विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका · VIDEHA · ISSN 2229-547X

मिथिलाक प्रसिद्ध लोक पर्वसामा-चकेबा

डॉ. चित्रलेखा · 2020-11-15 · अंक 310

योगेन्द्र पाठक वियोगी
नरक विजय
(एहि नाटकक एक संस्करण हमर पोथी ‘त्रिनाटकम्’ मे छपि गेल अछि। ओहि मे दृश्यक संख्या बहुत बेसी रहला सँ किछु निर्देशक लोकनि एकर मंचन पर प्रश्न चिन्ह लगौलनि। ओहि आलोचना कें ध्यान मे रखैत एकरा परिवर्धित कएल गेल। एकर बंगला अनुवाद श्री नवीन चौधरी केलनि अछि।- नाटककार)
पात्र परिचय
मानव पात्र — रमेश, सुरेश, अनुपम अमित (वैज्ञानिक)
पौराणिक पात्र — ब्रह्मा, विष्णु, महेश, नारद, यमराज, चित्रगुप्त, दू यमदूत
अंक 1
दृश्य 3
मंच सज्जा मे मामूली परिवर्तन, टेबुल सब हटा देल गेल अछि, मात्र किछु कुर्सी राखल। डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड स्विच ऑफ छैक। ई स्थान बाहुबली रमेश आ बाहुबली सुरेशक मृत्युस्थल अछि। खाकी ड्रेस पहिरने दूनू नीचा मे सूतल पड़ल अछि, दूनूक हाथ लग पिस्तौल छैक। मंचक दूनू कात सँ दूटा यमदूतक प्रवेश। प्रकाश हुनका दूनूक मुह पर पड़ैत अछि। दूनू मरल लोक लग आबि कए ठाढ़ भऽ जाइत अछि। तखन प्रकाश यमदूतक मुह सँ नीचा दिस मृतक पर पड़ैत छैक। यमदूत ओकरा दूनू कें उठेबाक चेष्टा करैत अछि तखने ओ दूनू मृतक ठाढ़ भऽ जाइत अछि।
रमेश (हाथक इशारा सँ स्वागत भाव देखबैत) यमदूत लोकनिक मर्त्यलोक मे स्वागत अछि।
दूत-एक हमरा सब कें स्वागत कथी लेल करैत छी ? हमरा सबहक काज अछि मात्र अहाँ दूनू कें लऽ कए यमराजक दरबार मे हाजिर करब, फेर कोनो दोसर ड्यूटी मे लागि जाएब।
सुरेश अरे जेबे करब, कने सुस्ता लिअऽ, एक जूम तमाकुओ तऽ खा लिअऽ, भरि दिन यमलोक आ मर्त्यलोकक बीच दौड़ैत दौड़ैत थाकि जाइत होएब ने।
दूत-दू थाकि तऽ जाइते छी मुदा काजे ततेक ने भऽ गेल अछि जे की कहू ? साँसो लेबाक फुरसति कहाँ भेटैत छैक ?
रमेश तें ने कहैत छी, कने विलमि जाउ।
(दूनू यमदूत एक दोसराक मुह ताकए लगैत छथि)
दूत-एक (दूत-दू सँ) की विचार छौ ?
दूत-दू ठीक छै, एक बेर कने नियम भंग कइए ली।
सुरेश बहुत नीक। (तमाकू चुना कए दैत) लिअऽ, खाउ।
दूनू दूत ई की छिऐ ?
रमेश आहि रे बा ? तमाकूओ नहि खेने छिऐक कहियो ?
दूत-दू ई सब यमलोक मे थोड़बे भेटै छै जे देखने रहबै ?
सुरेश अच्छा छोड़ू एकरा, आब ई कहू, हमरा सब कें यमलोक मे की की करऽ पड़तै ?
