विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका · VIDEHA · ISSN 2229-547X

घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005

रबीन्द्र नारायण मिश्र · 2018-09-01 · अंक 257

घरेलू िहंसा अिधिनयम, 2005 िकएक लागू करए पड़ल?
घरेलू िहंसाक अनिगनत घटना हमर देशमे होइत अिछ, मुदा महज सौ-पचास दज> होइत अिछ, ओहो चरम पर
पहुँचलाक बाद। कतेकोठाम बािलकासभ सpझक बाद घरक अपेKा सड़कपर अंजान लोकसंग रहब ”यादा सुरिKत अिछ
कारण घरमे अपन लोक ®ारा बेसी दुघ>टना, हžया आओर िहंसा करबाक संभावना रहैत अिछ, बािलका जखन रxता पर
बहराइत अिछ, तँ ओकरा पता निह होइछ िक शहरकचकाचॱधमे ओकरा संगे कखन कोनठाम छेड़खानी भए जाएत। बात
अगर गामक करी तँ बािलका सु± रxता पर जएबासँ डराइत अिछ मुदा ओिह डरक की करी, जकर जिड़ घरक अंदर होइत
अिछ आओर बािलकाक संगे पैघ होइत अिछ। ओिह डरक की करी जे ओकरा जनिमते ओकर माथामे बैिस जाइत अिछ
आओर आधा िजनगी धिर रहैत अिछ।
घरेलू िहंसा क बात करैत काल ऑनर िकिलंगक घटनासभकT फराक निह कए सकैत छी। ऑनर िकिलंगक जिड़
असलमे घरेलू िहंसा अिछ। िकएक तँ कोनो माए-बाप, भाए, काका कखनो सेहो अपनी बेटी वा बिहनके, सोझे मािर निह
देत, ओिहसँ पूव> नाना Eकारक यातना ओकरा देल जाइत अिछ।
एकटा सिœयकीय गणनाक अनुसार :
(i) िनžय चािरटा मिहला, एकटा पु³ष, आओर पpचटा ब»चा घरेलू िहंसाक कारण अकाल मृžयुक िशकार भए जाइत
छिथ।
(ii) अपन जीवन कालमे Ežयेक चािरटामेसँ एकटा मिहला घेरलू िहंसाक िशकार भए जाइत छिथ।

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(iii) २०-२४ बख>क मिहलाक उपर घरेलू िहंसाक सभसँ बेसी खतरा रहैत अिछ।
घरेलू िहंसा अिधिनयम 2005 xMीक सुरKा, ओ xMीक अिधकारक अिधक Eभावी ढंगसँ लागू करबाक हेतु आनल
गेल।
एिह अिधिनयमकT पािरत करएसँ पिहने कानूनी िxथित की छल?

(i) घरेलू िहंसा कानूनमे कोनो xपÇ माaयता निह छल,
(ii) (आईपीसी की 498 ए) क तहत घरेलू िहंसाक संपूण> अवधारणा िववािहत xMीपर कएल गेल ¡ूरताक धिर सीिमत
छल,
(iii) दुखसंत˜त बिहन, माए, बेटी वा अिववािहत xMी एिहमे सािमल निह छल,
(iv) Eतािड़त भेलापर िववािहत xMीकT सीिमत िवकcप छल: तलाक लए िलअए वा धारा 498 ए क अनुसार मोकदमा
करए,
घरेलू िहंसा दू Eकारक होइत अिछःआपरािधक आओर गैर-आपरािधक:
आपरािधक घरेलू िहंसा:
िबना सहमितकT शारीिरक संपक> जेना यौन उžपीड़न, लात मारब, अनाव©यक पछोड़कए भयभीत करब, कं˜यूटर
हैिकंग, आपरािधक अलगाव
गैर-आपरािधक घरेलू िहंसा:
िमM वा आन सामािजक सरोकारीसँ संपक> बािधत करब, टेलीफोनक संपक> निह होमए देब,
घरेलू िहंसा कानूनक तहत कोनो पीिड़त मिहलाजे अपरािधक संगे रहैत छिथ, एिह कानूनक अनुसार मोकदमा कए
सकैत छिथ।
घरेलू िहंसाक सबसँ खराब Eभाव ओिह पिरवारक छोट ब»चासभ पर होइत छैक।ब»चा वातावरणक उपज होइत
छिथ, एहने ब»चा बादमे जाकए घरेलू िहंसा करैत छिथ वा ओकर िशकार भए जाइत छिथ।
घरेलू िहंसा अिधिनयमक धारा२ (यु):
घरेलू िहंसा अिधिनयमक धारा२ (यु)क तहत माM पु³ष अपराधीक िखलाफ कार>बाइक Eावधानके असंबैधािनक
घोिषत करैत सुEीम कोट> aयायमूित> कुिरयन जोसेफ और रोिहंटन एफ नरीमनपीठ िनण>य देलक जे एिह कानूनक तहत मिहला
अपराधीकक िखलाफ सेहो मोकदमा चिल सकैत अिछ।माननीय aयायाधीश लोकिनक कहब छिन:
“xMीगणक िखलाफ कतेकोबेर िxMए सािजसक तहत काजकए घरेलू िहंसामे सािमल होइत छिथ, तT एिह कानूनक
उपरोत धारा कानूनक मूल उÉये©यसँ भुितआ गेल लगैत अिछ, तT ओकरा कानूनसँ हटा देल जाइत अिछ।”
घरेलू िहंसा कानूनक तहत केना मदित लेल जा सकैत अिछ?

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(१) कोनो Eकारक िहंसासँ वचाव हेतु आदेश Eा˜त करब,
(२) िनवास करबाक अिधकारक हेतु आदेश Eा˜त करब,
(३) मौिdक राहत
(४) िहरासतमे लेब
(५) Kितपूित>क हेतु आदेश
(६) अaतिरम आओर एकपKीय आदेश
सुरेश बनाम जयबीर (२००९):
सुरेश बनाम जयबीर (२००९)क मामलामे aयायलय ई आदेश देलक जे घरेलू िहंसा कानूनक धारा 12 कउपखंड
(1) कतहत आवेदनक िनपटारा करैत अaतिरम आदेशमे aयाियक दंडािधकारी गुजाराक हेतु अaतिरम राहत दए सकैत अिछ।
Eथम vणी aयाियक दंडािधकारी वा महानगर दंडािधकारीक ओतए िसकाइत कएल जा सकैत अिछ:
(१) जतए दोषी यित रहैत हो,
(२) जतए अपराध कएल गेल होइक,
(३) जतय Eतािड़त यित रहैत हो,
aयाियक दंडािधकारीक समK िसकाइतक िनपटान:
पीड़त यित संरKण अिधकारी, पुिलस िकंवा सेवा Eदाता (कcयाण अिधकारी)क मदित लए सकैत छिथ। िहनका
लोकिनक कत>य अिछ जे पीड़त यितक ज³री माग>दश>न करिथ एवम् aयायलय ®ारा देल गेल मौिdक Kितपूित>क आदेशक
पालन सुिनिÔत कराबिथ। संरKण अिधकारीक दाियžव अिछजे वो Eतािड़त यितक िसकाइतक घरेलू िहंसा Eितवेदन
(DIR)तैयारकए aयायालयकT उपल¦ध कराबए।संगिहँ Eतािड़त यितकT सेवा Eदाताक वारेमे उिचत माग>दश>न दैक जािहसँ ओ
ओिह कानूनी सुिवधाक लाभ उठा सकए।सेवा Eदाता कोनो कंपनी, मिहलाक कcयाण हेतु काय>रत गैर सरकारी संगठन, भए
सकैत अिछ।सेवा Eदाताक ई कत>य िथक जे Eतािड़त यितकT कानूनमे िनिहत ओकर अिधकारक बारेमे जानकारी देिथ
एवम् कानूनी उपचार लेबाकक हेतु उिचत वxथा करएमे ओकरा मदित करिथ। पुिलसक कत>य िथक जे ओ Eतािड़त
यितकT संरKण अिधकारी एवम् सेवा Eदाताक बारेमे जानकारी देिथ। संगिहँ भारतीय दंड संिहताक अनुKेद ४९८ (अ) मे
Eा˜त अिधकारक जानकारी सेहो देिथ।
aयाियक दंडािधकारीक समK पीिड़ता ®ारा िसकाइत Eा˜त भेलाक तीनिदनक भीतर मामलामे सुनबाइक तािरख तय
होएत।aयायालयसँ समन भेटलाक दूिदनक भीतर संरKण अिधकारी तकर जानकारी EितवादीकT देत। EितवादीकT देल गेल
समनक संग घरेलू िहंसा कानूनक धारा 12 कउपखंड (३)क तहत िसकाइतक Eितिलिप सेहो देल जाएत।Eितवादी ®ारासे
Eा˜त भेलाक बादे एकतरफा सुनबाइ भए सकैत अिछ आ xथाइ अaतिरम आदेश कएल जा सकैत अिछ। ज³री बुझलापर
aयायलय एकतरफा सुनबाइ कए अaतिरम आदेश दए सकैत छिथ। aयाियक दंडािधकारी ६० िदनक भीतर एहन िसकाइतक
िनपटान करताह। हुनकर आदेशक िखलाफ स8बिaधत पK ३० िदनक भीतर सेशन कोट>मे अपील दाएर कए सकैत छिथ।

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Eितवादी ®ारा संरKण आदेश िकंवा अaतिरम संरKण आदेशक पालन निह करब संËेय एवम् गैर जमनती अपराधक
vणीमे अबैत अिछ। हुनका तािह कारणसँ एक साल धिर जेल िकंवा बीस हजार ³पया जुमना भए सकैत अिछ। जॱ
संरKण अिधकारी दंडािधकारी ®ारा देल गेल आदेशक पालन करबामे िबना कोनो वािजब कारणके आनाकानी करैत छिथ तँ
हुनको एिह तरहक दंड देल जा सकैत अिछ, मुदा तािह हेतु िवभागीय अिधकारीकT पूव> अनुमित आव©यक िथक। पीिड़त
यितकT संयुत पिरवारक साझी िनवासमे रहबाक हेतु aयायलय िनवास करबाक आदेश दए सकैत अिछ भले ओिह
घरमेEितवादीक िहxसा होइक वा निह होइक।
एस आर बतरा एवम् अaय बनाम vीमती त³ना बतराक मामलामे उ»चतम aयायालय ई फैसला देलक जे घरेलू िहंसा
अिधिनयमक धारा १७ (१) क अनुसार Eतािड़त मिहला माM साझी आवासमे रहबाक हकदारभए सकैत अिछ।साझी आवासक
माने पित ®ारा कीनल िकंवा िकरायापर लेलगेल घर अिछ वा एहन साझी घर अिछ जािहमे पितक िहxसा होइक। कहक
माने जे जािह घरमे ओकर पितकT कानूनी अिधकार निह छैक तािहमे Eतािड़त यितकT रहबाक अिधकार aयायलय एिह
कानूनक तहत निह दए सकैत अिछ।
घरेलू िहंसा रोकबाक समाधान :
घरेलू िहंसा रोकबाक एकटा समाधान ई भए सकैत अिछ जे पित aयाियक दंडािधकारीक समK शपथ-पM देिथ जे ओ
आगा अपन पÏीक संग स8मानपूण> यवहार करताह,एहनिकछु निह करताह जािहसँ ओकरा कोनो Eकारक यंMणासँ फेर गुजरए
पड़ैक, तकर संपूिÇमे अपन संपि“कT गारंटी देिथ जािहसँ घरेलू िहंसाक पुनरावृित भेलापर ओकरा ज¦त कए लेल जाएत।
उपसंहार
आपसी स8बaध Eेम, आदर, ईमाaदारी, एवम भावुक लगावसँ सराबोर हेबाक चाही। आपसी अिवsाससँ िहंसा ओदुराचर
बढै़त अिछ, एहन दंपित िनरंतर आशंकाšxत रहैत छिथ जािहसँ जीवन नक> भए जाइत अिछ। जीवनक ई कटुसžय अिछ जे
अहp दोसरकT निह बदिल सकैत छी, हम अपनेटाकT बदिल सकैत छी।कमसँ कम एतबातँ कइए सकैत छी जे जािहस8बaधमे
ल”जित निह रिह गेल अिछ, जतए अिवsासक पराकाRा पहुँिच गेल अिछ, ओतए फसाद बढे़नाइ छोिड़कानून स8मत तरीका
अिœतआर करी।
मिहला संगठन िसफ> जाग•कता पैदा कए सकैत अिछ, पुिलस िसफ> उž पीड़न करएबलाकT जेल पठा सकैत अिछ, कोट>
िसफ> a याय दए सकैत अिछ, एिहमे सँ कोनो अहpक घरक हालत ठीक निह कए सकैत अिछ, घरमे पैिस िनžय-Eितक
समxयाक समाधान निह कए सकैत अिछ। अxतु िसफ> सोच बदलक ज•रत अिछ।
जीवनक दुखमय पिरिxथितसँ हािर निह मािन नव ओ सुंदर जीवन िजबाक हेतु सचेÇ रहैत िपिड़त यितकT ई
िवsास बनओने रहक चाही जे सुंदर समय आविहँबला अिछ, अएबे करत।q

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िगरÞतारीओ जमानत
कोनो-ने-कोनो झंझिटमे निहओ चाहैत कए बेर लोक फँिस जाइत अिछ। केबेर िनदÆष लोकक िखलाफ झूठ-फूसके
मामला बना देल जाइत अिछजािहमे पुिलसके घाल-मेल सेहो भए जाइक से भारी बात निह।टेलेिवजनकT गाम-गाम पसिर
गेलासँ अपराधक नव-नव xव•प गामो-घरमे फैिलरहल अिछ।कैटा कानूनो एहन भए गेल अिछजे िबना गलितओकT कैबेर लोक
जहलधिर पहुँिच जाइत छिथएहन पिरिxथितमे लोकके जहल ओ जमानतसँ स8बिaधत कानूनक जानकारी बहुत आव©यक भए
गेल अिछ जािहसँ यथ>क फसादसँ बिच सकिथआ ज•री भेलापर समाधान कए अपन जीवन ओ इ”जितक रKा करिथ।
कैटा कनून एहन अिछ जािहमे पुिलस मामला दािखल होइते अिभयुतकT िगरÞतार कएसकैत अिछ।उदाहरणxव•प
भारतीय दणड संिहताक धारा ४९८ (ए)क तहत कएलगेल मोकदमामे अिभयुतक हालत बहुत पातर भए जाइत छल।
ओकरा सभसँ पिहने पुिलस िगरÞतार करैत छल, तखन आर िकछु। बहुत रास मामलामे देखल गेल जे कएल गेल िसकाइत
झूट छल, कोट>मे साबूतक आधारपर सािबत निह भेल, अिभयुत बरी भए गेल, मुदा ताबित ओकर सभ दशा भए जाइत
छल, ओकर इ”जितकमिटयामेट भए जाइत छल। उ»चतम aयायलय एिह बातक संËान लैित िदशा-िनदµश जारी कएसुिनिÔत
करबाक Eयास केलक जे िनदÆश लोकके एहन मामलामे वेबजह िगरÞतारी निह होइक।
संिवधानक धारा २२ क अनुसारपुिलस ®ारा िगरÞतार कएल गेल यितकT अिधकार अिछजे ओ िगरÞतारीक कारण
जानए, जॱ िगरÞतारी वारंटक आधारपर भेल अिछतँ ओकरा वारंट देखाओल जाए, वकील वा िनकट स8बaधीकT संपक> कए
सकए।ओकरा िगरÞतारीक चौवीस घंटाक भीतर मिजÑßेटक स8मुखउपिxथत करब ज³री िथक। ओकरा इहो बताएब ज³री
ितक जे ओ जमानतपर छोड़ल जा सकैत अिछिक निह।
िगरÞतार कएलगेल यितकT हथकड़ीलगाएब :
ऊ»चतम aयायलयक िदशा िनदµशक अनुसार िगरÞतार कएलगेल यितकT हथकड़ीलगाबएसँ बचबाक चाही, कारण एहन
यित सजाआÞता निह होइत छिथ। हथकड़ीक Eयोग अपवािदकपिरिxथितमे तखने कएल जाएजखन िकअिभयुत िहंसक
हो, पुिलसक िगरÞतसँ भािग जेबाक संभावना होइक, िकंवा आžमहžयापर उता³ हो।
सीआरपीसीक धारा ७४क अधीनपुिलस अिभयुतकT िगरÞतार करबाक हेतु घरमे घुिसकए ओकरा पकिड़
सकैतअिछ, तािहलेल ज³री भेलापर घरकिखड़कीकT तोिड़सकैत अिछ।
कोनो यितकT िगरÞतार केलाकबादेओकर तलाशी कएल जा सकैत अिछ, पिहने निह। जॱ िगरÞतार कएल गेल यित
मिहला छिथ तखन मिहले पुिलस ई काज कए सकैत अिछ।
मिहलाक िगरÞतारी हेतुउ»चतम aयायलय ®ारा जारी कएलगेलिदशािनदµश :
उ»चतम aयायलय ®ारा जारी कएलगेल माग>दश>नक अनुसार सामाaयतः कोनो मिहलाकT सpझक बाद आ भोर हेबासँ
पिहने िगरÞतार निह कएल जाएत। जॱ ततबे आव©यक भए जाइक आ राितयेमे मिहलाक िगरÞतारी ज•री होइक, भोरधिर
³कब कानूनक अनुपालन हेतु िद°ित भए जेबाक संभावना Eवल होइक, तखन मिजÑßेटक पूव> अनुमित लए एव8मिहला पुिलस

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®ारा ई काज कएल जाएत। िगरÞतारीक बाद जॱ मिहलाकT तलाशी करब ज•री होइक तखन ई काज मिहला पुिलस ®ारा
कराओल जेबाक चाही।पुिलस हाजितमे मिहलाकT अलग राखबाक चाहीजॱ मिहलाक हेतु अलग हाजित निह होइक तखन
ओकरा अलग कोठरीमे राखल जेबाक चाही।
िवना वारंटकT िगरÞतारीः
आपरािधक Eि¡या संिहता1 9 73क धारा 41क अनुसार पुिलस कोनो यितकT िनÕिलिखत पिरिxथितमे िबना
वारंटकT िगरÞतार कए सकैत अिछ:
(१) जखन ओ कोनो संËेय अपराध केने हो,
(२) कोनो पुिलस अिधकारीकT कत>य िनव>हनमे यवधान ठाढ़ केने होइक,
(३) ओकर घरसँ कोनो चोरीक माल पकड़ल गेल होइक,
(४) कानूनी िहरासतसँ मिटआ रहल हो,
(५) सेना, वायु सेना, जलसेनासँ भािग आएल हो,
(६) जॱ ओकरा अपराधी घोिषत कएल गेल हो,
(७) जॱ ओ अºयxत अपराधी अिछ,
(८) जॱ ओकरापर संËेय अपराध करबाक शक छैक,
(९) जॱ aयायलय ®ारा छोड़ल गेल अपराधी aयायलयक शत>क अनुपालन निह करैत अिछ,
कैटा आओरएहन कानूनसभअिछ जािह िसकाइत भेलापर पुिलसकT अिभयुतकTिगरÞतार करबाक अजxM अिधकार भए
जाइत अिछ।
संËेय अपराध की िथक ?
संËेय अपराधमे पुिलस िबना कोट> आदेशकT अिभयुतकT िगरÞतार कए सकैत
अिछ।हžया, वलाžकार, चोरी, राÑßdोह, सन अपराधक मामला एिह vेणीमे अबैत अिछ।
असंËेय अपराध की िथक ?
असंËेय अपराध क मामलामे कोट>क आदेश भेलाक बादे ककरो िगरÞतार कएल जा सकैत अिछ।
जॱ अिभयुत पुिलसक िगरÞतसँ भागवाक Eयास करैत अिछ, तँ ओकरा पुिलस उपयुत वल Eयोग कए पकिड़ सकैत
अिछ, परंतु वलक अनाव©यक Eयोगसँ पुिलसकT बचबाक चाही।मुदा आव©यक भेलापर पुिलस जानोलए सकैत अिछ, वशतµ
ओकर अपराध मृžयुदंड देबए जोगर होइक।
अिšम जमानत :

