विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका · VIDEHA · ISSN 2229-547X

आधुनिक मैथिली गजलक संक्षिप्त आलोचनात्मक परिचय

आशीष अनचिन्हार · 2018-07-01 · अंक 253

आधुिनक मैिथली गजलक संिJdत आलोचनाgमक पिरचय
Etतुत आलेख हम मैिथली गजलपर िलखने छी। वत>मान शोधकT मानी तँ आब मैिथली गजल लगभग112
बख>क भऽ गेल अिछ। एिह 112 बख>मे मैिथली गजलमे बहुत रास Eयोग आ tथापना भेलै तकरे िनªपण
करब एिह लेखक उ_े«य अिछ। एिह लेखकT पढ़बासँ पिहने िकछु त­य सामने रािख दी जािहसँ मैिथली
गजलक सभ Eयोग आ tथापनाकT अहs सभ नीक जकs परिख सकब--

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

  
Videha Ist Maithili Fortnightly
ejournal 'िवदेह ' २५३ म अंक ०१ जुलाइ २०१८ (वषᭅ ११ मास १२७ अंक २५३ )
मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA
4

1) गजल लेल बहर ओ कािफया अिनवाय> छै (बहरक पालनमे िकछु छूट सेहो भेटै छै गजलकारकT मुदा
धेआन राखू जे बहरमे िलखते नै छिथ हुनका लेल ई छूट कोन काजक)। पं.जीवन झासँ आधुिनक मैिथलीक
गजलक जbम मानल जाइत अिछ आ tवाभािवक छै जे पिहल चीजमे सही आ गलत दूनू तgव रहै छै तँइ
पं.जीक िकछु गजलमे बहर ओ कािफयाक नीक Eयोग भेटत तँ िकछु गजल गीत जकs भेटत। मुदा तकर
बाद किववर सीताराम झा आ काशीक®त िमo मधुपजी मैिथलीक गजलक भार उठेला आ मैिथली गजलकT
िवtतार देला। किववर आ मधुपजीक गजल सभ पूण>ªपेण बहर ओ कािफयासँ सजल अिछ। िहनक दूनूक
गजल यथाथ>मे मैिथली गजल अिछ (भाषा मैिथलीक आ गजल xयाकरणकT मैिथलीक अनुªप देल गेल
अिछ)। किववरजी आ मधुपजी दूनू क‘मे गजल िलखलाह मुदा हमरा जनैत ई गजल सभ xयाकरणयु°त
आधुिनक मैिथली गजलक पृRभूिम अिछ।
2) लगभग 1970-75सँ मैिथली गजल ओहन धाराक लोक सभहँक हाथमे आिब गेल जे िक गजल बारेमे
िकछु नै जनैत छलाह। ओ माL दू पsितक बहर-कािफयाहीन पsित सभसँ बनल किवताकT गजल कहए
लगलाह। कोनो िवधामे Eयोग खराप नै छै मुदा पाठककT ±िमत कए कऽ कएल Eयोग हािनकारक होइत छै।
एिह धाराक लोक सभ कहैत छलाह गजलमे कोनो िनयम नै होइत छै। िकछु गोटे कहैत छलखिन जे
मैिथलीमे गजल भैए ने सकैए। जखन िक हुनका सभसँ पिहनेह² किववर आ मधुपजी xयाकरणयु°त गजल
लीिख चुकल छलाह। उपरेमे कहने छी जे एिह धाराक लोक सभकT गजलक ³ान नै छलिन संगे-संग िहनका
सभकT मैिथली गजलक इितहासक बारेमे सेहो पता नै छलिन अbयथा "गजलमे कोनो िनयम नै होइ छै" वा "
मैिथलीमे गजल िलखले नै जा सकैए" एहन-एहन बयान देबासँ पिहने ओ सभ जªर पं.जीवन झा, किववर
सीताराम झा, काशीक®त िमo मधुपजीक गजलमे Eयोग भेल िनयम सभकT जªर देिखतिथ।
3) एिह आलेखमे हम दूनू धाराक उŒलेख करब। दूनू धाराक गजलमे की-की अंतर अिछ, दूनू धाराक
गजलमे कोन-कोन काज भेल अिछ। दूनू धाराक की कमजोरी अिछ। दूनू धाराक Eितिनिध गजलकार
सभहँक िकछु शेर सभ सेहो हम देब। मैिथलीमे xयाकरणयु°त धारा पिहनेसँ अिछ तँ पिहने ओकरे वण>न हएत
बादमे िबना xयाकरण बला धाराक। जे गजलक िनयम पालन नै करै छिथ हुनकर कहब छिन जे xयाकरणसँ
िवचार ओ भाव बbहा जाइ छै (ई मोन राखू जे एहन कहए बला लोक सभ माL सा‘यवादी वा किथत
Eगितशील भावक बात करै छिथ)। हम एिह लेखमे xयाकरणयु°त गजल सभहँक उदाहरण दैत सािबत करब
जे कोना xयाकरणसँ भाव िक िवचार आिद पु´ होइत छै।
4) मैिथली गजल मने ओ गजल जे िक मैिथलीमे िलखल गेल चाहे ओकर देश कोनो िकएक ने हो।
5) एिह आलेखक सभ त­य हमर पोथी "मैिथली गजलक xयाकरण ओ इितहास"मे आिब चुकल अिछ जकरा
हम एिहठाम Eसंगक िहसाब² पुनलµखन केलहुँ अिछ।
आधुिनक मैिथली गजलक इितहास
मैिथलीमे गजल उदू> भाषाक मा¥यम² आएल। उदू>मे फारसीसँ आ फारसीमे अरबीसँ। पं.जीवन झा (जbम आ
मृgयुः 1848-1912) अपन नाटक "सुbदर संयोग" आ "सामवती पुनज>bम"मे पिहल बेर गजल िलखलाह।
सुbदर संयोग 1905 इ.मे Eकािशत भेल छल। तकर बाद किववर सीताराम झा (जbम 1891 ई.मे तथा
िनधन 1975 ई) गजल िलखलाह। किववरजीक "जगत मे थािक जगद‘बे अिहंक पथ आिब बैसल छी" ई
गजल 1928मे Eकािशत किववर सीताराम झा जीक " सूि°त सुधा ( Eथम िबंदु )मे संŽहीत अिछ।

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

  
Videha Ist Maithili Fortnightly
ejournal 'िवदेह ' २५३ म अंक ०१ जुलाइ २०१८ (वषᭅ ११ मास १२७ अंक २५३ )
मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA
5

काशीक®त िमo मधुप (जbम-मृgयुः 1906-1987) "िमिथलाक पूव> गौरव निह ¥यान टा धरै छी" नामक गजल
िलखलाह जे िक 1932मे मैिथली सािहgय सिमित, ¸ारा काशीसँ "मैिथली-संदेश" नामक पिLकामे Eकािशत
भेल।
xयाकरणयु°त आधुिनक मैिथली गजलक इितहास
पं.जीवन झाजीसँ एिह धाराक शुआत भेल आ तकर बाद किववर सीताराम झा, काशीक®त िमo मधुप,
योगानंद हीरा, जगदीश चbm ठाकुर "अिनल", िवजय नाथ झा, गजेbm ठाकुर, मु¹ाजी, शािbतलºमी चौधरी,
ओमEकाश झा, अिमत िमo, जगदानbद झा मनु,, कुbदन कुमार कण>, oीमती इरा मिŒलक, राम कुमार िमo,
नीरज कुमार कण>, Eदीप पु»प, राजीव रंजन िमoा, चंदन कुमार झा आिद भेलिथ। एिह धाराक अंतग>त सरल
वािण>क बहरमे लीखए बला िकछु गजलकार एना छिथ-- इरा मिŒलक, सुनील कुमार झा, पंकज चौधरी नवल
oी, िमिहर झा, अिनल मिŒलक, दीप नारायण िव_ाथ¼,Eवीन नारायण चौधरी Eतीक, भावना नवीन, रिव िमoा
भार¸ाज, अजय ठाकुर मोहन, Eभात राय भ½, सुिमत िमoा "गुंजन" आिद। एिह ठाम tप´ करब बेसी
जªरी जे सरल वािण>क बहर माL आरंिभक अनुशासन लेल अिछ। एकर उ_े«य ई अिछ जे पिहने
गजलकार हŒलुकसँ सीखिथ आ तकर बाद गजलक मूल बहरपर जािथ। ओना ई कहबामे हमरा कोनो
संकोच नै जे बहुतो िबना xयाकरण बला गजलकार सभसँ नीक ई सरल वािण>क बला गजलकार सभ लीखै
छिथ। सरल वािण>क बहर मूल वैिदक छंद अिछ जािहमे गजलक हरेक पsितमे अJरक सं©या एक समान
देल जाइ छै जखन िक गजलक मूल बहर वण>वृत अिछ जािहमे गजलक हरेक पsितक माLा¾म एक समान
रहै छै मने हरेक पsितक लघुकT िन¿चा लघु आ दीघ>क िन¿चा दीघ>।
उपरक नाम सभहँक अलावे हम अपने xयाकरणयु°त गजलक समथ>क छी आ िकछु गजल सेहो लीिख/किह
लै छी।
xयाकरणयु°त आधुिनक मैिथली गजलमे भेल काज
1905सँ लगातार xयाकरणयु°त िलखाइत रहल आ 11/4/2008कT “अनिचbहार आखर” नामक ¨लाग
इंटरनेटपर आएल। एकरा एिह िलंकपर देखल जा
सकैए
https://anchinharakharkolkata .blogspot.in/ । अनिचbहार आखर केर छोटका नाम " अ-आ "
राखल गेल अिछ। ई ¨लाग हमरा ¸ारा शुª कएल गेल छल आ समय-समयपर आन-आन गजलकार सभकT
जोड़ल गेल। वत>मानमे ई ¨लाग हमरा आ गजेbm ठाकुर ¸ारा संपािदत भऽ रहल अिछ तँ देखी xयाकरणयु°त
आधुिनक मैिथली गजल लेल भेल िकछु एहन काज जे अ.आ ¸ारा भेल ---
1) अ-आ िEंट वा इंटरनेटपर पिहल उपिtथित अिछ जे की माL आ माL गजल एवं गजल अधािरत िवधापर
केिbmत अिछ।
2) अ-आ केर आŽहपर oी गजेbm ठाकुर जी गजलशाtL िलखला जे की मैिथलीक पिहल गजलशाtL भेल।
एही गजलशाtLमे ठाकुरजी सरल वािण>क बहरक जbम देलाह।
3) अ-आ ¸ारा "गजल कमला-कोसी-बागमती-महानbदा स‘मान" केर शुªआत भेल। जे की tवतbL ªप²
गजल िवधा लेल पिहल स‘मान अिछ।

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

  
Videha Ist Maithili Fortnightly
ejournal 'िवदेह ' २५३ म अंक ०१ जुलाइ २०१८ (वषᭅ ११ मास १२७ अंक २५३ )
मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA
6

