विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका · VIDEHA · ISSN 2229-547X

हिन्दी फिल्मी गीतमे बहर—६

आशीष अनचिन्हार · 2019-03-01 · अंक 269

हिंदी फिल्मी गीतमे बहर-6
गजलक मतलामे जे रदीफ-काफिया-बहर लेल गेल छै तकर पालन पूरा गजलमे हेबाक चाही मुदा नज्ममे ई कोनो जरूरी नै छै। एकै नज्ममे अनेको काफिया लेल जा सकैए। अलग-अलग बंद वा अंतराक बहर सेहो अलग भ' सकैए संगे-संग नज्मक शेरमे बिनु काफियाक रदीफ सेहो भेटत। मुदा बहुत नज्ममे गजले जकाँ एकै बहरक निर्वाह कएल गेल अछि। मैथिलीमे बहुत लोक गजलक नियम तँ नहिए जानै छथि आ ताहिपरसँ कुतर्क करै छथि जे फिल्मी गीत बिना कोनो नियमक सुनबामे सुंदर लगैत छै। मुदा पहिल जे नज्म लेल बहर अनिवार्य नै छै आ जाहिमे छै तकर विवरण हम एहि ठाम द' रहल छी-----------------
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"नगीना" फिल्म केर ई नज्म जे कि मोहम्मद अजीज जी द्वारा गाएल गेल अछि। नज्म लिखने छथि आनंद बख्शी। संगीतकार छथि लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल। ई फिल्म 1986 मे रिलीज भेलै। एहिमे ऋषि कपूर, श्रीदेवी, अमरीश पुरी, प्रेम चोपड़ा आदि कलाकार छलथि।
आज कल याद कुछ और रहता नहीं
एक बस आपकी याद आने के बाद
याद आने से पहले चले आईये
और फिर जाइये जान जाने के बाद
अपनी आँखों में मुझको बसा लीजिये
अपने दिल में मेरा घर बना दीजिये
क्या करूँ दिल कहीं और लगता नहीं
प्यार में आपसे दिल लगाने के बाद
इश्क़ के मैंने कितने फ़साने सुने
हुस्न के कितने किस्से पुराने सुने
ऐसा लगता है फिर इस तरह टूट कर
प्यार हमने किया एक ज़माने के बाद
आपका नाम दिल से निकलता नहीं
दिल्लगी में कोई ज़ोर चलता नहीं
आपको भूल जाने की कोशिश भी की
और तड़पा हूँ मैं भूल जाने के बाद
पहिल आ तेसर पाँतिक मात्राक्रम अछि 212-212-212-212 तेनाहिते दोसर आ चारिम पाँतिक मात्राक्रम अछि 212-212-212-212+1 मूल मात्राक्रम अछि 212-212-212-212 मुदा उर्दूमे (मैथिलीयोमे) छूटक तौरपर अंतिम लघु मान्य छै। एकर बादक बंद सभमे पहिल तीन पाँतिक मात्राक्रम 212-212-212-212 आ चारिम पाँतिक मात्राक्रम अछि 212-212-212-212+1 एकर तक्ती उर्दू हिंदी नियमपर कएल गेल अछि। एहि नज्मकेँ शेरमे सेहो बदलि सकैत छी जेना निच्चा बदलल गेल छै--
आज कल याद कुछ और रहता नहीं एक बस आपकी याद आने के बाद
याद आने से पहले चले आईये और फिर जाइये जान जाने के बाद
अपनी आँखों में मुझको बसा लीजिये अपने दिल में मेरा घर बना दीजिये
क्या करूँ दिल कहीं और लगता नहीं प्यार में आपसे दिल लगाने के बाद
मतलाक दूनू पाँति मात्राक्रम छै 212-212-212-212 212-212-212-212+1 आ तकर बाद दोसर शेरक पहिल पाँतिक मात्राक्रम छै 212-212-212-212 212-212-212-212 जे कि उर्दू सहित मैथिलियोमे छूटक तौरपर मान्य छै मने जँ एहि नज्मकेँ गजल कहल जाए ताहूमे कोनो दिक्कत नहि।
