विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका · VIDEHA · ISSN 2229-547X

मिथिलाक इतिहास भाग-२

गजेन्द्र ठाकुर · 2020-11-01 · अंक 309

२.१०.डॉ आभा झा-बौक
२.११.कीर्तिनाथ झा-लघुकथा-नपुंसक
२.१२.दीपा झा- धिया- पूता आ डिजिटल कैदखाना
२.१३.उमेश मण्डल-लोक-नाट्य-वाद्य मण्डली- संकलन
२.१४.प्रियंवदा तारा झा- वापसी
२.१५.आशीष अनचिन्हार -सपना आ भ्रम
२.१६.आनन्द कुमार झा-मैथिलीक वर्तमान रंगमंच , धर्मिता आ स्वतन्त्रता
२.१७. मुन्नाजी- बीहनि कथा-- मानकीकरण ओ तुलनात्मक पक्ष
२.१८.नारी शब्दक विवेचना- डॉ. अपर्णा
२.१९.लालदासक ‘कौशल्या’-डॉ. अपर्णा
२.२०.रमेश्वर चरित मिथिला रामायणमे पुष्कर काण्डक विशेषता-डॉ. अपर्णा
२.२१.लालदासक रामायणमे विधि-व्यवहारक वर्णन- डॉ अपर्णा
योगेन्द्र पाठक वियोगी
नरक विजय
(एहि नाटकक एक संस्करण हमर पोथी ‘त्रिनाटकम्’ मे छपि गेल अछि। ओहि मे दृश्यक संख्या बहुत बेसी रहला सँ किछु निर्देशक लोकनि एकर मंचन पर प्रश्न चिन्ह लगौलनि। ओहि आलोचना कें ध्यान मे रखैत एकरा परिवर्धित कएल गेल। एकर बंगला अनुवाद श्री नवीन चौधरी केलनि अछि।- नाटककार)
पात्र परिचय
मानव पात्र — रमेश, सुरेश, अनुपम अमित (वैज्ञानिक)
पौराणिक पात्र — ब्रह्मा, विष्णु, महेश, नारद, यमराज, चित्रगुप्त, दू यमदूत
अंक 1
दृश्य 2
मंच सज्जा पछिले दृश्य सन, खाली शास्त्र-पुराणक पोथीक बदला मोटका विज्ञान पोथी, जर्नल आदि राखल। कुर्सी चारिटा। डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड पर लीखल छैक “'AI Laboratory (highly confidential)'। ई वैज्ञानिक अनुपमक प्रयोगशाला थिक। प्रकाश वैज्ञानिक पर फोकस होइत अछि। अपना प्रयोगशाला मे बैसल ओ लैपटॉप पर कोनो लेख देखि रहल छथि आ लेगो ब्लॉक सँ खेला रहल छथि। सामनेक टेबुल पर एकटा छोट आकारक डिजिटल घड़ी, किछु सीडी/डीभीडी, किछु कोटक बटन, लेजर टॉर्च, आर किछु यंत्रादि पसरल छैक। इलेक्ट्रोनिक्स बला टेबुल कने परिवर्तित आ सजाओल। एहि टेबुल पर छद्म वेश मे रमेश आ सुरेश खेलौना बला छोटका ड्रोन सँ किछु काज कऽ रहल छथि।
मंचक उपर पर्दा सँ एकटा एलईडी बल्ब लटकि रहल छैक जाहि सँ किछु अन्तराल पर लाल रंगक प्रकाश मंच कें आलोकित करैत छैक। वैज्ञानिक लैपटॉप देखि चौंकैत छथि।
वैज्ञानिक ई की ? (फेर लैपटॉप कें देखऽ लगैत छथि)
रमेश की भेल सर ?
वैज्ञानिक एखनहि बूझि जेबैक, काज करैत रहू।
जींस-कुर्ता पहिरने एकटा अपरिचित व्यक्तिक प्रवेश। हाथ मे गिटार सन बाजाक गिगबैग लटकल। एकदम वैज्ञानिकक सामने ठाढ़ भऽ जाइत छथि। प्रकाश पहिने आगन्तुक पर पड़ैत अछि तखन पूरा मंच आलोकित होइत अछि। वैज्ञानिक तरे तर मुसकिआइत छथि मुदा अकचकेबाक अभिनय करैत छथि।
वैज्ञानिक अहाँ के छी, एतए भीतर कोना घुसि गेलहुँ ? सुरक्षा अधिकारी अहाँ कें रोकलनि नहि ?
