गजेन्द्र ठाकुर
भाषा आ प्रौद्योगिकी (संगणक,छायांकन,कुँजी पटल/ टंकणक तकनीक):
भाषा आ प्रौद्योगिकी (संगणक,छायांकन,कुँजी पटल/ टंकणक तकनीक) , अन्तर्जालपर मैथिली आ विश्वव्यापी अन्तर्जालपर लेखन आ ई-प्रकाशन
गूगल आ वर्डप्रेस द्वारा जालवृत्त खोलबाक लेल बहुत रास बनल बनाएल परिकल्पित नमूना स्थल निर्माण लेल उपलब्ध अछि आ ओतए लेखन, संदेश आ टिप्पणीक लेल असीमित दत्तांशनिधि उपलब्ध अछि जतए जालोद्वहन मँगनीमे देल जा रहल अछि। ई सभ जालवृत्त निर्माण स्थल उपभोक्ता केन्द्रित अछि आ एतए सरल लेखन-पद्धतिक व्यवस्था सेहो कएल गेल अछि मुदा जे अहाँ संविहित पृच्छन भाषा (एस.क्यू.एल.) आधारित जालस्थलक निर्माण आ प्रबन्धन करए चाहैत छी तँ ओहि लेल ई निबन्ध अहाँक लेल उपयोगी रहत। पहिने मिथिलाक्षर आ देवनागरीक यूनीकोडमे लिखल जएबाक प्रक्रम दए रहल छी आ से अन्तर्जालपर पढ़ल जा सकबा योग्य कोना होएत तकरो चरचा होएत। तकर बाद जालस्थल निर्माण पद्धतिपर विस्तृत चरचा होएत।
देवनागरी लिपिकेँ रोमन टाइपराइटरपर कोन टाइप करी-
पहिने www.bhashaindia.com पर जा कए हिन्दी IME V.5 अवारोपित (डाउनलोड) करू । एहि विधि (प्रोग्राम) केँ अपना संगणक (कंप्युटर) पर प्रतिष्ठापित (इंस्टॉल) करू । फेर नियन्त्रण पटल (कंट्रोल पैनल) मे क्षेत्रीय आ भाषा (रेजनल आ लंग्वेज) पर जा कए लंग्वेज प्लावक (टैब) केँ दबाऊ । देखू जे कॉम्प्लेक्स स्क्रिप्ट/ राइट टू लेफ्ट लैंगुएज पर सही केर निशान लागल छैक आकि नहि । नहि छैक तँ करू आ संगणक ( कंप्युटर) ताहि लेल जे जे कहैत अछि से करू । एकरा बाद लंग्वेज प्लावक (टैबकेँ) आ डिटेल्स केँ दबाऊ । फेर ओतए ऐड क्लिक करू आ ओतए लंग्वेज मे हिन्दी आ कीबोर्ड मे HINDI INDIC IME 1[V.5.1] सेलेक्ट कए अप्लाइ दबाऊ । कंप्युटरकेँ रीस्टार्ट करू । आब वर्ड डोक्युमेंट खोलू । वाम Alt+Shift केँ सम्मिलित दबेला उत्तर H कुँजीपटल (कीबोर्ड) आओत नहि तँ नीचाँ लंग्वेजक़ेँ क्लिक करू आ हिन्दी चुनि लिअ । कुँजीपटलमे हिन्दी transliteration आ आन तरहक विकल्प जेना रेमिंगटन/ इन्सक्रिप्ट कुँजीपटल उपलब्ध अछि । चुनि कए टाइप शुरू करू ।
आब transliteration कुँजीपटलपर राम टाइप करबा लए raama टाइप करए पड़त । क् (हलन्त सहित) टाइप करबाक हेतु k दबाऊ आ माउसक लेफ्ट बटन क्लिक करू अन्यथा स्पेस पिञ्जक आकि एंटर पिञ्जक दबेला पर हलंत उड़ि जाएत ।
विकीपीडिया पर मैथिली पर लेख तँ छल मुदा मैथिलीमे लेख नहि छल,कारण मैथिलीक विकीपीडियाक स्वीकृति नहि भेटल छल । हम बहुत दिनसँ एहिमे लागल रही आ ई सूचित करैत हर्षित छी जे २७.१०.२००८ केँ मैथिली भाषामे विकी शुरू करबाक हेतु स्वीकृति भेटल छैक । एतए संगणक शब्द सभक स्थानीयकरणमे बहुत रास अंग्रेजी शब्दक अनुवाद हम कएने रही आ ताहिसँ एह क्रयमे रुचि बढ़ल आ मदति सेहो भेटल ।
देवनागरीमे टाइप करबाक हेतु एकटा आर तन्त्रांश साधन (सॉफ्टवेअर टूल) उपलब्ध अछि टूल अछि जे http://www.baraha.com/BarahaIME.htm लिंक पर उपलब्ध अछि । एकर विशेषता अछि एकर संस्कृत कुञ्जी फलक जे आन कोनो तन्त्रांशमे उपलब्ध नहि अछि । एहिमे उदात्त, अनुदात्त स्वरित आ किछु आन संस्कृत अक्षर उपलब्ध अछि मुदा एतहु स्वास्तिक, ग्वाङ, अञ्जी इत्यादि उपलब्ध नहि अछि । स॑ , स॒ , स॓ , सऽ केँ स लिखलाक बाद सिफ्ट ३,२,४ आ ७ दबेलासँ लिखि सकैत छी ।
तिरहुता लिपि लिखबाक हेतु एहि लिंक पर जाऊ।
http://www.tirhutalipi.4t.com/
मुदा एकरा हेतु एहि लिंक पर जे प्रीति फॉंन्ट छैक तकरा सेहो अवारोपित कए प्रतिकृति करू आ दुनू केँ ध्रुववृत्त चालक (हार्डडिस्क ड्राइव) C/windows/fonts मे लेपन करू । एहिमे जे फॉन्ट अछि से Ascii मे अछि । क्रुतदेव , शुशा ई सभ फॉण्ट सेहो एहि तरहक अछि, पहिने उपयोगी छल मुदा आब सर्च इंजिनमे यूनिकोड-यू.टी.एफ.8 केर सर्च होइत छैक आ Ascii मे लिखल देवनागरीक सर्च नहि भए पबैत अछि । विन्डोजमे मंगल वर्णमुख (फॉन्ट) अबैत छैक से यूनीकोडमे छैक आ एहिमे लिखल देवनागरी सर्च भए जाइत अछि । मिथिलाक्षरक यूनीकोड रूपक आवेदन (अंशुमन पाण्डेय द्वारा देल गेल) लंबित अछि जाहिमे बर्कले विश्वविद्यालयक प्रोफेसर डेबोराह एन्डरसन, Project Leader, Script Encoding Initiative, Dept. of Linguistics, UC Berkeley क आग्रहपर हमहुँ योगदान देने रही ।
आब किछु बात यूनीकोड आ जालस्थल (वेबसाइट) केर संबंधमे ।
कोनो फाइलकेँ पढ़बाक हेतु कंप्युटरमे आवश्यक फॉंट होएब जरूरी अछि, नहि तँ सभसँ सरल उपाय अछि, शब्द-संसाधकमे बनल लेख (वर्ड डोक्युमेंट) केँ पी.डी.एफ. फाइलमे परिवर्त्तित करू । एहिमे नफा नुकसान दुनू अछि । नफा जे बिना कोनो फांटक झंझटिक पी.डी.एफ.फाइल जाइ काँटा/ वर्णमुख/ लिपिमे लिखल गेल अछि, ताहिमे पढ़ल जा सकैत अछि । एकर नुकसान जे जखने फाइलमे जा कए सेव एज टेक्स्ट करब तँ अंग्रेजीतँ सेव भए जाएत मुदा देवनागरी तेहन सेव होएत जे पढ़ि नहि सकी । दोसर यूनीकोडक मंगलमे टाइप कएल लेखकेँ एडोब अक्रोबेटसँ पी.डी.एफ.मे परिवर्त्तित करबामे दिक्कत होए तँ संपूर्ण फाइलकेँ खोलि कए सभटा चयन करू, यूनीवर्सल यूनीकोड एम.एस.फांट ड्रॉप डाउन मेनूसँ सेलेक्ट करू फेर प्रिंटमे जा कए प्रिंटर (मुद्रक) एडोब एक्रोबेट सेलेक्ट करू । आब ई फाइल परिवर्त्तित भए जाएत पी. डी. एफ.मे । माइक्रोसॉफ्ट वर्डसँ pdf मे परिवर्त्तनक सोझ तरीका अछि, फाइल, प्रिंटमे जाऊ, आ फेर प्रिंटरमे एक्रोबेट डिस्टीलर सेलेक्ट कए प्रिंट कमांड दए दिअ । मुदा एहिमे कखनो काल pdf डॉक्युमेंट नहि बनैत छैक । तखन प्रिंटर एक्रोबेट डिस्टीलर सेलेक्ट कए प्रोपर्टीज मे जाऊ । ओतए अडोब pdfसेटिंग सेलेक्ट करू । ओतए ऑपशन डू नॉट सेंड फॉन्ट्स टू डिस्टिलर मे टिक लगाएल होएत । ओकरा अनचेक करू । आ से कए बाहर आऊ आ प्रिंट कमांड दिअ । आब pdf डॉक्युमेन्ट बनि जाएत । एहि फाइलमे कखनो काल घ हलन्त आ ज कखनो काल चतुर्भुज रूपमे नञि पढ़बा योग्य अबैत अछि ।
पी.डी.एफ. स्प्लिटर आ’ मर्जर सॉफ्टवेयर ( जेना फ्रीवेयर सॉफ्टवेयर ‘पी.डी.एफ. हेल्पर/ सैम) केर मदतिसँ आसानीसँ पी.डी.एफ. फाइल जोड़ि आ तोड़ि सकैत छी।
आब वेबसाइट बनेबाक पूर्व किछु मुख्य बातकेँ देखि लिअ । पाँच तरहक अन्तरजाल गवेषक (इंटरनेट ब्राउजर) अछि, शेष सभटा एकरा सभकेँ आधार बना कए रचित अछि । तखन सभसँ पहिने ई चारू अपना कंप्युटरमे प्रतिष्ठापित (इंस्टॉल) करू-
१.ओपेरा , २.मोजिल्ला , ३. माइक्रोसॉफ्टक इंटरनेट एक्सप्लोरर (ई तँ होएबे करत) , ४. गूगल क्रोम आ ५. एपलक,अखन धरि ई मेकिनटोसक लेल छल आब विन्डो लेल सेहो अछि, सफारी । आब जखन जाल पृष्ठ (वेब पेज) उपारोपित (अपलोड) करू वा पहिनहुँ तँ एहि सभपर खोलि कए अवश्य देखि लिअ ।
देवनागरी लिखबामे बराह आइ.एम.ई. केर योगदान विशिष्ट अछि । एहिमे संस्कृतक उदात्त , अनुदात्त आ स्वरित केर संगे बिकारी, देवनागरी अंक आ किछु संगीतक स्वरलिपि लिखबाक सुविधा अछि । विदेहक संगीत शिक्षा स्तंभ बिना एकर सहयोगक संभव नहि छल । मंद्र सप्तक, तीव्र आ कोमल स्वरक नोटेशन एहिमे अछि । ऋ,ॠ आ ऌ,ॡ आ ऍ, ऎ अ, ~ हलन्तक बाद जोड़क सुविधा एहिमे सुविधा छैक । अनुदात्त क॒ उदात्त क॑ आ स्वरित क॓ सेहो उपलब्ध अछि । ई विस्टामे सेहो कार्य करैत अछि । आ यूनीकोड फॉंटमे रहबाक कारण इंटरनेट पर पठनीय अछि ।
अ सँ ह तक वर्णमाला अछि । क्ष, त्र ,ज्ञ ओनातँ संयुक्त्त अक्षर अछि मुदा बच्चेसँ हमरा सभ अ सँ ज्ञ तक वर्णमालाक रूपमे पढ़ने छी । श्र सेहो क्ष, त्र, ज्ञ जेकाँ संयुक्त अक्षर अछि । ज्ञ केर उच्चारण ताहि द्वारे हमरा सभ ग आ य केर मिश्रण द्वारा करैत छी से धरि गलत अछि । ई अछि ज आ ञ केर संयुक्त । ऋ केर उच्चारण हमर सभ करैत छी, री । लृ केर उच्चारण करैत छी, ल, र आ ई केर संयुक्त्त । मुदा ऋ आ लृ स्वयं स्वर अछि, संयुक्ताक्षर नहि । विदेहक आर्काइवमे शुद्ध उच्चारणक आवश्यकताकेँ देखि कए अ सँ ज्ञ तक सभ वर्णक उच्चारण देल गेल अछि । भारतीय अंकक अंतर्राष्ट्रीय रूपक प्रयोगक देवनागरीमे चलन भऽ गेल अछि । भारतीय संविधानक अनुच्छेद 343(1) कहैत अछि जे संघक राजकीय प्रयोजनक हेतु प्रयुक्त होमए बला अंकक रूप, भारतीय अंकक अंतर्राष्ट्रीय रूप होएत। मुदा राष्ट्रपति अंकक देवनागरी रूपकेँ सेहो प्राधिकृत कऽ सकैत छथि ।
http://www.bhashaindia.com पर tbil converter सॉफ्टवेयर डाउनलोड करू । मंगल फॉंटमे आन फॉटसँ परिवर्त्तन करबाक अछि तँ डॉक्युमेन्ट .doc चयन करू इनपुट भाषामे हिन्दी आ ascii फॉन्टमे फॉन्ट चयन करू । आउटपुटमे भाषा हिन्दी आ फॉन्ट Unicode mangal चयन करू । आब ब्राउज कऽ कए फाइल सेलेक्ट करू । अहाँक कम्प्युटर मे ऑफिस २००७ अछि आ वर्ड डॉक्युमेन्ट .docx एक्सटेंशन अछि , तखन एक्सटेंशनकेँ रिनेम करू .docआब ब्राउजमे डॉक्युमेन्ट आबि जाएत । अहाँक कम्प्युटर मे ऑफिस २००७ नहि अछि तखन रिनेम केलासँ कोनो फाएदा नहि । आब कंवर्ट क्लिक करू । नूतन फाइल Unicode Mangal फॉन्टमे बनि जाएत । अहाँक शब्द संसाधक सञ्चिका )(वर्ड डॉक्युमेन्ट फाइल) मे यूनीलोड आ ascii वर्णमुख (फॉन्ट) मिलल अछि, तखन अंदाजीसँ ascii वा बेशी प्रयुक्त होएबला ascii केर चयन करू । कंवर्ट क्लिक करू कन्वर्ट भऽ जाएत यूनीकोड मंगल वर्णमुखमे।
जालस्थल निर्माण
पहिने कोनो ऑनलाइन प्रतिष्ठित संस्थासँ प्रदेश नाम (डोमेन नेम) कीनू । उदाहरणस्वरूप रिडिफ डॉट कॉम पर जाऊ आ रिडिफ होस्टिंगपर क्लिक करू । ओतए बुक यूअर डोमेन पर जा कए इच्छित नाम ट्कित कए देखू जे ओ उपलब्ध अछि आकि नहि । अहाँ अपन जालस्थलक हेतु उपयुक्त डोमेन नेम क्रेडिट कार्डसँ ऑनलाइन कीनि सकैत छी । ई सस्ता छैक दश डॉलर प्रतिवर्ष एकर अधिकतम मूल्य छैक । तकरा बाद जालोद्वहन सेवा (वेब होस्टिंग सर्विस) केर लिंकपर जाऊ । ५ वा दस साल लेल १०० एम.बी. स्थानक संग जालोद्वहन सेवा लिअ आ एकरा संग माय एस.क्यू.एल. सेवा मुप्त छैक मुदा ओहिमे लाइनक्सपर काज करए पड़त जे कनेक कठिनाह/ तकनीकी भए सकैत अछि से माइक्रोसॉफ्ट एस.क्यू.एल. सेवा किछु आर पाइ लगा कए अहाँ कीनि सकैत छी । आब अहाँ लग २० एम. बी. केर एस.क्यू.एल. दत्तनिधि (डाटाबेस) आ ८० एम.बी.केर साइट लेल जगह बाँचत (माने पूरा १०० एम.बी.) आ से पर्याप्त अछि। आर स्पेसक जोगार मँगनीमे भए जाएत, तकर चरचा आगाँ होएत। माइक्रोसॉफ्ट एस.क्यू.एल. सेवा लेबाक उपरान्त अहाँ अपन माइक्रोसॉफ्ट एक्सेल सञ्चिका ओतए चढ़ा सकैत छी आ तकर उपयोग अपन जालस्थलपर एकटा मध्यस्थ (इन्टरफेस) बना कए अहाँ कए सकैत छी ।
आब जालस्थल (वेबसाइट) बनेबाक विधिपर विचार करी।
माइक्रोसॉफ्ट फ्रन्टपेज ऑफिस एक्स.पी. क संग अबैत अछि । ऑफिस २००३ मे सेहो ई अलग सँ उपलब्ध अछि ।
प्रन्टपेजमे बनल-बनाओल वेबसाइट विजार्ड चलाऊ । मोटा-मोटी पाँच पृष्ठक जाल-स्थल बनि जाएत। एहिमे वाम कात राइट क्लिक कए पृष्ठक संख्या बढ़ा सकैत छी । ऊपरमे स्थित थीमसँ अपन इच्छा मोताबिक बनल-बनाओल डिजाइन सेहो लए सकैत छी । साइटक कोनो पृष्ठकेँ अहाँ फोटो एलीमेन्ट द्वारा फोटो गैलरीमे परिवर्तित कए सकैत छी आ ३-४-६ स्तम्भमे फोटो सभ सजा सकैत छी । ओहि पृष्ठपर डबल क्लिक कए अपन संगणकसँ फोटोकेँ आनू आ यूनीकोड टाइपराइटर द्वारा वर्णन टंकित करू । पृष्ठ सुरक्षित करबा काल चित्रक गुणवत्ता जे.पी.जी. फोटोमे १ सँ १०० धरि चुनबाक विकल्प छैक । जतेक पैघ फाइल चुनब ततेक बेशी जगह छेकत ।वाम आ नीचाँमे लिक लेल चिल्ड्रेन सेटिंग विकल्प चयन कएला उत्तर जालस्थलक सभ पृष्ठक सूचना ओतए आबि जाएत । बेशी पृष्ठ भेला उत्तर कोनो पृष्ठक भीतर पृष्ठ सभक श्रृंखला दए सकैत छी । आब अहाँक संगणकमे अहाँक जालस्थल माय डोक्युमेन्ट्स/ माय वेबमे सुरक्षित अछि ।
अपन वेबसाइटक वास्तविक स्वरूप प्रीव्यू विकल्प द्वारा ऊपर वर्णित ५ प्रकारक गवेषकमे देखू । किछु आवश्यक परिवर्तन प्रन्टपेजपर कएला उत्तर एहि साइटकेँ अपन सर्वरपर उपारोपित कए दियौक। एहि लेल फाइलजिला डॉट कॉम पर जाऊ जे मुफ्त तंत्रांश उपलब्ध करबैत अछि । एतए क्लाइन्ट आ सर्वर मे सँ क्लाइन्ट विकल्प चुनू आ तंत्रांश अपन कम्प्यूटरमे प्रतिष्ठापित करू । एकरा बाद यूजर नेम आ पासवर्ड दिअ आ एफ.टी.पी. डॉट डोमेन नेम पर पूर्ण जालस्थल वितरक (सर्वर) केर मूल फोल्डरमे पर उपारोपित कए दिअ। अहाँक जालस्थल अन्तरजालपर नियत जालस्थल पतापर देखाइ पड् लागत।
अपन अपन दत्तसङ्ग्रह कोनो तन्त्रांश जेना ई.एम.एस. एस.क्यू.एल.मैनेजर केर माध्यमसँ अपन वितरकपर चढ़ाऊ आ एहि लेल अपन सेवा प्रदातासँ दूरभाषपर गप कए किछु विशेष ओर्टक जानकारी लिअ। सभटा सामग्री चढ़ि गेलाक बाद अपन जालस्थलक पृष्ठपर बनाओल मध्यस्थ पृष्ठपर कोडमे यूजर नेम आ पसवर्ड देनाइ नहि बिसरू।
कोनो पृष्ठपर पृष्ठसँ संगीत अन्बाक लेल कम्प्यूटरसँ ओहि पृष्ठपर संगीतक सञ्चिका आयात करू मुदा आइ काल्हि मात्र ओपेरा आ इन्टरनेट एक्सप्लोररपर प्रन्टपेजसँ बनल जालस्थलमे संगीत बजैत अछि।
आब किछु गप पृष्ठ शैली (स्टाइल शीट) पर।