दूत-एक से कोना कहू ? यमराज जखन फैसला सुनेताह तखन ने बुझबै।
रमेश फैसला तऽ हमरा सब कें बुझले अछि, नरके मे जेबाक अछि। ताहि हिसाबें कहू ने की सब हेतैक।
दूत-दू सबटा तऽ हमरा सब कें नहि बूझल अछि, किछु देखने छिऐक से कहैत छी, जेना गरम तेलक कुण्ड मे फेकि देनाइ।
सुरेश अच्छा ! तेल कतेक गरम रहैत छैक ? माने ओकर तापमान कतेक रहैत छैक ?
दूत-एक ई की जानए गेलियै ? गरम तेल गरम तेल होइत छैक, बस एतबे। हम सब की ओहि मे पैसलियै जे बुझबै कतेक गरम छैक।
रमेश ऐं यौ एतबो नहि बुझैत छिऐ जे 50 डिग्री पर गरम कएल गेल तेल आ 200 डिग्री पर गरम कएल गेल तेल मे अन्तर होइत छैक ? अच्छा ई कहू जे तेल कोन वस्तुक रहैत छैक ? सरिसो, तीसी, नारिकेल, सोयाबीन आ कि कोनो फेंट फाँट बला ?
(दूनू यमदूत एक दोसराक मुह तकैत छथि, किछु नहि बूझि रहल छथि जे की उत्तर देथि।)
दूत-एक देखू, ई हमरा सब कें नहि बूझल अछि आ ने एहि सँ कोनो सरोकारे अछि। अहाँ यमलोक पहुँचि कए यमराज सँ बूझि लेब। चलू देरी जुनि करू।
सुरेश कने सूनू तऽ। ओ तेल कोना गरम कएल जाइछै ? माने बिजलीक हीटर लागल छैक कि सौर ऊर्जा सँ आ कि जारनि सँ?
दूत दू हमरा सब कें किछु नहि बूझल अछि। चलू देरी भऽ रहल अछि। (दूनू दूत दूनू मृतक कें पकड़बाक चेष्टा करैत अछि, सुरेश, रमेश जोड़ सँ ओकर हाथ झटकि दैत छैक जाहि सँ ओ सब खसि पड़ैत अछि, फेर अपना कें सम्हारैत ठाढ़ होइत अछि)
दूत एक अहाँ सब यमलोक नहि जेबै ?
सुरेश जेबै तऽ जरूरे, मुदा बिना सब बात फरिछेने विदा नहि होएब। अहाँ सब जाउ आ यमराज कें एतहि बजौने अबियनु, ताबत हम सब एतहि रहब। (दूनू गोटे अपन कमीज कें समेटि बाँहि उघार करैत अछि आ फूलल मांशपेशी कें निहारैत अछि। दूनू यमदूत ओहि दूनूक शारीरिक सौष्टव कें देखैत कने भयभीत होइत छथि।)
दूत-दू अहाँ सब नहिए जेबैक ?
रमेश कहलहुँ ने, यमराज सँ सब बात फरिछा लेलाक बादे जेबैक।
(दूनू मंचक पाछू भाग मे नीचा मे पड़ि रहैत अछि, खिसियाएल मुद्रा मे यमराजक प्रवेश, वेश भूषा पौराणिक वर्णनक हिसाबें। प्रकाश हुनका पर फोकस होइत अछि।)
यमराज (तामसक मुद्रा मे दूत कें सम्बोधित करैत) एतेक देरी किएक लागि गेल ? हम सब चिन्ता मे पड़ल छलहुँ। चित्रगुप्त महराजक कहला पर हमरा अपनहि आबए पड़ल।
दूत एक हमरा दूनू कें माफ कएल जाओ आ अपन समस्या कहबाक अनुमति देल जाओ धर्मराज। हम सब तऽ घुरि कए जाए बला छलहुँ अहाँ कें बजबै लेल।
यमराज (कने सामान्य होइत) बिना मृतात्मा कें लेने घुरि जइतहुँ ? से किएक ?
