोसर प¾ी हुनका ई आदेश, िनदÎश द' देलिथMह : "जािह िदन अहƒ पिहल प¾ी
क– अपन घर घुसा लेब तािहये िदन हम माहुर खाआ_मह_या क' लेब।"
मैनेजर साहेब एकाएक एक परमप¾ीभ`त पित बनैत बजला: "राम-राम! अहƒ की बजैत छी? िववाह सँ आई
धिर हमएकर शरीर निह छूल। आब घर घुसेबाक कोन gयोजन?"

मैनेजरसाहेब क– वंश वृ दोसर प¾ीक संतान सँ होमय लगलिन। बेटी-बेटा-बेटी। सबहरेक छह मास पर
गाम आबिथ। गाम अिबतिहं निह जािन कोना gथम प¾ी जकराअड़ोस-पड़ौसी सब िबयहुती कहैक बुिझ
जाइक। राित क' आिब जाइक। मुदा, भोजन त दूरमैनेजर साहेब केर माय िपितयाइन सब समान छीन मािर-
िपट क' भगा दैत छलिथMह।बेचारी रaताक िभखमंगी बनल अिछ। मुदा िकयोक मैनेजर साहेब क– इहो निह
किहसकलिन जे ओकरा अपना घर पर कम सँ कम अ¸-वaV िदयौक। आसरा िदयौक। ऊपर सँ बाप-
संबंधी सब सेहो ओिह अभगली पिर_य`ता क– मारैत पीटैत छैक। जीवन नक: बनल छैक।

एिहgकरणक जिड़ मे अगर चली त' एिह पिर_य`ता क– पिर_य`ता बनेबै मे gथमदोख ओकर िपता क– छिन।
जखन हुनका बुझल छलिन जे हमर बेटी एहेन अिछ त’ िववाहकिथलेल करा देलिथMह? ओिह पैसा सँ
ओकरा लेल कोनो िरहैिबिलटेशन सेMटर अथवािकछु आरो क' सकैत छला। से निह केलिन। जखन जमाय
बेटी क– छोिड़ देलिथMह त' ओकरा जीवन लेल कोनो इंतज़ाम करक छलिन।
दोसर दोखमैनेजर साहेब क–? अगर सािर सँ िववाह निह करबाक छलिन त' संबंध कोन कारणेसात मास धिर
रखला? पुनःÆ, अगर दोसर िववाह केलाह त'gथम प¾ीक सब िकछुवापस किथलेल निह क' देलिथMह?
एिह gकरण मे दुनू पक समाज सेहो ओिहना पातकी अिछ।
अनुभवक कथा अनंत अिछ। ककरा कही ककरा छोड़ी? कहब तखने बात फिरछायेत। िबना कहने कोना
बुझबैक?
एक दृ»ाMत हाले क– अिछ। से की? एक ¯यि`त िववाह केलाह। िववाहक एक वष:क बाद कतॱ नौकरी लेल
गेलाह। जे गेलाह से 3 वष: धिर एबे निह केलाह। सब उपाय भेल। जगह-जगह लोक पहुचल। थाना-
पुिलस मे रपट िलखा देल गेल। मुदा िकछु ने भेल।अंत मे ओिह युवक क– माता-िपता हुनक प¾ीक िववाह