अहाँ सम्पूर्ण जालस्थलक डिजाइन जे एक्के रंगक राखए चाही तँ एहि लेल सभ पृष्ठमे एकर विधिलेख दए दियौक आ एकटा फोल्डरमे डिजाइन राखि दियौक। एहिमे पृष्ठभूमिमे बाजए बला संगीत सेहो रहि सकैत अछि । एहिसँ ई फायदा अछि जे सभ पृष्ठ खुजबा काल फेरसँ तागति नहि लगबए पड़त मात्र एक बेर डिजाइन आ संगीत खुजबामे जे समय लागत सएह टा। दोसर पृष्ठपर जे लिखित अंश वा फोटो आदि रहत ताहिमे जतेक देरी लागत सएह समय मात्र लागत। माने अहाँक जालस्थल हल्लुक भए जाएत आ जल्दीसँ खुजत।
आब आर.एस.एस.फीडक विषयमे जानकारी ली।
जालस्थल तँ बनि गेल आब एकर प्रचार प्रसार सेहो होएबाक चाही। आर.एस.एस. फीड अछि रिअल सिम्पल सिन्डिकेशन फीड केर संक्षिप्त रूप। एकटा वा कैक टा .xml फाइल बना कए अहाँ अपन वितरकपर चढ़ा दियौक। अहाँ .css डिजाइन तकर बाद ई एक तरहेँ जालस्थलक नक्शा बना दैत अछि आ जखने एहिमे कोनो परिवर्तन अबैत छैक तँ फीड-रीडर/ एग्रीगेटरकेँ जालस्थलपर नव सामग्री अएबाक सूचना भेटि जाइत छैक। एहिमेमे मुख्य घटनाक/ लेखक सारांश रहैत छैक जे लिंकसँ जुड़ल रहैत अछि। ओहि लिंककेँ क्लिक केला उत्तर अहाँ विस्तृत जानकारी प्राप्त कए सकैत छी। .xml युक्त पृष्ठकेँ जालवृत्त (ब्लॉग) पर ऐड गाडजेट/ फीड/ मे पताक रूपमे लिखि कए ५ सँ २० धरि नूतन सामग्रीक (क्रमशः गूगल आ वर्डप्रेस ब्लॉगमे) अद्यतन जानकारी लेल जालवृत्त (ब्लॉग) पर राखल जा सकैत अछि। एकर आर उपयोग छैक जेना फीडबर्नर केर माध्यमसँ ई-पत्र द्वारा सदस्यकेँ सूचना देब, हेडलाइन एनीमेटर जालस्थल/ जालवृत्तपर लगाएब/ ई-पत्र द्वारा इच्छित सामग्रीक लिंक संगीकेँ पठाएब आ गवेषक वा फीड/ न्यूज रीडरक माध्यमसँ पढ़ब।
तकर बाद अपन जालस्थकेँ गूगल, याहूसर्च, लाइव सर्च आ आस्क डॉट कॉमपर सबमिट युअर साइट केर अन्तर्गत दए दियौक जाहिसँ ई सभ अन्वेषण यन्त्र अहाँक साइटकेँ ताकि सकए। .xml फाइलबला विश्वव्यापी अन्तर्जाल पता/ संकेत तकबामे एहि यन्त्र सभकेँ आर सुविधा होएतैक से अहाँ साइटक मुफत प्रचार होएत। .xml फाइल .htm केर स्थान लेत से नहि छैक मुदा एहिसँ फीड एग्रीगेटर/ अन्वेषण यन्त्र सभकेँ जालस्थलपर नव सामग्री तकबामे सुविधा होइत छैक। जखन अहाँक जालस्थलमे परिवर्तन आबए तँ अपन मूल .xml फाइलकेँ परिवर्तित कए वितरकपर चढ़ाऊ, शेष कार्य फीड एग्रीगेटर/ अन्वेषण यन्त्र स्वयं कए लेत। अहाँक अन्तर्जाल गवेषक सेहो साइटमे फीड रहला उत्तर विकल्प चुनलाक बाद जालस्थलक पृष्ठकेँ रिफ्रेश कए लैत अछि, कारण कखनो काल कऽ टेम्परोरी फाइल संगणकमे रहने पुरनके सामग्री इन्टरनेटपर देखाएल जाइत रहैत अछि। मुदा एहि लेल सभ पृष्ठमे एकटा कूटसंकेत देमए पड़त।
आब किछु चरचा ४०४ एरर पृष्ठक। अहाँक जालस्थपर कोनो फोटो/ लिंक जे पहिने छल मुदा आब नहि अछि केँ टाइप कएला उत्तर ४०४ एरर संकेत अन्तर्जाल गवेषक दैत अछि। अपन सेवा प्रदातासँ कन्फ्युगरेशन सम्बन्धी जानकारी लऽ कए अपन जालस्थलक स्टाइलसीटक हिसाबसँ एरर पृष्ठ बनाऊ जतए किछु व्यक्तिगत संदेश जेना- अहाँ द्वारा ताकल सामग्री आब उपलब्ध नहि अछि केर संग जालस्थलक दोसर लिंक सभ राखू। मुदा एकर ध्यान राखू जे एहि पृष्ठपर एहन कूटसंकेत रहए जाहिसँ अन्वेषण यन्त्र ओकरा सर्च नहि करए।
अपन जालस्थलपर girgit.chitthajagat.in वा google translate गाडजेट राखि सकैत छी जाहिसँ मैथिलीक सामग्री दोसरलिपि सभमे एक क्लिकमे परिवर्तित भए जाए।
साइटक प्रचार अपन ब्लॉग/ ग्रुप बना कए आ ऑनलाइन कमेन्ट सबमिशन लेल सेवा प्रदातासँ डॉट नेट सुविधा लए-जाहिसँ वितरक कमेन्ट अहाँक ई-पत्र संकेतपर पाठकक कमेन्ट प्रेषित कए सकए आ फीड एग्रीगेटरमे अपन फीड पंजीकृत कराए पाठकक संख्या बढ़ाओल जा सकैत अछि। कमेन्ट सबमिशन टाइपपैड डॉट कॉम (पेड ब्लॉगर सेवा प्रदाता) सँ सेहो प्राप्त कएल जा सकैत अछि, ई ब्लॉग लेल तँ पाइ लैत अछि मुदा प्रोफाइल बनबए लेल नहि आ ओहि संगे ब्लॉग आ साइट लेल कमेंट फॉर्मक कोड आ सुविधा दुनू उपलब्ध करबैत अछि, एहिमे अहाँ जालस्थलपर कमेंटक एक पृष्ठपर सँख्या, कमेंटपर आपसी वार्तालाप, आ कमेंट मॉडेरेशन विकल्प चुनि सकैत छी।
अपन जालस्थलक आर्काइव लेल गूगल साइट आ वर्डप्रेस १० आ ३ जी.बी. क्रमशः स्थान मुफ्त दैत अछि। फाइल ओतए अपलोड करू मुदा अपन साइटपर ओकर लिंक दए दियौक। एहिसँ अहाँ अपन बजट ठीक कए सकैत छी।
ब्लॉगक यू.आर.एल. यदि नीक नहि लागए तँ मोनमाफिक यू.आर.एल. सुविधा १० डॉलर सालानापर उपलब्ध अछि, मुदा ब्लॉगक सुविधाक अतिरिक्त कोनो आर सुविधा एहिसँ नहि भेटत। मुदा जे अहाँक बजट बहुत कम अछि तँ एकर उपयोग करू।
अहाँ लग जे पूर्ण साइट अछि तँ ओकर एकटा पृष्ठ पर एफ.टी.पी. अपलोडसँ डिसकसन फोरम आदि अपन साइटक ऊपर राखि सकैत छी आ ब्लॉगकेँ अपन साइटमे सम्मिलित कए सकैत छी। ब्लॉगरक भीतर प्रकाशनक अन्तर्गत यू.आर.एल. सुविधा १० डॉलर सालानापर आ एफ.टी.पी. अपलोड ई दुनू सुविधा उपलब्ध छैक।
आब चरचा फेव आइकनक। अपन लोगो ब्राउजरक पताक संग देबाक लेल .ico प्रारूपमे लोगोक चित्र बनाऊ आ अपलोड करू, संगमे स्टाइलसीटपर एकर विवरण दए दियौक।
अपन ई-पत्रमे सिगनेचर, माय स्पेस, फेसबुक, ओरकुट, ट्विटर,यू ट्यूब, पिकासा, याहूग्रुप आ गूगलग्रुप केर माध्यमसँ, आर.एस.एस.फीड आ हेडलाइन एनीमेटर जे ई-पत्र सिगनेचरमे सेहो राखल जा सकैत अछि केर माध्यमसँ सेहो एकर प्रचार कए सकैत छी।
गूगल एनेलेटिक्स आ वेबमास्टर टूलक सेहो उपयोग करू। एनेलेटिक्सक ट्रैकर कोड सभ पृष्ठपर दिअ जाहिसँ प्रतिदिन कतएसँ के आ कोना अहाँक जालस्थलपर अएलाह तकर जानकारी भेटि सकवे आ वेबमास्टर टूलसँ जालस्थल वेरीफाइ करू आ .xml फाइल सबमिट करू।
यदि कोनो पृष्ठपर कोनो फोटो/ लिंककेँ दोसर टैब/ गवेषकमे खोलए चाही तँ टारगेट फ्रेम/ न्यू विन्डो-ब्लैंक चुनू।
सी-डैक पुणेक अओजार आ फान्ट सेहो छैक मुदा ओहिसँ विशेष लाभ परिलक्षित नहि भए रहल अछि, उनटे बहुत रास दिक्कत जेना “द् ध” आ “ग् र” क्रमशः द्ध आ ग्र केर बदलामे देखबामे आओत।
विदेह ई-पत्रिका http://www.videha.co.in/ पर ऑनलाइन यूनीकोड टाइपराइटर उपलब्ध अछि।
पी.डी.एफ.सँ सव एज टेक्स्ट केलापर देवनागरी रूप यूनीकोडमे आ कखनो काल आनोमे नहि सेव होइत छैक। यूनीनगरीमे पी.डी.एफ.सँ कॉपी कए पेस्ट केलासँ देवनागरी रूप आबि जाइत छैक। आस्की कन्वर्टरक सहायतासँ पी.डी.एफसँ यूनीकोडमे बदलैत छैक मुदा प्रारूपण खतम भए जाइत छैक।
फन्ट कन्वर्टरमे SIL कन्वर्टर एहन टूल अछि जाहिमे प्रारोपण खतम नहि होइत अछि आ ई अछियो फ्री तन्त्रांश।
(विदेह पेटारसँ)
अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ।
जितेन्द्र झा
पताः जनकपुरधाम, नेपाल
स्वरक माला गँथती अंशु
हम सभ अपने भाषाकेँ हेय दॄष्टिसँ देखैत छी तें हमर भाषासाहित्य, गीतसंगीत आ संस्कृति पछुआ रहल अछि। ई कहब छन्हि अंशुमालाक। अंशु दिल्ली विश्र्वविद्यालयमे संगीतमे एम फ़िल कऽ रहल छथि। मैथिली गीत संगीतकेँ गुणस्तरीय बनएबाक लक्ष्य रखनिहारि अंशु मैथिलकेँ अपन भाषा-संगीत प्रतिक दृष्टिकोण बदलबापर जोड दैत छथि।
अंशुमाला संगीतक विद्यार्थी छथि। दिल्ली विश्र्वविद्यालयमे एम. फ़िल.मे अध्ययनरत अंशुक माय हिनक पहिल गुरु छथिन्ह। ई माय शशि किरण झासँ मैथिली लोक संगीतक शिक्षा लेने छथि। तहिना एखन किछु बर्षसं ई रेडियो कलाकार हॄदय नारायण झासँ संगीत शिक्षा ल' रहल छथि। बाल कलाकारक रुपमे सीतायण एलबममे गाबि चुकल अंशु बिभिन्न रेडियो कार्यक्रम आ स्टेज प्रोग्राममे सहभागी भ' क' मैथिली गीत गाबि अपन स्वरसं प्रशंसा बटोरने छथि।
एखन दिल्लीमे रहिकऽ संगीत साधनामे जुटल अंशु दिल्लीमे आयोजित विभिन्न कार्यक्रममे मैथिली गीत संगीत परसल करैत छथि।
मैथिली भाषीमे अन्य भाषाक गीत संगीतक प्रति बढैत रुचि मैथिली गीतसंगीत लेल हितकर नञि रहल हिनक कहब छन्हि। दिल्लीमे आयोजित एकटा कार्यक्रमकेँ याद करैत ई कहैत छथि जे जाहि कार्यक्रममे लगभग ८ हजार मैथिल रहथि ताहि कार्यक्रममे चाहियोकऽ मैथिली गीत नहि गाबि सकलहुं। ओहि कार्यक्रममे भोजपुरीक डिमाण्ड पुरा करैत अंशुके मैथिली डहकन गेबाक लेल मोन मसोसिक' रह' पडलनि। मुदा अंशु स्वीकारैत छथि जे गायक स्रोताक रुचिक आगु विवश होइत अछि, 'जनता जे सुनऽ' चाहत हमरा सएह गाबऽ पडत अंशु कहलनि। पटनामे मैथिली गीत गाबिक स्रोताक तालिक गडगडाटिसं खुश हएबाक आदति पडि चुकल अंशुकेँ दिल्लीमे आबिकऽ मैथिल भाषीक बदलल सांगीतिक स्वादसं अकच्छ लागि गेल रहनि।
मैथिलीमे लोकप्रिय धुनक अभाव रहबाक बात अंशु किन्नहु मान' लेल तैयार नहि छथि। धुन वा लयक अभाव नहि, स्रोता एहिसं अनभिज्ञ रहल हिनक दाबी छन्हि। मैथिली संगीतकर्मी एखनो आर्थिक समस्यासँ लडि रहल छथि, अंशु कहैत छथि। एहिक अभावक कारण प्यारोडी गीतक सहारा लेबालेल संगीतकर्मी बाध्य बनल अछि। मौलिक गीत,संगीतमे लगानीकर्ताक अभाव रहलासँ सेहो प्यारोडी संगीत लोकप्रिय भऽ रहल अछि, हिनक कहब छनि। 'सभसँ पैघ कमजोरी श्रोत छै कलाकार तँ सभ ठाम हारल रहैया' प्यारोडी प्रेमीपर रोष प्रकट करैत अंशु कहैत छथि। मुदा मैथिलीमे स्तरीय गीत संगीत स्रोताकेँ भेटक चाही से अंशुक विचार छन्हि। मैथिली लोकरंग मन्चद्वारा दिल्लीमे आयोजित कार्यक्रममे श्रोता भेटल वाहवाहीक उदाहरण दैत अंशु कहैत छथि जे स्रोताक मनोरन्जनक लेल स्तरीय कार्यक्रम सेहो हएबाक चाही।
मैथिली रंगकर्ममे लगनिहारकेँ उचित सम्मान तक नञि भेटि सकल, अंशुमालाक अनुभव छन्हि। मैथिली कलाकारकेँ आब' बला दिनमे बहुत मान सम्मान भेटक चाहि, हम इएह चाहैत छी अंशु कहैत छथि। मैथिली संगीतकेँ एकटा ऊँचाई पर पंहुचएबाक लक्ष्य रखनिहारि अंशु मैथिली रंगकर्ममे एखनो लडकी लेल बहुतो कठिनाई रहल बतबैत छथि।
अंशु आगु कहलनि-मैथिल समाजसँ जाधरि कलाकारकेँ सम्मान नञि भेटतै ताऽ धरि एहि क्षेत्रमे लडकी अपन प्रतिभा देखाब' लेल आगु नञि आओत।
नेपाल वन आ मधेश स्पेशल
टेलिभिजनमे जँ मैथिलीक मादे बात करी त नेपाल वन टेलिभिजनके एकटा अलग स्थान बनि चुकल अछि। नेपाल वन टेलिभिजन राति पौने ८ बजे प्रसारित होब' बला मधेश स्पेशलक माध्यमसं मैथिली बहुतो मैथिल धरि पंहुच रहल अछि। नेपालमे सभसं बेशी बाजल जाए बला दोसर भाषा मैथिली रहितंहु ओत्त ताहि अनुपातमे संचारमाध्यममे मैथिलीके स्थान नई भेट सकल छइ। एहन अवस्थामे पडोसी देश भारतसं सन्चालित नेपाल वन टेलिभिजन मैथिलीमे कार्यक्रम प्रसारण क मैथिलीभाषा भाषी मध्य अपन अलग स्थान बनालेने अछि। नेपालमे सरकारी स्तरपर संचालित नेपाल टेलिभिजन सहित निजी टेलिभिजन च्यानलमे मैथिली एखनो उपेक्षिते अछि। यद्यपि बेर बेरके मधेश आन्दोलन आ संचारमाध्यमपर लाग बला साम्प्रदायिकताक आरोपक कारणे काठमाण्डुकेन्द्रित टेलिभिजनसबमे आब मैथिलीके स्थान भेट लागल छइ। काठमाण्डुसं प्रसारित सगरमाथा टेलिभिजन सेहो सभदिन मैथिलीमे समाचार देल करैत अछि।
नेपाल वन टेलिभिजनक मधेश स्पेशल नामक 1 घण्टाक कार्यक्रममे समाचार, नेपालक समसामयिक राजनीति, नेपालक प्रमुख मुद्दापर बातचित आ गीत संगीत समेटल गेल अछि। समसामयिक वस्तुस्थिति पर लोक अपन धारणा द क परिचर्चाके महत्वपूर्ण बना देल करैत अछि। ई कार्यक्रम राति पौने आठ बजेसं पौने नओ बजेधरि प्रसारित होइत अछि। नेपाल केन्द्रित समाचार रहितो नेपाल सं बाहर इ कार्यक्रम देखिनिहार मैथिल कमी नई अछि। नेपालक सीमावर्ती मधुवनी, दरभंगा, सीतामढी, सुपौल, सहरसासहितके जिल्लासभमे सेहो एकर दर्शकके कमी नहि अछि। नेपालक मैथिल जत्त मैथिलीमे समाचार, गीत, आ परिचर्चा सुनि क सुसूचित होइत छैथ ततई भारत आ आन ठामक दर्शक मैथिली गीत आ संचारमाध्यममे मैथिलीक बोली सुनि हर्षित भेल करैत अछि।
मधेश स्पेशल नेपालक मधेशीके एकटा अन्तर्राष्ट्रिय संचारमाध्यममे मुंह खोलि क बजबाक अवसर देलकै, सेहो अपने भाषामे। नेपालक संचारमाध्यमसं सेहो कटल कट्ल रहबला मधेशके छोट छिन घटना सेहो प्रमुख समाचार बन लागल। मधेशीक मुद्दापर खुलिक बहस शुरु भ गेल। मधेशक नेता सेहो धोती कुर्ता पहिरिक काठमाण्डुएमे बैसि क कोनो टेलिभिजन पर प्रत्यक्ष रुपेँ जनतासँ बातचित कर लगला। टेलिभिजनमे जत्त मैथिली शुन्यप्राय छल ताहि अबस्थामे एक्कहिबेर एक घण्टा मैथिलीक कार्यक्रमके लोकप्रिय होब मे बेशी समय नइ लगलै। एखन इ कार्यक्रम दू बर्ष पुरा कर लागल अइ।
नेपाल 1 टेलिभिजन डिस टिभी आ टाटा स्काइपर उपलब्ध हएबाक कारणे इ देश विदेशमे रह बला मैथिललग सहजहिं पंहुच बनालेने अछि। एहिद्वारे लगभग ७० टा देशमे रहबला मैथिल भाषी मधेश स्पेशलके माध्यमसं मैथिलीमे सुचना आ मनोरन्जन ल रहल छैथ। मधेश स्पेशल मैथिली आ भोजपुरीक मिश्रित कार्यक्रम अछि। एहिमे मैथिली भाषाक गीत नादक अतिरिक्त भोजपुरीक चौकी तोड आ आधुनिक गीत सेहो प्रसारण होइ छै। ई कार्यक्रम तीन भागमे बाटल अछि। पहिलमे नेपाल आ अन्तर्राष्ट्रिय समाचार रहैछै त दोसरमे समसामयिक चर्चा(टक शो) आ तेसरमे मैथिली/भोजपुरी गीत।
दृश्य संचारमे मधेश स्पेशल मैथिलीके जगजियार करमे बड पैघ भूमिका निर्वाह क रहल अछि आ क सकैत अछि से कहनाई अतिशयोक्ति नई हएत। डोम कछ आ जट जटिनक नाचसं जं माटिक सुगन्ध लेब चाहैत हुवए त हुनका सभहक लेल मधेश स्पेशल सहायक भ सकैत छै।
मेधेश केन्द्रित कार्यक्रम होइतो इ मिथिलान्चलके सर्वाङिण विकासमे कत्तेक सहायक हएत से त आव बला दिने बताओत मुदा एतवा निश्चित जे टेलिभिजनमे मैथिलीक नियमित प्रसारणसं मैथिलके अपन बोली अपन भाषा याद दियबैत रहैतै।
