उमेश मण्डल
जगदीशप्रसादमण्डलजीक‘सुभिमानीजिनगी’
‘सुभिमानीजिनगी’श्रीजगदीशप्रसादमण्डलजीकरचितकथाकेरपोथीकनाओंथिक।एहिपोथीमेकुलआठगोटकथासंकलितअछि।सभकथामेमनुक्खकजीवनमेहोइतनिरन्तर-परिवर्तकेँरेखांकितकरैतओकरयथार्थकेँसमेटिओहिमेव्यवहारिकदृष्टिएनीक-बेजाकेँसेहोबिलगाओलगेलअछि।तथाओहिपरिवर्तितस्वरूपमेआधुनिकपरिवर्तनकआवश्यकताकेँनिरूपितकरैतस्वाभिमानीजीवनकव्यवहारिकपक्षकेँउजागरकएलगेलअछि।संग्रहकसभकथाकसार-संक्षेपक्रमश: निम्नांकितअछि।मुदाताहिसँपूर्वसंग्रहकपहिलकथा- ‘केकरा-लेकेलौं’ सँलऽकऽअन्तिमकथा‘आशापरपानिफेरागेल’धरिकलेखन-क्रमओलेखन-तिथिधरिकविवरणपरदृष्टिपातकएलजाए-
1. केकरा-लेकेलौं- शब्दसंख्या : 2649, तिथि : 23 जनवरी 2018
2. स्वाभिमानीजिनगी- शब्दसंख्या : 2767, तिथि : 28 जनवरी 2018
3. बाबाकबाग-बगिया- शब्दसंख्या : 3089, तिथि : 3 फरवरी 2018
4. अब-तब- शब्दसंख्या : 2076, तिथि : 7 फरवरी 2018
5. अगिलह- शब्दसंख्या : 2472, तिथि : 11 फरवरी 2018
6. कुकुरपन- शब्दसंख्या : 2229, तिथि : 28 फरवरी 2018
7. हेराएलजिनगी- शब्दसंख्या : 3107, तिथि : 5 मार्च 2018
8. आशापरपानिफेरगेल- शब्दसंख्या : 2447, तिथि : 9 मार्च 2018
रचनाकरबाकसन्दर्भमेएकमान्यताअछिजेकोनहुँरचनाकबिम्बअनायासअबैछ।अत: ओनियमितओनिर्धारितसमयककार्यनहिथिक।मुदाप्रस्तुतरचनाकनियमितलेखनसँउपरोक्तमान्यताकमजोरबुझनाजाइतअछि।प्रस्तुतपोथी 23 जनवरी 2018 सँ 9 मार्च 2018 धरिकबीचलिखलगेलअछि।नियमितलेखन, ताहूमेकथाविधाकलेखनसँसद्य: ओहनमान्यतापरप्रश्नचिह्नितहोइतअछि।हँ, ‘विषय-बिम्बकखनहुँ-कखनहुँआकहियोकालअबैतछैक’, एहेनमान्यताव्यक्तिगतभऽसकैछ।ईचीजरचनाकारनिर्भरकएसकैतअछि।उपरोक्तसभकथाकेरसार-संक्षेपनिम्नांकितअछि-
‘केकरा-लेकेलौं’, जाड़कमासमेघूरतरबैसलव्यक्तिसबहकबीचआपसीवार्त्तालापसँएहिकथाकप्रारम्भहोइतअछि।ओहिवार्त्तालापमेक्रमश: गामक-समाजकसंगमौसमकचर्चाहोइतअछि, ताहिक्रममेभोगीलालभाइकगप्पसेहोउठैतछन्हि।भोगीलालभायआयुर्वेदिकडॉक्टरछथि।स्वयंआयुर्वेदिकडॉक्टररहलोपरान्तभोगीलालभायअपनस्वास्थ्यनीकनहिराखिपबैतछथि।ततबेनहि, जहिनाअपनस्वास्थ्यकेँभोलीलालभायठीकनहिराखिपौलन्हितहिनाहुनकपरिवारसेहोछिड़ियागेलन्हि।ओना, आजुकपरिवेशमेअधिकतरपरिवारकसंरचनाबिगड़लेबुझिपड़ैछ।माए-बापकतौ, बेटापुतोहुकतौ...।
भोगीलालभाइकभरल-पुरलपरिवार, सभतरहेँसम्पन्नपरिवार, मानेबेटा-पुतोहु, बेटी-जमाएरहितहुआइहुनकसेवालेललगमेएकमात्रपत्नीटाछथिन।भोगीलालभाइकपत्नी- सुमित्रा, अन्तधरिसहचारिणीरहैतछथिन।एहनास्थितिकेँदेखैतकिसुनआसिंहेश्वरभोगीलालभाइकमृत्युकेँनीकमानैतछथिन।सिंहेश्वरभायकिसुनकेँकहलखिन-
“किसुन, जेनाभोगीभायआयुर्वेदशास्त्रपढ़नेछलातेनाअपनआयुकेँसंयमितनहिरखिसकलाह!”
