विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका · VIDEHA · ISSN 2229-547X

मैथिली साहित्यमे यदुनाथ झा ‘यदुवर’क देन

डॉ. बचेश्वर झा · 2018-09-15 · अंक 258

मैिथली सािहeयमे यदुनाथ झा ‘यदुवरक देन
सहरसा िजलाक Dाचीन लेखक वा किव लोकिनक िव{तृत पिरचय Dा®त करबाक साधन
निह अिछ। य]िप हुनका लोकिनक रचना अिधकvशत: Dकािशत होइ त छल ‘िमिथला मोद ’मे
पर_तु कोनो सािहeयकार अपन पिरचयक Dसंगमे निह िलखैत छलाह।
यदुनाथ झा ‘यदुवर ’मैिथली भाषा एवम् सािहeयक िवकासक लेल ‘मोद युग ’मे जे कोनो
अनवरत सािहeय रचना करैत रहलाह तािहमे सँ एक Dमुख €यि±त रहिथ ‘यदुवर ’सहरसा
िजलाक मुरहो गामक वासी, िशJे सं{कृतक िव¿ान डाक-तार िवभागमे जीिवकाप³ रहिथ।
िमिथला मोदक एक सश±त लेखक आ €यापक अथ=मे जातीय िहत िच_तक छलाह।
िहनक ज_म अनुमानत: 1888 ई. तथा मृeयु 1932 ई.मे भेलि_ह। मोदक ज_मिहसँ िहनक
रचना उपलËध भेल छल। डॉ. जयका_त िमw िहनक Dसंगमे कहैत छिथ- ‘Enthusiasm for
Maithili unbound, Very few well Parallel to him’ मैिथली सािहeयमे गीतक जे एकटा सश±त
पर7परा अिछ तािह ¬ममे यदुवरजी बहुत गीतक रचना कएने छिथ। ओकर िवषय व{तु
Dितपादन करबाक शैली आिदमे पिरव‘=न कऽ देलि_ह। गीतहुमे हुनक नव दृि¸कोणक
अिभ€यि±त भेल अिछ। गीतक अितिर±त अनेको किवता, कैकटा िनव_ध िमिथलाक एक
जिटल सम{या, वैवािहक सम{याकS D{तुत करैत कथा आिद Dकािशत छिन। िहनक
िवचारधारा कतेक Dगितशील एवम् आधुिनक छलिन से {प¸ ¤पS अिभ€य±त भेल अिछ।
मैिथलीक रा°Ñीय गीतक संकलन मैिथली िगतvजलीक भूिमकामे संकलन एवम् Dकाशन कय
यदुवरजी एकटा नव िदशाक संकेत कयलि_ह जकर ऐितहािसक महeव छैक।
भूिमकामे {प¸ कहने छिथ : –ान wृंगािरक स7ब_धी किवता पराकाQा धिर पहुँिच गेल
अिछ आब रा°Ñीय िवषयक किवता पराकाQा धिर पहुँचेबाक अिछ। आब रा°Ñीय िवषयक

