उमेश मण्डल
मैथिली साहित्य-रचनाक क्षेत्रमे जगदीश प्रसाद मण्डलक आगमन
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श्री जगदीश प्रसाद मण्डलक जन्म 5 जुलाई 1947इस्वीमेमधुबनी जिलाक बेरमा गाममे भेलन्हि। हिन्दी ओ राजनीति शास्त्र विषयसँ एम.ए. कए ई अपन जीविकोपार्जन हेतु कृषि कार्यकेँ अपनौलन्हि। एहि प्रसंगमे मण्डलजी स्वयं ‘मौलाइल गाछक फूल’ उपन्यासक ‘अप्पन बात’मे लिखने छथि-
“जहियाएम.ए.कविद्यार्थीरहीतहिएनोकरीसँविरागभऽगेल।आठबीघाजमीनरहए।खेतीसँजीवन-यापनकरैकबिसवासभऽगेल।बिनुगार्जनक–पुरुषगार्जनक-परिवार 1960 ईस्वीमेभऽगेल।पितेक अमलदारीसँदूभाँइपिसियौतरहैछला।तत्कालगार्जनीहुनकेदुनूभाँइपर छेलैन।कोसीकउपद्रवसँभागलपीसाबेरमेमानेसासुरेमेरहिगेलरहैथ। ..पिताकमृत्युकसमयतीनबर्खकहमआछहबर्खकजेठभायछला।पिसियौतभाए 1960 ईस्वीमेअपनगाम‘हरिनाही’ चलिगेला।दुनूभाय, श्री कुलकुल मण्डल 1954 इस्वीमे आ हम 1957 इस्वीमे गामकस्कूलसँनिकैलअपरप्राइमरीस्कूलकछुबीमेनाओंलिखौनेरही। 1960 ईस्वीसँपरिवारकबोझपड़ल।पुरुषविहीनभेनौंमाएओहनपरिवारकछेली, जइपरिवारमेमामा 1942 ईस्वीमेअंग्रेजकगोलीखाचुकलछला।साहसीमाए।अपनगहना, जमीनबेचदेलबच्चाकेँपढ़बैखातिर। पैंतीससालधरिसमाजसेवाकेला पछाइत अपनहहरैतशरीरदेखकिछुलिखै-पढ़ैकविचारजगल।”
2000 इस्वी धरि जगदीश प्रसाद मण्डलजी समाजसेवामे संलग्न रहलाह। रूढ़िएवम्सामन्तीव्यवहारकखिलाफलड़ाइ लड़ैत रहलाह, केस-मोकदमा, जहलयात्रादिमे हिनक लगभग चारि दसक समय बीतिलन्हि, पछाइतसाहित्यलेखनमे एलाह। पहिल रचना औपन्यासिक कृति ‘मौलाइलगाछकफूल’ थिकन्हि जे 2004 ईस्वीमेलिखलाह। 2008 इस्वी धरिक अवधिमे पाँच गोट उपन्यास, एक नाटकतथा किछु कथादि लीखि चुकल छलाह। मुदा कोनहु पत्र-पत्रिकादिमे एकहु गोट रचना प्रकाशित नहि भेल रहनि। तथापि हिनक कलम, लिखबाक क्रम जारी रहलन्हि- प्रस्तुत अछि एहि प्रसंगमे हुनकहि लिखल बात-
“मौलाइलगाछकफूल 2004 ईस्वीमेलिखलपहिल उपन्यासछी।अखनधरिपाँचटाउपन्यासआकिछुकथा, लघुकथा, नाटकसभअछि।छपबैकजेमजबूरीबहुतोरचनाकारकेँछैनसेहमरोरहल।मुदातइसँलिखैकक्रमनैटुटल।‘भैंटकलावा’ कथासेहोदू-हजारचारिकपहिलकथाछी।”