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अिšम जमानतदेबाक अिधकारउ»च aयायलय वा सेशन कोट>कT अिछ।अिšम जमानत हेतु आवेदन िनचला कोट>मे निह
कएल जा सकैत अिछ।अिšम जमानत देबाकाल aयायलय सुिनिÔत करैत अिछ जे आवेदक मामलाक िववेचनामे विछत
सहयोग करताह, देश छोिड़ बाहर निह चिल जेताह, कोनो गवाह वा सबूतकT Eभािवत निह करताह।आवेदककT जॱ आशंका
होइक जे ओकरा कोनो मामलामे फँसाकए िगरÞतार कएल जा सकैत अिछतँ ओ उिचत aयायालयकT अिšम जमानत हेतु
आवेदन कए सकैत छिथ।
अिšम जमानत ताबते धिरक हेतु देल जेबाक चाही जाधिर चालान कोट>मे Eिषत निह कएल गेल अिछ, तकर बाद
अिभयुतकT िनयिमत जमानत हेतु स8बिaधत aयायलयमे आवेदन देबाक चाही (सजलुÉीन अ¦दुल समद शेखबनाम रा”य
महाराÑß)
aयायक तकाजा िथक जे अिšम जमानत देबासँ पूव> िवरोधी पKकT aयायलय नोिटस जारी करए जािहसँ अिभयुत
गलत जानकािर दए िकंवा विछत जानकारीकT दबाकए अिšम जमानत निह लए सकए (बालचंद जैन बनाम मÍय Eदेश)
जमानती वारंट :
िगरÞतारीक वारंटकोनो कोट>क पीठासीन अिधकारी ®ारा िलिखत •पमे जारी कएल जाइत अिछ।ओिहमे xपÇ •पसँ
ई िलखल हेबाक चाही जे कानूनकक कोन धाराक अनुसार ओकर िगरÞतारीक वारंट जारी कएल गेल अिछ, ओकरा किहआ
आ कखन ओिह कोट>मे हािजर हेबाक छैक।ओिह आदेशमे इहो िलखल रहत जे ओकरा उिचत जमानात देला पर एिह
शत>संगिगरÞतारीसँ छूट देल जाइत अिछ जे ओ िनयत िदन/िनयत समय पर कोट>मे हािजर भए जाएत, तािह हेतु एकटा
िनिÔत रकमक बॱड सेहोओकरादेबए पड़ैतअिछ, एकािधक यितकक जमानात सेहो दबए पिड़ सकैत अिछ।
गैर जमानती वारंट :
गैर जमानती वारंटमे पुिलस अिभयुतकT िगरÞतार कए स8बिaधत कोट>मे हािजर करैत अिछ, तकर बादे ओकर जमानत
पर छोड़वाक आवेदनपर कोट> िवचारकरत।कोनो मामलामे जमानत पर अिभयुतकT िरहा करबासँ पूव> कोट>कT मामलाक गंभीर
छानबीन कएल जाइत अिछ, कोट> ई सुिनिÔत करए चाहैत अिछ जे जमानतपर छोिड़देलाक बाद ओ aयाियक EकृयाकT
Eभािवत निह करए, ज³रत भिर मामलाक अनुसंधानमे सहयोगकरए, गवाहसभकT तोड़बाक Eयास निह करए।संगिह ओकर
इितहास एवम् चिरMक िवषयमे सेहो जानकारी लेबाक Eयोजन होइत अिछ जािहसँ बाहर गेलाकबाद ओ समाजक हेतु समxया
निह भए जाए।
सेशन कोट>वा उ»च aयायालयसँ जमानत :
जॱ अिभयुत एहन अपराध केलक अिछ जािहमे मृžयुदंड वा आजaमकारावासक Eावधान िथक, तखन ओकरा जमानत
सेशन कोट>वा उ»च aयायालयसँ भेटत, तािहसँ िनचला कोट>सँ निह।
aयायलयकT जमानत देबाक समय बहुत सावधानीपूव>क िवचारकरबाक Eयोजन अिछ कारण अपराध िस„ होयबासँ पूवµ
ककरो जहलमे सड़ादेब मानवीय अिधकारक सरासर उcलंघन िथक मुदा संगिह समाजके यापकिहतकT Íयान राखब सेहो
ज•री अिछ, जे ओ यित बाहर आिबकए एहन ने कए देिथ जे कोनो आन यितक स8मानओ जीवन पर संकट उžप± भए
जाइक।
उपसंहार

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ejournal 'िवदेह ' २५७ म अंक ०१ िसत᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १२९ अंक २५७ )
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संिवधानक अनुKेद २१ एवम २२ क तहत Eा˜त मौिलक अिधकारक रKाक हेतु आव©यक अिछ जे बेबजह ककरो
xवतंMता पर आघात निह होइक, लोक िनवध अपन जीवनक रKा कए सकए। िगरÞतारी िनÔय एिह संवैधािनक अिधकारकT
स^ः सीिमते निह करैत अिछ अिपतु šहण लगा दैत अिछ। मुदा ककरो xवतंMता एिह हद धिर निह भए सकैत अिछ जे
कोनो िनदÆष आदमीक िजनाइ किठन कए दैक, िकंबा कोनो अपराधी बेटछु¬ भेल घुमैत रहए।अxतु, पुिलस एवम् aयायालयकT
एकटा संतुिलत ³िख रािख Ežयेक मामलामे नीर- Kीर िववेक रखैत काज करक चाही जािहसँ कोनो िनदÆष यितकT िफरसान
निह होबए पड़ैक आ दोषी खुcला निह घुमैत रहए।िनÔय ई संतुलन बनाएव एकटा किठन काज िथक मुदा समxत कानून ओ
aयायालय एिह Eयासमे लागल रहैत अिछ।q

सूचनाक अिधकार
भारतक संिवधानक अनुKेद १९ मे िनिहत मौिलक अिधकारसँ भारतक नागिरककT सूचनाक अिधकार Eा˜त अिछ।
तािह अिधकारकT Eा˜त करबाक यवxथा सूचनाक अिधकार अिधिनयम, 2005 क अaतग>त कएल गेल। सूचनाक अिधकार
अिधिनयम, 2005 Ežयेक नागिरककT ई अिधकार दैत अिछ जे ओ सरकारसँ ओकर काजक बारेमे जानकारी मिग सकैत
अिछ। एिह तरह¥ आब भारत सेहो िवsक ओिह ६० देशमे सािमल भए गेल अिछ जे अपन नागिरककT सूचनाक अिधकार
Eदान कए पारदश¸, जवाबदेह एवम् सुशासन xथािपत करबाक चाक-चौबंद यवxथा केने अिछ।
केadीय सूचना आयोग
सूचनाक अिधकार अिधिनयम, 2005 मे ई यवxथा कएल गेल अिछ जे केad सरकार ®ारा एक केadीय सूचना
आयोगक गठन कएल जाएत जािहमे एक मुœय सूचना आयुत एवम् अिधक सँ अिधक दसटा केadीय सूचना आयुत होएत।
मुœय सूचना आयुत एवम् अaय सूचना आयुतक िनयुितक हेतु एकटा सिमित गिठत होएत जकर अÍयK EधानमंMी एवम्
लोकसभामे िवपKक नेता एवम् EधानमंMी ®ारा मनोनीत केadीय मंMीमंडलक एकटा मंMी एकर सदxय हेताह। एकर अितिरत
Ežयेक रा”यमे रा”य सूचना आयोग अलगसँ गिठत कएल जाइत अिछ।
जॱ कोनो केadीय लोक सूचना अिधकारी िबना कोनो वािजब कारणसँ सूचनाक हेतु आवेदन निह लैत अिछ, िकंवा
वpिछत सूचना देबएमे आना-कानी करैत अिछ, िकंवा जािन-बूिझ कए गलत वा अधूरा जानकारी दैत अिछ, वा सूचना नÇ कए
देल गेल अिछ तँ केadीय सूचना आयोग सूचनाक अिधकार अिधिनयम, 2005 क अनुKेद ७ (१) अaतग>त ओकरा िखलाफ

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स8बिaधत िवभागकT अनुशासनाžमक कारवाई करबाक आदेश दए सकैत अिछ। एहन पिरिxथितमे आयोग स8बिaधत दोषी
अिधकारीकT सूचना देबाक िदन धिर २५० टाका Eितिदनक िहसाबसँ पचीस हजार टाका धिर जुमना लागा सकैत अिछ।
आयोगक समK िसकाइत सोझे दािखल कएल जा सकैत अिछ ? जॱ हँ, तँ कोन आधारपर ?
िनÕिलिखत पिरिxथितमे सूचनाक अिधकार अिधिनयम, 2005 क धारा १८ क अaतग>त आयोगक समK सोझे
िसकाइत दािखल कएल जा सकैत अिछ:-
(क) जॱ ओ ओिह कारणसँ अनुरोध Exतुत करबाक हेतु असमथ> रहल अिछ, िक ओिह अिधिनयमक अधीन एहन
अिधकारीक िनयुित निह कएल गेल अिछ वा केadीय सहायक लोक सूचना अिधकारी ओिह अिधिनयमक अधीन सूचना वा
अपीलक हेतु धारा 19 क उपधारा (1) म¥ िविनिद>Ç केadीय लोक सूचना अिधकारी वा ”येR अिधकारीकT पठेबाक हेतु
xवीकार करबासँ मना कए देलक अिछ;
(ख) जॱ ओकरा ओिह अिधिनयमक अधीन अनुरोध कएल गेल कोनो जानकारी धिर पहुंचएसँ मना कएल गेल अिछ;
(ग) जॱ ओकरा ओिह अिधिनयमक अधीन िविनिद>Ç समय-सीमाक भीतर सूचनाक हेतु वा सूचना धिर पहुँचक हेतु
अनुरोधक उ“र निह देल गेल अिछ;
(घ) जॱ ओकरासँ ओहन फ़ीसक रकमक संदाय करबाक हेतु अपेKा कएल गेल अिछ, जे ओ अनुिचत बुझैत अिछ;
(ङ) जॱ ओ िवsास करैत अिछ िक ओकरा ओिह अिधिनयमक अधीन अपूण>, Óिमत करएबला वा िमáया सूचना देल
गेल अिछ; आओर
(च) ओिह अिधिनयमक अधीन अिभलेखक हेतु अनुरोध करबाक हेतु वा ओकरा Eा˜त करबासँ स8बिaधत कोनो अaय
िवषयक स8बaधमे।
सूचनाक अिधकारक तहत सरकारी िवभाग, सरकारी सहायतासँ चलएबला गैर सरकारी संगठन, वा िशKण संxथानसँ
जानकारी Eा˜त कएल जा सकैत अिछ। सूचनाक अिधकार अिधिनयम, 2005 धारा 2 (एच) क तहत लोक Eािधकरण
अथवा साव>जिनक संxथाक लग उपल¦ध सूचनाक मग कए सकैत अिछ। साव>जिनक संxथासभमे संिवधान ®ारा xथािपत या
गिठत, संसद या कोनो रा”य िवधाियकाक कानून ®ारा xथािपत वा गिठत, केad वा रा”य सरकारक कोनो अिधसूचना वा
आदेशक ®ारा xथािपत वा गिठत, रा”य व केad सरकारक xवािमžव बला, ओकरा ®ारा िनयंिMत वा पय˜त माMामे सरकारी
धन पाबएबला िनकाय सभ, गैर सरकारी संगठन व िनजी KेMक िनकाय जे सरकारक ®ारा EžयK वा अEžयK •पसँ
िव“पोिषत अिछ, सािमल अिछ।
आवेदक ®ारा सूचनाक अिधकारक उपयोग करैत केहन जानकारी मगल जा सकैत अिछ ?
१. कोनो सरकारी दxताबेजक Eित मिग सकैत छी।
२.कोनो सरकारी दxताबेजक जpच कए सकैत छी।
३. कोनो सरकारी काजकT जpिच सकैत छी।
४. कोनो सरकारी काजमे Eयुत बxतुक Eमािणत नमूना मिग सकैत छी।

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एिह कनूनक तहत अहp कोनो जानकारी हािसल कए सकैत छी जेनािक : कोनो सड़ककT बनाबएमे सरकार कतेक
खच> केलक, EधानमMीक रहन- सहन पर कएल गेल खच>,राÑßपित भवनमे कएल गेल खच>, कोनो सरकारी योजना पर कएल
गेल खच>, पंचायत ®ारा कोनो योजनामे कएल गेल यय वा कोनो Eकारक अaय जानकारी वा ओिहसँ स8बिaधत दxतावेजक
छायाEित मगल जाए सकैत अिछ। सूचनाक अिधकार अिधिनयम, 2005 क अनुKेद ६ (२) अaतग>त आवेदकसँ ई निह
पूछल जा सकैत अिछ जे ओ सूचना िकएक मिग रहल छिथ।
संगिह यितगत िववरण, आय, पैन नंबर, िविभ± पैरामीटरक तहत िवशेषËक यितगत पैनल ®ारा देल गेल
Eा˜तक, संपि“क िरटन> आओर संपि“क िववरण, आकलन िरपोट>,मेिडकल िरपोट>, ब«क खातॲका िववरण, Eािधकरणसँ xपÇीकरण
मंगैत EÁ निह पूछल जा सकैत अिछ।
सूचनाक अिधकारक KेMमे निह आवएबला िवभाग :
–कोनो खुिफया एज¥सीक ओहन जानकारी, जकरा साव>जिनक भेलासँ देशक सुरKा आओर अखंडताकT खतरा हो
– दोसर देशक संग भारतसँ जुड़ल मामला
– थड> पाट¸ यानी िनजी संxथान स8बaधी जानकारी जे सरकारक पास उपल¦ध अिछ ओिह संxथाक जानकारीकT
स8बिaधत सरकारी िवभागक माफ>त हािसल कएल जा सकैत अिछ।
xवेKासँ जानकारी Eकािशत कएल जाएत :
सूचनाक अिधकार अिधिनयम, 2005 क अनुKेद ४ (बी) अaतग>त Ežयेक सरकारी िवभाग अपन िवभागसँ स8बिaधत
अिधकसँ अिधक जानकारी xवेKासँ िवभागक वेवसाइटपर Eकािशत करत। अaयथा भारतक कोनो नागिरक सूचनाक
अिधकारक तहत अनुKेद ६क तहत आवेदन दए सूचना Eा˜त कए सकैत छिथ।
सूचनाक अिधकारक तहत आवेदन कोना कएल जाएत ?
सूचनाक अिधकारक तहत आवेदनक हेतु कोनो िनिÔत EपM निह अिछ। सादा कागज पर अपन आवेदन िलिख कए
विछत जानकारी मगल जा सकैत अिछ।
आवेदन शुcकक भुगतान कोना कएल जाएत ?
सूचनाक अिधकारक तहत आवेदन करबाक हेतु केad सरकारक अधीन आबएबला मंMालय िवभागसँ जानकारी Eा˜त
करबाक हेतु दसटाकाक शुcक लगैत अिछ जकर भूगतान पोxटल आड>र, ब«क ãाÞट, ®ारा कएल जा सकैत अिछ। रा”य
सरकार सभ अलग- अलग शुcक रखने अिछ।
आरटीआइ ऑन लाइन
आवेदक सूचनाक अिधकार अिधिनयम, 2005 क अaतग>त सूचना Eा˜त करबाक हेतु, सूचनाक अिधकार (आरटीआई)
ऑनलाइन पोट>लक माÍयम https://rtionline.gov.in.सँ केadीय मंMालय/ िवभागसँ एवम् “ऑनलाइन सूचनामे उिcलिखत
अaय केadीय लोक EािधकरणकT अनुरोध कए सकैत छिथ।”

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आरटीआई िनयम, 2012 क अनुसार गरीबी रेखासँ नीचाक लोककT आरटीआई शुcकक भुगतान करबाक आव©यकता
निह अिछ। तथािप, बीपीएल आवेदककT अपन आवेदनक संग- संग एिह स8बaधमे, उपयुत सरकार ®ारा जारी Eमाण-पMक
एक Eित संल²न करब ज³री अिछ।
Eथम अपीलीय EािधकारीकT अपील करबाक हेतु, आवेदककT आरटीआई ऑनलाइन पोट>लमे “सबिमट फxट> अपील”नामक
िवकcपक चयन करए पड़त आओर सामने आबए बला फाम>कT भरए पड़त। Eथम अपीलकT दायर करबाक हेतु मूल आवेदनक
पंजीकरण संœया आओर ई-मेल आईडीक आव©यकता पड़ैत अिछ। आरटीआई अिधिनयमक अनुसार, Eथम अपीलक हेतु कोनो
शुcक निह देबाक अिछ। ऑनलाइन दायर आरटीआई आवेदन या Eथम अपीलक िxथित/ जवाब “िxथित” पर िलक कए
आवेदक ®ारा देखल जाए सकैत अिछ।
सूचना के देत ?
Ežयेक सरकारी िवभागमे एकािधक लोक सूचना अिधकारी/सहायक लोक सूचना अिधकारी िनयुत कएल जाइत छिथ
िजनकर जानकारी स8बिaधत िवभागक वेबसाइट िकंबा सूचना प¬ वा िवभागमे पूछ-ताछ कए Eा˜त कएल जा सकैत अिछ।
लोक सूचना अिधकारी/सहायक लोक सूचना अिधकारी िवभागक हेतु सूचनाक अिधकारक अधीन कएल गेल आवेदन Eा˜त
करैत छिथ, ओकरा स8बिaधत अिधकारीकT पठाए सूचना संकिलत करैत छिथ एवम् िनयत समय (आवेदन केलाक वाद एक
मासक अधीन, कोनो- कोनो मामलामे ४५ िदन) मे जानकारी आवेदककT पहुँचवैत छिथ।
सूचनाक अिधकार अिधिनयम, 2005 क अनुKेद ६(३) अaतग>त जॱ मगल गेल सूचना आंिशक वा पूण> •पसँ कोनो
दोसर लोक Eािधकरणसँ स8बिaधत अिछ तँ आवेदन Eा˜त केिनहार लोक Eािधकरण ओकरा संिविधत लोक EािधकरणकT पpच
िदनक भीतर xथानाaतिरत कए सकैत अिछ। तकर सूचना आवेदककT सेहो देल जाएत।
Eथम अपील
सूचनाक अिधकार अिधिनयम, 2005 क अनुKेद १९ (१) अaतग>त Ežयेक सरकारी िवभाग ओिह अिधकारीक नाम
अिधसूिचत करत जकरा लग Eथम अपील कएल जा सकैत अिछ। जॱ आवेदककT तीस िदनक भीतर जबाब निह भेटैत
छैक, िकंबा भेटल जबाब अपूण> वा Óामक छैक तँ आवेदक तीस िदनक भीतर Eथम अपीलीए अिधकारीक ओतए अपील कए
सकैत अिछ। एिह हेतु ओकरा फेरसँ फीस निह देबए पड़तैक।
ि®तीय अपील
Eथम अपीलीय Eािधकारीक ®ारा देल गेल िनण>यसँ जॱ आवेदक संतुÇ निह छिथ तँ ओ ि®तीय अपीलीय Eािधकारी
(रा”य सूचना आयोग िकंवा केadीय सूचना आयोग)कT ि®तीय अपील कए सकैत छिथ। Íयान रहए जे एजन कोनो अपीलक
समय सीमा ९० िदन अिछ।
सूचनाक अिधकार अिधिनयम, 2005 क अनुKेद २३ अaतग>त कोनो aयायालय ताधिर कोनो मामला निह सूनत जाधिर
Eथम अपील ि®तीय अपील/ क Eकृया पूरा निह भेल अिछ।
उ»चतम aयायलयक िकछु महžवपूण> िनण>य : उ»चतम aयायलय हालमे िसवील अपील संœया ६१५९-६१६२(२०१३)मे
संघ लोक सेवा आयोग बनाम अ²नेश कुमार एवम् अaयक (CIVIL APPEAL NO.(s).6159-6162 OF 2013