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किवताक Dकाशन होयब परमावcयक अिछ। एिहसँ िसÐ होइछ जे मैिथलहुमे रा¸ीय भावना
एवम् आधुिनक िवचारधाराक Dादुभ‹व होमए लागल। शंकरक िववाह नामक गjप , Dभात
Dभा, मैिथलीक आरतीनव युगक लोकिनसँ। गृ°म ऋृतु वण=न åमर आिद का€यरचना तथा
वस_त आिद िनव_ध Dकािशत छिन जकर उjलेख आगq कयल जाय।
मैिथली समाजक €यापक ¤पS िहत िच_तक िमिथला, मैिथल आ मैिथलीक उ³ितक हेतु
सतत संघष=शील। यदुवरजी कतहु कतहु परंपराक पालन किरतहु िवषय-व{तु एवम् िशjप
दूहूमे नवीनता आिन देलिन। देश भि±त भावनाकS {प¸ ¤पS मुखिरत कयने छिथ।
सव= Dथम D{तुत अिछ िहनक िकछु गीत। {वभािवक धािम=क Dवृि‘क रहबाक कारणS
भि±त गीतक रचना करब {वाभािवक। थोड़ शËदमे हृदयक भि±तभाव अिभ€यि±त करैत-
‘दुग‹क व_दना :
जय जय दुगæ, दुिरत िनवारणी,
भव भय हािरणी िरपु संहािरणी,
जन सुख कारीिण तारीिण ,
वढ़ु तनु धािरणी जगदुपकारीिण ,
िशव संग सतत िवहारीिण ,
जय नारायणी नरक िनवारीिण
यदुवर अधम उधारीिण।।
तीनटा गीतमे चuडीक व_दना कयने छिथ। जािहमे देश भि±तक भावनाक जे अिभ€यि±त
भेल अिछ से पqतीएसँ {प¸ होइछ।
“िमिथलाक मान राखू भारतमे चuडी, एरहु सभ पाप हो रामा।। ”
दोसर गीतमे भगवतीकS उपराग दैत छिथ_ह जे जािह भूिमसँ अहq ज_म लेलहुँ तकरे आइ
दुद=शा अिछ आ से अहq देखैत छी। िवषम व{तु एवम् िवचारधारामे कतेक आधुिनकता छलिन
तकर उदाहरण अिछ-
“मैिथलीक आतÒ नामक किवता। ” एिहमे मैिथली अपन स_तानकS क¤ण {वरS अपन
दुद=शा दूर करबाक लेल कहैत छिथ_ह। िमिथला िशिJत समाजकS जे अपनाकS DवुÐ मानैत

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छलाह िह_दीए िDय छलै_ह। हुनका लोकिनपर ने अं›ेजक मातृभाषाक Dेमक Dभाव आ ने
बंगालक नव जागरणक। अपने घरमे अपन मातृभाषा छोिड़ िह_दीक भ±त बिन अपनाकS
गौरवाि_वत बुझिनहार मैिथल छलाह। {वदेश , {व भाषा, {वजाितसँ िवमुख मैिथल सन दोसर
जाित भिरसके छल होएत। तS ओहन DवुÐ मैिथलक हेतु-
“की अपराध हमर अिछ कहु-कहु िमिथलाक सपूत सुजान। भए रहलहुँ अिछ पतन
दृि¸ सॱ हम अवनत दुिद=न खिरहान।।
चूिभ-चूिभ मुख हमिह िसखाओल बाजब माय-बाप अिछ।
िवलरै छी सभ हमर आई िकए हा ओ अहq लोकिन Dेमािदया।।
ताकू ऑंिख उठाय कनेको िथकहुँ मैिथली माय अहqक।
खैने लात िफरै छी घर-घर , कोनहुँ िविधए जीवन रािख।।
दोसर किवता अिछ ‘नवयुवक लोकिनसँ नÚ िनवेदन ’
किव नवयुवक लोकिनसँ आ›ह करैत छिथ जे ओ लोकिन आल{य छोिड़ भाषा, जाितक
िवकासक लेल किटवÐ भय जािथ तािह हेतु केओ उपहासो जौ करए तँ करए िदयौ।
हँसय देिख य]िप केओ अहqकS हँसय िदयौ मिर पोख ,
देश , जाित ओ धम= हेतु िनज िकछु तँ समय बँचाउ ,
कोनहु िविध देशक सेवाकS सबथल राम जँचाउ।
सािहयमे åमरक चच‹ उeयिधक होइत रहल। åमरक गुंजन कानकS तृ®त मनिह
करओ , मुदा ओकर {वभाव िन_दनीय मानल जाइछ। लोभी, मुदा यदुवरजी ¤पS उदार चिरL
€यि±तवक संग तुलना कएल।
एिह मा_यताक खuडन कय नव दृि¸कोणक {थापना कयलि_ह अिछ। हुनक मते åमर
कपटी निह अिछ ओ तँ गुणक अ_वेषण करैत रहैछ। एक फूलसँ दोसर फूलपर जायब गुणक
अ_वेषण करब िथक। समाजहुमे गुणवान €यि±तक आदर होबक चाही। गुणवान €यि±तक गुण
›ाहकक अभाव निह।
“कारी देिख åमर सब तोहर , करइत छिथ उपहास ,

