मिथिलाक भाषा एवं साहित्य
मिथिलाक प्रत्येक क्षेत्रक मैथिलीमे स्वरक दृष्टिऍं रंच मात्रक अन्तर स्पष्ट देखबामे अबैत अछि। जखन अन्तर्राष्ट्रीय भाषामे एकरूपता नहि, राष्ट्रीय स्तरक भाषामे भिन्नता तँ अन्य भाषामे रंचमात्रक भिन्नताकेँ भिन्नता नहियेँ कहल जा सकैत अछि। शब्दक उच्चारण ओ क्रियाक अनतमे जोर दऽ देलासँ जे स्वरक उहापोह परिलक्षित होइत अछि तकरा अन्तर नहियेँ कहल जा सकैत अछि। ओहुना कहावत अछि जे-
“तीन कोसपर पानि बदलय
पॉंच कोसपर भाषा
दिल्ली हो बा ल्हासा।”
स्वाभाविक बात थिक जे तीन कोसपर पानिक स्वादमे किछु अन्तर होइछ तेँ किन्तु अछि तँ ओ आखिर पानियेँ। तहिना शब्दक उच्चारण-प्रयोग जे अगल-बगलसँ कनेक-मनेक प्रवाहित रहैत अछि ताहि आधारपर आएल अन्तरपर विचार करैत डॉ. ग्रियर्सन श्री गोविन्द झा, डॉ. सुभद्र झा, डॉ. दिनेश कुमार झा आदि ठाम-ठामपर अपन अन्तर-विचारक चर्च कएने छथि। श्री गोविन्द झाजी पूर्णियॉं, भागलपुर ओ पूर्वी संथाल परगन्नाक बोलीकेँ पूर्वी मैथिली, मुंगेरक बोलीकेँ दक्षिणी मैथिली, मुजफ्फरपुर आ पूर्वी चम्पारणक बोलीकेँ पश्चिमी मैथिली, नेपालक तराईक समस्त मैथिली क्षेत्रक बोलीकेँ उत्तरी मैथिली तँ मध्य मिथिलाक ओ सभ क्षेत्र जाहिठाम मैथिलीक अलावा ककरो विशेष प्रभाव नहियेँ जकॉं छैक तकरा केन्द्रीय मैथिली कहि कऽ चर्चा कएलन्हि अछि।
तहिना डॉ. दिनेश कुमार झा अपन प्रसिद्ध ग्रन्थ “मैथिली साहित्यक आलोचनात्क इतिहास”मध्य सेहो बोली ओ स्वरक उहापोहकेँ आधार बनबैत ओहि मैथिलीकेँ जे मिथिलाक हृदयस्थलीकेँ स्पर्श करैत अछि अर्थात् मिथिलाक केन्द्रमे बाजल जाइत अछि तकरो केन्द्रीय मैथिली कहलन्हि अछि, ओ केन्द्र थिक उत्तरी दरभंगा ओ मधुबनीक क्षेत्र। केन्द्रीय स्थान होएबाक कारणेँ एहि केन्द्रीय मैथिलीकेँ ओ आदर्श मैथिली सेहो कहि कऽ सम्बोधन कएलन्हि अछि। दक्षिणी दरभंगा, दरभंगा शहरी क्षेत्रक पूर्वी मुजफ्फरपुर, पश्चिमी पूर्णियॉं धरिक क्षेत्रमे बाजल जाइबला मैथिलीकेँ दक्षिणी मैथिली कहने छथि तहिना पूर्णियॉंक पूर्वी क्षेत्र एवं सम्पूर्ण बंगालक दिनाजपुर ओ कि मालदह क्षेत्रमे प्रचलित मैथिलीकेँ पूर्वी मैथिली कहि सम्बोधन कएलन्हि अछि।
