उमेश मण्डल
जगदीश प्रसाद मण्डलक नाट्य कृतिक संक्षिप्त परिचय
नाटक/एकांकी विधामे मण्डलजीक उपलब्ध पोथीसभ छन्हि- 1. मिथिलाकबेटी (2009), 2. कम्प्रोमाइज (2013), 3. झमेलियाबिआह (2013), 4. रत्नाकरडकैत (2013), 5. स्वयंवर (2013), 6. पंचवटी (2013), 7. कल्याणी (2015), 8. सतमाए (2015), 9. समझौता (2015), 10. तामकतमघैल (2015), 11. बीरांगना (2015)
सभ पोथीक सामान्य परिचय क्रमश: निम्नांकित अछि-
1. मिथिलाकबेटी (2009): ‘मिथिलाक बेटी’ मण्डलजीक पहिल नाट्य कृति छियनि। नाटककार एहि पोथीक लेखन 2005 इस्वीसँ पूर्वहि कयने छथि। 2009 इस्वीमे श्रुति प्रकाशन, दिल्लीसँ जखन किछु पोथीक प्रकाशन भेलन्हि, जाहिमे प्रस्तुत नाटकक पोथी सेहो प्रकाशित भेल रहन्हि। ओही समयमे मण्डलजी अपन एक उपन्यासक ‘अप्पन बात’ शीर्षकक मध्य लिखने छथि- “मौलाइलगाछकफूल 2004 ईस्वीमेलिखलपहिलउपन्यासछी।अखनधरिपाँचटाउपन्यासआकिछुकथा, लघुकथा, नाटकसभअछि।छपबैकजेमजबूरीबहुतोरचनाकारकेँछैनसेहमरोरहल।मुदातइसँलिखैकक्रमनैटुटल।”
प्रस्तुत नाटक ‘मिथिलाक बेटी’क पहिल संस्करण 2009 इस्वीमे ‘श्रुति प्रकाशन’, न्यू राजेन्द्र नगर, नई दिल्ली- 110008 सँ प्रकाशित भेल छन्हि। वर्तमानमे तेसर संस्करण ‘पल्लवी प्रकाशन’, तुलसीभवन, जे.एल.नेहरूमार्ग, वार्डनं. 06, निर्मली, जिला- सुपौल, बिहार :847452 सँ प्रकाशित छन्हि।
प्रस्तुत नाट्य कृतिक लोकार्पण दिनांक 03.04.2010क जनकपुर (नेपाल) मे आयोजित ‘सगर राति दीप जरय’क 69म कथा गोष्ठीमे प्रसिद्ध रचनाकार डॉ. राजेन्द्र ‘विमल’, प्रसिद्ध भाषाविद्, डॉ. रामवतारयादव, डॉ. रामानन्द झा ‘रमण’, श्री राजाराम सिंह ‘राठौर’तथा मंचस्थ अन्य विद्वान लोकनिक बीच भेल अछि।
नाटककारक समर्पण भाव विराट रूपमे अंकित भेल अछि। निम्नांकित हुनक समर्पण भावकेँ देखल जाए-
“मिथिलाक वृन्दावनसँ लऽ कऽ बालुक ढेरपर बैसल फुलबाड़ी लगौनिहार तथा नव विहान अननिहारलेल...।” ई पोथी समर्पित अछि।
हिन्दी साहित्य जगतमे प्रसिद्ध नाटककार श्री रामेश्वर प्रेम ‘मिथिलाक बेटी’क नाटकक आमुखमे लिखने छथि- “प्रस्तुतनाटकसमस्याप्रधानअछि।मैथिलसमाजआवृहतरूपमेभारतीयसमाजमेजाति-पातितँछइहे, निष्ठावानकर्मनाथअपनबेटीकबिआहबिनुदहेजककरतातइक्रममेदीर्घकथोपकथनकमाध्यमसँईदेखौलगेलअछि। ईनाटकपठनीयभऽसकैछइ।विशेषताईछैजेईनाटकअपनसमाजमेपसरलकुरीतिपरआँगुररखैतअछि।”
प्रस्तुत नाटकक सन्दर्भमे द्वितीय आमुखकार श्री रामजी प्रसाद मण्डल, अवकाश प्राप्त पुस्तकालयाध्यक्ष, निर्मली महाविद्यालय निर्मली,क मनतव्य- “श्रीजगदीशप्रसादमंडलजीकमिथिलाकबेटीनाटकपढ़ल, ऐमेआधुनिकसमाजिकसमस्याकश्रीमंडलजीद्वारानीकचित्रणभेलअछि।आइसमाजदहेजकबिमारीसँग्रस्तअछि।एकरानवजीवनप्रदानकेनाइसभव्यक्तिकदायित्वअछि।मात्रकर्मनाथेनहि, ऐसमस्यासँलड़बाककाजसभलोककसमाजिकधर्मअछि।