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कपटी ¤प कहै छिथ सब और दैत अिछ Lास।
कारी ¤प िविचL य]िप तो िक_तु सकल गुण Ýयात्
गुिणए जन करइत छिथ जगमे गुणी जनक स7मान। ”
जिहना åमर चिच= तिहना कोइली आदृत। ऋृतुराज वस_तक वण=न। वस_तक आगमन
संदेश बाहक कामदेवक एक शस±त सैिनक िथक कोइली। परंच यदुवरजी एहू मा_यताकS
खिuडत कय जागरणक दूतमानलि_ह अिछ। एकटा ओ कोइलीसँ भारतवासीक पार{पिरक
ई°य‹, ¿ेषकS €य±त करैत कहैत छिथ_ह।
“सुमिर सुमिर तोहरा हे कोिकल , नयन नीर विरसाबै,
भा«यहीन भारतवासीकS जनु किहयो िवसराउ।
सभकS बचन सुनाय िहतक पुिन वैर , िवरोध हैटाउ। ”
िवषय-व{तुमे नवीनता अनवाक ¬ममे उपेिJत तुœछ व{तुक वण=न कय एकटा नव
िदशाक सूL पात कयलिन। उjलू, रेलबे {टेशनक िसंगनल , मोिसयानी,कुकुर आिदपर का€य
रचना करब िहनक मौिलकताक पिरचायक िथक। उदाहरण {व¤प- मोिसयानी :
“शाि_त भरल छुए जे मोिसयानी,
तोहर गुणकS सभ केओ मानी,
कलमक मािर खाइओ ढेिर ,
तथािप दैत छ मिस Dितवेिर। ”
एिह DकारS यदुवरजीक का€य रचनाकS सव=L कोनो ने कोनो Dकारक मौिलकता, नवीनता
अिछए। {वदेश , {वभाषा आ सभ जाितक िहत िच_तन , ओकर उ³ितक हेतु अथक Dय£
करब संगिह ओकर अिधकार Dाि®तक लेल संघष=शील रहब Dधान उÔेcय छल।
िमिथला, मैिथल एवम् मैिथलीक लेल कतेक Dेम छलिन तकर उदाहरण {व¤प चािरटा
पqती-
“सूनू औ ब_धुगण eयागू ई िवषधर िन_दकS
क‘=€य पालनमे लागू, भजु मातु पद अरिव_दकS

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गqिथ एकताक सूLमे, िहनका जगाउ सब िमिल कए ,
िनज देश िमिथला, जाित मैिथल , मातृ भाषा मैिथली...।”
अ{तु शुभम्...।
3.

वापसी

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राजदेव मuडल

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पjलवी Dकाशन
िनम=ली

ISBN :

दाम : `50/-
सव‹िधकार सुरिJत ©wी राजदेव मuडल
पिहल सं{ क रण :2018

Dकाशक : पjलवी Dकाशन
तुलसी भवन, जे.एल.नेह¤ माग=, वाड= नं. 06, िनम=ली, िजला-सुपौल,
िबहार: 847452

वेबसाइट :http://pallavipublication.blogspot.com
ई-मेल : pallavi.publication.nirmali@gmail.com
मोबाइल :8539043668, 9931654742

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िD_ट : मानव आट=, िनम=ली (सुपौल)
आवरण :wीमती पुनम मuडल, िनम=ली (सुपौल) िपन : 847452

WAAPSI
One-Act Play by Sh. Rajdeo Mandal.

ऐ पोथीक सव‹िधकार सुरिJत अिछ। कqपीराइटधारकक िलिखतअनुमितक
िबना पोथीककोनो अंशक छाया Dित एवं िरकॉिडंग सिहत इले± Ñॉिनकअथवा यvिLक, कोनो माfयमसँअथवा –ानक सं›हण वा
पुनD=योगक Dणाली ¿ाराकोनो ¤पमेपुन²eपािदत अथवा संचािरत-Dसािरतनिह कएल जा सकैत अिछ।

सािहeयसँ िसनेह रखिनहार
सुधीजनकS सादर समिप=त।

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पाL पिरचय -

1. पितलाल - (दहेजक लोभी बेकती)
2. लुतीचन - (पितलालक ›ामीण)
3. कंतलाल - (पितलालक बेटा)
4. च_देसर - (पितलालक समधी)
5. फूलोदाय - (कंतलालक प£ी आ च_देसरक बेटी)
6. सुखबा- (च_देसरक बेटा)
7. घॲघाय - (च_देसरक ›ामीण)
8. चटपिटया- (च_देसरक ›ामीण)
8.