4) अ-आ केर ई सौभा’य छै जे ओ मैिथली बाल गजल नामक नव िवधाकT जbम देलक आ ओकर पोषण
केलक। मैिथली भि°त गजल सेहो अ-आ केर देन अिछ। िवदेहक अÂ 111 पूण> ªपेण बाल-गजल
िवशेष®क अिछ आ अÂ 126 भि°त गजल िवशेष®क।
5) बख> 2008 आ 2015 मsझ करीब 30टासँ बेसी गजलकार मैिथली गजलमे एलाह। ई गजलकार सभ
पिहनेसँ गजल नै िलखै छलाह। संगे-संग करीब 6-7टा गजल समीJक-आलोचक सेहो एलाह।
6) पिहल बेर मैिथली गजलक JेLमे एकै बेर करीब 16-17 टा आलोचना िलखाएल।
7) अ-आ मैिथली गजलकT िवÃिव_ालय ओ यू.पी.एस. सी एवं बी.पी.एस. सीमे tथान िदएबाक अिभयान
चलौने अिछ आ एकटा माडल िसलेबस सेहो बना कऽ Etतुत केने अिछ।
8) अ-आ प. जीवन झा जीक मृgयु केर अंŽेजी तारीख पता लगा ओकरा गजल िदवस मनेबाक अिभयान
चलौने अिछ।
9) अ-आ 1905सँ लऽ कऽ 2013 धिरक गजल सÄÅहक सूची एकÆा ओ Eकािशत केलक (xयाकरणयु°त
एवं xयाकरणहीन दूनू)।
10) अ-आ अिधक®श गजलकारक (xयाकरण यु°त एवं xयाकरणहीन दूनू) संिJdत पिरचय Etतुत केलक।
11) अ-आ 62 खiडमे गजलक इtकूल नामक oृखंला चलौलक जे की समाbय पाठकसँ लऽ कऽ
गजलकार धिर लेल समान ªपसँ उपयोगी अिछ।
12) अ-आ मैिथलीमे पिहल बेर आन-लाइन मोशयाराक आर‘भ केलक आ ई बेस लोकिEय भेल।
13) मैिथली गजल आ अbय भारतीय भाषाक गजल बीच संबंध बनेबाक लेल "िवÃ गजलकार पिरचय
शृखंला" शुª कएल गेल।
14) एखन धिर अ.आ केर मा¥यम² मैिथली गजलमे गजल-1386, बाइ-417, बाल गजल 207, बाल
बाइ-47, भि°त गजल-47, हजल-21, आलोचना-28, कसीदा-3, नात-2, बंद-4,भि°त बाइ-1, मािहया-2,
देल जा चुकल अिछ। जतेक गजलकार अ.आ केर मा¥यम² आएल छिथ हुनका सभ ¸ारा रिचत गजलक
सं©या जोड़ल जाए तँ लगभग 3000 गजलक सं©या पहुँचत।
अनिचbहार आखरक एही काज सभकT देखैत मैिथली गजलक पिहल अªजी गजेbm ठाकुर 2008क बाद सँ
लऽ कऽ वत>मान कालखंडकT "अनिचbहार युग" केर नाम देलाह (1905सँ लऽ कऽ 2007 धिरक कालखंडकT
गजेbmजी आधुिनक मैिथलीक पिहल गजलकार जीवन झाजीक नामपर "जीवन युग" नाम देलाह)।

मैिथली गजलमे िवदेह केर योगदान
िवदेह इंटरनेटक EिसÇ मैिथली पिLका अिछ जे िक गजेbm ठाकुरजी ¸ारा संचािलत अिछ आ हरेक मासक
1 आ 15 तारीखकT Eकािशत होइत अिछ। एकरा एिह िलंकपर देखल जा
सकैए
http://videha.co.in/ िवदेहक िकछु एहन काज जै िबना आधुिनक xयाकरणयु°त मैिथली गजलक
उgथान स‘भव नै छल--
1) िवदेहक 21म अंक (1 नव‘बर 2008)मे राजेbm िवमल जीक 2 टा गजल अिछ। राम भरोस कापिड़
±मर आ रोशन जनकपुरी जीक 11 टा गजल अिछ। संगे-संग धीरेbm Eेमिष> जीक 1 टा आलेख मैिथलीमे

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

  
Videha Ist Maithili Fortnightly
ejournal 'िवदेह ' २५३ म अंक ०१ जुलाइ २०१८ (वषᭅ ११ मास १२७ अंक २५३ )
मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA
7

गजल आ एकर संरचना। अिछ संगे-संग ऐ आलेखक संग 1 टा गजल सेहो अिछ Eेमिष> जीक। िवदेहक ऐ
अंकमे कतहुँ ई नै फिड़छाएल अिछ जे ई गजल िवशेष®क िथक मुदा िवदेहक ऐसँ पिहनुक अंक सभमे
गजलक माद² हम कोनो तेहन िवtतार नै पबै छी तँए हम एही अंककT िवदेहक गजल िवशेष®क मानलहुँ
अिछ।
2) िवदेहक अंक 96 (15 िदस‘बर 2011)मे मु¹ाजी ¸ारा गजल पर पिहल पिरचच„ भेल। ऐ पिरचच„क
शीष>क छल मैिथली गजल: उgपिŠ आ िवकास (tवªप आ स‘भावना)। ऐमे भाग लेलिथ िसयाराम झा सरस,
गंगेश गुंजन, Eेमचंद पंकज, शेफािलका वम„, िमिहर झा ओमEकाश झा, आशीष अनिचbहार आ गजेbm ठाकुर
भाग लेलिथ। ऐकT अितिर°त राजेbm िवमल, मंजर सुलेमान ऐ दूनू गोटाक पूव>Eकािशत लेखक भाग, धीरेbm
Eेमिष>जीक पूव> Eकािशत लेख) सेहो अिछ।
3) िवदेहक अंक 111 (1/8/2012) जे की बाल गजल िवशेष®क अिछ जािहमे कुल 16 टा गजलकारक
कुल 93 टा बाल गजल आएल।
4) िवदेहक 15 माच> 2013 बला 126म अंक भि°त गजल िवशेष®क छै।
5) 15 नव‘बर 2013कT िवदेहक 142म अंक "गजल आलोचना-समालोचना-समीJा" िवशेष®क छल।
एिह सभहँक अलावे िवदेह समय-समयपर िविभ¹ िवधाक गोRी करबैत रहल अिछ जािहमसँ एकटा गजल
सेहो अिछ।
आधुिनक xयाकरणयु°त मैिथली गजलक आलोचना
आधुिनक xयाकरणयु°त गजल आलोचनाक बात करी तँ सभसँ पिहने रामदेव झा जी ¸ारा िलखल ओ रचना
पिLकाक जून 1984मे Eकािशत ओिह लेख केर चच„ करए पड़त जकर शीष>क "मैिथलीमे गजल" छल।
हमरा जनैत ई लेख ओिह समयक िहसाब² मैिथली गजल आलोचनाक सभ मापडंद पूरा करैत अिछ (वत>मान
समयमे रामदेव झाक जीक पुL सभ एही आलेखसँ वत>मान गजलकT मापै छिथ आ ई हुनकर सीमा छिन।
ईहो कहब उिचत जे वत>मान समयक िहसाब² ओ आलेख औसत tतरक अिछ मुदा एही कारणसँ एकर महgव
कम नै भऽ जेतै)। ओना ई उŒलेखनीय जे ईहो आलेख गजलक िवधानकT ओझरा कऽ रािख देने अिछ
कारण एिह लेखमे गजलक बहरकT मािLक जकs मानल गेल छै जे िक वtतुतः लेखक महोदय केर सीमा
छिन। वण>वृत छंदमे हरेक पsितक माLाक जोड़ एकै अबै छै आ मािLक छंदमे सहो। हमरा जनैत रामदेव झा
जी एहीठाम ±ममे फँिस गेलाह। वण>वृतमे लघु-गुª केर िनयत tथान होइत छै मुदा मािLक छंदमे लघुक
tथानपर दीघ> सेहो आिब सकैए आ दीघ>क tथानपर लघु सेहो। मुदा गजलक बहर वण>वृत छै। तथािप
कमसँ कम ओिह समयमे ई कहए बला िकयो सेहो भेलै जे गजलमे िवधान होइत छै आ सएह एिह आलेखक
पिहल िवशेषता अिछ। एिह आलेखक दोसर िवशेषता ई जे रामदेव झाजी Eाचीन मैिथली गजलकार सभहँक
नाम देने छिथ जे िक सभ गजलक इितहासकार ओ पाठक लेल उपयोगी अिछ। एिह आलेखक तेसर
िवशेषता अिछ जे रामदेव झाजी tप´ tवरमे ओिह समयक बहुत रास किथत ¾®ितकारी गजलकार सभहँक
गजलकT खािरज करै छिथ जे िक ओिह समयक िहसाबसँ बड़का िवtफोट छल। ई आलेख ततेक Eभावकारी
भेल जे ओ समयक िबना xयाकरण बला गजलकार सभ िछलिमला गेलाह आ एिह आलेखक िवरोधमे िविभ¹
व°तxय सभ देबए लगलाह। उदाहरण लेल िसयाराम झा सरस, तारानंद िवयोगी, रमेश ओ देवशंकर
नवीनजीक संपादनमे Eकािशत साझी गजल संकलन "लोकवेद आ लालिकला" (वष> 1990) केर कितपय लेख

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

  
Videha Ist Maithili Fortnightly
ejournal 'िवदेह ' २५३ म अंक ०१ जुलाइ २०१८ (वषᭅ ११ मास १२७ अंक २५३ )
मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA
8

सभ देखल जा सकैए जािहमे रामदेव झाजी ओ हुनक tथापनाकT जिम कऽ आरोिपत कएल गेल अिछ। ओही
संकलनमे देवशंकर नवीन अपन आलेख "मैिथली गजलःtवªप आ संभावना"मे िलखै छिथ जे "............पुनः
डा. रामदेव झाक आलेख आएल। एिह िनबbध मे दू टा बात अनग>ल ई भेल जे गजलक पंि°त लेल छंद
जकs माLा िनध„िरत करए लगलाह आ िकछु एहेन xयि°तक नाम मैिथली गजल मे जोिड़ देलिन जे किहयो
गजल नै िलखलिन"
आन लेख सभमे एहने बात सभ आन आन तरीकासँ कहल गेल अिछ। रामदेव झाजीक आलेखक बाद एहन
आलेख नै आएल जािहमे गजलकT xयाकरण दृि´सँ देखल गेल हो कारण तािह समयक गजलपर किथत
¾®ितकारी गजलकार सभहँक क¨जा भऽ गेल छल। कोनो िवधा लेल आलोचना Eाण होइत छै तँइ
"अनिचbहार आखर" अपन शुªआतेसँ आन काजक अितिर°त गजल आलोचनापर सेहो ¥यान क²िmत केलक
आ मैिथली गजलक अपन आलोचक सभकT िचिÉत कऽ बेसी आलोचना िलखबेलक। आ एही कारणसँ मैिथली
गजल आब ओहन आलोचक सभसँ मु°त अिछ जे िक मूलतः सािहgय केर आन िवधाक आलोचक छिथ आ
किहयो काल गजलक आलोचना कऽ गजलपर एहसान करै छिथ। ई पsित िलखैत हमरा गव> अिछ जे
मैिथली गजलकT आब छह-सात टासँ बेसी अपन आलोचक छै। अनिचbहार आखर जे-जे गजल आलोचना
िलखबा कऽ Eकािशत करबेलक तकर िववरण एना अिछ----
1) गजलक साºय (तारानंद िवयोगी जीक गजल संŽह केर आशीष अनिचbहार ¸ारा कएल गेल आलोचना)
2) बहुिपया रचनामे (अरिवbद ठकुर जीक गजल संŽह केर ओमEकाश जी ¸ारा कएल गेल आलोचना)
3) घोघ उठबैत गजल (िवभूित आनंद जीक गजल संŽह केर ओम Eकाश जी ¸ारा कएल गेल आलोचना)
4) िवदेहक 103म अंकमे Eकािशत Eेमचंद पंकजक दूटा गजलक समीJा जे की ओमEकाश जी केने छिथ
5) मु¹ाजीक गजल संŽह "मsझ आंगनमे कितआएल छी"- समीJक गजेbm ठाकुर
6) मैिथली गजल आ अभÆाकारी
7) अ³ानी संपादकक फेरमे मरैत गजल (घर-बाहर पिLकाक अEैल-जून 2012 अंकमे Eकािशत गजलक
समीJा)
8) मैिथली बाल गजलक अवधारणा
9) कितआएल आखर (मु¹ा जीक गजल संŽह केर अिमत िमo जी ¸ारा कएल गेल आलोचना)
10) गजलक लेल (िवजयनाथ झा जीक गजल ओ गीत संŽह- अहीँक लेल के ओमEकाश जी ¸ारा कएल
समीJा)
11) भोथ हिथयार (oी सुरेbm नाथ जीक गजल संŽह केर ओमEकाश जी ¸ारा कएल गेल आलोचना)
12) पहरा अधपहरा (बाबा बै_ानथ जीक गजल संŽह केर आशीष अनिचbहार ¸ारा कएल गेल आलोचना)
13) गजलक लहास (tव. कलानbद भ½जीक गजलसंŽह केरजगदानbद झा मनु ¸ारा कएल गेल आलोचना)
14) सूयÊदयसँ पिहने सूय„tत (राजेbm िवमल जीक गजल संŽहक आशीष अनिचbहार कएल गेल आलोचना)
15) बहुत िकछु बुझबैएः िकयो बूिझ ने सकल हमरा (ओमEकाशजीक गजल संŽहपर चंदन कुमार झाजीक
आलोचना)
16) EितबÇ सािहgयकारक अEितबÇ गजल (िसयाराम झा सरसजीक गजल संŽहपर जगदीश चंm ठाकुर
अिनलजीक आलोचना)

