विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका · VIDEHA · ISSN 2229-547X

संपत्ति हस्तांतरण

रबीन्द्र नारायण मिश्र · 2018-09-15 · अंक 258

संपि‘क क€जा
ठीकसँ लेल जाए जािहसँ बादमे कोनो Dकारक झंझिटमे निह पड़ी।q

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ejournal 'िवदेह ' २५८ म अंक १५ िसत᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १२९ अंक २५८ )
मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 222 9-547X VIDEHA
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¬ाि_तदूत : कबीरदास
ओिह युगमे जखन धािम=क क×रवाद चमÄeकष=पर छल, जखनिक जाित-पाितक भेदबाव समाजक मा_यता Dा®त केनिह
छल संगिह सम{त िविध-िवधानकS Dाभािवत केने छल,कबीर दास एकिहबेर िवoोहक िवगुल बजा देलाह! ओिह युगमे जखन
उœच जाितक लोकक संपूण= समाज पर वच={व छलैक, जखन धािम=क, सामािजक एवम् आिथ=क शि±त पूण=तः िकछु €यि±तक
हाथमे िसमटल छल, -कबीरदास बािज उठलाहः
एक बूंद एक मल-मूतर, एक चाम एक गूदा।
एक जाितसे सव उपना, कौन वाभन कौन सूदा।।
€यि±त-€यि±तमे भेदभाव करब कबीरदासकS एकदम पिसन निह छलिन। एिह दृि¸सँदेखल जाए तँ ओ भि±तकालक
महान सा7यवादीछलाह।मानव-मानवमे िवभेद उतप³ करएबला धम=, अ_धिवrास वो वाï आडंवरक Dित जतेक कठोर
²िखकबीरदास अपनओलिन ततेक िकओ निह अपना सकल।हुनकर कहब छलिन जे मानव माL एकिह ईrरक अंशअिछ।
Dकृित सभकS एकरंग वनओने अिछ, सभक सोिनत एकिह रंग अिछ, तखन ई िवभेद िकएक?
एकै पवन एक ही पानी, करी रसोई _यारी जानी।
माटी सूँ माटी लै पोती, लागी कहौ कहq धूँ छोती।।
कबीरदासकS जाित िवभेद एªोर‘ी पिसन निह छलिन।ज_मभिर ओ पाखंड, सामािजक अ_याय, जातीय िव¿ेष, एवम्
आिथ=क शोषणक िवरोधमे लड़ैत रहलाह।वाभन, शुoक कथे कोन ओ तँ िह_दू, मुसलमानक िवभेदकS सेहो {वीकार निह करैत
छलाह।
जॱ तूँ वाभन वभनी जाया, तौ आन बाट है ±यो निह आया।
जॱ तूँ तुरक तुरकनी जाया, तौ भीतर खतना ±यो न कराया।।
कबीरदास उपदेशकवा पुजारी निह छलाह।जीिवकाक हेतु वो जुàाक धंधा करैत छलाह, जकरा सामािजक धरातलपर
पैघ काज निह मानल जाइत छलैक।{वयं कपड़ा बूनब एवम् दोसर हेतु मजूरीकए कपड़ा बूनबामे अ_तर छैक।कबीरदास
कोनो मािलकक काज निह करैत छलाह।ओ गृह उ]ोगक {वािभमानक रJा करैत पेट भरैत छलाह।ओ अपन €यवसायमे
ततेक रिम गेल छलाह जे हुनक का€यमे सदित ओही Dकारक व{तुसभक वण=न अिछ।एवम् Dकारेण €वसायजिनत DितQाक
सेहो हुनका कोनो परवाह निह छलिन।
ओ सगव= कहलाहः

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जाित जुलाहा मित को धीर, हरिष-हरिष गुण रमै कबीर।
मेरे राम की अभै पद नगरी, कहे कबीर जुलाहा।
तू वाभन मØ कासी का जुलाहा।।
कबीर दास मौिलक िवचारक छलाह।धम=क वा{तिवक ताeपय=कS ओ बुझलाह आओर साधारण जनता धिर ओकरेभाषामे
तकरा रखलाह।तािह हेतु हुनका कोनो दुग=ित वqकी निह रहलिन।Dाणोक रJा किठन भए गेलिन।परंतु ओ िनभ=यतापूव=क अपन
िवचारपर अिडग रहलाह। तeकालीन समाजक िकछुशि±तशाली लोक कबीरदासक Dवल िवरोध कएलक। तS कबीरदासकS
कहए पड़लिनः
किबरा खड़ा बजारमे, िलआ लकुिट हाथ।
जो घर जारे आपना, धरै हमारे साथ।।
तमाम िवरोधक बाबजूद कबीरदास ¤कलाह निह, अपन िवचार लए कए आगू बढ़ैत रहलाह एवम् समयक कसौटीपर
सही उतरलाह।
भ±त कबीरक ई अनुभव छलिन जे शा{L मय‹दाक संग संDदाय िनQा जुड़ल होइत अिछ।शा{L एवम् संDदायक
सीमानमे रिह कए मानव माLक हेतु भि±तक सव=सुलभ पथ D{तुत निह कएल जा सकैत अिछ।भि±तपथक दूटा महान
अवरोधिथक-शा{L एवम् संDदाय जे भि±त भावनाकS सरल सहज रहए निह दैत अिछ।कबीर सहजमे आ{था रखैत छलाह।
हुनक लगाव कोनो Dकारक²िढ़ एवम् अ_ध मय‹दासँ निह छलिन।अनुभवकक तराजूपर त»य एवम् सeयकS परिख कए ›हण
eयाग करब हुनकर जीवन¬म छलिन। धािम=क अ_धिवrास एवम् ढ़ॲगकS ओ Dवल िवरोधी छलाह।
कंकड़ पाथर जोिड़ कए मि{जद िदओ बनाय।
ता चिढ़ मुjला बvग देइ ±या बिहरो भयो खुदाइ।।
संगिह ओ इहो कहलाहः
पाथर पूजे हिर िमले तé मØ पूजूँ पहाड़।
तासे तो चªी भली िपसे खाय संसार।।
Dखर मानवतावादी कबीर धािम=क DपंचकS चुनौती देलाह। िनभÒक एवम् तट{थ भावसँ ओ समाजमे विढ़ रहल ढ़ॲगक
िवरोध केलाह-
यह सब झुठी बंदगी, िबरथा पंच नबाज।
सqचै मारै झुिठ पिड़, काजी करै अकाज।।
करसे तो माला जपै, िहरदै बहै डमडूल।
पग तो पालामे िगरया, भजण लागी सूल।।
जप-तप संजम पूजा अरचा, जोितग जग बौराना।

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कागद िलिख-िलिख जगद भूलाना, मन ही मन न समाना।।
कबीरदास युग िनम‹ता छलाह। ओ पारंपिरक लीकसँ हिट कए समाजकS एकटा ¬vितक माग=पर अनलाह।गरीब-
धनीक, ´ाµण-शूo, आिदक बीचमे वग= सम_वयक सहज माग= D{तुत केलाह।मानवतावादक Dचार कए धम=क वा{तिवक अथ=कS
लोक बूझए, तकर Dयास केलाह।ओ अपन सम{त जीवनकS परोपकार एवम् मानव कjयाणमे लगा देलाह।
मानवमाLक क¸ िनवारणक हेतु ओ िचंितत रहैत छलाह।
सुिखआ सब संसारहै, खाबे अ² सोबै।
दुिखआ दास कबीर है, जागे अ² रोबे।।
अ{तु, ई तय अिछ जे कबीरदास संत आ किव तँ छलाहे सभसँ बिढ़कए ओ ¬ाि_तकारी छलाह।सम{त समाजमे ओ
एकटा नवचेतना आनए चाहैत छलाह।वग= िवभेदकS न¸कए समाजमे मानवतावादक {थापनाचाहैत छलाह।ईrर एक
छिथ, मनु±ख एक अिछ, िवभेद मानव िनिम=त अिछ-से हुनकर मंLवा±य छल।
समाजक ि{थिततँ तेहने छल जे ईrरक केबार िकछुए लोक हेतु खुजैत छल।तेहन समाजमे ताल ठोिक अपनिवचार
किह देब एवम् ओकरा €यवहारमे आनब एकटा ¬ाि_त निह तँ की छल ?Dयोजन अिछ समाजमे एहने €यि±तeवकS, जे हमरा
लोकिनकS वत=मान सामािजक अ_L¿ंदसँ मुि±त दए सकए।q

मकर सं¬vित
मकर सं¬ाि_त स7 पूण= भारत ओ नेपालमे सव=L कोनो-ने-कोनो Dकारसँ मनाओल जाइत अिछ। पौष मासमे जखन सूय=
मकर रािशमे अबैत छिथ तखने ई पाविन मनाओल जाइत अिछ। Dितवष= मकर सं¬ाि_त १४ वा १५ जनबरीकS पड़ैत अिछ।
तिमलनाडूमे मकर सं¬ाि_तकS ‘पॲगल’ कहल जाइत अिछ। कन‹टक, केरल एवम् आँ¯Dदेशमे एकरा सं¬ाि_तये कहल
जाइत अिछ। पंजाब आ हिरयाणामे ‘लोहड़ी’ कहल जाइत अिछ एवम् एक िदन पिहने अथ‹त् १३ जनबरीकS मनाओल जाइत
अिछ। उ‘र Dदेशमे एकरा मूलत: दानक पाविनक ¤पमे मनाओल जाइत अिछ। Dयागमे Dितवष= १४ जनबरीसँ माघमेला
Dारंभ होइत अिछ। माघ मेलाक Dथम { नान १४ जनबरीसँ Dारंभ भए कए अि_तम { नान िशवरािLकS होइत अिछ। महारा° Ñमे