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मामलामे xपÇ केलक अिछ जे अनग>ल, अनावxयक एवम् अयवहािरक सूचनाक मग कए सरकारी िवभागकT एतेक
िफरसान निह कएल जा सैत अिछ जे सरकारक अिधकश समय ओिह सूचनाकT उपल¦ध करेबामे एिह हद तक नÇ भए
जाइक जे रचनाžमक/सकाराžमक काज केनाइ पराभव भए जाए।
उ»चतम aयायालयक aयायमुित> आदश> कुमार गोयल एवम् aयायमुित> उदय उमेश लिलतक पीठ ®ारा २० माच> २०१८क
एनजीओ कॉमन कॉजक यािचकाक िनxतारण करैत फैसला देलक अिछ जे कोनो हालतमे पचासटा टकासँ बेसी शुcक निह
लेल जा सकैत अिछ। एकर अितिरत जॱ कोनो दxतावेजक Eितिलिपक मग कएल जाइत अिछ तँ Eित पृR पpच टका
अितिरत शुcक लेल जा सकैत अिछ। ई आदेश उ»च aयायालय, िवधान सभा आओर अaय सरकारी आओर xवाय“ िनकाय
सिहत सभ संxथापर बाÍयकारी होएत जे सूचना का अिधकार अिधिनयम, 2005 क अaतग>त अबैत अिछ।
उ»चतम aयायलय हालमे िसवील अपील संœया ९०१७(२०१३) थाल˜पलम सहकारी ब«क एवम् अaय बनाम् केराल
रा”य एवम् अaय (मामलामे xपÇ केलक अिछ जे सहकारी सिमित सभ सूचनाक अिधकार अिधिनयम, 2005 क अaतग>त
निह अबैत अिछ।
सूचना अिधकार कानून xपÇताक आव©यकता: सूचना अिधकार कानूनक सविधक महžवपूण> पहलू लोक Eािधकरणक
मुÉा पर xपÇताक आव©यकता अिछ। सूचनाक अिधकारमे अखनो कैटा Mुिट अिछ, जेना सरकारी अिधकारी ®ारा जबाब
देबाक हेतु भारी भरकम फीसक मग कए देब, आवेदनकT एिह िवभागसँ ओिह िवभाग xथानाaतिरक करैत रहब, सािमल अिछ।
Eथम अपील िवभागेकक अिधकारीक समK कएल जाइत अिछ जािहसँ मामलामे कोनो नव बात निह भए पबैत अिछ।
समाaयतः ओ पिहने लेल गेल िनण>यक पुिÇ कए दैत छिथ। तकर बाद दोसर आ अिaतम अपील रा”य वा केadीय सूचना
आयोगक समK करबाक Eावधान अिछ। मुदा समxया अिछ जे ओिहठाम आवेदनक भरमार अिछ आ िनण>य लेबामे बहुत समय
लािग जाइत अिछ जािहसँ कैबेर गलत लोक बँिच जाइत अिछ। सरकारकT बहुत रास मामलामे सूचना निह देबाक छूट भेिट
जाइत अिछ। कानूनक एिह Eावधानक कतेको मामलामे दु•पयोग होइत अिछ। कोनो-ने- कोनो बहाना बनाए सूचना निह
देबाक Eयास होइत रहल अिछ। हलािक आयोग एहन मामलामे बहुत सœत ³िख रखैत अिछ आ दोषी अिधकारीकT जुमना
सेहो लगबैत अिछ।मुदा तैँ की? िवलंब तँ भैए जाइत अिछ। फेरसभ लोक ओतेक धैय> पूव>क लागलो निह रिह पबैत छिथ।
जे होउ, सूचनाक अिधकार कानूनकT बिन गेलासँ भारतक नागिरककT सरकारी काम-काजक जानकारी लेब आसान भए
गेल अिछ। कतेको तरहक ज•री सेवामे िनण>यमे पारदिश>ता आएल अिछ। बहुत तरहक कदाचारक मामला सभ पकड़ल गेल
अिछ। सरकारी अिधकारी गलत काज करबामे डराइत छिथ। कतेको मंMी धिरकT इिxतफा दबए पड़लिन अिछ। िनÔय एिह
कनूनसँ आम नागिरकक महžव वढ़ल अिछ। मुदा िद°ित एिह बातक अिछ जे एखनो बहुत रास नागिरक एिह कानूनक
जानकारीसँ वंिचत छिथ। तािह हेतु ज³री अिछ जे एकर पय˜त Eचार होइक। सूचना लेबाक आ आवेदन करबाक EकृयाकT
आओर सरल बनाओल जाइक।q
२५ .०३ .२०१८

रबीad नारयण िमvक

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दूटा लघुकथा
जीबी तँ की की ने देखी !
लोक की की ने देखलक। मुदा दू-चािर बख>सँ जे सभ गाममे भए रहल छल से एकदम
अEžयािशत छलैक। नव-नव गुलंजर िनžय उठैत रहैक।
रिब िदन हाट लगल रहैक। सभ पु³ष हाट करए गेल रहए। अ•ण बाबू सपिरवार
गाम आएल छलाह। हुनकर भाए मोहन बाबू बेस अगरिजत छलाह। मैिßक उतीण> केने
छलाह। ओना, खेत-पथार बहुत तँ निह रहिन मुदा गुजर होयबामे कोनो िद°त निह होइक।
गाम घरक झगड़ा फिड़छाबएमे ओxताद छलाह मुदा अपना घरक झगड़ा निह फिड़छा पबैत
छलाह। घरवाली ब¶ड तेज छलिखन। गोर-नार दप-दप। बी.ए. केने छलिखन। िपता गरीब
मुदा िववेकी छलिखन। हुनकर एक माM कaया छलिखन शीला, िजनक िबआह मोहन बाबूसँ
भेल छलिन। मुदा िबआहक बाद हुनका लोकिनक आaतिरक मतभेद बढ़ले चल जाइत
छलिन। एिह बातसँ शीला बड़ दुखी ओ उदास रहैत छलीह।
अ•ण बाबू बहुत िदनक बाद आएल छलाह। दूनू भाए आपसमे ग˜प-स˜प करैत छलाह
िक यो xMीगण िरसापर आएल आ ओकरा संगे दोसर xMीगण घरसँ बहराएल आ िरसापर
बैस चु˜पे चिल गेलिथ। िकछु कालक बाद मोहन बाबू आँगन गेलाह तँ घरक िजंजीर बaद
छल। आँगन सु±। कतहुँ यो निह। मोहन बाबू गु8म। ने हुनका आगा सुझिन आ ने पाछा।
की करी,की निह करी िकछु फुराइते ने छलिन। ¡मशः ई ग˜प सौसे गाम पसिर गेल।
ई घटना कोनो नव निह छल। एक मास पिहने एकटा एहने घटना भेल जे पूरा
इलाकाकT झकझोिड़ देलक। पूरबिरया गामवाली बड़ सािžवक छली। दुरागमनसँ पिहने िबधबा
भए गेल छलीह। तिहआसँ आइ धिर सात बख> बीित गेल। मुदा कतहुँ हुनक चच निह
भेल। िनžय Eात: चािरये बजे उिठ जाइत छली। गामक सभ लोक सूतले रहए िक अaहिरएमे
नहा-सोना कए पूजा-पाठ करए लगैत छलीह। स8पूण> शरीर तेजमय। मुदा िकछु िदनसँ दद>
दद>क िसकाइत करैत छलीह। लोककT होइक जे पेटमे अcसर भए गेलिन अिछ। लाजे ओ
िकछु बजिथन निह। अaततोगžवा पढ़ुआ काका निह मानलिखन। हुनका जबरदxती अxपताल
लए गेलिखन। डाटर अxपतालमे भत¸ कए देलकिन। ओकरा भत¸ करा कए पढ़ुआ काका
िकछु पैसा-कौड़ी जोगार करए गाम आपस अएलाह। Eात:काल अxपताल पहुँचला तँ रोगीक

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ejournal 'िवदेह ' २५७ म अंक ०१ िसत᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १२९ अंक २५७ )
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कतहुँ प“े निह। पता निह रोगी केतए चल गेलीह। सॱसे इलाकामे एिह बातक गद> पिड़
गेल।
ओना तँ गाम-घरक लोक बेस नेम-टेमबला। मुदा बेसीलोकक मोन िसआह। यो
ककरोसँ कम निह मुदा भीतरे-भीतर सभकT घून पकड़ने। मुदा इलाकामे ए°े िबहािड़।
xMीगण सभ घोघ उठाबए लेल बेहाल। बेटा सभक िपताक कुंजी िछनए लेल बेहाल। पुतोहु
सभ सासुक ग¬ा पकड़ए लेल बेहाल। घरे-घरे िभ±क हाबा से जोरगर बहल अिछ जे बयन
परसैत-परसैत सभ परेशान। घरे-घर कै-कै गोट चूäा भए गेलैक अिछ।
खैर ! ई तँ जे भेलैकसे भेलैक। मुदा सभसँ आÔय> ओिह िदन भेल जहन पु³षो“म
बाबूक घरवाली हनहनायल थाना पहुँिच गेलैक। ओकरा देखए लेल चौगामका हजारो लोक
जमा भए गेल। करमान लागल लोक आ तैयो दनदनाइत दरोगाजीक ऑिफसमे Eवेश कए
गेल। दरोगाजी पुिलसकT आदेश देलिखनजे भीड़कT भगा दौक आ अपने ओिह कaयाक इजहार
लेबए लगलाह। सँए-बहुमे ग8भीर मतभेद भए गेल छलैक। घरवाली किन°ो रौ सहए वाली
निह छलैक। बाते-बातमे दूनू यितमे मािर -पीट भए गेलैक। घरवाली थानामे आिब कए
एफआइआर कए देलकैक- “हमारा जान का खतरा है। ”
तकर बाद ओ िरसा पकिड़ मधुबनी चल गेिल। बहुत िदनक बाद सुनल गेल जे ओ
कतहुँ आनठाम िबआह कए लेलक अिछ।
गाममे ओझा-गुनी आ भगैतक चच अखनो जोर पकड़ने छल। फुदरक घरवालीकT हाथक
चाटी चलैत छलैक आ कनेक-मनेक मंM-तंM सेहो ओ जनैत छल। मुदा एिह बेर अÇमीक
िदन बेस ताल भए गेलैक। ओकर घरवाली साफे बकए लगलैक। खुिल कए देवी खेलाए
लगलैक। गाम-गामक भगता आएल। मुदा ककरो बुते देवी निह पकड़मे अएलैक। गाममे
ओिह िदन पछवािर गामक ओझाजी आएल छलाह। हुनको तंMे-मंM बेस जोरगर छलिन।
दौड़ल-दौड़ल लोक हुनका बजौने आएल। ओझाजी अएलाह। अनुRान भिर राित भेलैक। देवी
बa हेबे निह करैक। अaततोगžवा भो³कबा राितमे आिब कए ओ देवी पकड़मे अएलैक।
गटागट बाजए लगलैक-
“एक मास धिर अनुRान कर। ई कर , ओ कर , निह तँ सॱसे गामकT पीस कए धए
देबौक। ” इžयािद-इžयािद...।

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औ बाबू! आब तँ सॱसे गॱआ ओझाजीक अनुनय-िवनय करए लागल। ओझाजी अपन भाव
बढ़बए लगलाह -
“हमरा तँ ओतए जेबाक अिछ। ई करबाक अिछ , ओ करबाक अिछ। हम परसू जेबे
करब। ए°ो िदन निह •िक सकैत छी। ”
ब¶ड मोसिकलसँ ओ •कलाह। िनžय सpझसँ देवीक अनुRान घरमे शु• होइक आ
भोर धिर चलैत रहैक। ओिह अनुRानक दौरान ओतए ककरो आएब मनाही छलैक। देवी
रिह-रिह कए गरजै-
“सभकT देखबौ। एक-एककT देखबौ.. !”
फूहर बाबू बाहर दरबाजापर सभ सुनैत रहिथ आ देवीक आराधना करैत-करैत औंघा
जािथ। ओमहर ओझाजी अनुRानमे लीन। अनुRानक अिaतम िदन छल। िन :श¦द राित।
ओझाजी आ फूहरक घरवाली अनुRानमे लीन। सभ यो औंघाइत छल। एही समयमे दूनू
देवी-देवता एकाएक गाएब। गामसँ पूब िदस सड़क छलैक। से पकड़ने-पकड़ने ने जािन कतए
चल गेल। भोर भेने गाममे फेर एकटा गुलंजर छुिट गेल।
गाममे आब की की ने अिछ। इंजीिनयर , Eोफेसर आ बीए-एमए केर तँ ग˜पे जाए िदअ।
गामक लोक बेस टेिटयाह। एकदम िनयमसँ रहब आ िनयमसँ जीब। भोरे उिठ कए सुतबाक
काल धिर मंMो»चार करैत रहताह। गरीबक घर कोनो अधलाह काज भेल निह िक ओकरा
च¬े बािर देताह। मुदा धिनक लेल सातटा खूनो माफ।
Eोफेसर साहेबकT घरवालीसँ निह पटलिन। तलाकक मोकदमा भए गेल। घरक लोकमे
सँ यो किनयpक पKधर निह भेलैक। तलाक पास भए गेलैक। Eोफेसर साहेब धराक दए
दोसर िबआह केलाह। ओिहसँ ब»चो भेलिन ओ ओिह ब»चाकT िवआहो भए गेलैक।
सोिचयौक समय कतए-सँ-कतए पहुँिच गेल। जीबी तँ की की ने देखी !
¦

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तुषारपात
सभागाछीसँ बरक िस„ाaत िलखाकए आिब गेल छलैक। सॱसे गाम हँगामा भए गेलैक।
हीराबाबूक बेटीक िबआह आइ.ए.एस. अिधकारीसँ हेतैक। िपता हो तँ एहन। लाख •पैआ
ितलक लगलैक।
हीराक िपता शीतल बाबू नामी ठीकेदार छलाह। एक माM सaतान एक बेटी छलिखन।
कतेको बरखसँ बरक खोजमे िभरल छलाह मुदा कतहुँ िकछु कमी तँ कतहुँ िकछु...। ओिह
िदन पुरबािर गाम िदस िबदा भेल छलाह िक रxतामे अकxमात िकछु गोटेसँ पिरचय भए
गेलिन। वएह सभ ओिह बरक पिरचय देलकिन। बर जिहना देखैत सु±र तिहना सौ8य
xवभाव। शीतल बाबू तय कए लेलाह जे जान रहए िक जाए मुदा ई काज करक अिछ।
अaतोगžवा एक लाख टकापर ग˜प गेल। पadह जुलाईक िदन सेहो िनिÔत भेल। बड़
उžसाहसँ िबआहक िविध सभ पूण> भेल ओ शीतल बाबूक ओिहठामसँ चौगामा लोककT हकार
देल गेल।
हीरा बाबू नीिलमाक िबआहक चच> इलाका भिरमे पसिर गेल। जकरे देखू सएह ओिह
िबआहक चच> करैत छल। िबआहक चािर-पpच िदनक बाद हीरा बाबू आइ.ए.एस.क EिशKण
करए चल गेलाह। बेस मौज कटलैक ओिह EिशKणमे। हीरा बाबू गोरनार ओ अतीव सुaदर
छलाह। हुनक यितžवमे आकष>ण छलिन। बेस मौजी लोक छलाह एवम् िवचारसँ
अžयाधुिनक। आइ.ए.एस.क EिशKण करैत-करैत ओ दुिनयpसँ पूण> पिरिचत भए गेल छलाह।
EिशKण समा˜त भेलापर हुनकर पदxथापन लखनउ भेलिन।
हीराबाबूक परा¡म िदन दुगु±ा ओ राित चौगु±ा बिढ़ते जा रहल छल। नीिलमाक पालन-
पोषण संयत वातावरणमे भेल छल। ठीकेदार साहेब य^िप सुखी स8प± लोक छलाह , मुदा
xवभावसँ अितशय संयत। िधया-पुतापर हुनके संxकारक छाप छल। नीिलमा जिहना देखैत
सुaदर छलीह , xवभावो ओिहना मधुर। िबआहसँ साल भिर पूवµ वो xनातकक परीKा Eथम
vेणीमे उ“ीण> केने छलीह। िबआहक बादसँ हुनका अपूव> Eश±ता छलिन। य^िप वो सभ
काज पूव>वते करैत छलीह। मुदा मोन सिदखन हुनकेपर टगल रहिन।
ओमहर हीराबाबू भोग-िवलासमे नीिलमाकT िबसिर गेलाह। Eयोजने कोन छलिन जे वो
नीिलमा हेतु यš होइतिथ।

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नीिलमाक आँिख िचर EतीKासँ असोथिकत भए गेल छलिन। एक िदन अपन माएकT संग
कए हीराबाबूक डेरापर xवयं पहुँच गेलीह। डेरापर पहुँिचते ओतएसँ एकटा बेस सुaदिरकT बाहर
जाइत देिख हुनकर माथा ठनकलिन। हीराबाबू ओकरे संग कोठरीसँ बहराएल छलाह।
नीिलमाकT देख वो गु8म पिड़ गेलाह। फेर बजलाह-
“हलो!नीिलमाजी। आउ , आउ। हम तँ अहॴक EतीKा कए रहल छलहुँ। ”
िकछु िदन हीराबाबूकT नीिलमाक संग खूब नीक लगलिन। िकaतु मासक धक लिगते
हीराबाबूक पुरना आदित सभ पछोड़ करए लगलिन। िकछु िदन नीिलमा चु˜प रहलीह , िकaतु
जहन मामला हदसँ बाहर भए गेल तँ वो सोचलीह जे हीराबाबूकT बुझाएल जाए।
“अहp एतेक राित धिर कतए रहैत छी?”
“कतहुँ रहैत छी तािहसँ अहpकT मतलब ?”
“ज•र मतलव अिछ ! आिखर हम अहpक अ„Êिगनी िथकहुँ। अहpक सुख-दुखमे हाथ
बटायब हमर हक ओ कत>य अिछ। ”
नीिलमा सेहो तावमे आिब गेल छलीह। बाते-बातमे हीराबाबू शराबक नशामे धुत एक
चाटी चला देलिखन। नीिलमा ओतिह पसरल ओछाओनपर जा खसलीह। हीरा बाबू दोसर
कोठरीमे जाए िकदिन बजैत आराम करए लगलाह। ओिह िदनसँ जे दूनू गोटेमे शाxMाथ>
शु•आत भेल से अिवरल चिलते रहल। घरक वातावरण कलहसँ नक> भए गेल छल।
नीिलमा हीराबाबूकT सुधारक हेतु कृतसंकcप छलीह ओ हीरा बाबू सेहो अपने रxतापर चलबाक
हेतु अड़ल रहलाह। िनरaतर तनाव ओ कलहमे रहलासँ नीिलमाक xवाxáय खसए लगलिन।
ओ एक मास धिर लगातार ”वरसँ पीिड़त रहलीह।
नीिलमाक िवमारीक खविर ठीकेदार बाबूक कान धिर पहुँचल। पिहने तँ हुनका िवsासे
निह भेलिन मुदा जखन हुनका नीिलमाक पM Eा˜त भेलिन तँ ओ गुम रिह गेलाह।
तेजxवी, चंचल ओ सतत Eश± रहए वाली नीिलमा पीयर , िनxतेज ओ शुÑक पिड़ गेल
छलीह। फटिकयेसँ अपन िपताकT अबैत देिख जान-मे-जान आिब गेलिन। ओ दौड़लीह आ
अपन िपतासँ xनेहवश सिट गेलीह। ठीकेदार साहेबकT अvुपात होमए लगलिन। हीराबाबूक
कार सेहो संयोगसँ ओिह समयमे बाहरसँ आएल एवम् ओहीठाम ठहरल।

