पु6तक समीIा साकेतानbदक
‘गण-नायक’
Cाचीन पर£पराक अनु¡प सािहयक ...... IेKमे कथाक रचना अवाध् ¡पसँ भऽ रहल अिछ। हष<क
िवषय अिछ जे मानव मोनक िचरसंपोिषत अिभलाषा आइ सािहयक अनुभूित आ िववेचनक ¡पमे फलीभूत भऽ
रहल अिछ।
मैिथलीमे लघुकथाक िवकास जतेक तीवÐगितसँ भेलैक तािहमे लघुकथाकS लोक िCय बनेबाक pेय 6व.
हिरमोहन झाकS छिbह।
आधुिनक सािहयक सव<तोभावेन गुण स£पता भारतीय अbय कोनो भाषा सािहयक समकIताकS
मैिथलीक कथा Cा´त करैछ। कथा, समय काल िसिमत पिरवेशक दृि¸ए क¸ सा®य अिछ तँ संगिह
महवपूण< यथेQ। इएह एक एहन िवधा अिछ जे िदन-Cित-िदन Cगितक ओर अ¿सर, गितशील आ उ<मुख
अिछ।
‘गणनायक’क कथाकार साकेतानbदजी िवलIण Cितभा पु ष छिथ जे अपन सार6वत साधनासँ िहbदी
आ मैिथली सािहयमे अIय कीित<, अशेष गौरव आ िन6सी अथ<वासँ pीमंत कएलिbह अिछ। िविभ पK-
पिKका सभमे Cकािशत रचना सभकS कलािवद्, समीIक आ िवचारक िनल
ज भावसँ सराहलिbह अिछ।
िवÆान, कथा मम< सभ िहनक कथाकS सािहयक pेQ उपलिध मािन कऽ खुलेआम 6वीकृतमे अिवचल
हाथ उठाकए सािहय अकादेमी Æारा पुर6कृत भेलापर सोलास समथ<न कएलिbह अिछ।
‘गणनायक’क कथा मानव जीवनक िवसंगितक ठोस धरातलपर ठाढ़ अिछ। कथाकारक मूल
चेतना, Cगितशील आ िवचारोेजक अिछ। युग सापेI आ लोक जीवनक एहन शा6वत िचK अिछ जे
सािहयमे अिव6मरणीय तँ रहबे करत संगिह भावी पीिढ़क हेतु Cितक ओर उनमुख होएबामे आममंथन करक
हेतु िववश करैत रहत। समीIक लोकिनक दृि¸मे कथा जे हो मुदा हमरा दृि¸मे कथा सुग िचKकS
अपना ‘अलबम’मे समेिट कऽ चिल रहल अिछ। जे आबएबला युगक ओर ऑंगुर उठाकए संकेत सेहो करत।
हम पबैत छी लेखकक भावना एच.जी वेसक भावनासँ अनुCािणत अिछ। ओना तँ ‘गणनायक’क कथानक
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सेहो जनजीवनक एक गोट नव पIकS समI अनलक अिछ। धरातलपर गित लएबाक हेतु ग^िहक मंद-चंचल
चरण चलबए पड़ैछ। तS उपयोिगताक दृि¸सँ ई ग^क युग कहबैछ।
कथा कहबाक सुनबाक Cवृि लोकक रागामक स£बbध समानाbतर चलैत आिब रहल अिछ, तS कथाकS
Cागैितहािसक कालसँ pृंखलाब करबाक Cयास कएल जाइत रहल अिछ। 6प¸त: कथा आदश<वादक
खvडहरसँ बहार भऽ यथाथ<क खिड़हान िदस बिढ़ रहल अिछ। सव
िधक महवपूण< रचना ‘गणनायक’मे
वेरोजगारी, आिथ<क िवपता, शोषण, चोर बाजारी, दमनामक Cवृि एवम् नोकरशाहीक यथाथ< िचKण अिछ।
मुÄयत: िशिIत वग<क मोह भंगएवम् ओकर िनरीहता आ पीउ़ासँ जुड़ल संघष<क कथा कहैत अिछ।
कामाÄया ओिहसँ Cबल संघष< करैत एक 6वािभमानी युवक अिछ। एिहठामक लेखक कामाÄयाकS ‘उपµम’ कथा
केर मुÄय पावक ¡पमे उपि6थत कऽ आदश< 6थािपत कएलिन अिछ, िकएक तँ िवपताक पीड़ा झेलैत ओ
कालक चारण निह बनैत अिछ। एिह कथामे जीवनक स£मानजनक संकप अिछ।
‘आलुक िवमा’कथामे Cशासन तंKक िवकरालताक दु6साहिसक Cितरोध कृषक Cितिनिध जय
मंगल, रामशरण आ रहमतुला Æारा देखल गेल अिछ। एतबे निह, Cदश<नपर उता¡ आµोिशत कृषक आ
कृषक Cितिनिधपर पुिलस Æारा लाठी गोली तक चलाओल जाइछ, जािहसँ कृषक CितिनिधकS जानसँ हाथ
धोमए पड़ैछ। कथामे CजातंKक माखौल, Kुिटपूण< {यव6थाक िज£मेवार पदािधकारीक िवषद िवण<न करबामे