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एिह िदन िववािहत मिहला अपन पिहल सं¬ाि_तपर तूर-तेल वा नून अ_ य सुहािगनकS दइ छिथ। बंगालमे एिह िदन { नानक
बाद ितल दान करबाक Dथा अिछ।
एिह अवसरपर गंगासागरमे Dितवष= िवशाल मेला लगैत अिछ। असममे मकर सं¬ाि_तकS ‘माघ-िवहू’ अथबा ‘भोगाली
िवहू’क नामसँ जानल जाइत अिछ। राज{ थानमे एिह पव=पर सुहािगन मिहला अपन सासुकS िवयिन दए आशीव‹द Dा®त करैत
छिथ। संगे कोनो सौभा«य सूचक व{ तुकS चौदहक संÝ यामे पूजन एवम् संकjप कए चौदहटा ´ाµणकS दान दइ छिथ।
मकर सं¬ाि_तक माf यमसँ भारतीय सÁ यता एवम् सं{ कृितक िविवध ¤पमे आभास होइत अिछ। एहेन धारणा अिछ जे
मकर सं¬ाि_तक िदन शुÐ घी एवम् क7 बलक दान केलासँ मोJक Dाि®त होइत अिछ।
माघे मासे महादेव: यो दा{ पित वृहक7 वलम्
स भु±e वा सकलान भोगान अ_ ते माJ Dा®पित।।
पुराणक अनुसार मकर सं¬ाि_तक पव= वáµा, िव° णु, महेश, गणेश, आधशि±त आ सूय=क आराधना एवम् उपासनाक पावन
वáत अिछ जे तंL-मंL-आe माकS शि± त Dदान करैत अिछ। संत-महिष= लोकिनक अनुसार एकर Dभावसँ Dाणीक आe मा शुÐ
होइत अिछ, संकjप शि± त बढ़ैत अिछ, –ान तंतु िवकिसत होइत अिछ। मकर सं¬ाि_त अही चेतनाकS िवकिसत करएबला
पाविन अिछ। ई स7 पूण= भारतमे कोनो-ने-कोनो ¤पे मनाओल जाइत अिछ।
पुराणक अनुसार मकर सं¬ाि_तक िदन सूय= अपन पुL शिनक घर एक मासक हेतु जाइत छिथ, कारण मकर रािशक
{ वामी शिन छिथ। य]िप É योितषीय दृि¸सँ सूय= आ शिनक ताल-मेल संभव निह अिछ, तथािप एिह िदन सूय= { वयं अपन
पुLक घर जाइत छिथ। पुराणमे आजुक िदन िपता पुLक स7 ब_ धमे िनकटताक Dारंभक ¤पमे देखल जाइत अिछ।
मकर सं¬ाि_तक िदन गंगाकS पृ» वीपर आनएबला भगीरथ अपन पूव=जक तप=ण केने छलाह। हुनक तप=ण { वीकार
केलाक बाद एही िदन गंगा समुoमे िमिल गेल रहिथ। तँए एिह िदन गंगा सागरमे मेला लगैत अिछ। िव° णु धम=सूLक अनुसार
िपतरक आe माक शाि_तक हेतु एवम् अपन { वा{ थवÐ=न ओ सबहक कjयाणक हेतु ितलक Dयोग पुu यदायक एवम् फलदायक
होइत अिछ। ितल-जलसँ { नान करब, ‘ितल’क दान करब, ितलसँ बनल भोजन, जलमे ितल अप=ण, ितलक आहुित एवम्
ितलक उवटन लगाएब।
एिह िदन भगवान िव° णु असुरक अ_त कए युÐ समािजक घोषणा केने छलाह। ओ राJस सबहक मुड़ीकS मंदार पव=तमे
दबा देने रहिथ। एतदथ= एिह िदनकS अशुभ एवम् नकाराe मकताकS समा®त करबाक िदनक ¤पमे देखल जाइत अिछ।
सूय=क उ‘रायण भेलाबाद देवता लोकिन वáµ मुहु=त उपासनाक पुuयकाल Dारंभ होइत अिछ। एिह कालकS परा-अपरा
िवधाक Dाि®त काल कहल जाइत अिछ। साधनाक हेतु एकरा िसिÐकाल सेहो कहल जाइत अिछ। एिह समयमे देव
Dित° ठा, गृह िनम‹ण, य–कम= आिद पिवL काज कएल जाइत अिछ।
रामायण कालसँ भारतीय पL-पिLकामे दैिनक सूयÄपारायणक Dचलन अिछ। रामचिरतमानसमे भगवान राम ¿ारा गुÞडी
उड़ेबाक काय=क उj लेख सेहो अिछ। मकर सं¬ाि_तक वण=न वािj मकी रामायणमे सेहो भेल अिछ।
राजा भगीरथ सूय=वंशी छलाह। ओ भगीरथ तप-साधनाक ¿ारा पापनािशनी गंगाकS पृ» वीपर आिन अपन पूव=जक उÐार
केने छलाह। राजा भगीरथ अपन पूव=जक गंगाजल, अJत,ितलसँ wाÐ-तप=ण केने छलाह। तिहआसँ मकर सं¬ाि_तक { नान
आ मकर सं¬ाि_तक wाÐ-तप=णक परंपरा चिल रहल अिछ।

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किपल मुिनक आwमपर मकर सं¬ाि_तक िदन मq गंगाक पदाप=ण भेल छल। पावन गंगाजलक { पश= माLसँ राजा
भगीरथक पूव=जकS { वग= Dाि®त भेलिन।
किपल मुिन वरदान दैत बजलाह-
“मातृ गंगे िLकाल तक लोक सबहक पापनाश करतीह एवम् भ± तजनक सात पुcतकS मुि±त एवम् मोJ Dदान करतीह।
गंगाजलक { पश=, पान, { नान ओ दश=न सभ पुu यदायक फल Dदान करत।”
सूय=क सातम िकरण भारतवष=मे आfयािe मक उ³ितक Dेरणादायी अिछ। सातम िकरणक Dभाव भारतवष=मे गंगा-जमुनाक
मf य अिधक समय तक रहैत अिछ। एिह भौगोिलक ि{थितक कारण हिर¿ार आ Dयागमे माघमेलाक आयोजन होइत अिछ।
िपतृतुj य भगवान भा{ कर दिJणायनसँ उ‘रायणमे जाइत काल उज‹मयी Dकाश पृ» वीपर वष‹ करैत छिथ। अतुj य शि± त
wोत Dकृित राितकS छोट एवम् िदनकS पैघ करए लगैत छिथ। पृ» वीमाता उदर{ थ आनाजकS पकबए लगैत छिथ। चा¤ तरफ
शुभे-शुभ होइत रहैत अिछ। एहेन अÜुत समयमे मकर सं¬ाि_तक पव= मनाओल जाइत अिछ।
स¬ाि_तक िदन पंजाबमे ‘लोहड़ी’क नामसँ मनाओल जाइत अिछ। पंजाबक अितिर± त ई पाविन िहमाचल
Dदेश, हिरयाणा, दिJणी उ‘र Dदेश आ ज7 मू काc मीरमे सेहो धूम-धामसँ मनाओल जाइत अिछ। पारंपिरक
तौरपर ‘लोहड़ी’ फसलक रोपनी आ ओकर कटनीसँ जुड़ल एक िवशेष पाविन अिछ। एिह िदन वॉंनफायर जकq आिगक ओलाव
जरा कए ओकर चा¤कात नृeय कएल जाइत अिछ। बालक सभ भvगड़ा, वािलका सभ िगÐा नृeय करैत छिथ। लोहड़ीक
आलावक आसपास लोक एकÙा भए दुj ला-भÙी Dशंसामे गायन करैत छिथ।
केतेको गोटेक मा_ यता अिछ जे ‘लोहड़ी’ शË द लोई (सत कबीरक प£ी) सँ उeप³ भेल मुदा अनेक लोक एकरा
ितलोड़ीसँ उeप³ मानै छिथ, जे बादमे लोहाड़ी भए गेल।
लोहड़ीक ऐितहािसक स_ दभ= सु_ दरी-मुंदरी नामक दूटा अनाथ क_ या छली। ओकर काका ओकर िववाह निह करए
चाहैत छल अिपतु ओकरा राजाकS भSट कए देबए चाहैत छल। ओही समयमे हुj ला भ×ी नामक एकटा उफqइट छौड़ाकS
नीकठाम िबआह कए देलक। वएह उफqइट वरपJकS िबआहक हेतु मनाओलक आ जंगलमे आिग जरा कए दुनू क_ यqक िबआह
करओलक। कहल जाइत अिछ जे दुj ला शगुनक ¤पमे गुड़ देलक। भावाथ= जे उफqइट होइतो दुj ला भ×ी िनध=न वािलका
सबहक क_ यqदान केलक एवम् ओकरा अपन कªाक अe याचारसँ बँचओलक।
लोहड़ीक िदन बœचा सभ दुj ला भ×ीक स7 मानमे गीत गबैत घरे-घर घुमैत अिछ। बœचा सभकS िमठाइ एवम् अ_ य
व{ तु सभ दैत अिछ। जँ कोनो पिरवारमे कोनो खास अवसर जेना बœचाक ज_ म, िववाह आिद अिछ तँ लोहड़ी आर धूम-
धामसँ मनाओल जाइत अिछ। सिरसवक साग आ मकईक रोटी खास कए एिह अवसरपर बनाओल जाइत अिछ।
तािमलनाडूमे एिह समय ‘पॲगल’ मनाओल जाइत अिछ। Dचूर माLामे अ³क उपजापर भगवान सूय=कS ध_ यवाद –ापन
हेतु पाविनक आयोजन कएल जाइत अिछ। तािमलनाडूक अलावा पुडुचेड़ी, wीलंका, िवr भिरमे पसरल तिमल लोकिन एकरा
मनबैत छिथ। ओइ पॲगलमे चािर िदन तक–माने १४ सँ १६ जनवरी तक–मनाओल जाइत अिछ।
इ_ o देवताक स7 मानमे पिहल िदन भोगी उe सव मनाओल जाइत अिछ। पॲगल दोसर िदन मािटक वत=नमे दूधमे चाउर
पका कए खीर भगवान सूय=कS आन-आन व{ तु संगे चढाओल जाइत अिछ। एिह अवसरपर घरक आगूमे कोलम (अपना
ओइठामक अिरपन जकq) बनाओल जाइत अिछ। पॲगलक तेसर िदन मÙू पॲगल कहल जाइत अिछ। एिह िदन गायकS नाना
Dकारसँ सजा कए ओकरा पॲगल खुआएल जाइत अिछ। चािरम िदन क_तुम पॲगल कहल जाइत अिछ। घरक मिहला सभ
{ नानसँ पूव= हरिदक पातपर िमठाइ, चाउर, कुिसयार हरिद आिद रािख कए अपन भाय लोकिनक कjयाण कामना करैत छिथ।

