विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका · VIDEHA · ISSN 2229-547X

हिन्दी फिल्मी गीतमे बहर—५

आशीष अनचिन्हार · 2019-02-01 · अंक 267

िहंदी िफ>मी गीतमे बहर-5

गजलक मतलामे जे रदीफ-कािफया-बहर लेल गेल छै तकर पालन पूरा गजलमे हेबाक चाही मुदा नÆममे ई
कोनो ज{री नै छै। एकै नÆममे अनेको कािफया लेल जा सकैए। अलग-अलग बंद वा अंतराक बहर सेहो
अलग भ' सकैए संगे-संग नÆमक शेरमे िबनु कािफयाक रदीफ सेहो भेटत। मुदा बहुत नÆममे गजले जकk
एकै बहरक िनवpह कएल गेल अिछ। मैिथलीमे बहुत लोक गजलक िनयम तँ निहए जानै छिथ आ तािहपरसँ
कुतक करै छिथ जे िफ>मी गीत िबना कोनो िनयमक सुनबामे सुंदर लगैत छै। मुदा पिहल जे नÆम लेल
बहर अिनवाय नै छै आ जािहमे छै तकर िववरण हम एिह ठाम द' रहल छी-----------------

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'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७)

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"िखलौना" िफ>म केर ई नÆम जे िक मुह¡मद रफीजी ·ारा गाएल गेल अिछ। नÆम िलखने छिथ आनंद
बÎशी। संगीतकार छिथ लßमीक€त ¦यारे लाल। ई िफ>म 1970 मे िरलीज भेलै। एिहमे संजीव कुमार,
मुमताज, िजते89, शhुá िस8हा आिद कलाकार छलिथ। ई िफ>म गुलशन नंदाजीक उप8यासपर आधािरत
अिछ।

तेरी शादी पे दूँ तुझको तोâफ़ा मÉ –या
पेश करता हूँ िदल एक टूटा हुआ

खुश रहे तू सदा ये दुआ है मेरी
बेवफ़ा ही सही िदलHबा है मेरी

जा मÉ तनहा रहूँ तुझको महिफ़ल िमले
डूबने दे मुझे तुझको सािहल िमले
आज मरज़ी यही, नाख़ुदा है मेरी

उã भर ये मेरे िदल को तड़पाएगा
ददÒ िदल अब मेरे साथ ही जाएगा
मौत ही आिख़री बस दवा है मेरी

एिह नÆमक सभ पkितक माhाœम 212 212 212 212 अिछ। एकर त–ती उदू िहंदी िनयमपर कएल गेल
अिछ। बहुत काल शाइर गजल वा नÆमसँ पिहने माहौल बनेबाक लेल एकटा आन शेर दैत छै ओना ई
अिनवाय नै छै। एिह नÆमसँ पिहने एकटा शेर "तेरी शादी पे दूँ तुझको तोहफ़ा मÉ –या" माहौल बनेबाक लेल
देल गेल छै। समा8यतः दीघक बाद बला "ए" केर उ‚चारण लघु भ' जाइत छै आ मैिथलीमे सेहो एकर हम
िEथितनुसार लघु मानबाक िसफािरश केने छी।

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'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७)

िखलौना" िफ>म केर ई नÆम जे िक मुह¡मद रफीजी ·ारा गाएल गेल अिछ। नÆम िलखने छिथ आनंद
बÎशी। संगीतकार छिथ लßमीक€त ¦यारे लाल। ई िफ>म 1970 मे िरलीज भेलै। एिहमे संजीव कुमार,
मुमताज, िजते89, शhुá िस8हा आिद कलाकार छलिथ। ई िफ>म गुलशन नंदाजीक उप8यासपर आधािरत
अिछ।

िखलौना जानकर तुम तो, मेरा िदल तोड़ जाते हो
मुझे इस, हाल मƒ िकसके सहारे छोड़ जाते हो

मेरे िदल से ना लो बदला ज़माने भर की बातॲ का
ठहर जाओ सुनो मेहमान हूँ मÉ चँद रातॲ का
चले जाना अभी से िकस िलये मुह मोड़ जाते हो