लेखकअपनभावनाकेँअभिव्यक्तिमात्रकेनेछैथ।दिशास्वयंसमाजकेँतकबाकअछि।कथामूलतःमिथिलाकधरतीकउपजअछि।आईखालीमिथिलाकनहि, भारतवर्षकसमस्याअछि।नाटकविधामेईकमजोरभलेँदेखापड़एमुदाकथोपकथनसमाजिकविरुपताकेँनिरुपितकरबामेसक्षमअछि।”
नाटककार श्री जगदीश प्रसाद मण्डल ‘मिथिलाक बेटी’क शीर्षक अन्तर्गत सम्बन्धित भाव-भूमिकेँ व्यक्त करबाक हेतु 9 गोट पुरुष तथा 5 गोट स्त्री पात्रकेँ माध्यम बनौलन्हि अछि। ओ पात्रसभ अछि- 1. कर्मनाथ (प्रशासनिकअफसर), 2. सोमनाथ (कर्मनाथकपिता), 3. रामविलास (सेवानिवृत्तिमिस्त्री), 4. विकास (सेवानिवृत्तिशिक्षक), 5. नूनू (कर्मनाथकभाए), 6. लालबाबू (कर्मनाथकभाए), 7. श्रीचन (किसान), 8. फुलेसर (कर्मनाथकबेटा), 9. राधेश्याम (बोनिहार), 10. चमेली (कर्मनाथकपत्नी), 11. आशा (कर्मनाथकमाए), 12. माधुरी (रामविलासकपत्नी), 13. चम्पा (कर्मनाथकबेटी), 14. जुही (कर्मनाथकबेटी)
2. कम्प्रोमाइज (2013): श्री जगदीश प्रसाद मण्डलजीक एहि नाटकक पहिल संस्करण 2013 इस्वीमे ‘श्रुति प्रकाशन’, न्यू राजेन्द्र नगर, नई दिल्ली- 110008 सँ प्रकाशित भेल छन्हि।पछाति ‘पल्लवी प्रकाशन’, तुलसीभवन, जे.एल.नेहरूमार्ग, वार्डनं. 06, निर्मली, जिला- सुपौल, बिहार :847452 सँ सेहो अग्रिम संस्करण प्रकाशित छन्हि।
प्रस्तुत नाट्य कृतिक लोकार्पण श्री उमेश मण्डलक संयोजकत्वमे आयोजित ‘सगर राति दीप जरय’क 80म कथा गोष्ठी, निर्मली (सुपौल)मे दिनांक 30.11.2013क डॉ. अशोक अविचल तथा डॉ. रामाशीष सिंहजीक अध्यक्षतामे, अधिवक्ता श्रीरामप्रवेशमण्डल, नाटककार तथा मंचस्थ अन्यान्य विद्वान सभक बीच भेल अछि।
कम्प्रोमाइज नाटकमे नाटककार अपन भाव-भूमिकेँ निम्नांकित पात्रसभक माध्यमसँ व्यक्त कएलनि कयने छथि-
(1) नसीवलाल- किसानकअगुआ, 65 वर्ष
(2) सुकदेव- बटाइकिसान (बटेदार) 64 वर्ष
(3) मनचन- बटेदार, 40 वर्ष
(4) सोमन- बटेदार, 45 वर्ष
(5) रघुवीर- तीमन-तरकारीउपजौनिहार, 45 वर्ष
(6) रामरूप- बटेदार, 44 वर्ष
(7) कर्मदेव- बी.ए. पासयुवक
(8) प्रो. कृष्णदेव- 50-55 वर्ष
(9) दिनेश- मैट्रिककछात्र
(10) शिवशंकर- एजेन्ट (बोरिंग-दमकल)
(11) घनश्याम- बैंकमैनेजर
(12) बहादुर- नोकर
(13) मनमोहन- इंजीनियर
(14) सन्तोष- एग्रीकल्चरग्रेजुएट
(15) डॉ. रघुनाथ- सेवानिवृतडॉक्टर, 60 वर्ष
(16) अनुराधा- डॉ. रघुनाथकपत्नी, 58 वर्ष
(17) सुधा- कृष्णदेवकबेटी।हाइस्कूलकछात्रा
(18) शान्ती- पंचायतमुखिया, 25 वर्ष
(19) आभा- शिक्षिका, 22 वर्ष