आगन्तुक (ठाढ़ भेल, कने दूर हटि कए स्वतः) हम तीनू लोक मे स्वच्छन्द विचरण करैत रहैत छी। हमरा के रोकत ? (प्रकट, वैज्ञानिक लग जा कए) हम एतए आकाश मार्ग सँ एलहुँ। मुदा अहाँ घबराउ नहि, अहाँक सुरक्षा कें हमरा सँ कोनो खतरा नहि अछि।
वैज्ञानिक (आश्चर्यचकित हेबाक अभिनय करैत, कुर्सी आगू बढ़बैत) अच्छा, बैसू। बाजू अहाँ की चाहैत छी ? चाह, काफी किछु मँगाबी ?
आगन्तुक (कुर्सी पर बैसैत) चाह, काफी छोड़ू, काज सूनल जाओ। ओना तऽ हम संगीत सँ सम्बन्ध रखैत छी मुदा एखन अहाँ लग वैज्ञानिक आविष्कार सबहक जानकारी लेबा लेल आएल छी।
वैज्ञानिक सब आविष्कारक वर्णन इंटरनेट पर उपलब्ध छैक। आब इंटरनेट अपना ब्रह्मांड मे सबतरि उपलब्ध छैक आ कोनो ग्रहक बासी कतहु बैसल एकरा पढ़ि सकैत अछि।
आगन्तुक हम अहाँक मुहें सूनए चाहैत छी।
वैज्ञानिक (रमेश, सुरेश दिस इंगित करैत) हमर ओ दूनू सहकर्मी एतए काज करथि तऽ कोनो असुविधा नहि ने ?
आगन्तुक कोनो असुविधा नहि। अपने सुनाउ।
वैज्ञानिक बेस, हम किछु पुरान आविष्कारक जानकारी दऽ सकैत छी। जाहि विषय पर शोध चलिए रहल छैक तकरा बारे मे हम किछु नहि कहब।
आगन्तुक कोनो बात नहि, जतेक अहाँ बता सकैत छी से बताउ। (कागत पर लिखब शुरू करैत छथि।)
वैज्ञानिक (किछु सोचि आ घड़ीक आकारक अपन स्मार्टफोन बहार करैत) एकरा देखियौ, आब ई बड़ पुरान आविष्कार भऽ गेलैक, एकर अनेक नव रूप सेहो आबि गेलैक अछि मुदा हम एखनहुँ कखनो कए एकर व्यवहार कऽ लैत छी। एकरा स्मार्टफोन कहल जाइत छैक।
आगन्तुक (किछु लिखैत) ई की काज करैत छैक ?
वैज्ञानिक एना कहियौ — ई की नहि करैत छैक। साधारण दूरभाष सँ लऽ कए सिनेमा देखब, चित्रक आदान प्रदान करब आ रोबोट कें कोनो काजक लेल आदेश देब तऽ पुरान बात भऽ गेलैक, आब हम एतए बैसले बैसल विश्वक कोनो भाग मे बरखा सेहो करबा सकैत छी, कोनो अन्य भाग मे रातिओ मे कृत्रिम सूर्य उगा सकैत छी, कोनो अन्य ग्रह पर आक्रमण करबा सकैत छी, आरो बहुत किछु।
आगन्तुक (चिन्तित होइत) कृत्रिम सूर्यक निर्माण भऽ गेल। आश्चर्य ! अहाँ कोनो अन्य ग्रह पर आक्रमण करबा सकैत छी, ई तऽ विशेष चिन्ताक बात। (लाल प्रकाश हुनका मुह पर पड़ैत अछि, ओ विचलित होइत छथि) ई प्रकाश किएक ?
वैज्ञानिक एतुका सब गतिविधिक जानकारी केन्द्र कें पठाओल जा रहल छैक। असुविधाक लेल क्षमा चाही। (रमेश आ सुरेश अपना मोबाइल पर कोनो ट्यून लगबैत छथि आ नेपथ्य मे जोर सँ वर्षा आ बिहाड़ि एबाक आवाज होइत छैक। आगन्तुक ध्यान सँ सुनैत छथि)
आगन्तुक ई की भऽ रहल छैक ?
वैज्ञानिक कृत्रिम वर्षा लेल एकटा नव प्रयोगक तैयारी मे किछु जाँच कएल जा रहल छैक। चिन्ताक कोनो बात नहि।
आगन्तुक कृत्रिम वर्षा ! आश्चर्य। (लेगो ब्लॉक दिस देखबैत) ई की छिऐक ?