उत्तरी संथाल परगन्ना, दक्षिणी मुंगेर ओ भागलपुर दक्षिणी भागक मैथिलीकेँ छिका-छिकी मैथिली नाम देलन्हि अछि। ताही प्रकारेँ पूर्वी चम्पारण ओ पश्चिमी मुजफ्फरपुरक प्रचलित मैथिलीकेँ पश्चिमी मैथिलीक नामे चर्चा एकलन्हि अछि। उत्तरी दरभंगा तथा मधुबनी क्षेत्रमे बसल मुसलमान सम्प्रदायक बीच बाजल जाइबला मैथिलीकेँ जे रंच-मात्र परिवर्तन परिलक्षित करैत अछि। तकरा जोलही मैथिली तथा जातिगत हिसाबेँ अन्तर भेल भाषाक आधारपर पूर्वी सोतिपुराक क्षेत्रक बोलीकेँ केन्द्रीय जनसाधारणक मैथिली कहि- एकर क्षेत्र मधुबनी सबडिविजन मानलन्हि अछि।
स्पष्ट अछि जे बोलीक उच्चरणक आधारपर मैथिलीक रूप निर्धारित कएल गेल अछि। सूक्ष्मतासँ विचारोपरान्त डॉ्. दिनेश कुमार झाक मैथिली साहित्यक आलोचनात्मक इतिहासमे चर्चित रूप ग्रियर्सनक द्वारा देल गेल विचारसँ बहुत दूर धरि मेल खाइत अछि। ग्रियर्सन मैथिली भाषाक विभाषाक रूपमे तँ कतहु चर्च नहि कएलन्हि अछि किन्तु बोलीमे स्वरक उहा-पोहक आधारपर आदर्श मैथिली, दक्षिणी मैथिली, पूर्वी मैथिली, छिका-छिकी मैथिली, पश्चिमी मैथिली आ केन्द्रीय जनभाषाक मैथिली कहि कऽ चर्च अवश्यक कएलन्हि अछि।
स्वरक उच्चारणमे कनेक-मनेक क्षेत्रियताक दृष्टिए अन्तर स्पष्ट अवश्य अछि तेकर ई अर्थ नहि जे मैथिली भाषा ओ साहित्यमे कतहु अन्तर अछि। नेपालक सप्तरी, बारा, जनकपुर, सरलाही, विराटनगर, सुनसरी, धरानअथवा धनकुट्टा क्षेत्रक मैथिली, एहि क्षेत्र सभक प्रयुक्त होइत मैथिलीसँ भिन्न नहि। हँ, एतबा अवश्य जते राजनीतिज्ञ भलेँ ही ओकरा अन्य देशमे बॉंटि कऽ धऽ देने हो। मैथिली दुनू क्षेत्रकेँ अपन एकरंगक स्नेह दए एके संग एक दोसराक हृदयकेँ महने अछि।
हँ, एखन किछु राजनीतिज्ञ अपन पेट ओ राजनीति चलएबाक हेतु संगहि राजनीतिक रोटी सेकबाक निमित्त एकर अपनहि अंगकेँ अंगिका आ बज्जिका नाम दए एकर अंकेँ विकलांग बनएबाक कुत्सित प्रयासमे अवश्य लागल छथि। यद्यपि हमरा जनैत ओ सुफल होमयबला नहि छथि, ओ भाषणे आ पोस्टर धरि समटा कऽ रहि जएताह। तथापि, ओ सभ अस्थिरताक जहर फैलएबासँ बाज नहि आबि रहल छथि तथा मैथिलीक खुट्टा एखन धरि डोलल नहि अछि तथापि एकर सुरक्षा हेतु एकरो राजनैतिक संरक्षणक नितान्त आवश्यकता अछि जाहिसँ मैथिली अपन कतेको हजार वर्षक अपन किलाकेँ डोलय नहि देअए।
सन्दर्भ सूची :-
1. मैथिली साहित्यक आलोचनात्मक इतिहास- डॉ. दिनेश कुमार झा
2. मिथिला- डॉ. लक्ष्मण झा
3. मिथिला भाषामय इतिहास- मुकुन्द झा वक्शी