दूत-दू की कहू धर्मराज, एहन मृतात्मा सँ कहियो पाला नहि पड़ल छल जे प्रश्न पूछत।
यमराज (आश्चर्यचकित होइत) मृतात्मा प्रश्न पुछलक ? आश्चर्य, एना तऽ कहियो नहि भेल छलैक।
दूत-एक सएह ने कहैत छी। दूटा लोक अछि जे अपना कें बाहुबली कहैत अछि, नाम छैक सुरेश आ रमेश। ओ पूछऽ लागल नरक मे कोन तरहक यंत्रणा देल जाइत छैक।
दूत-दू हम सब गलती सँ कहि देलियै जे गरम तेलक कुण्ड मे फेकल जाइत छैक। बस, तकर बाद ओ सब प्रश्न पर प्रश्न करऽ लागल, तेल कतेक गर्म रहैत छैक, तेलक तापमान कतेक होइत छैक ? कोना कए गरम कएल जाइत छैक ? कोन पदार्थक तेल रहैत छैक – नारिकेल तेल कि सरिसो तेल कि फेंट फाँट बला।
दूत-एक हमरा सब कें एकर उत्तर बूझल नहि छल। ओ दूनू कहलक जे जाबत एहि प्रश्नक उत्तर नहि भेटि जाएत ताबत यमलोकक यात्रा नहि करब। जाउ यमराज कें अपनहि आबए कहियनु।
यमराज (खिसिआइत) मृतात्माक एतेक साहस कोना भेलैक जे अहाँ सब सँ प्रश्न पुछलक ? हमरा बजबैक आदेश देलक ? (तामसें जोर सँ बजैत) कतए अछि ओ दुष्टात्मा सब? देखाउ हमरा। एखनहि हम ओकरा सबहक नंगटपनी घोसारि दैत छिऐक। (एखन प्रकाश रमेश आ सुरेश पर फोकस होइत अछि)
दूत दू (हाथक इशारा सँ देखबैत) ओएह दूनू छी ओ बाहुबली मृतात्मा।
(दूनू मृतात्मा हड़बड़ा कए उठि जाइत छथि आ एकहि संग धर्मराजक पैर पर खसैत छथि)
रमेश, सुरेश जय हो, जय हो, धर्मराजक जय हो। महाराज वैवस्वतक जय हो। मर्त्यलोक मे महाराज सूर्यपुत्रक स्वागत।
यमराज (तामस कें घोंटैत, कने हटि कए, स्वतः) आश्चर्यक बात, पहिल बेर एहि मर्त्यलोक मे कियो यमराजक जयजयकार करैत स्वागत कऽ रहल अछि, जरूर ई दूनू कोनो विशिष्ट व्यक्ति अछि। (लग आबि, प्रकट) अहाँ सब यमदूतक संग नहि जा कए बहुत पैघ नियम भंग केलियै, जे आइ तक नहि भेल छलैक। एहि अपराध लेल अहाँ सब कें सजाए बढ़ाओल जा सकैत अछि।
रमेश पहिने आसन ग्रहण कएल जाओ सूर्यपुत्र (हुनका हाथ पकड़ि कुर्सी पर बैसबैत छथि, अपने दूनू गोटे टेबुलक दूनू कात ठाढ़ होइत छथि, यमदूत लोकनि काते मे ठाढ़ रहैत छथि) यमलोक जेबा लेल तैयारे छी धर्मराज, आ जे कोनो सजाए भेटत ताहि लेल सेहो तैयार छी।
सुरेश मुर्दा पर जेहने दश मोनक बोझ तेहने पचास मोनक बोझ। जखन नरके मे बास करबाक अछि आ यातना सहबाके अछि तखन हजार बरखक बदला दू हजार बरख सएह ने। कोनो फर्क नहि पड़ैत छैक।
यमराज (आश्चर्यचकित होइत) अहाँ सब अपने मोने कोना बूझि गेलिऐ जे नरके मे बास करबाक अछि ?