वैज्ञानिक ब्रह्माण्डक अन्य ग्रह पर बनऽ बला महल आदिक नमूना। सौरमंडलक सब ग्रह पर एहन भवन सब बनि गेल छैक। वायुमंडलक संरचनाक हिसाबें भवनक डिजाइन तैयार कएल जाइत छैक।
आगन्तुक किछु बुझबा मे नहि आएल, आगू कहियौ।
वैज्ञानिक (हाथ मे एकटा प्लास्टिक जकाँ कोनो पारदर्शी चीज उठबैत) एकरा देखियौ, ई अद्भुत वस्तु थिक।
आगन्तुक (किछु नहि देखैत) अहाँ हमरा बड़ बुड़िबक बुझैत छी की ? खाली हाथ देखा कए कहैत छी एकरा देखियौ। एना ठकू नहि।
वैज्ञानिक इएह तऽ एकर विशेषता छैक, हमरा हाथ मे अछि मुदा अहाँ देखि नहि सकैत छिऐक। ई अदृश्य पदार्थ छिऐक। एकर गुण सब सुनबैक तऽ ततेक आश्चर्य लागत जे अहाँ फेर कहब ठकैत छी।
आगन्तुक बेस, कहियौ।
वैज्ञानिक संक्षेप मे बूझि लिअऽ जे धरती पर जे कोनो प्राकृतिक धातु (metal) पदार्थ अछि तकर नीक सँ नीक गुण एकरा गुणक तुलना मे करोड़ो गुणा न्यून लागत। आ सबसँ महत्वपूर्ण बात जे एकरा पर तापक कोनो असरि होइते नहि छैक, कतेको सूर्यक सम्मिलित ताप कें ई सहि सकैत अछि। एकर वस्त्र जे कोनो वस्तु कें ओढ़ा देबैक ओ अदृश्य भऽ जाएत। ओकरा आगिक कोनो डरे नहि रहतै।
आगन्तुक (बेस आश्चर्यचकित होइत) सत्ते कहैत छी ?
वैज्ञानिक हम तऽ पहिनहि कहलहुँ जे अहाँ कें लागत हम झूठ बजैत छी। हमर काज छल सुना देब, विश्वास करी बा नहि से तऽ अहाँ जानी।
आगन्तुक (बेस चिन्तित होइत) ठीक छैक, किछु आर सुनाउ।
वैज्ञानिक एकर दोसर गुण छैक जे विशेष तरीका सँ एहि मे बिजलीक धारा बहाओल गेला सँ ई पारदर्शी नहि रहि जाइत छैक, एकरा सँ लेजर प्रकाश बहराइत छैक।
आगन्तुक (लिखबाक उपक्रम करैत) ई लेजर प्रकाश की होइत छैक ?
वैज्ञानिक कृत्रिम सूर्ये जकाँ पूर्णतः मानव निर्मित अजूबा। (एकटा लेजर टॉर्च उठा कए वैज्ञानिक ओकर प्रकाश चारू कात देखबऽ लगैत छथि, प्रकाश अनेक पुंज मे बँटैत छैक, एक दू बेर आगन्तुकक आँखि पर सेहो पड़ैत छनि, ओ हाथ सँ आँखि झँपैत छथि आ विस्मित होइत छथि)
आगन्तुक एहि सँ तऽ आँखि आन्हर भऽ जेतैक।
वैज्ञानिक ओ क्षणिक प्रभाव छैक, चिन्ताक बात नहि।
आगन्तुक बेस, मानि लैत छी। एकर आर की की गुण छैक ?
वैज्ञानिक सबटा विस्तार सँ कहऽ लागब तऽ एक दिन मे खतमो नहि होएत। संक्षेप मे बूझि लिअऽ जे लेजर प्रकाश धरती पर प्रायः सब क्षेत्र मे उपयोग भऽ रहलैक अछि आ सब लोक एकर गुण सँ परिचित अछि। एही प्रकाश द्वारा हम एतए बैसले बैसल कोनो ग्रह पर शत्रु कें नष्ट कऽ सकैत छी।
आगन्तुक एकर एकटा नमूना हमरा भेटि सकत की ?