सिंहेश्वरभाइक‘च्यू-च्यू’सुनिलेखककहलकनि- “आयुर्वेदकीकोनोमुखौटीशिक्षापद्धतिछी, ओतँगीताजकाँजिनगीकक्रियाकपद्धतिछीकिने।तैठाम..?”
बिच्चेमेसिंहेश्वरभायबजलाह-
“जिनगीकपद्धतितँजीता-जिनगी-लेअछि, आबओकराछोड़ह।जहिनासमाजकनापी-जोखीओकरजिनगीकबेवहारमेअछितहिनानेपरिवारिकजिनगीमेबेकतीकसेहोअछि।तइमेभोगीभायकेँकोताहीभेलैन।”
वास्तवमेप्रत्येकव्यक्तिकेँअपनसद्गतिलेलजीवनकक्रिया-कलापपरनजरिदेबआवश्यक, जौंक्रिया-कलापकेँठीकनहिकएलजाएततँजीवनमेओहिनाहूसआओतजहिनाभोगीलालभाइकजीवनमेएलन्हि।
‘सुभिमानीजिनगी’कथामेश्यामाएकटाएहनकिशोरअछिजकरामेकिन्नरहेबाकलक्षणप्रकटहोइतछैक।ओकरखेल-कूद, पसन्द-नापसन्दअपनाउमेरकआनबच्चाजकाँनहिरहनेसमाजकलोकबुझएलगैतअछि।समाजओकराकिन्नरपरिवारमेसौंपिदेबयचाहैए।परम्पराकप्रभावसँश्यामाकमाएसेहोओकरविरोधमेरहैतछथिन।मुदाओकरपिता- जीवनकाका, श्यामाकेँअपनापैरपरठाढ़करबायोग्यशिक्षादेबाकआआत्मनिर्भरबनेबाकप्रणलैतबजैतछथि- “परिवारआकिसमाजएकदिसजुटिआगूमेकिएनेठाढ़हुअएमुदाएक्कोइंचपाछूअपनविचारसँनइघुसकब।”
पतिकप्रणदेखिअन्तत: मंगलीकाकीसेहोश्यामाकसंगतँभऽजाइतछथिमुदाहुनकमोनझुझुआइतेरहैतछन्हि।कारणसमाजकबान्ह-छान्हकेँजेदेखैतआबिरहलछथि।स्थिति-परिस्थितिकेँदेखैतजीवनकाकाकेँएकाकएकपुरुषार्थजगलन्हिआरामायण, महाभारतकचर्चाकरैतबजलाह- “जेसमस्याअपनापरिवारमेउपस्थितभऽगेलअछिओखालीअपनेपरिवार-टामेभेलआकिआइयेभेलअछिआपहिनेनइभेलहएतसेकेनाबुझैछिऐ? सभदिनहोइतआबिरहलअछिआआगूओहोइतरहत।महादेवकेँसेहोअर्द्धनारीश्वरकहलजाइछैन।जखनेअर्द्धनारीश्वरतखनेनेसन्तानविहीन! कार्तिकआगणेशतँतखनभेलैनजखनमहादेवआपार्वतीदुनूदूछला।मुदाजखनदुनूसटिएकभेलातखनकोनोसन्ताननइनेभेलैन।तँएकीहुनकादेववंशसँकियोहटादेलकैनआकिहटादेतैन?”