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बाप-बेटीक एिह मधुर िमलनक कोनो Eभाव हीराबाबूपर निह पड़ल आओर वो ससुरकT
िबना गोर लगने अपन िनवास िxथत कायलयमे दनदनाइत चल गेलाह। ठीकेदार साहेब बुजुग>
छलाह। हीरा बाबूक रंग-ढंग ओ नीिलमाक िनxतेज देहकT देिख ओ िxथितकT तुरaत बुिझ
गेलाह। मोनमे भयंकर ¡ोध होमए लगलिन। मुदा अपन आवेगकT बेस मोसिकलसँ रोकलाह।
फेर नीिलमाक संगे हुनकर कोठरीमे चिल गेलाह।
पता निह , कतेक काल धिर ठीकेदार साहेब नीिलमाक संगे बैसल रहलाह। xनेह िमिvत
अपन ग˜पसँ हुनका सुखी करैत रहलाह। एिह ग˜प सभसँ नीिलमाकT Eय˜त मानिसक िवvाम
भेलिन। वो सुित रहलीह। ठीकेदार साहेब पता निह , की की सोचैत रहलाह ?
भोरे आठे बजे ओ ओिहठाम पहुँचल रहिथ। दुपहिरयाक एक बािज रहल मुदा हीरा बाबू
अखन धिर ससुरक पुछािर निह केलाह। नीिलमाक संग भोजन कए ठीकेदार साहेब xवयं
हीरा बाबूसँ भTट करए गेलाह। हीरा बाबू अपन आवासीय कायलयमे फाइलक बीच डूबल
छलाह। ठीकेदार साहेब हुनका देिख िठठिक गेलाह। मुदा हीरा बाबू अिवचल रिह हुनक
ितरxकार करैत रहलिखन।
नीिलमा आगू बढ़ैत कहलिखन-
“बाबूजी, अएलाह अिछ। ”
हीरा बाबू ठीकेदार साहेबकT इसारा कए बैसबाक आšह कएलिन। ठीकेदार साहेब
पुछलिखन-
“की हाल अिछ ?”
“ठीके। कोना अएलहुँ?” हीरा बाबू बािज उठलाह।
“ओिहना शहरमे िकछु काज छल। सोचलहुँ अहुँसँ भTट केनिह चली। ”
नीिलमाकT अपन िपताक उपेKा निह सहल गेलिन। ओ तमतमाइत अपन िपताकT िघचने
ओिहठामसँ उिठ गेलीह। हीरा बाबू पुन: फाइलमे डुिव गेलाह।
गाड़ी मधुबनी टीशनपर आिब गेल छलैक। नीिलमाकT औंघी लािग रहल छलिन। ठीकेदार
साहेब उठौलिखन-

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उठू नीसू उठू। मधुबनी आिब गेल। ”
नीिलमा थाकल , झमार लउतरलीह। िनxतेज , उžसाहहीन , नीिलमाक ए°ा जॱ-जॱ गाम िदिस
बढ़ए लागल , नीिलमाकT भूतकालक दृ©य सभ मोन पड़ए लगलिन। कतेक दुला• छली ओ।
गामक लोक सभ जे यो ओमहरसँ गुजरए , नीिलमा िदस तिकते रिह जाए। जेहने स”जन
तेहने सुaदिर। xवभाव ओ गुणक अपूव> समaवय। िपताक एकलौता सaतान। ठीकेदार साहेब
जे िकछु कमेलाह तकर Eेरणा नीिलमेक छल। कतेक गरीब छलाह वो। नीिलमा ल×मी बिन
कए आएल छिल हुनका ओतए। नीिलमाक जaम होइतिह ओ बढ़ए लगलाह। मुदा आइ संगे-
संग ए°ापर चलैत-चलैत ओहो गुम छलाह। िकछु कालमे गाम आिब गेल। ठीकेदार साहेब ओ
नीिलमा एकपेिरया रxतापर अपन घर िदस बढ़ैत गेलाह। लगैत छलैन जेना हुनकर सभ
आशापर तुषारपात भए गेल हो।
¦

रबीad नारायण िमvक
नमxतxयै
आगp...
३२ .
गाम अिबतिहं ओकरा पुÑपाक समाचार भेटलैक। पुÑपा माxटर साहेबक नवजागरण मंचक सदxयता लए लेने
छिल। बेटा राजकुमारक उšवादी सोचक Eगितशील िवचारमंचक मूध>aय नेता छलैक मुदा ओ माxटर साहेबक
इमाaदार छिबसँ Eभािवत रहए। फेर दुनू गोटे संगे मनोरोगी अxपताल कpकेमे साल भिर समय िबतौने छल। बादमे
डाटर भेद खोललक जे दुनू xवxथे छल। ककरो िदमाग खराप निह रहैक। मानिसक अवसादक कारण यवहार
गड़बड़ा गेल रहैक।
जे होइक, मुदा घरेमे वैचािरक मतभेद ओहो माएक संग राजकुमारक हेतु एकटा किठन पिरिxथित ज•र
उžप± कए देने छल। तकर समाधान हेतु राजकुमार माxटर साहेब ओिहठाम पहुँचल। माxटर साहेब राजकुमारकT
देिख बहुत Eश± भेलाह। राजकुमार सभटा बात माxटर साहेबकT कहलकिन। आिखर ओ हुनकर िव^ाथ¸ रिह
चुकल छल। माxटर साहेबक कोनो बात काटए जोगर निह होइत छलैक। ओजनाधार पाट¸क ³िखसँ असहमत
छलाह। कारण ओकरामे वैचािरक इमाaदारीक अभाव रहैक। मुदा Eगितशील िवचारमंचक सेहो समथ>न निह कए

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सकैत छलाह। कारण उšवादसँ िफरंगीक लोहा लेब स8भव निह छल। सामािजक पिरव“>न तँ माxटर साहेबक
मूलमंM छलिन।
सै„ािaतक •पसँ राजकुमार माxटर साहेबसँ सहमत छल। मुदा एकर कायaवयन कोनो होएत। कारण
ओकरा गुटमे आधा आदमी तँ भूतपूव> डकैत छल जे गाहे-बगाहे ओकर संग भए गेल छल। डकैती आब छोिड़ देने
छल मुदा अतीत ओकरा सभक पछोड़ कए रहल छल।
एिह सभक समाधान हेतु माxटरे साहेब िवचार देलिखन जे अ³णसँ भTट कए एहन लोक सभकT आम माफी
िदआबक Eयास कएल जाए जािहसँ ओ सभ खुिलकए राÑßक मुœयधारासँ जुिड़ सकए।
राजकुमारकT ई िवचार बहुत नीक बुझेलैक। माxटर साहेबक संग कए अ³णक डाक बंगला िदस िवदा भए
गेल। मोन भेल जे एक बेर अ³णसँ भTट कएल जाए। ब»चाक दोxतछल, हमर नैहरक छल, तT िजËासा
xवभािवक। हुनका कहिलअिन तँ सहष> तैयार भए गेलाह। हम सभ िबना कोनो पूव> सूचनाकT दिड़भंगा कलटरक
डेरापर पहुँच गेलहुँ। ओिह डेराक •प-रंग देिखकए लगैक जे कोनो पैघ आदमी ओतए आिब गेल छी। कतेको
नोकर-चाकर सभ लागल छल। फुल, फलहरीसँ भरल छल। कतेको गोटे कलटर साहेबसँ भTट करए आएल
रहिथ। मुदा पीए जहॉं हमर नाम कहलकै ओ तुरaत अपने बाहर आिब गेलाह आओर हमरा देिखते बहुत Eश±
भेलाह। हम सभ अaदर अितिथ कKमे बैिसले रही िक माxटर साहेब, राजकुमारक ओिहठाम आगमनक सूचना
भेटल। अ³ण हुनकर िव^ाथ¸ रिह चुकल अिछ।
राजकुमार तँ xकूिलया संगी रहैक। अ³णकT जहॉं खबिर भेटलैक, तुरaत ओकरो सभकT ओहीठाम बजा
अनलक। तीनटा xकूिलआ संगी, हम, अ³ण आओर राजकुमार माxटर साहेबक संगे एकåा भए गेल रही। सभक
बहुत खाितर भेल। ओकर अंšेजी पÏी एंगल ज•री काजसँ पटना गेल रहैक। सॱसे डेरा खािलए छल।
ग˜प-स˜पक ¡ममे माxटर साहेब Eगितशील िवचारमंचक चच केलिथ। ओ जहॉं से बात शु• केलिथ तँ
अ³ण टोकलकिन जे अहॉं तँ नव जागरण मंच बनौने छी। फेर Eगितशील िवचारमंचसँ की लेना-देना?
तािहपर माxटर साहेब कहलिखन जे दुनू संxथा अलग-अलग काज कए रहल अिछ। दुनूक उÉे©यमे कोनो
बेसी अaतर निह छैक। हम सभ आपसमे िमिल कए िफरंगीसँ संघष> करए चाहैत छी। मुदा एिहमे िद°त आिब
रहल अिछ।
तािहपर अ³ण हुनका दुनू गोटेकT दोसर कोठरीमे लए गेल आओर सभ बात िवxतारसँ सुिन कहलक जे हम
िफरंगीसँ Eगितशील िवचारमंचक काय>क“ सभपरसँ पुरना केस सभ हटा लेबाक अनुशंसा कए देबैक मुदा भिवÑयमे
िहंसाक रxता छोड़ए पड़तैक। सभकT िलिखत शपथपM देबए पड़तैक जे ओ सभ आगा एिह तरहक काज निह
करत। माxटर साहेब आओर राजकुमार तुरaत एिह बातमे सहमित दए देलिथ। एिहसँ नीक Exताव भइए की
सकैत छल?
ग˜प-स˜पक बाद ओ सभ हमर कोठरीमे आिब गेलाह। ताबे हम सभ चाह-जलखै कए लेने रही। कनीकाल
आरामो केने रही। माxटर साहेब अितशय Eश± रहिथ। राजकुमार सेहो आsxत छल। सभ अपन-अपन जगहपर

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बैिस आगूक कार>बाइक योजना बना रहल छलाह िक यो धरफराएल अaदर आएल। ओ राजकुमारक हाथमे एकटा
पुज¸ देलक। राजकुमार ओकरा पिढ़ िचिaतत भए गेल। सभ पूछए लगलैक- “की भेल?”
माxटर साहेबकT सेहो िचaता होमए लगलिन। राजकुमारक माए पुÑपा बहुत दुिखत छलैक। जखन राजकुमार
गामसँ िवदा भेल रहए तखनो ओकर हालत ठीक निह रहैक। ओ माxटर साहेबक संगे चो¬े गाम िवदा भए गेल।
हम सभ ओतिह अटिक गेलहुँ। कारण नीकसँ ग˜प करक इ»छा छल। एक युगक बाद ओकरासँ भTट भेल
छल। xकूिलआ संगी तँ छलहे, हमर िपितऔतो छल आओर से ओकर यवहारमे लिKत भए रहल छल।
हमरा सभ अ³णक सžकारसँ बहुत Eश± रही। सभ तरहक सुिवधासँ स8प± ओिह डेरामे अभाव छल तँ
ओकर पिहल पÏीक जे तमसाकए िकंवा आ¡ोशमे डेरा छोिड़ नैहर चिल गेल रहिथन।
भोर होइते हमरा लोकिनक हेतु गरम-गरम चाह आिब गेल। सिक>ट हाउसक िडलस कोठरीमे हम दुनू गोटे
रही। लगए जेना दोसर देश पहुँिच गेल छी। कतए गामक पिरवेश, कहॉं कलटरक आवासक स8प± पिरसर ओ
सुस”जत सिक>ट हाउस।
कनीकालमे अ³ण अपने आएल। सभ गोटे संगे चाह पीलहुँ। चाह पीबैतकाल ग˜प-स˜पक ¡ममे िधया-
पुताक चच> xवाभािवकसँ भेलैक। ब»चा सभक, खास कए बेटी सभक पढ़ाइ लए कए हम बहुत िचaतामे रही।
अ³णक उदारताक वण>न लोकक मुहT सुनैत रिहऐक। से स^: तखन देखिलऐक जखन ओ तुरaत
ब»चासभक पढ़ाइक िज8मा उठा लेलक। सरकार िदससँ बहुत रास छाMवृि“ अबैत छलैक आओर एमहर-ओमहर
भए जाइत छलैक।
अ³णक एिह आsासनसँ मोन Eश± भए गेल। फेर आओर-आओर Eकरण सभपर ग˜प होमए लागल। हम
सभ भोरे जे बैसलहुँ से ९ बािज गेल। अ³णकT कायलय जेबाक रहैक। पिहनेसँ तय कैटा बैसारमे से जेबाक
रहैक। जाइत-जाइत अपन पिहल पÏी उमाक चच> कए गेल आओर आšह केलक जे ओकरा मनाओल जाए।
अ³ण ओकरो अपना ओिहठाम राखबाक हेतु तैयार छल। उमाक नैहर हाजीपुर लग नवगाम हमर सभक गामसँ
फटकी रहैक तथािप ओकरा आsासन दए हम सभ गाम िवदा भेलहुँ।
समxया जिटल तँ भइए गेल रहैक। उमाक नैहर बेस धनाæय छलैक। ओ सभ कोनो मामलामे अ³णसँ
उ±ैस निह रहैक, बीसे रहैक। उमाक भाए सभ बड़का-बड़का पदपर रहैक। बाप धनीक ओ EितिRत जमॴदार
रहिथन। तखने मोतीपुर ¶योढ़ीमे अ³णसन बरसँ बेटीक िबआह केलिथ। मुदा समय बलवान होइत अिछ। लोक
सोचैत अिछ िकछु, भए जाइत छैक िकछु।
ओमहर गाम पहुँचतिहं राजकुमारक मोन कोनादन भए गेल। जेना िकछु असगुन घिटत भए गेल हो।
पोखिरक लग पहुँचले छल िक रमुआ भेटलैक। ओकरा देिखते भोकासी पािड़ कए कानए लगलैक रमुआ। कनैत-
कनैत बाजल-
“मालिकन निह रहलीह…।”

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एतबा कहैत-कहैत ओ फेरसँ कानए लागल, राजकुमारसँ लपिट गेल। की-की कहैत रहल। राजकुमार तँ
अपने अबाक रहए, एना असमयमे माए चिल जेिथन से निह सोिच सकल रहए। मुदा भावी...। राजकुमारक
कनैत-कनैत ऑंिख लाल भए गेल। जमीनपर Eाणहीन, िन:श¦द, अचल पड़ल ओकर माए तुलसी चौरा लग उ“र
मुहT राखल छलीह। चा³कातसँ लोक सभ घेरने छलाह। राजकुमार द{डवत भए हुनका Eणाम करबक हेतु उ„त
भेल आओर ठामिह खिस पड़ल।
q

३३ .
अ³ण कायलय गेल मुदा ओकर मोनमे कािäसँ आइ धिर भेल घटना¡म बेर-बेर मोनमे घुमैत रहलैक।
यो ई निह सोिच सकैत छल जे माxटर साहेब सन नीक लोकक िखलाफ जासूसी चलैत हो। मुदा सत सएह
रहैक। अंšेजक राज रहैक। जे यो देश भत छल ओकरा सभपर िफरंगीक व¡ दृिÇ रहैक। लोककT पता
होइक निह होइक मुदा ओकर िहसाब-िकताब िफरंगीक ओिहठाम राखल जाइत छल। के कतए गेल,ककरा
ककरासँ भTट केलक- सभ बातक जानकारी ओकरा रहैत छल।
कायलयमे Eगितशील िवचार मंच एवम् नव जागरण मंच सिहत अaय एहन संिचका सभ मंगओलक।
संिचका देिख ओ दंग रिह गेल। आÔय> लगलैक जे एतेक असžय खबिर सभ कोना आओर ककरा माÍयमसँ
अबैत रहल। एताबत ई बुझा गेलैक जे माxटर साहेबक बातपर अमल करैत तथाकिथत िवdोही सभकT माफी देब
आसान निह छलैक। मुदा ओ Eयास करैत रहल।
िकछु िदनक बाद फेर घुमैत िफरैत हम सभ अ³णक डेरापर पहुँचलहुँ। एिह बेर हमर चा• ब»चा संगे
छल। तीनू बेटीक कालेजमे नाम िलखाबक छलैक। एिह बातक चच> होइतिह अ³ण तुरaत अपन पीएकT घ{टी दए
बजओलक आओर आदेश देलक जे तीनू ब»चाक नाम पटना कालेजमे िलखा देल जाए एवम् तीनूक रहबाक ओ
अaय खचक Eबaध हेतु पय˜त छाMवृित xवीकृत सेहो कए देल जाए। आिखर तँ ओ िजलाक कलटर छल।
तीनू बेटीक नाम पटना कालेजमे िलखा गेल। छाMावासमे रहबाक यवxथा भए गेल एवम् मािसक छाMवृि“क
पिहल अिšम भूगतान सेहो भए गेल।
हमरा उमीदसँ बेसी मदित अ³णसँ भेटल। ओकरा हृदयसँ धaयवाद दैत हमसभ दोसर िदन गाम आपस
िवदा होइत रही। अ³ण उमाक हाल चाल पूछए लागल। हम सभ हाजीपुर लग िxथत नवगाम जाए उमासँ भTट
कए आएल रही, मुदा ओिहठाम भेल बातकT कहबाक िह8मत निह भए रहल छल। मुदा अ³ण तँ तेज आदमी छल।
ओ हमरा लोकिनक भाव भंिगमासँ सभ बात अिखआिस लेलक आओर एतबे आšह केलक जे एकबेर ओकरा उमासँ
भTट करबा दैक, कारण यितगत xतरसँ ओ एिहमे सफल निह भए सकल छल।
एमहर हम सभ गाम पहुँचले छलहुँ िक माxटर साहेब, राजकुमारक शीÛे एक हेबाक समाचार भेटल।
माxटर साहेब ओ राजकुमारक वैचािरक मतभेद पिरिxथितजaय कारणसँ कम भेल जा रहल छलिन। ओ सभ तँ

