नरेIKजीक मैिथली आ िहंदी गजलक तुलनाQमक िववेचना
एिहठाम समीा लेल हम नरेIKजीक मैिथली आ िहंदी गजलक चुनलहुँ अिछ। ई समीा एकै गजलकारक दू
भाषामे िलखल गजलक तुलना अिछ। पिहने हम दूनू भाषाक गजल आ ओकर बहरक तती ओ रदीफ-
कािफयाक समीा करब तकर बाद भाव, कय ओ भाषाक िहसाबसँ।
नरेIKजीक चािर टा मैिथली गजल जे िक िमिथला दश;नक Nov- Dec-16 अंकमे Rकािशत अिछ---
1
राज काज भगवान भरोसे
अिछ सुराज भगवान भरोसे
मूलधनक तँ बाते छोड़ू
सूिद याज भगवान भरोसे
खूब सयता आयल अिछ ई
लोक लाज भगवान भरोसे
देह ठठा कऽ क िकसानी
आ अनाज भगवान भरोसे
अपना भिर सब यॲत िभराऊ
िकंतु भcज भगवान भरोसे
एिह गजलक पिहल शेरक पिहल पcितमे आठ टा दीघ; अिछ। दोसर पcितमे आठ टा दीघ; अिछ। दोसर
शेरक पिहल पcितमे सात टा दीघ; आ एकटा लघु (तँ) अिछ। हमरा लगैए शाइर तँ शदक दीघ; मािन लेने
छिथ जे िक गलत अिछ। पं. गोिवIद झाजी अपन iयाकरणक पोथीमे एहन शदक लघुए मानने छिथ जे िक
सव;था उिचत तँइ एिह गजलमे सेहो ई लघु हएत। कोनो लघुक दीघ; मािन लेबाक परंपरा गजलमे तँ नै छै
मुदा मैिथली गजलमे हमरा लोकिन संgकृतक िनयमक अनुसार अंितम लघुक दीघ; मानै छी मुदा एिह गजलमे
तँ बीचक लघुक दीघ; मानल गेल अिछ जे दूनू परंपरा (गजल आ संgकृत) िहसाबo गलत अिछ। दोसर
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पcितमे आठ टा दीघ; अिछ। तेसर शेरक दूनू पcितमे आठ-ठ दीघ; अिछ। चािरम शेरक पिहल पcितमे सात टा
दीघ; आ एकटा लघु अिछ (कऽ) एिहठाम हम दोसर शेरक पिहल पcित लेल जे हम बात कहने छी तकरे
बुझू। दोसर शेरमे आठ टा दीघ; अिछ। पcचम शेरक दूनू पcितमे आठ-आठ टा दीघ; अिछ। एिह गजलक
रदीफ "भगवान भरोसे" अिछ आ कािफया "आ" विन संग "ज" वण; अिछ जेना काज-सुराज, याज, लाज,
अनाज मुदा पcचम शेरक कािफया अिछ "भcज" जे िक गलत अिछ। "भcज" केर विन "आँ" केर ज छै
मुदा मतलामे "आ" विनक संग ज छै। तँइ पcचम शेरक कािफया गलत अिछ। ई गजल बहरे मीरपर
आधािरत अिछ जािहमे जकर िनयम अिछ जे "जँ कोनो गजलमे हरेक माVा दीघ; हो तँ ओकर अलग-अलग
लघुक सेहो दीघ; मानल जा सकैए। मुदा बहरे मीरक िहसाबसँ सेहो एिह गजलमे कमी अिछ।
2
फोड़त आँिख िदवाली आनत
कान कािट कनबाली आनत
अहॴक हाथ पयर कटबा लय
टाका टािन भुजाली आनत
देश Rेम केर डंका पीटत
केस मोकदमा जाली आनत
पेट बािIह कऽ क चाकरी
एहने आब बहाली आनत
पूरा पूरी दान चुका कऽ
सबटा िडबा खाली आनत
एिह गजलक पिहल आ दोसर शेरक हरेक पcितमे आठ-आठ टा दीघ; अिछ। तेसर शेरक पिहल पcितमे एकटा
लघु फािजल अिछ तेनािहते दोसर पcितमे सेहो एकटा लघु फािजल अिछ। चािरम शेरक पिहल पcितमे छह
टा दीघ; आ दू टा लघु अिछ। कऽ शदक िववेचना उपर जकc रहत। दोसर पcितमे "ए" शदक लघु मािन
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लेल गेल अिछ जे िक हमरा िहसाबo उिचत नै। पcचम सेरक पिहल पcितमे सात टा दीघ; आ एकटा लघु
अिछ। कऽ लेल उपरके िववेचना देखू। दोसर पcितमे आठ टा दीघ; अिछ। एिह गजलक कािफया ठीक