िगला तुमसे नहॴ कोई, मगर अफ़सोस थोड़ा है
के िजस ग़म ने मेरा दामन बड़ी मुि¸कल से छोड़ा है
उसी ग़म से मेरा िफर आज िर¸ता जोड़ जाते हो

खुदा का वाEता देकर मनालूँ दूर हूँ लेिकन
तु¡हारा राEता मÉ रोक लूँ मजबूर हूँ लेिकन
के मÉ चल भी नहॴ सकता हूँ और तुम दौड़ जाते हो

एिह नÆमक सभ पkितक माhाœम 1222 1222 1222 1222अिछ। एकर त–ती उदू िहंदी िनयमपर कएल
गेल अिछ। उदूमे दू दीघक बीच बला संयु–ता¥रक एकटा लघु मािन लेबाक छूट सेहो छै मुदा ई मैिथली
सिहत आन आधुिनक भारतीय भाषामे निह भेटत। उदूमे "और" शŸदक माhा िनधpरण दू तरीकासँ कएल
जाइत छै "और मने 21" आ "औ मने 2"। एिह नÆमक संगे आन नÆम लेल ई मोन राखू। उदूमे "शŸदक
बीच बला "ह" केर उ‚चारण पिहल शŸदमे मीिल क' ओकरा दीघ बना दैत छै जेना िक "लहिर" केर
उ‚चारण "लैर" सन आिद, "मƒहँदी" केर उ‚चारण तेहने भ' जाइत अिछ। ज{री नै जे ई िनयम मैिथली
लेल सेहो सही हएत।

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"शि–त" िफ>म केर ई नÆम जे िक लता मंगेशकरजी ·ारा गाएल गेल अिछ। नÆम िलखने छिथ आनंद
बÎशी। संगीतकार छिथ आर.डी.बमन। ई िफ>म Sept 22, 1982 मे िरलीज भेलै। एिहमे अिमताभ
ब‚चन, िEमता पािटल, िदलीप कुमार, राखी आिद कलाकार छलिथ।

हमƒ बस ये पता है वो बहुत ही खूबसूरत है
िलफ़ाफ़े के िलये लेिकन पते की भी ज़{रत है

( एिह दू पkितक माhाœम अिछ 1222 1222 1222 1222)

हम ने सनम को ख़त िलखा, ख़त मƒ िलखा
ऐ िदलHबा, िदल की गली शहरे वफा

(एिह Eथायीक माhाœम अिछ 2212 2212 2212)

पीपल का ये पwा नहॴ, काग़ज़ का ये टुकड़ा नहॴ
इस िदल के ये अरमान हÉ, इस मƒ हमारी जान है
ऐसा ग़ज़ब हो जाये ना रEते मƒ ये खो जाये ना
हम ने बड़ी ताक़ीद की, डाला इसे जब डाक मƒ
ये डाक बाबू से कहा हम ने सनम को खत िलखा

बरसॲ जबाबे यार का, देखा िकये हम राEता
एक िदन वो ख़त वापस िमला और डािकये ने ये कहा
इस डाकखाने मƒ नहॴ, सारे ज़माने मƒ नहॴ
कोई सनम इस नाम का कोई गली इस नाम की
कोई शहर इस नाम का हम ने सनम को खत िलखा

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'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७)
(उपरक दूनू अंतराक माhाœम 2212 2212 2212 2212 अिछ) एिह नÆमक ई िवशेषता जे एिहमे "शहर"
शŸदक िगनती िहंदी जकk कएल गेल छै अ8यथा उदूमे शहर केर माhा दीघ लघु होइत छै। एकर त–ती उदू
िहंदी िनयमपर कएल गेल अिछ।

Suggested citation: आशीष अनचिन्हार. “हिन्दी फिल्मी गीतमे बहर—५.” Videha — First Maithili Fortnightly eJournal, issue 267, 2019-02-01. https://www.videha.co.in/research/2019/267/हिन्दी-फिल्मी-गीतमे-बहर-५.htm

मूल विदेह अंक / Original issue