(20) सोनिया- सुकदेवकपत्नी, 60 वर्ष
3. झमेलियाबिआह (2013): प्रस्तुत नाटकक पहिल संस्करण 2013 इस्वीमे ‘श्रुति प्रकाशन’, न्यू राजेन्द्र नगर, नई दिल्ली- 110008 सँ प्रकाशित भेल छन्हि।वर्तमानमे ‘पल्लवी प्रकाशन’, तुलसीभवन, जे.एल.नेहरूमार्ग, वार्डनं. 06, निर्मली, जिला- सुपौल, बिहार :847452 सँ सेहो प्रकाशित छन्हि।
प्रस्तुत नाटकक लोकार्पण ‘सगर राति दीप जरय’क 80म कथा गोष्ठी, निर्मली (सुपौल)मे अधिवक्ता श्रीवीरेन्दकुमारयादव, नाटककार तथा मंचस्थ अन्यान्य विद्वान सभक बीच दिनांक 30.11.2013कडॉ. अशोक अविचलजीक अध्यक्षतामे भेल अछि।
झमेलियाबिआह नाटकमे नाटककार अपन भाव-भूमिकेँ व्यक्त करबाक हेतु निम्नांकित पात्रसभकेँ माध्यम बनौलन्हि अछि-
1. भागेसर, 2. झमेलिया, 3. यशोधर, 4. राजदेव, 5. श्याम, 6. कृष्णानन्द, 7. बालगोविन्द, 8. राधेश्याम, 9. घटकभाय, 10. रूपलाल, 11. गरीबलाल, 12. धीरजलाल, 13. पान-सातबच्चा, 14. सुशीला, 15. दायरानी,16. घटकभाइपत्नी, 17. सुनीता
प्रसिद्ध नाटककार श्री रवि भूषण पाठकजी एहि नाटकक प्रसंगलिखने छथि- “झमेलियाबिआह’नाटकअपनऔपन्यासिकविस्तारआकाव्यात्मकदृष्टिसँपरिपूर्ण।जगदीश प्रसाद मण्डलजीसमकालीनविश्वआगद्यकपारस्परिकतासँनीकजकाँपरिचितछैथ, तँएहिनकरसम्पूर्णरचना-संसारमेसमकालीनताकवैभवपसरलअछि, जेतेवैचारिक, ओतबेरूपगत।समकालीनताकप्रतिहिनकरझुकाव‘झमेलियाबिआह’कएकटाविशेषस्वरूपदइछइ।बारहसालकनेनाकबिआहकओरियाओनकरैतमाए-बापकचित्रजेतेहँसबैछैक, माएकबिमारीओतबेसुन्न।
लेखककरचनासंसारमेकाल-देवतालेलविशेषजगह, तँएईनाटकप्रहसनकप्रारंभिकरूपगुणदेखाबितोकिछुआरअछि।पहिलदृश्यमेसुशीलाकहैछथिन‘राजादैवककोनठेकान...’, ‘अगरदुरभाखापड़तैतँसुभाखाकिएनेपड़ैछै...।’ आराजा, दैवककर्तव्यकप्रतिईउदासीनताकअनुभवसमस्तआस्तिकताआभाग्यवादिताकेँखंडितकरैए। सभनाटकमेभरतमुनिकेँखोजनाइजरूरीनै, ओनाउत्साहीविवेचकअर्थ-प्रकृति, कार्यावस्थाआसंधिकखोजकरबेकरता, आकोनोतत्वनैमिलतैनतँचिकडि़उठता।
यद्यपिलेखककउद्देश्यस्पष्टअछि।शास्त्रीयरूढ़िजेना- नान्दीपाठ, मंगलाचरण, प्रस्तावना, भरतवाक्यकप्रतिलेखककोनोआकर्षणनैदेखबैछथिन।एतबेनैपाश्चात्यनाट्यसिद्धांतकेँहूबहू–देकसी–खोजएबलाकेँआलससेहोलगतैन।तँए‘झमेलियाबिआह’ नाटकमेस्टीरियोटाईपसंघर्षदेखबाकइच्छुकभायलोकैनकनेकबचिबचाकेचलब।विसंगतिआसमस्यानाटककफार्मूलाकेँनाटकमेखोजएबलाकेँसेहोझमेलाबुझासकैछैन,किएकतँलेखककोनोफार्मूलाकेँस्वीकारिकऽनैलिखैछथिन।”