8 नवम्बर 2008 मे मिथिलाक प्रसिद्ध ‘सगर राति दीप जरय’क 64म कथा गोष्ठी डॉ. अशोक अविचलक संयोजकत्वमे हुनक गाम- रहुआ संग्राम (मधेपुर)मे आयोजित भेल छल जाहिमे जगदीश प्रसाद मण्डलजी उपस्थित भऽ‘भैंटक लावा’ कथा केर पाठ कएलनि। एहि गोष्ठीमे भाग लेबाक आग्रह डॉ. तारानन्द ‘वियोगी’ कयने रहनि।सगर राति दीप जरयक गोष्ठीमे भाग लेबए लेल आयोजक/संयोजकक हकार अनिवार्य नहि होइछ। कोनहु माध्यमसँ पता चलल वएह थिक हकार। ‘वियोगीजी’सँ जगदीश प्रसाद मण्डलक पहिल भेँट 2008 इस्वीमे मधुबनीमे भेल छलन्हि।
साहित्य क्षेत्रमे जगदीश प्रसाद मण्डलजीक पहिल मंच रहुआ संग्राम 64 सगर राति दीप जरय कथा गोष्ठीकेँ कहल जा सकैछ। जाहिठामसँ हुनक रचना सार्वजनिक हएब शुरू भेल। ओना, पहिनेबेरमा पंचायत आ रहुआ संग्राम, दुनू मधेपुर ब्लौकक अन्तर्गत पड़ैत छल। जे कि जगदीश प्रसाद मण्डलजीक कर्म क्षेत्र रहल छन्हि। समर्पित समाजसेवीक क्रिया-कलाप रहल छन्हि। “8.11.2008 लक्ष्मीनाथगोसाँइकस्थानमेकार्यक्रमभेल छल। ओना, केतेकबेरराजनीतिकमंचपररहुआमेबाजिचुकलछेलौं, कर्मक्षेत्रछल तँएकथावचैमेसंकोचनइभेल।”
2008 इस्वीसँ पूर्व जगदीश प्रसाद मण्डलजीक एकहु गोट रचना सार्वजनिक नहि भेल छलन्हि। कोनहुँ पत्र-पत्रिकादिमे प्रकाशित नहि भेल छलन्हि। पहिल रचना ‘घर बाहर- पटना’सँ प्रकाशित भेलन्हि। जाहि कथाक पाठ रहुआ संग्राममे कयने छलाह, आ प्रशंसा भेल छलन्हि। द्रष्टव्य अछि के सभप्रशंसाकयने रहन्हि- “डॉ. रमानन्दझा‘रमण’जीओकथामांगिलेलैन।किछुएमासकउपरान्त‘घरबाहर’ पत्रिकामेप्रकाशितकेलैन।सिद्धपुरुषकस्थानमेप्रतिष्ठाभेटल।डायरी-कलमभेटल।गमछा-पागभेटल।लक्ष्मीनाथगोसाँइकमुर्तिसेहोभेटल।”
घर-बाहरमे एक आर रचना (कथा) प्रकाशित भेलन्हि। पछाति ‘मिथिला दर्शन- कोलकाता’मे ‘चुनवाली’ नामक कथा प्रकाशित भेलनि। चुनवाली, भैंटक लावा आ बिसाँढ़, कथा प्रकाशित होइतहि ‘विदेह’क सम्पादक श्री गजेन्द्र ठाकुरजीसँ सम्पर्क भेलन्हि। तकर बाद मण्डलजीक रचना सभ पुस्तकाकार रूपमे प्रकाशित हुअ लगलन्हि। एहि सन्दर्भमे जगदीश प्रसाद मण्डलजी ‘अप्पन बात’मे लिखलन्हि अछि- “घरबाहरमेभैंटकलावाआबिसाँढ़छपलआफेरमिथिलादर्शनमे‘चुनवाली’ कथापढ़ितेअनेकोबधाइफोनआएलजेना- पञ्जीकारविद्यानन्दझाजीक।एकटामहत्वपूर्णफोनश्रीगजेन्द्रठाकुरजीकरहल।हिनकरफोनसुनितेजिनगीकओहनचौबट्टीटपिगेलौंजेचौबीसघन्टाकखुशीमनमेआबिगेल।”