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जनाधार पाट¸क मुिखआ चेतनसँ सेहो ग˜प करए चाहैत छलाह। उÉे©य ई छल जे समxत राÑßवादी शित एक
भए िफरंगीकT देशक बाहर करए। देश xवतंM होएत तँ सभ रxता अपने खुजत। पराधीन सपनहुँ सुख नाही। से
बात आब सभक मोनमे धिस गेल छलैक। पिहनहुँ ई बात सभ जनैत छल, मानैत छल, मुदा आपसी मताaतरक
नफा िफरंगी सभ उठबैत रहल।
िफरंगी सभकT जासूसी खबिर भेिट गेलैक जे राÑßवादीसभ एक भए रहल अिछ। ओकरा सभहक हेतु ई
कोनो शुभ समाचार निह छल। सभ विरR अिधकारी सभक बैसार भेल। िवचार रहैक जे जनाधार पाट¸क
Eगितशीलमंचसँ फराके रखबाक Eयास होइक। तािह लेल माxटर साहेब ओ राजकुमारक एकटाकT Eोžसािहत कएल
जाए। तािहपर अ³ण अपन बात रखैत जोर देलक जे ई तखने स8भव होएत जखन िक ओकरा सभक िखलाफ
मोकदमा सभ आपस लेल जाए। कहक मतलब जे आम माफीक एलान कए देल जाए। सभ अ³णक Exताव
मािन गेल। िकछुए िदनमे माxटर साहेब ओ राजकुमारकT अ³णक कायलयसँ बजाओल गेल आओर सरकारी
एलानक िचåी देल गेल जािहमे Eगितशील िवचार मंच एवम् नव जागरण मंचक काय>का“क नाम तमाम मोकदमा
सभसँ हटा देल गेल। ओकरा सभकT आम माफी दए देल गेल।
िडगिडिगआ िपिट कए एिह बातक एलान गाम-गाम कए देल गेल। िनÔय ई माxटर साहेब ओ राजकुमारक
हेतु बहुत नीक िदन छल। पिरप¬ामे ओकर सभहक नारा लािग रहल छल। हमरा लोकिन अपन गामसँ िसमिरआ
मास करए गेल रही। गाम-गामक लोक सभ ओिहठाम एक मास गंगाक कछारमे ट¥ट खसाए भोरे-भोर गंगा xनान
कए पूजा पाठ करैत अिछ। नव नव लोकसँ पिरचयक अवसर भेटैत छैक। गाम घरक िचaतासँ िकछु िदनक हेतु
मुित भए जाइत अिछ।
ओिह माघ मेलामे नवगामक लोक सभ सेहो रहैक। हमर नैहरक लोक सेहो रहैक। सभक आपसमे ¡मश:
भTट-घॉंट होइत होइत बात खुजलैक जे उमा सेहो मास करए आएल छिथ। हम एक िदन असगरे हुनकर बासा
िदस गेलहुँ। संयोगसँ ओ बाहर िनकिलते रहिथ। नवगाम लोकक डेरा दूरेसँ यो देखा देने रहए। हमरा हुनका
एकबेर भTट भेल रहए, मुदा ए°िह बेरमे कतेक ग˜प कएल जाइत। अपना भिर बुझाबक Eयास केने रिहऐक।
एिहबेर एसगिर पािब िवxतारसँ ग˜प भेल।
उमाक संग अaयाय तँ भेले रहैक। ओ चुपचाप से सिह जाएवाली निह रहिथ। हुनकामे दृढ़ता ओ िनRा
भरल छल। सžय ओ aयायक हेतु ओ कोनो हद धिर लिड़ सकैत छलीह। हुनकर इएह यितžव तँ अ³णक
डरक कारण छल। ओ जनैत छल जे उमा Eितकार करतीह। एही भयसँ šिसत भए ओ िकछु बीचक रxता
िनकालबाक Eयासमे छल। मुदा उमा तँ एकदम एिह पार वा ओिहपारक तैयारीमे छिल। ओकर तक>क आगू हम
िकछु निह किह सकिलऐक। अ³ण गलती तँ केनिह रहए।
q

३४ .

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आममाफीक एलानमे भजनानaददास उफ> गरम िसंहक नाम सेहो रहैक। ई शुभ समाचार देबए माxटर साहेब
राजकुमारक संग कए xवयं देबए गेलाह। ई तँ एकटा बहाना रहैक, असलमे हुनका सभक इ»छा रहिन जे
भजनानaददासजी महराजसँ भTट कए xवतंMता आaदोलनकT आग बढ़ाबक जोगार कएल जाए। िकछु आिथ>क
मदितक सेहो Eयोजन रहिन।
भजनानaददासक यश चा•कात पसिर गेल छल। देशक कोन-कोनसँ भतगण ओिह आvममे आिब शािaत
लाभ करैत छलाह। भजनानaदजीक यितžव ओ चिरM िदन Eित िदन चमिक रहल छल। लोकसँ xवे»छासँ Eा˜त
अकूत धनक उपयोग ओ जन कcयाणमे करैत छल। ओकर आvममे अÍयाžमक यवहािरक xव³प देखबामे अबैत
छल। आvममे रहिनहार िबधवा सभ पूण> सुरिKत ओ आनaदमे रहैत छलीह। दू सएसँ बेसीए िबधवाक पालन
पोषण हुनकर आvममे होइत छल। वृaदावनेमे निह अिपतु चा•कात भजनानaददासक आvमक यश छल।
भजनानaददास भजन करैत-करैत वxतुत: संत भए गेल छलाह। संगिह िवशु„ राÑßवादी िवचारक छलाह।
िफरंगी सभकT हुनकर बढ़ैत Eतापसँ डर होइत छलैक। तT हुनका केसमे फसाबए चाहलक मुदा सžयक िवजय
भेल। ओ ई बात बुझैत रहिथ।
दोसर िदन सpझमे माxटर साहेब ओ राजकुमार आvम पहुँचलह। ओिह समय आvममे आरती चलैत रहैक।
भजनानaदजी इशारासँ िहनका सभकT ओतिह ³कबाक हेतु कहलिखन।
आvमक आरती तँ नामी छल। स«कड़ो संत, महाžमा, गृहxथ, िबधवा सभ मगन भए आरती करिथ ओ
राधे! राधे!क भजन सेहो। हारमोिनयम, ढोल, झाइलक संग सूरदासक भजन सुिन तँ कतेको भतगण भाव िवèल
भए नृžय करए लगैत छलाह। करीब डेढ़, घaटा भिर ई काय>¡म चलल।
तकर बाद Eसाद िवतरण भेल। हमरो सभकT Eसाद भेटल। Eसाद अित xवािदÇ होइत छल। होइत छल
जे खाइते रही।
आरतीक बाद भजनानaदजी हमरा सभकT अपन कKमे बजा लेलिथ आओर सभ बात Íयानसँ सुनलिथ। ओ
एिह बातसँ बहुत Eश± भेलिथ जे हुनका एवम् आvममे हुनका संगे रहिनहार हुनकरचेला सभपर सँ पुरनका
मोकदमा सभ सरकार आपस लए लेलक। माxटर साहेब बात आगू बढ़बैत कहलिखन जे xवतंMता आaदोलनमे
गित देबाक काज छैक।
आपसी संगठन मजगूत कए िफरंगी सरकारपर आ¡मणक Eयोजन छैक। तािह हेतु ओ सभ Eगितशील
िवचार मंच ओ जनजागरण मंचक िवलय करए चाहैत छिथ।
Eयास तँ ईहो भए रहल अिछ जे जनाधार पाट¸क सेहो सािमल कए समxत जनशितकT संगिठत कएल
जाए मुदा जनाधार पाट¸बला सभ आगा- पाछा कए रहल छल। ओकरा सभमे असलमे सही नेतृžवक अभाव छल।
भजनानaददास एिह बात सभसँ बहुत Eश± भेलाह जे xवतंMता आaदोलन आब गित पकिड़ रहल अिछ।
अपना तरफसँ ओ सभ Eकारसँ सहयोगक आsासन देलाह। तय ईहो भेल जे एकमास बाद दिड़भंगामे एकटा
स8मेलन कएल जाएत जािहमे Eगितशील िवचार मंच ओ जनजागरण मंचक आपसी िवलय भए जाएत।

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रचनापर अपन म ◌ंतय editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ।
जगदीश Eसाद म{डल - पंगु आ आमक गाछी (उपaयास ) धारावािहक आ दूटा लघुकथा

जगदीश Eसाद म{डलक
पंगु
उपaयाससँ...
7.
देश xवतंM भेला पछाइत, जमीनक लड़ाइ सॱसे देशमे पसैर गेल। 1947 इxवीसँ पूव> जिहना एकमुरही लड़ाइ
अंगरेजी शासनक िखलाफ उठल छल तिहना xवतंM भेला पछाइतदेशमे जमीनक लड़ाइ पसैर गेल। लड़ाइ केना ने
पसरैत, आिखर कृिष Eधान देशो तँ छीहे िकने। िबनोवा भावेक नेतृžवमे भूदानी आaदोलन शु• भेल। आaदोलनक नारा छल-
जमीनबला अपन कुल जमीनक छठम िहxसा xवे»छासँ दान करैथ। ओ जमीन खेतीपर जीवन बसर करैबला भूिमहीनक बीच
देल जाए।
ओना, जमीनक लड़ाइ दू •पमे चलल।पिहल, जमीनबलासँ बकाxत जमीन खेती करैबला बँटेदारकT देल जाए, आ दोसर
भूदानमे Eा˜त जमीनक बँटबारा सेहो हुअए। भूदानकT यË •पमे xथािपत कएल गेल।
खेत ओहन स8पैत छी, जइमे एक धुर-आध-धुर लेल खून-खराबी, मािर-पीट गामे-गाम होइते आिब रहल छल। हजारो
मुकदमा जिहना कोट>मे फँसल छल तिहना हजारो भूिमहीन सेहो कानूनी िशकंजामे फँिस जहल जाइत-अबैत रहला।
ओना, गाम-गामक संग िजला आ रा”य xतरपर सेहो भूदान किमटी बनलछल, तैसंग सरकारी कायलय सेहो बनल, मुदा
जइ ढंगसँ भूदानी नारा छल तेकर ठीक िवपरीत ओकर कायaवयन हुअ लगल। लेन-देनक अ¶डा सरकािरयो कायलय आ
भूदािनयो किमटी बिन गेल। जेकर पिरणाम हुअ लगल जे एक-एक जमीनक सबूत [i] तीन-तीन, चािर-चािर आदमीकT भेटए
लगल। एक िदस जमीन देिनहार दाता अपन जमीन छोड़ए निह चाहै छल, तँ दोसर िदस Eा˜तकतक बीच सबूत लऽ कऽ
तेहेन ओझरी लािग गेलजे गामे-गाम लड़ाइ फँिस गेल।
भूदान किमटीक जे सदxय लोकैन छला ओहो आिगमे घी दइक काज करबे केलैन। ओना, गामे-गाम िकछु एहेन दाता
सेहो छेलाहे जे अपन देल जमीन, अपना िवचारसँ भूिमहीनकT सुपुदÆ केलैन आ अपने हाथे दखल-क¦जा सेहो करबा देलिखन।
मुदा एहेन लोक ए°ी-दु°ी भेला। गाम-समाजक जेहेन समxया जमीनक छल ओइ अनुपातमे पॉंच-दस Eितशत एहेन भेल।
छठम िहxसा, जमीनदान करैमे सेहो एक•पता निह रहल। हथ-उठाइ भीख जकp छठम िहxसाक जगह माM िकछु
जमीनक नाम-पMटा दऽ देलिखन। सेहो ओहन जमीन देलिखन जे उपजाउ भूिम निह छल। चौर-चpचर, परती-परpत जमीन
छल। ओना, गाम-गाममे गरीबकT माM जमीन उपजबैयेक समxया निह, बसो-बासक समxया सेहो छल। गामक चौथाइ आवादी
ओहन छल, जेकरा घर बaहैक अपन घरािरयो ने छेलइ।
गामे-गाम तँ निह, मुदा िकछु गाम िमला-िमला खादी भ{डार सेहो बनल। गाम-गामक समाजक िकछु जाित िवशेष ओहन
छल जे खादी कपड़ा बुनै छल। खादी भ{डार ओकरा क»चा माल [ii] दइ छेलै आ ओकरासँ बुनल कपड़ा कीनै छल।
ओना, कपड़ा बुनैक लूिर माM िकछु जाित-िवशेषकT छल, एकर [iii] समाजीकरण नइ भेल छल, जइसँ िकछु जाित-िवशेषक बीच

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उ^ोग सीिमत भऽ गेल। कपड़ा बनबैक जे क»चा माल छेलै ओ जाितक बaधन तोिड़ अिधकश जाितक बेवसाय ज•र बनल
छल, मुदा वएह बेवसाय आगू बिढ़ते कपड़ा बुनब समािजक बaधनमे फँिस गेल छल। तहूमे खास कऽ मुिxलम जाितक
बीच ‘जोलहा आ धुिनया’क बेवसाय बुझए जाए लगल। िहaदू-मुसलमानक बीच समाज बनले अिछ। िहaदू ऐ बेवसायकT निह
अपनौलक। मुसलमानोक बीच सैयो जाित अिछ। ओइ सैयो जाितमे माM दू जाित- जोलहा-धुिनयाक रोजगार माM बिन कऽ
रिह गेल। जोलहा-धुिनया सभ गाममे अिछसेहो बात निहयT अिछ। िकछु-िकछु खास गाममे अिछ। तहूमे पिरवारक संœयाक
िहसाबसँ सेहो ठेकान निहयT अिछ। जइसँ सभ गामक जोलहा-धुिनयाक बेवसायो निहयT बनल। जइ-जइ गामक जोलहा-
धुिनयाक रोजगार कपड़ा बुनब निह छल, ओ सभ अपन-अपन आन-आन रोजगार जीवकोपाज>न लेल करबे करै छल।
गाम-गामक खादी भ{डार भूदानी सबहक अ¶डा बिन गेल। माने ई जे भूदान किमटीक जे सदxय सभ छला, ओ सभ
खािदये भ{डारमे खाइ-पीबैसँ लऽ कऽ अपन डेरा रखै छला आ खािदये भ{डारक वxM सेहो Eा˜त करै छला। जइसँ
एकाएकी खादी भ{डार टुटए लगल, अaतो-अaत सभ टुिट गेल। गाम-गामक एकटा बेवसाय मिर गेल। खादी भ{डारकT टुटने
जिहना कपड़ा बुनकरक रोजगार गेल तिहना सूत कटिनहारक रोजगार सेहो मरबे कएल। एक तँ ओिहना गाम-गाममे
बेरोजगारी पसरल छल, तैपर एकटा आरो बिढ़ गेल। ओना, िमिथलचलमे अनेको साधन कल-कारखानाक लेल मौजूद अिछ
मुदा साधन रिहतो कल-कारखानाक अभाव रहबे कएल। ठाम-ठीम चीनीक िमलआ धानसँ चाउर बनबैक िमलटा माM छल।
ओना, लघु उ^ोगक •पमे सेरसो-तोरीसँ तेल बनबैक संग कुिशयारसँ गुड़ बनबैक हथकघ[iv ] •पमे सेहो छल, मुदा ओहो वृहत्
•पमे निह छल। चीनी िमल सेहो सालो भिर निहयT चलै छल, सालक माM छह मास चलै छल। छह मास ब± रहै
छल, जइसँ िमलमे काज करैबला vिमक सबहक बीच ईहो समxया[v] छेलैहे। ओना, कहैले बैसारीक समय vिमककT आधा
वेतन देल जाइ छेलै, मुदा ओहूमे अनेको •काबट छेलइ। ओहो िनयिमत •पसँ निहयT चलै छल।
गाम-गाममेनगदी खेतीक •पमे कुिशयारक फिसल छल, मुदा कुिशयारो तँ सभ खेतमे निहयT उपजैए। नीचरस
खेत, जइमे पािन बसैए तइमे कुिशयारक खेती निहयT होइए। कुिशयारक खेती-ले ऊँचरस जमीन चाही। जे सभ गाममे निहयT
अिछ। ओना, जैठाम-जैठाम चीनी िमल बैसौल गेल ओ कुिशयार उपजैबला जमीन देख-देख बैसौल गेल, मुदा िमलसँ दूर-दूर
हटलो गाम सबहक िकसान, नगदी खेती बुिझ कुिशयारक खेती थोड़-थाड़ करबे करै छला। गामक खेतसँ िमल तक
कुिशयार पहुँचबैक साधन रेलोक माल गाड़ी छल आ बैल गाड़ी सेहो छल। रेलक xटेशने-xटेशन िमलक राटन बनल छेलइ।
जैठाम इलाकाक िकसान बैलगाड़ीसँ कुिशयार पहुँचबै छला। ओना,कुिशयारक रेट िमलक जेते रहै छल तइमे ढुलाइ खच>
सेहो ओही मूcयमे कटौती होइ छेलै, जइसँ xथानीय िकसान आ दूरक िकसानक दरमे अaतर होइते छल। तहूमे नगद
कारोबार सेहो निहयT होइत छल।
कुिशयारोक खेती करैमे िकसानकT अनेको समxया छेलैaहे। एक तँ सीजनल फिसल रहने एकेबेर सभ िकसानक
कुिशयार तैयार होइ छेलैन, जे समयपर निह कटने वजनमे कमी अबै छल, तैसंग िमलक जेतेक Kमता, कुिशयार पेरैक छल
तेही अनुकूल कुिशयारक पुज[vi] भेटै छेलै जइसँ िकसानकT अबै-जाइक समxया छेलैaहे। तेकर पछाितयो नगदा-नगदी कारोबार
निहयT छल। मासक-मास,सालक-साल िकसानक कुिशयारक दाम पछुआइत छल, जइसँ कुिशयार उपजौला पछाितयो समयपर
िकसान अपन पाइसँ काज निह कऽ पबै छला। ओना, जइ िमलकT जेतेक कुिशयारसँ चीनी बनबैक Kमता छल, ओ ओतबे ने
पेरत। जँ िकसान बेसी खेती केलैन तँ ओिहना खेतमे रिह जाइ छेलैन, जइसँ खेती अनिबसबासू बनैत गेल आ िमलो ब±
हुअ लगल।
q
श¦द संœया : 911, ितिथ : 30 मई 2018
जारी....