4. रत्नाकरडकैत (2013): प्रस्तुत पोथीश्री जगदीश प्रसाद मण्डलजीक चारिम नाट्य कृति छियनि। एहि पोथीक पहिल संस्करण 2013 इस्वीमे ‘श्रुति प्रकाशन’, न्यू राजेन्द्र नगर, नई दिल्ली- 110008 सँ प्रकाशित भेल छन्हि।पछाति ‘पल्लवी प्रकाशन’, तुलसीभवन, जे.एल.नेहरूमार्ग, वार्डनं. 06, निर्मली, जिला- सुपौल, बिहार :847452 सँ सेहो अग्रिम संस्करण प्रकाशित छन्हि।
प्रस्तुत नाटकक लोकार्पण श्री उमेश मण्डलक संयोजकत्वमे आयोजित ‘सगर राति दीप जरय’क 80म कथा गोष्ठी, निर्मली (सुपौल)मे डॉ. रामाशीष सिंह आ डॉ. अशोक अविचलजीक संयुक्त अध्यक्षतामेकिसलय कृष्ण, नाटककार तथा मंचस्थ अन्यान्य विद्वान सभक बीच दिनांक 30.11.2013क भेल अछि।
नाटककार श्री जगदीश प्रसाद मण्डलजी अपन ‘रत्नाकर डकैत’ सम्बन्धि भाव-भूमिकेँ निम्नांकित पात्रसभक माध्यमसँ व्यक्त कएलनि अछि-
1. रत्नाकर, 2. महेश, 3. सुरेश, 4. गणेश, 5. भजनलाल, 6. मिसरलाल, 7. रमणलाल, 8. मोजेलाल, 9. बर्बरी, 10. सुग्रीव, 11. हनुमान, 12. अध्यक्ष, 13. शबरी, 14. हरेलही, 15. बिसरलीही
5. स्वयंवर (2013): ‘श्रुति प्रकाशन’, न्यू राजेन्द्र नगर, नई दिल्ली- 110008 सँ प्रस्तुत नाटकक पहिल संस्करण 2013 इस्वीमे प्रकाशित भेल अछि।वर्तमानमे ‘पल्लवी प्रकाशन’, तुलसीभवन, जे.एल.नेहरूमार्ग, वार्डनं. 06, निर्मली, जिला- सुपौल, बिहार :847452 सँ सेहो प्रकाशित अछि।
प्रस्तुत पोथीक लोकार्पण‘सगर राति दीप जरय’क 80म कथा गोष्ठी, निर्मली (सुपौल)क मंचपर श्रीशम्भुसौरभ, नाटककार तथा मंचस्थ अन्यान्य विद्वान सभक बीच लोकार्पण कराओल गेल अछि। उक्त आयोजन श्री उमेश मण्डलक संयोजकत्वमे आयोजित छल, जकर अध्यक्षता डॉ. रामाशीष सिंह आ डॉ. अशोक अविचलजीक संयुक्त कयने छलाह।
स्वयंवर नाटकमे श्री जगदीश प्रसाद मण्डलजी अपन भाव-भूमिकेँ व्यक्त करबाक हेतु निम्नांकित पात्रसभकेँ माध्यम बनौलन्हि अछि-
1. मकशूदन, 2. सोनेलाल, 3. सिंहेश्वर, 4. रूपलाल, 5. जीयालाल, 6. सोहनलाल, 7. रौदी, 8. मोहनलाल, 9. किशोर, 10. बुधनी, 11. रूक्मिणी, 12. सुशीला
6. पंचवटी (2013): श्री जगदीश प्रसाद मण्डलजीक एहि नाटकक पहिल संस्करण 2013 इस्वीमे ‘श्रुति प्रकाशन’, न्यू राजेन्द्र नगर, नई दिल्ली- 110008 सँ प्रकाशित भेल छन्हि।पछाति ‘पल्लवी प्रकाशन’, तुलसीभवन, जे.एल.नेहरूमार्ग, वार्डनं. 06, निर्मली, जिला- सुपौल, बिहार :847452 सँ सेहो अग्रिम संस्करण प्रकाशित छन्हि।
श्री जगदीश प्रसाद मण्डलक प्रस्तुत नाट्य कृति- ‘पंचवटी’क लोकार्पण श्री उमेश मण्डलक संयोजकत्वमे आयोजित ‘सगर राति दीप जरय’क 80म कथा गोष्ठीमे प्रसिद्ध साहित्यकार श्रीराजदेवमण्डल, नाटककार तथा मंचस्थ अन्यान्य विद्वान सभक बीच भेल अछि। उक्त आयोजन मानिकराम-बैजनाथबजाजधर्मशाला, सुभाषचौक, निर्मली (सुपौल)मे दिनांक- 30.11.2013क आयोजित भेल छल, जकर अध्यक्षता डॉ. अशोक अविचल तथा डॉ. रामाशीष सिंहजी कयने छलाह।
