विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका · VIDEHA · ISSN 2229-547X

मैथिली पत्रिकामे अनुवाद साहित्य

देवेश झा · 2018-10-01 · अंक 259

“मैिथली पिNकामे अनुवाद सािहaय ”
अनुवाद िथक एक भाषाक वा6य कU दोसर भाषामे कहब िलखब । पिहलकU मूल भाषा आ दोसरकU लय
भाषा कहल जाइछ । अिभFाय अिछ मूल भाषाक भावकUशत-Fितशत लय भाषामे उिचत शŽद सिहत अंतरण
करव, िकoतु समया होइत अिछ जे सभ भाषाक Fकृित, पर‘परा, शŽद स‘पदा आ वभाव अपन-अपन होइत
अिछ । एतबिह निह ; भाषागत िनयममे से हो िभ“ता रहैत अिछ । तकर मु”य कारण अिछ जे कोनो
भाषाक Fकृित, पर‘परा शŽद स‘पदा आ •विन ओिह थान िवशेषक जलवायु, भौगोिलक
िथित, वातावरण, धम>, आचार-िवचार,उ™चारण •विन आिद तaव सॅ Fभािवत रहैत अिछ । तU मूल भाषाक
शŽदक हू-ब-हू समान अथ>बला शŽद दोसर भाषामे निह रहैत अिछ । एहना िथित म› एक भाषा दोसर भाषा
सँ शŽद उधार लैत अिछ । आ मूल पक शŽदकU लय भाषा मे ओिह प मे Fयु6त करैत अिछ ।

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ejournal 'िवदेह ' २५९ म अंक ०१ अ᭍टूबर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३० अंक २५९ )
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यथा, आंžेजी सँ हम लैत छी टेशन, कोट>, प›ट आिद आ हम दैत छी छॱकी, झ„झन,धोती, साड़ीआिद । य]िप
अनुवाद जिटले काय> अिछ आ फराक सँ िववेचनीय अिछ, िकoतु से हमर िहसाक िवषय निह । तखन
एतेक कहब अव यक जे आइ िव¡ मानव एक दोसारक स‘पक> मे बहुत तीव¢ गित सँ अिब रहल अिछ । तU
एक दोसराक सामािजक जीवन, स£यता,संकृित, आचार-िवचार, रहन सहन, जीवन प•दित सॅ पिरिचत होयब
आव यक, जकर मु”य ¤ोत िथक ओतु¥ा सािहaय । सामािजक Fितिवंब देखवाक हो तँ सािहaय िबनु देखने
कचरेटा देखल जा सकैछ । तaपय> ई जे आजुक संदभ> मे अनुवाद सािहaयेक निह, जीवनक अपिरहाय> अंग
बिन गेल अिछ । मैिथली पN-पिNका देखला सॅ sात होइत अिछ जे अनुवाद सािहaय अपेLाकृत संतोषFद
निह अिछ से तखन िमिथलाक जन जीवन ओ ओकर स£यता- संकृित मे अनुवादक Fवृित रचल-बसल अिछ
। नेना वा अबोध सoतान कU बिढया िपतामही, मातामही, िपतामह आिदिविभ“ Fकारक संकृत लोकक अथवा
žoथक कोनो -कोनो अंश अपन भाषा मे सुनाऽिनक संकार सॅ संपक> करैत आइल छिथ । िकoतु एही
अनुवाद-Fवृितक अछै तँ पN-पिNका मे अनुवादक
अ¨पतासोचनीयअिछ।