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ejournal 'िवदेह ' २५७ म अंक ०१ िसत᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १२९ अंक २५७ )
मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA
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[i] कानूनी अिधकार
[ii] सूत
[iii] कपड़ा बनबैकT
[iv] िबनु इंिजनक
[v] माने छह मास बैसारीक समxया
[vi] राटनपर कुिशयार आबैक आदेश पM
आमक गाछी
आर8भ...
1.
बीस जून। ओना, बीस जून गोटे साल शु• जेठमे पड़ैए तँ गोटे साल उतार जेठमे, तैसंग कोनो-कोनो साल अखाढ़क
शु•मे सेहो पिड़ते अिछमुदा से निह, ऐ साल ‘बीस जून’ उतार जेठमे पड़ल। स˜ताहसँ बेसी बैरसाइत [i]कT सेहो भइये गेल
छल...।
बीघा भिरक देवचadक गाछी-कलममे तीनटा आमक गाछ भरखैर पकैत, बॉंकी सात-गाछमे गोिट-पëरा आ शेषमे कोनो-
कोनोमे बोनाइत तँ कोनो-कोनोमे अखन िख»चे सुआदक रंग पकड़ने। ओना, Eेमनगरक िकसान आन गामक िकसानसँ कनी
बुिधगरो आ vमगरो[ii] नइ छैथ सेहो केना नइ कहल जाए। Eेमनगरक चा•कातक जे गाम सभ अिछ, जेना-
रामपुर, कृÑणपुर, महमदपुर आ •dपुरइžयािदगामक िकसान सभ जे कलम-गाछी लगबै छैथ, तइमे कलमी आम हुअ िक
सरही, जामुन हुअ िक बैर, बेल हुअ िक बरहर,शीशो हुअ िक गमहाइर, सभ िकयो सहरगंजा रोपै छैथ, मुदा Eेमनगरक िकसान
सभ जे गाछी-कलम लगौने छैथ आिक लगबै छैथ ओ एकदम कतारबaदी •पमे। कतारबaदीक माने ई जे कलमी आमक
कलममे जिहना कलमी आम छोिड़दोसर ने कोनो आमे गाछ आ ने बेखे-बुिनयािदक। बेख-बुनायािद भेल लकड़ी उपयोगी वृK।
ओना, कलिमयो आम सइयो रंगक अपन गुण-धम>बला अिछए, तँए एक गुणक िमलान आ एक धम>क िमलान ओहूमे बेसी नीक
होइत अिछ। िकएक तँ ओकर सभ िकछु एक •पे चलैए आ से नइ रहने जिहना बहुधम¸कT एकठाम भेने होइए तिहना केतौ
नहाइकाल झगड़ा तँ केतौ खाइकाल झगड़ा, केतौ चाहक झगड़ा तँ केतौ अनचाहक झगड़ा होइतो अिछ आ अरबेधलो रिहते
अिछ। अरबेधब भेल- आिगयो आ खढ़-पातसँ लऽ कऽ ठहुरी-चेरा धिरक सुखाएल जरनोकT एकठाम रािख देब, भलT िकए ने
कनी-कनी हटाइये कऽ रखलॱ आ पूरबा-पछबा हवामे ऊिड़-पुिर एकठाम भऽ सुनैग कऽ पजैर जाइते अिछ।
खाएर.., Eेमनगरक िकसान vेR िकसान छिथयो आ मानलो जाइते छैथ। इलाकामे जखन कखनो आमक गाछी-कलम वा
बेख-बुिनयािदक चच> केतौ होइए तँ Eेमनगरक चच> जिहना होइए तिहना रामपुरोक चच> होइते अिछ मुदा से Eेमनगरक िवपरीत
िदशामे। िवपरीत िदशा भेल- जिहना भगवान रामक नाम शुभ रिहतो गaदा-सँ-गaदा वxतु देख ‘राम-राम’ किह गबाही रिख दइ
िछऐन, जिहना मृžयुक बिरयातीमे ‘राम-नाम सत् छी’ कहैत असमसानक पार लगबै छी तिहना ने जुआन-जहानक बिरयातीमे

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ejournal 'िवदेह ' २५७ म अंक ०१ िसत᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १२९ अंक २५७ )
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रसगुcला खाइत-खाइत राम-धाम सेहो पार लगबैबते छी। खाएर जे छी से छी, सभ नीके छी आ सभ अधले छीमुदा सभ
िकयो तँ छीहे िकने।
पनरह जूनकT कौलेजमे गरमी छु¬ी भेल, ओना िकछु गोरे एकरा ‘अमैया छु¬ी’ आ िकछु गोरे ‘šीÑमावकाश’ सेहो किहते
छैथ मुदा जाए िदयौ ऐ बातकT, बात तँ बाते छी, अपना मनक मौजी बहुकT कहलॱ भौजीआ लोको लग अपन िनल>जताक नाच
नचैत रहलॱ। भाय,पÏी पÏी छैथ िकने, ओ तँ जिहना जीवन संिगनी भेली, अ„Êिगनी भेली तिहनाEेिमका सेहो भेबे केली, मुदा
तैठाम जँ िकयो िदन-राित टी.भी.मे खेले वा िसनेमे देखती तँ देखौथ आ अपन कम>क समय िवधाताक हाथमे दऽ दौथ..!
गरमी छु¬ी होइते धीरेad सोझे गाम आिब गेल। बीस जूनकT जगमोही सेहो आम खाइक बह±े अपन मातृक पहुँचल।
धीरेad आ जगमोही पटनेमे रिह पटने कौलेजमे बी.ए. फाइनल इयरमे पिढ़तो अिछ आ ए°े िवषय दुनूक रहने संग-संग
िकलासोमे आ Ìयूटोिरयलमे सेहो एक-दोसरकT देखतो अिछए। मुदा जिहना जेनरल लासमे तिहना Ìयूटोिरयल लासमे सेहो
दुनूक बैइसैक Ø¥च अलग-अगल अिछए। जइसँ लगक गपो-स˜प किहयो िकए हएत। ओना, अखन तक ने धीरेad अपन
अंगीत जगमोहीकT बुझैत आ ने जगमोहीए धीरेadकT बुझैए। तेहेन जुग-जमाना आिब गेल अिछ जे ने िकयो नामक टाइिटलसँ
केकरो परेख सकैए आ ने जाित-पpिजसँ, केकरा एते छु¬ी छै जे अनेरेक रमझौआमे लागल रहत। नव पीढ़ीक लोक खेलाड़ी
आ िसनेमा-कलाकार सबहक नामधुन करत आिक अपन बाप-पु³खाक..! कोन मतलब ओकरा छै जे अपन बाप-पु³खाक वंश
आ जीवनकT िबिटया अपन वंशक इितहासक संग देश-दुिनयpक इितहासकT बुझत। मुदा ईहो तँ बात सबहक सोझेमे अिछ जे
जे जेते िजनगीक रस पीबए चाहैए ओ ओते बेचैन सेहो भेले जाइए।
ओना, समाजशाxM िवषयक जेनरल लासमे पचाससँ ऊपर िव^ाथ¸ अिछ, मुदा शिनयT-शिन जे Ìयूटोिरयल लास चलैए
ओ उनटा पाठक, तँए ओ लास माM पान-सातटा िव^ाथ¸ करैए बॉंकी अिधकश मैिटनी शो िसनेमा देखैए वा िकछु गोरे घुिम-
िफर शहरे-बजार देखैए। मैिटनी शो िसनेमा देखैक कारण िटकटक कaशेसन सेहो अिछए। उनटा पाठ जे Ìयूटोिरयल
लासमे होइए ओ ई होइए जे आन िदन– माने सोमसँ शु¡ धिर िशKक जे पढ़बै छैथ ओकर उ“र ओइ लासमे िव^ाथ¸सँ
लेल जाइए। आइक पिरवेशमे–माने िशKण संxथानक पिरवेशमे, Ìयूटोिरयल लासक नामो भिरसक छाM सभ नइ बुझैत हएत–
जखन कौलेजमे पढ़ाइये निह भऽ रहल अिछ तखन ओकर उ“र की भेटत।
Ìयूटोिरयल लासक पान-सातटा िव^ाथ¸मे जिहना धीरेadक तिहना जगमोहीक उपिxथित अिनवाय> •पसँ रहैए। बॉंकी
पान-सातक बीच नव-पुरान होइत रहैए। सभ िशKकक अलग-अलग स˜ताहमे Ìयूटोिरयल लास होइ छैन, तँए ऐ बातकT
िशKक सभ निह बुिझ पबै छैथ। ओना, छाMो सभमे िकछु गोरेक स8बaध िशKको सभ संग छैaहे, तँए अपन-अपन
Ìयूटोिरयलमे अपन-अपन पिरिचत छाM रिहते छैन जइसँ नव-पुरान हएब सोभािवके अिछ। जिहना धीरेad अपनाकT ओते
स°त बना लास पहुँचै छल जे जे िकछु िशKक पुछतातइमे जे पढ़ौने छैथ ओकर अितिरत अपनो िवचार राखब, तिहना
जगमोही सेहो अपन तैयारीक संग लास पहुँचै छल। ओना,Ìयूटोिरयल लासमे कम िव^ाथ¸ रहने आगूक जे दुनू Ø¥च बैसैक
अिछ, तहीपर दिहना भागक Ø¥चपर धीरेad बैसैत आ बामा भागक Ø¥चपर जगमोही। समयक िमलानी दुनूकT रxतोक िमलानी
करबैत आ Ìयूटोिरयल लासक सेहो। माने भेल एक गाड़ी पकड़ैले जिहना दूटा याMी अपन िनधिरत समयपर घरसँ िवदा
होइ छैथ जइसँ रxतामे गप-स˜प भलT निहयì होइत हौनु मुदा मुँह-िमलानी तँ होइते छैन। कहैकालमे भलT सभ किह दइ िछऐ
जे शरीरक पpच इadीमे जिहना मुँह भेल, आँिख भेल तिहना कानो भेल। मुदा की तीनूक जीवन ि¡या ए°ेरंग अिछ? मुँहमे
मुंगबाक सुआदसँ लऽ कऽ तेतैरक खट-मीठ आ नीमक तीतपन तकक रस भेटते अिछ, जखन िक आँिख सोझे देखैबला
भेल। नीक-सँ-नीक आ अधला-सँ-अधला देख-देख ऑंिख कखनो कािन-कािन नोरो चुबबैए तँ कखनो िमरचाइक कड़ुपनसँ
पािनयì तँ बहैबते अिछ। मुदा कान तँ काने छी, खा-पीब कऽ रस चुसैक कोन बात जे आँिख जकp ने देिखये सकैए आ ने
मुँह जकॉं सुआदे पािब सकैए, लऽ दऽ कऽ हवामे उड़ल नीक-बेजाएकT खाली सुिनटा सकैए। जइसँ, जिहना बिहरा अपने ताले
नचैए तिहना नाच करत। मुदा ऐ सभसँ कोन मतलब धीरेadेकT आिक जगमोहीए-कT छइ। दुनू गोरे कौलेजमे पढ़ैए, कौलेिजया
संगी किहयौ आिक लासक संगी,एक-दोसरक छी। अåारह बख>क उमेर सेहो दुनू टिपये गेल अिछ, िकए ने खुिल कऽ
खेलाएत। मुदा से निह, दुनू अपन-अपन सीमाक बीच अनुबaध अिछ। ओना, दुनूक EÁो“र दुनू तँ सुिनते अिछ, तैसंग िशKक

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सेहो Ìयूटोिरयल लासमे सुनै छिथन जइसँ एक-दोसरक अÍययनक गहराइ सेहो एक-दोसर बुिझये रहल अिछ।
ओना, लासमे िशKक िनधिरत पाíय¡ममे जे पोथी िनधिरत अिछ ओकरे आधार बना पढ़बै छैथ मुदा िशKको तँ िशKके ने
भेला। िकयो जेतबो िसलेबशमे अिछ तेतबो ने पढ़बै छैथ आ िकयो िकयो एहनो तँ छिथए जे ओिरकासँ घी परसै
छैथ। ‘ओिरकासँ घी परसब’क माने भेल िसलेबशसँ अितिरतो पढ़ाएब, हुनका कोन मतलब छैन जे दािलक सुआद रहल िक
मेटाएल। ओ तँ िसलेबशक कोन बात जे दुिनयॉंक िसलेबश आगूमे रिखये दइ छैथ। िशKकेक अनुकरण ने िशKाथ¸ करत।
ओहो ने वएह बुझत। भलT िकए ने ओ िशKकक पठनकT िनिण>त करए जे जिहना िशKक जुग-îÇा छैथ तिहना जुग-dÇो तँ
होइते छैथ। तँए िशKािथ>योकT तिहना ने िजनगीक बाट भेटत।
ओना, िशKको अपन िसखपनसँ सीिखये नेने छैथ जे Ìयूटोिरयल लासमे अनेरे जे माथक बोझ बढ़ाएब (माथक बोझ
बढ़ाएब भेल- एक-एक छाMसँ EÁ पुछब) तइसँ नीक जे प«तालीस िमनटक घaटीमे दस िमनट रीब-रीबेमे गेलबँचल प«तीस
िमनट, से निह तँ एक-एक छाM-छाMासँ EÁ पुिछ समय ससािर लेब। जे लाभ धीरेadोकT आ जगमोहीकT सेहो भेिटये जाए।
जिहना कहल जाइए जे करत-करत अºयाससँ जड़-मूढ़ सेहो सुजान भइये जाइए। मनुख तँ सहजे मनुख छी, अ±-खाइबला
आ पािन पीबैबला। घोड़ा घास खाइए तखन तँ एते िहिहआइए, मनुख तँ सहजे मनुख छी जेकर सभ जीव-जaतुसँ अितिरत
गुण भेल हँसब।
Ìयूटोिरयल लासक िशKक भेला EÁक“, धीरेad आ जगमोही भेल उ“र देिनहार। बpकी सभ िशKकोक भाषण आ
िव^ािथ>योक ‘उ“र-भाषण’ सुनिनहार भेल। तँए खुलल वा झpपल भेल िनण>यक“। िकए अनेरे कोनो पKमे ठाढ़ हएत। िकए
ओ EÁक“ EÁ अëेजत आ िकए ओकर जवाबदेह बनत। सभ ने सुिवधानुसार जीबए चाहैए। जखन अवसर भेटल तखन
वएह सभ िकए छोिड़ देत। अपन उ“रमे जिहना िशKकक भाषण िसलेबशकT अित¡मण करै छेलैन तिहना धीरेadो आ
जगमोहीओ उ“र दइते छल। तेकरा िशKक लोकैन, Ìयूटोिरयल लासक िवषय किह परीKामे िलखैसँ परहेज करैक सलाह
दुनूकT दैत लास अaत करै छला।
दुिनयpमे Eेमोक अपन रंग-•प छइ। सात अरब लोकमे जगमोहीक जेहेन •प धीरेad देख रहल छल ओहन •प
धीरेadक जगमोही निह देख पेब रहल छल। दुनूक अपन-अपन नजिरयो आ दृिÇकोणो छेलैहे। मुदा Ìयूटोिरयल लासक जे
िसख (अÍययन) छल ओ दुनूकT ज•र नव िसखपन (अÍययनशीलता) िदस बढ़ौलक, जइसँ एक-दोसरक बीच, िभ± दृिÇ
रिहतो आकिष>त करबे करै छल।
ओना, आकष>णोक अपन गुण-धम> अिछ। कोनो आकष>ण ओहन होइए जइमे िवकष>णो समान •पमे संगे चलैए आ कोनो
एहनो आकष>ण अिछए जइमे िवकष>णक माMा कम रहने हेराएल-हेराएल सन रहैए। जइसँ आकष>णे-आकष>ण बुिझ पड़ैए।
तिहना िवकष>णोक तँ छइहे जे बेसी माMामे भेने आकष>णकT दािब दइए। जखन लोहा सन िनज¸व धातुक चु8बकीय आकष>ण
ओहन होइए जे अपना सन-सन भतलोहोकT अपना संगमे रंिग अपन गुण-धम>सँ भिरये दइए। भलT ओ ओतबेकालक िकए ने
होउजेतेकाल चुमकलोहमे सिट अपनो चु8बकžवमे िकए ने बदैल गेल हुअए। खाएर जेतए जे होइ से तेतए हुअए। अजगर
सन सpपो जखन अपन नजैरक कनखी आ मुँहक सूसकारीसँ आन सpपकT लगमे आिन भKे िकए ने कऽ लैत हुअए मुदा
तइसँ कोन मतलब धीरेadकT आिक जगमोहीएकT अिछ। अखन तँ िजनगीक एको टपान दुनूमे सँ एको ने टिप सकल
अिछ, तखन िजनगीक टपानक बाते केना बुझत।
जिहना धीरेadक मनमे जगमोहीक Eित िजËासा जागल तिहना जगमोहीकT सेहो धीरेadक Eित जागल। एक रxताक
राही–माने एक िवषयक िव^ाथ¸–भेने दुनूक मनमे एते तँ िजËासा जिगये चुकल अिछ जे जखन दुनू गोरे एक कौलेजक एक
लासमे पढ़ै छी तखन बुिधयो-Ëान ने एकरंग हुअए। एकर माने ईहो निह जे आनसँ बेसी नइ हुअए, आ ने यएह माने हएत
जे आनसँ क8मो नइ हुअए। एक xथानक याMीक बीच एहेन कोनो सीमा थोड़े अिछ जे सभकT ए°ेरंग चलए पड़त।
कौलेजोमे तँ तिहना होइते छै जे िकयो Eथम vेणीमे उतीण> होइए, िकयो दोसर vेणीमे आ िकयो तेसर vेणीमे। मुदा िजनगीक
अÍयेता अपन िजनगीक अÍयाय ओहीठामसँ शु• करैक चेÇा करै छैथ जैठाम मजगूत नीवक ज•रत अिछ। औझुके नीवपर