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भाइक हेतु हरिद, चून, चाउरक पािनसँ आरती करैत छिथ आ ई पािन घरक आगूमे बनल कोलमपर िछड़िक देल जाइत
अिछ।
जj लीक×ू म×ू पॲगल िदन पॲगल पव=क एक िह{ साक ¤पमे खेलल जाइत अिछ। एिह लेल ›ामीण सभ पिहनेसँ
सqढ़कS खुआ-िपआ कए तैयार केने रहैत छिथ। एिहमे मूलत: केतेको गामक मि_ दरक सqढ़ (कोिवल कालइ-तिमल नाम) भाग
लैत अिछ। जj लीक×ूक तीन अंग होइत अिछ : वािट म_ जू िवरा×ू, वेली िवरा×ू आ वाटम ग_ जु िवरा×ू। वािट म_ जु िवरा×ूमे
सqढ़कS जे €यि±त िकछु दूरीपर िकछु समय तक रोिक लइ छिथ, से िवजेता होइ छिथ। वेली िवरा×ूमे सqढ़कS खाली मैदानमे
छोिड़ देल जाइत अिछ आ लोक ओकरा िनयंLणमे करबाक Dयास करैत अिछ। वाटम म_ जुिवरा×ूमे सqढ़कS नमगर र{ सीसँ
बाि_ ह देल जाइत अिछ, आ िखलाड़ी सभ ओकरा िनयंिLत करबाक Dयास करैत छिथ।
स7 पूण= देश जकq िमिथलvचलमे सेहो मकर सं¬ाि_तक पव= मनाओल जाइत अिछ। गाम-घरमे एकरा ितला सं¬vित सेहो
कहल जाइत अिछ। अं›ेजी नया सालक ई पिहल पाविन होइत अिछ। लोकक घरमे नव अ³ भेल रहैत अिछ। पिहनिहसँ
लोक चूड़ा कुटा कए एिह पाविनक तैयारी केने रहैए। अपना एिहठाम माघ मासकS अeय_त पिवL मास मानल जाइत अिछ।
बूढ़-बूढ़ मिहला सभ भोरे-भोर जाड़-ठाढ़कS िबसरैत पोखिरमे डुबकी लगबै छिथ। गाममे कएटा मसोमात, वृÐा सभकS थर-थर
कँपैत { नान करैत देखैत छिलएिन। सभसँ मनोरंजक दृc य तँ तखन होइत छल, जखन ओ सभ महादेवक माथपर जल
ढाड़ैतकाल गाम-घरक सभटा झगड़ा सोझराबएमे लागल रहैत छली। जानह हे महादेव! हमरा पेटमे िकछु निह अिछ। हमर
मोन गंगासन िनम=ल अिछ मुदा एहेन अe याचारक िनपटान तूँहॴ किरयह।
..पता निह, महादेव सुिनतो छलिखन की निह। मुदा हमरा ई सभ सुिन कए ज¤र वकोर लागल रहैत छल।
बœचामे पाविन सभ अÜुत आन_ दक िवषय रहैत छल। सभसँ सरल ओ आन_ ददायी होइत छल ितला सं¬vित। भोरे-
भोर पोखिरमे जा कए डुबकी लगाउ। माइक हाथे ितल-चाउर खाउ। ितल-चाउर खुअबित काल माए पुछिथ-
“ितले-ितले बहब की निह?”
तािहपर किहअिन-
“खूब बहब।”
िवध समा®त। तकरबाद चुरलाइ, ितलबा इe यािद भिर मोन खाउ...।
कएक िदन पिहनिहसँ चुरलाइ, ितलबा (ितललाइ) आ लाइ (मुरहीक लाइ) बनेबाक काय=¬म Dारंभ भए जाइत छल।
घरक वातावरण चुरलाइक सुग_ धसँ पिरपूण=। एिह पाविनमे सभसँ िवशेषता ई अिछ पाविनक साम›ी बिन गेल तँ ओकरा लेल
बेसी DतीJा निह करए पड़ैत अिछ। िदनमे वáाµण भोजन होइत छल। वáाµण िकयो आसे-पासक लोक होइत छलाह,कारण
भिर गाममे भोजे रहैत छल। ब×ा भिर-भिर घी िखचिड़मे देल जाइत। संगे तरह-तरह केर पकवान सभ सेहो रहैत छल।
हमरा गाममे िकछु गोटे ओइठाम ितला सं¬ाि_तमे िजलेबी बनैत छल। भोजमे िखचिड़क संग िजलेबी खेबाक बœचा
सभकS अÜुत उe साह रहैत छल। िखचिड़मे ततेक Dचूर माLामे घी रहैत छल जे भोजनक बाद हाथ साफ-साफ धोनाइ
किठन। पाविनक कएक िदन बादो धिर चूरालाइ आ ितलबाक आन_ द भेटैत रहैत छल।
एिह पाविनमे चूड़ा, दही, खेबाक सेहो परंपरा अिछ। चूरा-दहीक वण=न करैत ख×र कका कहलिखन जे जखन पातपर
चूड़ाक संग आम, धाLीक अँचार ओ तरकारी परसल जाइत अिछ तँ बुझू जे अ_ हिरया आिब गेल। तकर बाद जखन दही

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परसाएल तँ बुझू जे इजोिरया। जेना पातपर च_ oमा उतिर गेलाह। ऊपरसँ जँ मधुर रािख देल जाए ओ कौर पेटमे गेल तँ
पुछू निह। पुरा सोिनत ठuढा जाइत अिछ आ आe मा तृ®त भए जाइत अिछ।
िमिथलvचलमे एिह पव=कS मनेबाक अÜुत परंपरा अिछ। चुरलाइ खाउ, चुरा-दही खाउ, िखचिड़ खाउ, जे खाउ, जखन
खाउ...।
व{ तुत: ई आन_ दक पव= िथक जे कोनो-ने-कोनो ¤पे स7 पूण= भारतपवष=मे मनाओल जाइत अिछ। सूय=क तेजक मकर
सं¬ाि_तसँ जिहना बढ़ैत रहैत अिछ, तिहना सभ लोक-वेदक सुख बढ़ैत रहए, सएह एिह पाविनक f येय िथक।

रबी_o नारयण िमwक
दूटा लघुकथा
पढ़ू पूत चuडी
समय एक गितसँ आगा बढ़ल जा रहल अिछ। मुदा हम-अहq ओकर Dवाहमे किह निह
कतए पहुँिच जाइत छी। जेना कोनो तेज धारमे छोट-मोट कतेको व{तु {वत: दहाइत कहq-
सँ-कहq पहुँिच जाइत अिछ , वएह हाल एिह िजनगीक अिछ।
“अहq की केलहुँ? घूरतर बैसल Dाय: िनeय सqझमे गामक कैटा बूढ़सभ आपसमे चच‹
करैत छलाह। ”
±यो िकछु, ±यो िकछु कहैत। ग®प-स®प िबबादक ²प धरैत आ अ_ततोगeवा किहओ
काल झंझटोक संभावना भए जाइत। सभसँ ढीठ ओ दबंग ठीठरकका पहलमान वो अपढ़
छलाह आ ओिह घूरक महिफलमे डंकाक चोटपर किहतिथ-
“पढ़ू पूत चuडी जासे चले हuडी। ”
स]: लाभमे पूण= आ{था छलिन। भोरमे बœचा मिहष चरौलक आ स qझमे एक डाबा
गरम-गरम दूध। एिहसँ नीक शा{L की भए सकैत छल ? सभ पढ़ाइ-िलखाइ €यथ=। किहआ
पढ़त आ किहआ कमाएत.. ? मुदा, ओहीठाम हीरा कªाक {वर एकदम दोसर रंग छल। िधया-
पुता पढ़त तँ िवचारवान होएत आ सुखी रहत।