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

  
Videha Ist Maithili Fortnightly
ejournal 'िवदेह ' २५३ म अंक ०१ जुलाइ २०१८ (वषᭅ ११ मास १२७ अंक २५३ )
मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA
9

17) अरिवbदजीक आजाद गजल (अरिवbद ठाकुरजीक गजल संŽहपर जगदीश चंm ठाकुर अिनलजीक
आलोचना)
18) छË गजल (गंगेश गुंजनजीक गजल सन िकछुपर आशीष अनिचbहार ¸ारा कएल आलोचना)
19) कलंिकत चान (राम भरोस कापिड़ ±मरजीक गजल संŽहक आशीष अनिचbहार ¸ारा कएल आलोचना)
20) मैिथली गजल xयाकरणक शुªआती Eयोग (गजेbm ठाकुरजीक गजल संŽह "ध®िग बाट बनेबाक दाम
अगूबार पेने छँ" केर आशीष अनिचbहार ¸ारा कएल आलोचना)
21) िचकनी मािटमे उपजल नागफेनी (रमेशजीक गजल संŽह "नागफेनी" केर आशीष अनिचbहार ¸ारा कएल
आलोचना)
22) नवगछुलीक E®जल सरस रसाल: नव अंशु (अिमत िमo केर गजल संŽह "नव-अंशु" केर िशव कुमार
झा"िटŒलू" ¸ारा कएल गेल समीJा)
23) िसयाराम जा सरस जीक गजल संŽह "शोिणताएल पैरक िनशान"पर कुंदन कुमार कण>जीक िटdपणी
24) oी जगदीश चbद ठाकुर ऽअिनलऽ जीक िलखल गजल संŽह "गजल गंगा" केर जगदानंद झा"मनु" ¸ारा
कएल समीJा
25) मैिथली गजलक संसारमे अनिचbहार आखर (आशीष अनिचbहारक गजल संŽहक जगदीश चंm ठाकुर
अिनलजी ¸ारा कएल आलोचना)
26) थोड़े मािट बेसी पािन (िसयाराम झा सरसजीक गजल संŽहपर कुंदन कुमार कण>जीक आलोचना)
आधुिनक xयाकरणयु°त मैिथली गजलक िकछु उदाहरण
एिह ठाम आब हम िकछु शेरक उादहरण देब आ एिहमे हम अरबी बहर जे िक गजलक मूल बहर अिछ आ
सरल वािण>क बहर दूनूमे िलखल शेर सभ Etतुत करब। हम उदहारणमे सभ िवचार बला शेर राखब जािहसँ
पाठक सहजिहं बुझता जे बहर-xयाकरण गजलक िवचारमे बाधक नै होइत छै। गजलक पिहल पsितमे जे
माLा¾म रहै छै तकर ओ पूरा गजलमे पालन करब छंद वा बहरक िनव„ह केनाइ भेलै। ऐठाम हम tप´
करी जे मैिथलीक आधुिनक xयाकरणयु°त गजलकारक सं©या बहुत बेसी अिछ मुदा हम एिहठाम माL ओतबे
गजलकारक शेर लेलहुँ अिछ जािह हमर उ_े«य पूरा भऽ जाए (उदाहरणमे आएल शेर सभ एकौ गजलक भऽ
सकैए आ अलग अलग गजलक सेहो। संपादक महोदयसँ आŽह जे उदाहरणमे देलग गेल शेर सभहँक
वत>नीकT यथावत् राखिथ)।--
पं जीवन झाजीक एकटा गजलमे विण>त िवरहक नीक िचLण देखू—

अनंÄ सbताप सॱ जरै छी अहsक िचbता जतै करै छी
सखीक लाजे ततै मरै छी जतै कही वा जतै कहाबी
एिह शेरक माL¾म 12+122+12+122+12+122+12+122 अिछ आ पूरा गजलमे एकर Eयोग भेल
अिछ। झाजीक दोसर गजलक एकटा आर िवरहपरक शेर देखू—

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

  
Videha Ist Maithili Fortnightly
ejournal 'िवदेह ' २५३ म अंक ०१ जुलाइ २०१८ (वषᭅ ११ मास १२७ अंक २५३ )
मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA
10

अहs सॲ भ²ट जिहआ भेल तेखन सॲ िवकल हम छी
उठैत अbधार होइए काज सब करबामे अJम छी
एिह शेरक माLा¾म 1222+1222+1222+1222 अिछ आ पूरा गजलमे एकर Eयोग भेल अिछ। उपरक
एिह तीन टा उदाहरणसँ tप´ अिछ जे पं. जीवन झाजी मैिथली गजल आ गजलक xयाकरणक बीच नीक
ताल-मेल रखने छलाह। फेर हुनक तेसर शेरक एकटा आरो शेर देखू जे िक Eेममे पड़ल नायक-नाियका
मनोभाव अिछ--
पड़ैए बूिझ िकछु ने ¥यानमे हम भेल पागल छी
चलै छी ठाढ़ छी बैसल छी सूतल छी िक जागल छी
एिह शेरक माLा¾म 1222+1222+1222+1222 अिछ आ पूरा गजलमे एकर Eयोग भेल अिछ। किववर
सीताराम झाजीक िकछु शेरक उदाहरण देखू—

हम की मनाउ चैती सतुआिन जूड़शीतल
भै गेल माघ मासिह धधकैत घूड़तीतल`
मतलाक छंद अिछ 2212+ 122+2212+ 122 आब एही गजलक दोसर शेर िमला िलअ-

अिछ देशमे दुपाटी कङरेस ओ िकसानक
हम मsझमे पड़ल छी बिन कै िबलािड़ तीतल
पिहल शेर आइयो ओतबे Eासंिगक अिछ जते पिहले छल। आइयो नव साल गरीबक लेल नै होइ छै। दोसर
शेरकT नीक जकs पढ़ू आइसँ सािठ-सŠर साल पिहलुक राजनीितक िचL आँिख लग आिब जाएत। tप´
अिछ जे िबना xयाकरण तोड़ने किववरजी Eगितशील भावक गजल िलखला जे अजुको समयमे ओतबे Eासंिगक
अिछ जतेक की पिहने छल। जे ई कहै छिथ जे िबना xयाकरण तोड़ने Eगितशील गजल नै िलखल जा
सकैए हुनका सभकT ई उदाहरण देखबाक चाही। काशीकाbत िमo "मधुप" जीक दूटा शेर देखल जाए—

िमिथलाक पूव> गौरव निह ¥यान टा धरै छी
सुिन मैिथली सुभाषा िबनु आिगय² जड़ै छी

सूगो जहsक दश>न-सुनबैत छल तहीँ ठs
हा आइ "आइ गो" टा पिढ़ उ¿चता करै छी

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

  
Videha Ist Maithili Fortnightly
ejournal 'िवदेह ' २५३ म अंक ०१ जुलाइ २०१८ (वषᭅ ११ मास १२७ अंक २५३ )
मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA
11

एिह गजलमे 2212-122-2212-122 माLा¾म अिछ जे िक गजलक हरेक शेरमे पालन कएल गेल अिछ।
देखू मधुपजी िभ¹ tवर लऽ कऽ आएल छिथ मुदा िबना xयाकरण तोड़ने। योगानंद हीराजीक गजलक दू टा
शेर—

मोनमे अिछ सवाल बाजू की
छल कपट केर हाल बाजू की
मतलाक दूनू पsितमे 2122-12-1222 अिछ आ दोसर शेर देखू-

छोट सन चीज कीिन ने पाबी
बाल बोधक सवाल बाजू की
हीराजी दोसर गजलक दू टा आर शेर देखू—

शूल सन बात ई
संसदे जेल अिछ

आब हीरा कहै
जौहरी खेल अिछ
एिह गजलक हरेक शेरमे सभ पsितमे 2122+12 माLा¾म अिछ। आब अहॴ सभ कहू जे हीराजीक गजलमे
समकालीनता, Eगितशीलता आिद छै िक नै। पिहल शेरमे शाइर वत>मान जीवनमे पसरल अजरकताकT देखा
रहल छिथ तँ दोसर शेरमे अभावक कारण ब¿चा धिरकT कोनो चीज नै दऽ पेबाक िववशता छै। तेसर शेर
आजुक िवडंबना अिछ। संसद वएह छै जे पिहने छलै मुदा स®सद सभ आब अपराधी वग>क अिछ तँइ
शाइरकT ओ जेल बुझा रहल छिन। चािरम शेरमे शाइर Eायोिजत Eसंशाक खेलकT उजागर केने छिथ। ई
खेल सािहgय िक आन कोनो JेLमे भऽ सकैए। जगदीश चंm ठाकुर "अिनल" जीक गजलक दू टा शेर—

टूटल छी तँइ गजल कहै छी
भूखल छी तँइ गजल कहै छी
मतलाक दूनू पsितमे 2222 +12 + 122 छंद अिछ आ एकर दोसर शेर देखू—

ऑिफस सबहक कथा कहू की

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

  
Videha Ist Maithili Fortnightly
ejournal 'िवदेह ' २५३ म अंक ०१ जुलाइ २०१८ (वषᭅ ११ मास १२७ अंक २५३ )
मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA
12

लूटल छी तँइ गजल कहै छी
भूख केर कथा सेहो xयाकरणयु°त गजलमे। सरकारी आिफसक कथा सभ जनैत छी। अिनलजी एहू कथाकT
xयाकरणक संग उपिtथत केने छिथ। समकालीन tवरे नै कालातीत tवरक संग िवजयनाथ झा जीक ऐ
गजलक दूटा शेर देखू—

िचदाकाश मधुमास मधुम°त मित मन
िवभव अिछ िविवधता उदय Óास अपने
मतलाक छंद अिछ 122-122-122-122 आब दोसर शेरक दूनू पsितकT जsच कऽ िलअ संगे संग भाव केर
सेहो-

खसल नीर िनम„Œय िनिध नोर जानल
सकल Ôोत oुित िवbदु िवbयास अपने
जँ आिद शंकराचय> केर मातृभाषा मैिथली रिहतिन तँ शायद िवजयनाथेजी सन िलखने रिहतिथ ओ। राजीव
रंजन िमoजीक ई गजल देखू—