वैज्ञानिक (एकटा पुरान छोट लेजर पेन हुनका दैत) ई राखि लेल जाओ।
(सुरेश खेलौना बला ड्रोन कें उड़बैत छथि। नेपथ्य मे हवाइ जहाज उड़बाक आवाज होइत। आगन्तुक एहि खेला कें आश्चर्यचकित भावें देखैत छथि आ आबाज कें अकानैत छथि। ड्रोन मंच पर एम्हर ओम्हर उड़ैत रहैत छैक आ फेर एक क्षणक लेल आगन्तुक के माथ पर बैसि जाइत छैक। ओ अकचकाएल भावें छड़पि कए कुर्सी सँ उठि जाइत छथि। तखने ड्रोन हुनका माथ सँ उड़ि जाइत छैक। ओ असौकर्यक भाव देखबैत माथ हँसोथैत छथि। तकर बाद ओ ड्रोन वैज्ञानिक के सामने रुकि जाइत छैक।)
रमेश हमरा सबहिक प्रयोग सफल रहल सर। ई यान आब तैयार अछि। आब हमरा सबकें अनुमति भेटए।
वैज्ञानिक बहुत नीक। आब अहाँ दूनू गोटे अपन अभियान पर जा सकैत छी। हमर शुभकामना। (वैज्ञानिकक पैर छुबैत रमेश आ सुरेशक प्रस्थान)
आगन्तुक ई कोन चिड़ै छियैक जे एतेक जोर के आवाज करैत उड़ैत छैक ?
वैज्ञानिक चिड़ै नहि ई अन्तरिक्ष यान छिऐक जे अपना ब्रह्मांड मे कतहु जा सकैत अछि। एकर ओजन मात्र सौ ग्राम छैक मुदा ई एक हजार किलोग्रामक ओजन उठा कए उड़ि सकैत अछि।
आगन्तुक ई तऽ पुष्पक विमानक कान कटलक यौ।
वैज्ञानिक आब ककर कान कटलक आ ककर नाक कटलक तकर अन्दाज हमरा तऽ नहि अछि। अहाँ कोन काल्पनिक पुष्पक विमानक चर्चा करैत छी से तऽ अहीं जानी मुदा हमर टीम एकटा एहन यान पर शोध कऽ रहल अछि जे अन्य ब्रह्मांडक यात्रा सेहो कऽ सकत। एकर बारे मे हम एखन किछु नहि कहि सकब।
आगन्तुक मुदा अन्य ब्रह्मांड पर जेबा लेल अहाँ सब कें देवता सबहक संग युद्ध करऽ पड़त।
वैज्ञानिक (कने खिसिएबाक मुद्रा मे) ई तऽ अनर्गल बात भेल, देवता लोकनि अपने सबतरि बौआइत रहथि से नीक आ मानव अपन आविष्कारक बल पर कतहु जाए तऽ हुनका सँ युद्ध करऽ पड़त। ओना कोनो युद्ध लेल हम सब रोबोट सेना आ विभिन्न प्रकारक परमाणु बम तैयार कइए लेने छी।
आगन्तुक रोबोट सेना की भेलैक ?
वैज्ञानिक रोबोट माने भेल यंत्र मानव जे पूर्णतया मानव निर्मित अछि। छिऐक तऽ ई एक प्रकारक यंत्र मुदा प्रजनन छोड़ि बाँकी सब काज मनुक्खे जकाँ करैत अछि। सीमित मात्रा मे प्रजनन सेहो कऽ सकैत अछि, माने दोसर रोबोट कें बना सकैत अछि यदि अनुमति दऽ दियैक।
आगन्तुक (आश्चर्य सँ आँखि पसारैत) अद्भुत, एहि रोबोट सेनाक संहारक कोनो विधि ?
वैज्ञानिक ओ हम नहि कहि सकैत छी। एतेक बूझि लिअऽ जे अस्त्र शस्त्रक कोनो असरि नहि होइत छैक एकरा पर।
आगन्तुक आ परमाणु बम की भेलैक ?