अिछ। ई गजल बहरे मीरपर आधािरत अिछ जािहमे जकर िनयम अिछ जे "जँ कोनो गजलमे हरेक माVा
दीघ; हो तँ ओकर अलग-अलग लघुक सेहो दीघ; मानल जा सकैए। मुदा बहरे मीरक िहसाबसँ सेहो एिह
गजलमे कमी अिछ।
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लाख उपलिधसँ ओ घेरा गेल अिछ
बस हृदय आदमी के हेरा गेल अिछ
सब समाजक चलन औपचािरक बनल
लोक संबंधसँ आन डेरा गेल अिछ
सबटा चेहरा बनौआ अपिरिचत जकc
मूल चेहरा ससिर कऽ पड़ा गेल अिछ
भोरसँ सcझ धिर फूिस पर फूिस िथक
लोक अपने नजिरसँ धरा गेल अिछ
देशक सोना पcिख बनत एक िदन
फेर अनचोके मे ई फुरा गेल अिछ
एिह गजलक पिहल शेरक पिहल पcितक माVा¡म 2122-1122-2212 अिछ आ दोसर पcितक माVा¡म
2122-1222-2212 अिछ। दोसर शेरक पिहल पcितक माVा¡म 2122-1221-2212 अिछ आ दोसर
पcितक माVा¡म 2122-1121-22212 अिछ। तेसर शेरक पिहल पcितक माVा¡म 2121-2122-12212
अिछ आ दोसर पcितक माVा¡म 2121-2122-12212 अिछ। चािरम शेरक पिहल पcितक माVा¡म
211212212212 अिछ आ दोसर पcितक 212212112212 अिछ। पcचम शेरक पिहल पcितक माVा¡म
22222112212 अिछ आ दोसर पcितक 212222212212 अिछ। एिह गजलक तेसर, चािरम आ पcचम
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शेरक कािफया गलत अिछ। एिह गजलक हमरा बहरेमीरपर मानबासँ आपि अिछ आ से िकए ई पाटक
लोकिन माVा¡म जोिड़ देिख सकै छिथ जे अलग-अलग लघु जोड़लाब बादो लघु बिच जाइत छै। तँइ हमरा
आपि अिछ संगे-संग ई गजल आर कोनो बहरपर आधािरत नै अिछ सेहो gप¢ अिछ।
4
िडबा सन सन शहरक घर अिछ
पािन हवा मे िमलल जहर अिछ
गाम जेना बेदखल भऽ रहल
बाध बोन धिर घुसल शहर अिछ
आजुक युगमे कोना पकड़बै
चोर साधु मे की अंतर अिछ
देश बनल शो केश बजारक
जनतंVक बेजोड़ असर अिछ
अजब दौर अिछ ल£य िनपा
िदशा हीन ई भेड़ सफर अिछ
मतलाक दूनू पcितमे आठ टा दीघ; अिछ। दोसर शेरक पिहल पcितमे आठ टा दीघ; आ एकटा लघु अिछ।
दोसर पcितमे आठ टा दीघ; अिछ। तेसर शेरक पिहल पcितमे आठ टा दीघ; आ एकटा लघु अिछ। दोसर
पcितमे आठ टा दीघ; अिछ। चािरम आ पcचम शेरक दूनू पcितमे आठ आठ टा दीघ; अिछ। एिह गजलमे आएल
"भेड़ सफर" शद यु¤मपर आगू चिल भाषा खंडमे चचW हएत। ई गजल बहरे मीरपर आधािरत अिछ जािहमे
जकर िनयम अिछ जे "जँ कोनो गजलमे हरेक माVा दीघ; हो तँ ओकर अलग-अलग लघुक सेहो दीघ; मानल
जा सकैए। एिह गजलक मतलाक पिहल पcितक कािफया "घर" केर उ¥चारण िहंदी सन कएल जाए तखने
सही हएत अIयथा मैिथली उ¥चारण िहसाबo गलत हएत। बाद बcकी शेरक कािफया मतलाक कािफयापर
िनभ;र करत तँइ ओकर िववेचना हम नै क' रहल छी।
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नरेIKजीक चािर टा िहंदी गजल जे िक हुनक फेसबुकक वालसँ लेल गेल अिछ----
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यह जो चौपट यहp का राजा है
कुछ नहॴ वक़्त का ताकाजा है
हम लड़ाई से बहुत डरते ह§
यूं िक कुछ घाव अभी ताजा है.