िजनगी खेल तमाशा टा
आसक संग िनराशा टा

के जानल गऽ कखन केहन
दैबक हाथ तऽ पासा टा

उपरक दूटा शेरक माLा¾म 2221 1222 अिछ आ एिह गजल सभ शेरमे एकरे पालन कएल गेल अिछ।
जीवनक गूढ़ बातकT सरल श¨दमे कहल गेल अिछ सेहो xयाकरणक संग। आस आ िनराश दूनू िजवनक भाग
छै। दोसर शेरमे भ’य केखन पलटत तकर वण> अिछ। अहॴ कहूँ िवचार कतए बbहा गेल छै xयाकरणसँ।
ओमEकाशजीक ई दूटा शेर देखू—

कखनो सुखक भोर िलखै छी
कखनो खसल नोर िलखै छी

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

  
Videha Ist Maithili Fortnightly
ejournal 'िवदेह ' २५३ म अंक ०१ जुलाइ २०१८ (वषᭅ ११ मास १२७ अंक २५३ )
मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA
13

िमठगर रसक बात कहै छी
संगे कª झोर िलखै छी
2-2-1-2, 2-1, 1-2-2 माLा¾म Egयेक पsितमे अिछ। शाइर अपन िनजी जीवनक बातकT बहर-xयाकरणमे
कहलिथ आ नीक जकs कहलिथ अिछ। कोनो शाइरकT जीवनमे भऽ रहल सभ बातकT िलखबाक चाही मुदा
अफसोच जे लोक िकछु Jिणक लाभ लेल ने सच बाजए वाहैए आ ने सूनए चाहैए। मुदा शाइर अपन मीठ-
तीत सभ बात xयाकरणमे किह रहल छिथ। कहs कोनो िदÕत छै। अिमत िमoक दूटा शेर देखल जाए—

जािह घरमे भूखल दीन अहs देखने होयब
हाड़ म®सक बनल मशीन अहs देखने होयब

एक पाइक लेल परान अपन बेच दै छै ओ
गाम घरमे एहन दीन अहs देखने होयब
एकर माLा¾म 2122-2112-1122-1222 अिछ। एिह गजलमे Eगितशीलता सेहो अिछ आ बहर-xयाकरण
सेहो। एखनो कतहुँ-कतहुँसँ समाद आिब जाइए से फŒलs िकछु पाइ लेल अपन ब¿चा बेिच लेलक वा अपन
ब¿चा संग जान दऽ देलक। ई सभ बात गजलमे अिमतजी xयाकरणक संग रखने छिथ। Eदीप पु»प केर
एकटा गजल देखल जाए आ समकालीनता, xयं’य आ xयाकरण तीनू एकै संग देखू---

गमकैत घाम बला लोक
चमकैत चाम बला लोक

भाषण आमो पर दै छै
थुर¼ लताम बला लोक

बsटै दरद सगरो खूब
ई झंडु बाम बला लोक

करतै उÇार िमिथलाक
िदŒली असाम बला लोक

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

  
Videha Ist Maithili Fortnightly
ejournal 'िवदेह ' २५३ म अंक ०१ जुलाइ २०१८ (वषᭅ ११ मास १२७ अंक २५३ )
मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA
14

मॱसो केर हाट लगबै
गsधीक गाम बला लोक
222-222-2 सब पsितमे माLा¾म अिछ। Eदीपजीक ई गजल समŽ ªप² ओहन गजलकार सब लेल अिछ
जे िक अनेरे गजलक xयाकरणकT खराप मानै छिथ। Eदीपजी जखन दोसर शेरमे "थुर¼ लताम बला लोक"
कहै छिथ तँ xयं’यक पराकाRा भऽ जाइत अिछ। अंितम शेरमे Eयोग भेल "गsधीक गाम बला लोक" पsित
ओहन लोकक नकाब उतारैत अिछ िजनकर जीवनमे भीतर िकछु छिन आ बाहर िकछु। राम कुमार िमoजीक
टूटा शेर देखू—

जाित- धम>क जु¹ाम² अँिटयाइते रहलहुँ
छूत-अछुतक अदहनम² उिधयाइते रहलहुँ

पेट कोना जड़लै पितयौलक िकयो किहया
झूठ-सsचक भाषण धिर पितयाइते रहलहुँ

सभ पsितमे माLा¾म 2122+222+2212+22 । जाित-धम> एखनो अपना समाज लेल भयावह सपना
अिछ। आ शाइर रामकुमार िमoजी xयाकरणक संग एकर वण>न केने छिथ। दोसर शेरमे ओ झूठ भाषणसँ
जनता कोना तृdत होइ छै से कहने छिथ। अहॴ सभ कहू की xयाकरणसँ भाव बbहा गेलै? दू टा शेर कुंदन
कुमार कण>जीक देखू जािहमेसँ पिहल शेर िनिÖते ªप² उपिनषद् केर मोन पािड़ दैए --
भाव शुÇ हो त मोनमे भय कथीके
छोिड़ मृgयु जीव लेल िनÖय कथीके

जाित धम>के बढल अहंकार कुbदन
रिह िवभेद ई समाज सुखमय कथीके
एकर माLा¾म 212-1212-122-122 अिछ। भय िक डर ओकर होइ छै जे गलत काज करै छै।
कुंदनजीक पिहल शेर एकरे उØािटत करैए। दोसर शेरमे शाइरक िवÃास छिन जे जा धिर जाित भेद ने
हटत ता धिर समाज सुखमय नै भऽ सकैए। Eसंगवश कही जे कुंदन कुमार कण> नेपालमे मैिथली ओहन
पिहल गजलकार छिथ जे िक अरबी बहरमे गजल िलखै छिथ। आगू बढ़बासँ पिहने सरल वािण>क बहर बला
गजलक िकछु उदाहरण देिख ली। मु¹ाजीक दूटा शेर देखू-

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

  
Videha Ist Maithili Fortnightly
ejournal 'िवदेह ' २५३ म अंक ०१ जुलाइ २०१८ (वषᭅ ११ मास १२७ अंक २५३ )
मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA
15

केखन धोखा देत ई समान बजआ गारंटी नै
ई केखनो हँसाएत केखनो देत कना गारंटी नै

सरकार बनाबै एहन योजना गरीबक लेल
केखन जेतैक गरीबक अिtतgव मेटा गारंटी नै
(19 वण> हरेक पsितमे।) मु¹ाजी आजुक बजारवादसँ उपजल कमगुणवŠा बला समानक हाल अपन पिहल
शेरमे कहलिथ। दोसर शेरमे ओ सरकारी योजनका मूल उ_े«यपर xयं’य कऽ रहल छिथ। आब देखू सुिमत
िमo गुंजनजीक दूटा शेर—

नै कहू कखनो पहाड़ छै िजनगी
दैबक देलहा उधार छै िजनगी

भारी छै लोकक मनोरथक भार
कनहा लगौने कहार छै िजनगी
(वण>-13) गुंजनजीक पिहल सेर आसासँ भरल अिछ। ओ जीवनकT भारत मानबाक ओकालित नै करै छिथ।
दोसर शेरमे ओ लोकक अनेरेक सेहंताक संकेत देने छिथ।
सरल वािण>क बहरक उपरका उदाहरणक अितिर°त िवजय कुमार ठाकुर, नारायण मधुशाला, रामसोगारथ
यादव , िव_ानंद बेदद¼ आिद सभ सेहो सरल वािण>क बहरमे गजल िलखबाक Eयास कऽ रहल छिथ। एही
¾ममे मैिथल Eश®तजीक नाम सेहो जोड़ जा सकैए। मुदा िचंता ई जे ई सभ िविभ¹ िवधामे सेहो िलखैत
छिथ तँइ िहनकर सभहँक गजलक Eभाव केर आकलन एखन ताgकाल नै भऽ सकैए। दोसर िचंता ईहो जे
xयाकरणक मूल भाव रचना सुंदर करब छै केकरो आलोचनामे tथान भेटबाक िक पुरtकार Eािdत िक आन
कोनो Eयोजन नै। तँइ बहुत रास गजलकार एहनो भऽ सकै छिथ जे कोनो अभी´ पूरा नै भेलापर
xयाकरणक पालन छोिड़ सकै छिथ। मुदा फेर दोहरा दी जे "xयाकरणक मूल भाव रचना सुंदर करब छै आन
कोनो Eयोजन िसÇ करब नै"।

मैिथली बाल गजल

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

  
Videha Ist Maithili Fortnightly
ejournal 'िवदेह ' २५३ म अंक ०१ जुलाइ २०१८ (वषᭅ ११ मास १२७ अंक २५३ )
मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA
16

मैिथली बाल गजल श¨दक िनªपण हमरा ¸ारा भेल छल मुदा एिह िवषय-वtतुक गजल किववर सीताराम झा
पिहने लीिख गेल छिथ। तँइ ई मानब उिचत जे बाल गजलक अिtतgव मैिथलीमे पिहनेसँ छल मुदा ओकर
नामाकरण अनिचbहार आखर कालखंडमे भेलै। उपर जतेक गजलकार सभहँक उदाहरण देने छी वएह सभ
बाल गजल सेहो िलखने छिथ तँइ बेसी नै तँ दू-चािर टा बाल गजलक शेर रािख रहल छी। पिहने किववर
सीताराम झाजीक ई बाल गजल देखू—

बाउजी जागू ठारर भरै छी िकयै
xयथ> सूतल िक बैसल सड़ै छी िकयै
2122+ 122+ 122+ 12 माLा¾म अिछ। आब कुंदन कुमार कण>जीक बाल गजल देखू—

गामक बूढ हमर नानी
छै ममतासँ भरल खानी
2221-1222 माLा¾म अिछ। आब अिमत िमoजीक देखू—

हाट चल हाथकT पकिड़ भैया हमर
भीड़मे जाउँ नै िबछिड़ भैया हमर
212-212-212-212 माLा¾म अिछ। आब पंकज चौधरी नवलoीजीक देखू—

देख भेलै भोर भैया
आब आलस छोड़ भैया

दाय-बाबा माय-बाबू
लाग सभके गोर भैया
2122+2122 माLा¾म अिछ।
मैिथली भि°त गजल
मैिथली भि°त गजल श¨दक िनªपण अिमत िमo ¸ारा भेल छल मुदा एिह िवषय-वtतुक गजल किववर
सीताराम झा पिहने लीिख गेल छिथ। तँइ ई मानब उिचत जे बाल गजलक अिtतgव मैिथलीमे पिहनेसँ छल
मुदा ओकर नामाकरण अनिचbहार आखरक बाद भेलै। उपर जतेक गजलकार सभहँक उदाहरण देने छी वएह
सभ बाल गजल सेहो िलखने छिथ तँइ बेसी नै तँ दू-चािर टा भि°त गजल क शेर रािख रहल छी, पिहने
किववर सीताराम झाजीक—

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

  
Videha Ist Maithili Fortnightly
ejournal 'िवदेह ' २५३ म अंक ०१ जुलाइ २०१८ (वषᭅ ११ मास १२७ अंक २५३ )
मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA
17

जगत मे थािक जगद‘बे अिहंक पथ आिब बैसल छी
हमर °यौ ने सुनैये हम सभक गुन गािब बैसल छी
1222+1222+1222+1222 माLा¾म मने बहरे हजज। आब जगदानंद झा मनुजीक भि°त गजल देखू—

ह‘मर अँगना मैया एली
गमकै चहुँिदस अड़हुल बेली

धन हम छी धन ह‘मर अँगना
मैया जतए दश>न देली
22-22-22-22 माLा¾म अिछ। आब कुंदन कुमार कण>जीक भि°त गजल देखू—

हे शारदे िदअ एहन वरदान
हो जैसँ िजनगी हमरो कŒयाण
2212-222-221 माLा¾म अिछ। आब अिमत िमoजीक देखू—