वैज्ञानिक कने घुसकि आउ। (लैपटॉप पर एकटा छोट भिडियो हुनका देखेबाक उपक्रम) अपने जे देखलियैक ताहि सँ दस लाखक जनसंख्या बला शहर नष्ट भऽ गेल छलैक। एखन एहन शक्तिशाली बम सब छैक जे एकेटा सँ आर्यावर्त सदृश देश स्वाहा भऽ जाएत।
आगन्तुक (बहुत बेसी चिन्तित होइत) एतेक शक्तिशाली ! एहन अस्त्र तऽ महाभारत युद्ध मे सेहो नहि छलैक। बेस, आगू कहियौ।
वैज्ञानिक एकरा देखियौक (हाथ मे एकटा बटन सदृश वस्तु लैत) ई भेल हमर प्रतिरूप। हमर मस्तिष्कक सब ज्ञान एहि मे भरल छैक। एकरा साइबोर्ग (cyborg) अवस्था कहल जाइत छैक। हम आब एहि अवस्था मे अमर भऽ गेल छी। एकर एक प्रति राष्ट्रीय संग्रहालय मे सेहो राखल छैक। आब हमरा मृत्युक कोनो डर नहि अछि।
आगन्तुक (लिखब बन्द करैत आ कागत कें पॉकेट मे रखैत) बर बेस, एहि सँ बेसी हमरा दिमाग मे एखन नहि अँटत। की हमरा अपन अंतरिक्ष यानक एकटा नमूना दऽ सकैत छी ?
वैज्ञानिक (अस्वीकारक मुद्रा बनबैत) माफ करब मुदा एहि लेल उच्च स्तरीय अनुमतिक आवश्यकता छैक। संगहि अपनेक पूर्ण परिचय सेहो जरूरी होएत।
आगन्तुक (परिचयक नाम पर कने घबराइत) कोनो बात नहि। रहए दियौक। एतेक जानकारीक लेल बहुत धन्यवाद। चलैत छी। (प्रस्थान)
वैज्ञानिक (दर्शक कें सम्बोधित करैत) अहाँ सब चिन्हलिएनि ई के छलाह ? नहि ने ? अरे ओएह नारद बाबा, वेष बदलि कए आएल छलाह देवता सबहक दिस सँ धरती पर जासूसी करए लेल। हमरा खुफिया रिपोर्ट भेटि गेल छल तें विज्ञानक प्रगतिक बारे मे चुनि चुनि कए बात कहलिएनि। हमर बात सूनि कए केहन चिन्तित भऽ रहल छलाह से तऽ अपने सब देखिये लेलियैक। हमरा तऽ लागल जे बेसी खिस्सा कहबनि तऽ कतहु हॉर्ट अटैक ने भऽ जाइन। मुदा भागि गेलाह। देखियौ आगू की करैत छथि।
वैज्ञानिक द्वारा लैपटॉप बन्द करबाक उपक्रम, प्रकाश शनैः शनैः बंद होइत अछि, नेपथ्य मे धड़-पकड़ के हल्ला, किछु लोक एम्हर ओम्हर दौड़ैत देखाइत अछि। दू बेर पिस्तौल चलबाक शब्द सूनऽ मे अबैत अछि। तखने घोषणा –
घबराउ नहि, एहि गोली सँ दूनू बाहुबली रमेश आ सुरेशक अन्त भेल। पुलिस द्वारा घेरल जेबाक बाद पकड़ेबाक डर सँ दूनू बाहुबली रमेश आ सुरेश अपने गोली सँ आत्महत्या कऽ लेलक। करीब बीस बरखक बाद राज्य मे शान्ति बहाल होएत। चलू महावीर मंदिर मे लड्डू चढ़बै लेल। सब जा रहल अछि।
(अगिला अंकमे जारी)
अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ।
रबीन्द्र नारायण मिश्र- धारावाहिक उपन्यास-लजकोटर
लजकोटर
(प्रवासीक जीवनपर आधारित)
(९म खेप)
-9-
माएक संगे हम अपन डेरा पहुँचलहुँ ।एकहि आङनमे एकपाँतिसँ दसटा कोठरी छल जाहिमे किरायेदारसभ रहैत छल । एकहिटा शौचालय-स्नानगृह छल जाहिमे बेराबेरी सभक काज चलैत छल । कोठलीसभक आगामे कनीटा खाली जगह रहैक जतए भानस बनैत छल । आङनमे लोकक मिस पड़ैत रहैथ छल। रच्छ ई छल जे लगीचेमे एकटा पार्क छल । जकरा ककरो मोन उबिआइत तँ ओहि पार्कमे चल जाइत छल । माएकेँ आबिगेलासँ हमरा मोन हल्लुक लगैतछल मुदा ओकरा सदरिकाल गुम्मे देखिऐक । कखनो किछु नहि कहैत मुदा मोनमे प्रशन्नता नहि रहैत छलैक ।
एहिबेर दिल्ली अएलाक बाद कारखानाबला काज छुटि गेल। बहुतरास कर्मचारीसभकेँ हटा देने रहैक। हम अपनाभरि बहुत प्रयास केलहुँ जे थोड़बो दिन काज करए दिअए मुदा मालिक नहि मानलक । तखन किछु तँ करबेक छल । हनुमानमंदिरक आगा पटरीपर चाह-पानक दोकान खोलि लेलहुँ । भोरसँ रातिधरि दोकानपर रहए पड़ैत छल । क्रमश:दोकानमे बिक्री बढ़ए लगलैक। मुदा स्थानीय गुंडा सभ हफ्ता लैत छल । जतेक कमाइ होइक तकेर आधासँ बेसीओकरेसभमे चल जाइत छल ।