नेपालक (किछु भारतक) मिथिला मैथिल मैथिलीक सामाजिक-आर्थिक-राजनीतिक-सांस्कृतिक समाचार
भाषा हित कि भोट्क लोभ
नयी दिल्लीक मैथिली भोजपुरी एकेडमीक अध्यक्ष एवं दिल्लीक मुख्यमन्त्री शीला दीक्षित मैथिली भोजपुरी एकेडमीकेँ आन एकेडमीसँ आगू बढल देखऽ चाहैत छी, से कहलनि अछि। मैथिली भोजपुरी एकेडमी द्वारा आयोजित भिखारी ठाकुरक विदेशिया नाटक मन्चन कार्यक्रममे दीक्षित ई बात कहलनि। मैथिलीक लेल अलग एकेडमीक माँगक प्रति दीक्षित कहलनि जे हमरा सभकेँ जोड़क बात करक चाही तोडक नञि। एकताक दोहाइ दैत मुख्यमन्त्री भने अलग एकेडमीक् बातसँ कन्नी कटने होथि मुदा मैथिली भाषा साहित्यमे लागल प्रबुद्धबर्ग मानैत छथि जे अलग एकेडमीसँ मात्र मैथिलीक वास्तविक विकास भऽ सकत। ओना एकेडमी भोट बटोरबाक साधन मात्र नञि बनए ताहि दिश सेहो ध्यान देब जरुरी अछि। एकेडमीक आयोजनमे ६ अगस्त मंगलक राति विदेशिया आऽ ७ अगस्त बुधक राति महेन्द्र मलंगियाक काठक लोक मन्चित कएल गेल छल। मैथिली भोजपुरी एकेडमी आन एकेडमीसँ आगू बढय से दीक्षितके कहब रहनि। सरकारी ढिलासुस्तीकेँ स्वीकारैत ओऽ एक दिन सबहक आवाज सुनल जायत, कहलनि। नव दिल्लीमे एकेडमी द्वारा आयोजित कार्यक्रममे भोजपुरी नाटक विदेशिया देखलाक बाद दीक्षित नाटक खेलनिहार रंगकर्मीकेँ प्रशंसा केने रहथि। नाटयशालामे भोजपुरी आऽ मैथिली भाषीक भीड़ लागल छल। तहिना मैथिली भोजपुरी एकेडमीक उपाध्यक्ष अनिल मिश्र, एकेडमी, विहारक समॄद्ध संस्कॄतिकेँ बखानैत एहन प्रस्तुति निरन्तर होइत रहत, से जनतब देलनि।
"हमर सिंहासन अटल अछि" मलंगिया
'जाधरि हमर कलम चलैत रहत ताधरि मैथिली नाटककारक रुपमे हमर ऊँचाइ धरि कियो नञि पहुँचि सकैत अछिए। ई सिंहनाद छनि मैथिलीक प्रख्यात नाटककार महेन्द्र मलंगियाक। समकालीन मैथिली साहित्यकारकेँ चुनौती दैत, ओ नाटककार अपन सिंहासन किनको बुते डोलाएल पार नञि लगतए से दाबी करैत छथि। मैथिली नाटककार महेन्द्र मलंगिया एखन मैथिलीक सभसँ लोकप्रिय आऽ ख्यातिप्राप्त नाटककारमे चिन्हल जाइत छथि। चुनौतीपुर्ण शैलीमे मलंगिया कहैत छथि, हमर हाथमे जाधरि कलम अछि, हम अपन स्थानपर टिकले रहब, हमर सिंहासन अटल अछि। मैथिली नाटकक भीष्मपितामह कहल जाए तँ केहन लगैए, ताहि जिज्ञासामे मलंगिया मुस्कियाइत कहलनि जे हमर नाटक लोककेँ पसिन छञि हमरा ताहि पर गर्व अछि, हम जाहि स्तरक नाटक लिखैत छी, तेहन रचना एखन नञि भऽ रहल छञि। ओऽ जनकपुरक रंगकर्मीक खुलिकऽ प्रशंसा करैत छथि। मैथिली रंगकर्ममे लागल जनकपुरक कलाकारक मलंगिया प्रसंशा करैत कहलनि, जनकपुरक कलाकारसँ बहुत आशा कएल जाऽ सकैत अछि। मैथिली नाटकमे शेक्सपियर कहल जाएबला मलंगिया ४ दशकसँ बेशी समय नेपालमे बिता देने छथि। ओऽ नेपालमे मैथिली साहित्यक संरक्षण लेल सन्तोषप्रद काज नञि भऽ सकल, बतौलनि। नेपालमे दोसर सभसँ बेशी बाजल जाएबला भाषा मैथिलीमे रंगकर्मक समयसापेक्ष बिकास नञि भऽ सकल मलंगियाक कहब छनि। लोकतन्त्र बहालीक बाद सेहो नेपाल सरकार मैथिलीक लेल किछु नञि कऽ सकल हुनक आरोप छन्हि। नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान द्वारा मैथिली भाषा, साहित्यक लेल भेल काजके ओऽ कौराके संज्ञा देलनि। प्रतिष्ठानद्वारा मैथिलीलेल भऽ रहल काज प्रति मलंगिया असन्तुष्टि ब्यक्त कएलनि। मैथिली रंगकर्ममे निरन्तर कार्यरत संस्थाकेँ सरकार दिशसँ कोनो तरहक सहयोग नञि भेट रहल बतबैत, ताहि प्रति खेद ब्यक्त कएलनि। सरकारी उपेक्षाक कारण सेहो मैथिली रंगकर्म ओझराहटिमे पडल, मलंगिया मानैत छैथ।
मैथिली साहित्यमे नाटककार आऽ निर्देशकक रुपमे ख्यातिप्राप्त मलंगिया रंगकर्मकेँ रोजीरोटीसेँ जोडल जाए, से कहैत छथि। जाऽ धरि रोजीरोटीसँ रंगकर्म नञि जुटत ताऽ धरि बिकास सम्भव नञि, मलंगिया स्पष्ट कहैत छथि। जनकपुरमे मिथिला नाटय कला परिषदसँ आबद्ध भऽ मैथिली नाटककेँ जन-जन धरि पंहुचएबाक अभियानमे लागल मलंगिया राजतन्त्रमे मैथिली भाषा संस्कृतिक संरक्षणक लेल कोनो काज नञि भेलाक कारणे सेहो मैथिली पछुआएल अछि, से कहलनि।
मैथिली भाषामे आम दर्शकक मोनमे गडि जाएबला नाटक लिखिकऽ मैथिली साहित्यक श्री बृद्धिमे योगदान देनिहार मलंगिया नाटककार नाटक लिखैत काल दर्शकक मानसिकता, उमेर , शिक्षा आऽ पेशाकेँ ध्यानमे राखए से सलाह दैत छथि। 'हम दर्शककेँ लक्षित कऽ नाटक लिखैत छी, तेँ हमर लिखल नाटक लोककेँ नीक लगैत छञि, मलंगिया अपन सफ़लताक रहस्य बतबैत कहलनि।
बिदेशिया नाटक
बिदेशिया घुरि जो
विदेश जएवाक बाध्यता समाजक एकटा कटु सत्य अछि। अपन गामघर छोडिकऽ कियो विदेश जाय नञि चाहै-ए, मुदा परिस्थितिक आगू ककरो किछु नञि चलए छञि। किछु एहने परिवेशकेँ पर्दापर देखेबाक प्रयास कएल गेल विदेशिया नाटकमे। मैथिली भोजपुरी एकेडमीद्वारा दिल्लीमे आयोजित विदेशिया नाटकमे किछु एहने देखल गेल। वियाह भेलाक किछुए दिनक बाद विदेशिया गाम छोडि दैत छञि, विदेश जाऽ कऽ पैसा कमाय लेल। गाम संगहि विदेशियाकेँ छुटि जाइत छञि, अपन नवकी कनियाँ, गामक संगी-साथी आऽ याद सेहो। ओ पाईक लोभसँ घर छोडने रहैया, मुदा ओऽ पाई तँ नईहे कमासकल शहरमे अपन जीवनके एकटा आओर साथी बनालैयऽ। एम्हर ओकर पहिल कनियां विदेशियाके बाट जोहैत रहैयऽ। विदेशियाक यादमे ओऽ कखनो बटुवाके पुछैयऽ तँ कखनो बारहमासा गबैयऽ। नाटकक निर्देशक संजय उपाध्याय विदेश जएबाक ग्रामीण प्रबॄतिकेँ सुखान्त बनेलहुँ से कहलनि। गामक सोझ आऽ सुशील कनियाकेँ छोडि विदेशिया विदेशमे रइम जाइयऽ। ओकरा आब शहरिया संगी निक लगै छइ, जे दुगोट बच्चाक माय सेहो अइ। विदेशिया अपना आपके बिसरि जाइयऽ। गामक कनिया नइ शहरक छम्मकछल्लो आब ओकर प्राण भऽ गेल छञि। एहिबीच भिखारी विदेशियाकेँ निन्नसँ जगबैत अछि। नाटकमे भिखारी बनल रंगकर्मी अभिषेक शर्मा नाटकक माध्यमसँ लोक अपन गाम घरके याद करलेल विवश भऽ जाइयऽ, से कहलनि। विहारक सुपौल जिलाक रंगकर्मी शारदा सिंह नाटकमे देखाएल गेल विषय बस्तु समाजक सत्य रुप रहल बतौलनि। विदेशिया गाम तँ घुरैयऽ मुदा असगरे नई चारि गोटेक संगे , दूटा बालगोपाल आऽ तकर माय। किछु झोंटाझोंटी आऽ कलहक बाद दु्नू सौतिन आऽ विदेशिया गामेमे रहऽ लगैयऽ। नाटक अन्ततः सुखान्त भऽ कऽ समाप्त होइत अछि। ई कथा गामसँ बाहर रहनिहार एकटा निम्न मध्यमबर्गीय युवककेँ जिनगीक मात्रे नञि अछि। बहुतो युवक गाम देहात छोडिते अपन माटि पानिकेँ बिसरि जाइत अछि। शरीरसँ मात्र नञि मोनसँ सेहो विदेशिया भेनिहारकेँ ई नाटक अपन गाम अपन वास्तविक पहिचानक याद दियबैत रहत।
आब चलू नेपाल दिस
सशस्त्रक सनसनी
मधेश एखन दू दर्जनसँ बेशीक संख्यामे रहल सशस्त्र समूहसँ आक्रान्त अछि। कहियो सशस्त्रक विरोधमे जनकपुरक जानकी मन्दिरमे पत्रकार रैली निकालैत अछि तँ कहियो सिरहाक कर्मचारी कार्यालयमे ताला लगाकऽ सशस्त्रक विरोध प्रदर्शन करैत अछि। तहिना सर्लाहीमे बस चालकक हत्या भेलासँ शुरु भेल यातायात बन्दसँ जनजीवन कष्टकर भऽ रहल अछि। मधेशक माँगकेँ अपन नारा बनाकऽ खुलल दू दर्जनसँ बेशी संगठनकेँ एखन मधेशमे तीब्र बिरोधक सामना करऽ पड़ि रहल छन्हि।
चालकक हत्या
सर्लाही। राजमार्गमे एखनो शान्ति सुरक्षाक अबस्था बेहाळे अछि। सर्लाही जिलामे हथियारधारी लुटेरा समुह ७ तारिखक रातिमे एकटा बस चालकक गोली मारि हत्या कऽ देलक। राजधानी काठमाण्डू जाऽ रहल बसक चालक कॄष्ण खवासक गोली लागि मॄत्यु भेल छल। पूर्व पश्चिम राजमार्ग अन्तर्गत सर्लाहीक जंगलमे राति ९ बजे ओऽ समूह बसमे लूटपाटक प्रयास कएने रहए। बस नञि रोकि भागऽ लगलाक बाद लुटेरा समूह गोली चलौने छल। गोली लागि घायल भेनिहार चालक खवासकेँ उपचारक बास्ते लालबन्दी अस्पताल लऽ जाइत अबस्थामे बाटेमे मृत्यु भेल, से स्थानीय प्रहरी जनौलक अछि। चालकक गोली लगलाक बाद खलासी बसकेँ नियन्त्रणमे लऽ कए दुर्घटना होबऽ सँ बचौने छल। प्रहरी घटनामे संलग्न होएबाक आशंकामे सात गोटेकेँ पकडलक अछि। दोसर यातायात व्यवसायी आऽ मजदुर चालक हत्याक बिरोधमे चक्काजाम जारी रखने अछि। सरकार समस्या समाधान लेल आगू नञि आएल, कहैत यातायात मजदूर देशव्यापि आन्दोलनक चेतावनी देलक अछि। मजदूर आऽ व्यवसायी पुर्वान्चलक तीन अन्चल आऽ जनकपुर अन्चलमे चक्काजाम कएलाक बाद जनजीवन प्रभावित भेल अछि। बन्दक कारण उपभोग्य वस्तुक अभाव होबऽ लागल अछि।
नेपालक (किछु भारतक) मिथिला मैथिल मैथिलीक सामाजिक-आर्थिक-राजनीतिक-सांस्कृतिक समाचार
"रे नोर एना तोँ नञि टपक"
कोशी नेपाल आऽ भारतक जनता लेल एकटा अभिशापसँ कम नञि। १८ अगस्तक कोशी नदी पुर्वी तटबन्धकेँ पश्चिम कुशहा लग तीन सय मीटर भत्थन करैत बाट बदलने छल। तञि के बाद नेपालक लगभग १ लाख जनता विस्थापित भेल। वएह पानि जहन बिहारमे आएल तँ आओर विकराल रुप ल लेलक। बिहारमे पानिसं ३० लाखसं बेशी जनता प्रभावित अछि, जाहिमे २० लाख कोशी इलाकाके अछि। मृतकक संख्या हजारोमे हेबाक आशंका कएल जाऽ रहल अछि। बिहार सरकारक तथ्यक अनुसार कोशी बाढिसँ ७ सय ७५ गामक २२ लाख ७५ हजार जनता प्रभावित अछि।
कोशीक कोप
चीनक तिब्बत उदगमस्थल रहल कोशी नेपाल होइत बिहार कुर्सेला धरि सात सय २० किलमीटर दुरी पार करैत गंगानदीमे मिलैत अछि। कोशी नदी वार्षिक ५० अरब घन लिटर पानि गंगानदीमे पंहुचाबै-ए। कोशी नदीक वर्तमान जलाधर क्षेत्र ९२ हजार ५ सय ३८ वर्ग फ़िट मिटर अछि, जाहिमेसँ ४१ हजार ३ सय ३३ वर्ग किलोमीटर नेपालक भीतर पड़ैत अछि। कोशी योजना संचालनक ४५ वर्ष होइतो कोशी पीडितक समस्या जहिनाक तहिना अछि।
नेपाल आऽ भारत दुनु देशकेँ एहि प्रश्नक उत्तर देव आवश्यक अछि- किए टुटल बान्ह ? बाढिसँ गरीब किसान भूमिहीन भऽ गेल अछि, ने लत्ता कपडा ने पेटमे अन्न आऽ ने पीबालेल पानि। किसान टकटक्की लगौने अछि कोशीक पानि पर, जे कखन घटत? जमिनदार पानिदार भऽ गेल, गाय महिष सबटा दहाऽ गेल छैक, आव बाँकी छञि मात्र जीवाक आश,,,,,।
दोष ककर
नेपाल आऽ भारत दुनु पक्ष एक दोसराके दोषारोपण कऽ रहल अछि। 'भारतीय प्राविधिक तटबन्ध मरम्मतिक लेल गेल छल मुदा, ओत्त काज करबाक वातावरण नञि बनलाक बाद तटबन्ध निर्माण नञि भऽ सकल, भारतीय पक्ष कहैत अछि। कोशी नदीक समझौता अनुसार नेपाल किछु नञि कऽ सकैत अछि, तेँ हमसभ मुक दर्शक छी, दोष भारतक अछि नेपाली पक्षके दाबी। भारतीय प्रधानमन्त्री डा मनमोहन सिंह बाढ़िक बिभीषिका देखिते राष्ट्रीय विपत्तिक घोषणा कऽ देलनि। बहुत रास पाई आऽ खाद्यान्न सहयोग करबाक आश्र्वासन सेहो। मुदा कोशी तटबन्ध टुटल किए, एकर सरकारी स्तरपर कोनो तरहक जाँच-बुझक आदेश नञि देल गेल अछि। हँ नेपालसँ एहि बिषयमे बातचीत करबालेल एकटा उच्चस्तरीय कमिटीक गठन कएल गेल अछि। ओऽ समिति की बातचीत करत आऽ की निष्कर्ष निकालत भविष्यक गर्भमे अछि।
क्षतिपुर्ति
कोशी समझौताक अनुसार कोशी तटबन्धक सभ तरहक काज भारतक जिम्मामे अछि। तटबन्धक मरम्मति मात्रे नञि तटबन्ध टूटलासँ होबऽ बला क्षतिपुर्ति सेहो भारते देत, से सन्धिमे उल्लेख अछि। नेपालक परराष्ट्रमन्त्री उपेन्द्र यादव कोशी समझौता अनुसार भारत सरकारकेँ सभ तरहक क्षतिपुर्ति देबऽ पडतै, से कहैत छथि। सन्धिक अनुसार इलाज, पुनर्वास आऽ खाद्यान्न जेहन सहयोग भारत सरकारकेँ करक चाही। भारतीय प्रधानमन्त्री आऽ विदेशमन्त्रीसँ सहयोगक आग्रह कएल गेल आऽ ओऽ सभ एहि प्रति सकारात्मक रहल, मन्त्री यादव कहलनि। आब देखऽ के बाँकी अछि, कोशी पीडित धरि कहिआ पडोसी देशसँ सहयोग पहुँचैत छञि।
नञि रुकल कटान
कोशी कटान नियन्त्रणलेल एखन धरि कएल गेल सभ प्रयास असफ़ल भेल अछि। कोशीक सभसँ महत्वपुर्ण मानल जाएबला स्पर बहऽ लागल अछि। नेपाल आऽ भारतीय प्राविधिक टोलीद्वारा कटान नियन्त्रणलेल कएल गेल प्रयास निरर्थक भऽ गेल अछि। संयुक्त प्राविधिक टोलीक निगरानीमे बीस हजार बोरा बालु, गिटी राखि कऽ नदिकेँ पश्चिम दिश घुमएबाक प्रयास निरर्थक भऽ गेल अछि। बर्षाक कारण सेहो बाढि नियन्त्रण दुरुह बनल अछि। नेपाल सरकार कोशी कटानसँ बिस्थापित भेनिहारक प्रति परिवार १५ हजार टका सहयोग देत। ई १५ हजार ब्यथित कोशीपीडितके कत्तेक सहयोग भऽ सकत ओऽ सहजहि अनुमान लगाओल जा सकै-ए।
किछु मरल बहुतो निपत्ता
सप्तकोशी नदी गामेक बाटसँ बह लगलाक बाद विस्थापित भेनिहारसभ एखनो अपन परिजनक खोजिमे अछि। हरिपुर, श्रीपुर आऽ पश्चिम कुशाहासँ विस्थापित सभ अपन घर परिवारक सदस्यके ढुंढि रहल अछि। सुनसरी प्रशासन एखनधरि ५ गोटेक मृत्युक पुष्टि कएलक अछि। मुदा एखनो चारि सय गोट सम्पर्कविहीन अछि।
दोसर दिश कोशी बाढ़िसँ विस्थापित आब पेटझरीक चपेटमे आबि गेल अछि। पानि गन्दा भऽ गेलाक बाद विस्थापित शिविरमे पेटझरी आऽ मुँहपेट जाएव विकराल रुप लऽ लेने अछि। विस्थापित एक बालक सहित दु गोटक पेटझरीसँ मृत्यु भेल अछि। मृत्यु भेनिहारमे श्रीपुर-३ के ५६ वर्षीयय तेजन सदा आऽ ६ वर्षिय रम्बा सदा अछि। सुनसरीक विभिन्न २९ शिविरमे एक हजार ५ सय गोट एखन बिमार अछि। अधिकांशमे पेटझरी, निमोनिया, बोखार आऽ छातीमे इन्फ़ेक्सन देखल गेल अछि। रोगीमेसँ १२ गोटक अवस्था चिन्ताजनक रहल, उपचारमे संलग्न चिकित्सक जनौलक अछि।
कत्तेक बिपत्ति !