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अंकDार7भ

Dथ म दृcय
{थान- पितलालक दुआिर।
समय- िदन।
लुतीचनक Dवेश

लुतीचन- (जोरसँ आवाज दैत अिछ।)
काकाऽऽऽयौ काकाऽ ऽ। अँगनामे िछऐ यौ। एने आऊ कनी।
(पितलाल भीतरसँ िनकलैत अिछ।)

पितलाल- िकए एते जोरसँ हjला करै छँह। बाज ने की बात िछऐ।

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लुतीचन- कािà सॉंझमे हाट गेल छेलॱ। अहq समधीक भाय भेटल छल। समधी
बेमार अिछ। ओ कहलक भSट करबाक लेल।

पितलाल- धुर , की भSट करबै। िबयाहमे जे दहेजक ¤पैआ बॉंकी रिह गेलै से अखनी
तक निह देलक। दू गोरेक सोझामे गछौटी केने छल।

लुतीचन- छोिड़ दहक आब ओइ ग®पकS। कहिबयो छै- भेल िबआह आब करब की।

पितलाल- केना छोिड़ देबइ। ऐ कारणे तँ अँगनामे माए बेटा दुनू िमिल कऽ हमरासँ
लड़ैत रहैए।

लुतीचन- ओतए जेबहक तब ने कोनो बातो हेतह।

पितलाल- तहूँ चल ने लुतीचन। दुनू गोरे रहबै तँ ग®पो चलबैमे ठीक रहतै।

लुतीचन- ठीके छै। हमहूँ जाएब। ओनएसँ बजारक काजो केने आएब। अहqआऊ हम
तैयार रहब।
q
(कहैत लुतीचन D{थान करैत अिछ।)
सीन Óाप।

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दोसर दृcय-

समय- िदन
{थान- (पितलालक समधी–च_देसरक घर।

(पितलाल आ लुतीचनक Dवेश)
लुतीचन- दुआिरपर तँ कोय निह अिछ।
(अँगनासँ कनबाक {वर आिब रहल अिछ।)

पितलाल- (कान लगा कऽ सुनैत अिछ)
यौ समधीजी छी यौ। अँगनासँ िनकलू ने। हम दुआिरपर ठाढ़ छी।
(कनबाक {वर मिÐम भऽ जाइत अिछ। च_देसरक जेठ बेटा सुखबा ऑंिख
पोछैत िनकलैत अिछ।)

सुखबा- आऊ बाबू, अँगने आऊ।
बाबूजी निह रहला। चिल गेला {वग=। आब हुनकासँ भSट निह होएत।

पितलाल- ओह ! जुलुम भऽ गेलइ। की भेल छेलै?

सुखबा- (कनैत {वरमे) िकछो निह भेल रहै। दू-तीन िदनसँ बेाखार लगै छेलै। आइ
एकाएक छातीमे दरद उठलै आ जाबे सचेत भऽ कऽ असपताल लऽ जैतॱ ताबे
पराने छुिट गेलइ।

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पितलाल- अœछा सबुर करह। कनलासँ िकछ निह हेतह। की करबहक , भगवानकS इएह
मंजूर छेलइ। होनीकS िकयो निह रोिक सकैत अिछ। धरतीपर एतबे िदनक
दाना-पानी िलखल छेलैन। धीरज तँ बा_है पड़तह।

सुखबा- हँ, से तँ ठीके। आब दोसर उपाये कोन छइ। मुदा पिहनेसँ एहेन बातक
किनयé शंका निह छेलइ।

पितलाल- हौ, एहेन मृeयु तँ सभसँ नीक। िकनको सेवो-टहलक अवसर निह भेटलैन।

सुखबा- ई तँ दोसर बात भेल बाबू। मुदा अचानक जे कोनो भिरगर भार कपारपर
पिड़ जाइ छै तँ...।

पितलाल- शाि_तसँ काज करबहक तँ सब चीजक रा{ता लिग जेतइ।

सुखबा- चलू बाबू। अहq सभ लहाश लग बैसब। ओइठाम िकयो नइ छइ। दाह-
सं{कारक लेल हमरा कतेक चीजक इि_तजाम करए जाए पड़त।