देश उनके िलए िखलौना है
हमको इस बात का अIदाजा है
जैसे चाहे इसे बाजाते ह§
गोिक जनतंV एक बाजा है
अब उठा है तो धूम से िनकले
यारो आिशक का ये जनाजा है
एिह गजलक पिहल पिहल आ दोसर दूनू शेरक शेरक माVा¡म 2122-12-1222 अिछ। एिह शेरक दोसर
पcितमे शायद टाइिपंग गलती छै तँइ सही शद "तकाजा" हम मानलहुँ अिछ। दोसेर शेरक पिहल पcितक
माVा¡म 2122-12-1222 आ दोसर पcितक माVा¡म 2122-112222 अिछ। तेसर शेरक पिहल पcितक
माVा¡म 2122-12-1222 अिछ आ दोसर पcितक माVा¡म 2122-12-2222 अिछ। चािरम शेरक पिहल
आ दोसर दूनू शेरक माVा¡म 2122-12-1222 अिछ। एिह शेरक दोसर पcितमे शायद टाइिपंग गलती छै
तँइ सही शद "बजाते" हम मानलहुँ अिछ। पcचम शेरक दूनू पcितक माVा¡म 2122-12-1222 अिछ।
बहरमे जतेक माIय छूट छै से लेल गेल अिछ। कुल िमला देखी तँ एिह गजलक दूटा शेर बहरसँ खािरज
अिछ (दोसर आ तेसर)। एिह गजलमे कािफया ठीकसँ पालन भेल अिछ।
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क़यामत ऐन अब दालान पर है
नज़र दुिनया की रौशनदान पर है.
न जाने रौशनी आयेगी कब तक
अभी तो तीरगी परवान पर है.
िपघल जाता है उनके आँसुओं पर
मेरा गुgसा िदले नादान पर है.
शगल उनके िलए है शायरी भी
मगर मेरे िलए तो जान परहै.
मुहबत की वकालत करने वाला
अभी नफ़रत की इक दूकान पर है.
एिह गजलक हरेक शेरक हरेक पcितमे 1222-1222-122 माVा¡म अिछ। बहरमे जतेक माIय छूट छै से
लेल गेल अिछ। एिह गजलक कािफया सेहो ठीक अिछ।
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बाढ़ मo लोग िबलिबलाते ह§
रहनुमा बाढ़ को भुनाते ह§
घोषणाओं पे घोषणाएं ह§
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नाव वह काग़ज़ी चलाते ह§
इस तरफ़ भुखमरी का आलम है
और वह आँकड़े िगनाते ह§
फंड जो भी जहp से आता है
ख़ुद ही वो बcट करके खाते ह§
साल दर साल बाढ़ आ जाये
दरअसल ये ही वो मनाते ह§
एिह गजलक हरेक शेरक हरेक पcितमे 2122-12-1222 माVा¡म अिछ। बहरमे जतेक माIय छूट छै से
लेल गेल अिछ। एिह गजलक कािफया सेहो ठीक अिछ।
4
आकाश से टपके हुए िकरदार नहॴ ह§
हम भी मक़ीन ह§ िकरायेदार नहॴ ह§ |
उनके इरादॲ की भी मालूमात है हमo
ऐसा नहॴ िक हम भी ख़बरदार नहॴ ह§
वह नाम हमारा िमटायoगे कहc कहc
बुिनयाद की हम ®ट ह§ दीवार नहॴ ह§ |
इंसान ह§ अपनी हदॲ का इ¯म है हमo
हम आपके जैसा कोई अवतार नहॴ ह§ |
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हम अपनी मुहबत की नुमाइश नहॴ करते
िर°ते िनभाते ह§ दुकानदार नहॴ ह§ |
पढ़ना ही अगर हो तो पढ़ो इQमीनान से
अदबी िकताब ह§ कोई अख़बार नहॴ ह§ |