बाढ़िसंगहि सप्तरी जिलामे सर्पदंश बढि गेल अछि। सर्पदंशसँ शुक्रक राति आओर एक गोटेक मृत्यु भेल अछि। भादव महिनामे सांप कटलासँ मरनिहारक संख्या ६ भऽ गेल स्थानीय जनस्वास्थ्य कार्यालय जनौलक। खेतमे काज कऽ रहल स्थानीय रामकृष्ण यादवकेँ सांप कटने रहन्हि। इलाजक लेल सगरमाथा अंचल अस्पताल लऽ जाइत काल हुनक मृत्यु भेल। एहिसँ पहिने फ़किरा ३ क ४५ बर्षीय रामअशिष यादव, पत्थरगाडा ७ क १४ बर्षिय बमभोला यादव आऽ महादेव ८क १२ बर्षीय घनश्याम इसरक मृत्यु भऽ चुकल अछि।
बिहारक बाध्यता
कोशीक जलस्तर बढ़लाक बाद बिहारक स्थिति आओर असहज भऽ गेल अछि। बिहार सरकार वायु सेनाक ४ हेलिकप्टर, ८ सय ४० नाव आऽ सेनाक मदतिसँ युद्ध स्तरमे राहत कार्य भऽ रहल बतौलक अछि। मुदा बाढिपीडित लाखो जनता एखनो बाढिमे फ़ंसल अछि। सरकारी सहयोग समेत अपर्याप्त रहल, बाढिपीडितक कहब छञि। बिहार सरकार एखन धरि कोशी क्षेत्रमे २८ आऽ समुचा राज्यमे ७६ गोटेक मृत्यु भेल जनौलक अछि। मुदा प्रभावित इलाकामे स्थानीयवासी बहुतो शव दहाइत देखल गेल कहैत अछि। बिहार सरकारक तथ्यांकमे कोशी बाढ़िसँ ७ सय ७५ गामक २३ लाख जनता प्रभावित भेल कहल गेल अछि।
बिछियाक आर्तनाद
पेटमे अन्न नईं, राहतलेल आकाशमे टकटकी लगौने आंखि, आङमे लत्ताकपडाक अभाव आ भोक्कासी ...। सभ अपन अपन पीडा सुना रहल अछि। पेटके राक्षस शान्त नई भेलाक बाद ओ त सौंसे आदमीएके खा लेलक। नवजात शिशु कत्तेक काल भुक्खे रहैत, ओकरा कोशीक कोरमे छोडिदेल गेल।
कोशी सन बेदर्दी जगमे कोइ नइ लघुनाटकमे किछु एहने देखल गेल। मैलोरंगक आयोजनमे दिल्लीमे सेप्टेम्बर १२ क' मन्चित लघुनाटकमे कोशीक बिभीषिका देखएबाक प्रयास कएल गेल। नाटकमे राहतलेल मारामारी कएनिहार जनता भुखसं मृत्युवरण करबाक बाध्यताके जीवन्त रुपमे प्रस्तुत कएल गेल। पीडितके रोदनसं दर्शक भावविह्वल बनल छल। मैलोरंग सेप्टेम्बर १२ सं १४ तारिखधरि मैथिली लोकरंग महोत्सव स्थगित कएलक अछि। कोशी क्षेत्रमे घुरैत मुस्कानकसंग महोत्सव आयोजन हएत मैलोरंग जनौलक अछि।
संघर्षक कठिन बाट
मैथिली साहित्यकार व्रजकिशोर बर्मा मणिपद्मक स्मृतिमे नयां दिल्लीमे सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजन कएल गेल। एहि कार्यक्रममे मैथिली नाटक मन्चन हएबाक संगहि मिथिलांगन संस्थाक स्मारिका सेहो विमोचन कएल गेल। मिथिलांगन साहित्यकार मणिपद्मक स्मृतिमे 'उगना हल्ट' नामक मैथिली नाट्क मन्चन कएने छल।
ब्रज किशोर बर्मा मणिपद्म मैथिली साहित्यक चर्चित नाम अछि। लोक साहित्यक संरक्षणमे हुनक योगदान उल्लेखनीय मानल जाईत अछि। इएह योगदानक सम्मान करैत हुनका मैथिलीक वाल्टर स्काट सेहो कहल जाईत छन्हि। लोरिक, राजा सल्हेश, नैका बन्जारा जेहन लोकगाथाक संरक्षण करबामे हुनक योगदान सराहनीय रहल कार्यक्रममे कहल गेल। मिथिलांगन एहिसँ पहिने सेहो मणिपद्मक स्मृतिमे विभिन्न कार्यक्रम आयोजन करैत आएल अछि। तहिना त्रैमासिक मिथिलांगन पत्रिका सेहो प्रकाशनके निरन्तरता देल गेल संस्था जनौलक अछि। उगना हॉ/ल्टक लेखक कुमार शैलेन्द्र आ निर्देशक संजय चौधरी छैथ। नाटकमे दिल्लीमे संघर्षरत मैथिली रंगकर्मीक जीवनक कटु सत्य देखएबाक प्रयास कएल गेल अछि। उगना हल्ट बिहारक मधुवनी जिलाक एक रेल्वे स्टेशनक नाम अछि , यद्यपि नाटकके परिवेश नयां दिल्लीक रंगकर्मीक अडडा मण्डी हाउसपर केन्द्रित अछि। स्थानीय पण्डौल आ सकरी बीचक स्टंशन अछि उगना हॉल्ट। नाटकमे मैथिली भाषा संस्कृतिक संरक्षणलेल अपस्यांत नवतुरियाक कथा ब्यथा समेटल गेल अछि। ओएह युवाक संघर्षक इतिबृत मे नाटक घुमैत अछि।। कियो संगीतकार बन' चाहैत अछि त कियो गीतकार, ककरो फ़िल्ममे हिरो बनबाक धुन सबार छइ त ककरो हिरोइन। अन्ततः कठिन संघर्षक बाद सभ अपन लक्ष्य प्राप्त करबामे सफ़ल होइत अछि। नाटकमे संगठने शक्ति अछि आ एहिँस सफ़लता पाबि सकैत छी से पाठ सिखएबाक प्रयास कएने छैथ नाटककार। छिरिआएल आ दिग्भ्रमित जँका बुझाईत पात्रक अभियान अन्तमे सफ़ल होइत अछि। अन्ततः नाटक सुखान्त अछि।
(विदेह पेटारसँ)
अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ।
नवेन्दु कुमार झा
समाचार वाचक सह अनुवादक (मैथिली), प्रादेशिक समाचार एकांश, आकाशवाणी, पटना। विदेह सम्मान- -श्री नवेन्दु कुमार झा केँ पहिल "विदेह मैथिली पत्रकारिता सम्मान भेटल छन्हि।
अस्तित्वक लेल संघर्ष करैत पटनाक विद्यापति स्मृति पर्व
मिथिलांचलक सांस्कृतिक धरोहर महाकवि विद्यापतिक जयन्तीक प्रतीक्षा मिथिलावासी वर्ष भरि करैत छथि। कार्तिक धवल त्रयोदशीकेँ प्रति वर्ष मनाओल जाएवला एहि वार्षिक उत्सवमे पूरा मनोयोगक संग मिथिलावासी शामिल होइत छथि। एहि क्रममे राजधानी पटनामे आयोजित होमएवाला विद्यापति स्मृति पर्वक प्रतीक्षा सेहो राजधानीक मिथिलावासीकेँ रहैत अछि। मुदा एहि वर्ष एहि आयोजनपर जेना ग्रहण लागि गेल अछि। बढ़ैत संसाधनक बावजूद आयोजक एहि सांस्कृतिक उत्सवक स्वरूप वर्ष-दर-वर्ष छोट कएने जा रहल छथि। ई आयोजन आब इतिहास बनबाक द्वारपर ठाढ़ अछि। पछिला चौबन वर्षसँ प्रति वर्ष आयोजित होमएवाला त्रिदिवसीय कार्यक्रम एहि वर्ष एक दिवसीय होएबाक संवाद अछि। पटनाक हार्डिंग पार्कसँ सचिवालय मैदान आ मिलर हाई स्कूल मैदान होइत ई आयोजन जखन भारत स्काउट मैदान धरि आएल ता धरि ई उम्मीद छल जे ई समारोह अपन पुरान गौरवकेँ फेरसँ प्राप्त करत मुदा जखन एहि समारोहक स्थान परिवर्तित कऽ कापरेटिव फेडरेशन परिसर आबि गेल तऽ स्पष्ट भऽ गेल जे आब आयोजक मात्र खानापूर्ति करबाक लेल एकर आयोजन करैत छथि। आ एहि बेरक सूचनापर गौर करी तऽ स्पष्ट होइत अछि जे आब एहि समारोहक आयोजन मात्र औपचारिकता रहि गेल अछि। कोसी क्षेत्रमे आएल बाढ़ि आयोजक सभकेँ एकटा बहाना बनि गेल अछि आ एहि बहाने एहि समारोहक गौरवपूर्ण इतिहासकेँ समाप्त करबापर लागल छथि।
बाढ़ि मिथिलांचलक नियति अछि। शायदे कोनो वर्ष होएत जखन कि एहि प्राकृतिक आपदाक सामना नहि होइत अछि मुदा एहि बेर कोसीमे आएल बाढ़िसँ आयोजक संस्था चेतना समितिक कर्ता धर्ताकेँ अपन गाम-घर दहाएल तँ हुनक दर्द जागि उठल आ कार्यक्रमक समय-सीमा घटा देलनि। दरभंगा, मधुबनी, मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी आदि मिथिलांचलक कतेको क्षेत्र सभ साल बाढ़िक मारि झेलैत अछि मुदा बिना रुकावट सभ साल तीन दिवसीय विद्यापति स्मृति पर्वक आयोजन होइत रहल अछि। ओहि क्षेत्र सभक चिन्ता समितिकेँ शायद नहि रहैत छल। ज्यो बाढ़िक समस्याक प्रति एतेक गंभीर छलाह तँ पूर्वमे कतेको बेर आएल बाढ़िक बाद एहि आयोजनकेँ छोट कएल जा सकैत छल से आइ धरि नहि भेल। ज्यो अहू बेर आयोजक एहि समस्याक प्रति गंभीर रहितथि तँ एहि समारोहक माध्यमसँ राजधानीक मिथिलावासीक सहयोग बाढ़ि पीड़ितक मदति लेल लऽ सकैत छलाह। एहन रचनात्मक डेग संस्था उठाएत से संस्थाक कर्ता-धर्ताक आदति नहि रहलनि अछि। एहिसँ समितिकेँ सामूहिक श्रेय भेटैत से तऽ संस्थाक महानुभाव लोकनिकेँ कतहु मंजूर नहि छलनि। ओ तँ व्यक्तिगत श्रेय लेबापर विश्वास करैत छथि।
दरअसल चेतना समितिक जुझारू पदाधिकारी सभमे आब काज करबाक चेतना नहि बचल अछि। नहि तँ ओ एहिपर जरूर चिन्तन करितथि जे एहि समारोहमे प्रतिवर्ष दर्शकक संख्या किए कम भऽ रहल अछि। जखन संस्थाक स्तरसँ दर्शककेँ जोड़बाक कोनो प्रयास नहि भऽ रहल अछि तँ एहिमे दर्शक दिससँ प्रयास होएबाक बात सोचब निरर्थक अछि। ओना आयोजक कतेको वर्षसँ एहि समारोहकेँ विराम देबाक प्रयासमे छथि। कखनो चुनावक बहाना बना तँ कखनो कानून व्यवस्थाक बहाने एहि कार्यक्रमक स्वरूपकेँ छोट क देलनि। एहि वर्ष तँ कोसीक विभीषिका तँ मानू हुनक सभक मनोनुकूल वातावरण दऽ देलक। प्रारम्भमे त्रिदिवसीय आयोजनक तैयारीक बाद एकाएक एकरा एक दिवसीय करब मात्र औपचारिकता लागि रहल अछि जाहिसँ कि जे किछु मैथिली प्रेमी छथि अगिला वर्शसँ अपनहि एहि कार्यक्रमसँ कटि जाथि आ दर्शकक अनुपस्थितिक बहाना बना कार्यक्रमकेँ बंद कऽ देल जाए। ई विडम्बना कहल जा सकैत अछि जे पटनामे शुरू भेल विद्यापति स्मृति पर्वक देखा-देखी प्रदेश आ देशक आन क्षेत्रमे वर्ष दर वर्ष पूरा उत्साहक संग आयोजित भऽ रहल अछि आ एहि ठामक आयोजनक अस्तित्वपर संकट आबि गेल अछि। वास्तवमे चेतना समिति आब किछु फोटोजेनिक चेहरा सभक अखाड़ा बनि गेल अछि जे एकर कार्यालय विद्यापति भवनकेँ अपन दलान बुझि अपनहिमे कुश्ती करैत रहैत छथि। कोसीक विभीषिकाक दर्द मठाधीश लोकनिक संग-संग सभ मिथिलावासीकेँ अछि। कोसीक बाढ़ि पीड़ितक दर्द एहि आयोजन माध्यमसँ सभ मिथिलावासीकेँ जोड़ि सामूहिक रूपेँ बाटल जा सकैत छल। ज्यो से नहि तऽ बाढ़ि पीड़ितक मदति लेल प्रदेश आ देशक कतेको क्षेत्रमे सामाजिक-सांस्कृतिक कार्यक्रमक कएल गेल आयोजन व्यर्थ छल।
मिथिलाक कतेको महान विभूति सभक प्रयासँ शुरू भेल राजधानीक ई सांस्कृतिक उत्सव पूरा देशमे एकटा महत्वपूर्ण स्थान रखैत अछि। एहि आयोजनकेँ इतिहास बनेबाक प्रयास करब चिन्ताक विषय अछि। पहिने कार्यक्रमक स्थान छोट करब आ आब एकर समय सीमा घटएलासँ राजधानीक मिथिलावासी मर्माहत छथि। एकरे परिणाम अछि जे छोटे स्तरपर सही राजधानीसँ सटल दानापुर आ राजीवनगरमे किछु वर्षसँ आयोजित भऽ रहल विद्यापति पर्व आब लोकप्रिय भऽ रहल अछि। आब राजधानीक मिथिलावासी चेतना समितिक बदला एहि दुनू स्थानपर होमएवाला आयोजनक प्रतीक्षा करैत छथि। शायद अहूसँ चेतना समिति सचेत होएत आ विद्यापति स्मृति पर्वक अपन पुरान गौरवकेँ पुनर्स्थापित करबाक प्रयास करत।
(विदेह पेटारसँ)
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श्याम सुन्दर शशि
कतारक मैथिल भेड़ा चरवाह
कतारक सदरमुकाम दोहासँ लगभग एक सय किलोमीटर दूर जमालिया स्थित मरुभूमिक छातीपर बनाओल गेल भेड़ाक गोहियाक आगू ठाढ़ भऽ एक गोट युवक सिटी बजा रहल छल। महाभारतकालीन कृष्ण जकाँ। जनु अपन गोप आ गोपीकेँ लग बजेबाक उपक्रम कऽ रहल हो। मुदा एहि मरुभूमिमे ने गाई अएबाक कोनो सम्भावना छलै आ ने गोपी। मुदा बकरी आ भेड़ा धरि अवश्य आबि गेल ओकर सिसकारी सुनिकए। दिनभरि ५० डिग्रीक ताप छोड़ि स्वयं थकित सुरुज भगवान संध्या रानीसँ रसकेलि करबाक धुनमे पश्चिमाचलगामी वाट पकड़ि लेने छलाह। पश्चिमसँ आवएवला सेनुताएल प्रकाश मरुभूमिक वालुपर पड़ि मलिछाह आकृति बना रहल छल। मरुभूमि पिलिया ग्रस्त रोगी जकाँ बेजान देखना जाऽ रहल छल। पछिया हवा सांय सांय कऽ रहल छल। हावाक गतिसंग वालुक छोट-छोट कण उड़ि-उड़ि राहगीरकेँ घायल बना रहल छल। बूझि पड़ैत छल जे प्रलयकेर पूर्व संकेत हो। चारुकात वियावान मरुभूमि आ एहिमे उगल एक आध बबूरक पौध। हम बेर-बेर सोचैत रहैत छी जे धन्य बबूर, ऊँट आ सार्कदेशक दुखिया मजुरसभ जे एहि भूमिकेँ धरती होएबाक ओहदा प्रदान करैत छैक। अन्यथा...??