भारतमे पिNका पदाप>णक शुभ काल िथक आठारहम
शताŽदीक उŒराध> जखन क‘पनी सरकारक आिधपaय थािपत भ गेल छल । िकoतु मैिथली पNकािरताक
विण>म िवहानक िकरण Fफुिटक होइछ तखन-जखन 1905 मे जयपुर सँ“मैिथली िहत साधन” नामक
मािसक Fकािशत होइछ, जािहमे अनुवाद तँ निह टीका अव य रहैत छल । पुन: दोसर शुभ मुहूत>क Lण
अबैछ 1906 मे जखन मैिथली पिNकाक इितहास मे नव संक¨प, नवचेतना अ नव िदशा ल क
आयल ‘िमिथला-मोद’ मैिथली सािहaयक उ•यान मे नवल बसंत, नवल मलयािनल सदृश महमह करैत आयल ।
एकर Fकाशन मे िविभ“ बाधाक फलवप अव¬­ता तॅआयलमुदा 1936 सँ पुन>Fकाशन Fार‘भ भेल ।
िमिथला मोदक मा•यमे अनुिदत žoथ सभक Fकाशन सँ अनुवाद िविध Fाणवoत भ उठल । एिहमे महaवपूण>
अिछ (क) िहतोपदेश (अनुवादकक नाम अंिकत निह अिछ) (ख)कपाल कुeडला (अनु॰ पं० िशवनoदन चौधरी
पुिण>या ) (ग) °ी मदभगवतगीता( अनु० पं० िNलोचन झा) (घ)मुuाराLस (अनु० पं० चेतनाथ झा) (ङ) उŒर
रामचिरत(अनु० मुंशी रघुनoदन दास),पं० कुशे¡र कुमर आ बाबू भोलालाल दसक संयु6त
संपादकaवमे ‘िमिथला’ मािसकक Fकाशन Fारंभ भेल जे अ™युतानoद दŒ ³ारा अनूिदत ‘महाभारतक’कितपय अंश
तथा गुणवंत लाल दास ³ारा ‘दुगq स´तशतीक’ अंशक पाoतर धारावािहक ¬पे Fकािशत कयलक / पं० छेदी
झा ‘मधुपक मेघदूत क अनुवाद Fकािशत होबय लगल छल जे पुण> निह भ सकल |

इलाहाबाद सँ बाल मािसक पिNका ‘बटुक’के Fकाशन °ी सुधाकtत िम°क संपादकaव मे होइत छल | ऐिह बाल
पिNका म› अनुवाद सािहaय िवशेष महaव रखैत अिछ | ओिह मे म०म० उमेश िम° ³ारा
उपा”यानमालाक ‘निचकेतोपा”यान’ क अनुवाद ¬सी कथा बरखा आयन बेगं, जवाहर लाल नेह¬क ‘िपताक पN
पुNीक नाम’ क अनुवाद तथा °ी रमाकtत िम° ³ारा रवीouनाथ टैगोरक ‘कबूलीवाला’ क अनुवाद एवं
टा¨सटायक कथाक अनुवाद ‘तीिनटा बाबाजी’ (अनु० °ी रमाकtत राय) महaवपूण> एवँ अिवमरणीय अिछ ।

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एिहना °ी धीरे¡र झा ‘धीरेou’ क स‘पादन मे िवशे¡र सािहaयकुटीर लोहना
सॅ‘िधयापुता’नामक दोसर बाल मािसक पिNका Fकािशत होएत अिछ । मैथली पिNकािरता मे एकरहु थान
अित महaव रखैत अिछ । एिह पिNका मे िधयापुताक ¬िच जगयबा लेल तथा संकार भरबाकउदे य सॅ
बाल सािहaय प मे अनूिदत रचनाक बहुलता देखबा मे अबैछ । एिहमे पंचतंN कथाक यथा ‘माइक
बोल’‘सूय> उिग रहल छिथ’ आ वग> तथा कीछुआaमकथा,वैsािनक कथा, ग¨पक अनुवाद भेल अिछ ।
मैिथली पिNकािरताक इितहास मे नव आयाम जुड़ैत अिछ तखन, जखन 1950 मे ‘वैदेही’ मािसकक
Fकाशनक °ीगणेश होइत अिछ । एिहठाम एतेक कहब आव यक Fतीक होइछ जे मैिथली पN-पिNकाक
Fयोगाaमक तथा अितaव थापना Fि¶या अित िवकट एवं संघष>मय होइतो िवकाशोoमुखी तँ रहल अिछ ।
िकoतु जीिवका सँ जुड़ल निह रहवाक कारणे आ राजकीय उपेLापूण> नीितक पिरणाम वप पिNका सभ
अ¨पजीवी होइत आयल अिछ । बोि­तावादी िव³ान, सािहaयसेवी आ कीछु उaसाही मातृभाषानुरागी लोकिनक
³ारा नव-नव पN-पिNका अबैत रहल मुदा वजनो सँअपेिLत सहयोग निह भेटबाक कारणे काल कविलत
होइत गेल । एिह Fसंग पं० चंuनाथ िम° ‘अमर’ जीक कथा सव>था समीचीन अिछ जे “मैिथली पNकिरता
पी लŒी मे कु‘हड़ेरक बितया देखबा मे अबैत अिछ जे आ·गुर देखौला सँ सड़ैत आिब रहल अिछ (मे०
पN का इितहास )। बात सदथ> अिछ, मुदा एिहजड़ता कU बहुत दूर धिर तोड़ैत अिछ ‘वैदेही’मािसक पिNका