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गाममे ओिह घूरक चच‹ चिच=त छल। दूनू गोटासँ सqझमे जँ बैिसतिथ तँ अपन-अपन
दश=नक अनुसार ज¤र बिजतिथ आ पिरणाममे िववाद होइत।
ठीठरकका दबंग ओ लठैत छलाह। जबरद{त खेती-पथारी रहिन। िधया-पुता सभ बेस
मोट-सॲट आ लंठ। सभ खेतीमे लागल रहैत छल। पिरवार सुखी छल। हुनका तुलनामे हीरा
कªाक हालत पातर छल। िधया-पुता सभ {कूल-कॉलेजमे पिढ़ रहल छल। खेती-पथारी
कोनो खास निह। तS कखनो काल ठीठर कªाक कथन ठीक बुझाइत छलिन। मुदा दूनू गोटे
अपन-अपन िवचारपर दृढ़ छलाह।
हीरा ककाकS अपन िधया-पुताक बड़ आशा छलिन। आ तS अपन स7पूण= शि±तसँ िधया-
पुताकS िशJा €यव{थामे लागल रहैत छलाह।
समय िबतैत गेल आ हुनकर सभ नेना सभ पिढ़-िलिख यथायो«य नीक-नीक {थानपर
पहुँचलाह। ओमहर ठीठरक गृह{ती िदन-Dित-िदन गड़बड़ाइत गेल। वृÐाव{थाक जोर
पकिड़तिह पुL सभ आपसमे लड़ैत रहैत छलाह। बात िबगड़ैत देिख वो सभकS फराक-फराक
कए देलिखन। जमीन-जथा बँिट गेल।
बीस बख=क बाद आइ ने हीरा बाबू छिथ आ ने ठीठरकका। मुदा सुनबामे बहुत िकछु
आएल। ठीठरकका बड़ क¸मे मिर गेलाह। बेटा सभ खेत-पथार बेिच लेलक आ पेट
पोसबाक हेतु गामसँ पड़ा गेल। हीरा बाबू सेहो सुखी निह भए सकलाह। िधया-पुता सभ
पढ़लक-िलखलक ज¤र मुदा सभ अपनामे €य{त। ककरो बूढ़ाक €यथापर सोचबाक
समय , इœछा ओ साम»य= निह भेलैक। ±यो कलक‘ा तँ ±यो बंबई। पqचो बेटा पqचटा शहर
धेने छलाह। सुनबामे ईहो आएल जे मिझला बेटा लखनउमे मकान बना लेलक अिछ। हीरा
बाबू ओिहना एसगर टकटक तकैत िबदा भए गेलाह।
ओिह {कूलमे मौलाना-जोलहाक बेटा सेहो हमरा सभहक संगे पढ़ैत छल। पढ़एमे सामा_य
छल मुदा अeय_त सÉजन वो संवेदनशील। कै िदन गामसँ {कूल जाइत काल वो भेिट
जाइत। मुदा वो {कूल िनयिमत निह जाइत छल। कै िदन बाधमे ओकरा हम सभ हर जोतैत
देिखयैक। हँिसयो लागय आ दुखो भए जाए। किहओ काल ओकर िपता सेहो भेिट
जाइत , एकटा आ›हक संग-
“बौआ , माहटर साहेब बाबूसँ किह देबै जे हमर बचबा आज नै जाएत।”

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पुिछऐक-
“िकए ?”
तकर जवाबमे पनिपआइ गमछामे ब_हने हर जेातइत अपन बेटा िदिस इसारा करैत।
कै िदन हमरा संगे वो {कूल जाइत। र{तामे भSट भए जाइत छल। गमछामे पqच-छहटा
िकताब ओ िकछु कॉपी ब_हने हमरा देखैत घरेसँ आबाज दैत-
“हमहँ चलब। ठाढ़े रहब। ”
आबाज सुिन कए हम-सभ पाकरी गाछक तरमे सु{ताए लगैत छलहुँ। {कूल पहुँिच
सभसँ पिछलका सीटपर वो बैिस जाइत छल। आ कै िदन तँ सभ घuटीमे मािर खाइत रहैत
छल। िबना कोनो आ¬ोश आ Dितकृयाक कै िदन किहितऐक-
“एना मािर िकएक खाइत रहैत छह ! नीकसँ पढ़ाइ करह। ”
मुदा वो हमर-सभहक बात सुिन िकछु-िकछु अकाðय तक= दए दैत छल।
बहुत िदनक बाद ओकरा एक िदन चौकपर िर±सा लगौने देखिलयैक। हमरा देिख
ओकरा उeसाह भेलैक। Dाय: ओकरा भेलैक जे ई याLीपर ओकरा िबशेष अिधकार छैक।
एक बेर हमरा मोन भेल जे ओही िर±सासँ चली मुदा आeमा िसहिर गेल। हमर वो सहपाठी
िर±सा चलाओत आ हम ओिहपर बैसल रहब। आ हम कात भए गेल रही। िकछुए कालक
बाद ओकर बूढ़ िपता एक गñर कपड़ा लेने आएल। Dाय: हमरा निह िचि_ह सकल। ओिह
िर±सापर गñर रािख बाप-बेटा िमिल कए बीड़ी पीबए लागल। समयक एतेक अ_तरालक बादो
बाप-बेटाक {नेह बनल छल। हमरे सभहक संगे िकछु विरQ िव]ा थÒ सभ सेहो {कूल जाइत
छलाह। जािहमे सँ कै गोटा मैिÑकमे चािर-पqच बेर फेल कए ¬ाि_तकारी भए गेल छलाह।
गाममे छोटका लोक सभकS संगिठत कएक ओ सभ महा उपoव ठाढ़ कए देने छल। कैटा
पैघ गृह{थक हर-जन ब_द भए गेल छल। पिनभरनी सभ आँगनमे काज निह करत आ
भिरआ भार लए कए निह जाएत। जकर घर जािह जमीनपर छैक से तकर हेतैक। ई हेतै
वो हेतै आ भए कए रहतै। िदन राित गाममे घोल-फचªा होइत रहैत...।

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सभसँ बड़का आफद बड़का मािलककS भेल रहिन। वो एकदम िचंितत भए गेल रहिथ।
िदन-राित हुनका ओिहठाम भuडारा चलैत रहैत छल। इलाकाक पहलमान ओ लंठक जमघट
रहैत छल।
समय बीतलाक संग-संग वो ¬ाि_तकारी सभ शा_त भए गेलाह। अिधकvश कतहुँ-कतहुँ
चाकरी कए रहल छलाह आ एकाधटा अकाल मृeयुक सेहो िशकार भए गेलाह।
बड़ीकाल बैसल इएह सभ सोचैत रही िक िदनेश भाए भेट भए गेलाह। ओ हीरा बाबूक
जेठ भाितज छलाह आ अंतकालमे वएह बेचारेक सेवा केने रहिथ। हीरा बाबूक छोट पुL टुना
हमर सहपाठी छलाह। हुनके Dित ग®प होमए लागल। कहलाह जे वो तँ बहुत िदनसँ लंदनमे
रहैत अिछ। बड़का हािकम भए गेल अिछ आ बहुत रास पैसा कमाइत अिछ। मुदा कै बख=सँ
गाम निह आएल अिछ।
पुछिलयिन-
“हीराबाबूक काजमे आएल रहिथ की निह ?”
“निह आएल रहिथ। ”
छगु_तामे पिड़ गेलहुँ। पुछलऐक- “िकएक ?”
“किह निह !मुदा मृeयुसँ दू-तीन बख= पूव= आएल छलाह। गाम डोिल गेल रहए। जाइत
काल बहुत रास टाका िपताकS दैत रहिथन मुदा ओ निह लेलिखन। ”
िबœचेमे चॱकैत पुछल-
“कारण ?”
“कहq दिन कहलिखन जे ई पैसा अहॴ राखू। काज आओत। जािह पैसाक कारण अहq
एतेक दूर चिल गेलहुँ, गाम-घर ,माए-बाप ओ सभ िकछु eयाग कए देलहुँ तािह पैसाकS €यथ=
हमरापर िकएक न¸ कए रहल छी। टुना तिहआसँ घुिर कए गाम निह अएलाह। ”
“मुदा ठीठर ककाकS की भेल ?”

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की कहूँ!सभ बेटा घर छोिड़ पड़ा गेल। करबो की किरतैक। गामपर िकछु निह बqचल
रहैक। असगर ठीठर कका कािह कटैत रहैत छलाह। जेठकी पुतोहु थोड़-बहुत सेवा कए
दैत छलिखन। ”
एक बेर फेर ठीठर कका भीमकाय ओ हुनक आ®त वा±य मोन पिड़ गेल-
“पढ़ू पूत चuडी, जा से चलए हuडी। ”
शरीरमे बड़ थाकान बुिझ पड़ैत छल , किह निह कखन नी³ आिब गेल।
¦

मुÝयमंLीक {वò
“की करी िकछु फुरा निह रहल अिछ.. ! Dेसबला सभ पाछू पिड़ गेल अिछ। जतए जाउ
ओतिह ई सभ पहुँिच जाएत। ” मुÝयमंLीजी बािज उठलाह। पुन: अपन Dेस सिचवकS
बजौलिखन-
“िम{टर िसंह। अहq एकटा िव–ि®त अखबारमे Dकािशत करबा िदयौक जे Dेसक आदमी
मुÝयमंLीसँ स7बि_धत ओही समाचारकS Dकािशत कराबिथ जे हुनकर सरकारी कारोबारसँ
स7बÐ होइक आ जकरा छापब जनताक हेतु िनता_त आवcयक होइक। संगिह ईहो समाचार
Dकािशत करबाओल जाए जे हमर €यि±तगत कृया कलाप छापए बला समाचार पL ओ सभ
€यि±तक िव¤Ð कार=वाई कएल जाएत। ”
उ‘रमे Dेस सिचव बािज उठलाह-
“ठीक सर। Dेस बला सभकS किह निह की भए गेल छैक ? एकरा सभकS सबक
सीखेनाइ बेस ज¤री िथक। हम आइए ई िव–ि®त Dकािशत करबा दैत िछयैक। ”