सजल दरबार छै जननी
भगत भरमार छै जननी

िकओ नै हमर छै संगी
खसल आधार छै जननी
1222-1222 माLा¾म अिछ।
उपरक एिह उदाहरण सभसँ ई tप´ भऽ गेल हएत जे xयाकरण केखनो भाव वा िवचार लेल बाधक नै होइ
छै। हँ, हजारक हजार रचनामे िकछु एहन रचना बुझाइ छै जािहमे xयाकरणक कारण भाव बािधत भेलैए मुदा
ई तँ रचनाकारक सीमा सेहो भऽ सकै छै। गजल, भि°त गजल ओ बाल गजलक अितिरि°त मैिथलीमे
xयाकरणयु°त बाइ, बाल बाइ, भि°त बाइ, कता, हजल, नात आिद िवधा सेहो िलखल गेल अिछ आ
ओकर उदाहरण Eचुर माLामे अिछ आ अहs सभ एकरा अनिचbहार आखरपर नीक जकs देिख सकै छी।
िबना xयाकरण बला मैिथली गजलक इितहास

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

  
Videha Ist Maithili Fortnightly
ejournal 'िवदेह ' २५३ म अंक ०१ जुलाइ २०१८ (वषᭅ ११ मास १२७ अंक २५३ )
मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA
18

लगभग 1970-75सँ एखन धिर बहुतो गजलकार ओहन गजल िलखलिथ जािहमे गजलक िनयमक पालन नै
भेल अिछ। ई कहब बेसी उिचत जे ओिह धाराक गजलकार सभ िनयम पालन करहे नै चाहैत छिथ। ओ
हुनकर अवधारणा हेतिन। एिहठाम ओिह धाराक िकछु Eितिनिध गजलकार सभहँक नाम देल जा रहल अिछ -
-
1) रवीbm नाथ ठाकुर, 2) मायानंद िमo, 3) कलानंद भ½, 4) िसयाराम झा "सरस", 5) अरिवbद ठाकुर,
6) सुध®शु शेखर चौधरी, 7) धीरेbm Eेमिष>, 8) बाबा बै_नाथ, 9) िवभूित आनbद, 10) तारानbद िवयोगी,
11) रमेश, 12) राजेbm िवमल…आिद।
उपरमे देल Eितिनिध गजलकारक अितिर°त बहुतॲ एहन शाइर सभ छिथ जे की िछटपुट आजाद गजल
िलखला आ अbय िवधामे महारत हािसल केलाह। एिह सूचीमे बाबू भुवनेÃर िसंह भुवन, रमानंद रेणु, फूल चंm
झा Eवीण, वैकुiठ िवदेह, शीतल झा, Eेमचंm पंकज, प.िनgयानंद िमo, शारदानंद दास पिरमल, केदारनाथ
लाभ, तारानंद झा तण, रमाक®त राय रमा, महेbm कुमार िमo, िवनोदानंद, िदलीप कुमार झा िदवाना,
वै_नाथ िमo बैजू, िवलट पासवान िवहंगम, सारtवत, कण> संजय, अिनल चंm ठाकुर, «याम सुbदर शिश,
अशोक दŠ, कमल मोहन चु¹ू, रोशन जनकपुरी, िजयाउर रहमान जाफरी, धमµbm िवहवल्, सुरेbm Eभात,
अतुल कुमार िमo, रमेश रंजन, कbहैया लाल िमo, गोिवbद दहाल, चंmेश, चंmमिण झा, फजलुर रहमान
हाशमी, रामलोचन ठाकुर, िवनयिवÃ बंधु, रामदेव भावुक, सोमदेव, रामचैतbय धीरज, महेbm, केदारनाथ लाभ,
गोपाल जी झा गोपेश, नंद कुमार िमo, देवशंकर नवीन,माक>iडेय Eवासी,अमरेbm यादव, नरेbm आिद। बहुत
रास नाम धीरेbm Eेमिष> जी ¸ारा संपािदत गजल िवशेष®क पर आधािरत अिछ। िकछु िदन धिर गीतल नामसँ
सेहो Eयोग भेल मुदा हम एकरा अजादे गजल मानै छी आ वtतुतः ओ अजादे गजल छै। आ तँइ िन¿चा हम
ओकरो समेटने छी एिहठाम।
िबना xयाकरण बला मैिथली गजलमे भेल काज
िबना xयाकरण बला मैिथली गजलमे एखन धिर कोनो एहन काज नै भेल अिछ तँइ एिह आधारपर एकर
मूŒयाकंन करब असंभव तँ नै मुदा बहुत किठन अिछ। एिह धाराक शाइर सभ बस अपन-अपन गजलक
पोथीकT Eकािशत करबा लेबाकT काज मािन लेने छिथ। आगूसँ हम "िबना xयाकरण बला मैिथली गजल" लेल
“अजाद गजल” श¨दक Eयोग करब। अजाद गजलक इितहासमे जे पिहल जगिजयार काज देखाइए ओ अिछ
एिह1990मे िसयाराम झा सरस, तारानंद िवयोगी, रमेश आ देवशंकर नवीनजी ¸ारा संकिलत ओ संपािदत
साझी गजल संŽह "लोकवेद आ लालिकला" केर Eकाशन। एिह संकलनमे कुल 12 टा गजलकारक 84 टा
गजल अिछ। भूिमका सभहँक अनुसारे ई संकलन Eगितशील गजलक संकलन अिछ आ जािहर अिछ जे
एिहमे सहभागी गजलकार सभ सेहो Eगितशील हेबे करता। बारहो गजलकारक नाम एना अिछ कलानंद भ½,
तारानंद िवयोगी, डा.देवशंकर नवीन, नरेनm, डा. महेbm, रमेश, रामचैतbय धीरज, रामभरोस कापिड़ ±मर,
रवीbm नाथ ठाकुर, िवभूित आनंद, िसयाराम झा सरस, Eो. सोमदेव। एिह संकलनक अलावे धीरेbm Eेमिष>जी
¸ारा संपािदत पŒलव केर "गजल अंक" जे िक 2051 चैतमे मैिथली िवकास मंच, माठम®डूक मािसक
सािहिgयक Eकाशन अंतग>त Eकािशत भेल (वष>-2, अंक-6, पूणÚक-15) सेहो अजाद गजलक धारामे नीक
काज अिछ। जँ अंŽेजी तारीखसँ बूझी तँ माच>,1995 केर लगभगमे पŒलवक "गजल अंक" Eकािशत भेल
अिछ ( नेपालक तारीख बदलबामे जँ हमरासँ गलती भेल हो तँ ओकरा सुधारल जाए)। आगू बढ़बासँ पिहने

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

  
Videha Ist Maithili Fortnightly
ejournal 'िवदेह ' २५३ म अंक ०१ जुलाइ २०१८ (वषᭅ ११ मास १२७ अंक २५३ )
मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA
19

पŒलवक गजलक अंकक िकछु बानगी देिख िलअ--एिह गजल िवशेष®कमे कलानंद भ½, फूलचंm झा Eवीण,
रमानंद रेणु, िसयाराम झा सरस, राजेbm िवमल, रामदेव झा, बैकुंठ िवदेह, रामभरोस कापिड़ ±मर, रमेश,
शेफािलका वम„, शीतल झा, गोपाल झाजी गोपेश, Eेमचंm पंकज, पं.िनgयानंद िमo, शारदानंद पिरमल, रमाक®त
राय रमा, महेbmकुमार िमo, धीरेbm Eेमिष>, चंmेश, िवनोदानंद, िदिलप कुमार झा दीवाना, वै_नाथ िमo बैजू,
रोशन जनकपुरी, सारtवत, कण> संजय, «यामसुंदर शिश, अिजत कुमार आजाद, ललन दास, धमµbm िवÛल,
सुरेbm Eभात, अतुल कुमार िमo, रमेश रंजन, कbहैयालाल िमo, गोिवbद दहाल आिद 34 टा गजलकारक
एक एकटा गजल अिछ मने 34 टा गजलकारक 34 टा गजल अिछ। एिह िवशेष®कक संपादकीय अजादक
गजलक िहसाबे अिछ। ई पिLका कुल चािर प¹ाक छपैत छल आ ओिह िहसाब² चॱतीस टा गजल कोनो
खराप सं©या नै छै।
नेपालसँ Eकािशत पŒलवक "गजल अंक" आ भारतसँ Eकािशत "लोकवेद आ लालिकला" दूनूक समयमे करीब
6-7 बख>क अंतराल अिछ (Eकाशनसँ पिहनेक तैयारीकT सेहो देखैत)। दूनूक संपादको अलग छिथ। दूनू
काजक tथान ओ पिरिtथितयो अलग अिछ मुदा ओिह के अछैत एकटा दुयÊग दूनूमे एक समान ªपसँ
िव_मान अिछ। ई दुयÊग अिछ ओिह अंक िक संकलनमे पुरान गजलकारकT tथान नै देब। जँ दूनू संपादक
चाहतिथ तँ ओिह अंक िक संकलनमे पुरान गजलकारकT समेिट कऽ एकटा संपूण> िचL आिन सकै छलाह
मुदा पता नै कोन पिरिtथित िक तgव छलै जे दूनू ठाम एिह काजमे बाधक बनल रहल। Eाचीन गजल बेसी
अिछए नै तँइ ने बेसी पाइ लगबाक संभवाना छलै आ ने बेसी मेहनितक जªरित छलै। भऽ सकैए जे िहनका
सभ लेल ई EÜ महgवपूण> नै हो मुदा एकटा गजल अ¥येताक ªपमे हमरा सभसँ बेसी इएह बात खटकल
अिछ। िकछु एहन तgव तँ जªर रहल हेतै जािहसँ Eभािवत भऽ कऽ दूनू संपादकक एकै रंगक सोच रखने
छलाह। खएर सूचना दी जे वत>मान समयमे हमरा ओ गजेbm ठाकुरजी ¸ारा संपािदत पोथी "मैिथलीक
Eितिनिध गजलः1905सँ 2016 धिर" जे िक ई-भस>न ªपमे Eकािशत अिछ तािहमे उपरक दुयÊगकT दूर कऽ
देल गेल अिछ। एिह संकलनमे सभ Eाचीन गजलकारकT tथान देल गेल अिछ जािहसँ मैिथली गजलक संपूण>
छिव पाठक लग आिब जाइत छिन।
उपरक काजक अलावे एक-दू बख> पिहने मधुबनीमे सेहो अजाद गजलकार सभ ¸ारा गजल काय>शाला
आयोिजत भेल रहए मुदा ओकर समुिचत त­य हमरा लग नै अिछ तँइ ओिहपर हम िकछु बजबासँ बsिच रहल
छी।
अजाद गजलक शाइर सभ काजमे नै “Eयोग”मे बेसी िवÃास राखै छिथ आ तकर बानगी िथक "गीतल"।
गीतल (जे िक वtतुतः अजादे गजल अिछ) केर जbमदाता छिथ मायानंद िमo। ओ अपन गीतल िवधा केर
पोथी "अवातंतर" केर भूिमकामे(पृR 6 पर) िलखै छिथ-- "अवाbतरक आर‘भ अिछ गीतलसँ। गीतं लातीित
गीतलम्ऽ अथ„त गीत कT आनऽ बला भेल गीतल। िकbतु गीतल पर‘परागत गीत निह िथक, एिहमे एकटा सुर
गजल केर सेहो लगैत अिछ। गीतल गजल केर सब बंधन ( सत> ) कT tवीकार निह करैत अिछ। कइयो
निह सकैत अिछ। भाषाक अपन-अपन िवशेषता होइत अिछ जे ओकर संtकृितक अनुªप² िनिम>त होइत
अिछ। हमर उ_े«य अिछ िमoणसँ एकटा नवीन Eयोग। तÝ गीतल ने गीते िथक, ने गजले िथक, गीतो िथक
आ गजलो िथक। िकbतु गीित तgवक Eधानता अभी´, तÝ गीतल।" ई पोथी 1988मे मैिथली चेतना पिरषद्,
सहरसा ¸ारा Eकािशत भेल। उपरका उØोषणामे अहs सभ देिख सकै िछऐ जे कतेक दोखाह tथापना अिछ।