एिह गजलक पिहल शेरक पिहल पcितक माVा¡म 2212-2212-221122 अिछ। दोसर पcितक माVा¡म
2212-1212-221122 अिछ। दोसर शेरक पिहल पcितक माVा¡म 2212-2212-221212 अिछ। दोसर
पcितक माVा¡म 2212-122-122-1122 अिछ। बहरमे जतेक माIय छूट छै से लेल गेल अिछ मुदा तइ
बादो ई गजल बहरमे नै अिछ। मतलाक दूनू शेरेमे एकपता नै अिछ। तँइ हम माV दू शेरक तती केलहुँ
अिछ बाद-बcकी शेरक िववेचना पाठक बुिझये गेल हेता। कािफया सेहो गलते अिछ।
बह रक िहसाबसँ नरेIKजीक गजल --
चा मैिथली गजलक देखल जाए तँ ई gप¢ अिछ जे नरेIKजी अिधकpशतः बहरे मीरपर आिfत छिथ आ
ताहूमे कतेको ठाम हूसल छिथ। जखन िक बहरे मीर बहुत आसान बहर छै आ एिह बहरमे छूट बहुत छै।
तेनािहते जँ चा िहंदी गजलक बहरक देखल जाए ई gप¢ होइए जे नरेIKजी बहरे मीरक अितिरत आन
बहर सभपर सेहो हाथ चलबै छिथ आ ओहूमे कतेको gथानपर हूसल छिथ। तथािप ई उ¯लेखनीय जे आनो
बहरपर ओ गजल लीिख सकै छिथ। नरेIKजी मैिथली-िहंदीक देल उपर बला गजलक बहर संबंधमे हमर ई
gप¢ माIयता अिछ जे नरेIKजी माV लयक बहर मािन लै छिथ जखन िक लय आ बहरमे अंतर छै। लय
मने गािब कऽ, गुनगुना कऽ। लयपर िलखलासँ केखनो बहर सटीक भैयो सकैए आ केखनो निहयो भऽ
सकैए।
बहर ओ कािफयाक आधारपर नरेIKजीक गजलक एकै बेरमे हम गलत नै किह सकै छी कारण मैिथलीक
किथत गजलकार सभसँ बेसी मेहनित नरेIKजी अपन गजलमे केने छिथ आ जँ ई थोड़बे मेहनित करतिथ वा
करता तँ िहनक गजल एकटा आदश; गजल भऽ सकैए। ओना एिह बातक संभावना कम जे ओ एिह तयक
मानताह। करण वएह िजद जे iयाकरण कोनो जरी नै छै। रचनामे भाव Rमुख होइत छै आिद-आिद।
मैिथलीमे नरेIKजीक गजल अपन पीढ़ीक अिधकpश गजलकार (सरसजी, तारानंद िवयोगी, रमेश, देवशंकर
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नवीन एवं ओहने गजलकार) सभसँ बेसी ठोस गजल छिन से मानबामे हमरा कोनो शंका नै मुदा बहर ओ
कािफयाक िहसाबo पूरा-पूरी सही नै छिन (मने नरेIKजी माV अपन समकालीनसँ आगू छिथ)। एिहठाम हम
नरेIKजीक चािर-चािर टा गजल लेलहुँ मुदा आन ठाम हुनक Rकािशत वा हुनक फेसबुकपर Rकािशत मैिथली
आ िहंदी गजलक अनुपातसँ ई gप¢ अिछ जे नरेIKजी मैिथलीमे माV संपादकक आ²हपर गजल िलखै
छिथ। मने मैिथली गजल हुनकर येय नै छिन। अइ बादॲ आ³य; जे िहंदी गजलमे हुनकर कोनो िवशेष
gथान नै छिन। ई बात हम एकटा िहंदी गजल पाठकक तौरपर किह रहल छी। हुनकर समूहक िकछु लोक
हुनका भने िबहारक िहंदी गजलकारक िलgटमे दऽ दौन मुदा वाgतिवकता इएह जे िहंदी गजल संसारमे
नरेIKजीक कोनो gथान नै छिन। आ एकरा माV राजनीित नै कहल जा सकैए। िहंदी गजलमे एहतराम