मुदा ओऽ युवक शान्त छल। एक क्षणक बाद सुरुज अस्त भऽ जएतै, सगर सन्सार अन्हार भऽ जएतै आ सयौ विगहामे पसरल मरुभूमिपर कारी रंगक चादर ओछा जाएत। ओऽ अन्हार होएबासँ पहिनहि अपना अधकि भेड़ा आ बकरी गोहियामे घुसियावए चाहैत छल। कर्तव्य परायण मनुपुत्रक रूपमे अपन दायित्व निर्वाह करए चाहैत छल।
एहि तरहेँ अपन ईसारापर कृष्ण जकाँ भेड़ा-बकड़ीकेँ नचावएवला युवक के नाम छल महेन्द्र कापर। नेपालक सिरहा जिल्लाक कमलाकात भेड़िया गामक ई मैथिल युवक, विजुली, पिवाक पानि, सड़क आ स्वास्थ्यादि सुविधासँ विहीन एहि मरुभूमिमे गत एक वर्षसँ एहिना भेड़ा वकरी चड़वैत अछि। महेन्द्र कापर मात्र नहि, एहि मरुभूमिक विभिन्न भागमे बनाओल गेल विभिन्न भेड़ा, बकड़ी आ ऊट बथान तथा लगाओल गेल वगैचामे हजारौं नेपाली, भारतीय, वंगलादेशी, श्रीलंकन आ सुडियन मजुरसभ काज करैत अछि। अपना सभ दिस एक गोट कहबी नहि छैक जे, “जएवह नेपाल, संगहि जएतह कपार”। तहिना ई युवक सभ अपन करम भोगि रहल अछि। ओऽ सभ अबैत काल जे दोहा देखने छल, चकमक विजुलीवत्ती देखने छल आ चिक्कन चुनमुन फोरलेन सड़क देखने छल से घुरैत काल फेर देखत। ओकरा सभक वास्ते दोहा सहर दिल्ली दूर छैक।
महेन्द्र जमालियाक एहि अन्कन्टार मरुभूमिमे गत एक वर्षसँ काज करैत अछि। ओकरा जिम्मामे दू सय भेड़ा आ बकड़ी छैक। हमरा सभकेँ देखिते ओकर आँखिमे विशेष प्रकारक चमक व्याप्त भऽ गेलै, मुखमण्डलपर खुशीक रेखा नाचए लगलैक। साँझ पड़ि रहल छैक ओकरा लालटेम नेसवाक छैक, रातुक खाना बनेवाक छैक आ खुला आकाशक नीचाँ तरेगन गनैत राति बितेवाक छैक। गत एक वर्षसँ महेन्द्रक ई दैनिकी बनि गेल छैक। ईजोरिया रातिक चानकेँ देखि ओऽ अतिशय प्रसन्न होइत अछि, “ई चान हमरो बाऊ आ माय आउर सेहो देखैत होतै नञि”? ओकर निश्चल प्रश्न हमरा भावुक बना देने छल।
ओऽ भेड़ा आ बकरीकेँ गोहियामे गोतैत अछि। पठरूसभकेँ दूध पियबैत अछि। चारा रखैत अछि आ चैन भऽ हमरा सभसँ गप्प करवा वास्ते बैसि जाइत अछि। ओऽ एक वर्ष पूर्व कतार आएल छल। मानव तस्करसभ ओकरा कहने रहैक जे वगैचाक काज छैक। ओऽ सोचने रहय जे फलफूलमे पानि पटाएव, रोपव उखारव आ रियाल कमाएव मुदा से भेलै नहि। ओऽ भेड़ा चरवाह बनि कऽ रहि गेल। असलमे महेन्द्र अपने निरक्षर अछि। ओकर कतार आगमनके उद्देश्य छलै गाममे घर बनाएव आ बेटा-बेटीकेँ बोर्डिंग स्कूलमे पढ़ाएव। मुदा ओकर एक वर्षक श्रमसँ ई संभव नहि भऽ पाओल छैक। एक वर्षमे तँ महाजनकेँ ऋणो नहि फरिछाओल छैक। एहि वास्ते ओकरा आओर दू वर्ष एहि मरुभूमिक वालुकेँ फाकय परतैक। अवैत काल दलाल ओकरासँ ७५ हजार रुपैया लेने रहैक। जे ओऽ महाजनसँ ऋण लऽ कऽ चुकता कएने छल।
जहन महेन्द्रक गप्पक बखारी खुजलै तँ फेर बन्द होएवाक नामे नहि लैक। ओकरा तँ ओहि गोहियामे राति बितैवाक छलै मुदा हमरा सभकेँ सय किलोमीटर दूर दोहा अएवाक छल। हमरा सभक धरफड़ीकेँ ओऽ अकानि गेल छल। कहलक सर, कहियोकाल अवैत जाइत रहब। भेड़ा बकड़ी संगे रहैत-रहैत ओहने भऽ गेल छी, देखियौ चाहो पानिक लेल नहि पुछलहुँ। आ कपड़ा लपेटल एकगोट पानिक बोतल आगाँ बढ़ा देलक। “हमरा सभक फ्रिज बुझू कि एयर कन्डीशन ईहे अछि”।
गर्मीसँ सुखाएल कण्डकेँ पानिसँ भिजाओल आ अपन गन्तव्य दिस आगाँ बढ़ि चललहुँ। लगभग दश किलोमीटर वाट तय कएलाक बाद हमरा लोकनि जमालिया नगरमे पहुँचलहुँ। मुसलमान धर्मावलम्बी सभक रोजा खोलवाक समय भऽ गेल रहै। सड़क कातमे बनाओल गेल चबुतरापर नाना प्रकारक व्यंजन साँठल जाऽ रहल छल। लोक विस्मील्लाह करवालेल तैयार छलाह। हमरा मोन पड़ल महेन्द्रके गोहियामे राखल खवुज (कतार सरकारक सस्ता दरक रोटी) आ प्याउजक धेसर। एसगर महेन्द्र एखन नून, मिरचाई आ तेल प्याउजक संग खवुज दकरि रहल हएत। एतए ओकरेद्वारा पोसल गेल खस्सीक विरयानीक स्वाद लऽ रहल अछि मालिक आउर।
दोहा, कतार, जमलिया।
(विदेह पेटारसँ)
अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ।
डॉ कैलाश कुमार मिश्र
यायावरी
नॉर्थ कछार हिल्स: धरतीक नुकाएल स्वर्ग –डॉ कैलाश कुमार मिश्र
-हमर अंग्रेजीमे लिखल लेख पढ़ि लोक सभ हमरासँ मैथिलीमे लिखबाक हेतु अनुरोध करैत छथि। स्पष्ट कए दी जे अंग्रेजी हमर व्यवसाय केर भाषा थिक। कहियो मिथिलामे नहि रहलहुँ, संस्कृत आ सोतियामी मैथिली नहि तँ पढ़लहुँ आ ने लिखलहुँ। तञि मैथिलीमे लिखक कल्पना जखने करैत छी तँ हाथ काँपय लगैत अछि। तीन वर्ष पूर्व डॉ विश्वनाथ झा अपन त्रैमासिक पत्रिका रचना हेतु लिखबाक लेल भावनात्मक रूपेँ हमरा बाध्य कऽ देलन्हि। डराइत-डराइत हम रचनामे “यायावरी” नामसँ अपन यात्रा-वृत्तान्त लिखनाइ प्रारम्भ केलहुँ। पाँच अंकमे लगातार लिखलाक बाद कार्यक अत्यधिक व्यस्तताक कारणेँ यायावरी लिखनाइ बन्द कऽ देलहुँ। घुमब आ अंग्रेजीमे लिखबसँ समय कहाँ बचैत अछि।
एम्हर नौ-दस माससँ गजेन्द्र बाबू अपन पत्रिकाक हेतु पुनः मैथिलीमे लिखबाक हेतु कहि रहलाह अछि। अतेक चेरियेलन्हि जे अन्ततः यात्रा-वृत्तान्तक “यायावरी” प्रारम्भ कऽ रहल छी। पाठक लोकनिसँ नम्र निवेदन जे हमर लेखक विषय आ वर्णनकेँ पढ़थि आ भाषा-विन्यासक गलतीपर बेशी ध्यान नहि देथि।
यायावरीक प्रारम्भ हम असम केर एक छोट भव्य, रम्य, आकर्षक, कठिन परन्तु अनेक रंग आ उल्लाससँ भरल भूखण्ड, नार्थ कछार हिल्ससँ कऽ रहल छी।
अपन संस्था –इन्दिरा गान्धी राष्ट्रीय कला केन्द्रक सदस्य सचिव डॉ कल्याण कुमार चक्रवर्ती महोदय केर निर्देश एवं कार्यशैलीसँ प्रभावित भऽ हम समस्त उत्तर-पूर्व भारत एवं सिक्किममे विभिन्न क्रियाकलाप प्रारम्भ केलहुँ, जाहिसँ स्थानीय संस्कृति आ विरासत केर रक्षा कएल जा सकय। असममे कार्यक श्रीगणेश हमरा लोकनि “श्रीमंत शंकरदेव कला क्षेत्र” गुआहाटी केर सचिव श्री गौतम शर्माक संग कएल।
लगभग ६४ बीघा पहाड़ी धरतीमे बनल श्रीमंत शंकरदेव कलाक्षेत्र बड्ड रमनगर जगह बुझना गेल। जे कियो गुआहाटी घुमए जाथि आ हुनका कलासँ थोरेकबो प्रेम होइन तँ श्रीमंत शंकरदेव कलाक्षेत्र अवश्य जाथि, ई हमर निवेदन। कलाक्षेत्रमे पानिक फब्बारा, फुलबारी, विशाल आ कलात्मक अनेको भवन, दू टा अतिथि गृह, आर्टिस्ट विलेज; कलाकार सभकेँ रहबाक हेतु डॉरमेटरी; संग्रहालय, कला दीर्घा, बच्चा सभक लेल टॉय रेल एवं अन्य व्यवस्था; असम केर इतिहासक सम्बन्धमे “लाइट एण्ड साउंड” कार्यक्रम; पुस्तकालय, शिवसागर जिलाक ऐतिहासिक रंगघर केर रिप्रोडक्शन इत्यादि बरवश कुनो घुमए बलाकेँ मोन मोहि लैत छैक।
असम केर अधिकांश ऑफिस आ घरसभमे लोक अपन जुत्ता-चप्पल आदि घरक बाहरे खोलि प्रवेश करैत छथि। हमहूँ एहि परम्पराक पालन जखन-जखन असम जाइत छे, तखन-तखन करैत छी।
स्पष्ट कऽ दी जे श्रीमंत शंकरदेव कलाक्षेत्र सोलहम शताब्दीक महान वैष्णव सन्त शंकरदेव केर नामपर असम राज्य सरकार, भारत सरकारक आर्थिक सहायतासँ समस्त उत्तर-पूर्व भारत, विशेषरूपेण असम केर संस्कृति, विरासत तथा गौरवक संरक्षण एवं सम्वर्धन करबाक दृष्टिसँ बनल छैक।
शंकरदेव जातिसँ कायस्थ छलाह। श्री बाल्मीकि प्रसाद सिंह जे असम काडर केर आइ.ए.एस.पदाधिकारी छलाह; बादमे भारत सरकारक गृह सचिव भेलाह आ अन्ततः विश्वबैंक केर कार्यकारी निदेशक पदसँ अवकाश प्राप्त कएलन्हि, हमरा कहलाह जे शंकरदेव मैथिल छलाह। हुनकर पितामह मिथिलासँ असम प्रवास कऽ गेलथिन्ह। पञ्जीसँ ईहो पता चलैत छैक, जे शंकरदेव तँ नहि परन्तु हुनकर पिता तीन-चारि बेर मिथिला आयल छलाह। एहि बातक एतय उल्लेख करब केर पर्याय ई जे एहि विषयपर गहन शोध करबाक आवश्यकता थिक। यदि ई बात प्रमाणित भऽ गेल जे शंकरदेव मैथिल छलाह तँ आइ हमरा लोकनि विद्यापतिक मैथिल होएबापर गर्व करैत छी, तहिना शंकरदेवोपर गर्व करब। हमरा हिसाबे तँ प्रबुद्ध मैथिल सभ बिहार सरकारसँ शंकरदेवपर एक गहन शोध करबाक परियोजना प्रारम्भ करबाक हेतु निवेदन करथि। गजेन्द्रजी एहि दिशामे आगाँ बढ़थि तँ नीक बात। संयोगसँ वाल्मीकि बाबू आइ-काल्हि सिक्किम प्रदेशक राज्यपाल थिकाह। हुनकर मदतिसँ परियोजनाक प्रारम्भ कएल जा सकैत अछि। ओऽ हमरा कतेको बेर एहिपर कार्य करक हेतु कहि चुकल छथि। एक समय एहनो छलैक जखन बंगाली सभ विद्यापतिकेँ बंगाली बुझैत छलाह। परन्तु आब प्रमाणित भऽ गेल जे विद्यापति मैथिल छलाह। यदि एहने किछु सबरा परम्परा केर जनक श्रीमंत शंकरदेवक उतेढ़पोथीसँ चलि जाय तँ बुझू जे हमरा लोकनि धन्य भऽ जाएब।
श्रीमंत शंकरदेव कलाक्षेत्रक सचिव गौतम शर्मा आ सुलझल व्यक्ति छथि। लगभग पचास वर्षक गौर वर्ण आ मध्यम कद-काठीक आकर्षक व्यक्तित्व। स्थिर चित्त। प्रथम दृष्टिमे लागत जे ओहिना कियो छथि। परन्तु मुदा डायनेमिक लोक। कलाक्षेत्रक १२५ आदमी हुनकर इशारापर नचैत रहैत अछि। सदिखान ओऽ अपन सहयोगी सभकेँ परिवारक सदस्य जेकाँ स्नेह करैत छथि।
गौतम शर्माक सहयोगक कारणेँ हमरा लोकनि गुआहाटी आ तेजपुरमे बहुत सफलतापूर्वक अनेक कार्यक्रम कऽ चुकल रही। हमरा लोकनि असम केर किछु एहन क्षेत्रमे ओहि क्षेत्रक संस्कृति आ विरासतपर कार्य करए चाहैत रही, जाहिपर विशेष कार्य नहि भेल हो। शर्माजीसँ पता चलल जे सांस्कृतिक दृष्टिएँ असम प्रदेशकेँ मोटा-मोटी चारि क्षेत्रमे बाँटल जा सकैत अछि:
१.अपर असम
२.लोअर असम
३.बराक घाटी
४.नॉर्थ कछार घाटी
शर्माजीसँ इहो पता चलल जे नॉर्थ कछार हिल्स सांस्कृतिक वैविध्यतासँ भरल अनुपम स्थान थिक, जाहिपर कोनो विशेष कार्य नहि भेलैक अछि। परन्तु ई घाटी उपद्रव, विभिन्न घटना, बन्द आदिक कारणेँ बेशी जानल जाइत अछि। लोक सभ सामान्यतया एतय जाएसँ बचए चाहैत छथि। मुदा सौन्दर्य आ सांस्कृतिक विभिन्नताक कारणे ई थिक असम केर शृंगार-नकमुन्नी।
शर्माजीक बात सुनि हमरा मोनमे ई भावना प्रबल भऽ गेल जे नॉर्थ कछार घाटीमे अवश्य कार्य करब।
गौतम शर्मा हमर मनोदशाकेँ बुझैत कहलाह: “कैलाशजी, अगर अहाँ एतए कार्य करए चाहैत छी तँ हम व्यवस्था कए देब। एतए केर जिला अधिकारी आ नॉर्थ कछार घाटी ऑटोनोमस काउन्सिल केर प्रिंसिपल सचिव अनिल कुमार बरुआ हमर मित्र छथि। एस.पी.केँ हम सेहो जनैत छियन्हि। ऑटोनोमस काउन्सिल केर संस्कृति विभागक अधिकारीगण हमरा लग बराबर अबैत रहैत छथि। सभ कियो मदति करताह।