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हद भए गेल !किह निह , Dेसबला सभकS की भए गेलैक अिछ। ”
अहॴ कहू अपना सभमे बिलदान देबाक तँ पुरान Dथा छैक आ तािह बातकS लए कए
Dेसबला सभ छािप देलकै अिछ आ सॱसे देशमे हरिवड़Ä मिच गेल। जे ितवारीजी अपन कुसÒ
बचएबाक हेतु छागरक सोिनतसँ {नान कएलिन अिछ। लगैत अिछ जे Dेसबला सभकS सबक
सीखबिह पड़त। मुदा कोना? कािà एिह िवषयपर िब{तारसँ िवचार-िवमश= कएल जएतैक।
“मैडम। Dेस िवल तँ अहॴक आ–ासँ लगाओल गेल। ”
मुदा जािह तरहक िवरोध एकर भए रहल अिछ से तँ अDeयािशत अिछ। लगैत अिछ
हमरा नव मुÝयमंLीक िनयुि±त करिह पड़त। ”
“हम तँ अहqक शरणमे सिदखन रहलहुँ अिछ। कही तँ एिह िवलकS आपस लए ली?”
“एकर बादो हम ई आrासन निह दए सकैत छी। फेर ग®प कएल जेतैक। ”
-±यो मिहला {वर एतबा किह कए टेलीफोन कािट देने छल। एकर बादे माननीय भूतपूव=
मुÝयमंLीजीक िन³ उपिट गेलिन। सभटा बीतल ग®प सीनेमाक रील जकq सपनामे देखार भए
रहल छलिन। असलमे हुनकर कुसÒसँ हटब एकटा तेहन मािम=क Dसंग छल जे हुनका िनरंतर
ओझरौने रहैत छल।
ओना जिहआसँ ओ मुÝयमंLी भेलाह तिहएसँ हुनका भयावह {वò सभ आबए लागल
छलिन। िवपJी दलक नाकेब_दी मजबूत भए गेल छलिन आ स‘ादलमे सेहो कै गूट भए गेल
छल मुदा साहसक बले ओ आगा बढ़ैत जाइत छलाह। अक{मात गाड़ीक पिहया धसैत
देखलिन तँ वो ओकरा उखारबाक कोनो कम Dयास केलिन से बात निह , मुदा भावी Dवल।
कणÄक रथ तँ एिहना धिस गेल रहिन। बेस सं¬मण कालमे ओ जहq ने आगू बढ़लाह िक
रथक पिहआ धसए लागल। ठीक एकदम वएह हाल माननीय भूतपूव= मुÝयमंLीजीकS भेलिन।
भए सकैए जे हमर ग®प अहqकS तीत लगैत हो। अपने लोकिन भावुक निह होइ।
माननीय भू.पू. मुÝयमंLीजी कुसÒ बचएबाक हेतु कोन कुकम= छोड़लाह ?
कहबी छैक जे ने दौड़ चली ने ठेिस खसी। मुदा मुÝयमंLीजीकS ई ग®प के बुझेतिन।
ओिह िदन अखबार पढ़ैत छिलयैक तँ एकटा बेस नमगर अपील पढ़लहुँ। धूत=ताक चरम सीमा
छल। मैिथलीमे समाचार पL िनकालताह।

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यौ महामहोपाfयायजी। अपनेकS ई बुिÐ िकछु िदन पूव= िकएक निह भेल ? की अहq
जनताकS ओतेक मुख= बुिझ रहल िछयैक जे अहq ओकरा भुितएने िफिरऐक। एकदम निह।
आब जमाना बदललै। खैर ! देर अएलहुँ दु²{त अएलहुँ। मुदा ई तँ कहू जे ओिह समाचार
पLमे की की खबिर छपतैक ? मुÝयमंLी पदक पुन: Dाि®तक हेतु जँ अहq कोनो य– करबैक
तँ ओकरा Dमुखतासँ छपबैक वा निह ? आशा अिछ जे एिह बेर ओ समाचार मैिथलीमे Dकािशत
समाचार पLक मुÝय पृQपर अपने छापब।
ओिह िदन गाममे बैसार रहैक। नवतुिरआ सभ मैिथलीक Dचार-Dसारक हेतु बेस
आ_दोलन केने छलाह। माननीय भू.पू. मुÝयमंLीजी Dमुख व±ता छलाह। वो बाजक लेल ठाढ़े
छलाह िक ±यो दौड़ल आएल। कहलक-
“िदjलीसँ फोन आएल अिछ। ”
ओ मंचपरसँ धड़फड़ाइत उतरए लगलाह ओ एही ¬ममे लूढ़िकयो गेलाह। फेर वएह नारी
{वर। फेर वएह हतDभ भू.पू. मुÝयमंLी...।
एमहर बैसारीमे हjला छलैकजे भू.पू. मुÝयमंLीजी िकछु महeवपूण= घोषणा करताह।
स7भवत: ओिह अDeयािशत फोनक कारणसँ बैसारक कय=वाहीपर ग7भीर Dभाव पड़ल आ बैसार
साधारण भाषणक बाद {थिगत भए गेल।
ओिह िदनुका बैसारक बाद भू.पू. मुÝयमंLीजी बहुत िदन धिर चुप रहलाह। पिछला
मिहना मुÝय पृQपर समाचार छपल छल। ओकर िकछु महeवपूण= अंश D{तुत अिछ-

िदनvक २ मई सन् १९७६
आइ मुकुल पटना अएलाह। परम स_तोष अिछ जे हम हुनका Dश³ कए सकलहुँ।
ओना हमर Dित¿_दी लोकिन हमरापर लागल छिथ मुदा जाधिर मुकुल हमरापर निह िवगरताह
ताधिर ±यो िकछु निह कए सकैत छिथ। तS हुनका Dश³ करबाक हेतु जान लगा दी।

िदनvक १२ िसद7बर १९८१

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मैिथलीक अिधकार हेतु िकछु मैिथल आएल छलाह। आिखर मैिथलीक की महeव
अिछ ? हमरा ई सभ तँ एकदम नीक निह लगैत अिछ , मुदा कएल की जाए। €यि±तगत हमरा
मैिथल , मैिथलीसँ कोनो लगाव निह अिछ। हँ, जँ ±यो अपन स7ब_धी होिथ वा दो{त-मिहम
होिथ तँ ितनका नीक-सँ-नीक पद िदआबी आ मदितओ करी। मैिथली, मैिथली िचिचएलासँ की
होएत ?

१४ अ±टुबर १९८२
िबहार बेस िववादा{पद राÉय अिछ। मोन तँ होइए जे एिह पदकS छोिड़ जा कए आराम
करी, वा पुन: अपन पिहलुका पेशामे लािग जाइ। मुदा एतेक आमदनी छैक एिह काजमे जे
अ_यथा सातो ज_ममे निह भए सकैत अिछ। Dेसबला सभ पाछू पिड़ गेल अिछ। की करी
बुझा निह रहल अिछ ?

१ जनवरी १९८४
देखा चाही नव बख= की की रंग लबैत अिछ। मुÝयमंLी पदसँ हटलाक बाद तीवá वैरा«य
भए रहल अिछ। खने मोन करैत अिछ जे राजनीितसँ स_यास लए ली। खने मन करैत
अिछ जे ‘यु¿ाय कृत िन य ’क पुनरावृि‘ कए दी। एकटा उपाय सुिझ रहल अिछ। मैिथलीक
Dचारमे पदयाLा िकछु सÉजन चला रहल छिथ। हुनके संग धरी। गामे-गाम मैिथलीक नामे
हमरो Dचार भइए जाएत। सुनबामे आएल अिछ जे दिड़भंगा लग एकटा बड़ िसÐ तvिLक
छिथ। हुनकोसँ िकछु परामश= करब। आगा जगद7बाक ईœछा।

कैिदनसँ थाकल-झमारल भू.पू. मुÝयमंLीजी ओिह िदन दुपहिरयामे कनेके आँिख मुनने
छलाह िक सपनाए लगलाह। साJात् मिहषासुर मिद=नी क‘ा लए घुिम रहल छलीह। शLुक
संहार करैत छलीह। नवका मुÝयमंLीक नाशक हेतु षडयंL जोर-सोरसँ चिल रहल छल।
जतिह देखू ततिह भू.पू. मुÝयमंLीजीक {वागतमे {वागत¿ार सभ बनल छल। मैिथलीक Dचार
खूब भेलैक। भू.पू. मुÝयमंLीजीक नामक नगारा चा¤कात बािज रहल अिछ। चुनाव घोषणा
भए गेलैक। बड़का-बड़का उ]ोगपित सभ अपन भिव°यक आशापर पय‹ ®त च_दा दए रहल
छिथ।