इgलाम, नूर मुहaमद नूर, जहीर कुरैशी सभ पुरान छिथ एवं नवमे गौतम राजिरषी, gवपिनल fीवाgतव, वीनस
केसरी, मयंक अवgथी आिद अपन gथान बना लेला मुदा की करण छै जे नरेIKजी असफल रिह गेला। हम
फेर कहब जे हरेक चीजमे राजनीित नै होइ छै। िहंदी गजलक नव शाइर गौतम राजिरषी, gवपिनल
fीवाgतव, वीनस केसरी, मयंक अवgथी आिदक पाछू कोनो संपादक क हाथ नै छलिन मुदा नीक िलखलासँ
कोन संपादक नै छापै छै। आ िहनकर सभहँक सभ गजल iयाकरण ओ भाव दृि¢सँ संतुिलत रहै छिन आ
तँइ ई सभ बहुत कम समयमे िहंदी गजलमे अपन gथान बना लेला मुदा नरेIKजी नै बिढ़ सकला आ तािह
लेल माV हुनक बहर ओ iयाकरण नै पालन करबाक िजद िजaमेदार छिन। मैिथली गजलमे तँ ई अपन
समकालीन गजलकारसँ आगू बिढ़ जेता मुदा ई िहंदीमे िपछड़ले रहता कारण ओिहठाम बहर सेहो देखल जाइ
छै जखन िक मैिथली गजलमे बहर देखानइ आब शु भेलैए।
िकछु एहन बात जे िक Rायः हम, सभ आलोचनामे कहैत िछयै " मैिथलीक अराजक गजलकार सभ िहंदीक
िनराला, दु´यंत कुमार आ उदू;क फैज अहमद फैज केर बहुत मानै छिथ। एकर अितिरतो ओ सभ अदम
गॲडवी मुµवर राना आिदक मानै छिथ। मैिथलीक अराजक गजलकार सभहँक िहसाबo िनराला, दु´यंत कुमार
आ फैज अहमद फैज सभ गजलक iयाकरणक तोिड़ देलिखन मुदा ई ¶म अिछ। सच तँ ई अिछ जे
िनराला माV िवषय पिरवत;न केला आ उदू; शदक बदला गजलमे िहंदी शदक Rयोग केला, तेनािहते दु´यंत
कुमार इमरजेIसीक िव·¸ गजल रचना ¡pितकारी पo केलिथ। फैजक साaयवादी िवचारक गजल लेल
जानल जाइत अिछ। मुदा ई गजलकार सभ िवषय पिरवत;न केला आ समयानुसार शदक Rयोग बेसी केला।
एिहठाम हम िकछु िहंदी गजलकारक मतलाक तती देखा रहल छी ( जे-जे मतला हम एिहठाम देब तकर
पूरा गजल ओ पूरा त¹ती हमर पोथी मैिथली गजलक iयाकरण ओ इितहासमे देिख सकै छी)---
सूय;कpत िVपाठी िनरालाजीक एकटा गजलक मतला देखू--
भेद कुल खुल जाए वह सूरत हमारे िदल मo है
देश को िमल जाए जो पूँजी तुaहारी िमल मo है
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मतला (मने पिहल शेर)क माVा¡म अिछ--2122+2122+2122+212 आब सभ शेरक माVा¡म इएह
रहत। एकरे बहर वा की वण;वृत कहल जाइत छै। अरबीमे एकरा बहरे रमल केर मुजाइफ बहर कहल
जाइत छै। मौलाना हसरत मोहानीक गजल “चुपके चुपके रात िदन आँसू बहाना याद है” अही बहरमे छै
जकर िववरण आगू देल जाएत। ऐठc ई देखू जे िनराला जी गजलक िवषय नव कऽ देलिखन Rेिमकाक
बदला िवषय िमल आ पूँजी बिन गेलै मुदा iयाकरण वएह रहलै।
आब हसरत मोहानीक ई Rिस¸ गजलक मतला देखू---
चुपके चुपके रात िदन आँसू बहाना याद है
हमको अब तक आिशक़ी का वो ज़माना याद है
एकर बहर 2122+2122+2122+212 अिछ।
आब दु´यंत कुमारक ऐ गजलक मतलाक तती देखू---