गौतम शर्माक बातसँ हमर मोन प्रसन्न भऽ गेल। तुरतहि डॉ कल्याण कुमार चक्रवर्तीसँ अनुमति लए २३ नवम्बर २००७ ई. सँ ८ दिनक संस्कृति एवं विरासत केर प्रलेखन केर कार्यक्रम नॉर्थ कछार धारी केर मुख्यालय हाफलौंगमे करबाक प्लान बना लेलहुँ। ई कार्यक्रम गौतम शर्माक सहयोगसँ करक छल। तदनुसार पूर्व निर्धारित् योजनाक अनुसार हम २१ नवम्बरकें साँझे दिल्लीसँ सँझुका हवाई-जहाजसँ गोवाहाटी पहुँचि गेलहुँ। गुआहाटीसँ हाफलोंग केर दूरी सड़कमार्गसँ २६१ किलोमीटर छैक। हमरा लोकनि (हम आ शर्माजीक ३ सहयोगी) टाटा सूमो (जीपसँ) २२ नवम्बरक साढ़े चारि बजे प्रातः गुआहाटीसँ हाफलौंगक लेल प्रस्थान कऽ देलहुँ। शर्माजी बड्ड पारिवारिक व्यक्ति छथि। ओऽ पूरा टीमक लोक सभक लेल भोजन, टेन्ट, जलखै, जेनरेटर आदिक व्यवस्था गुआहाटीसँ कए ट्रकमे लादि हॉफलोंग लऽ गेलाह।
समय दुर्गापूजाक छलैक। रास्तामे अनेक ठाम स्थानीय युवक सभ हमरा लोकनिकेँ चन्दा लेल रोकैत रहल। एक ठाम हमरा लोकनि केर राशन-पानि आ करीब २५ आदमीसँ भरल बड़का बसक चक्का सड़कक कात माँटिमे धसि गेल। चारि घन्टाक इन्तजारक बाद सेनाक सहायता लए चक्काकेँ दलदलसँ बाहर निकालल गेल। अन्ततः साढ़े एगारह बजे रातिमे हाफलौंग पहुँचलहुँ। मोनमे डर छल। हेबो किएक नहि करैत! हमरा सभकेँ अएबासँ दू दिन पहिने पाँच आदमीक बीच हाफलौंग शहरमे गोलीसँ मारि देल गेल रहैक।
खैर! शर्माजीक प्रयास आ डॉ के.के.चक्रवर्ती जीक असम केर मुख्य सचिव केर नाम लिखल चिट्ठीक कारण हमरा हाफलौंग सर्किट हाउसमे रहबाक व्यवस्था भऽ गेल। सर्किट हाउस शहरक सभसँ ऊँच स्थानपर बनल अंग्रेजी हुकुमतक समयक भव्य मकान छैक। एतएसँ प्रकृति केर अवलोकन तथा समस्त हाफलौंग शहर एवं अगल-बगलक इलाकाकेँ देखल जा सकैत अछि।
हमर कोठरी काफी पैघ आ साफ सुथरा छल। हँ, पानिक कनिक दिक्कत अवश्य छलैक। कपड़ा बदलिते सुति रहलहुँ। भेल जे रातिमे भोजन नहि करब। परन्तु गौतम शर्मा कतऽ मानऽ बला छलाह! कनिकबे कालक बाद एक स्थानीय कलाकारकेँ लए आबि गेलाह। हम शिष्टतावश नहिओ चाहैत बैसि रहलहुँ। शर्माजी कहलन्हि, “जल्दी चलू। भोजन तैयार अछि”। नॉर्थ कछार हिल्स ऑटोनोमस काउन्सिल केर कला एवं संस्कृति विभागक निदेशक श्री लंगथासा सेहो शर्माजीक संग छलथिन्ह। हुनके प्रयाससँ संस्कृति भवन केर प्रांगणमे हमरा लोकनिकेँ कार्यक्रम करबाक अनुमति भेटल छल। लंगथासा उदार आ संस्कृति प्रेमी छथि। स्वयं दिमासा जनजातिक छथि। कहलन्हि “हमरा सभ लेल ई गौरव केर बात थीक जे अहाँ लोकनि दिल्लीसँ आबि एहि इलाकामे जतए कियोक नहि आबए चहैत अछि, अयलहुँ अछि आ हमरा लोकनिक संस्कृति एवं धरोहरक रक्षाक प्रति कृतसंकल्पित छी। एतए तँ ओना असम राइफल्स, सैनिक, पुलिस आदिक जमघट लागल रहैत अछि, परन्तु संस्कृति आ विरासतक चिन्ता ककरा छैक? अहाँ सभकेँ केना धन्यवाद दी”।
हम लंगथासा महोदय दिस तकैत बजलहुँ: “अहाँ सभ यदि चाही तँ हमरा लोकनि एहि क्षेत्रक सांस्कृतिक धरोहरकेँ संरक्षण एवं संवर्धनक हेतु बेर-बेर आएब”।
हमरा बातपर उत्साहित भऽ लंगथासाजी बजलाह: हमरा लोकनि सभ तरहक सहयोग करबाक हेतु तैयार छी। एतय केर तमाम अलगाववादी, सरकार विरोधी जत्था समूह संस्कृति रक्षणक विरोधी नहि थिक। तमाम लोसभ अहाँक निर्णयसँ प्रसन्न अछि। जावत धरि अहाँ सभ एतए रहब तावत धरि अतए कुनो मार-काट नहि हैत। अहाँ जे जाहि तरहक स्थानीय सहयोग चाही, हमरा लोकनि करबाक हेतु तत्पर छी”।
एकर बाद हमरा लोकनि रात्रिक भोजन हेतु विदा भेलहुँ। चटगर भोजन-भात, माछ, दालि, सजमनि केर तरकारी, सलाद, मिठाई, चटनी- केलाक बाद पुनः सर्किट हाउस आबि सुतबाक तैयारीमे लागि गेलहुँ। सुतएसँ पहिने अपन पत्नीकेँ दूरभाषसँ आश्वस्त कए देलियन्हि। जे चिन्ताक कोनो बात नञि। हम एतए ठीक छी”। एकर तुरत बाद सुति रहलहुँ।
अगिला दिन प्रातः पाँच बजे उठि बाहर अएलहुँ तँ मनोरम दृश्य देखि मोन मस्त भऽ गेल। सर्किट हाऊससँ एना बुझना गेल जेना सुरुज अपन लालिमा लए लाल गेन जकाँ उगैत छथि। हरियर जंगल, कलकल करैत छोट परन्तु घुमावदार नदीक प्रभाव, दूरमे बनल जंगलक मध्य आदिवासी सबहक छोट-छोट घर, सभ किछु मनमोहक लगैत छल।
किछु कालक बाद गौतम शर्मा सम्वाद पठओलन्हि जे हमरा लोकनिक कार्यक्रम साँझ ६ बजे प्रारम्भ हैत। किछु कालक बाद सत्यकाम आ कुशा महन्त किछु स्थानीय लोक संग हमरा लग आबि कहलन्हि जे खाली समयमे हॉफलौंग आ अगल-बगलक क्षेत्रकेँ देखबाक चाही। हमरा ई विचार नीक लागल। तुरत तैयार भऽ गेलहुँ।
स्थानीय लोकसभसँ पता चलल जे हाफलोंग मूलतः “हंगक्लौंग” सँ बनल छैक जकर अर्थ थीक सम्पन्न आ रत्नगर्भा धरती। बादमे किछु दोसर विद्वान लोकनि कहलन्हि जे “हॉफलौंग” शब्द दिमासा जनजातिक शब्द “हाफलाऊ” (HAFLAU)क विकृत रूप थीक। “हाफलाऊ” शब्दक अर्थ भेल वाल्मीक पहाड़ी (Ante hill)। हाफलौँग शहरक निर्माण अँग्रेज प्रशासन द्वारा १८९५ ई. मे बोराइल रेंजपर एकटा छोट छिन हिल स्टेशनक रूपमे कएल गेलैक। प्रारम्भमे चीर, देवदारक पाँतिसँ लागल गाछ, नौ छेदक गोल्फ कोर्स, छोट परन्तु आकर्षक आ कलात्मक बंगला, हाफलौंग लेक, रेलवेक कर्मचारी सभ लेल स्टाफ क्वार्टर, छोट बजार, रेलवे स्टेशन आदि सुविधाक संग एहि शहरक विकास प्रारम्भ कएल गेलैक।
अंग्रेज सबहक हिम्मतिक प्रशंसा करए पड़त। ३६ खोह (tunnels) कऽ बना रेल लाइन लऽ गेनाइ ओहि जमानामे अर्थात् १८९५-९८ मे की छोट बात छैक? रेलवेक निर्माण कार्यक हेतु ठीकेदार, मजदूर, कर्मचारी, व्यापारी आदि सभ उत्तर-प्रदेश, बिहार, बंगाल आ असम केर अन्य स्थानसँ आनल गेल। पुनः आपसमे वार्तालापक हेतु एक नव तरहक बजारु हिन्दी विकसित कएल गेलैक। एहि हिन्दीकेँ हॉफलौंग-हिन्दी कहल जाइत छैक। ई हिन्दी व्याकरणक निअमक पालन स्वतंत्र भऽ करक अधिकार दैत छैक। हाफलौंग हिन्दी रोमन लिपिमे लिखल जाइत छैक। स्थानीय बुद्धिजीवी लोकनिक कठिन संघर्षक फलस्वरूप आइ-काल्हि हॉफलौंग हिन्दीक मान्यता साहित्य अकादमीसँ भऽ गेल छैक।
नार्थ कछार हिल्स असम केर बहुरंगी चुनरी थीक। एतए निम्नलिखित एगारह जनजातिक लोक रहैत छथि:
१. दीमासा (Dimasa or Cachari)
२. ह्मार (Hmar)
३. जेमि नागा (Zeme Naga)
४. कुकी (Kuki)
५. बंइते (Baite)
६. कार्बी (Karbi)
७. खासी अथवा प्नार (Khasi or Pnar)
८. ह्रांगखल (Hrangkhals)
९. वइफी (Vaiphies)
१०. खेलमा (Khelma)
११. रोंगमई (Rongmei)
एकर अतिरिक्त अन्य समुदाय जेना कि बंगाली, असमी, नेपाली, मणिपुरी, मुसलमान, देसवाली आदि सेहो एतए रहैत छथि। सभ समुदायक बीच हमरा भावनात्मक एकताक कड़ी बुझना गेल। भारतक अनेकतामे एकताक स्वरूप बुझाएल जेना अपन मनिएचर धारण कए एहि छोट धरामे मोडेल बनि “संगे-संगे चली”, “संगे-संगे खाई”, “संगे-संगे रही” केँ चरितार्थ करैत छल।
स्वतन्त्रता प्राप्तिक बाद भारतक अन्य शहर जकाँ हॉफलौंग सेहो शनैः-शनैः विकसित भऽ रहल अछि। १९७० ई. मे एकरा जिलाक मुख्यालय बना देल गेलैक। आब नॉर्थ कछार हिल्स ऑटोनोमस काउन्सिल केर मुख्यालय, विभिन्न सरकारी विभागक दफ्तर आ मकान, आवासीय परिसर, पार्क, जेहल, खेल परिसर आ मैदान, दू टा रेलवे स्टेशन, सिविल अस्पताल, प्राइमरीसँ हाइयर सेकेण्डरी स्तर केर विभिन्न विद्यालय, सभ सुविधासँ परिपूर्ण सरकारी महाविद्यालय जाहिमे कला, विज्ञान एवं वाणिज्य संकाय केर अधिकांश विषयक पढ़ाई केर सुविधा सहजतासँ उपलब्ध छैक; पानिक सुविधा, डाक, टेलीग्राम, टेलीफोन आदिक सुविधा, बैंक, चर्च, मन्दिर, मस्जिद, पुस्तकालय अनेक तरहक सामाजिक-सांस्कृतिक क्रिया-कलापमे संलग्न संस्था; सिनेमा हॉल, बस स्टेण्ड आदि सुविधासँ भरल अछि।
अगर रेलसँ हाफलौंग आबय चाही तँ गुआहाटीसँ नॉर्थ प्रन्टीयर हिल सेक्शन केर मीटरगेज द्वारा लम्डींगक रस्ते लोअर हाफलौंग स्टेशन आबि सकैत छी। एकर दूरी गुआहाटीसँ २८५ किलोमीटर छैक। सिलचरसँ बदरपुर होइत हिल हाफलौंग स्टेशन केर दूरी ९२ किलोमीटर छैक।
रेलक डिब्बामे बैसि नॉर्थ कछार हिल्स केर नील पहाड़ीक अवलोकन केनाई स्वर्ग केर अवलोकनसँ कम नञि छैक। जीग-जैग (टेढ़-मेढ़) रस्ता नगाँवसँ प्रारम्भ भय समस्त नॉर्थ कछार हिल्सक उत्तरसँ दक्षिण दिशामे जिलाक तीन प्रमुख नदी- माहुर, दीयूंग आ जटिंगा- कऽ संग-संग चलैत रहैत छैक। बुझाएत जेना पानि, रेलक पटरी आ मनुक्खक मोन तीनू आपसमे तालसँ ताल मिला गतिमान भेल होए।
उपरोक्त तीन नदीक अतिरिक्त एहि धरामे चारि छोट-मोट नदी आरो थीक। एहि नदी सबहक नाम छैक: जीनाम, लंगटींग, कोपिली, डिलेयमा। सभसँ पैघ नदी दीयूंग छैक जकर लम्बाई २४० किलोमीटर छैक।
१८६६ मीटर केर ऊँचाई पर अवस्थित थुंगजांग पहाड़ी सभसँ ऊँच स्थान छैक।
नॉर्थ कछार हिल्स पूबसँ असम केर पड़ोसी प्रदेश नागालैण्ड आ मणिपुर; पश्चिममे मेघालय आर कार्बी अंगलौंग जिला; उत्तरमे नगांव आ कार्बी अंगलौंग जिला तथा दक्षिणमे बराक घाटीक कछार जिलासँ घेरल अछि। ४८९० वर्ग किलोमीटर क्षेत्रमे पसरल नॉर्थ कछार हिल्स केर सामान्य ऊँचाई समुद्र तलसँ ३११७ फीट छैक।
नॉर्थ कछार हिल्स जिलामे ६१९ गाम; पाँच प्रखण्ड, दू सब डिवीजन (हाफलौंग आ मइबांग)मे विभक्त अछि।
अतए केर आदिवासी मूल रूपसँ झूम खेती करैत छथि। झूममे एक भागक जंगल-झाड़केँ काटि ओहिमे आगि लगा पुनः खेती कएल जाइत छैक। तीन-चारि वर्षक बादओहि भूमिमे पुनः जंगल झाड़केँ बढ़ए देल जाइत छैक आ जंगल-झाड़सँ भरल जमीनकेँ आगि लगा साफ कय ओहिमे खेती कएल जाइत छैक। एतए १७,२९३ हेक्टेअर जमीन झूम खेतीक रूपमे, टोटल फसल हेतु उपयुक्त जमीन ३६७५८ हेक्टेअर आर बीया रोपए बला समस्त जमीन २९२०५ हेक्टेअर छैक। एहि जनपद केर करीब ४५२९वर्ग किलोमीटर धरती जंगलसँ भरल छैक। ६१०.५१ वर्ग किलोमीटर सुरक्षित आ बाकी हिस्सा राज्य सरकार द्वाराघोषित। तीन सुरक्षित जंगल क्षेत्रक नाम क्रमशः
(क) लांगटींग-मूपा सुरक्षित जंगल (४९७.५५ वर्ग कि.मी.)