2009 सँ 2013 इस्वीक बीच जगदीश प्रसाद मण्डलजीक 27 गोट पोथी श्रुति प्रकाशन, दिल्लीसँ प्रकाशित भेल छन्हि। जाहिमे हिनका एक्कहु पाइ प्रकाशनक हेतु नहि देबए पड़लन्हि। ई चीज स्पष्ट होइछ दू ठामसँ, पहिल जे लेखक स्वयं अपन ‘तरेगन’ पोथीक मनमनियाँमे लिखने छथि- “समय-समयपरगजेन्द्रजी (श्रीगजेन्द्रठाकुर, मेंहथ)कआग्रहआसुझावआसंगहिश्रुतिप्रकाशनकश्रीनागेन्द्रकुमारझाआश्रीमतीनीतूकुमारीकभरपुरसहयोगभेटलासँलिखैकनवउत्साहोआआशोमनकेँसक्कतबनादेनेअछि।” आ दोसर ‘अंशु’ समालोचनाक पोथीमे श्री शिव कुमार टिल्लू लिखने छथि- “जगदीश प्रसाद मण्डलजीक लघुकथा‘बिसाँढ़’ आ‘भैंटकलावा’ घर-बाहरमेआ‘चुनवाली’ मिथिलादर्शनमेप्रकाशितहोइतेमैथिलीपत्रिकाकसंपादकमण्डलकसंग-संगप्रबुद्धपाठककमध्यहड़होरिमचिगेल।‘पहिनेआउआपहिनेपाउ’कआधारपरविदेहकसंपादकश्रीगजेन्द्रठाकुरहिनकरचनासभकेँअपनपत्रिकामेछपबएलेलहथियालेलनि।ऐप्रकारकशब्दकप्रयोगकरबाकहमरतात्पर्यअछिजेजगदीशजीकोनोनवरचनाकारनैछथि, तिरसठिबर्खकमाँजलसाहित्यकारछथि, मुदाहिनकरचनाकप्रदर्शननैभेलछल।समग्ररचना-संसारहिनकपुत्रश्रीउमेशमण्डलजीककम्प्यूटरमेओझराएलछलकिएकतँछपबैलेकैंचाकेतएसँआएत?”
एहि तरहेँ जगदीश प्रसाद मण्डलजीक आगमन मैथिली साहित्यक दुनियाँमे होइत छन्हि। बिनु पाइक अर्थात् बिनु खर्चेक पोथी प्रकाशन मैथिली साहित्यमे नव उदाहरण छल। जगदीश प्रसाद मण्डलजीक 27 गोट पोथी एकसंग श्रुति प्रकाशन, दिल्लीसँ प्रकाशित भेलन्हि। वर्तमानमे ओहि तरहेँ पोथीसभक प्रकाशन पल्लवी प्रकाशन,निर्मलीसँ भऽ रहलन्हि अछि।
प्रस्तुत अछि मण्डलजीक आइ धरिक प्रकाशित पोथीक सूची, जाहिमे क्रमश: कथा, उपन्यास, कविता, गीत आ नाटक-एकांकी अछि-
कथा- 1. गामकजिनगी (2009), 2. तरेगन (2010), 3. बजन्ता-बुझन्ता (2013), 4. शंभुदास (2013), 5. उलबाचाउर (2013), 6. अर्द्धांगिनी (2013), 7. सतभैंयापोखैर (2013), 8. गामकशकल-सूरत (2014), 9. अपनमनअपनधन (2015), 10. समरथाइकभूत (2014), 11. अप्पन-बीरान (2014), 12. बालगोपाल (2014), 13. भकमोड़ (2013), 14. रटनीखढ़ (2014), 15. पतझाड़ (2014), 16. लजबिजी (2014), 17. उकड़ूसमय (2015), 18. मधुमाछी (2015), 19. पसेनाकधरम (2015), 20. गुड़ा-खुद्दीकरोटी (2015), 21. फलहार (2015), 22. खसैतगाछ (2015), 23. एगच्छाआमकगाछ (2016), 24. शुभचिन्तक (2016), 25. गाछपरसँखसला (2016), 26. डभियाएलगाम (2016), 27. गुलेतीदास (2016), 28. मुड़ियाएलघर (2016), 29. बीरांगना (2017), 30. स्मृतिशेष (2017), 31. बेटीकपैरुख (2017), 32. क्रान्तियोग (2017), 33. त्रिकालदर्शी (2017), 34. पैंतीससालपछुआगेलौं (2017), 35. दोहरीहाक (2018), 36. सुभिमानीजिनगी (2018), 37. देखलदिन (2018), 38. गपकपियाहुललोक (2018), 39. दिवालीकदीप (2018), 40. अप्पनगाम (2018), 41. खिलतोड़भूमि (2019), 42. चितवनकशिकार (2019)