पितलाल- चलह।
(सुखबा आगू आ पाछूसँ पितलाल आर लुतीचन िवदा होइत अिछ।)
q
सीन Óॉप।

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दृcय- तीन

समय- िदन।
{थान- च_देसरक घरक एक भाग

(चौकीपर च_देसरक लहाश अिछ। एकटा औरितया ओइठाम बैसल अिछ।
सुखबा, पितलाल आ लुतीचनक Dवेश।
(पितलालकS देखते औरितया नोर पोछैत िवदा भऽ जाइत अिछ।)

सुखबा- अहq सभ अहीठाम बैसू आ हमरा लकड़ीक इि_तजाम करैले जाए िदअ।
(कहैत िवदा भऽ जाइत अिछ। पितलाल माथपर हाथ दऽ एक कातमे बैस
जाइत अिछ।)

लुतीचन- मन िकएक दुिखत करै छी। बुढ़ छेलैथ नीके भेलैन जे मिर गेला।

पितलाल- से तँ ठीके कहै छी। मुदा प£ी आ बेटाकS की जवाब देबै? ओ तँ हमरे िदस
हुड़कान मारै छइ।

लुतीचन- की हुड़कान मारैए ?
पितलाल- धुर तूँ की बुझबीही। गुड़क मािर तँ धोकड़े बुझै छइ। प£ी कहैत रहैए जे
लेाककS केते दहेज देलकै। मुदा अहqकS ठिक लेल। गछलो टका निह देलक।
अहq बुड़बक छी। मु²ख छी।
लुतीचन- अœछा, सुनू एकटा बात कहै छी।

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पितलाल- कह ने रौ। कोनो उपाय लगा ने।

लुतीचन- समधीक कान िदस देखै िछऐ।
(लहाश िदस इशारा करैत)
दुनू कानमे सोनाक कनौसी अिछ िनकािल कऽ जेबीमे रिख िलअ। िकयो
ऐठाम निह छै जे देखबो करत।

पितलाल- बात तँ तूँ ठीके कहै छँह मुदा बुिझ जेतौ तब की हएत ?
लुतीचन- ऐठाम आइ केतेक लेाक एतै आ जेतइ। ओइमे की पता चलतै जे के
लेलक। आ जँ बेसी डर बुझाइत अिछ तँ अपना गामे िदस चिल देबइ।

पितलाल- ठीके कहै छँह। इएह अि_तम उपाय अिछ।
(उिठ कऽ समधीक लहाश लग जाइत अिछ।)
q
सीन Óॉप।

दृcय- चािर

समय- िदन।
{थान- चौबिटया।

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ejournal 'िवदेह ' २५८ म अंक १५ िसत᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १२९ अंक २५८ )
मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 222 9-547X VIDEHA
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(पितलाल आ लुतीचन लफड़ल चौबिटया लग पहुँच गेल अिछ। पाछूसँ सुखबा
अपना दूटा गॱऑं घॲघाय आ चटपिटयाक संगे Dवेश करैत अिछ।)

सुखबा- (हjला करैत) यौ बाबूऽऽऽ। कनी ठाढ़ रहू।
(पितलाल आ लुतीचन ठाढ़ होइत अिछ)

घॲघाय- (हकमैत) यौ िकएक भागल जाइ छी?

पितलाल- भागल कहq जाइ छी। हम तँ गाम जाइ छेलॱ।

घॲघाय- गाम िकएक जाइ िछऐ ?

पितलाल- जाइ छी गामपर सँ बेटा-पुतौहकS भेज देबइ। ओ सभ एता तँ दाह-सं{कारमे
भागो लेता।

चटपिटया- अहqक घरपर समाद भेज देने छी। ओ सभ अिबते हेता। अहq परेशान
निह होउ।

पितलाल- परेशान केना निह हएब। दूटा माल-जाल अिछ। घर-अँगनाकS सुनहट
छोड़नाय नीक बात हेतइ। हम जाइ छी।

