विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका · VIDEHA · ISSN 2229-547X

पुष्कर काण्डक विशेषता

डॉ. अर्पणा · 2020-10-01 · अंक 307

डॉ. अर्पणा
पुष्कर काण्डक विशेषता
कविवर लालदासक प्रशस्तिमे आचार्य सुरेन्द्र झा ‘सुमन’कवि-नवतिकामे कहने छलाह-
“रमा रहित रामक अयन
नहि अशक्ति पुरुषत्व।
लालदास रचि ‘रमेश्वरचरित’,
बुझऔल तत्त्व।। ”
आ दामोदर लाल ‘विशारद’लिखैत छथि-
“लाल मधुप लखि लाल भव, किंशुक पर जनु मूल।
वैदेही पद कमल मधु, सेव सकल सुख मूल।।”[1]
रामायण रचनाक परम्परामे केओ एहन नहि होएत जे लालदासक नाम नहि जनैत हो वा रामायणक पद नहि सुनने हो।
देवी कामाख्याक प्रेरणासँ महाशक्ति जाग्रत भूमिमे एकर लेखन ग्रन्थरत्नकेँ विशिष्ट अर्थवत्ता दैत अछि। फलत: रामेश्वर चरित मिथिला रामायणक रचनाक उद्देश्य अछि सीता-चरित्रक सर्वोत्तर्ष महालक्ष्मी, महासरस्वती आ महाकालीक समवेत रूपमे आदिशक्ति ध्वजोत्तोलन। महाकाली आ रणचण्डी दुर्गाक सीताक चरितक प्रतिष्ठापन ओज आ गर्वक प्रतीक नारी शक्तिक आह्वान। शक्ति-शक्तिमानक समरसेतुमे जीवनक चरितार्थ निहित अछि। बिनु शक्तिक योग ब्रह्मा, विष्णु महेश शव छथि, बुढ़ियाक फुसि थिकाह। एकर प्रतिपादन-सम्पादन रामायणक अन्तिम काण्ड पुष्पकरकाण्डसँ भए जाइत अछि।
लालदासक सर्वश्रेष्ठ अवदान थिक जे नारीक अस्मिता-मनस्विता उद्वोधक अछि।[2]
वीरांगनाक रूपमे सीताक अवतरण पुष्करकाण्डक भेँट थिक। सीताक चरित्रक सर्वातिशयता पुष्करकाण्डक अग्रणी भूमिका अछि। रामक रामत्व सीताक बिना शून्य अछि। सीता-परित्यागक मार्मिक अंशकेँ छोड़ब लालदासक बुद्धिमता थिक।
रमेश्वर चरित मिथिला रामायण रामक लोक नायत्वमे सीताक असीम सामर्थ्य आकलित करैत अछि। वैष्वमतपर शाक्त मतक उत्कर्ष प्रदर्शित करैत अछि। एतय सभ किछु शक्तिक दृष्टिए देखल गेल अछि। सीता साक्षात योगमाया थिकीह जनिक भू-भागपर सृष्टिक जय ओ क्षय नचैत अछि।[3]
मूल प्रकृति लक्ष्मी जनिक, सीता रूप प्रधान।
तनिक नाम जपि पाबि नर, दुहु लोकक कल्याण।।
पुष्करकाण्डमे देखाओल गेल अछि जे रामक पराक्रम ओ विजयक सभटा श्रेय सीताकेँ छलनि, राम तँ निमित्त मात्र छलाह। जहीिना महाभारतमे देखाओल गेल अछि जे अर्जुनक विजयक श्रेय कृष्णकेँ छलनि, कृष्ण विहीन होइते अर्जुनक सभटा शौर्य निष्प्रभ भए जाइत अछि। तहिना लालदास देखओलनि अछि जे सीताक सहाय्यसँ विहीन रहने सहस्त्रमुख रावणक सम्मुख प्रभावहीन भए गेल छलाह। हुनक समस्त सैन्य ओकर वयव्यस्त्रसँ उधिया गेल छल। मुदा सीताक हेतु ओकर बध करब कठिन नहि छल। पुष्करकाण्डक आरम्भमे रामक सिंहासनारोहणक पश्चात् एक दिन जखन ऋषि महर्षि लोकनि रामक अभिनन्दन करबाक क्रममे रामवण वधक प्रशंसा करैत छथि तँ सीताकेँ हँसी लागि जाइत छनि। ई देखि राम जखन जिज्ञासा करैत छथि तँ हुनका सीतासँ ज्ञात होइत छनि जे श्वेत द्वीपपर एखनहुँ सहस्त्रमुख रावण वर्त्तमान अछि। सीताक मुखसँ ई सन्दर्भ सुनि रामकेँ बड़ क्षोभ होइत छनि। तत्क्षण चारू भाई मिलि श्वेत द्वीप दिस प्रस्थान करैत छथि। मार्गमे वायुक तेहन प्रचण्ड प्रवाह बसि रहल छल जे ओकर झोंकमे चारू भाई उधियाइत-उधिआइत पुन: अवध फेका जाइत छथि। तदुपरान्त सीता हुनका लोकनिक संग पुष्पक विमानपर चढ़ि सैन्य सहित प्रस्थान करैत छथि। सीताक प्रभावसँ सभ केओ श्वेत द्वीप पहुँचैत छथि। युद्धमे राम सहित सभ सैन्य संज्ञाहीन भए जाइत छथि। वशिष्ठ मुनिक कहलाक पश्चात् सीताकेँ बड़ रोष होइत छनि तथा ओ अपन सामान्य स्वरूप त्यागि कालीक रूप धारण कए शत्रुक संहार करय लगैत छथि। थोड़बे कालमे सहस्त्रमुख रामवणकेँ वध कऽ दैत छथि मुदा हुनक उग्ररूप रामकथामे ‘सहस्त्र स्कन्ध रावणक वध-कथा उपलब्ध अछि।
लालदास वैष्णव मतक प्रतिपादनक संगहि शाक्त सम्प्रदायक भावनाक अनुकूल वस्तु-विन्यास कयलनि अछि। भारतीय संस्कृतिक अनुरूप आदर्श पारिवारिक जीवन तथा भक्तिपक्षक अनुरूप आत्मनिवेदन ओ समर्पझा भावक रामयण वस्तु-विधान दृष्टिगोचर होइछ।■
सम्पर्क-
बालूघाट, बॉंध रोड, मुजफ्फरपुर
[1]आचार्य सुरेन्द्र झा ‘सुमन’ कविनवतिका, मैथिली मन्दिर, राजकुमारगंज, दरभंगा, 1984
[2]कर्णामृत (जुलाई-सितम्बर, स्मृति विशेषांक) 2000, कोलकाता
[3]सम्पादक विजयनाथ ठाकुर ‘जयन्ती’, पृ.- 131, चेतना समिति, पटना, नवम्बर- 2004
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Suggested citation: डॉ. अर्पणा. “पुष्कर काण्डक विशेषता.” Videha — First Maithili Fortnightly eJournal, issue 307, 2020-10-01. https://www.videha.co.in/research/2020/307/पुष्कर-काण्डक-विशेषता.htm

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