हो गई है / पीर पव;त /सी िपघलनी / चािहए,
इस िहमालय / से कोई गं / गा िनकलनी / चािहए।
एकर बहर 2122 / 2122 / 2122 / 212 अिछ।
फैज अहमद फैज जीक ई गजलक मतला देखू--
शैख साहब से रgमो-राह न की
शु¡ है िज़Iदगी तबाह न की
एिह मतलाक बहर 2122-1212-112 अिछ।
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आब कने अदम गॲडवी जीक एकटा गजलक मतलाक तती देखू—
ग़ज़ल को ले / चलो अब गc / व के िदलकश /नज़ारॲ मo
मुस¯सल फ़न / का दम घुटता / है इन अदबी / इदारॲ मo
एकर बहर 1222 / 1222 / 1222 / 1222 अिछ।
एिहठाम हम ई माV भाव ओ कयसँ संचािलत गजलकारक कुतक;सँ बँचबा लेल देलहुँ अिछ। जखन दु´यंत
कुमार सन ¡pितकारी गजलकार बहर ओ iयाकरणक मानै छिथ तखन नरेIKजी वा आन किथत ¡pितकारीक
iयाकरणसँ कोन िद¹त छिन सेनै जािन।
भाव , कय , िवषय ओ भाषाक िहसाबसँ नरेIKजीक गजलक सीमा---
उप शीष;कमे "सीमा" एिह दुआरे िलखलहुँ जे भाव, कय ओ िवषय लेल कोनो रोक-टोक नै छै जे इएह
िवषयपर िलखल जेबाक चाही वा ओिह िवषयपर नै िलखल जेबाक चाही। अइ ठाम देल गेल नरेIKजीक
मैिथली-िहंदी गजलक भाव ओ भाषासँ gप¢ भेल हएत जे नरेIKजी चाहे मैिथलीमे िलखिथ वा िहंदीमे हुनकर
िवषय मास;वादी िवचारधाराक आगू पाछू रहैत छिन। ओना ई खराप नै छै मुदा दुिनयc बहुत रास "भूख"सँ
संचािलत छै चाहे ओ पेटक हो, जcघक हो िक धन, यश केर हो। जतबे सच पेटक भूख छै ततबे आन
भूख सेहो। तँइ एकटा भूखक सािहQयक नीक मानल जाए आ दोसर भूखक खराप से उिचत नै। नरेIKजीक
सेहो कोनो िवपरीत िलंगी आकिष;त केने हेथिन आ कोहबरमे हुनकर करेज सेहो धक-धक केने हेतिन। ओना
िवचारधाराक महान बनेबा लेल ओ किह सकै छिथ जे ने हमरा कोनो िवपरीत िलंगी आकिष;त केलक आ ने
कोबरमे करेज धक-धक केलक। ई हुनकर सीमा सेहो छिन हुनकर िवचारधाराक सेहो। अइ ठाम एकटा
महQवपूण; R¾ राखए चाहब जे नरेIKजी वा हुनके सन ¡pितकारी गजलकार सभ iयाकरणक ई किह िवरोध
करै छिथ जे iयाकरण क¿रताक Rतीक िथक मुदा आ³य; जे िवषय ओ भावक मािमलामे नरेIKजी वा हुनके
सन गजलकार सभ क¿र छिथ। हमरा जतेक अनुभव अिछ तािह िहसाबसँ हम किह सकैत छी किथत
पसँ छÀ मास;वादी सभ दोहरा बेबहार करै छिथ अपन जीवन ओ सािहQयमे। iयाकरणक क¿रताक िवरोध
आ िवषय ओ भावक क¿रताक पालन इएह दोहरा चिरV िथक। एकै कयपर कोनो िवधाक रचना िलखलासँ
ओिहमे दोहराव केर खतरा तँ होइते छै संगे संग पाठक इरीटेट सेहो भ' जाइत छै। कोनो रचना जखन
िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com
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ejournal 'िवदेह ' २५२ म अंक १५ जून २०१८ (वषᭅ ११ मास १२६ अंक २५२ )