पुलिसिआ आतंकसँ बचबाक हेतु हम विजयकेँ कै बेर फोन करिऐक मुदा ओ फोन काटि दिअए,कहिओ गप्पे नहि करए। बुझेबे नहि करए जे बात की छैक? पटरीपर दोकान करब एतेक मोसकिल काज थिक से हमरा नहि बूझल छल ।दोसर कोनो व्योंत नहि छल,तेँ सभ किछु बरदास करैत रहलहुँ । घरमे माएक हालत चिंताजनक भेल जाइत छल । ओकरा रहि-रहि कए गाम मोन पड़ैक,गामक मंदिर,व्रह्मस्थान,तिथि-त्योहार सभबातक चर्चा करैत रहैत । कोना-कोना के-के झगड़ा केलक,कोना सोलहभेलैक, कोना के जहल चल गेल से सभ सुनबैत रहैत । असलमे दिन-राति ओकर माथमे गामे घुमैत रहैत छलैक,ओ करितै की?
क्रमशः ओकर हालत खराबे होइत गेलैक । एकदिन तँ बैसले-बैसल माथा घुमि गेलैक आ धराम दए खसलि । हम दोकानपर रही । अगल-बगलक लोक फोन केलक । दोड़ल डेरा पहुँचलहुँ ।दहिना जाँघक हड्डी टुटि गेल रहैक । उठा-पुठा कए अस्पताल लए गेलहुँ । भरिदिन अस्पतालक चक्कर लगबैत रहलहुँ।डाक्टरसभ किओ किछु किओ किछु राय दैत रहल । शल्य चिकित्सा करेबाक हेतु ने ओ अपने तैयेार छल ने हमर मोन मानए मुदा डाक्टरक कहब जे शल्य चिकित्सा जरुरी छनि । हारि कए हम अपन सहमति दए देलिऐक ।शल्य चिकित्सामे की भेलैक की नहि ,ओकर हालत गड़बड़ाइते गेल आ दूदिनक बाद ओ अस्पतालेमे दम तोड़ि देलक।
माएक एहि तरहेँ गुजरि गेलासँ हमरा तँ लकबा मारि गेल। बहुत अफशोच भेल जे बेकारे एकरा अपना संगे अनलिऐक । गाममे कष्टे सही ,जीबि तँ रहल छल ।मुदा आब की? जीवनभरिक हेतु एकटा अपराधबोध हमरा मोनमे होइत रहत जे हमरे दुराग्रहक कारण ओकर ई हाल भेल । भावी प्रवाल होइत छैक । आब तँ सभसँ पहिने ओकर अंतिम संस्कारकओरिआन करबाक छल । से सभ जोगार भए गेलैक । यमुनाकातमे माएक अंतिम संस्कारसंपन्न भेल।
संस्कारक बाद श्राद्धक समस्या छल । दिल्लीमे कोनो व्यवस्था नहि छल । ओना गामोक हालत तँ सएह छल मुदा माए सभ दिन गामेमे रहलथि । तेँ सभक इएह विचार जे हुनकर श्राद्ध गामेमे हेबाक चाही । ट्रेनमे टिकटक ओरिआन करबामे विजय बहुत मदति केलाह । अस्तु, उतरी पहिरने गरीबरथसँ गाम बिदा भेलहुँ ।
गाम पहुँचलाक बाद सभसँ पहिने हमरकाका भेंटलाह। एतेक अपनत्वक कहिओ उमीद नहि छल । हमरा अएबासँ पहिनहि ओसारापर हमर रहबाक व्यवस्था कए देने रहथि । चारिम दिन छल । महापात्र अएलाह आ सभटा कृयाकर्म नियमपूर्वक प्रारंभ भेल ।साँझमे काका कहलाह –
" कोनो चिंता नहि करिअह । सभटा भए जेतैक । कलमबला खेत तोरेसभक छह । ओहीसँ काज चलि जेतैक । लिखापढ़ी बादोमे भए जेतैक । घरक बात छैक ।कनीमनी घटतैक तँ बादोमे दए देबह ,भौजीक काज नीकसँ भए जानि । फेर देखल जेतैक ।"
हम हुनकर बात सुनति रहि गेलहुँ । की जबाब दितिअनि? गामक लोकसभमे सबजाना भोजक प्रचार भए गेल । ओना आबलोककेँ भोजकप्रति पुरना जमाना जकाँ उत्साह नहि रहलैक।गाममे लोको नहि अछि । बेसी लोक बाहरे रहैत अछि।काका हमरा एकटा सादा कागजपर औंठा निसान लेलथि आ श्राद्धक चिंतासँ मुक्त कए देलाह।श्राद्ध नीकसँ संपन्न भए गेल । गामभरि एकादशा,द्वादशा दुनू दिनसबजाना भोज भेल। थैहि,थैहि भए गेल । तेरहम दिन माछ-भात भेल । तकरबाद भगवानक पूजा भेल । ओहीदिन काकाजी अपना ओहिठाम बजओलाह-" दिल्ली कहिआ जेबहक?"