मुदातैयोमंगलीकाकीकमोनजेहनमजगूतीएबकचाहीसेनहिआबिपबैतछन्हि।ताहिपरपत्नीकेँबुझबैतजीवनकाकाकहलखिन-
“ओसभ–जेठाढ़छलसे–केसभछल?जेपुरुख-नारीकबीचकअछि।जेकराशखा-सन्ताननइहएत।जखनरामचन्द्रजी, लक्ष्मणआसीताकसंगघुमिकऽअयोध्याकआड़िपरपहुँचलातखनवएहसभदुनूभाँइकगट्टापकैड़कहलकैनजे‘अहाँहमराकिएनेविदाइदेलौं? जइआशामेअहींजकाँचौदहबर्खहमहूँसभटपलाखेलौं?”
उपरोक्तबातसुनिमंगलीकाकीकमनआशरीरजेनाशान्तभऽगेलनि, सहमतभेलीह।रणभूमिकसंगीपेबजीवनकाकाउत्साहितहोइतबजलाह-
“श्यामाहमरसन्तानछी।अपनाजीबैतओकराभीखमाँगैतदेखब, कीओहनलाजकविचारलोकअपनेनइकरत।दुनियाँएकदिसभऽजाए, मुदा...।जाबेधरिश्यामापढ़एचाहत, समांगबुझिसहयोगदेबइ।जहियाओपढ़ाइछोड़ततहियाअपनाआँखिकसोझमेओकरामनोनुकूलजीबैकसाधनबनादेबइ।अपनापैरपरठाढ़कऽसमाजकओहनमनुखबनादेबैजेअपनश्रमसँअपनसुभिमानीजिनगीबनाजीबतआओकररक्षाकरैतरहत।”
समाजमेकिन्नरकप्रतिबनलरूढ़िवादीसोचकेँएहिकथामेदेखारकरैतभेलअछिआओहिसोचकेँखण्डितकएएकआदर्शपिताककर्त्तव्यकेँसेहोदेखाओलगेलअछि।
‘बाबाकबाग-बगिया’, एकटाभूमिहीननिर्धनअनाथबालककेरकथाथिक।बालकगोबरधनदासगाम-समाजसँअलगभऽगोकुलदासकस्थानमेरहबाकलेलहुनकालगपहुँचअपनबातकहलकन्हिजेगुरु-गोसाँइ, अपनेकदरबारमेहमचौकीदारबनिरहएचाहैतछी।
अपनानियमानुसारगोकुलदासकहलकन्हि- “बेरागी! अखनअहाँकबालपनअछि।तँए, पुरनिकपातपरकपानिजहिनागोलीबनि-बनिगुड़कैतरहैएआजेतेकालपातपररहलतेतबेकालओअपनस्वच्छरूपरहिचमकैतरहैएमुदापातसँनिच्चाँहोइतेओकराधरतीसोंखिनिपत्ताकऽदइछै, तहिनाअखनअहाँकअवस्थाअछि।तँएअपननियमकेँजँअपनेरक्षाकरैकभारउठाबीतखनकिछुभऽसकैए।”
मुड़ीडोलबैतगोबरधनस्वीकारकरैतअछिजेस्थानकजेनियमहएततकराहमसोल्होअनाअंगीकारकरब।गोकुलदासपुछलथिन-
“बाउ, दुनियाँमेबहुतलोकोछैथआबहुतरंगकव्रतोअछि!तँए...।”
बालमनगोबरधनदासव्रतकेँनहिबुझिअर्थपुछैतअछि, ताहिपरमहात्माजीव्रतकअर्थबतबैतछथिन- “कियोझूठनइबजैकव्रतलइछैथतँकियोझूठेकठीकेदारीकरैछैथ, कियोचोरिकेँअधलाबुझिपरहेजकरैकव्रतलइछैथआकियोचोरिकेँखनदानीपेशाबुझिपरम्पराकनिर्वाहसेहोकरैछैथ।”
विभिन्नतरहकसोच-विचारकरैतगोबरधनदासअन्तत: गोकूलदासकचेलाबनिअपनजीवनबिताबएलगैतअछि।समयबीतैतगेल।गोकुलदासकमृत्युकपछातिओइठकुरबाड़ीकमुख्यकर्त्तासेहोबनिजाइतअछि।अपनजीवनकअन्तिमपड़ावदेखिगोबरधनदास 10 कट्ठामेअपनपसिनकरंग-बिरंगकफल-फूलकगाछलगबैतअछि।धीरे-धीरेओगाछसभबोनबनिजाइछ।आब, जखनगोबरधनदासअपनेजीवितनहिछथि, तखनहुनकलगाओलगाछ-वृक्षसुखिरहलछन्हि।