‘वैदेही’ मे अनुवाद िवधा कU जािह Fमुखताक संग थान देल गेल ओ अनुकरणीय अिछ । सव>Fथम बंगला
सािहaयक पुरोधा शरतचंu चटज¸ रिचत ‘रमेर-सुमित’(बंगला उपoयासक अनुवाद) एवं1856क कथा िवशेषtक
मे ठाकुर पाठक चोधरी ³ारा ¶िमक सी कथाक अनुवाद बंगलाक ‘शेफाली’ तथा िहoदी कथा ठाकुरक कूपक
अनुवाद मैिथली पिNकािरता जगत मे िवशेषता आिन गोरवािoवत कायलक।
वैदेही मिसक अपन पचास-बावन बख>क दीघ> याNा मे मैिथली पN-पिNका सािहaयक
इितहास मे जे िविशº आ महaवपूण> योगदान कयलक अिछ तकर लेखा-जोखा थोड़ म› संभव निह
िकoतु, एतेक तँ कहले जा सकैछ जे ई मैिथली सािहaयक िविभ“ िवधाक संगिह अनुवाद सािहaयक कU अिभ“
अँगन प मे समायोिजत करैत आयल अिछ । यथा 1966 क नव‘बर-िदस‘बरक संयु6त„क अनुवाद
िवशेषtक िथक । एिहमे का»य मम>s नेपाल नरेश महाराज मह›u रिचत नेपाली का»य संžह “उसैकोलागी” क
अनुवाद °ी अनoत िबहारी दास इoदुजी कयने छिथ । अनुवाद शीष>क िथक “तोरे लागी” स‘पूण> संयु6तtक
अनुिदत का»यक अिछ ।
Fो० आनoद िम°क संपादन मे ‘अिभयान’ मािसक पिNकाक Fकाशन होयब Fारं‘भ भेल
जािह मे गोक¸क ‘शा¨टमाग>’ क अनुवाद °ी हंसराजिजक सश6त लेखनी सँ कयल गेल अिछ जे मैिथली
सािहaयक भंडार कU समृ­ करबा मे अमू¨य योगदान कयलक ।
भरती भ6तक संपादन मे बहुचिच>त मैिथली मािसक ‘सोनामािट’ क आठ अंक म› V›च कथाक (अनुवादक °ी
मायानoद िम°), बंगलाक दु गोट कथाक (अनुवादक °ी भuनाथ ओ °ी ¼ज िकशोर ठाकुर) खलील िज¼ानक