मानुषीिमह सं᭭कृताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA
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पाठके लेल छै तखन पाठकक ·िचक अवमानना िकए? हँ एतेक सावधानी लेखकक जर रखबाक चाही जे
पाठकक अवpिछत मcग जेना अ°लीलता, दंगा पसारए बला रचना नै लीखिथ। एक बेर फेर हम िहंदीक
संदभ;मे कहए चाहब जे िहंदी गजलक कय बहुत िवgतृत छै। िहंदी गजलमे साaयवादी िवचारधारा बला
गजलक अितिरत आनो िवषयपर गजल छै आ हमरा िहसाबo नरेIKजी िहंदी गजलमे नै बिढ़ सकला आ तािह
लेल बहर ओ iयाकरण संग एकै कयपर िलखबाक िजद सेहो िजaमेदार छिन। एिहठाम देल
नरेIKजीक मैिथलीक चािरम गजलमे "भेड़ सफर" मैिथलीमे अवpिछत Rयोग अिछ। नरेIKजीक भाषा Rयोग
खतरनाक अिछ। हम जानै छी जे एना िलखलासँ लोक हमरा शु¸तावादी मानए लागत मुदा हम ई िचंता छोिड़
िलखब जे हरेक भाषामे आन भाषाक शदक Rयोग हेबाक चाही मुदा एकर मतलब नै जे सभ शदक Rयोग
माIय भऽ जेतै। उदाहरण दैत कही जे मैिथलीमे "वफा" शद Rचिलत नै अिछ मुदा "वफादार" शद
बहुRचिलत अिछ। एिहठाम R¾ उठैत अिछ जे जखन वफा शदक Rचलन नै तखन वफादार कोना Rचिलत
भेल। ई बात शु¸ पसँ आम जनताक बात छै। आम जनताक जीह आ संदभ;मे "वफा" शद नै आिब
सकलै जखन िक वफादार उ¥चारणक िहसाबसँ आ संदभ;क िहसाबसँ Rयोग होइत रहल अिछ।
िन´कष;--- नरेIKजी गजल बहर ओ कािफयाक िहसाबसँ दोषपूण; तँ अिछ मुदा मैिथलीक अपन समकालीन ओ
परवतÁ गजलकार यथा सरसजी, रमेश, तारानंद िवयोगी, िवभूित आनंद, कलानंद भ¿, सुरेIKनाथ, धीरेIK
Rेमिष;, राजेIK िवमल संगे एहने आन गजलकार सभसँ बेसी ठोस अिछ। िहनक िहंदी गजल सभ सेहो बहर
ओ कािफयाक िहसाबसँ दोषपूण; अिछ आ ओिहठाम िहनकासँ पिहने बहुत रास iयाकरण ओ भाव बला
गजलकार अपन मू¯याकंन लेल Rतीारत छिथ तँइ िहंदी गजलमे िहनकर िटकब बहुत मोि°कल छिन।
िवrास नै हो तँ िहंदी गजलक गंभीर पाठक बिन देिख िलअ। जँ नरेIKजी iयाकरण पक सaहािर लेिथ आ
आनो िवषयपर गजल कहिथ तँ िनि³त ई बहुत दूर आगू जेता। आ जेना िक उपरक िववेचनसँ gप¢ अिछ
जे िहनका बेसी मेहनित नै करबाक छिन। िकछु अहम् ओ iयाकरणक हेय बुझबाक च¹रमे िहनक नीको
गजल दूिर भेल अिछ। ओना हम उपरे आशंका बता देने छी जे आने किथत ¡pितकारी जकc ईहो
iयाकरणक बेकार मानता।
नोट---- 1) एिह समीामे जतेक संदभ; लेल गेल अिछ से हमर पोथी "मैिथली गजलक iयाकरण ओ
इितहास"सँ लेल गेल अिछ तँइ कोनो Rकारक संदभ; जेना पं गोिवIद झाजीक कोन पोथीक कोन पृपर
चंKिबंदु युत gवर लघु होइत छै आिद जनबाक लेल ओिह पोथीक पढ़ू।
2) बहरक ततीमे जँ कोनो असावधानी भेल हो तँ पाठक सभ सूिचत करिथ। हम ओकरा सुधारब।
२.