विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका · VIDEHA · ISSN 2229-547X

मैथिली साहित्यक अवदान: मिथिला भाषा रामायण आ चन्दा झा

डॉ. बचेश्वर झा · 2018-09-01 · अंक 257

मैिथली सािहžयक अवदान
िमिथला भाषा रामायण
चaदा झा
किववर मैिथली सािहžयाकाशक चad िथकाह। मैिथली सािहžयकT अपन शीतल ”योžसनाक अमर
वरदान देलिaह। इएह कारण िथक जे ओ मैिथलीक महान् किवक •पमे समादृत होइत आधुिनक मैिथली
सािहžयक जनक मानल जाइत छिथ। वxतुत:िव^ापितक पÔात् इएहटा किव भेलाह जे मातृभाषाक वाxतिवक
महžव बूिझ ओकर िवकासक िदशामे EयÏशील भेलाह।
उ±ैसम शता¦दीमे पुन: कवीsरे जनभाषाकT काय भाषाक •पमे मि{डत कैलिaह तथा अपन सशत
लेखनीसँ अनवरत सािहžय सृिÇमे योगदान दैत मातृवाणीक अच>नामे सुवण> वणवलीक उपहार चढ़बैत रहलाह।
िहनक वहुमुखी Eितभा, Eगाढ़ पाि{डžय, सािहžयक •िच, पुरातžव-Eेम एवम् दीघ> जीवन िविवध EकारT मैिथली
सािहžयक स8व„>नमे सहायक िस„ भेल। िहनक जaम सन् 1931 ई.मे स˜तमी वृहxपितकT दिड़भंगा िजलाक
िप{डा•छ गाममे भेल छल। Eारि8भक िशKा मातृक बड़ गpव सहरसा िजलामे भेल। बादमे संxकृतक उ»च
िशKाक हेतु पिवM नगरी काशी गेलाह। काशीसँ Ežयागत भेलापर पाि{डžयक अितिरत हुनक किवžव
शितक यशोवcलरी चतुिद>क पसरए लागल। बाcयकालिहसँ Eितभापूण> Eतीत भेलाह।
िमिथला भाषा रामायणक मूल Eेरक xव. महाराज ल×मीsर िसंह छलाह। मातृभाषा मैिथलीमे धम> šंथक
अभाव खटकलैaह। चaदा झा िशवक समिप>त भत छलाह। िशवक िEय राम तT भित भावना हुनक
सािहžयक कृितक िवधा िथक। मातृभूिम ओ मातृभाषा Eेमक पुÑपाÙिल दय ओ अपन काय देवताक अच>ना
कैलिaह। एिह दृिÇए िमिथला भाषा रामायण हुनक सविधक Eिस„ िEय कीि“> िथक। चaदा झाक नामोcलेख
माMसँ िहनक रामायणक उÚोष होइछ। šaथक नाम करणेसँ िमिथला-मैिथलीक Eित किवक सहज अनुरागक
पिरचय भेटैत अिछ। Eाय: ई शौभा²य कोनो आन šंथकT निह हएत जेकर Ežयेक श¦दपर िव®त म{डली
िवचार कएने हो तथा जे पाि{डžयक कसौटीपर पिरशु„ Eमािणत भेल हो।
रामायण भारतीय वाङमय केर आदश> कृित िथक। देशक चािरिMक आदश>कT अनुEािणत करबाक लेल
राम चिरतक अवतार मैिथलीमे आव©यक छल। वxतुत: जािह सxकृितक संघष>क युगमे चaदा झाक आिव>भाव
भेल छल तकर ई अिनवाय> Eिति¡या छल। कवीsरक एिह कृितक कT सव> Eथम महा कायो हैबाक सौभा²य
Eा˜त छैक। चad किव जिहना कायाžमकतामे बाcमीिक तिहना रचना करबामे Eमुख। चaदा झाकT युग
जागरणक Eतीक मानल जाइछ। ओना तँ िमिथला भाषा रामायणक मूलाधार िथक अÍयाžम रामायण मुदा
अटूट v„ाक कारणT मौिलकताक िनवहमे Mुिट निह होए देल अिछ। िवशेष कय िमिथलाक वण>न, ल×मण-
परसुराम स8वाद, लंका दाह वण>न, राम अंगद-स8वाद आिद कतेक xथल अिछ जतए किवक मौिलक Eितभा
xफुट भेल अिछ, तथा मनोरम िस„ भेल अिछ। विभ± रसक Eयोग लेल राम कथाक महžव सवÆपिर अिछ
तिहना भाव Eकाशनक ¡ममे िविवध अलंकारक Eयोगसँ ओ एकर कला पKकT समृ„ बनौने छिथ। एतए

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ejournal 'िवदेह ' २५७ म अंक ०१ िसत᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १२९ अंक २५७ )
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xपÇ अिछ जे रामायण मूलत: भित काय िथक। िमिथलाक गौरवक गुणगान निह िबसरलाह अिछ रामक
मुँह कहबैत छिथ-
“सžय ितरहुित यËभूिम पु{य देिनहािर,
शाxMकT बजैत बेर कीर बैिस डािर-डािर।”
पुन: सीताक चिरतक Eसंगमे ओ एिह िवषयकT निह िबसरल छिथ जे सीता िमिथलाक बेटी छलीह।
सीता xवयं कहलैaह-
“जनक जनक जननी अविन,
रघुनaदन Eाणेश
देवर ल×मण हमर छिथ,
नैहर िमिथलादेश।”
एकर भाषा ओ शैली माधुय> जन साधारणकT आकृÇ कएलक। ओ शीÛिह िव®ानसँ लऽ कऽअिशिKत समाज
मÍय ई िEय भए गेल। एिह गंथक अÍययनसँ मैिथली िव®ानकT अपन मातृभाषाक गौरव ओ गंभीरताक Ëान
भेलिaह। एिह ¡ममे देखब जे अशोक बािटकाक विaदनी सीताकT अपन िवप± जीवनसँ िवशेष कठोर बचन
कहबाक भनxताप छिaह जे मनो वेदना िवगिलत भए उठल अिछ- हे रघुनाथ! अनाथ जकp दश कंठकपूरी हम
आइिल छी िसंहक Mास महावनमे,हिर नीक समान हेराय छी।

Suggested citation: डॉ. बचेश्वर झा. “मैथिली साहित्यक अवदान: मिथिला भाषा रामायण आ चन्दा झा.” Videha — First Maithili Fortnightly eJournal, issue 257, 2018-09-01. https://www.videha.co.in/research/2018/257/मैथिली-साहित्यक-अवदान-मिथिला-भाषा-रामायण-आ-चन्दा-झा.htm

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