रमेश धर्मराजक जय हो। बुझले अछि जे हम सब कोनो अबोध बच्चा नहि छलहुँ ने। ब्रह्महत्या, नारीहत्या, भ्रूणहत्या, गोहत्या आदि सँ लऽ कए छागरहत्या, शूकरहत्या, कुक्कुटहत्या, मत्स्यहत्या, छुटले की छल ?
यमराज (आश्चर्य प्रदर्शित करैत) अच्छा !
सुरेश ओतबे नहि देव, डकैती तऽ साधारण बात भेल, अपहरण, व्यभिचार आ साइवर क्राइम मे सेहो हमरा दूनूक जोड़ नहिए रहल हेतैक।
रमेश बीस बरख तक एतेक जे पाप कएल तऽ ई सोचिए कए ने जे नरक मे दीर्घ प्रवास करब।
सुरेश नरक मे देल जाए बला यातना आदिक वृहत जानकारी सेहो लऽ लेने छी धर्मराज। सबटा शास्त्र पुराण आर अन्यान्य ग्रन्थ सब सेहो चाटि गेल छी।
रमेश जतेक प्रकारक अपराध हम सब कएल अछि ओहि सब लेल एतुका ग्रन्थ सब मे तऽ सजाएक प्रावधानो नहि छैक। लगैत अछि ग्रन्थकार कें ओहि अपराधक कल्पनो नहि छलनि। तकरा बारे मे अपने कोना निर्णय लेब से सोचि राखू धर्मराज।
यमराज ओ तऽ बादक बात भेल, एखन एहि मृत्युलोक मे रुकल किएक छी जखन कि अहाँ सबहक भोगक अवधि शेष भऽ गेल अछि ? अंट शंट प्रश्न पूछि कए यमदूत लोकनि कें रोकने रहलियैनि से किएक ?
सुरेश महाराज औदुम्बर, हमरा सब कें बूझल छल जे देरी भेला सँ अपने स्वयं मर्त्यलोक एबे करबैक।
रमेश हमरा सबहक प्रश्न ओ नहि अछि जे दूत लोकनि सँ पूछल। ओ तऽ बहन्ना छल।
सुरेश महाराज वैवस्वत, अपने कें कष्ट देल एतए बजाए से मात्र एकटा छोट अनुरोध करबाक हेतु।
रमेश हमर आग्रह जे दूनू यमदूत कात भऽ जाथि। (यमराज इशारा करैत छथिन, दूनू दूतक प्रस्थान)
सुरेश हमरा सबहक आग्रह एतबे जे अपना संग पाँच किलो ओजनक एकटा ब्रीफकेस लऽ जेबाक अनुमति भेटए।
यमराज (आश्चर्यचकित होइत) ई की बाजि रहल छी ?
रमेश महाराज औदुम्बरक जय हो। बुझले होएत जे आब फोकटियो हवाइ जहाज कम्पनी सब लोक कें सात किलो ओजन तक के ब्रीफकेस अथवा हैंडबैगक अतिरिक्त पन्द्रह किलो चेकइन लगेज लऽ जेबाक सुविधा दैत छैक। हम सब तऽ मात्र पाँच किलोक अनुमति माँगि रहल छी। सेहो ब्रीफकेस टा, कोनो चेकइन लगेजक झंझट नहि।
यमराज मुदा ई कोना सम्भव छैक ? आइ तक कहियो एना नहि भेलैक।
सुरेश अपने तऽ धर्मराज छी, हम सब मर्त्यलोकक अदना प्राणी अपने कें की बुझाएब ? तैयो पुछैत छी जे जखन इन्द्र गौतम ऋषिक पत्नी अहिल्याक शीलभंग करबा लेल गेलखिन तऽ ओहि सँ पहिने ओहन घटना भेल छलैक की ?
यमराज अहाँ सब की कहऽ चाहैत छी ?