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

  
Videha Ist Maithili Fortnightly
ejournal 'िवदेह ' २५३ म अंक ०१ जुलाइ २०१८ (वषᭅ ११ मास १२७ अंक २५३ )
मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA
20

Eयोग हएब नीक गdप मुदा अपन कमजोरीकT भाषाक कमजोरी बना देब कतहुँसँ उिचत नै आ हमरा जनैत
मायानंद जीक ई बड़का अपराध छिन। जँ ओ अपन कमजोरीकT आँकैत गीतल केर आर‘भ करतिथ तँ कोनो
बेजाए गdप नै मुदा मायाजी पाठककT ±िमत करबाक Eयास केलाह जे िक ताgकाल सफल सेहो भेल। ई मोन
राखब बेसी जªरी जे 2011मे Eकािशत किथत गजल संŽह " बहुिपया Eदेश मे " जे की अरिवbद ठाकुर
¸ारा िलिखत अिछ ताहूमे ठीक इएह गdपकT दोहराओल गेलैए। गीतल िवधाक उØोषणापर सभसँ बेसी आपिŠ
िसयाराम झा सरसजीकT छिन जकरा ओ अपन पोथी "शोिणताएल पएरक िनशान" केर भूिमकामे िलखलिन
अिछ आ एहीठाम अजाद गजल दू ठाम बँिट गेल। पिहल िसयाराम झा सरस एवं अbय जे िक गजलकT
गजल मानै छलाह जािहमे तारानंद िवयोगी, रमेश, देवशंकर नवीन आिद छिथ। दोसर गीतल जािहमे मायानbद,
तारानbद झा तण, िवलट पासवान िवहंगम, आिद एला वा छिथ। ऐठs हम ई tप´ करऽ चाहब जे नाम भने
जे होइ मायानbद जी बला गुट वा सरसजी बला गुट दूनू गुटमेसँ कोनो गोटा गजल नै िलखै छलाह कारण
ओ xयाकरणहीन छल। आ xयाकरणहीन किथत गजलकT गजल नै गीतले टा कहल जा सकैए।
मैिथलीक अजाद गजलमे नै भेल काज
1) गजलक सं©या वृिÇ िदस धेआन नै देब-- गजलक सं©या वृिÇसँ हमर मतलब अपनो िलखल गजल आ
अनको िलखल गजल अिछ। किथत ¾®ितकारी सभहँक िवचार अिछ जे क‘मे िलखू मुदा नीक िलखू। मुदा
सवाल ओतिgह रिह जाइ छै जे नीक रचना िनध„रण केना हो जखन िक लोक लग सीिमत सं©यामे रचना
रहै। हमरा िहसाब² ई ±®ित अिछ जे कम रचलासँ नीके होइत छै। हमर tप´ िवचार अिछ जे रचना सं©या
बढ़लासँ अपना भीतर Eितयोिगता बढ़ै छै आ भिव»यमे नीक रचना िलखबाक संभावना बिढ़ जाइत छै। जािह
िवधामे बेसी िलखाइत छै ओकर Eचार-Eसार ओ लोकिEयता बेसी जŒदी होइत छै। मुदा अजाद गजलकार
सभ एिह मम>कT नै बुिझ सकलाह। हमरा बुझाइए जे मैिथलीक अजाद गजलकार सभ Eितयोिगतासँ डेराइत
छिथ। हुनका बुझाइ छिन जे जँ कादिचत् Eितयोिगतामे हािर गेलहुँ तँ हमर की हएत। मुदा हुनका सभकT
बुझबाक चाही जे सािहgयमे जीत-हािर सन कोनो बात नै होइ छै।
2) गजलकारक सं©या वृिÇ िदस धेआन नै देब--- कोनो िवधाक िनयम टुटलासँ ओ िवधा सरल बिन जाइत छै
आ ओिह िवधामे बहुत रास रचनाकार आबै छिथ जेना िक किवता िवधामे भेलै। तखन मैिथलीमे िबना िनयम
केर गजल रिहतॲ ऐमे शाइरक कमी िकएक रहल? मैिथलीक अजाद गजलकार सभ कते नव शाइरकT
Eोgसािहत केलिथ। जबाब सु¹ा भेटत। मैिथलीक अजाद गजलकार सभ अपने लीखै छिथ आ अपनेसँ शुª
आ अपनेपर खgम। आिखर गजल िवधामे नव शाइर अनबाक िज‘मा केकर छलै? ईहो कहल जा सकैए जे
मैिथलीक अजाद गजलकार सभ जािन बूिझ कऽ अपन वच>tव सुरिJत रखबाक लेल नव शाइरकT Eोgसािहत
नै केलिथ। हुनका सभ डर छिन जे कहॴ हमरासँ बेसी ओकरे सभहँक नाम नै भऽ जाइ।
3) मैिथली गजलक आलोचना िदस धेआन नै देब-- जेना िक सभ जानै छी जे आलोचना कोनो िवधा लेल Eाण
होइत छै मुदा आÖय> जे मैिथलीक अजाद गजलकार सभ गजल-आलोचनाकT हेय दृि´सँ देखला। मैिथलीमे
अजाद गजलक Eितिनिध गजलकार िसयाराम झा सरस, तारानंद िवयोगी, रमेश, देवशंकर नवीनजीक संपादनमे
बख> 1990मे " लालिकfला आ लोकवेद " नामक एकटा साझी गजल संŽह आएल। एिह संŽहमे गजलसँ
पिहने तीनटा भा»यकारक आमुख अिछ। पिहल आमुख सरसजीक छिbह आ ओ तकर शुआत एना करै छिथ
-- " समालोचना आ सािहिgयक इितहास लेखनक JेLमे तकरे कलम भँजबाक चाही जकरा ओिह सािहिgयक

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

  
Videha Ist Maithili Fortnightly
ejournal 'िवदेह ' २५३ म अंक ०१ जुलाइ २०१८ (वषᭅ ११ मास १२७ अंक २५३ )
मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA
21

Egयेक सूºतम tपंदनक अनुभूित होइ......."। अथ„त सरसजीकT िहसाब² कोनो सािहिgयक िवधाक आलोचना,
समीJा, वा ओकर इितहास लेखन वएह कए सकैए जे की ओिह िवधामे रचनारत छिथ। जँ हम एकर
xया©या करी तँ ई नतीजा िनकलैए जे गजल िवधाक आलोचना वा समीJा वा ओकर इितहास वएह लीिख
सकै छिथ जे की गजलकार होिथ। मुदा हमरा आÖय> लगैए जे ने 1990सँ पिहले सरसजी ई काज केलाह
आ ने 1990सँ 2008 धिर ई काज कऽ सकलाह (सरसेजी िकए आनो सभ एहन काज नै कऽ सकलाह)।
2008कT एिह दुआरे हम मानक बख> लेलहुँ जे कारण 2008मे िहनकर मने सरसजीक एखन धिरक अंितम
किथत गजल संŽह "थोड़े आिग थोड़े पािन" एलिbह मुदा ओहूमे ओ एहन काज नै कऽ सकलाह। ई हमरा
िहसाब² कोनो गजलकारक सीमा भए सकैत छलै मुदा सरसजी फेर ओही आमुख के तेसर आ चािरम पृRपर
िलखै छिथ" मैिथली सािहgयमे तँ बंगला जकs गीित-सािहिgयक एकटा सुदीघ> परंपरा रहलैक अिछ। गजल
अही परंपराक नxयतम िवकास िथक, कोनो EितबÇ आलोचककT से बुझऽ पड़तैक। हँ ई एकटा दीगर आ
महgवपूण> बात भए सकैछ जे मैिथलीक समकालीन आलोचकक पास एिह नxयतम िवधाक आलोचना हेतु कोनो
मापदंिडके निह छिbह। निह छिbह तँ तकर जोगार करथु........" आब ई देखल जाए जे एकै आलेखमे कोना
दू अलग अलग बात किह रहल छिथ सरसजी । आलेखक शुआतमे हुनक भावना छिbह जे " जे आदमी
गजल नै लीखै छिथ से एकर समीJा वा इितहास लेखन लेल अयो’य छिथ मुदा फेर ओही आलेखमे ओहन
आलोचकसँ गजल लेल मापदंड चाहै छिथ जे किहयो गजल निह िलखला। भए सकैए जे सरसजी ई आरोप
सरसजी अपन पूव>वत¼ िववादाtपद गजलकार मायानंद िमo पर लगबिथ होिथ। जे की सरसजीक हरेक
आलेखसँ tप´ होइत अिछ। मुदा ऐठाम हमरा सरसजीसँ एकटा EÜ जे जँ कोनो कारणवश माया जी ओ
काज नै कए सकलाह वा जँ मायानंद जी ई किहए देलिखbह मैिथलीमे गजल नै िलखल जा सकैए तँ ओकरा
गलत करबा लेल ओ अपने (सरसजी) की केलिखbह। 2008 धिर मैिथलीमे 10-12 टा किथत गजल
संŽह आिब चुकल छल। मुदा अपने सरसजी कहs एकौटा किथत गजल संŽह समीJा वा आलोचना
केलिखbह। गजलक xयाकरण वा इितहास लेखन तँ बहुत दूरक बात भए गेल। ऐ आलेखसँ दोसर बात इहो
tप´ अिछ जे सरसजी कोनो समकालीन आलोचककT गजलक समीJा लेल मापदंड देबा लेल तैयार नै
छिथ। जँ कदािचत् कनेकबो सरसजी आलोचक सभकT मापदंड िदतिथन तँ संभवतः 2008 धिर गजल JेLमे
एहन अकाल नै रिहतै।
आब हम आबी िवदेहक अंक 96 पर जािहमे oी मु¹ा जी ¸ारा गजल पर पिरचच„ करबाओल गेल छल।
आन-आन Eितभागीक संग-संग Eेमचंद पंकज नामक एकटा Eितभागी सेहो छिथ। पंकजजी अपन आलेखमे
आन बातक संग इहो िलखैत छिथ -“ कितपय xयि°त एकटा राग अलािप रहल छिथ जे मैिथलीमे गजलक
सुदीघ> पर‘परा रिहतहु एकरा माbयता नै भेिट रहल छैक। एहन बात Eायः एिह कारणे उठैत अिछ जे मैिथली
गजलकT कोनो माbय समीJक-समालोचक एखन धिर अछूत मािनकऽ ए‘हर ताकब सेहो अपन मय„दाक
Eितकूल बूझैत छिथ। एिह स‘बbधमे हमर xयि°तगत िवचार ई अिछ, जे एकरा ओहने समालोचक-समीJक
अछूत बुझैत छिथ िजनकामे गजलक सूºमताकT बुझबाक अवगितक सव>था अभाव छिन। गजलक संरचना,
िमजाज आिदकT बुझबाक लेल हुनका लोकिनकT tवयं Eयास करऽ पड़तिन, कोनो गजलकार बैिस कऽ भÆा
निह धरओतिन। हँ, एतबा िनÖय जे गजल धुड़झाड़ िलखल जा रहल अिछ आ पसिर रहल अिछ आ अपन
सामथ>यक बल पर समीJक-समालोचक लोकिनकT अपना िदस आकिष>त कइए कऽ छोड़त “ अथ„त Eेमचंद

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

  
Videha Ist Maithili Fortnightly
ejournal 'िवदेह ' २५३ म अंक ०१ जुलाइ २०१८ (वषᭅ ११ मास १२७ अंक २५३ )
मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA
22