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ejournal 'िवदेह ' २५८ म अंक १५ िसत᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १२९ अंक २५८ )
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एिह सबहक पिरणामो बहरेलैक आ हम पुन मुÝयमंLी भए गेलहुँ। सपथ ›हण
समारोहमे िकछु मैिथल सभ उपoव करए चाहैत छलाह िक पुिलस लाठीचाज= कए देलक...।
एतबिहमे भू्.पू. मुÝयमंLीजी सपनेमे गरजए लगलाह िक हुनक नी³ खुिज गेल। उठलाह
तँ वएह रामा वएह खटोला। पुनमु=िषकोभव।
¦
१६ अग{त १९८४
रबी_o नाराय ण िमwक
नम{त{यै
आगq...
३५ .
जाबे अ²णओ एडली ल_दनमे पढ़ाइ-िलखाइ करैत रहए ताबे दुनू गोटे दू देह आओर एक आeमा छल।
अ²ण सोचैक तँ एडली बजैक। एडली सोचैक तँ अ²ण बजैक। दुनूक दो{ती से परमान चढ़ल जे दोसर सभकS
इ°य‹ होमए लगलैक। ±यो-±यो चौल करैक जे ई दुनू कहॴ आपसेमे ने िबआह कए िलअए। जाधिर ओ सभ संगे
रहल िदन राितक कोनो पता निह चलैक। दुनू संगे पढ़ए, संगे टहलए आओर संगे खाए य]िप दुनूकS छाLावासमे
अलग-अलग कोठरी रहैक मुदा बेसी काल दुनू एªेठाम रहए। Dेमक पराकाQा कहल जाए तँ हज= निह।
मुदा एकर सभक Dेमक बीचमे आिब गेलैक एंगल। एंगल एडलीक िमL छलैक। ओ एडलीक िशJको
रहैक। मुदा तािहसँ की? पा ाeय सं{कृितमे ई सभ चलैत छल। अ²णक एडलीक संग घिन¸ताक कारण एंगलक
अ²णो लग उठब बैसब होइते छल। देखए सुनएमे अ²ण आकष=क छलहे संगिह ओकर Dितभाक चच= सगरे
कालेजमे छल।
एक िदन एडली ओ एंगल िपकिनक मनाबए ल_दनक लगीचक झील जा रहल छल। एंगल कहलकै जे
अ²णोकS संग कए लेल जाए। एडली ई D{ताव अ²ण लग रखलक तँ ओ सहष= तैयार भए गेल। तीनू झीलक
कातमे बैसल छल। जाड़क समयमे हjलुक रौद ओकरा सभपर पिड़ रहल छल। झीलक चा¤कात अÐ=न«न
जोड़ी सभ अपना-आपमे म{त छल। ±यो ककरो देखत से होश निह रहए।
एहन मनमोहक ओ उ‘ेजक वातावरणमे एडली, एंगल ओ अ²ण एक दोसरकS देिख रहल छल। एंगलकS की
फुरेलैक जे ओ अ²णकS हाथ धए िखचलक आओर चलैत गेल। एडली देिखते रिह गेल। तिहआसँ अ²णक
एंगलसँ आकष=ण बिढ़ते गेल। सqझमे एडली, एंगलमे कहा-सुनी भेलैक। मुदा एंगल अपन िजÔपर अिड़ गेलैक। ओ

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अ²णक Dित अपन आकष=णक आगू िकछु निह सोिच सकल। एडली ओकर पुरान दो{त रहैक, मुदा सेहो पाछु
रिह गेलैक। एडली बाजी हािर चुकल छल।
एडली बुिधयार छल। ओ बातकS बतंगर बनबएमे िवrास निह करैत छल। अ{तु ि{थितसँ समझौता करैत
ओ अ²णसँ अपन िमLता बनओने रहल। एंगलसँ िवचार करएमे सेहो कोनो लाभ निह छलैक। तS सभ चुपचाप
सिह गेल। तकर लाभ ओकरा भेलैक। गाहे-बगाहे एंगल ओकरो fयान रखैत रहल। एवम् Dकारेण अ²ण, एडली
आओर एंगलक ितकड़ी बिन गेल, ताबे ओिहना रहल जाबे अ²ण ल_दनमे रहए।
अ²ण Dशासकीय सेवामे उ‘ीण= भए गेल छल। तकर बाद ओकरा अपन देश आपस अयबाक रहैक। एंगल
संगिह जयबाक हेतु िजÔ कए देलकै। एडली सेहो एिह हेतु अ²णकS बुझओलक। अ_तगोगeवा अ²ण ओ एंगल
संगिह दिड़भंगा आएल। एडली ओतिह रिह गेल।
q
३६ .
पूव= िनध‹िरत काय=¬मक अनुसार दिड़भंगामे Dगितशील जागरण मंच ओ जनजागरण मंचक रा°Ñीय
काय=कािरणीक स7मेलन बजाओल गेल। देश भिरसँ –ात-अ–ात करीब पqचसए Dितिनिधभाग लए रहल छलाह।
दिड़भंगाक राज मैदान टžटक शहर बिन गेल छल। कतहु लाल, कतहु हिरअर झंडा फहरा रहल छल।
रा°Ñभि±तसँ भरल ओज{वी गीत सभ बजाओल जा रहल छल। एिह वातावरणमे रिह-रिह कए तरह-तरहक सूचना
Dसािरत भए रहल छल।
जनाधार पाटÒक सेहो आमंिLत कएल गेल छल। पर_तु ओ सभ एिहमे भाग ली, निह ली से दुिबधामे रिह
गेलाह। {वतंLताक लड़ाइ एकजुट भए लड़ब ई तँ नीक बात रहैक, मुदा नेतुeवक सम{या ओझड़ाएल रहैक।
अ_ततोगeवा तय भेल जे ओ सभ िफलहाल यथावतक ि{थितमे रहत। माने अपन अलग आि{तeव बनओने रहत।
मुदा जनाधार पाटÒक नव िनव‹िचत मुिखआ चेतन €यि±तगत {तरपर आएल छल। ओकरा संगे दू-चािर गोटे आओर
आिब गेल रहए।
काय=¬म Dार7भ होइते बंदे मातरम्-क नारासँ धरतीसँ आकाश एक भए गेल। सभ एक {वरसँ “सुजलv
सुफलv मलयज शीतलाम्” गबैत गबैत भाव िवभार भए गेल। तकर बाद राजकुमार िव{तारसँ रा°Ñीय पिरदृ°यक
वण=न करैत दुनू मंचक अंद²नी ि{थितक चच‹ केलाह आओर घोषणा केलाह जे आइसँ दुनू मंचक िवलय भय गेल
अिछ। आब एिह मंचक नाम रा°Ñवादी दल रहत।
एतबे बात ओ कहने छल िक उमा अपन संगे १५-२० टा मिहलाक संगे नारा लगबैत मंच धिर पहुँच
गेिल। हुनका सभक हाथमे प× छल जािहपर मोट-मोट आखरमे िलखल छल-
“{Lीक स7मान िबना {वतंLताक ग®प िनरथ=क िथक।”

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उमाकS एिह तरहS आओर मिहला सभक संगे एिह तरहS आ¬मण देिख सभ सकदम भए गेलाह। बैसारक
काय=वाही ²िक गेल। जे जेना छल, तिहना रिह गेल। लगलैक जेना स7पूण= वातावरणकS लकबा मािर देने हो।
राजकुमार ओ मा{टर साहेबकS िकछु फुरेबे निह करिन।
बैसारमे भाग लैत अिधकvश लोक उमाक समथ=नमे बाजए लगलाह। ओिहमेसँ िकछु गोटे तँ उमा लग आिब
ओकरे संगे नारा लगबएलगलाह। आब की होएत?
मा{टर साहेब {वयं उिठ कए उमा लग गेलाह। जन भावनाक आदर करैत उमाकS मंचपर लए अनलिखन।
तकर बादे बैसारक काय=वाही Dार7भ भेल।
चा¤कातसँ लोक उमाक समथ=नमे आिब गेल आओर आ›ह करए लागल जे उमाकS नवोिदत रा°Ñवादी दलक
अfयJा बनाएल जाए। मा{टर साहेब, राजकुमार उमासँ मंLणा कए हुनका रा°Ñवादी दलक अfयJ चूिन लेल
गेल। ‘उमा देवीक जय’ सँ वातावरण गुंजायमान भए गेल।
रा°Ñवादी दलक गठनसँ जनाधार पाटÒमे आपसी िसरफुटौअल बिढ़ गेल। पाटÒ कतेको गुटमे बँिट गेल
छल। पाटÒमे िकछु गोटे रा°Ñवादी दलक संगे िवलएकपJधर रहिथ। एिहसँ {वतंLता आ_दोलन Dखर होइत। मुदा
पाटÒक बूढ़ नेता सभ चाहिथ जे यथावत बनाओल रहए देल जाए कारण ओ सभ अपन अपन कुसÒकS संकटमे
निह देबए चाहिथ।
उमाकS रा°Ñवादी पाटÒक अfयJा बनबाक समाचार अ²णकS जासूसक माfयमसँ भेटलैक। ओ अeय_त
िवचिलत भए गेल। उमाक एिह तरहक Dितकृयाक ओकरा आशा निह छल।
महौलकS गड़बड़ाइत देिख अ²ण एंगलक संगे िकछु िदनक हेतु ल_दन सरकारी याLापर चिल गेलाह। हमर
माए दुिखत पिड़ गेल छल। ओकरा असगरमे बहुत िदªत भए रहल छलैक। तS िकछु िदनक हेतु हम अपन नैहर
गेलहुँ जािहसँ माएकS सेवाक अवसर भेटए। एक युगक बाद हम नैहर गेल रही। हमरा देिखते हमर माए बहुत
Dश³ भेल। लगलैक जेना तुर_त ठीक भए गेल। टन-टन बाजए लागिल।
असलमे ओ एकाकीपनसँ उिब गेल छिल। फेर िदआदसभ सेहो तंग करिन। स7पि‘मे िह{सा निह दैक
जािहसँ ओ बहुत दुखी छिल। हमर अपन िप‘ी सेहो गुजिर गेलाह। हुनका तीनटा बेटीए रहिन। अ{तु, हमर
सभक सम{त स7पि‘कS हमर िपितऔत काका हरिप लेबए चाहैत छल।
माएक {वा{थ ठीक भेल। ओमहर हमरा सासुरसँ िवदािगरीक हेतु समाद आिब गेल छल। मासो िदन नैहरमे
निह भेल छल। मुदा कै बेर िवदागरीक हेतु आदमी आिब चुकल। अ_तमे ओ {वयं आिब गेलाह आओर हम सासुर
िवदा भए गेलहुँ।
q

३७ .