लेखक िनिभ<क एवम् िन6संकोच देखल गेलाह अिछ।
‘कचोट’ कथामे जीवनक न½न सय Cितभािसत होइछ। जकर मुÄय पाK बौआ झा छिथ। जॱ एिह
कथामे एकओर भारतीय स£मताक िनम<म हया भेल अिछ तँ दोसर ओर मोनीक अ{यत Cेमक पीड़ा पाठककS
6पिbछत करैत अिछ।
‘एक डेग आगू’ कथामे सामbतवादीक खूनी पंजासँ धाइल रामजीक कु¡प िचKण अिछ। सामbती
सbतापसँ सbतरत जवान बेटी गुलिबयाक ठानल िववाह निह कऽ कज
सँ मुत होएबाक Cयास ओकर अि¿म
सोचकS समI अनलक अिछ। ई कथा पाठककS अितसंवेदनशील बनबैत अिछ।
‘पकड़ िवयाह’कथामे सम सामियक िवcुप सं6कृितक सबाक िचKण अिछ। अभाव¿6त मैिथलक पुKी
उÁक सीमा टिप कए अिभभावककS िवचार शूbय बना दैछ जकर कारण दहेज Cथाक िवकप ¡पमे ‘पकड़
िवयाह’शु¡ए भेल अिछ। कथाकार कथामे धड़फरा कऽ रोचक आ भाव Cधान होइतहुँ सम6याक समाधानक
हेतु अपकालीन, असौकय< गुझना जाइछ। कथाक परायणसँ कथा अध बिटयेमे पाठककS छोिड़ दैछ जािहसँ
पूण< तृि´त निह होइछ।
अिगला कथा ‘आब भेटने की’मे नारीक संवेदनाक सbत´त ¡प भौितक सुखक
िनरसता, Cेम, 6नेह, दया, सहानुभूितसँ िरत मम
bतक पीड़ाक अिभ{यित अिछ। ई एकटा सरल सहज
रोमÎिटक कथा अिछ जे बड़ रोचक शैलीमे आगi बढ़ैत अिछ। आ अbतमे आिब सम¿ ¡पमे एकटा िवलIण
Cभाव छोिड़ जाइत अिछ। ........ भव Cवvता एवम् मधुबर िवbयास एिह रोमÎिटक कथाक िविश¸ गुण
अिछ। लेखक एिह कथामे मiजल मनोिवलेषक Cतीत होइत छिथ।
‘िKवेणी समाहार’सामािजक बोधसँ जुड़ल कथा अिछ। कथाक मुÄय पाK िभखारी साहु स£पूण< कथामे
चिच<त भेल छिथ। अथक Cयास, pमसा®य जीवन,साहस आ समयसँ जुझैत िनध<न लोक पूण< धनवान होइत
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अिछ, ओकर स£पतासँ सीिदत गामक डाही दु¸ पंचैती करिनहार रामेlार बाबूआ िशवजी िसंह अपन Cपंचक
चपेटमे आिन िभखारीक समटल आ समृ पिरवारकS कहलपूण< बना दैत देखल जाइत छिथ। तेसर
सा£यवादक दोहाइ देिनहार दिरc फूल झा िभखारीक दोहन गाहे-वगाहे करैत कथामे देखल जाइछ। ई कथा
एकिह संग अनेक िवषय व6तु, {यित आ तस£बbधी घटनाक व6तुत: समाहार बुझाएल मुदा मुÄय तीन
पिरि6थित आ पिरवेशक िदशा बोध करबैत अिछ। कथा अपना-आपमे िवड़ल अिछ। िवसंगित आ समाजक
छÒकS उघािर कऽ पाठकक समI रािख दैछ।
‘मचकल खुÓा’लोकोितक आधार लए िलखल गेल कथा अिछ। खास कऽ अनमेल िववाहक कारणS
उप पिरि6थितक बोध कथा अिछ। मचकल खुÓासँ तापय< अिछ कमजोर पितसँ। कथाकारक कमाल जॱ-
जॱ आगi बढ़ैत अिछ पाठककS कौतुहलपूण< बनबैत रहैछ। कथा मुÄय पाKक ¡पमे कजरैलावाली गोिर-नािर
सुडौल, सुनमनी आ ता¡णक तेजसँ Iीिजत मुÄयमvडलवाली छिथ, जिनक िववाह दूबर-पातर, कारी खेड़नाठ
आ झiमर मुँह संगिह िवकृत बगेवािन रेलक खलासीसँ होइत कथामे देखाओल गेल अिछ। नपुंसक पितक
कारणS तेरह वष< धिर दागल सiढ िन:सbतान कजरैलावाली लोकक बीच बiझी कहबए लगैछ। जखन बद
6त
निह भेलैक तँ दाबल मोन िवकपक ओर आकृ¸ भेलै। जिहना पािन पिनबट ढूिढ लैछ तिहना बगलक
पड़ोसी पाचो मनगर, बलगर,सुडौल सुbदर युवक भेिट गेलासँ रमबामे भiगठ निह भेलै। कथाक रोचकता आरो