रमेश एतबे जे कोनो नव काज शुरू करबा लेल पहिने की भऽ गेल छैक तकरा देखब जरूरी नहि। एना जँ लोक करऽ लागए तऽ कहियो कोनो नव काज शुरुए नहि हेतैक।
यमराज मुदा यमलोक मे मृत्युलोकक चीज वस्तु कोना रहि सकैत छैक ?
सुरेश एखनहु तऽ रखने छिऐक धर्मराज। नरकक विभिन्न कुण्ड मे जे मानव मल, मूत्र, रक्त, मज्जा, वीर्य, अश्रु आदि भरल छैक से यमलोक मे तऽ नहिए भेटैत हेतैक। मानव तऽ मर्त्यलोकेटा मे छैक देव। ओ सामान सब तऽ एतहि सँ उठा कए लऽ गेलियैक।
यमराज सम्भवतः अहाँक बात ठीक अछि, मुदा ई काज बहुत दिन पहिने भेल छलैक जखन हमर पूर्वक पूर्वक पूर्वक यमराज यमलोकक काज देखैत छलखिन।
रमेश कहुना भेल होइक, भेलैक तऽ। बस, तखन हमरा सबहक निवेदन स्वीकार कऽ लेल जाओ सूर्यपुत्र।
सुरेश यदि अपनेक यान मे जगहक समस्या हो तऽ हम सब विशेष यानक व्यवस्था कऽ सकैत छी। ओ यान एतुका वैज्ञानिक लोकनि कठिन शोध सँ तैयार केलनि अछि जे ब्रह्मांड मे सबतरि जा सकैत छैक।
यमराज नहि नहि, तकर काज नहि पड़तैक मुदा हम अपने मोने ई अनुमति नहि दऽ सकैत छी। एहि लेल हमरा देवता सबहक संग विशेष मीटिंग करए पड़त।
रमेश कइये लेल जाओ धर्मराज, ताबत हमरा दूनू कें एतहि छोड़ि देल जाओ। ओतए चल गेलाक बाद घूरि कए तऽ आएल पार नहि लागत।
यमराज ठीक छैक, हम दूनू यमदूत कें अहाँ दूनूक पहरा मे लगा दैत छिएनि। (संकेत करैत छथि, दूनू यमदूतक प्रवेश), हम कने देवलोक मे एकटा इमर्जेन्सी मीटिंग करबा लेल जाइत छी, ताबत हिनका दूनू कें एतहि रखियनु। (यमराजक प्रस्थान)
सुरेश अपने सब आराम सँ भीतर मे बैसू ने। कतेक काल ठाढ़ रहब। भीतर मे अपनेक लेल सब इन्तजाम कएल अछि। (इशारा करैत छथि)
दूत-एक भगबै नहि ने यौ ?
रमेश भागि कए कतए जेबै ? मरल लोक समाजक बीच कोना जेतैक ? सब भूते बूझि लेत आ ढेपियौनाइ शुरू करत। अपने सब निश्चिन्त रहू।
दूत-दू बेस (दूनूक प्रस्थान)
सुरेश (दर्शक दिस मुह घुमा) देवलोक मे इमर्जेन्सी मीटिंग चलि रहल छैक, परमीसन तऽ भेटबे करतैक। किएक ने जल्दी जल्दी ब्रीफकेस तैयार कऽ ली।
रमेश आ विशेष यान कें सेहो तैयार करबा कए राखिए ली। किन साइत ?
(दूनूक प्रस्थान, मंच अन्हार)
(अगिला अंकमे जारी)

Suggested citation: डॉ. चित्रलेखा. “मिथिलाक प्रसिद्ध लोक पर्वसामा-चकेबा.” Videha — First Maithili Fortnightly eJournal, issue 310, 2020-11-15. https://www.videha.co.in/research/2020/310/मिथिलाक-प्रसिद्ध-लोक-पर्वसामा-चकेबा.htm

मूल विदेह अंक / Original issue