"अखन तँ ओहिविषयमे किछु नहि सोचलिऐक अछि ।"
" कोनो बात नहि । पाँच-सात दिन बादे सही । असलमे तोहरबला घरारीमे मालजालक घर बनेबाक अछि । हमर ओलार बहुत फटकी छैक आ टुटिओ गेल छैक ।"
"की कहलिऐक?'
"एना अंठेलासँ काज चलतह?"
"आब ई घरारी हमर भेल । सभबात पहिने भए चुकल अछि ।"
" की गप्प करैत छी? हम तँ खेतक गप्प केने रही । "
“खेतक दामसँ बेसी खर्चा कतए जेतैक, तूँही कहह?"
हम बुझि गेलहुँ जे ओबैमानीपर अड़ल छथि । हिनकासंगे गलथोथरी करब व्यर्थ अछि।
गाममे आब किछु बाँचलनहि छल,करबाक हेतु किछु नहि छल । अस्तु, दिल्ली लौटि गेलहुँ ।संयोगसँ तत्कालमे टिकटक जोगार भए गेल । रस्तामे कोनो दिक्कति नहि भेल । ट्रेन बहुत खालिए रहैक । दोसरदिन भेने दिल्ली पहुँचलहुँ । अपन डेरापर गेलहुँ । ओहिठामसँ चोट्टे विजयसँ भेंट करए हुनकर डेरापर पहुँचलहुँ । ओ अपने तँ नहि रहथि मुदा मालती भेटि गेलि । हमरा देखितहि हँसए लागलि ।
"की बात छैक, माथपर केस कटल अछि?"
"माए मरि गेलैक ।"
"से केना की भेलैक?"
"एहीठाम आएल छलि ।दुखित पड़ि गेल ।एतबा कहैत कहैत हमरा कनाए लागल । आगा नहि बाजि सकलहुँ ।"
मालती जलखैक ओरिआनमे लागि गेलीह । ताबे हम ओतहि बैसले रही कि विजय सेहो आबि गेलाह।
"गामसँ कहिआ अएलहुँ?"
"काल्हिए अएलहुँ अछि ।"
"ओ काज किछु चलि रहल अछि कि नहि?