बढ़ैत अिछ जखन कजरैलावाली एक सुbदर बालकक जbम दऽ अपना संग पितक दोषसँ मुत होइछ। एिह
तरहS कथामे देखल जाइछ जे एक दोषसँ मुत होइत अिछ तँ लोकापचार आ कुचच
क आब स^: भाजन
बनैत अिछ। खुजल मुँहकS ओ बbद कऽ निह सकैत छल िकएक तँ ओकर खुÓा मचकल रहै। अिbतम
िन¶कष<पर पहुँचैत पाठक आकष<णक कारणS अचाएल रहैछ। हृदयपर 6थायी Cभावक अनुभव करैछ।
‘गणनायक’अिbतम कथा िचbतनीय, रोचक, समयानुकूल बदलैत राजनीितक पिरदृयक सटीक िचKण
अिछ। एिह कथाक मुÄय पाK नरेबाबू सामbती गुण¿ाही छिथ। चुनावमे छल-बल-कलसँ जीतैत छिथ। वएह
एकर गणनायक िथकाह। अपन आधार सीढ़ी छीतन दासकS िबसिर जाइत छिथ। छीतन दास हिरजनक
माइनजन (मुिखया) अपन हािनयÔकS ताकपर रािख िहनका चुनावमे एड़ी-चोटी एक कऽ दैत अिछ, चािर कÕा
जमीनक Kासदीक कारणS ओ िडली अजल तेिज कोनहुना जाइत अिछ। ओतए िव6फािरत आँिखसँ
नरेबाबूकS ढूिढ़ िहनका राजकीय आवासपर पहुँचैत अिछ, दुलभ< भSट जखन होइत छैक तँ सुख-सुbदरीक
अठखेल कएिनहार, नरेबाबू छीतन दासक {यथाकS सुनबाक बदला डॉंट-फटकारसँ नकािर कऽ दैत छिथ। एिह
तरहS कथामे छीतन दासक अवहेलना हैब, अनभुआर, अनपढ़ मैिथल छीतन दासक िदलीसँ आपसीक गुंजाइश
कथामे निह हैब पाठककS संदेहक सीमामे बाbहैत अिछ। कथा िशIाCद संग-संग वत<मान समयक गणनायकक
रंग बदलैत चिरKक Cvट िचK कथा िथक।
सम6त कथाक परायणसँ सु6प¸ Cतीत होइछ जे समाजवाद, सा£यवाद वत<मानकालीन सÎ6कृितक
पिरवेश, राजनैितक संरचना आिथ<क पिरि6थितक ठोस धरातलपर आधािरत एहन शा6वत भावनासँ जनमानसकS
अवगत करौलिbह अिछ जे संजीिवनी बुिट बिनकए Cगितशील सािहयकारक हेतु आदश< उपि6थत करैत
अिछ।
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िहनका रचनामे यथाथ<वाद निह अिपतु यथाथ< अिछ। िहनक पाK कापिनक भऽ सकैए, मुदा
कपनाशीलताक कायामे कटुजीभ लगाओल गेल अिछ तथािप µािbतकारी आ यथाथ<मयी छिbह। संगिह संग
व<मान समयक चोट, बढ़ैत सÖयताक रंग, जमानाक µुर थापड़ आ सम¿ जीवनक कटु-मधु अनुभवकS
िववेकक तराजूपर तौिल कऽ उकेरल गेल अिछ। भाषाक सहजता, िशपगत वैिश¶×य िहनक कथाक अपन
फराक पहचान बना दैत अिछ। कथाक कलामकता पाठकक अbत6थलकS छुिब लैत अिछ।
िमिथला मैिथलक मानदvडकS नव-नव सौवणÂ Cितभासँ मढ़बाक महनीय गुण साकेतानbदजीमे पाओल
जाइछ। िन¶पI भावS 6वीकार करए पड़ैछ जे शvय-यामल सधन आ¿हुज लोक कलाक आव<जक स£पदासँ
संरिIत कोसी, कमला, गvडकी आ वागमतीक पावन जलसँ अिभिसंिचत एवम् िविभ वन स£पदासँ आछािदत
िमिथला भूिम जतेक pीस£प रहल अिछ, Cितभाक दृि¸ए सेहो एिह IेKक Cित6पधÂ कतहु होअए से अनुपम
जकर साकेतानbदजी CयI Cमाण 6व¡प छिथ।
अपन Cितभाक Cकाश िव6तृत कऽ Cाचीन कथाकारसँ सव<था िभ कथाक रचना कएल अिछ।
भाव, भाषा, संवेदनशीलता आ स£Cेषणीयताक संग भाव सं¿हण अिभ{यितक दृि¸सँ यथाथ<कS कथा व6तुसँ
जोड़बाक दु6साहस कथा कलाकS नव आयाम देलक अिछ।
कथा कमÂक हेतु एक आदश<क उप6थापना िथक। साकेतानbद जीक रचनाक एिह िविश¸ताक आकलन
C6तुत करब सला®य निह अिपतु तÍयकथन अिछ। एकिह शदमे िहनका शला®य तँ अनाआसे उपलध भेल
छिन। तथा6तु।। q