मैिथली सािहयक अवदान
िमिथला भाषा रामायण
चaदा झा
किववर मैिथली सािहयाकाशक चad िथकाह। मैिथली सािहयकT अपन शीतल योसनाक अमर
वरदान देलिaह। इएह कारण िथक जे ओ मैिथलीक महान् किवक पमे समादृत होइत आधुिनक मैिथली
सािहयक जनक मानल जाइत छिथ। वxतुत:िव^ापितक पÔात् इएहटा किव भेलाह जे मातृभाषाक वाxतिवक
महव बूिझ ओकर िवकासक िदशामे EयÏशील भेलाह।
उ±ैसम शता¦दीमे पुन: कवीsरे जनभाषाकT काय भाषाक पमे मि{डत कैलिaह तथा अपन सशत
लेखनीसँ अनवरत सािहय सृिÇमे योगदान दैत मातृवाणीक अच>नामे सुवण> वणवलीक उपहार चढ़बैत रहलाह।
िहनक वहुमुखी Eितभा, Eगाढ़ पाि{डय, सािहयक िच, पुरातव-Eेम एवम् दीघ> जीवन िविवध EकारT मैिथली
सािहयक स8व>नमे सहायक िस भेल। िहनक जaम सन् 1931 ई.मे सतमी वृहxपितकT दिड़भंगा िजलाक
िप{डाछ गाममे भेल छल। Eारि8भक िशKा मातृक बड़ गpव सहरसा िजलामे भेल। बादमे संxकृतक उ»च
िशKाक हेतु पिवM नगरी काशी गेलाह। काशीसँ Eयागत भेलापर पाि{डयक अितिरत हुनक किवव
शितक यशोवcलरी चतुिद>क पसरए लागल। बाcयकालिहसँ Eितभापूण> Eतीत भेलाह।
िमिथला भाषा रामायणक मूल Eेरक xव. महाराज ल×मीsर िसंह छलाह। मातृभाषा मैिथलीमे धम> ंथक
अभाव खटकलैaह। चaदा झा िशवक समिप>त भत छलाह। िशवक िEय राम तT भित भावना हुनक
सािहयक कृितक िवधा िथक। मातृभूिम ओ मातृभाषा Eेमक पुÑपाÙिल दय ओ अपन काय देवताक अच>ना
कैलिaह। एिह दृिÇए िमिथला भाषा रामायण हुनक सविधक Eिस िEय कीि> िथक। चaदा झाक नामोcलेख
माMसँ िहनक रामायणक उÚोष होइछ। aथक नाम करणेसँ िमिथला-मैिथलीक Eित किवक सहज अनुरागक
पिरचय भेटैत अिछ। Eाय: ई शौभा²य कोनो आन ंथकT निह हएत जेकर Eयेक श¦दपर िव®त म{डली
िवचार कएने हो तथा जे पाि{डयक कसौटीपर पिरशु Eमािणत भेल हो।
रामायण भारतीय वाङमय केर आदश> कृित िथक। देशक चािरिMक आदश>कT अनुEािणत करबाक लेल
राम चिरतक अवतार मैिथलीमे आव©यक छल। वxतुत: जािह सxकृितक संघष>क युगमे चaदा झाक आिव>भाव
भेल छल तकर ई अिनवाय> Eिति¡या छल। कवीsरक एिह कृितक कT सव> Eथम महा कायो हैबाक सौभा²य
Eात छैक। चad किव जिहना कायामकतामे बाcमीिक तिहना रचना करबामे Eमुख। चaदा झाकT युग
जागरणक Eतीक मानल जाइछ। ओना तँ िमिथला भाषा रामायणक मूलाधार िथक अÍयाम रामायण मुदा
अटूट vाक कारणT मौिलकताक िनवहमे Mुिट निह होए देल अिछ। िवशेष कय िमिथलाक वण>न, ल×मण-
परसुराम स8वाद, लंका दाह वण>न, राम अंगद-स8वाद आिद कतेक xथल अिछ जतए किवक मौिलक Eितभा
xफुट भेल अिछ, तथा मनोरम िस भेल अिछ। विभ± रसक Eयोग लेल राम कथाक महव सवÆपिर अिछ
तिहना भाव Eकाशनक ¡ममे िविवध अलंकारक Eयोगसँ ओ एकर कला पKकT समृ बनौने छिथ। एतए
िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com
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ejournal 'िवदेह ' २५७ म अंक ०१ िसत᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १२९ अंक २५७ )
मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA
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xपÇ अिछ जे रामायण मूलत: भित काय िथक। िमिथलाक गौरवक गुणगान निह िबसरलाह अिछ रामक
मुँह कहबैत छिथ-
“सय ितरहुित यËभूिम पु{य देिनहािर,
शाxMकT बजैत बेर कीर बैिस डािर-डािर।”
पुन: सीताक चिरतक Eसंगमे ओ एिह िवषयकT निह िबसरल छिथ जे सीता िमिथलाक बेटी छलीह।
सीता xवयं कहलैaह-
“जनक जनक जननी अविन,
रघुनaदन Eाणेश
देवर ल×मण हमर छिथ,
नैहर िमिथलादेश।”
एकर भाषा ओ शैली माधुय> जन साधारणकT आकृÇ कएलक। ओ शीÛिह िव®ानसँ लऽ कऽअिशिKत समाज
मÍय ई िEय भए गेल। एिह गंथक अÍययनसँ मैिथली िव®ानकT अपन मातृभाषाक गौरव ओ गंभीरताक Ëान
भेलिaह। एिह ¡ममे देखब जे अशोक बािटकाक विaदनी सीताकT अपन िवप± जीवनसँ िवशेष कठोर बचन
कहबाक भनxताप छिaह जे मनो वेदना िवगिलत भए उठल अिछ- हे रघुनाथ! अनाथ जकp दश कंठकपूरी हम
आइिल छी िसंहक Mास महावनमे,हिर नीक समान हेराय छी।