‘अब-तब’, कथामेविभिन्नतरहकतीमन-तरकारीकबदलैतसामाजिकव्यवहारपरआपससँविचारहोइतअछि।भोज-भातमेअदौरीकमेटाइतजिनगीसँसमाजमे (तरकारीकसमाजमे) दुखकमाहौलअछि।विभिन्नतरहकतरकारीकनामबलापात्रसबहकबीचवर्त्तमानसामाजिकस्थिति-परिस्थितकेँचर्चाहोइतअछि।आपसमेविचारहोइतअछि।पछातिसभकियोअपन-अपनभूमिकाकेँचिह्नितकरैए।ताहिबीचआरो-आरोतरकारीसभकउपस्थितिहोइतअछि।गप-गपचलबाककारणेँपताचलैएजेअदौड़ीबाबाअब-तममेछथि, मानेअदौड़ीबाबामरणासन्नछथि।
खान-पीनकजेपरम्पराअछिताहिमेअदौड़ीबाबाप्रमुखअंगछथि।कोनहुँभोज-भातबिनुअदौड़ीकसम्पन्ननहिहोइतछल।मुदाआजुकसमयमेअदौड़ीकप्रासंगिकताखत्मभेलजारहलछैक।आबलोकओकरमहत्वकमकएनेजारहलअछि।बैगनलालकसंगअदौड़ीबाबाकपुरानयारीरहलछन्हि! मुदाआबओहोखत्महेबाककगारपरअछि।
‘अगिलह’, कथामेपक्षधरकाकाअपननोकरीसँसेवानिवृतभऽखेती-बाड़ीआफल-फूलकदेख-रेखकरैतछथि।मुनीलालहुनकपिसियौतभायअछि।मुनीलालअपनपत्नीकमृत्युकपश्चातपचपनवर्षकअवस्थामेदोसरविवाहकरयचाहैतअछि।पक्षधरकाकाकेँईबातअनसोहॉंतलगैतछन्हि।अनसोहाँतएहिदुआरेलगलन्हिजेमुनीलालकेँदूटाबेटाछैन, दुनूपढ़ि-लिखिपरिवारकसंगबाहररहैएआपैंतीसवर्षकजेठबेटीविधवाभऽअपनेऐठामरहैतछैक।जेकरासखा-सन्ताननहिछैक।ओना, बेटीकेँवैधव्यभेलापछातिमुनीलालअपनोआगामो-समाजककतेकोव्यक्तिसावित्रीकेँदोसरविवाहकरयलेलकहबोकेलखिनमुदाओएक्केहिठामसभकेँकहलकन्हि- “सृष्टि-कर्ताजेभोगउठालेलैन, तइभोगकपाछूआबनइपड़ब।दुनियाँबड़ीटाअछि।भीख-दुखमांगिगुजरकरबमुदादोसरपुरुखकमुँहनइदेखब।”
एहिनास्थितिमे, मुनीलालकजिद्दपक्षधरकाकाकेँअगिलहजकाँबुझिपड़ैतछन्हि।पक्षधरकाकामुनीलालकेँओकरविधवाबेटीसावित्रीकउदाहरणदैतएकपिताककर्तव्यपरविचारकरबाकलेलआग्रहकरैतछथि।
‘कुकुरपन’, कथामेकहलगेलअछिजेकोनहुँकाजलेलपहिनेस्वयंपात्रहोमएपड़ैतछैकतखनलोकओहिकाजकयोग्यहोइतछथि।कथाकमुख्यपात्रअपनाबुझनेसमाजकपंचबनबाकउपक्रमकरैतछथि।हुनकामनमेछन्हिजेहमसमाजमेप्रतिष्ठाबनाबी, लोकहमरापंचैतीमेपंचमानय, इज्जतकरए।मुदास्वयंअपनपत्नीकपक्षलैतएकटाझगड़ामेगारा-गारीकरएलगैतछथि।जखनकिझगड़ाककारणबुझलोनेरहैतछन्हि।पछातिएहिबातकअखिहासभेलापरबड़ीचालाकीसँअपनाऊपरपंचैतीबैसबाकनौबतकेँखत्मकरैतछथि..!