(ख) कूरुंग सुरक्षित जंगल (१२४.४२ वर्ग किलोमीटर)
(ग) बोराइल सुरक्षित जंगल (८९.८३ वर्ग किलोमीटर)
ओहि दिन लगभग साढ़े बारह बजे भोजन कयल। तत्पश्चात् नॉर्थ कछार हिल्स ऑटोनोमस हिल्स काउन्सिलक कला एवं संस्कृति विभागक निदेशक लंगथासा महोदय, उप-निदेशक श्री संजय जी दूंग एवं किछु अन्य लोकनि हमरा लग अयलाह आ कहलन्हि जे “चलू अहाँकेँ पहाद्ई दिस लऽ चलैत छी। यदि समय बचत तँ जटींगा पहाड़ी आ गाम सेहो चलब”।
गुआहाटीमे किछु लोक सभ जानकारी देने छलाह जे जटींगा पहाड़ीपर चिड़ै सभ रातिमे रोशनी देखलापर झुण्डक-झुण्डाअबि रोशनीपर प्रहार करैत छञि तथा सामूहिक रूपेण आत्महत्या कऽ लैत छैक। इहो पता चलल छल जे पक्षीशास्त्री लोकनि एहिपर गहन शोधमे बहुत दिनसँ लागल छथि परन्तु एखन धरि कोनो ठोस निष्कर्षपर नहि आबि सकल छथि जे आखिर एकर रहस्य की छकि? आ एकर सत्यता की थिकैक? गुआहाटीमे मोन बना लेने रही जे जटींगा पहाड़ी अवश्य जायब। आइ ई अवसर हमरा लंगथासाजी देलन्हि तँ मोन गद् गद् भऽ गेल। हम तुरत हुनका लोकनिक संग जटींगा गाम जयबाक लेल तैयार भऽ गेलहुँ।
जटींगा पहाड़ी आ गामक रस्तामे विभिन्न प्रकारक बेंतक झाड़ी आ बांस भेटल। नॉर्थ कछार हिल्सक टोटल धरती (४८९००० हेक्टेअर)मे लगभग ३०७९०० हेक्टेअरमे बांस लागल छैक। बांस अनेक प्रकारक अनेक प्रजातिक, असम प्रदेशमे ३३ नस्ल केर बांस होइत छैक, जाहिमे लगभग २० नस्ल वा प्रजाति एहि क्षेत्रमे उपलब्ध छैक। प्रमुख प्रजातिमे काको/ पीछा वा पीछा, जाति, डालू, मूली, हिलजाति, कता, मकालू, काली-सूण्डी, टेराई आदिक नाम सामान्यो मनुक्खक जीभमे रचल-बसल छैक। बांस एहि क्षेत्रक लोकक जीवनक प्रमुख आधार छैक। एकर प्रयोग झोपड़ी, जाफरी, जारनि, पूल आदि बनेबाक लेल कएल जाइत छैक। बांसक कोपड़सँ तरकारी, अचार आदि सेहो बनायल जाइत छैक। बांसकेँ स्थानीय चाऊर, मकई आदिसँ बनल दारु पीबाक हेतु बर्तन (ग्लास-कप)क रूपमे कएल जाइत छैक। जमीनक कटाव रोकबाक हेतु बांसक आधार देल जाइत छैक। एकर अलावे बांसक प्रयोग बर्तन, फर्नीचर, कृषियन्त्र एवं उपकरण, धनुष-वाण, सजेबाक कलात्मक वस्तु, हस्तकला, बत्ती, सीढ़ी इत्यादिमे उपयोग होइत छैक। बादमे हम अनेको वाद्य या लोकवद्य यंत्र देखलहुँ जाहिमे बांसक प्रयोग कएल गेल रहैक।
अन्ततः हमरा लोकनि जटींगा गाम पहुँचलहुँ। ई गाम बोराइल रेंज केर पादगिरि (foothills) पर बसल छैक। ई पहाड़ी तरह-तरहक प्रवासी एवं देशी चिड़ै सबहक विश्राम-स्थली थिकैक। एहि स्थानमे अंग्रेजी मास सितम्बर-अक्टूबरमे चिड़ै सभ अन्हरिया पक्षक रातिमे रोशनीक कोनो स्रोत जेना कि टॉर्च, मशाल आदि देखि झुण्डक-झुण्डमे आबि खसि पड़ैत छैक आ आत्महत्या कऽ लैत छैक। जटींगा गाम हॉफलौंग शहरसँ आठ किलोमीटर केर दूरीपर बसल छैक। लोक सभसँ ज्ञात भेल जे चिड़ै सभ अन्हरिया रातिमे रोशनी देखि झलफलाक खसय लगैत छैक; जकर फायदा उठा कऽ चिड़ैमार सभ बांसक लग्गी अथवा बत्तीसँ चोन्हरायल चिड़ै सभपर प्रहार करय लगैत छैक एवं पकड़ि लैत छैक।
अन्हरिया रातिक संग-संग एक निश्चित वातावरणक भेनाई चिड़ै सबहक सामूहिक आत्महत्याक लेल सेहो कारण बनैत छैक। ई वातावरण छैक हवाक बहबाक दिशा। हवाक दिशा दक्षिण-पश्चिमसँ उत्तर-पूबमे हेबाक चाही। बोराइल पहाड़ीक अगल-बगलमे धूंध आ शीत लागल रहनाई सेहो जरूरी। धूंधमे कनीक झलफलाईत रोशनी हेबाक चाही। एहन स्थितिमे जखन दक्षिण दिशासँ धूँध चलैत छैक तखने चिद्ऐ सभ जटिंगा दिस आगाँ बढ़ैत अछि। सामूहिक आत्महत्या करय बला चिड़ै सभमे लाली चिड़ै (Indian ruddy), कौड़िल्ला (King fisher), भारतीय नौरंग (Indian pitta), हारिल, ब्लैक ड्रोंगो, उजरा बगुला, चितकबरी पौरकी, बटेर आदि प्रमुख छैक।
आश्चर्यक बात ई जे अधिकांश चिड़ै जे कृत्रिम रोशनीक चकाचौंधसँ सामूहिक रूपसँ झुण्डक-झुण्डमे झलफला या चौंधिया कऽ खसैत छैक ओ सभ देशी चिड़ै छैक। प्रवासी चिड़ै सभ संगे ई घटना घटित नहि होइत छैक। स्थानीय लोकसभसँ ईहो पता चलल जे ई प्रवृत्ति समस्त जटींगा पहाड़ीमे नहि भऽ कऽ किछु खास क्षेत्र जे कि मात्र डेढ़ किलोमीटर केर लम्बाई आ २०० मीटर केर चौड़ाईक सीमामे बन्हल छैक।
जटींगा गामक एक पच्चासी बर्षक वृद्ध जे प्नार (खासी) जनजातिक छथि सँ पता चलल जे चिड़ै सबहक जटींगामे कृत्रिम रोशनीसँ सामूहिक आत्महत्याक प्रवृत्ति केर जानकारी सर्वप्रथम १९१४ ई.क आसपास चललैक। भेलैक ई जे एक राति ककरो चारि-पांच बरद जंगल दिस भागि गेलैक। बरदक मालिककेँ भेलैक जे अगर बरदकेँ रातियेमे नहि पकड़ल गेलैक तँ बाघ-शेर सभ खाऽ जेतैक। तञि पाँच आदमी एकटा टोली बना बांसक फट्ठीमे कपड़ा बान्हि ओहिमे मटिया तेल डालि ओकर मशाल बना कऽ तथा हाथमे लालटेन लय बरद सभकेँ ताकक लेल जंगल दिस बिदा भेल। कनीक कालक बाद आश्चर्यजनक ढ़ंगसँ चिड़ै सभ झुण्डमे आबि मशाल लग आबि खसय लगलैक। परन्तु ई लोकनि ओहि चिड़ै सभकेँ नहि पकड़लकैक। यद्यपि ओऽ सभ चिड़ै मांसक प्रयोगमे लाबए जोग रहैक। एकर कारण ई छलैक जे स्थानीय जेमि नागा समुदाय (जनजाति) क लोकक बीच ई भ्रान्ति रहैक जे जटींगा क्षेत्रमे रातिक भूत-प्रेत विचरण चिड़ै बनि करैत रहैत छैक। हुनका लोकनिकेँ तञि डर भेलन्हि जे चिड़ै केँ पकड़लासँ कतहु कोनो अनिष्ट ने भऽ जाए।
१९१७ ई.क आसपास लाखन-सारा नामक एक व्यक्ति कृत्रिम रोशनीसँ झलफलाएल चिड़ै सभकेँ सर्वप्रथम पकड़ि घर अनलाह एवं ओकर मांसकेँ भुजि पका कऽ खयलन्हि। आ ओकर कोनो दुष्प्रभाव हुनका सभकेँ नञि भेलन्हि। एकर बाद चिड़ै सभपर आफत शुरू भऽ गेलैक। लोकसभ अन्हरिया रातिमे कृत्रिम रोशनीक मदतिसँ चिड़ै सभक संहार प्रारम्भ कऽ देलक। हालाँकि जखन अंग्रेज प्रशासनकेँ एहि बातक जानकारी भेटलैक तँ एहि परम्परापर रोक लगा देल गेलैक।
स्वतन्त्रता प्राप्तिक बाद लोक पुनः नुका-चोरा कऽ शिकार करए लगलाह। आब पर्यावरणविद्, पक्षीशास्त्री, पत्रकार एवं अन्य लोकनिक अथक प्रयासक बाद प्रशासन पुनः कृत्रिम रोशनीसँ चिड़ै मारबाक प्रथापर प्रतिबन्ध लगा देलकैक अछि। हम ओहि स्थानपर गेलहुँ। ओतए रंग-बिरंगक चिड़ै सबहक आकर्षक फोटो टांगल रहैक। एक मूल वाक्य नीक लागल। वाक्य ई रहैक: “shoot these birds with your camera, not with bullets:.
घड़ी देखलहुँ तँ साँझ भऽ गेल छल। आब हमरा लोकनि जटींगासँ सोझे सर्किट हाउस आबि गेलहुँ। मुँह हाथ धोलाक बाद कार्यक्रम स्थलीपर पहुँचलहुँ। ओतए पाँच हजार लोक सभ आयल छलाह। सभ जनजाति केर स्त्री-पुरुष, बच्चा सीयान सभ कियो अपन समुदायक परम्परागत रंग-बिरंगक वस्त्र पहिरने सुसज्जित भेल पहुँचल छलाह। प्रशासन केर सहयोग तँ छले। डिप्युटी कमिश्नर, नॉर्थ कछार हिल्स ऑटोनोमस काउन्सिल केर चेअरमेन, सदस्य, प्रमुख सचिव, एस.पी., स्थानीय कॉलेजक शिक्षक एवं छात्र सभ कियो पहुँचल छलाह। स्थानीय पत्रकार सभ सेहो उत्साहित छलाह।
सभ कियो हमरा माध्यमसँ आ गौतम शर्माक माध्यमसँ इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केन्द्र केर प्रति धन्यवाद दैत छलाह। हम सोचलहुँ जे केहेन विडम्बना छैक। जे क्षेत्र सांस्कृतिक सम्पन्नताक खान थिक ओकर एहेन अपमान! मुख्यधारासँ एहि क्षेत्रकेँ वंचित किएक कएल गेल छैक! हमरा भेल जे समस्त विश्वमे नॉर्थ कछार हिल्ससँ शान्त आर सांस्कृतिक वैविध्यसँ भरल आर कोनो जगह नञि भऽ सकैत अछि। हम अपन भाषणमे बजलहुँ: “हमरा लोकनि अहाँ सभकेँ सिखाबए नहि अएलहुँ अछि। हमरा लोकनि अएलहुँ अछि अहाँ लोकनिकेँ जाग्रत करक हेतु जे अहाँ सभ अपन सांस्कृतिक वैविध्यता तथा गरिमाकेँ बुझू आ एकरा सास्वत राखू। हमरा लोकनि एतए केर सांस्कृतिक विरासतकेँ जानए आ ओकर डॉक्युमेन्टेशन करए आएल छी। अगर अहाँ सबहक सहयोग रहल तँ बेर-बेर आएब। हमर कार्यक्रममे आ एक्शनमे कौमा (,) वा अर्धविराम भऽ सकैत अछि, पूर्ण विराम कखनहुँ नहि हैत”।
लोक सभ हमर बातकेँ सही अर्थमे लेलन्हि। पहिल दिनक कार्यक्रम लगभग साढ़े-नौ बजे राति धरि चललैक।
जखन रातिमे भोजनक उपरान्त विश्राम करए गेलहुँ तँ एक आदमीक देल एक पुस्तक पढ़य लगलहुँ। पुस्तक नॉर्थ कछार हिल्सपर छलैक। ओहि पोथीमे रातु हकमओसा नामक स्थानीय कविकेँ नॉर्थ कछार हिल्सपर लिखल किछु पंक्ति बड्ड उपयुक्त बुझना गेल: पंक्ति यथावत अंग्रेजीमे पाठक लेल लिखि रहल छी:
A harmonious game of hide and seek
Behind the bushes, marshy meadow
Under shadow with clouds view,
Ever ready for worthwhile, cherish at dawn,
The blues make enchanting heart of lovers
Midst of covers white
Changing scene that lively for romance
Beauty and bounty of brooks that flow.
Moments of joy, love to cherish
Insight the harmony game of hide and seek
Behind thick trespasses of white and blue
With narrow path of zig-zag.
The beauty of hills under cover
Orchids, white fall, violet at hills
Every moment thrilled with behalf
Nature disposal at North Cachar Hills
(विदेह पेटारसँ)
अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ।
डॉ. गंगेश गुंजन
१
भोज परक आँटी- सत्तरिक नव-खाढ़िक युवा नवतुरिआसँ
“भोज परक आँटी” अवश्य सुनल हएत बन्धु! हमरा लोकनि ते आब आयु-अवरोहणक प्रक्रियामे छी। मुदा पराभव अछि अपन एहि मैथिल मानक ओ स्वप्न जे मिथिलांचलक समग्र सामाजिक परिवर्तनक अर्थात्- जनपथक निर्माण (राजपथ नहि) आकांक्षामे सौँसे बातपर उत्कट डेगे चलिते रहबा लेल विवश छी। हमर गाम पिलखबारो ताहि से जुटल अछि, जाहिसँ हितेन्द्रजी अहाँक गाम केओटी।
हमरा पीढ़ीकेँ तँ इतिहास “भोज परक आँटी” बना लेबाक बेर-बेर उपाय कएलक, जेना-तेना बँचबामे सफल रहलियैक, मुदा भऽ कहाँ कोनो खास सकलैक। तेकरे टा अफसोच। एक बोझक रूपमे फसिलकेँ खरिहानधरि कहाँ पहुँचा सकलियैक। तेकरे टा दुःख! मुदा टिकल रहलियैक अपन जीवन-मूल्य आ समाज दर्शनक भूमिपर। एक टा कवि-लेखक जे संघर्ष असकरो कऽ सकैत छी। से रस्ता चलबाक यत्न। जे से।
पूरा बिहार- आन्दोलनक परिणति एहन आ एतए धरि भऽ जेतैक से क्यो सोचियोसकैत छलैक? अवश्ये बुझल हएत जे ताहि आन्दोलनक उपज- आमद भरि देश कैक टा महापद आसीन सी.एम. समेत कतोक एम.पी., एम.एल.ए. महोदय छथि। अहाँक पीढ़ीमे यदि सत्येक (सन्देह नहि सत्तरिक कारवाँक भव से कहि रहल छी जे) सत्ये मिथिलाक दर्द अछि तँ राजनीतिकेँ चिन्हैत जाइ जाऊ। पोलीटिक्स कऽ एहि नव अवतारकेँ। से भाषाक। ताहूमे मैथिलीक नव-नव ब्रांडक नेता आ एहन राजनीतिकेँ चीन्हि जाऊ। कारण जे राजनीतिक ई एकदम नव अवतार ठीक विश्व-बाजारी अवतार! कोनो औसत सुख लेल ककरो “भोज परक आँटी” नहि बनब। एहि वाष्पीकरणक प्रवाहमे एहन लोक नीक समय अर्थात् कोनो प्रतिगामी व्यवस्था रोकि नहि सकैत अछि। स्वयं राजनीतिक विचारधारा-अवधारणामे सेहो युगक अनुसार सकारात्मक पुनर्विचार चलि रहल छैक। जाति, धर्म, सम्प्रदय, क्षेत्रीयता सभसँ ऊपर सोचैत। समग्रतासँ एक होऊ। अपन मिथिलाँचलो तँ देशेमे ने अछि।
अपम माँ मैथिली तँ अवश्ये महान। मुदा अन्य लोकक मातृभाषा सेहो तुच्छ नहि। अपना देशक सभ भाषा श्रेष्ठ अछि। मुदा दुर्भाग्यसँ किछु मूढ़ मैथिल मानसिकताक लोक आर तँ आर हिन्दी तककेँ अपमान जेकाँ कऽ देबाकेँ अपन मैथिल प्रेम बुझि लैत छथि, ई नकारात्मक प्रवृत्ति उचित नहि। हम तँ तेहन समयकेँ सहन कएने छी, जे किछु परम् विद्वान् अत्यन्त आदरणीय लोक लिखैत तँ मैथिली नहि तँ इंग्लिश। हिन्दी नहि। ई बहुत विचित्र लागए। आखिर हिन्दी अपन बहुत गौरवशाली लोकतन्त्र राष्ट्र-भाषा थिक। बन्धु! से मानसिकता बदलि जरूर रहल अछि मुदा अहाँ खाढ़िक (पीढ़ीक) युवा नवतुरिआमे आओर तेजीसँ परिवर्तन चाही। बात नहि रुचए तँ बिसरि जाएब, आग्रह!