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एक कथाक (अनुवादक °ी भuनाथ), नागाल½डक लोक कथाक (अनुवादक °ी गणेश शंकर खगq) एवं
जीमकाव¾ट िलिखत िशकार कथा “¬u Fयागक नरभLी चीताक (अनुवािदका मधुिमता) अनुवाद भेल अिछ ।
िशवाकाoत पाठकक संपादन मे Fकािशत‘बागमती’ मािसक मे ऋÀवेदक दान सू6त, समाज सू6त आिदक अनुवाद
पं० सुरेou झा ‘सुमन’ ³रा कयल गेल ।
कलकŒा सँ Fकािशत ‘िमिथला दश>न’ मे िहoदीक आचाय> महावीर Fसाद ि³वेदीक
िनबंध ‘सािहaय’ क अनुवाद उžकाoत झा ‘उž’³ारा भेल अिछ । िमिथला दश>न मे ‘अनुवाद कथा िवशेषtक’ क
Fकाशन सेहो कैल गेल अिछ । य•यपी िमिथला दश>न मे कीछु और अनुवाद काय> भेल अिछ । मुदा से
खोजे कयला सँ उपलŽध भ सकत ।
‘देिसलबयना’ मािसक मे यामलदास गु´तक बंगला नाटक क इसाइ हाइनेकक एक गाही जम>न किवताक
अनुवादक °ी रामलोचन ठाकुर छिथ । मैिथली मािसक मािटपािन, मािसक ‘कणqमृत’ मािसक ‘देसकोस’ तथा
Nैमािसक ‘आरंभ’ आिदक मैिथली पिNकाक इितहास मे महaवपूण> थान रखैत अिछ, मुदा एही सभ मे अनुिदत
रचनाक सं”या बड़ थोड़ अिछ । अंत मे मैिथलीक सवqिधक िनयिमत बहुFशंिसत आ सव>िFय जािह पिNकाक
िववरण Fतुत क रहल छी ओकर नाम िथक ‘िमिथला-िमिहर’। मैिथली पNकािरतक मे¬दंड मानल जाइछ
िमिथला िमिहरकU। पNकािरताक प मे सव™च नामधारी िमिथला िमिहरकU एिह सािहिaयक अनुSानमे सव>Fमुख
मानैत िविभ“ दृिº सँअंितम थान पर राखल गेल अिछ ।
पिहनिह कहल अिछ जे मैिथली पN -पिNका मे अनूिदत रचनाक िथित संतोषFद
निह अिछ | तकर Fमुखकारण अिछ पN-पिNका अ¨पजीवनक फलवप बरमहल अव¬­ता | सोच आ
पिरक¨पनाक वप साकार निह भ सकल | तथािप अनुवाद होईत रहल अिछ |
FÃ उठेत अिछ जे ई अनुवाद सभ मूल भाषासं FaयL अनुवाद भेल अिछ वा अFaयL ¬पे दोसर भाषासं ?
एकर खुलासा होयबाक चाहैत छल जे निह भेल अिछ । तU अनूिदत सािहिaयक
कृितकU देखब आ ओकर गुणवŒा कU परखब तU और किठन । तकर हेतु ई जे मूल भाषासँ लय भाषाक
िमलानक उपराoत सँ संभव होयत । मुदा िथित ई अिछ जे अिधकtश अनुवाद मूल सँ निह, अिपतु मा•यमे
भाषा सँ भेल अिछ । मैिथली पN-पिNकामे अनुिदश सािहaयक पL दुब>ल रहबाक सभसँ महaवपूण> कारण
अिछ जे एको »यि6त ने त भावसाियक अनुवाद केने छिथ आ ने एकोटा अनुवाद पिNकाक फारक सँ »यवथे
अिछ । FÃ इहो अिछ जे अनुवाद काय>कU के ओ अपन ‘केिरयर’ बनाबिथ तँ कोना? जीिवका सँ िबना जोड़ने
°मक फलीभूत होयबाक संभावना कम| इएह कारण अिछ जे मैिथली मे ने अनुवाद पिNका अिछ आ ने कोनो
पN पिNका अनुवाद सािहaयक लेल थायी त‘भ रखने अिछ । मैिथलीक सािहaयकार लोकिनक
भावावेश, ¬िच आ मातृभाषाक सेवा भाव सँ वाoत: सुखाय अनुवाद कृितक Fणयन होइत अिछ । पN-
पिNकाक Fकाशक संपादक जखन मन भेलिन, ओकरा छािप देलिन मैिथली मे िवशेष पU पN-पिNका मे
सो]े य अनुवाद काय> होयबाक चाही जे निह भ रहल अिछ । आजुक युग मे अनुवाद-काय> एकटा िमशन
िथक । दुिनया कU जनबाक-परखबाक सभ सँ पैघ मा•यम िथक । आजुक बहुत लोक अनुवाद पर िजबैत

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अिछ । एकटा बात और अनुवाद काय>क जे आिथ>क पL छै, तािह लेल बाजार चाही, मुदा सँ अिछ निह ।
बाजारक अभाव अनुवादक अभाव, पN-पिNका मे अनुवादक अभाव सभ एक दोसरा पर िनभ>र अिछ । मैिथली
पN-पिNका मे बेसी वा कम जे कीछु अनुवाद काय> भेल अिछ से तँ िभ“ बात िथक, िकoतु एतबाक तँ पº
पिरलिLत होइत अिछ जे अनुवाद िवशेषत: सािहaय सँ स‘बिधंत अिछ । एतेक तँ अव ये जे मैिथली पN-
पिNका मे अनुवाद सािहaयक िथित िवकासोoमुखी अिछ । अव यकता छैक एकर गितशीलता बढ़यवाक।
देवेश झा
एन० डी० कॉलेज रामबाग ,पूिण>या
Fा•यापक (मैिथली िवभाग )

Suggested citation: देवेश झा. “मैथिली पत्रिकामे अनुवाद साहित्य.” Videha — First Maithili Fortnightly eJournal, issue 259, 2018-10-01. https://www.videha.co.in/research/2018/259/मैथिली-पत्रिकामे-अनुवाद-साहित्य.htm

मूल विदेह अंक / Original issue