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ने कािä ठाढ़ हएत। तँए, भिवसवे“ा भलT जे हुअए मुदा भिवसक िनमता नइ छी सेहो केना नइ कहल जाएत। औझुके
रोपल गाछ ने कािä फल देत।
धीरेadो आ जगमोहीयो एक-दोसरक जीवन पिरचय गु˜त •पसँ भॉंज लगबए लगल। मुदा दुनूक Eितबिaधत
बाट, Eितबिaधत ऐ मानेमे जे जानकारी पबैमे कहॴ सीमोलंघन ने भऽ जाए, नइ तँ जगहँसी हएत। एक तँ पटनामे ने धीरेadकT
बेसी िचaह-पहचीनक लोक आ ने जगमोहीएकT। ओना, कौलेजो आ हाइयो xकूल, सइयो-हजारो अपिरिचत चेहराक पिरिचत
करबैक गड़ छीहे, मुदा पिरचय-पात करैक जगह तँ छी निह, छी तँ पढ़ै-िलखैक जगह। जेकर अपन िनधिरत सीमा-सरहद
अिछ। तँए, एक िसमानक बीच रिह िकयो अपनाकT पार-घाट लगैबतो अिछ आ लगबौ चाहैए।
धीरेadकT िपता-पुMक बीच जे सीमा अिछ तइमे जिहना िपता जीबेad छिथन तिहना पुM धीरेadो अिछ। माने ई जे
अनेको ि¡या-कलापक बीच िपता-पुMक जीवन अिछए। मुदा अखन से निह। अखन एतबे जे जेतेक उिचत खच> िव^ाथ¸क
छल ओ धीरेad जिहना िनमािह रहल अिछ तिहना जीबेad सेहो अपन पुMक िहसाबसँ अपन माहवारी खचÆ आ xवतंMतो देब
िनमािह रहल छैथ। मुदा ऐ सीमाक बीच धीरेad अपन कोस>क िकताब िसलेबशक अनुसार िपताक पाइसँ कीिन नेने छल मुदा
िशKकक मुहसँ अनेको अaय िकताबक नाओं सुिन मन तँ उछटबे कएल। जइसँ धीरेad Eितिदन एक घaटा कौलेजक रीिडंग
•ममे बैस नव-नव पोथी पढ़ैत रहल अिछ। कौलेजक रीिडंग •म, पुxतकालय आ कायलय तीनू कोठरी ए°े मकानमे जुड़ल
अिछ। तीनूक बीचक देवालमे शीशा लागल अिछ जइसँ एक दोसर कोठरीकT नीक जकॉं देखल जाइए।
धीरेad रीिडंग •ममे कुस¸पर बैस टेबुलपर तीन-चािरटा िकताब रिख एकटाकT उनटा रहल छल, तहीकाल जगमोही
पुxतकालयक पैछला िकताब जमा करैत ऐगला लइले आलमारी देखए लगल। ओना, पुxतकालयक सभ पोथी रिजÇरमे
अंिकत ऐछे मुदा ओ दोसर िव^ाथ¸ देख रहल छल।
नमगर-चौड़गर रीिडंग •मक कोठरी, दज>नो आलमारी िकताबसँ सजल अिछए। एकसँ दू आलमारी Eित िवषयक
िकताबसँ सजौल फुटा-फुटा लगौल अिछ। बीचमे बइसैले कुरसीक संग टेबुल सेहो लगले अिछ। जइसँ िबनु बँटवारा केनहुँ
बैइसैक जगह बँटाइये गेल अिछ। माने ई जे आलमारीक लगेमे िकयो बैस कऽ पढ़बकT नीक बुझबे करैए। धीरेad अपन
समयानुसार रीिडंग •ममे िकताब सभ टेबुलपर रिख कलमसँ कॉपीमे िलख पुन: िकताब उनटबैत रहए। पुxतकालयक
आलमारीमे जगमोही िकताब खोिज रहल छल। पुxतकालयो आ रीिडंगो •मक आलमारी हाथ-हाथ भिरक दूरीमे सजल अिछ।
पुxतकालयक दुनू आलमारी खोिल जगमोही िकताब खोिज रहल छल आ दोसर िदस धीरेad दुनू आलमारी खोिल िकताब
िनकािल टेबुल सजौने छल।
दू आलमारीक बीचक जे जगह अिछ ओइ बीच होइत जगमोही धीरेadकT देख रहल छल। तही बीच पुxतकालयक
िकछु िकताब गड़बड़ भऽ गेल रहै तेकर कहाकही ऑिफसमे उठल। मुदा िकताब तँ िकताब छी, आिगयोमे जरैबला, पािनयोमे
गलैबला आ िदबारो-िद8मककT खाइबला, तैठाम अनेरेक ने कहा-कही भेल। खाएर.., जेकरा माए-बाप जaम दइए से तँ माए-
बापकT िबसैर जाइए, ई तँकौलेजक पुxतकालयक िकताब छी, एकर के माए-बाप छै! अनेरे के एते आलमारीकT उधेसत।
ओना, देवालक बीच शीशा लगल रहने जिहना जगमोही पुxतकालयमे ब± अिछ तिहना रीिडंग •पमे धीरेadो ब±े अिछ मुदा
देख रहल छल दुनू एक-दोसरकT।
ओना, अखन तकक तरपेसकी जानकारीमे जिहना जगमोही अपन मामा गामक धीरेadकT बुझैत तिहना धीरेadो अपना
गामक भिगनी जगमोहीकT बुझैत। मुदा अखन धिर एको िदन बात-चीत निह भेल।
पुxतकालयक कायलयमे कहा-कही भेने सबहक िधयान ओइ िदस भेल आ जगमोहीक िधयान धीरेad िदस भेल।
शु•मे जगमोही मोट-मोट िकताब धीरेadक टेबुलपर राखल देख थोड़ेक सहमल ज•र मुदा एते तँ आžम-शित जिगये गेल
छेलै जे धीरेad मामा गामक छी। चाहे तँ नाना दािखलमे हुअए वा मामा दािखलमे वा भाइक दािखलमे, मुदा अंगीत तँ छीहे।
जँ सेहो नइ छी तैयो एक कौलेजक एक लासक आ एक िवषयक संगी तँ भेबे कएल। जखन ए°े िवषयक संगी छी तखन
जीवनक ि¡यो-कलाप तँ ए°ेरंग ने हएत। केना कोयलाखानक vिमक अपनाकT लेबर लास किह एकठाम बैसार-उसार
करैए। केना खेतक धान रोपिनहार धनरोपिनया कहबैए। कहॉं केतौ मद>-औरतक भेद छइ। एक िदस मातृकक

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स8बaध, दोसर िदस कौलेजक स8बaध अिछए, तैसंग एक उमेरक िसयान सेहो दुनू गोरे छीहे। तखन गप-स˜प करैमे बाधा
की? चोरनुकबा Eेममे कोनो दम होइए, ओ तँ चोर सबहक ि¡या भेल। Eेम तँ साव>भॱम अिछ।िवचारक Eेम, बेवहारक
Eेम, िजनगी जीबैक Eेमइžयािद, जे लोकचोरा-नुका कऽ िकए करत।
दू आलमारीक बीचक रxता देने शीशाक देवाल पार करैत जगमोही धीरेadक अनुकरण करए लगल। धीरेad जिहना
िकताबमे ऑंिख गािड़, समुdी हीरा जकॉं पpित खोिज कॉपीमे नोट कए रहल छल, तेकर हू-ब-हू फोटोšाफी जगमोही अपन
बुिधक डायरीमे उतारए लगल। दस िमनटक फोटोšाफीक रील जगमोही मनमे गिढ़ नेने छल।
संजोग भेल, पॉंच बािज गेल। आब सभ िकछु बaद हएत। जगमोहीकT दूटा िकताब लेबाक छेलै जे इसू करा चुकल
छल। धीरेad आलमारीमे िकताब रिख कॉपी नेने बाहर िनकलल। ओना, लोको पतराएले छलइ। माM दू गोरे कौलेजक xटाफ
आ चािर-पॉंचटा िव^ाथ¸ अिछ। पुxतकालयक सीढ़ीसँ िन»चp उतैरते जिहना धीरेadक नजैर िखर जगमोहीपर िछछलल तिहना
जगमोहीक नजैर सेहो धीरेadपर िछछलए लगल। ओना, दुनूकT अपन-अपन नैितक अनुशासनक िवचार मनमे दौिड़ये रहल
छल। अही गुन-धुनमे दुनू िबना िकछु बजने-भुकने कौलेजक अिaतम गेट लग पहुँच गेल। चौब¬ी जगह, तँए के िकमहर
जाएत तेकर जानकारी दुनूकT अपन-अपन।
ओना, एहेन कोनो Eितकूल मौसम निहयT अिछ जे दुनूक बीच गप-स˜प नइ भऽ सकैए।मुदा šामीण पिरवेशक उपज
दुनू, माने दुनूक जaम गाम देहातमेभेनेदुनूक मनमे गाम गमैया स8बaध सेहो बिनयT गेल अिछ। तँए दुनूक बीच िकछु ओझरौठ
अिछए। जे ने जगमोही बुिझ सकल अिछ जे धीरेadक संग कोन तरहक स8बaध मािन बाजल जाए, आ ने धीरेadे से बुिझ
रहल अिछ। तैसंग दुनूक मनमे ईहो बेवधान छैहे जे अपनासँ उमेरमे जेठ मानल जाए वा छोट। तेकर कारण दुनूक अपन-
अपन अिछ। धीरेadक मनमे नचै छै- जखन दुनू गोरे कौलेजक एक लासमे पढ़ै छीतखन ई मािन लेब जे जगमोहीक उƒ
हमरासँ कम हेतैई तँ बालबोधक िवचार भेल! िकएक तँ जेतेक समय हमरा ‘अ-आ’ सँ अबैमे अखन धिर लागल तेते तँ
जगमोहीकT सेहो लगल हेबे करत, तखन छोट मानल जाए वा पैघ? आइ जँ कौलेजमे एको लास आगू-पाछू रिहतॱ तखन तँ
एकटा देखौआ सीमा भेटैत, जिहना कोनो गामक जमीनक नापी लेल पैछला सवµक कोनो पहचान भेटला बाद अमीनकT कोनो
खेतक आिड़-मेड़ बनबैमे असान होइए तिहना। मुदा धीरेadक मनमे एकटा िवचार उठल। उठल ई जे जइ गाममे बािढ़क
कारणे वा भुमकमक कारणे िसमानक पहचान मेटा गेल रहैए तँ ओइ सीमाकT पकड़ै तँ दोसर गामक िसमानक सहारा लेले
जाइए।
जगहमोही जखन अपन पैछला इितहास िदस नजैर िखरौलक तँ साफ-साफ देखए लगल जे जिहया पॉंच बख>क रही
तिहये बाबा लोअर Eाइमरी xकूलमे नाओं िलखा देलैन, तिहयासँ ने किहयो फेल केलॱ आ ने कोनो लासे फािन कऽ
टपलॱ।मनमे उठलै- तिहना ने धीरेadोकT भेल हएत। बीचमे मातृकक स8बaध सेहो अिछ, जँ नानाक स8बaधमे हएत आ तखन
जँ भैयारीक स8बaधे बाजबईहो तँ नीक निहयT हएत। आ तहूमे जँमाए बुझती तखन तँ ओहो गनजन करबे करती..!
ओना, धीरेadोक मन सकताइये रहल छल जे अनजान-सुनजान महाकcयाण। गप-स˜पक पछाइत जखन स8बaधक
असल पिरचय हएत तखन अपन िवचारकT सुधािर लेब। तिहना जगमोहीक मन सेहो रसे-रसे ओहन सीमापर पहुँच गेल। तँए
दुनूकT मुँह खोलैक अनुकूल मौसम बिन गेल। एक तँ ओहुना जखन संगे-संग पढ़ै छी तखन बजा-भुकी करैमे कोन एहेन
पहाड़े आिक समुdे बीचमे बाधक अिछ।
गेटपर पहुँच धीरेad जगमोही िदस तकलक। ओना, जगमोही सेहो धीरेadे िदस तािक रहल छल।दुनूक ऑंिख मीिल
गेल। ऑंिख िमिलते दुनूक मुँह टुिxकयाएल। जिहना प“ा-कलश वा फूल-फलक टुसी चिलते अपन सुगaध िनकालए लगैए
तिहना दुनूक मनसँ िनकलए लगल...। जगमोही बाजल-
“डेरा केतए रखने छी?”
जिहना जगमोही बाजल तिहना धीरेad उ“र देलक-
“ऐठामसँ साए मीटर हएत।”

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धीरेadक बात सुिन जगमोही घड़ी देखलक। पॉंच बािज कऽ पॉंच िमनट भेल छेलइ। मने-मन अपन समयक अँटकार
लगौलक तँ बुिझ पड़लै आधा घaटा समय बीचमे खाली अिछ। जगमोहीक ऐगला समयक सीमा िनधिरत छेलै, िकएक तँ
सिचवालयमे जगमोहीक िपता- गोिवaद काय>रत छिथन जे िनžय छअ-पौने छअ बजे तक डेरा अबै छिथन। िपताजीकT अबैसँ
पिहनिह जगमोही अपन कौलेजक काज िनवटा डेरा पहुँच जाइए। तैबीच जगमोहीक माइयो बजारक काज कऽ आिब जाइ
छिथन।
जगमोही बाजल-
“रxते-रxते चिल कऽ अपन डेरा देखा िदअ। दोसर िदन समय पेलापर आगूक िकछु गप-स˜प करब।”
सोäोअना जगमोहीक बात निह सुिन धीरेad िब»चेमे बाजल-
“चलू, संगे-संग चलबो क• आ अहॉं अपनो डेराक जानकारी िदअ।”
साइए मीटरपर धीरेadक डेरा, गपे-स˜पमे दुनू गोरे पहुँच गेल। डेरा लग ठाढ़ होइत धीरेad असमंजसमे पिड़ गेल।
असमंजस ई जे शहर-बजार छी। ऐठाम सभ तरहक Eितयोिगता अिछ! मुदा लगले मनमे उिठ गेलै जे अखन िव^ाथ¸ जीवनमे
छी, तँए अखन व“>मानक िवचार करब अिछ निह िक भिवसक। धीरेad बाजल-
“डेरामे चाह-ताह तँ नइ बनबै छी मुदा जलखैक ओिरयान तँ रिहते अिछ, चलू पिहने जलखै कऽ लेबतखन जाएब।”
ओना, दुनूक मन गवाही दइते रहै जे कौलेजसँ लऽ कऽ गाम धिरक स8बaध अिछए, तखन खेबे-पीबेमे कोन हज>...।
जगमोही बाजल-
“डेरा तँ भीतर जा कऽ देख लेब मुदा जलखै नइ करब। बेसीसँ बेसी एक िगलास पािन पीब लेब।”
दुनू गोरे कोठरीमे पहुँचल। कोठरीमे कुरसी निह, छोट-Kीण कोठरीमे धीरेadक पूण> िजनगी समटल अिछ। ए°े
चौकीपर बैस धीरेad बाजल-
“गाममे ऐबेर आम खूब फड़ल अिछ, अमैया छु¬ी हेबे करत...।”
जगमोही बाजल-
“अहॉंक घर Eेमनगर छी आ हमरो...।”
‘हमरो’ सँ आगp निह बिढ़ जगमोही चुप भऽ गेल।
अपन गामक नाओं सुिन धीरेad बाजल-
“अहूँक मातृक तँ Eेमनगरे ने छी?”
जगमोही-
“आइ एतबेपर रहए िदयौ। पनरह जूनसँ अमैया छु¬ी भऽ रहल अिछ, माइयो नैहर जेती, हुनके संग बीस जूनकT
अहॉंक गाम पहुँच जाएब।”
मुxकी दैत धीरेad बाजल-
“हमरा गाम पहुँचब आिक अपन मातृक?”
जगमोही-
“अहॉं जे बुिझऐ...।”
q
श¦द संœया : 3068, ितिथ : 10 अगxत 2018

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जारी....

[i] बटसािवMी
[ii] मेहनत करैबला


जगदीश Eसाद म{डल
दूटा लघुकथा
िकयो ने पुछैए
एकतीस साल नोकरी केलाक बाद रामानaद भाय घुिम कऽ गाम एला। एकतीस सालक बीच ए.एस.पी. सँ लऽ कऽ चािर मास आइ.जी.क पद सेहो
सुशोिभत केने छला। तैबीच ऑिफसक कम>चारी ज•र बुझैन जे िखिशयाह अफसर छैथ तँए काजमे कोताही केने िबगड़बो करता आ भऽ सकैए जे लाल कलम
चला देता तँ नोकिरयोमे जड़ब हेबे करत। िकछु गोरे इमानदार सेहो बुिझते छेलैन। पचीस िदस8बरकT रामानaद भाय सेवा िनवृ“ भेला आ अपन प¥शनक सभ काज
स8हािर दस जनवरीकT डेराक सभ वxतु जात नेने पÏीक संग गाम आिब गेला। तेसर िदन माने बारह जनवरीकT, िभनसुरका चाह पीब रामानaद भाय अपन
ऐगला[i] िजनगीक िवषयमे गौर करए लगला। तही बीच पÏी- सुलेखा सेहो कोठरीसँ िनकैल दरब”जापर पहुँचली। पÏीपर नजैर पिड़ते रामानaद भाय बजला-
“गामक िकयो ने पूछ करैए..!”
ओना, सुलेखाक जे बीतल िजनगी छेलैन ओ तँ अफसर पिरवारक रहैन तँए कोनो बात वा कोनो बेवहारकT देखै-बुझैक तरीका अ˜पन बिन गेल छेलैन। जइ
अनुकूल ओ बजली-
“अखन दुइये िदन एना भेल अिछ तइमे केना ई बुिझ गेिलऐ?”
अपन समझसँ सुलेखा बाजल छेली, मुदा सेवा िनवृि“सँ पूव>क िवचार िजनगीक अनुकूल जिहना रहैए तिहना सेवा िनवृि“क पछाइत मृžयुक स8भावनासँ
Eभािवत भेने जीवन-मृžयुक बीचक स8भावनाक सं¡मण भेने अनुकूल िवचार सेहो Eभािवत होइते अिछ। जइसँ िवचारमे िकछु-ने-िकछु सं¡मण होइते अिछ। हेबो
केना ने करत, जीता-िजनगी लोक दोसरक सहारा बनैए आ मृžयुक आगमन देख लोक दोसराक सहारा चािहते अिछ। तँए रामानaद भाइक िवचार पÏीक िवचारसँ
सहमेलू निह भऽ सहखेलू जकpबुिझ पड़लैन। मुदा समxया िकछु हुअ आिक केहनो हुअ ओ तँ समxयाšxत लोककT भोगै-िवचारै पड़ैए।
रामानaद भायकT पÏीक िवचारमे जे आसरस भेटक चाही से नइ भेटने मन थोड़ेक िनरस जकp भइये गेलैन। मुदा जे िवचार रामानaद भाइक मनमे पनैप
गेल छेलैन ओकर प¥पीकT ओतै रोिक, मनकT दोसर िदस बहटारैत बजला-
“जइ िदन गामसँ नोकरी करए िवदा भेल रही ओ िदन आ आइ जखन नोकरी छुटला पछाइत गाम एलॱ हेन तइमे केतेक अaतर आिब गेल अिछ से
अनुमान करै िछऐ?”
पितक बात सुिन सुलेखा थोड़ेक िसरिसरेली ज•र मुदा िकछु लोकक एहेन सोभाव होइते अिछ जे जिहना खुशी रहलापर बोली-वाणीकxवर रहल तिहना
नाखुशी भेलापर सेहो ओिहना रहल। सुलेखो तिहना अपन मुँह ब± कऽ लेली, िकछु बजली निह। भऽ सकैए जे मने-मन गुड़-चाउर फpकए लगल होइथ।
ल×मणपुर गाममे पिहल-पिहल आइ.पी.एस. रामानaद भाय भेला। ओना, पढ़ै-िलखैक िखयालसँ ल×मणपुर बहुत पछुआएल अिछ। सोäोअना िबनु पढ़ल-िलखल
गाम निहयT अिछ मुदा जनसंœयाक चौथाइयोसँ कम ज•रे अिछ। पनरह-सँ-बीस Eितशत साKर पु³ख वग> आ दू-सँ-पpच Eितशत मिहला वग> साKर अिछ। रामानaद
भाय िव^ाथ¸ए जीवनमे ल×मणपुरक वातावरणसँ अलग भऽ मािMकक वातावरणमे जा पढ़ला, बढ़ला आ पालल-पोसल गेला, जैठाम पढ़ाइ-िलखाइक औसत अिधक अिछ
आ तहूमे खासकए रामानaद भाइक मामा-नानाक पिरवार तँ आरो बेसी अगुआएल छेलैन। रामानaद भाइक मामाक पिरवारमे ई सातम पीढ़ी चिल रहल छैन जे पढ़ै-
िलखैक धारासँ नीक जकp जुड़ल अिछ। माने अKर-बोध आ अÍययन बोधक सातम पीढ़ीक न8बरपर रामानaद भाइक मामा सभ भेलिखन। मामक चािर भpइक
भैयारी छैन। जे चा• चािर िदशाक अÍययेता। िकएक तँ हुनक िपता- रघुनaदन बाबाक अपन खास सोच रहैन। रघुनaदन बाबाक अपन खास सोच पिरवारक
िखयालसँ रहल होिन वा समाजक ज•रतक िखयालसँ जे चा• बेटा– •पलाल, भूपलाल, दुखलाल आ सुखलाल–कT चािर िदशाक अÍययन िदस झुकौलैन, जइसँ