जी सरसे जी जकs भÆा नै धरेबाक पJमे छिथ। सरसजी 1990मे कहै छिथ मुदा पंकजजी 2011केर
अंतमे मतलब 22साल बाद। मतलब बख> बदलैत गेलै मुदा मानिसकता नै बदललै। ऐठाम हम ई जर
कहए चाहब जे भÆा धराबए लेल जे ³ान आ इ¿छा शि°त होइ छै से बजारमे नै िबकाइत छै। संगे-संग ईहो
कहए चाहब जे मायानंद िमoजीक बयान आ अ³ानतासँ मैिथली गजलकT जतेक अिहत भेलै तािहसँ बेसी
अिहत सरसजी वा पंकजजीक सन गजलकारसँ भेलै। ऐठाम ई tप´ करब बेसी जªरी जे हम ऐ बातसँ
बेसी दुखी नै छी जे ई सभ िबना xयाकरणक गजल िकए िलखला मुदा ऐ बातसँ बेसी दुखी छी जे ई
गजलकार सभ पाठकक संग िवÃासघात केला। जँ ई सभ सॲझ ªप² किह देने रिहतिथन जे गजलक
xयाकरण होइ छै आ हम सभ ओकर पालन नै कऽ सकै छी तखन बाते खgम छलै मुदा अपन कमजोरीकT
नुकेबाक लेल ई सभ नाना Eकारक Eपंच रचला जकर दु»पिरणाम गजल भोगलक। हमरा जहs धिर अ¥Þयन
अिछ तहs धिर लगभग माL 4-5 टा गजल आलोचना tवतंL लेखक ªपमे अजाद गजलकार सभ ¸ारा
िलखल गेल अिछ (जँ पोथीक भूिमका सभकT सेहो जोड़ी तँ एकर सं©या 8-9 टा भऽ सकैए)। एिह कड़ीमे
तारानंद िवयोगीजीक "मैिथली गजलः मूŒयाकंनक िदशा", देवशंकर नवीनजीक "मैिथली गजलःtवªप आ
संभावना", धीरेbm Eेमिष>जीक "मैिथलीमे गजल आ एकर संरचना" आिद Eमुख अिछ।
मैिथलीक अजाद गजलक िकछु उदाहरण
जेना िक पिहने कहने छी अजाद गजलमे xयाकरण नै अिछ तँइ हम एकर उदाहरणमे शेर सभहँक खाली भाव
संबंधी िववेचना करब (उदाहरणमे आएल शेर सभ एकौ गजलक भऽ सकैए आ अलग अलग गजलक सेहो।
संपादक महोदयसँ आŽह जे उदाहरणमे देलग गेल शेर सभहँक वत>नीकT यथावत् राखिथ)--
सुध®शु शेखर चौधरी जीक दू टा शेर--

अपने बेसाहल बाटसँ पेरा रहल छी हम
अपने लगाओल कsटसँ घेरा रहल छी हम
xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx
हम पल ओछौने बाट छी िनराश नै करबै
िनतुआन सन अधार छी हताश नै करबै
पिहल शेरमे शाइर सुध®शुजी अपनेसँ जbमल समtया कोना परैशान करै छै तकर नीक संकेत देलाह अिछ।
दोसर शेर िहनक गजलक मूल भाव (खुदा-बंदा बला, एकरा संसािरक ªपमे सेहो लऽ सकै िछयै) समेटने
अिछ।

अरिवbद ठाकुर जीक दू टा शेर—

संसद केर फोटो मे िकछुओ निह हेर फेर
स®पनाथ नागनाथ इएह दुनू बेर बेर

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

  
Videha Ist Maithili Fortnightly
ejournal 'िवदेह ' २५३ म अंक ०१ जुलाइ २०१८ (वषᭅ ११ मास १२७ अंक २५३ )
मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA
23

xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx
लीक छोिड़ जे चलल िसयार
बिन गेल एक िदन चौकीदार
पिहल शेरमे शाइर अरिवbद ठाकुरजी देशक जनताक िवडंवनाक िचLण केने छिथ। जनता बª कोनो पाट¼कT
भोट िकए ने दै सभ पाट¼क चिरL एकै रंगक भऽ जाइ छै। दोसर शेरक िहनक xयं’य अिछ जािहमे नकली
¾®ितकािरताकT उजागर कएल गेल अिछ।

िवभूित आनंद जीक दू टा शेर—

एकेटा धारणा अिछ एकेटा उदेस
°यो ने होए रंक आ ने °यो नरेश
xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx
फूलो मे फूल, अड़हूल केर रंग जकs
चाªभर तेजी सँ पसिर रहल जनता
पिहल शेरमे शाइर िवभूित आनंदजी सभहँक मोनक बात रखने छिथ। आ दोसर शेरमे ओ क‘यूिन´ पाट¼क
Eतीक लाल रंगक तुलना हड़हूल फूलसँ केने छिथ।

कलानंद भ½ जीक दू टा शेर—

शंकामे िव¥वंसक आइ जीिब रहल लोक
अिववेकी अिधकारमे अणुबम भेल छै
xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx
अिछ बटोही सशंिकत बनल बाट पर
िदन मे आभास रातुक अभिर गेल अिछ
पिहल शेरमे शाइर कलानंद भ½जी वत>मान समtयाक वण>न केने छिथ। कोन देश कोन बह¹ासँ कतए किहया
आ¾मण कऽ देत तकर कोनो िठकान नै। दोसर शेरमे सेहो एहने सन भाव अिछ।

बाबा बै_नाथ जीक दू टा शेर—

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

  
Videha Ist Maithili Fortnightly
ejournal 'िवदेह ' २५३ म अंक ०१ जुलाइ २०१८ (वषᭅ ११ मास १२७ अंक २५३ )
मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA
24

कोन एहन हम काज कª जे लागय कोनो पाप निह
भूखक आिगसँ बेसी भैया अिछ कोनो संताप निह
xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx
किहयो जँ मोन पड़ए अपन अतीतक जीवन
बस आँिख मूिन दूनू किनय² लजा िलअ
अरब देशक एकटा कहबी छै जे पाथर वएह मारए जे कोनो पाप नै केने हो। एही भावकT शाइर वै_नाथजी
अंिकत केने छिथ पिहल शेरमे। दोसर शेर िहनक कमालोसँ कमाल अिछ। कोनो कुकम¼कT एिहसँ बेसी
धुतकारल नै जा सकैए।

रवीbm नाथ ठाकुर जीक दू टा शेर—

हँसैत भोर सजल सsझ लोक सदा चाहैए
उदास भोर मरल सsझ तकर की होयत
xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx
जे पािन पीिब बैसल हो घाट घटा केर
पता तकरिहंसँ जाय पूछी बजार हाट केर
शाइर रवीbmजी पिहल शेरमे घटल लोकक संकेत देने छिथ Eतीकक ªपमे। पाइ घिटते सम®ग सेहो घिट
जाइ छै अइ दुिनयsमे। दोसर शेरमे कमालक Eतीकक Eयोग भेल अिछ। हाट-बजारमे वएह ठिठ सकैए जे
िक घाट-घाट केर पािन पीने हो। ई बात Eाचीन हाटसँ लऽ कऽ एखनुक आधुिनक tटोरपर सेहो लागू
अिछ।

मायानंद िमo जीक दू टा शेर—

एखन तँ राित अिछ आ राित केर बातो अिछ
कतेक राित धिर कतेक राित केर चलतै
xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx
देखक बाद निह देखैक बड़ बहाना अिछ
चलैत भीड़ मे एकसगर जेना हेरायल छी
शाइर मायानंदजी पिहल शेरमे समयच¾सँ संदिभ>त बात कहने छिथ। दोसर शेरमे हुनकर ओहन दुख सामने
आएल अिछ जािहमे पिहचानल लोक सेहो अनिचbहार बिन जाइ छै।

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

  
Videha Ist Maithili Fortnightly
ejournal 'िवदेह ' २५३ म अंक ०१ जुलाइ २०१८ (वषᭅ ११ मास १२७ अंक २५३ )
मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA
25

िसयाराम झा सरस जीक दू टा शेर—

पूिण>मा केर दूध बोड़ल ओलिड़ गेल इजोर हो
Ãेत वसनक घोघ तर धरतीक पोरे पोर हो
xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx
माथ उठबए सवाल सोिनत के
काल लीखैछ हाल सोिनत के
िसयारामजीक पिहल शेर शाÃत सॱदय>क वण>नमे अिछ तँ दोसर शेर Eगितशील।

रमेश जीक दू टा शेर—

सॴथ जए टा चाही तए टा छूिब िलय
टीस मुदा तािजbदगी रहैत छै
xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx
जामु आ ग‘हािर केर छाह तर मे
बsस केर कोपर सुखैल जा रहल
शाइर रमेश जीक पिहल शेर असफल Eेम आ ओकर टीसक नीक वण>न अिछ। दोसर शेर उbटा अिछ।
xयावहािरक ªपसँ बsसक छाहमे कोनो आर गाछ नै नमहर होइत छै मुदा शाइर अपन शेरमे जामु आ ग‘हािर
केर छाहसँ बsसक भयक वण>न केने छिथ। दोसर शेरक िविवध xया©या भऽ सकैए।

राजेbm िवमल जीक दू टा शेर—

डािरसँ जे चूकत तँ बानर बङौर लेत
बेरपर हूसत से केराके घौर लेत
xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx
चानीक ब½ा सन नभमे संिचत नJLक मोती
अहॴ लेल बस अहॴ लेल सृि´क सतरंगी जोती

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

  
Videha Ist Maithili Fortnightly
ejournal 'िवदेह ' २५३ म अंक ०१ जुलाइ २०१८ (वषᭅ ११ मास १२७ अंक २५३ )
मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA
26

शाइर राजेbmजीक पिहल शेर हमरा जनैत जनतापर xयं’य अिछ। जनते एहन अिछ जे सभ समय हो-हो
करैए मुदा बेरपर हुिस जाइए। िहनक दोसर शर Eेमक सॱदय> वण>न अिछ।

धीरेbm Eेमिष> जीक दू टा शेर—

िजनगी अिछ बड़ िघनाह नाक चुबैत पोटासन
सुड़िक–सुड़िक तैयो छी ढोिब रहल मोटासन!
xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx
कोन िवजय लए खेल ई खुिनयs
जइमे सभक िसकtत भेल छै
जीवनकT िनमािहए कऽ िकयो महान बनै छै। आ जीवन िनमाहए लेल नीक-बेजाए सभ करए पड़ैत छै
धीरेbmजीक पिहल शेरक मूल भाव इएह अिछ। दोसर शेरमे धीरेbmजी ओिह अ³ात मजबूरी िदस संकेत केने
छिथ जािह कारणसँ लोक एक दोसरक दुश्मन बिन गेल अिछ। आ माL अपन जय लेल सभहँक पराजय
केर जोगाड़ करैए मुदा अंतमे सभहँक संग ओहो हािर जाइए अनेक कारणसँ।

तारानंद िवयोगी जीक दू टा शेर—

िघचने िघचाइछ निह िजनगी के गाड़ी
एक खंड मुtकी आ बहुते लचारी
xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx
ओिहना के ओिहना िजनगी मरैत गेलै
एÕे सन फोटो सँ एलबम भरैत गेलै
पिहल शेरमे शाइर तारानंद िवयोगी जीवन ओिह सीमापर पहुँिच गेल छिथ जतए आदमी हताश भऽ बैिस
जाइए। िकछु लोक एिह सेरकT िनराशावादी किह सकै छिथ मुदा हमरा जनैत िनराशा सेहो जीवनेक अंग छै।
दोसर शेरमे शाइर जीवनक एकरसतासँ उिबआएल बुझाइत छिथ।

रोशन जनकपुरी जीक दू टा शेर—

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

  
Videha Ist Maithili Fortnightly
ejournal 'िवदेह ' २५३ म अंक ०१ जुलाइ २०१८ (वषᭅ ११ मास १२७ अंक २५३ )
मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA
27