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“वृ_दावन िबहारी लाल की जय।” िनरंतर भजन, कीत=न ओ Dवचनमे तjलीन भजनान_ददासजी महराज
अfयािeमक पराकाQापर पहुँच गेल रहिथ। एकिह जीवनमे €यि±तeवक एहन ¤पातंरण कमे सूनएमे अबैत अिछ।
िक_तु ज_म-ज_मक सं{कार जेार मारैत अिछ। जीवनक कतेको रह{य अिछ जकर गिणतीय €याÝया अस7भव।
पर_तु स]: सeय इएह छल जे एकटा डकैत गरम िसंह महान कृ°णभ±त भए गेलाह।
ततबे निह लोक कjयाण हेतु सव={व, सम{त साम»य=कS अिप=त कए देने छलाह। जिहना ओिह आwममे
धनक बख‹ होइत छल तिहना ओिह पैसाक जन कjयाण हेतु खच= कए देल जाइत छल। कहबी छैक :
“पानी बाढ़े नावमे, घरमे बाढ़े दाम
दोनो हाथ उिलिचये, एही सयानो काम।”
एिह कथानकक भजनान_दजी महराज एकटा जीव_त उदाहरण छलाह। अपना लेल िकछु निह। “तेरा
तुझको अप=ण” कS चिरताथ= करैत छलाह, अपन आwममानव जाितक कjयाण हेतु उपलËध कए देने छलाह।
आwममे तँ भजन िकत=न चिलते रहैत छल। भuडारा चिलते रहैत छल। भ±तगण सभ
मृदंग, ढोलक, पखावज ओ झािल बजाए कृ°ण नाम संिकत=न किरते रहैत छलाह। सम{त वातावरण ततेक धािम=क
ओ भावनापूण= रहैत छल जे ओिहठाम अएिनहार कोनो, केहनो €यि±त शाि_तक अनुभव करैत छल।
मुदा भजनान_दजी एतबेपर निह ठहरल छलाह। ओ अपन रा°Ñक Dित कत=€यसँ सेहो सचेत छलाह। हुनकर
कहब छलिन जे जाधिर भारतमाता परतंLताक बेड़ीसँ जकड़ल छिथ, ताधिर {वगÄ €यथ= िथक। मुि±तक कामना
अ_याय िथक।
“के बोले मा तुिम अबले...।” निह, निह, भारत माता अवला कदािप निह भए सकैत छिथ। कोिट, कोिट
हुनक संतान हुनक DितQा ओ {वतंLताक रJा हेतु {व={व eयाग करए हेतु कृतसंकjप अिछ। देश {वतंL भए
कए रहत। “भारत माताक जय! व_दे मातरम्”- इएह किह हुनकर Dवचनक अ_त होइत छल।
रा°Ñवादी दलक आिथ=क सम{याक समाधान तँ भजनान_ददासजी महराजक आwमक माfयमसँ भए जाइत
छल। महराजजीक एकटा भ±तक दिड़भंगामे तीन महलक भवन छलैक। ओ तीनू महल भजनान_दजी Dेरणासँ
रा°Ñवादी दलकS दान कए देलक। {वयं दुनू €यि±त िदन-राित रा°Ñ सेवामे लािग गेल। िफरंगी सभ एक िहसाबे
िहिल गेल छल। ओकरा सभकS रा°Ñवादी दलक बढ़ैत शि±तसँ ततेक €याकुलता भेलैक, ततेक भय भए भेलैक जे
इÉजितसँ देश छोड़बाक र{ता ताकय लागल।
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अ²ण एंगल केर संग ल_दन हवाइ अÞडापर पहुँचले छल िक एडली हवाइ अÞडापर पहुँच गेल। लगैत
छल जेना ओ बहुत िदनसँ एिह अवसरक DितJामे छल। ओकर फाटल- फाटल हिरअर ऑंिख बहुत िकछु किह
रहल छल। हवाइ अÞडासँ अ²ण ओ एंगल विहग=मन ¿ारपर एडलीक {वागतसँ अिभभूत छलाह।
अ²ण सरकारी काजसँ जोगार लगाए ल_दन गेल छल। ओिहठाम आवास सिहत आओर आवcयक सुख-
सुिवधाक Dब_ध छल। ओसभ ओतिह जेबाक हेतु उ]त छल पर_तु एडली अिड़ गेल। ओकर बात काटबओकरा
सभक बसमे निह छल।
अ{तु, ओ सभ एडलीक बात मािन ओकर घर िदिस िवदा भेल। अ²ण लेल ओकर घर नव निह छल।
ल_दन Dवासक दौरान ओ सभ कतेको िदन ओतए रहल छल। अबैत जाइत छल। एक िहसाबे ओ सभ ओकर
पािरवािरक िमL भए गेल छल। ल_दन पहुँिच अ²णकS उसास तँ भेलैक। कमसँ कम उमाक घात-Dितघातसँ
ताeकािलक राहत भेटलैक। संगे पुरान दो{त सभसँ भSट-घॉंट होइत रहलैक। ओकरा सभक संगे िबताओल
मधुर, {नेिहल समयकS पुन: स]: जीबाक अवसर भेटलैक। सरकारी काम काज तँ बहाना छल।
एक िदन एडलीक ओिहठाम रिह अ²ण सरकारी अितिथ गृहमे चिल आएल। एंगल ओ एडली ओतिह रहल।
ई दुनू तँ पुरान दा{त छल। बहुत िदनक बाद एकठाम भेल छल। लगलै जेना िबडÄ उिठ गेल। दुनूकS ग®पक
अ_ते निह होइक। ग®पेटाक बात रिहतए तँ कोनो बात निह। लगबे निह करैक जे अ²ण ओकरे संगे आिब कए
कतहुँ आनठाम ²िक एंगलक DतीJा कए रहल अिछ।
आिखर ल_दन, ल_दन छैक। ओिहठामक अ_मु±त वातावरणमे बढ़ल, पढ़ल एंगल ककरो हेतु बा_हल छेकल
कतेक रिह सिकतैक? एहनमे तँ अ²ण {वयं सोिच सकैत छलाह। मुदा भावी Dवल। जे हेबाक छल से भेल।
दुखक बात तँ ई छल जे एहूकात गाड़ी िघिसर-िफिसर करैत छल। ओिहकात तँ स]: उमा गरिज रहल छलैक।
अ²ण सचमुचमे बेचारा भए गेल छल। कहबी ठीके छै- ‘ने दौिड़ चली, ने ठžिस खसी।’
एक स®ताह बहुत निह होइत छैक। देिखते देिखते शिन, रिब आिब जाइत छैक। पqच िदनका खटैनी दू
िदनका स®ताहा_त अवकाशमे गिल जाइत छैक। अ²ण सेहो पqच िदन ल_दनक सरकारी काजमे €य{त रहल मुदा
शु¬क सqझ अएलापर माथ ठनकलै। आब की कएल जाए? एंगलक अएबाक ग®प कोन, फोनो निह केलकै। ओ
तँ एडली संगे तेना कए रिम गेलैक जे आगा- पाछा िकछुक सुिध निह रहलैक।
अ²ण जखन एडलीक ओतए पहुँचल तँ पता लगलैक जे ओ सभ ल_दनसँ बाहर चिल गेल अिछ। कतए
गेल से घरक लोक ने अपना मोने िकछु कहलकै आ ने अ²ण पुछलक। ओिहठामक समाजमे बेसी खोध-बेधक
पर7परा निह छैक। बहुत रास बात €यि±तगत रिह जाइत अिछ।
अ²ण गु7म छल। ओकरा एिह बातकS आब आभास भए रहल छलैक जे अपन सभक मािट-पािनमे
ज_मल, पोसाएल पु²खक िबआहक एहन कjपना रहैत छैक जािहमे ओकर {Lी आज_म ओकरा Dित िनQावान
रहैक, ओ जे चाहए सएह करैक, मुदा ई तँ ल_दन छै। से बात बहुत िबलंबसँ बुझए आिब रहल छलैक।
एडली ओ एंगल {कूटरपर ल_दनसँ करीब चालीस िकलोमीटर दूर एकटा िरजाट=मे ठहरए हेतु जा रहल छल
िक एकटा तेज गितसँ चलैत कार ओकरा टªर मािर देलकै। टªर ततेक जबरद{त छल जे {कूटर पचरा भए