उपन्यास- 1. मौलाइलगाछकफूल (2009), 2. उत्थान-पतन (2009), 3. जिनगीकजीत (2009), 4. जीवन-मरण (2010), 5. जीवनसंघर्ष (2010), 6. नैधाड़ैए (2013), 7. बड़कीबहिन (2013), 8. ठूठगाछ (2015), 9. इज्जतगमाइज्जतबँचेलौं (2017), 10. लहसन (2018), 11. पंगु (2018), 12.आमकगाछी (2018)
पद्य- 1. इन्द्रधनुषीअकास (2013), 2. राति-दिन (2013), 3. तीनजेठएगारहममाघ (2013), 4. सरिता (2013), 5. गीतांजलि (2013), 6. सुखाएलपोखरिकजाइठ (2013), 7. सतबेध (2018), 8. चुनौती (2019)
नाटक/एकांकी- 1. मिथिलाकबेटी (2009), 2. कम्प्रोमाइज (2013), 3. झमेलियाबिआह (2013), 4. रत्नाकरडकैत (2013), 5. स्वयंवर (2013), 6. पंचवटी (2013), 7. कल्याणी (2015), 8. सतमाए (2015), 9. समझौता (2015), 10. तामकतमघैल (2015), 11. बीरांगना (2015)
जगदीश प्रसाद मण्डलजीकेँ एहि तरहक साहित्य सेवा लेल समय-समयपर सम्मान/पुरस्कार सेहो भेटैत रहलनि अछि। यथा-विदेहसम्पादक मण्डल द्वारा ‘गामक जिनगी’ लघु कथा संग्रह लेल‘विदेहसम्मान- 2011’, बालप्रेरकबीहैनकथासंग्रह ‘तरेगन’लेल ‘विदेह बालसाहित्यपुरस्कार-2012’, तथा ‘नैधारैए’उपन्यास लेल‘विदेहबालसाहित्यपुरस्कार- 2014-15’, ‘गामक जिनगी व समग्र योगदान हेतु साहित्यअकादेमी द्वारा-‘टैगोरलिटिरेचरएवार्ड- 2011’, मिथिला मैथिलीक उन्नयन लेल साक्षर दरभंगा द्वारा- ‘वैदेहसम्मान- 2012’, मिथिला-मैथिलीक विकास लेल सतत क्रियाशील रहबाक हेतु अखिल भारतीय मिथिला संघ द्वारा- ‘वैद्यनाथ मिश्र ‘यात्री’सम्मान- 2016’, रचना धर्मिताक क्षेत्रमे अमूल्य योगदान हेतु ज्योत्स्ना-मण्डल द्वारा- ‘कौमुदी सम्मान- 2017’, मैथिली साहित्यमे समग्र योदान लेल एस.एन.एस. ग्लोबल सेमिनरी द्वारा ‘कौशिकीसाहित्यसम्मान- 2015’, आमिथिला-मैथिलीक संग अन्य उत्कृष्ट सेवा लेल अखिल भारतीय मिथिला संघ द्वारा ‘स्व. बाबूसाहेवचौधरीसम्मान- 2018’ इत्यादि।
एहि तरहेँ श्री जगदीश प्रसाद मण्डलक अनवरत लेखन ने मात्र मैथिली साहित्य जगत बल्कि भारतीय भाषा साहित्यक बीच सेहो अपन स्थान निरूपित करैत अछि।
उमेश मण्डल
शोधार्थी, बी.आर.ए.बी.यू. मुजफ्फरपुर