चटपिटया- एकटा ग®प सुिन िलअ समधीजी तब जाएब।

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पितलाल- जjदी कहू।

चटपिटया- केना कहब , किहतो अनोन सन लगैत अिछ आ निह कहब सेहो निह बनतै।

पितलाल- सोझ मुहS कहू ने। जे कहैक अिछ।

चटपिटया- देिखयौ, अहq ई निह सोचबै जे कोनो आरोप लगबै छी। ओना, कर-कुटमैतीमे
एहेन बात बाजब अनुिचते होइ छइ। मुदा जँ निह बाजी तँ आरो अनुिचत।
स_देह आ शंकाकS साफ कऽ ली, सएह उ‘म होइ छइ।

घॲघाय- तूँ तँ तेतेक ग®पकS घुमा-िफरी करै छहक जे एिहसँ नीक हमरा बाजए
दएह।

पितला- हँ-हँ, अहॴ बाजू।

घॲघाय- यौ समधीजी, लहाश लग अहॴ बैसल छेलॱ। तखनी ओइठाम िकयो निह
छेलै। सोनाक कनौसी कानमे निह छइ। अँगनाक {Lीगण सभ बजैए जे
समधीक कानक कानौसी अहॴ िनकािल लेिलऐ।
(पितलाल चु®पी साधने ठाढ़ अिछ।)

चटपिटया- चुप रहने काज निह चलत समधीजी। सोनाक कनौसी छेलै तँए पुछै छी।
अहqकS एना निह करबाक चाही।

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पितलाल- ठीके कहै छी। हमरा एना निह करबाक चाही। मुदा समधीजी जे हमरा संगे
केलक से हुनका करबाक चाही?
(पितलालक बेटा कंतलाल आ पुतौह फूलोदाय Dवेश करैत अिछ।)

चटपिटया- ओ तँ बेचारे {वग= चिल गेला। ओ अहq संगे की केने छला?

पितलाल- अखनी तक दहेजक ¤पैआ जे गछौटी केने छल से बॉंकीए अिछ।
ओना, अपने तँ दुिनयSसँ चिल गेला।
मुदा ओ ¤पैआ हमरा के देत ?

चटपिटया- ओ! तँए ओकरा बदलामे कानक कनौसी घॴच लेिलऐ।

पितलाल- तँ की किरतॱ। प£ी आ बेटा कहैत अिछ जे अहq मु²ख छी। िबआहमे
ठका गेलॱ। अहq मनुख निह छी।

कंतलाल- बाबूजी, अहq एतेक नीचा िगर जाएब से पता निह छल।

फूलोदाय- (पित कंतलाल िदस तकैत)
अहqक बाबूजी पिकया आदमी अिछ। जीयतक तँ बाते छोड़ू, मुइलोसँ सूइद
समेत तसील लैत अिछ।

कंतलाल- हुनकर सेानाक कनौसी अपास कऽ िदयौ। आब ऐ िवषयमे हम किहयो निह
बजब।

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पितलाल- ठीके छै, जखन तोरो वएह िवचार छौ तँ वापस कऽ दइ िछऐ।
(पितलाल सोनाक कनौसी सुखबाक हाथमे दैत अिछ।)

घॲघाय- अœछा, आब सब ग®प छोड़ू। चलै चलू, दाह सं{कारमे।

पितलाल- आब कोन मुहS ओइठाम जाएब। सोना तँ हम वापस कऽ देलॱ। मुदा हमर
DितQाक वापसी तँ निह भऽ सकैत अिछ।

फूलोदाय- िच_ता निह क¤ बाबूजी। अहq चलू। हमर घर-पिलवार िछऐ। हम सब
बात स7हािर लेबइ।

कंतलाल- बाबूजी, अहq तँ िघनेबे केलॱ। सासुरमे हमरो िघना देलॱ।

पितलाल- देिखयौ, जेकरा लेल कानलॱ, तेकरा ऑंिखमे नोरे निह। आब ऐठाम हम ठाढ़
निह रिह सकै छी।
(तेजीसँ D{थान)
q
सीन Óॉप।

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Suggested citation: डॉ. बचेश्वर झा. “मैथिली साहित्यमे यदुनाथ झा ‘यदुवर’क देन.” Videha — First Maithili Fortnightly eJournal, issue 258, 2018-09-15. https://www.videha.co.in/research/2018/258/मैथिली-साहित्यमे-यदुनाथ-झा-यदुवर-क-देन.htm

मूल विदेह अंक / Original issue