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गेल। हेडली ओहीठाम कै पलटी खेलक मुदा कोनो बेसी चोट निह लगलैक। पर_तु एंगल हवामे कै फीट ऊँचाइ
धिर फेका गेल आओर धरामसँ नीचा बीच सड़कपर खसल। ई तँ संयोग छलैक जे पाछुसँ अबैत दोसर कारक
वाहन चालक एकाएक ´ेक लए लेलक निह तँ ओतिह ओ टुकड़ी-टुकड़ी भए जाइत।
एिह दुघ=टनामे एंगलक दिहना जॉंघक हÞडी टुिट गेल छलैक। कनी- मनी चोट तँ सॱसे देहमे छलैक।
एडलीक हालत सेहो ठीक निह छलैक। ¬मश: दुनू पैर फुिल गेलैक जािहसँ चलबामे असोकय= होइत छलैक।
कहुना कए {थानीय पुिलस एकरा सभकS ल_दनक DितिQत अ{पतालमे भतÒ करओलक। अ²णकS सेहो
पुिलस ¿ारा सूचना भेटल। ओ तुर_त अ{पताल पहुँचल। ओ एंगलक हालत देिख दुखी भए गेल। जाबे एंगल
अ{पतालमे रहल ताबे ओहो ओतिह रहल। मुदा तकर बादक िच_तासँ ओ €य› रहए लागल।
शु¤मे अ²णक काय=¬म छलैक जे ओ तीन-चािर मासमे अपन देश आपस आिब जाएत। मुदा गाम-घरसँ जे
समाचार सभ भेटैक आओर जािह DकारS उमा उ›सँ उ›तर भए रहल छिल, ओकर मोन बेचैन भए जाइक, कोनो
समाधान निह फुराइक।
संयोग एहन भेलैक जे अं›ेजसभकS खुिफआ िरपोट= भेटलै जे अ²णकS िहतमे निह छल। ओकरा सभकS
अ²णक गित-िविधपर स_देह भए गेल छलैक। तS ओकरा कम-सँ-कम साल भिरक हेतु ल_दनमे रहबाक आदेश
कए देलक।
सरकारी आदेश छलैक, तS अ²णकS कोनो िवकjपो निह रहैक। ओकर मोन िनर_तर अपन गाम-घरपर टvगल
रहैत छलैक। तथािप ओ अपना आपकS ल_दनमे €य{त कए लेलक। िदन भिर काय=लयमे समय बीित जाइत
छल। सqझ कए समय िबताबक हेतु एतए बहुत जोगार सभ छलैक।
एंगल अ{पतालसँ छुिट कए अ²णक डेरापर अएलैक। मुदा ओकरा नीकसँ चलल निह होइक। डा±टरक
परामश=क अनुसार ओकरा िफिजओिथरैपीक Dयोजन रहैक। सभ सुिवधा आसे-पासमे उपलËध छल। मुदा घरमे
बैसल-बैसल ओ तंग भए रहल छिल। कोनो उपायो निह रहैक। अ²ण काय‹लय चिल जाइक। िदन भिर ओ
एसगिर कहुनाक समय िबताबिथ।
एिहना एक िदन ओ उदासघरमे िकछु पिढ़ रहल छिल िक एडलीक फोन आएल। एंगल ओकरा तुर_त आबए
हेतु आ›ह केलक। एडली िबना िवल7ब केने ओतए आिब गेल। िदनभिर दुनू गोटाकS ग®प-स®पमे समय कोना बीित
गेल सेपता निह चलल। सqझमे ओ अपन घर आपस जेबाक इœछा €य±त केलक। ताबत अ²ण सेहो आिब गेल
रहए। अ²ण ओ एंगल दुनू गोटे ततेक आ›ह केलकै जे ओ ओहीठाम रिह गेल। एंगल, एडली संगे तेहन तjलीन
भए जाइक जे अ²णकS करए हेतु िकछु रिहए निह जाइक। कखनहुँक ओहो ग®पमे लािर देबाक Dयास करैक मुदा
ओकरा सभक हेतु धिनसन।
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३९ .
अ²ण ल_दन चिल गेल से समाचार हमरा सभकS खबािसनीक माfयमसँ भेटल। एिह बेर ओ बहुत िदनपर
आएल छिल। ग®प-स®पक ¬ममे कहए लागिल जे हमर माए स7पि‘मे बँटबारा हेतु बहुत हjला केलकै। मुदा हमर
िपितऔत काका टस सँ मस निह होइत छैक। ओकर कहब जे बेटीक िबआह भइए गेल। तखन अहॉंकS
खोिरसक अितिर±त िकछुके अिधकार निह अिछ। कतेको बेर बैसार भेलैक। पंचसभ सेहो ओकरे संग भए
गेलैक। बहुत रास स7पि‘ तँ ओ अपना नामे करा चुकल छल।
ई बात सभ जखन हुनकर कानमे गेलिन तँ दिड़भंगामे मोकदमा कए देलाह। दिड़भंगाक नामी ओिकल मोना
बाबू हमर सभक केस लिड़ रहल छलाह। कोट=सँ नोिटस जारी भेल। हमर िपितऔत काकाकS िदआद सभ बहुत
कहलकै। अनततोगeवा ओ पसीजल आओर पqच बीघा जमीन हमरा माएकS देबाक हेतु तैयार भए गेल। ओ एिह
D{तावकS मािन लेलाह। जतए हम स‘िर बीघाक उ‘रािधकारी रिहतहुँ कतए माL पqच बीघापर समझौता करए
पड़ल। कोनो िवकjपो निह छलैक। कानूने तेहने छलैक।
समय बीतैत देरी निह होइत अिछ। देिखते-देिखते हमर बœचा सभ जबान भए गेल। तीनू बेटीक पढ़ाइ पूरा
भए गेल। ओ सभ अपन अपन ¤िचक िवषयमे एमए पास कए चुकल छिल। एकमाL पुL सेहो इंजीिनयिरंगमे
पढ़ैत छल। एकरा सभक पढ़ाइ-िलखाइमे अ²णक ग7भीर योगदान छलैक। आिथ=क िच_ता तँ किहओ होमए निह
देलक।
पिढ़-िलिख तँ गेल मुदा आब की कएल जाए। ई सम{या िवकट छल। कारण ओिह समयमे बेटीक पढ़ाइ-
िलखाइ िबरलैके ±यो करैत छल। से हम सभ केलहुँ आओर जेना-तेना पार लािग गेल। मुदा भिव°यक संघष=
आओर Dवल लगैत छल।
इएह सभ सोचैत रही िक हमर तीनू बेटी गाम आएल। ओकरा सभकS देिख मोन गदगद भए गेल। सभक
€यि±तeवमे अÜुत चमक छलैक। आeमिवrाससँ भरल छल। िव]ासँ ओकरा सभकS बहुत आeमशि±त Dा®त भए
गेलैक आओर ओ सभ जीवनमे िकछु {थान बनबए हेतु कृतसंकjप लगैत छिल।
जिहयासँ रा°Ñवादी दल बनल, जनाधार पाटÒक जनाधार तेजीसँ खसिक रहल छल। रा°Ñवादी दलक कमान
उमाक हाथमे पिड़ते चा¤कातक {Lीगण खास कए मfयवगÒय पिरवारक, ओिह दलसँ जुड़ए लागिल। लगैक जेना
देशमे ¬ाि_त आिब गेल अिछ।
िशJा निह, पािरवािरक स7पि‘मे िह{सा निह, घरसँ बाहरो िनकलबाक पिरि{थित निह, आिखर एिह बातक
Dितकार तँ भेनिह रहैक। अ{तु, अवसर भेिटते एक िदस तँ “ब_देमातम्”केर नारा लगैत तँ दोसर िदस {Lी
स7मानक रJाक चच‹ सेहो जोर पकड़ने जाइत छल।
िफरंगी सभ एिह बातसँ िचि_तत छल। ओकरा सभकS िकछु फुरेबे निह करैक जे एिह पिरि{थितसँ कोनो
िनपटी। तखन ओ सभ सोचलक जे जनाधार पाटÒक मदित लए आपसेमे उठापटक कराओल गेल।

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Videha Ist Maithili Fortnightly
ejournal 'िवदेह ' २५८ म अंक १५ िसत᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १२९ अंक २५८ )
मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 222 9-547X VIDEHA
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जिहआसँ चेतन जनाधार पाटÒक अfयJ भेल छल, ओकर िफरंगी सभसँ पिहल भSट-धॉंट रहैक। मुदा
िफरंगीसभ ओकरा Dभावमे निह आिन सकल।
रा°Ñवादी दलक Dभावसँ हमर तीनू बेटी- हीरा, वाणी ओ गंगा Dभािवत छलीह। देश ओ समाजक हेतु िकछु
करबाक इœछा हुनका सभकS उ¿ेिलत कएने छल। उœच िशJा Dा®त कए ओ समाजक दुद=शाकS बेसी नीकसँ बुझैत
छलीह। अ{तु, ओ सभ सभ काजकS पाछु कए उमाक संग भए गेलीह। रा°Ñवादी दलक सि¬य सद{यता ›हण
कए गाम-गाममे घूमए लगलीह।
आब उमा एसगिर निह छलीह। छोट, पैघ, जवान, बूढ़ सभ ओकरा संग दए रहल छलैक। असलमे गाम-
गाममे पसरल एिह अ_यायसँ मुि±तपाबक एकटा अवसर आिब गेल छल। जतिह देखू “ब_दे मातरम्” केर नारा
लािग रहल अिछ। भारत- माताक जयगान भए रहल अिछ। एकिह {वरमे समाजमे युग-युगसँ पसरल
वैमन{यता,भोदभाव, शोषणक िव²Ð आ¬ोश सेहो तीवáतर भए रहल अिछ। ±यो-±यो कहैत छल जे समाजकS
िबखिuडत करबाक ई िफरंगी सभक नव हथकंडा अिछ।
रा°Ñवादी दलमे मिहलाक पैठसँ सभसँ बेसी Dश³ता भजनान_ददासजीकS भेलिन। हजारो सालसँ यातनापूण=
जीवन जीबए हेतु िववश {LीगणकS अिभ€यि±त एकटा साधन भए गेल छल रा°Ñवादी दल। जखन कखनो नव
Dयोग होइत अिछ, चाहे ओ सही हो, गलत हो, जे हो, ओकर िवरोध, Dितरोध होइते अिछ। मुदा ओहो िवकासक
एकटा पदचापे बुझबाक चाही। अ_ततोगeवा मनु±खक Dयास सफल होइते अिछ। से निह होइत तँ मनु±खक
िवकास निह भए सकैत अिछ। आिदकालसँ लोक पिरि{थितसँ संघष= केलक आओर आगा बढ़ल अिछ।
भजनान_ददासजी भि±त, अfयाeम ओ रा°Ñवादक Dखर óवजवाहक भए गेल छलाह। गाम घरमे भए रहल
सामािजक, राजनीितक घटना¬मसँ आwममे अएिनहार लोकक माfयमसँ ओ पूण= अवगत छलाह। हुनकर एिह
उदारताक लाभ रा°Ñवादी आ_दोलनकS भेिट रहल छल। एही बात सभकS fयानमे रखैत रा°Ñवादी दलक अिगला
बैसार वृ_दावनमे करबाक िनण=य भेल।
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Suggested citation: रबीन्द्र नारायण मिश्र. “संपत्ति हस्तांतरण.” Videha — First Maithili Fortnightly eJournal, issue 258, 2018-09-15. https://www.videha.co.in/research/2018/258/संपत्ति-हस्तांतरण.htm

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