‘दू-पL’ उप_यासक िवcलेषणाeमक अfययन
पLाeमक शैली म िलखल गेल एवं 1969 ई0 म सािहeय अकादमी ¿ारा पुर{कृत कएल गेल ‘दू-पL’ उप_यास
उपे_oनाथ झा ‘यास’ क िवषय तथा िशjप दुनू दृि°तएँ अeयंत महeवपूण= लघु उप_यास िथक एिह उप_यास म
दुई गोट मिहलाक दुई टा पL अिछ जािहम एक पL भारतीय मिहला wीमित इ_दु देवी नौ वष= सॅअमेिरका म
रहैत अपन {वामी कँ िलखने छिथ ओ पिहल पL िथक । एकर अंेजी अनुवादक Dितिलिप इ_दु देवी क
मिमयौत भाई रमेश छिथ । रमेश सेहो िकछू वष= पूव= {वयं अमेिरका चिल गेल छलाह ओ अपन पLक संग
पठा दैत छिथ_ह ।
ओ दोसर मिहला जे इ_दु देवी के हुनक पLक उर दैत छिथ_ह से िथक अमेिरका िनवासी जेिसका
अमेिरका मे इ_दु देवी क पित सुरे_o क संगी रहिथ । आ ई िथक एही उप_यासक दोसर पL । एिह
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ejournal 'िवदेह ' २५८ म अंक १५ िसत᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १२९ अंक २५८ )
मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 222 9-547X VIDEHA
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उप_यासक सभ सँ पैघ िवशेषता िथक पLक माfयम सँ दू सं{कृितक िववेचना दुनू पLम दुनू देशक
सÁयता, सv{कृित ओ सं{कार आिद साकार भ उठल अिछ ।
पा ाeय सv{कृितक Dितमूित= जेिसका कोन ¤पँ आपन पL म अपन सv{कृितक कएने छिथ से वण=नीय अिछ
। ओ अपने सv{कृितक अनु¤प पL िलखने छिथ । तिह लेल एिह पLक िनÂ अंश o¸य िथक {वािमक
लग रहला सँ सुख चैन Dाय: छैक , परंतु ब_धनॱ तँ कम नहॴ । आ ई त fयान म रखक िथक जे जतै
कतहु रही, अपन माययदा {वतंLता बड़ िDय अिछ । ओिह पर आधार होयब हमरा आिद हुनक काज त
हुनको हमर काज, नहॴ तँ हुनक तरवा चटैत, नौकरानी भेली िकए रहिथ_ह? ई िथक पा ाeय सं{कृितक
झलक ।
मुदा भारतीय सv{कृितक िवशेषता िथक जे िकछू भ जेतैक मुदा भारतीय नारी अपन पित कँ सवÄपिर बूिझते
रहत जकर उदारहण िथक इ_दु देवी ¿ारा िलखल गेल पLक अ_तक िव]ापितक पद । जकरा दोहराबैत
इ_दु देवी पL कँ समा®त करै छंिय । पित ¿ारा एतेक गलती केएलाक बादो हुनका ¿ारा एतेक
अपमान, अeयाचार सहलाक बादो हुनका ¿ारा एतेक अपमान, अeयाचार सहलाक बादो हुनको पर कोनो दोष
निहं लागल ।
अपन माथ पर सभ दोष लड कर पित कँ जुग-जुग िजवाक हेतु कामना करैत छिथ । एिहठाम इ_दु देवी
¿ारा िलखल पLक िकछु अंश o¸य अिछ –
“युग-युग िजबयु बसयु लाख कोस,
हमर अभाग, हुनक निह दोष ।“
एिह उप_यासक महeव ओ िवशेषता कँ Dितपािदत करैत डॉ0 दुगनाथ झा wीश िलखने छिथ- “एिह
उप_यासक महeव अिछ मैिथिल उप_यास-JेL मे पLाeमक । रचना Dणालीक नवDयोग एवं नवीन व{तु-िवषय
हणक दृि¸ सँ ।
उप_यासकर इ_दु , सुरेन जेिसका एवं रमेश चािर गोट माL पाLक वृता_त-D{तुत कए बड़ कौशलक संग दुई
सं{कृितक तुलनाeमक िववेचना कएल अिछ,िवशेषतः भारतीय ओ प ाeय दृि¸कोण म {Lीगणक सामािजक ओ
मानिसक ि{थित ओ आदेश म की अ_तर छेक, तकरा {प¸ करैत अ_तत: भारतीय ललनाक शालीनताक ओ
wेQताक बड़ सजीव Dितपादन भेल अिछ | मानिसक¿_द ओ संघष=क सूÇम ओ कलाeमक आकलन एिह
उप_यासक Dमुख िवशेषता िथक |
दू पL उप_यासक ममेके बुझबाक हेतु उप_यासक Dकृित एवं ओकर Dयोजनके बुझब आवcयक ते एिह Dसंगे
अंगरेजीक उप_यासक Dिसfद समालोचक समरसेट मqमक कथन o¸य िथक –
“I think it an abuse to use novel as pulpit or plat form, and I believe readers
are misguided when they suppose they can thus easil y acquire knowledge.it
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would be fine If we could swallow the powder of pro fitable information made
palatable by the jam of fiction.”
डॉ० अमरेश पाठक एिह उप_यासक Dसंग िलखने छिय-साधारणतः मैिथलीक उप_यासकार लोकिन अपन
सीिमत अनुभव एंव उप_यास कलाक हेतु अपेिJत ानक अभावक कारणे ओिह पJक िचLणॲ निह कए
सकलाह अिछ जकर िचLण दू पLम संभव भए सकल अिछ | चािर गोट माL पाL पर स7पूण= वृतvत
आधािरत अिछ | ओ पाL छिय -इ_दु देवी ,सुरे_o जेिसका एवं रमेश |िभ³-िभ³ पिरि{थितम एिह पाL सभके
रािख मानिसक ¿_द एवं संघष=क िचLण ¿ारा जे िचL यास जी अंिकत कएल अिछ से सeयानु¤प भेल
अिछ | संघष=िहक ि{थितमे पाLक चिरLमे िनखार आिब सकैत आ अिछ |जेिसका , रमेश एवं सुरे_oक
यि±तeवक िचLण जे कएल गेल अिछ से Dशंसनीय अिछ | एिह करणवश अपन सं{कृित,सÁयता ओ आचरण
िवrमे सवÄपिर अिछ| तिह से अपन देशक अनेकताओ म एकताक देश कहल जाइत अिछ |
व{तुतः ई उप_यास दुनू देशक सं{कृित क दश=बैत भारतीय ललनाक शालीनता ओ wेQता क
बड संजीव ओ कलाeमक ढंग स उपि{थित करैत अिछ |‘दू पL ‘ पLाeमक शैलीमे िलखल गेल एक सफल
उप_यास िथक |
देवेश झा
एन० डी० कॉलेज रामबाग ,पूिण=या
Dाfयापक (मैिथली िवभाग )
संदभ=
1. दू-पL , पृ0-84
2. तथैव , पृ0-45
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3. मैिथली सािहeयक इितहास-wीश , पृ0-353
4. मैिथली उप_यासक आलोचनाeमक आfययन पृ0-172
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