7. कल्याणी (2017): एहि पोथीक पहिलसंस्करण 2013 इस्वीमे एकांकी संचयनक पोथीमे संकलित कय श्रुति प्रकाशनसँ प्रकाशित भेल अछि।पछाति पल्लवीप्रकाशन, तुलसीभवन, जे.एल.नेहरूमार्ग, वार्डनं. 06, निर्मली, जिला- सुपौल, बिहार : 847452 सँ 2017 इस्वीमे प्रकाशितभेल।
श्री जगदीश प्रसाद मण्डल प्रस्तुत एकांकीकेँ कुल 9 गोट पात्र, यथा- 1. जेलर, 2. चन्द्रनाथ, 3. अनन्तकुमार, 4. सूर्यदेव, 5. निष्कान्त, 6. क्षितिजदेव, 7. कल्याणी, 8. प्रतिज्ञा, 9. शान्ति केर माध्यमसँ लिखने छथि।
8. सतमाए (2017): प्रस्तुत पोथी- ‘सतमाए’क पहिल संस्करण 2013 इस्वीमे पल्लवीप्रकाशन, तुलसीभवन, जे.एल.नेहरूमार्ग, वार्डनं. 06, निर्मली, जिला- सुपौल, बिहारसँ2017 इस्वीमे प्रकाशितअछि।
नाटककार प्रस्तुत ‘सतमाए’ एकांकीमे उक्त पात्रसभक समायोजन कयने छथि- 1. बुद्धिधारी, 2. बिपैतबाबू, 3. पुलकित, 4. चिन्तामणि, 5. शिवकुमार, 6. सुलक्षणी, 7. सावित्री, 8. खजुरिया, 9. तेतरी
9. समझौता (2017): पोथीक पहिलसंस्करण 2013 इस्वीमे एकांकी संचयनक पोथीमे संकलित कय श्रुति प्रकाशनसँ प्रकाशित भेल अछि।पछाति पल्लवीप्रकाशन, तुलसीभवन, जे.एल.नेहरूमार्ग, वार्डनं. 06, निर्मली, जिला- सुपौल, बिहार : 847452 सँ 2017 इस्वीमे प्रकाशितभेल। श्री जगदीश प्रसाद मण्डल प्रस्तुत एकांकीकेँ निम्नांकित पात्रसभक माध्यमसँ लिखने छथि-
1. श्याम, 2. सुकान्त, 3. फुलेसर, 4. कुसेसर, 5. मुनेसर, 6. रौदी, 7. अनुप, 8. झोली, 9. रूपनी, 10. रेखा
10. तामकतमघैल (2017): पोथीक पहिलसंस्करण 2013 इस्वीमे एकांकी संचयनक पोथीमे संकलित कय श्रुति प्रकाशनसँ प्रकाशित भेल अछि।पछाति पल्लवीप्रकाशन, तुलसीभवन, जे.एल.नेहरूमार्ग, वार्डनं. 06, निर्मली, जिला- सुपौल, बिहार : 847452 सँ 2017 इस्वीमे प्रकाशितभेल।
तामक तमघैल एकांकीमे श्री जगदीश प्रसाद मण्डलजी अपन भाव-भूमिकेँ व्यक्त करबाक हेतु निम्नांकित पात्रसभकेँ माध्यम बनौलन्हि अछि-
1. तेतरी, 2. रविन्द्र, 3. चन्द्रदेव, 4. सुनरलाल, 5. रागिणी, 6. बलाटवाली, 7. पीपरावाली, 8. अनुराधा
11. बीरांगना (2017): पोथीक पहिलसंस्करण 2013 इस्वीमे एकांकी संचयनक पोथीमे संकलित कय श्रुति प्रकाशनसँ प्रकाशित भेल अछि।पछाति पल्लवीप्रकाशन, तुलसीभवन, जे.एल.नेहरूमार्ग, वार्डनं. 06, निर्मली, जिला- सुपौल, बिहार : 847452 सँ 2017 इस्वीमे प्रकाशितभेल।
श्रीजगदीशप्रसादमण्डलप्रस्तुतएकांकीकेँनिम्नांकितपात्रसभकमाध्यमसँलिखनेछथि- 1. सोनमाकाका, 2. चेथरू, 3. जुगेसर, 4. अयोधी, 5. जीवन, 6. रूपनी, 7. कुशेसरी, 8. कोशिला