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"अनारकली" फिल्म केर ई नज्म जे कि लता मंगेशकर जी द्वारा गाएल गेल अछि। नज्म लिखने छथि राजेंद्र कृष्ण। संगीतकार छथि सी.रामचंद्र। ई फिल्म 1953 मे रिलीज भेलै। एहिमे प्रदीप कुमार, बीना राय आदि कलाकार छलथि।
इस इंतेज़ार-ए-शौक को जनमों की प्यास है
इक शमा जल रही है तो वो भी उदास है
मुहब्बत ऐसी धड़कन है जो समझाई नहीं जाती
ज़ुबां पर दिल की बेचैनी कभी लाई नहीं जाती
चले आओ, चले आओ तक़ाज़ा है निगाहों का
किसी की आरज़ू ऐसे तो ठुकराई नहीं जाती
मेरे दिल ने बिछाए हैं सजदे आज राहों में
जो हालत आशिक़ी की है वो बतलाई नहीं जाती
एहि नज्मक सभ पाँतिक मात्राक्रम 1222-1222-1222-1222 अछि। एकर तक्ती उर्दू हिंदी नियमपर कएल गेल अछि। मुदा एहि पाँति "मेरे दिल ने बिछाए हैं सजदे आज राहों में" मे बहर टूटल छै आ शाइर एकर गजल कहियो नै रहल छथिन। बहुत काल शाइर गजल वा नज्मसँ पहिने माहौल बनेबाक लेल एकटा आन शेर दैत छै ओना ई अनिवार्य नै छै। एहि नज्मसँ पहिने एकटा शेर "इस इंतेज़ार-ए-शौक को जनमों की प्यास है" माहौल बनेबाक लेल देल गेल छै।
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"प्यासा" फिल्म केर ई नज्म जे कि मोहम्मद रफी जी द्वारा गाएल गेल अछि। नज्म लिखने छथि साहिर लुधियानवी। संगीतकार छथि सचिन देव बर्मन। ई फिल्म 1957 मे रिलीज भेलै। एहिमे गुरू दत्त, वहीदा रहमान, माला सिन्हा आदि कलाकार छलथि। एहि नज्मक सभ पाँतिक मात्राक्रम 122-122-122-122 अछि।
ये महलों, ये तख्तों, ये ताजों की दुनियाँ,
ये इंसाँ के दुश्मन समाजों की दुनियाँ,
ये दौलत के भूखे रवाजों की दुनियाँ,
ये दुनियाँ अगर मिल भी जाए तो क्या है .
हर इक जिस्म घायल, हर इक रूह प्यासी
निगाहों में उलझन, दिलों में उदासी
ये दुनियाँ है या आलम-ए-बदहवासी
ये दुनियाँ अगर मिल भी जाए तो क्या है .
यहाँ इक खिलौना है इंसाँ की हस्ती
ये बस्ती हैं मुर्दा परस्तों की बस्ती
यहाँ पर तो जीवन से है मौत सस्ती
ये दुनियाँ अगर मिल भी जाए तो क्या है .
जवानी भटकती हैं बदकार बन कर
जवाँ जिस्म सजते है बाज़ार बन कर
यहाँ प्यार होता है व्योपार बन कर
ये दुनियाँ अगर मिल भी जाए तो क्या है .
ये दुनियाँ जहाँ आदमी कुछ नहीं है
वफ़ा कुछ नहीं, दोस्ती कुछ नहीं है
जहाँ प्यार की कद्र कुछ नहीं है
ये दुनियाँ अगर मिल भी जाए तो क्या है .
जला दो इसे फूक डालो ये दुनियाँ
जला दो इसे फूक डालो ये दुनियाँ
मेरे सामने से हटा लो ये दुनियाँ
तुम्हारी है तुम ही संभालो ये दुनियाँ
ये दुनियाँ अगर मिल भी जाए तो क्या है
एकर तक्ती उर्दू हिंदी नियमपर कएल गेल अछि। "हर इक" केर मात्राक्रम लेल अलिफ-वस्लक नियम देखल जाए मने एकर मात्राक्रम "हरिक" केर हिसाबसँ लेल जेतै।

Suggested citation: आशीष अनचिन्हार. “हिन्दी फिल्मी गीतमे बहर—६.” Videha — First Maithili Fortnightly eJournal, issue 269, 2019-03-01. https://www.videha.co.in/research/2019/269/हिन्दी-फिल्मी-गीतमे-बहर-६.htm

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