"कहाँ किछु कए रहल छी।
"ठीक छैक, अहाँ काल्हिभोरे थानामे भेंट करू ।"
विजयक गप्पसँ बहुत प्रशन्नता भेल । ताबे मालती जलखै लए कए आबि गेलीह ।जलखै,चाह-पान सभ भेलैक ।मुदा मालती अपना बारे मे किछु नहि बजलीह । हमहुँ किछु नहि पुछलिऐक । भेल जे कहीं विजय बिगड़ि गेलाह तँ होइतो काज बिगड़ि जाएत ।
ओहिठामसँ निकलि बसस्टैंडपर ठाढ़भेल बसक प्रतीक्षा करैत रही कि किशुन देखाएल। ओहो कतहु जा रहल छल । कनी-कनी झकाइत छल । हम ओकरा देखि आबाज देलिऐक-"किशुन!किशुन! मुदा ओनहि सुनलक आ दौड़कए बसमे चढ़ि गेल ।ओकरासँ भेंट होइत-होइत रहि गेल । कोनो बात नहि । एतबा संतोख भेल जे ओ जीबि रहल अछि आ ठीक-ठाक अछि।आब ओ मंदिरेपर रहैत अछि कि कतहु आनठाम चल गेल से पता नहि चलि सकल ।
कनीके कालमे बस अएलैक आ हमहुँ ओहिमे चढ़ि अपन डेरा दिस बिदा भेलहुँ। बसमे जबरदस्त धक्कम-धुक्का छलैक । कहुनाकए आगादिस ससरलहुँ । किछुकालमे एकटा सीट खाली भेलैक । हम ओतए बैसि गेलहुँ ।सटले दोसर सीटपर एकटा गोरनार, बेस चुहिलगर छौंड़ी बैसलि छलि । ओकर पैघ-पैघ आँखि,भरल-भरल देह बेस आकर्षक छल । मोबाइलफोनपर मैथिलिएमे ककरोसँ गप्प कए रहल छलि । ई जानि बहुत प्रशन्नता भेल जे इहो मैथिले छथि । बस चलैत रहलैक । यात्रीसभ चढ़ैत-उतरैत रहल ।हम ओकरादिस तकैत रहलहुँ । ओहो गाहे-बगाहे हमरा दिस घुरैत रहैत छलि। मुदा ततबे । हमरा किछु पुछबाक साहस नहि होअए आ ओ किछु बाजए नहि । मुदा ओ छलि बेस रमनगर । बस हमर डेरासँ एकस्टाप पहिनेधरि पहुँचि गेल छल ।भेल जे जँ आबो नहि बाजब तँ परिचयो नहि होएत ।आखिर अपना दिसक लोक छथि ,संयोगसँ भेटि गेल छथि तँ परिचय करबामे कोन हर्ज? सएह सोचि हम टोकारा देलिऐक-" अहाँक घर कतए अछि?"
"मधुबनी "
"हमहुँ ओमहरे क छी?
" एहिठाम की करैत छी?"
"किछु नहि । गाम चल गेल रही। माएक श्राद्ध कएक आबि रहल छी ।काज ताकि रहल छी । “
"ओ! केहन काज तकैत छी?"
"जएह भेटि जाए । एहिमे हमर कोनो पसिंद की भए सकैत अछि?"
"अहाँ काल्हि हमरा ओहिठाम आउ । हम अपन बाबूसँ गप्प करबनि ।" ओ अपन मोबाइल नंबर आ पता लिखा देलथि। हम बहुत खुश रही । एकरा एकटा चमत्कारे कहि सकैत छी जे दिल्लीसन जगहमे अपन लोक भेटि जाथि आ ओहो एहन मदतिगार होथि ।बसस्टापआबि गेल छल ।उतरैत , उतरैत हम ओकर नाम पुछलिऐक । ओ बजलीह –“लता”। हम बससँ उतरि गेलहुँ ।बससँ उतरैत काल पलटिकए देखलिऐक । ओहो हमरे दिस ताकि रहल छलि । हम बससँ उतरि अपन डेरा पहुँचलहुँ । डेरा पहुँचतहि माए मोन पड़ि गेल । तरह-तरहक बातसभ मोनमे घुमैत रहल । बहुत मोसकिलसँ दूबजे रातिमे जा कए निन्न भेल।
रबीन्द्र नारायण मिश्र, पिताक नाम : स्वर्गीय सूर्य नारायण मिश्र, माताक नाम : स्वर्गीया दयाकाशी देवी, बएस : ६६ बर्ख, पैतृक ग्राम : अड़ेर डीह, मातृक : सिन्घिआ ड्योढ़ी, वृति : भारत सरकारक उप सचिव (सेवा निवृत्त)/ स्पेशल मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट, दिल्ली(सेवा निवृत्त), शिक्षा : चन्द्रधारी मिथिला महाविद्यालयसँ बी.एस-सी. भौतिक विज्ञानमे प्रतिष्ठा : दिल्ली विश्वविद्यालयसँ विधि स्नातक
प्रकाशित कृति : मैथिलीमे:-

Suggested citation: गजेन्द्र ठाकुर. “मिथिलाक इतिहास भाग-२.” Videha — First Maithili Fortnightly eJournal, issue 309, 2020-11-01. https://www.videha.co.in/research/2020/309/मिथिलाक-इतिहास-भाग-२.htm

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