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एकटा बेटा िकसानी Ëान, दोसर मशीनी Ëान, तेसर िचिकžसा आ चािरम वकालत िदस बढ़ला। िकछु िदनक पछाइत चािरम बेटा- सुखलाल िजला जज बनला।
वएह वातावरण रामानaदकT भेटल छेलैन जइसँ आइ.पी.एस. बनला। ओना, ल×मणपुरक अपन धरतीक उपज, माने िशKाक दौरमे एक गोरे मैिßक पास किर कोसी
Eोजेटक िकरानी, दोसर मैिßक पास लोअर Eाइमरी िव^ालयमे िशKा िमM आ तेसर बेकती बी.ए. पास केला पछाइत बेरोजगारे रिह गेल। वएह कलक“ासँ िदcली
तक घुिम-फीिर नोकरी नइ भेने सिठया-किठया कऽ बी.एल.मे नाओं िलखौलक आ वकील बिन झंझारपुर कोट>मे काय>रत अिछ। बpकी गामक लोक छोट-मोट बेपारक
संग खेती-िगरहxती करैए। तँए की गाममे स8प±ता निह अिछ सेहो निहयT कहल जा सकैए। झोरे छाप डॉटर िकए ने हुअए मुदा ल×मणपुरक डॉटर तँ वएह छी
िकने। जेकरा काजमे समाजक िबसवास छइ। भगवान र»छ रखथुन ल×मणपुरवासीकT जे टाटा हॉxपीटल ब8बई आ आयुवµद संxथान िदcलीक मुँह निह देखए पड़इ।
िकयो सुखे थोड़े जाइए। दमकल-बोिरंगसँ लऽ कऽ ßेटर धिरक िमxMी, िबजलीक मैकेिनकक संग मोबाइलक मैकेिनक सेहो ल×मणपुरमे अिछए। तौला-कराही
बनबैबला माने बरतन-बासनक सृजनक“क •पमे कु8हार-पि{डत सेहो अिछए। दुग xथानक दुग माताक संग Øï xथानक रेमaतक संग घोड़ो गढ़बे करैए। तिहना
केबाड़-चौकैठक संग चौकी आ सजल-धजन पलंग धिरक सृजेता कम>कार कलाकार ल×मणपुरमे निह अिछसेहो केना नइ कहल जाए। तिहना कpच-कड़चीसँ कpच
बpसक फुलडालीसँ लऽ कऽ पनडालीक संग पतडालीक [ii] अितिरत डाला-धनडाला तकक िनमणक“ नइ अिछ सेहो केना नइ कहल जाएत। जइ गाममे सभ
कथुक स8प±ता रहत तइ गामकT जँ स8प± नइ कहबै तँ ओइ गामक तौहीनक संग बेइमानी सेहो भेबे कएल िकने। मुदा से बात निह, गॱओं आ अनगॱओं सभ
ल×मणपुरकT स8प± समाज मािनते अिछ। जँ से नइ मानैत अिछ तँ िकयो अनगॱऑं िकए अपन बेटी-बेटाक संग भाइयो-बिहनक िबआह ल×मणपुरमे करैए। िकनका
मनमे एहेन इ»छा नइ रहै छैन जे अपन बिहन वा बेटीक िजनगी नीक जकp निह चलए। ओना, िजनिगयो-िजनगीमे अaतर होइते अिछ। ए°े गाममे एक पिरवारक
िजनगी खाइ-पीबैसँ लऽ कऽ कपड़ा-ल“ा, घर-दुआिरक संग पढ़ै-िलखै तक स8प± रहैए आ ओहीठाम माने बगलेमे, दोसरकT केकरो पढ़ै-िलखैक खच> नइ जुटै छै तँ
केकरो रहैक नीक घर निह छइ। तिहना केकरो कपड़ा-ल“ाक अभाव अिछ तँ केकरो खेबा-पीबाक। मुदा िकछु अिछ, गाम तँ सबहक िछऐaहे। सभकT अपन-अपन
अिधकारो आ कत>यो छैaहे। तइमे जे जेहेन िवचारक छैथ ओ ओइ अनुकूल अपन पिरवारक िसरजनो-Eितपाल करै छैथ आ नÇो-संहार किरते छैथ।
आइसँ बतीस बख> पूव> रामानaद भाय जखन आइ.पी.एस. क8पीट केलैनतँगामक जेते बुझै-सुझैबला लोक छला सभ खुशीसँ झूिम उठल छला। िकनको
झुमैक खुशी छेलैन जे गाम समाजक लोक उिठ कऽ स“ा तक पहुँचला, तँ िकनको खुशी जे गाममे कोनो भीड़-कुभीड़ पड़त तेकर रKक गोबरधन धारी कृÑण जकp
अवतार लइये लेलैन। िकनको मनमे खुशी ऐ दुआरे रहैन जे देखा-देखी दुिनयp चलैए, जखने एक गोरे धरतीसँ उिठ अकास छुिब लेलैन तखने दोसरो-तेसरेा छुबे
करत। आ िकनको मनमे ई आशा छेलैन जे िबनु पढ़ल-िलखलकT ने नोकरी[iii] नइ भेटैए आिक नइ भेटत मुदा ओइ संग पढ़लो-िलखल जे टौआएल िफरैए कमसँ
कम आब ओकरा सबहक बेरा पार हेबे करत। जखन एते पैघ िडšी रामानaद भाय हpिसल केलैन तखने ने पैघ पदक Eाि˜त सेहो हेबे करतैनजइसँ दबल-कुचललकT
लाभ हेबे करत।
रामानaद भाइक िपता जनकनaद साधारण पpच बीघा जोत जमीनक िगरहxथ, िजनका अपन होश-हवास एते निह जे रामानaद भाइक पदक गिरमाकT बुिझतैथ
मुदा सासुरक जे पिरवार रहैन ओइसँ िकछु-ने-िकछु अंकैत तँ ज•र छेलाहे। बेटाक िडšीक खुशीमे समाजे नािच उठल छल जइसँ जनकनaद सेहो झूिम उठला।
बेटाक EितRाक खुशीमे जनकनaद समाजक संग कुटु8बो-पिरवारकT भोज खुएबाक िवचार मनमे रोिप लेलैन।
ßेिनंग स8प± केला पछाइत रामानaद भाय गाम एला। परसू जुआइन करए जेता। बीचमे कािä भिर समय अिछ। जनकनaदकT भोज करैक अवसर
भेटलैन। ओना,रामानaद भाय पनरह िदन पिहनिह अपन काय>¡मक जानकारी िपताकT दए देने रहैन। भोजो तँ भोज छी, अपन-अपन गुण-धम> तँ ओकरो छइहे।
िबआहक भोज बिरयातीक भोज भेलजइमे दू समाजक बीच मनुख-मनुखक काaहक िमलानीक संग लड़का-लड़कीक िबआह होइत अिछ।तँए ऐ भोजमे रxसा-कxसी
सोभािवक अिछ, जइसँ खेबा-पीबाक ओहन •प पकड़बे करत। िकए ने लोक (बिरयाती) बाजत जे जिहना अँिठयाहा रसगुcला छल तिहना लालमोहनो आ डलनामे
सेहो डलडेक छॱक पड़ल छेलइ। मुदा ओहीठाम vाधक भोजक महाžम बदैल जाइए। बदलबो केना ने करत, जैठाम मृत-आžमाकT xवग>-नक>क भागी बनैक EÁ
अिछतैठामक पंच जँ भोजमे तीमन-तरकारीक पिरचय करए लगत तखन अनेरे ने भोजखौक सभ भेल-गेलमे ओइ आžमाकT नक> पठौत। मुदा जनकनaदक भोज तँ से
छेलैन निह, ओ तँ रामानaद भायकT शुभकामनाक छेलैन। तँए ऐठाम जँ भोज खाइबला शुभकामना छोिड़ अड़कच-बथुआ बाजत से की ल×मणपुरक लोक बेकूफ
अिछ। एते खुशी तँ सबहक मनमे छेलैaहे जे गामक धरतीसँ अकास टेकै धिरक खा8ही गाममे बिन ठाढ़ भेला अिछ।
तेसर िदन चािर बजे रामानaद गामसँ िवदा हेता। दुपहरक पछाितयेसँ समाजक एका-एकी लोक शुभकामनाक संग रामानaदकT अिरयातै-ले आबए लगला।
ओना,काजुल लोक जँ चािर बजे याMा करता तँ ओइसँ पनरह िमनट पिहने तैयारी करैमे लगता आ समयसँ पpच िमनट पिहने पहुँचैक पिरयास करता, मुदा अकाजुल
तँ बेरक चािर बजेक याMा-ले भोरेसँ िसंगार-पेटार निह करत तँ ओकरा-ले ओ याMाक सगुन की भेल। मुदा से निह, रामानaद भाय ßेिनंग कऽ चुकल छला, काज
करैक ढंगमे नवपन आिब गेल छेलैन। दुपहरक पछाितयेसँ समाजक शुभेझुकT देख-देख अपन याMा मन पड़ए लगलैन। मुदा ओ तँ चािर बजे हएत। तँए खुला
देहक संग रामानaद अपन शुभिचaतकक शुभकामना šहण कऽ रहल छला। समाजो तँ समाज छी, जखन बेिटयोकT लोक धान, हरदी आ दूिभक खॲइछ भिर िवदा
करैत तखन बेटा तँ सहजे बेटा छी, तहूमे ओहन बेटा जे धरतीसँ उिठ अकासक सॲगर बिन ठाढ़ अिछ, तँए िकयो नववxM तँ िकयो बटखरचा, भाड़ा लेल नगद-
नारायण सेहो अरपनक संग अिप>त कइये रहल छेलैन।
घरसँ िनकलैकाल रामानaद भाय घर-जनसँ लऽ कऽ गाम-जन तक शुभेKुक •पमे देख रहला अिछ। सबहक सेवा सबहक कcयाण मनमे नािच रहल
छेलैन। सीमा टपबैत जिहना रामकT अयोÍयावासी अिरयातलकैन तिहना रामानaद भायकT ल×मणपुरवासी अपन गामक सीमान धिर अिरयाइत देने रहैन।
पान खेला पछाइत रामानaद भाय पÏीकT सोर पाड़लैन। ओना, सुलेखाक मन भीतरे-भीतर थौआ भऽ गेल रहैन, मुदा पदक अिaतम सीढ़ीक रोब तँ अ„>मृतो
जीिवत छेलैaहे। लगमे अिबते सुलेखा बजली-
“िकए एना डकबािह केलॱ?”
पÏीक श¦दक xवाद जेना रामानaद भायकT कड़ुआएल बुिझ पड़लैन मुदा जिहना चढ़aत धारक वेग आ उतरaत धारक वेगक गित बदैल जाइ छै तिहना
रामानaद भायकT हुअ लगलैन। मुदा एकटा नमहर िजनगीक भुत भोग तँ बिनयT गेल छलातँए सोचैयो-िवचारैक आ बुझबो-सुझबोक नजैर तँ बिनयT गेल छेलैन।
बजला-

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ejournal 'िवदेह ' २५७ म अंक ०१ िसत᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १२९ अंक २५७ )
मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA
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“दुिनयpमे हमरा-ले अहp सँ लगक दोसर िकयो ने अिछ, तँए अहpकT एकटा बात कहए चाहै छी।”
दर-दरसँ गुजरल रामानaद भाइक मन अनुभूितक संग अनुभव कऽ नेने छेलैन जे िजगनीमे चूक ज•र भेल, जँ से निह भेल तँ एकतीस बख> पूव>क समाज
आइ िकए कुद-•प चेहरा देख भटैक गेल? पितक किcपत भाव बुिझ सुलेखा अपन गु³žवक भाव जगबैत पुछलकैन-
“की कहए चाहै छी?”
िविxमत होइत रामानaद भाय बजला-
“पदक मदमे समाजक संग भारी चूक भेल!”
सुलेखा बजली-
“की चूक भेल?”
रामानaद भाय बजला-
“मन बोिझल अिछ, कािä कहब।”
q
श¦द संœया : 1584, ितिथ : 9 जुलाई 2018

केकरो िकयो ने
एक तँ ओहुना मधुबनी जाइसँ पिहने पÏीसँ खूब र°ा-टोकी भेल। र°ा-टोकीक कारण छल एकटा मुकदमा। र°ा-टोकी होइत-होइत रका-टोकहुअ लगल।
आ ओहो एते बिढ़ गेल जे दुनू परानी दू िदस भऽ गेलॱ। माने ई जे पÏी बजली-
“हमरा एहेन ठpठ महॴस आिक ठpठ गाए पोसैक ज•रत नइ अिछ जे भिर िदन ओकरा पाछू लागल रहू आ दूधक बेरमे फूल सुँघा देत।”
एक मानेमे पÏीक िवचार जँचल। जँचल ई जे गाए आिक महॴस िकयो पोसैए धनक उगाही बुिझ।ओ भलT कम दुधगैर हुअए आिक बेसी ई दीगर बात
भेल। मुदा साफे िकछु ने हुअए ई तँ कनी कठाइन भइये गेल। मुदा पÏी बाजल छेली एकटा केसक उदाहरणमे।
आइसँ तीस बख> पिहने गाममे दू गोरेक झगड़ाक पनचैतीमे पंच बिन गेलॱ। ले बङौर!गुर केतौ आ पह केतौ पिड़ गेल! जइ झगड़े पनचैतीमे गेल रही
ओकर चच> पंच सभकT अबै दुआरे पछुआएले छल तइसँ पिहने गामक दोसर गप उखैड़ गेल। जेते गोरे पनचैतीमे पहुँचल रही तहीमे दू पाट¸ बिन गेल। दू पाट¸ जँ
िवचारे धिर रहैत तखन तँ कोनो बात निह। गाम-घरमे एना होइते छइ। कोनो घटना गाममे िकए ने हुअए, जहp-तहp दू गोरे–चािर गोरेक बीच कहा-कही होइते
अिछ, भलT ओइ कहा-कहीक कोनो कारगर पिरणाम नइ िनकलौ। मुदा एतए से निह भेल। दुनू पाट¸क बीच हाथा-बpही होइत थापर-मु°ा चिल गेल। धरमागती जँ
पुछी तँ मािर बेसी हमरे पाट¸ माने हम जइ पाट¸मे रही सएह सभ खेलक। मुदा बेकतीगत •पमे हम बेसी हाथ चलेलॱ, हाथ िक चलेलॱ जे दुनू हाथमे ऑंगुरक
मु°ा बािaह बेसुमार चलेलॱ जइसँ एक गोरेकT बेसी चोट लिग गेलै, वएह केस कऽ देलक, सएह केस आइ तीस बख>सँ लड़ैत आिब रहल छी। लड़ैत की आिब रहल
छी, मधुबनी जाइ-अबै छी। किहयो हािकम निह, तँ किहयो पेशकारक ðड़ताल, किहयो वकीलक विहÑकार, तँ किहयो चपरासीक हड़तालक दुआरे कोट> लगबे ने
कएल, जइसँ तारीक-पर-तारीक होइत-होइत आइ तीसम बरख बीित रहल अिछ।
मासे-मास तारीक भेने पिरवारक अिनवाय> खच>मे, माने मासक बजटमे केसक खच> साए •पैआ जोड़ाइये गेल अिछ। ओना, पिरवारमे पpच-दस, पचीस-पचास
•पैआक केते काज खिग जाइए से बरदास करैत आिब रहल छी।
पÏीक EÁक उ“र देब ज•री छेलएहे। जँ से निह देब तखन तँ पÏीक संग हारबे ने भेल। आ जखने घरमे पÏीक जीत हएत तखने ने पु³ख-जुइितक
घर मौगी-जुइितक भऽ जाएत वा पु³खाह घर मौिगयाह भऽ जाएत। आ जँ से हएत तँ गाम-समाजक मुँह रोिक देबै, कहबे करत िकने- ‘फcलॉं घर मौिगयाहक घर
छी।’ मनमे कोनो ताले-मेल नइ बैइसए। पछाइत घाल-मेल करैत बजलॱ-
“केस-मोकदमाक हाल अहp थोड़बे बुझबैओ इ”जतक लड़ाइ छी, िबनु लड़ने केकरो इ”जत होइ छइ।”
आमक गाछक सराइर हुअए आिक ल“ीक फॲकगर मुड़ी, ओकरा तोिड़ देने जिहना मुिड़ये बदैल जाइए तिहना भेल। पÏी बजली-
“हमरा ऐ केससँ कोनो मतलब नइ अिछ, सात गोरे फँसल अिछ, जे गित ओइ छबोकT हेतै से हमरो हएत।”
बजैक ¡ममे तँ पÏीक िवचार नीक छेलैaहे। िकएक तँ सि8मिलत पिरवार ने छी। दुनू गोरे िमिल कऽ ने ठाढ़ो केने छी आ आगू मुहT चलाइयो रहल छी।
मुदा जँ केसक पैरवी छोिड़ देबै तखन तँ अनेरे गैर-हािजरीमे वारंट हएत, ज¦ती-कुक¸ हएत! आजँ कहॴ पुरान केस बुिझ हािकम फैसले िलिख देलैनतखन तँ सजो
भऽ सकैए। तैकाल मे हमर साती पिÏयो पूिर पौती आिक अपने पुरए पड़त?
ओना, एते चलाकी दुनू परानीक गप-स˜पमे कइये नेने छेलॱ जे पÏीकT बेतुकार उ“र निह दए, कहने रिहऐन जे मधुबनीसँ ऐ बेरक तारीक केने अबै
छी, तखन िनचेनसँ दुनू परानी िवचािर लेब।

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अपने मधुबनीए-मे रही। जेठुआ लगन जखन एहेन अिछ, तखन फगुआ मासक फागुनक लगन केहेन भेल छल से सभकT बुझले अिछ। अपना बुझल नइ
छल जे औझुका लगन अपनो लगल अिछ, तँए थोड़े िनचेन रहबे करी। आठ-नअ बजे राितमे जखन घरपर पहुँचलॱ तँ देखिलऐ जे सॱसे अaहार पसरल अिछ।
घरमे एकोटा मनुख निह। गुण अिछ जे गाए-महॴस नइ पोसने छी, एकटा जँ पीिलया कु“ा अिछयो तँ ओकरा-ले समाजे खुजल अिछ। ओना, जखन दरब”जापर
पएर देलॱ तखन ओ दरब”जाक आगूमे अaहारेमे बैसल छल। हािर-थािक िनण>य केलॱ जे अनका भरोसे लोक केते िदन जीब सकैए, से नै तँ भेल ते चािरटा रोटी
बनाएब अिछ। अनेरे तीमन-तरकारी बनबैक भpजमे की पड़ब से नै तँ जखन अपने उपजौल तरकारी अिछ, तखन िकए ने ओकरा उसैिनये वा पकाइये कऽ
पुÇगरसँ चहटगर स±ा बना ली। एते करब कोन असाध भेल।
तेसर िदन हहाएल-फुहाएल पÏी िधया-पुताक संग नेने पहुँचली। बजलॱ- “लगन कटबए केतए गेल छेलॱ?”
पÏी बजली-
“बिहनक बेटीक सासुर। िबआह छेलइ।”
मनक िवचारकT मनेमे दािब, मुँह ब± कऽ लेलॱ। िकएक तँ मनमे आिब गेल- ‘च-र-र-अ सरोकारे करहर मौसा।’
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श¦द संœया : 718, ितिथ : 11 जुलाई 2018

[i] अबैबला
[ii] पत-पिथया
[iii] सरकारी नोकरी

Suggested citation: रबीन्द्र नारायण मिश्र. “घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005.” Videha — First Maithili Fortnightly eJournal, issue 257, 2018-09-01. https://www.videha.co.in/research/2018/257/घरेलू-हिंसा-अधिनियम-2005.htm

मूल विदेह अंक / Original issue