अन्तत: सोहनभाइकमुहसँईसुनएपड़ैतछन्हि- “भनेपनचैतीटरिगेल।मुदातोरासंगभैयारीकसम्बन्धअछितँएकहिदइछिअजेएहेन-एहेनकुकुरपनचालिछोड़ह।नहितँसमाजमेकहियोमुँहउठाकऽताकलनइहेतह।”
‘हेराएलजिनगी’, एकओहनलोकककथाथिकजेनियमितरूपेअपनकार्यकेँसम्पादनकरैतअपनजिनगीसँबहुतउम्मीदतँरखैतछथि, मुदातेहनभऽनहिपबैतछन्हि।हीराननसुभ्यस्तकिसानकपढ़ुआबेटाछथि।हीराननबी.एस-सी. धरिपढ़िपबैतछथिमुदाकोनहुँनोकरीनहिभऽपबैतछन्हि।देखिते-देखितेहुनकबेटा-बेटीसेहोबालिगभऽजाइतछन्हि।अपनपैतृक, साढ़ेतीनबीघाजमीनकबदौलतिहीराननअपनबेटीककन्यादानकरबआबेटाकेँएम.बी.ए. कराएबअसम्भवलगैतछन्हि।हीराननकेँअपनजिनगीहेराएलसनलगैतछन्हि।
‘आशापरपानिफेरगेल’, एहिकथामेललितनामकपढ़ल-लिखलकिसानचर्चभेलअछि।ललितकपरिचयकथाकारकशब्दमे- “बी.ए. पासकेलापछाइतललितभायकिसानीजीवनधारणकेलाह।ओना, आन-आनजकाँललितभाइकमनमेकहियोनोकरी-चाकरीनइएलैन, जइसँपढ़ैकक्रममेकहियोमनमेईनइजगलैनजेधुरफन्दाचालिपकैड़नीकरिजल्टपाबी।धुरफन्दाचालिभेल- नोकरीकहिसाबेपैरबी-पैगामसँपरीक्षाकरिजल्टकजोगारबैसाएब।ललितभाइकमनमेबच्चेसँएहेनविचारजमिकऽघरकएलेलकैनजेज्ञान-लेपढ़ैछी।ओना, सभज्ञाने-लेपढ़बोवालिखबोकरैछैथ।तँए, ललितभायनेकहियोट्यूशनकभीरगेलाआनेनोट-चन्द्रिकाकभाँजमेपड़ला।सभदिनमौलिककिताबकीनिपढ़लैन।”
ललितउच्चशिक्षाप्राप्तकएकिसानी-जीवनओकिसानी-कर्मसँप्रेमकरैतमनलगाकऽखेती-बाड़ीकरैतछथि।खेतीकरबकेँललितअपनधर्मबुझैतछथि।बेसीआमदनीप्राप्तकरबालेलएहिबेरिसूर्जमुखीकखेतीकरैतछथि।समुच्चाखेतमेसूर्यमुखीलहलहाउठैतअछि।मुदाचिड़ै-चुनमुनीकप्रकोपततेकबढ़िजाइतअछिजेफसिलबरबादभऽजाइतअछि।ललितचिन्तितभऽरहयलगैतछथि।हुनकाअपनाभाग्यपरकतेकोप्रश्नउठयलगैतछन्हि।
मिथिलाककिसानकेँभाग्यपरनिर्भररहबाकप्रमाणएहिरेखांकितभेलकरैतअछि।
उमेशमण्डल
शोधार्थी, बी.आर.ए.बी.यू. मुजफ्फरपुर