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ओिह युवक सँ छोट भाई सँ करा देलिथन। पिरवार चलए लगलैक। aVी मािन लेलक जे हमर gथम पित
आब एिह संसार मे निह छिथ, त देओर संग िववाह कर’ मे कोनो हज: निह। पिहल पित सँ एक लड़की
रहैक। दोसर पित सँ एक बालक। सब िकछु पटरी पर िनक सँ चलय लगलैक। करीब 9 वष:क बाद
एकाएक ओिह मिहलाक जीवन मे भूचाल आिब गेलैक। पिहल पित किह निह कोना कतए सँ वापस घर आिब
गेलैक। अपन प¾ी लग गेल। बाद मे पता चललैक जे ओकर अनुपिaथित मे ओकर छोट भाई सँ िववाह भ’
गेल छैक पिहल प¾ी क–। बेचारी मिहला दू नाव मे कोना पैर रखत? बड़का समaया। पिहल पित ओकरा
पर अपन अिधकार जतबैक। दोसर पित कहैक जे हम त’ सब चीज़ अवधािर क’ िववाह केने रही।दुनू भाई
मे “Mद चलैत रहलैक। अिMतम िनण:य ई भेलैक जे मिहलाक gथम पित दोसर कोनो लड़की सँ िववाह
करथु। जखन से भ’ गेलैक त’ मामला सुलिझ गेलैक।
िमिथला मे एहनो िवधान रहल अिछ जे जाित-मूलक नाम पर एक आदमी 20-25 टा िववाह क’ लैत
छलाह। एक दू छोिड अिधकŒश प¾ी पिर_य`ताक जीवन जीबैत छली।पिर_य`ताक अथ: केवल अ¸-वaV-
aथानक तकलीफ अथवा सामािजक मय^दे निह अिपतु शारीिरक, मानिशक सुख स वंिचत हएब सेहो भेल।
जखन लाचार भेल अिह तरहक िaVÉन िकछु दोसर पुrष िदस देखैत छिथ त’ समाज हुनका कुलटा,
िनल:Çज, अपिवV, Ü», दुÆिरV आ ने जािन की-की कहैत आिब रहल अिछ? िकनको डाईन त’ िकनको
डािह किह टाच:र कैल जाइत छिन। समाज बौक बनल रहैत अिछ।धनक इ¢छाक पूित: भ’ सकैत अिछ,
तनक इ¢छाक पूित: कोना हएत?

खादी आ िमिथला/मधुबनी पेिMटंग केर शुrआत भेला सँ बहुत पिर_य`ता अपन आिथ:क मय^दाक रा करबा
मे सफलं रहिल छिथ। प·िटंग मे पîPी गंगा देवी, गोदावरी दXाक कथा सबके बूझल अिछ। खादीक
आगमन सँ कतेको पिर_य`ता अपन अ¸, वaVक उपाज:न करबा मे सफल भेली। अपन सोच, अरमान,
सपना, सृंगार सब िकछु खादीक ताग मे देखनाई शु’ केलिन। कला_मकता अपन पराका»ा पर पहुँच गेल।
िमिथलाक सूती खादी देखैत-देखैत समaत भारत मे अपन मिहनी, कलाकारी आिद गुणक कारणे gिसÚ भ’
गेल।

हम मानवशाaV, कला-इितहास आ मानवािधकारक छाV रहल छी।आिदवासी आ uामीण समाज मे काज करैत
आिब रहल छी। आिदवासी समाज मेकोनो कारणे अगर पित-प¾ी मे निह प­लैक त’ पित-प¾ी दुनू क– ई
aवतंVता छैक जे अपन जीवनसाथी क– छोिड दोसर तािक लए। एिह सँ पिर_य`ता gथाएिह तरहे ओिह
समाज मे gभावी निह छैक जािह तरहे अपना समाज मे।

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एक बात आरो हमरा अचरज मे डालैत अिछ। लोक जािह मे िaVÉन सेहो सिoमिलत छिथ, सभ िकयोक
अिह तरहक िवधानक पिरचालन लेल पुrख सँ अिधक दोष aVी क– दैत छिथ। जखन की स_य ई अिछ
जे िपतृसXा_मक समाज अपन जाल ऐना ने िबछेने अिछ जािह मे सामाMय क– क– पुछैत अिछ आधुिनका आ
पढिल मिहला सेहो फंिस जाइत छिथ। अंत मे अतबे कहब जे पिर_य`ता aVी समाजक समaया निह अिछ।
ई मानवक समaया अिछ। एिह पर गंभीर बनक ज’रत अिछ। सबक– एक संग आिब संगोर करैत अिह
समaयाक िनदान िनकलबाक अिछ। अिह अिभशाप क– समाlत करक अिछ। से भेल तखने हम सब गव: सँ
किह सकैत छी जे हम सब gगितक पथ पर बिढ़ रहल छी।

Suggested citation: डॉ. कैलाश कुमार मिश्र. “परिचर्चा: परित्यक्ता आ परिस्थिति—मिथिलाक सन्दर्भमे.” Videha — First Maithili Fortnightly eJournal, issue 250, 2018-05-15. https://www.videha.co.in/research/2018/250/परिचर्चा-परित्यक्ता-आ-परिस्थिति-मिथिलाक-सन्दर्भमे.htm

मूल विदेह अंक / Original issue