आङनमे अिछ गु‘हिर रहल कागजके बाघ
घर घरमे अिछ रोहिट-क¹ा, डर लगैए
xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx
जािन ने किहया धिर बूझत ई लोक जे
वधशालामे आgमाक जोर निह होइत छै
पिहल शेरमे शाइर जनकपुरीजी लोकक भीतरक अ³ात अदंकक वण>न केने छिथ। सभकT बूझल छै जे बाघ
कागज केर छै मुदा एखनुक लोक असगर भऽ चुकल अिछ आ ओही कारणसँ ओकरा कागजक बाघसँ सेहो
डर लािग रहल छै। कोनो हgया करए बला आदिमए होइत छै से दोसर शेरसँ बुझा जाइत अिछ जखन िक
शाइर हgयाराक पैरवी करै छिथ। आब ई हgयारा कोनो ªपमे कोनो कारणसँ िकयो भऽ सकैए। माL
आदिमएकT मारए बला हgयारा होइत छै से मानब एकभगाह अिछ।

उपरमे देल गेल अजाद गजलक उदाहरणसँ ई बात tप´ अिछ जे सभ अजाद गजलकार सभहँक भाव नीक
छिन। भावमे बसल िबंब खsटी मैिथल छिन। Eतीक सेहो नव छिन मुदा बस गजलक xयाकरण नै छिन।
जखन िक शुआतेमे कहने छी िबना कािफया बहरक गजल नै होइत छै। आÖय> ईहो जे अजाद गजलकार
सभ दु»यंत कुमार िक अदम गॲडवी की फैज अहमद फैज केर उदाहरण दै छिथ मुदा दु»यंत कुमार िक
अदम गॲडवी की फैज अहमद फैज केर गजलमे Eयोग भेल xयाकरणकT नै देिख पाबै छिथ। अजाद
गजलकार सभहँक तक> छिन जे जखन रचनामे भाव, िबंब, िवचार सभ िकछु छै तखन ओकरा गजल मानबामे
की िदÕत। मुदा हम उbटा पूछब जे ओकरा किवते मानबामे की िदÕत? अंततः कोनो किवतामे भाव, िबंब,
िवचार होइते छै ने। तँइ ओकरा किवते मानू। मुदा दुखद जे अजाद गजलकार सभ कहता जे ई किवता नै
गजल अिछ मुदा कोना तइ लेल हुनका तक> नै छिन। िकछु तँ तgव हेतै जे किवता, गीत आ गजलकT
अलग-अलग करैत हेतै। हमरा िहसाब² बहर-कािफया, xयाकरण ओ तgव छै जािहसँ किवता, गीत आ गजलमे
अंतर कएल जा सकैए।
उपरमे हम कहने छी जे अजाद गजलकार सभ दु»यंत कुमार, अदम गॲडवी आिदकT बहुत मानै छिथ तँ एक
बेर कने ईहो देिख ली जे दु»यंत कुमार, अदम गॲडवी सभ गजल xयाकरणक पालन केने छिथ की नै---
सूय>क®त िLपाठी िनराला जीक ई शेर देखू-

भेद कुल खुल जाए वह सूरत हमारे िदल म² है
देश को िमल जाए जो पूँजी तु‘हारी िमल म² है
मतला (मने पिहल शेर)क माLा¾म अिछ-- 2122+2122+2122+212 आब सभ शेरक माLा¾म इएह
अिछ। िनरालाजीक ई गजल तािक कऽ पढ़ू आ िमलाउ जे पूरा गजलमे xयाकरणक पालन भेल छै िक नै।
दु»यंत कुमारक ऐ गजलक त°ती देखू---

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

  
Videha Ist Maithili Fortnightly
ejournal 'िवदेह ' २५३ म अंक ०१ जुलाइ २०१८ (वषᭅ ११ मास १२७ अंक २५३ )
मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA
28

हो गई है / पीर पव>त /सी िपघलनी / चािहए,
इस िहमालय / से कोई गं / गा िनकलनी / चािहए।
अइ शेरक माLा¾म 2122 / 2122 / 2122 / 212 अिछ। दु»यंतजीक ई गजल तािक कऽ पढ़ू आ
िमलाउ जे पूरा गजलमे xयाकरणक पालन भेल छै िक नै। आब कने अदम गॲडवी जीक दू टा गजलक
त°ती देखू—

ग़ज़ल को ले / चलो अब गs / व के िदलकश /नज़ारॲ म²
मुसल्सल फ़न / का दम घुटता / है इन अदबी / इदारॲ म²
अइ शेरक माLा¾म 1222 / 1222 / 1222 / 1222 अिछ।

भूख के एह / सास को शे / रोसुख़न तक /ले चलो
या अदब को / मुफ़िलसॲ की / अंजुमन तक /ले चलो
अइ शेरक माLा¾म 2122 / 2122 / 2122 / 212 अिछ। अहs सभ अदमजीक दूनू गजल तािक पढ़ू
आ िमलाउ जे पूरा गजलमे xयाकरणक पालन भेल छै िक नै। एकटा ओहन गजलकारक गजल केत त°ती
देखा रहल छी िजनक नाम लऽ सभ अजाद गजलकार सभ बहर ओ छंदक िवरोध करै छिथ। तँ चलू फैज
अहमद फैज जीक ई गजल देखू—

शैख साहब से रtमो-राह न की
शु¾ है िज़bदगी तबाह न की
अइ शेरक माLा¾म 2122-1212-112 अिछ। अहs सभ पूरा गजल तािक पढ़ू आ िमलाउ जे पूरा गजलमे
xयाकरणक पालन भेल छै िक नै। तेनािहते आजुक EिसÇ शाइर मुनxवर राना केर ऐ गजलक त°ती देखू—

बहुत पानी बरसता है तो िम½ी बैठ जाती है
न रोया कर बहुत रोने से छाती बैठ जाती है
अइ शेरक माLा¾म 1222 / 1222 / 1222 / 1222 अिछ। अहs सभ पूरा गजल तािक पढ़ू आ िमलाउ
जे पूरा गजलमे xयाकरणक पालन भेल छै िक नै। हसरत मोहानीक ई EिसÇ गजल देखू---

चुपकेचुपके रात िदन आँसू बहाना याद है
हमको अब तक आिशक़ी का वो ज़माना याद है

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

  
Videha Ist Maithili Fortnightly
ejournal 'िवदेह ' २५३ म अंक ०१ जुलाइ २०१८ (वषᭅ ११ मास १२७ अंक २५३ )
मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA
29

अइ शेरक माLा¾म 2122+2122+2122+212 अिछ। अहs सभ पूरा गजल तािक पढ़ू आ िमलाउ जे पूरा
गजलमे xयाकरणक पालन भेल छै िक नै। अंतमे राहत इbदौरी जीक एकटा गजलक दू टा शेरकT देखू
देखू—
चरागॲ को उछाला जा रहा है
हवा पर रौब डाला जा रहा है

न हार अपनी न अपनी जीत होगी
मगर िसÕा उछाला जा रहा है
अइ दूनू शेरक माLा¾म गजल (1222 / 1222 / 122) (बहर-ए-हजज केर मुजाइफ) अिछ। अहs सभ
पूरा गजल तािक पढ़ू आ िमलाउ जे पूरा गजलमे xयाकरणक पालन भेल छै िक नै।
उपरमे देल गेल िहंदी-उदू> गजलकार सभहँक शेर सभकT देखलासँ पता चलत जे िनराला जी गजलक िवषय
नव कऽ देलिखन Eेिमकाक बदला िवषय िमल आ पूँजी बिन गेलै मुदा xयाकरण वएह रहलै। अदमजी भखूक
एहसासकT शेरो-सुखन धिर लऽ गेलाह मुदा ओही xयाकरणक संग। दु»यंतजी अपन गजलक मा¥यमे िहमालयसँ
गंगा िनकािल देलाह मुदा xयाकरण ने तोड़लाह। फैज अहमद फैज अपन गजलमे धािम>क क½रताक िवरोध
केलाह मुदा ओहो xयाकरण नै तोड़लाह। तेनािहते आनो शाइर सभ नव भाव-भंिगमाक गजल िलखने छिथ
सेहो xयाकरणक पालन करैत। तखन ई मैिथलीक अजाद गजलकार सभ कहै छिथ जे xयाकरणसँ भाव-
िवचार बbहा जाइ छै या गजलमे xयाकरण नै होइ छै से कते उिचत? एिहठाम आिब हमरा ई कहबा /
tवीकार करबामे कोनो संकोच नै जे जँ ई अजाद गजलकार सभ अपन िजद छोिड़ एखनो गजलक xयाकरण
tवीकार कऽ लेता तँ मैिथली गजलक सुिदन शुª भऽ जाएत कारण िहनका सभ लग भाव-बोध, िवचार ओ
अनुभव बहुत बेसी छिन मुदा िवधागत xयाकरण ने पालन करबाक कारणे िहनकर सभहँक िलखलपर िवधाक
ªपमे EÜिचÉ लािग जाइत अिछ। िसयाराम झा सरसजीकT दुख छिन जे गीत िवधा वत>मानमे मैिथलीक
क²mीय िवधा िकए नै अिछ (देखू हुनकर पोथी आखर-आखर गीत केर भूिमका)। ई दुख हमरो अिछ गजलक
संदभ>मे, गीतक संदभ>मे आ सभ छंदयु°त काxयक संदभ>मे। हमरो ई इ¿छा अिछ जे गजल-गीत-अbय छंदयु°त
काxय मैिथली सािहgय केर क²mीय िवधा बनए। बिनयो सकैए। जँ अनिचbहार आखर-िवदेह माL दस बख>मे
िकछुए गजल काय>कत„क संग अपन गजल संबंधी लºय पूरा कऽ सकैए तँ फेर अनुमान कª जे जँ सभ
अजाद गजलकार सभ अपन िजद छोिड़ xयाकरण बला गजल िलखनाइ शुª कऽ देिथ तँ कतेक कम समयमे
ई लºय पूरा हएत? मुदा तािह लेल जªरी छै िवधागत छंद ओ xयाकरणकT माननाइ। एकटा गजल
काय>कत„क तौरपर हमरा िवÃास अिछ जे जँ सभ नै तँ अिधक®श अजाद गजलकार िजद छोिड़ िवधागत छंद
के मानता तँ माL 15-20 बख>मे गजल-गीत-अbय छंदयु°त काxय मैिथली सािहgय केर क²mीय िवधा बिन
जाएत। ई िवÃास हमरा एनािहते नै अिछ एकर पाछू अनिचbहार आखर ओ िवदेहक िवÃास सेहो अिछ।
गजलक एकटा काय>कत„क तौरपर हम EतीJा कऽ रहल छी जे किहया मैिथली गजलकT ई सौभा’य भेटतै जे
ओ मैिथली सािहgयक क²mीय िवधा बनत आ ताहूसँ पिहने हमरा अइ बातक EतीJा अिछ जे कोन-कोन अजाद
गजलकार सभ हमर एिह सपनाकT यथाथ>मे बदलबाक लेल सहयोग देता। EतीJारत.....................

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

  
Videha Ist Maithili Fortnightly
ejournal 'िवदेह ' २५३ म अंक ०१ जुलाइ २०१८ (वषᭅ ११ मास १२७ अंक २५३ )
मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA
30

Suggested citation: आशीष अनचिन्हार. “आधुनिक मैथिली गजलक संक्षिप्त आलोचनात्मक परिचय.” Videha — First Maithili Fortnightly eJournal, issue 253, 2018-07-01. https://www.videha.co.in/research/2018/253/आधुनिक-मैथिली-गजलक-संक्षिप्त-आलोचनात्मक-परिचय.htm

मूल विदेह अंक / Original issue