२
मैथिलीक उर्वर क्षेत्रमे कॉरपोरेट-जगत धाप
एम्हर आब मैथिलीकेँ ई अष्टम सूचीक मान्यता एकटा आओर नव वादक उपहार-दरभंगा-मधुबनी-सहरसा वादक उपहार बनि रहलए। नव बाजारी प्रवृत्तिक ई प्रच्छन्न बीज-वपन आरम्भ भ’ चुकल अछि। सावधान। जे वर्ग एहि नव प्रयोजन-सिद्धिक बाट पर चलि आ’ चला रहलाह अछि, तनिकासँ संवाद होयबाक चाही। एखनहि-एही काल। अन्यथा मैथिलीक जतेक आ’ जेहन हानि आइ धरि नहि भेल छलैक, ताहिसँ बहुत बेशी आ’ खतरनाक नोकसान भ’ जयतैक। देशमे प्रचलित तुच्छतावादी प्रवृत्तिक विरुद्ध रखबारी कर’ पड़त। पूरवाग्रह मुक्त्त मन-प्राणसँ। अपना-अप्नी क’ क’ सुतारबाक, हथिययबाक अवसरवादी प्रवृत्तिसँ बाज अबै जाथि। मैथिलीक विषयकेँ समग्रतामे -देखि-बूझि क’- जाहिमे सम्पूर्ण मिथिला, मैथिल आ’ मैथिली अछि। छुछे दरभंगा-सहरसा-मधुबनी –ए टा नहि। आ’ ने छुच्छे सोति-ब्राह्मण-ब्राह्म्णेतर मैथिली भाषा-संस्कृति। तहिना साहित्य कथा कि कविता कि उपन्यास कि नाटके टा नहि। ई सभटा समस्त मिथिलांचलक एक जातीय सांस्कृतिक समग्रता तथा लोक गरिमाक, मानवीय गुणवत्ता, जीवनमूल्यक दबाबमे करैत रचनाकर-विचारकक संघर्ष आ’ आदर्शोन्मुख अभिव्यक्त्तिमे समस्त युग-यथार्थ बनैत अछि। ओना अपना-अपना पीढ़ीक प्रति आग्रह-आवेश स्वाभाविक, तेँ सभ दिना यथार्थ। मुदा वैह यदि कट्टरताक रूप ल’ लिअय तँ सामाजिक जहर बनि जाइछ। दुःखद आ’ चिन्तक विषय तँ ई जे एहन प्रवृत्ति मैथिली भाषा आ’ साहित्यमे सृजनरत अधिकांश नव्यतम रचनाकारमे पर्यंत देखाइ पड़’ लागलए। जनिकर लेखनसँ मैथिलीकेँ बड़-बड़ आशा छैक। से लोक सेहो।ई दुश्चिन्तेक विषय। एहन विभाजनकारी, विद्वेषोन्मुखी डेगकेँ रोकबाक चेतना जगाउ। आरम्भेमे-एखने। एहन वेगमे संस्थामूल्य सभक क्षय होयबामे समकालीन लोकक नकारात्मक पहल केर मुख्य भूमिका रहैत आयल छैक। आइ तँ आर। संस्था समेत साहित्यक आकलन-मूल्यांकनसँ ल’ साहित्य-सम्मान धरिक मानदण्ड-निकष-कसौटीक निष्पक्षता आ’ ईमानदारी पर प्रश्न उठि रहल अछि। संस्था मूल्य सभक क्षरण आ’ कठघरामे ठाढ़ कएल जयबाक घटना सभकेँ, हल्लुक क’ नहि, बहुत गंभीरता आ’ जिम्मेदारीसँ स्वीकार करबाक एखनहि अछि- बेर छैक। नहि तँ पछताय लेल तँ सौँसे भविष्य धएल अछि। एहि परिस्थिति तथा एकर खतरनाक प्रवृत्ति पर लोकक ध्यान जयबाक चाही, जे कोना एन.आर.आइ. प्रकारक लोक सभ आइ एक-बएक अचानक मैथिलीक भाषा-सांस्कृतिक आँगनकेँ सेहो कब्जा क’ रहल छथि। तेहन देशी एन.आर.आइ प्रकारक लोककेँ अवश्य चिन्हित कयल जयबाक चाही जे मिथिलांचल-मैथिली भाषा आ’ लोकक प्रसँग कहियो किछु नहि कयलनि। कोनो योगदान नहि। परन्तु आइ मैथिलीक ओहू क्षेत्रक अवसर आ’ संस्थाकेँ अपने अधीन क’ लेबाक प्रबंधमे सक्रिय, लगातार सफल भ’ रहल छथि। विडंबना तँ ई जे मैथिली-मिथिलांचलक विरुद्ध एहि गतिविधिमे बहुत रास तथाकथित मैथिलीक उच्चकोटिक लेखक-समालोचक-कवि ( छद्म प्रातिशील रचनाकार समेत) सेहो कोनो आपत्ति वा विरोध दर्ज नहि क’ रहल छथि। बल्कि मैथिलीक एहि नवोदयक-साम्राज्यवादक परोक्ष सहयोगे क’ रहल छथि। सँभव जे भविष्यमे अपना लेल कोनो उत्पादक अवसरक वास्ते निवेश बुद्धिसँ, ई सभ क’ रहल होथि, एकरे व्यावहारिक बाट मानि क’ चुप बनल छथि। युवा पीढ़ीक सेहो। के पड़य एहि सभमे? अद्यावधि प्राप्त इतिहासक जानकारीमे तत्काल यश-धनक अति-उताहुल , व्यग्र नव पीढ़ी! ई पराभव बजार आ’ भूमंडलीकरण (प्रायः!) मिथिलांचलक एहि नव गणित आ’ समाजशास्त्रकेँ की चीन्हओ? जा रहल लोक चीन्हओ कि आबि रहल लोक? ककर दायित्व। हमरा जनैत अवसर आ’ दूरगामी प्रभाव परिणतिकेँ दृष्टिमे राखि क’, छुच्छे बौद्धिकताक, बुद्धिजीविताक संकीर्णताक नहि, सबजन मैथिल अर्थात् जनसाधारणक मंगलकेँ नजरि पर राखि, स्वच्छ हृदय, पारदर्शी व्य्वहारवादक चलन अनै जाउ। यदि सत्ये मैथिली, मिथिलासँ अनुराग हो। पारम्परिक मैथिल कूटिचालि चोड़ै जाइ जाउ। अंततः मैथिली अपना सभक एकहि टा नाओ अछि। सभ गोटय एही नाओमे सवार छी। पार उतरब तँ सभ क्यो। तेँ नाओमे भूर नहि हो। बीचहिमे डूबय ने कतहु। अन्हारोमे अनका टाटक भूर देखबाक आँखि आ’ नेत बदल’ पड़तैक।(अन्हारोमे अनका टाटक भूर देखबाक बिम्ब पूर्णियाक कवि- प्रशान्तजीक मन पड़ि गेलय ‘सद्य मैथिल छी’) जे ओ’ आकश्ववाणी पटनाक मैथिली कार्यक्रम भारतीमे प्रसारित कयने रहथि)। नकारात्मक-ध्वंसात्मक समझ आ’ बुद्धिसँ परहेज करए जाइ जे क्यो से क’ रह्ल होइ। चन्द्रमा पर नव प्रभुवर्गक प्लॉट-रजिस्ट्री जेकाँ सद्याः उपलब्ध मैथिलीक एहन ऐतिहासिक अवसरक उपयोग सोचै जाउ-उपभोग नहि। दरभंगा बनाम सहरसा बना क’ मैथिलीक क्षेत्रीय रजिस्ट्री जुनि करबै जाउ। मनै छी, कहियो छल हेतै ई मनवाद। मुदा से मैथिलीक नितांत दोसर दौर छलैक। से ध्यान रखबाक थिक। ई(वि)काल प्रायः सभ भाषा-साहित्यक इतिहासमे अबैत रहलैए। साहित्यिक सरोकार समाजसँ रहैत छैक, तथा समाज जीवन-यापन समेत जीवन-शैली आ’ जीवन मूल्यक निर्मिति आ’ निर्वहन तत्कालीन सत्ताक उपज होइत अछि। तेँ जन साधारणे लोकटा नहि, बुद्धिजीवी आ’ नेतृवर्ग सेहो ताही दबाबमे अपन प्राथमिकता तय क’ क’ अपन बाट बनबैत अछि आ’ सुभीता चह’ लगैत अछि। कालांतरमे जल्दीये तकर अभ्यस्त भ’ जाइत अछि। मध्यम वर्ग बेशी आ’ जल्दी। ई सुविधावादी जीवन-शैली आ’ जीवनदर्शन जन्मैत छैक- कहियो धर्म-सत्ता, कहियो राज-सत्ता, कहियो विकलांग लोकतंत्र वा कहियो अपरिपक्व लोक सत्ताक विचार-व्यवहारक संवेदनशील व्यवस्था शासनक अधीनतामे। बहुसंख्यक जनताक अशिक्षा दुआरे। तखन ओहि समयक जे बुधियार वर्ग रहैत अछि से सत्ताक अनुगमन करबाक सुभीतगर निष्कंटक बाट चुनैये। सुभीताकेँ अपन जीवन-मूल्य बना लैत अछि। जे बुधियार नहि अर्थात् जनसाधारण लोक, ताहि परिस्थितिकेँ अपन नियति वा प्रारब्ध मानि लैत अछि। एना अगिला कएक पीढ़ी धरि एहिना ओंघड़ाइत चलैत चलि जाइत छैक। गुलामी खाली कोनो बाहरीये देश वा सम्राट-साम्राज्येक टा नहि होइत अछि। गतानुगतिकता आ’ यथास्थितिवादी मानसिकता आ’ युगक प्रगति-गतिकेँ नहि बूझि, मूड़ी निहुँरैने सभ किछु स्वीकार आ’ सहैत चलि जाइक प्रवृत्ति सेहो गुलामियेक थिक। सत्ता तुष्ट लोकक ताबेदारी सेहो नव भाँग-गाँजाक अभ्यास अर्थात् गुलामिये होइत अछि। से ई सभ प्रकारक गुलामी बहुत युग धरि चलैत रहि जाइत छैक- अगिला कोनो सामाजिक परिवर्त्तन- कोनो महाक्रांति अयबा धरि। एखन धरिक इतिहासक शिक्षा तँ यैह कहैत अछि। उर्वर क्षेत्रक आविष्कारक बाद बजार ओकरा हथियबैत छैक। तेहन लोक से क’ नहि गुजरय। निजी सम्पत्ति ने बना लिअय। एकर रजिस्ट्री-केबाला ने करबा ने करबा लिअय। मैथिलीकेँ मसोमातक जमीन जेकाँ अपना-अपना नामे लिखबाक व्योंतमे लागल तेहन लोक से क’ नहि लिअय। एहि प्रक्रियामे माफियो –घुसपैठियो सभक गतिविधि अचानक तेज भ’ जाइत छैक। कहबाक प्र्योजन नहि जे मैथिली एखन सैह उर्वर क्षेत्र बनल अछि। मैथिली माफियाक कॉरपोरेट सेक्टर जोशमे अछि। गतिविधि तेज केने अछि। मैथिलीक विषयकेँ समग्रतामे -देखि-बूझि क’- जाहिमे सम्पूर्ण मिथिला, मैथिल आ’ मैथिली अछि। छुच्छे दरभंगा-सहरसा-मधुबनी-ए टा नहि। आ’ ने छुच्छे सोति-ब्राह्मण-ब्राह्मणेतर मैथिली भाषा, संस्कृति। तहिना साहित्य कथा कि कविता कि उपन्यास कि नाटके नहि। ई सभटा समस्त मिथिलांचलक एक जातीय सांस्कृतिक समग्रता तथा लोक गरिमा, मानवीय गुणवत्ता, जीवनमूल्यक दबाबमे करैत रचनाकार-विचारकक संघर्ष आ’ तकरे आदर्शोन्मुख अभिव्यक्त्तिमे युग-यथार्थ बनैत अछि। सद्यः उपलब्ध मैथिलीक एहन ऐतिहासिक अवसरक उपयोग सोचै जाइ- उपभोग नहि। दरभंगा बनाम सहरसा बना क’ मैथिलीक रजिस्ट्री-बन्दोबस्त नहि करबै जाइ जाय।
३
किछु एहनो बात विषय
यद्यपि एहि बात –‘सगर राति दीप जरय’ पर हम सिद्धांततः प्रभासजीसँ सहमत नहि रहलौँ, परन्तु एम्हर पछिला दशकमे ई तिमाही-कथा गोष्ठी- ‘सगर राति दीप जरय’- आजुक मैथिली कथा-विधामे की योगदान कएलक अछि, से तथ्य आब इतिहासमे दर्ज अछि। ई बात सही छैक जे एहन कोनो कार्य कोनो एक गोटेक नहि होइछ। मुदा सभ वर्त्तमानकेँ ओहि एक संस्थापना-कल्पक व्यक्त्ति-लेखककेँ अवसरोचित रूपेँ कृतज्ञतासँ स्मरण अवश्य कयल जयबाक चाही। से लेखकीय नैतिकता थिक। आ’ हमरा जनतबे, से रहथि- स्व. प्रभास कुमार चौधरी। हमरा तखन दुखद निराशा भेल जखन एहि बेरक मैथिली साहित्य अकादेमी पुरस्कार पओनिहार प्रदीप बिहारीजी साहित्य अकादेमी-सभागारमे लेखक-सम्मिलन-अवसर पर अपना वक्तव्यमे सगर राति दीप्प जरयक उपलब्धिक चर्चा तँ कएलन्हि, मुदा स्व. प्रभास जीक नामोल्लेखो नहि कयलखिन। एकरा हम साधारण घटना नहि मानि सकैत छी। गंभीर बात बुझैत छी। कारण हमरा लोकनि रचनाकार छी। औसत कोटिक कोनो राजनीतिक नहि। संभव हो नाम अनावधानतामे छूटि गेल होनि। मुदा हमरा सभ लेखक छी तेँ एहन असावधानी करबा लेल स्वाधीन नहि छी। यद्यपि अपन खेद हम हुनका प्रकट कयलियनि। हमरा लगैये जे अपन-अपन सकारात्मक इतिहासक प्रति सभ पीढ़ीक मनमे कृतज्ञताक भाव अंततः लेखकक ऊर्जा आ’ प्रेरणे बनैत रहैत छैक। बतौर कवि हम मैथिलीमे जाहि काल-बिन्दु पर ठाढ छी, तकर जड़ि विद्यापतिसँ ल’ सुमन-किरण-मधुप- आ यात्रीएमे। ई सोचि क’ मन कृतज्ञ होइत अछि! बल्कि गौरांवित। ओना, एकटा लेखक रूपमे हम एहिमे सँ क्यो नहि छी। जेना सभ, सभक कारयित्री प्रस्थान छथि, तहिना हमहुँ नागार्जुन-यात्रीक कारयात्री प्रस्थान छी। आ’ ई भाव हमरा रचनाकर्ममे अग्रसर करबाक उत्तरदायित्व द’ गेलय। तर्पण तिल-कुश –अंजलि बला कर्मकाण्डकेँ तँ हम नहि मानैत छी, मुदा पुरखाक तर्पण हमरा प्रिय अछि। अपना शैलीमे। अपन जीवन-मूल्यक एकटा अभिन्न तत्त्व बुझाइत अछि। तकर बाट की हो? अवसर पर कृतज्ञ स्मृति! अवसर पर- तिथि पर नहि।
(विदेह पेटारसँ)
अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ।
हितेन्द्र गुप्ता
आब नहि खुलत नवका शराबक दोकान
बिहार मे आब शराबक नवका दोकान नहि खुलत. बिहार सरकारक ई फैसला अछि जे आब शराब दोकानक लेल नवका लाइसेंस जारी नहि कएल जाएत. बिहारक आम लोक लेल ई नीक खबर अछि. लोक सभ कमाई केर एकटा बड़का हिस्सा शराब पर खर्च करि दय छथिन्ह. बिहार मे तं कइटा घर शराबक चक्कर मे बर्बाद भ गेल. कतेक लोक सभ दिन भर मजदूरी कs क अएला के बाद सीधे शराबक दोकान पर चलि जाए छथिन्ह. नून-तेल खरीदय के जगह शराबक बोतल खरीद लैत छथिन्ह. परिवार के संग मारि-पीट करय छथिन्ह. सरकार एहि पर रोक लगाबय लेल शराबक दाम बेसि करि देलक मुदा कोनो खास फर्क नहि पड़ल. बिक्री जारी रहल. ओना सरकारक नवका लाइसेंस जारी नहि करय के फैसला सं खास फर्क नहि पड़त...किएक तं पुरना दोकान तं खुलले रहत. पुरना दोकान पर शराब तं मिलते रहत. अगर सरकार सच मे एहिपर रोक लगाबय चाहैत अछि तं ओकरा गुजरात जकां पूर्णरूप सं शराब पर बंदी लगाएबाक चाही. सरकार के कहनाय अछि कि ओ शराब के दुष्परिणाम के बारे मे लोक के जागरूक करत...हर साल 26 नवंबर के मद्य निषेध दिवस मनाएत. मुदा एकर खास असर नहि पड़त. अगर सरकार सच मे गंभीर अछि तं ओकरा सभ धर्मक धर्मगुरु के संग मिलि कs लोक मे एकर खिलाफ अभियान चलएबाक चाही. लोक सभ के ई बतैनाय जरूरी अछि जे एहि सं सेहत आओर पाई दुनू के नुकसान पहुंचैत अछि. ई लोक के खोखला बना दैत अछि. सरकार के एकटा तय समय सीमा दsक एकर दोकान करय वाला के दोसर बिजनेस करय लेल प्रोत्साहित करबाक चाही. एहि पर दस तरहक टैक्स लगा कs एकरा एतेक महंग करि देल जाए जेहिसं लोक एकरा खरीदय मे दस बेर सोचय. (हितेन्द्र गुप्ता साभार- हेल्लो मिथिला http://www.hellomithilaa.com/2011/06/blog-post_2742.html )
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सुभाष साह
लन्दनमे नेपाल मेला २००८ (लन्दनसँ श्री सुभाष शाहक रिपोर्ट)
लन्दन शहरमे पिकाडिली सर्कस नामक स्थान पर नेपाल एमबैशीक सहायता सऽ २१ आऽ २२ सितम्बर २००८ कऽ अहि मेलाक आयोजन कैल गेल छल जाहिमे नेपाल के पर्यटन मंत्री आदरणीया सुश्री हिशिला यामी नेपालक राजदूत श्री मुरारी राज शर्मा खैतान ग्रुपके चेयरमैन एवम् मैनेजिंग प्रेसिडेंट श्री राजेन्द्र खैतान आदि सहित अन्य दिग्गज सब उपस्थित छलैथ।अतऽ इहो घोषणा कैल गेल जे साल २०११ के पर्यटन वर्षक रूपमे मनाओल जायत। सुश्री यामी सऽ हम सब अहू बात पर विचारविमर्श केलहुं जे 'लुम्बिनी' के पर्यटक सबलेल बेसी आकर्षक बनाबऽ लेल की कैल जा सकैत अछि।यामीजी अहि बात लेल प्रतिबद्ध भेली जे ओ सीता मैया एवम् बुद्धदेवक इतिहास सऽ सम्बन्धित स्थानके
विकासमे यथाशक्ति योगदान देती।
श्री नवीन कुमार एवम् सुश्री सुनीता शाह द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक परिधानक फैशन शो अत्यन्त सफल रहल।हमरा सब अन्मुक (ANMUK- Association of Nepali Madheshis in UK) के सदस्य सबलेल अहि आयोजनक सफलता बहुत पैघप्रोत्साहन अछि।
(विदेह पेटारसँ)
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सुशांत झा
ग्राम+पत्रालय-खोजपुर, सम्प्रति सुशांत जी इंडिया न्यूजमे कॉपी राईटर छथि, मिथिला विश्वविद्यालयसँ स्नातक (इतिहास), तकर बाद आईआईएमसी (भारतीय जनसंचार संस्थान) जेएनयू कैम्पससँ टेलिविजन पत्रकारितामे डिप्लोमा (2004-05) ओकरबाद किछु पत्र-पत्रिका आ न्यूज वेबसाईटमे काज, दूरदर्शनमे लगभग साल भरि काज। संप्रति इंडिया न्यूजसँ जुड़ल- सम्पादक
१
की बलिराज गढ़ मिथिलाक प्राचीन राजधानी अछि?
हमर गाम खोजपुरसँ करीब एक किलोमीटर दक्षिण दिस बलिराजपुर नामक एकटा गाम छैक। ई गाम मुधुबनी जिला मुख्यालयसँ करीब 34 किलोमीटर उत्तर-पूब दिसामे छैक। एतय एक टा प्राचीन किला छैक जे 365 बिगहामे पसरल छैक आ एकर देखभाल भारत सरकारक पुरातत्व विभाग क रहल अछि। किलाक खुदाई भेलापर एहिमे सँ मृदभांड आ विभिन्न तरहक बस्तु निकलल आ सोनाक सिक्का सेहो भेटलैक। किलाक बाहर जे बोर्ड लागल छैक ताहि के मुताबिक ई किला मौर्यकालीन हुअक चाही। किला के कात करोटमे जे गाम छैक ओहिमे भाँति-भाँतिक किंवदन्ति पसरल छैक, किलाक विषयमे। जतेक लोक, ततेक तरहक बात। किछु लोकक कथन छन्हि जे ई किला राक्षस राज बलिक राजधानी छलै -आ किछु गोटा तँ राजा बलिकेँ देखबाक सेहो दावा केलन्हि अछि। साँझ भेलाक बाद लोक सभ किला दिस जाइसँ बचए चाहैत छथि। भऽ सकैत अछि जे ई अफवाह सरकारी कर्मचारी लोकन्हि फैलेने हुएआए-कारण जे ओकरा सभकेँ ड्यूटी करएमे कनी आराम भऽ जाइत छैक। लोक सभ राजा बलिक डरे किछु चोरबऽ नञि चाहए छैक।
किला अद्भुत छैक। किलाक देबार भग्नावस्थामे रहितहु अपन यौवनक याद दिआ रहल अछि। किलाक देबार एतेक चाकर छैक जे ओदृपर तँ आसानी सँ एकटा रथ निकलिये जाइत हेतैक। देबारमे लागल ईंटा दू-दू फीट नमहर आ लगभग गोटेक फुट चाकर छैक। चीनक देबारसँ कम मोट नहि हेतैक ई अपन यौवन कालमे। किलामे एकटा पोखरि छैक, ककरो नहि बूझल छैक, जे कहिया खुनाएे ई पोखरि। बूढ़-पुरानक कहब छन्हि जे ई पोखरि राक्षसक कोरल अछि। किछु लोकनिक तँ ई मत छन्हि जे एहिमे एकटा सुरंग सेहो छैक-जकर रस्ता कतओ आर निकलैत छैक। सुनैत छियैक जे घ्राज-परिवारक सदस्यकेँ आपातकालमे बाहर निकालैक लेल एहन सुरंग बनायल जाइत छलैक। किलाक कात-करोटमे जे गाम छैक तकर नाम सेहो ऐतिहासिक। किलाक पूब दिस छैक फुलबरिया नामक गाम आ ओकर बगलमे सटल छैक गढ़ी गाम..जे आब अप्रभ्रंश भऽ कऽ गरही भऽ गेलैए। किलाक पच्छीम दिस छैक रमणी पट्टी नामक गाम आ ओहिसँ सटल छैक भुपट्टी। किलाक दक्षिणमे छैक बिक्रमशेर, जतय प्राचीन सूर्य मंदिरक अवशेष भेटलैए। ई बात ध्यान देबाक जोग जे सूर्य मंदिर देशमे बड्ड कम जगह छैक। बलिराज गढ़क खुदाई पहिल बेर 1976 मे भेलैक, जखन केन्द्रमे साइत डॉ0 कर्ण सिंह एहि बिभागक मंत्री छलाह। गढ़क उद्धारक लेल मधुबनीक पूर्व सांसद भोगेन्द्र झा आ कुदाल सेनाक अध्यक्ष सीताराम झाक बड्ड योगदान छन्हि। किछु इतिहासकार लोकनिक कहब छन्हि, जे ई किला बंगालक पालवंशीय राजा लोकनिक किला भ सकैत अछि वा फेर मौर्य सम्राटक उत्तरी सुरक्षा किला भऽ सकैत अछि। ओना किछु गोटेक कहब छन्हि जे एकर बड्ड संभावना- जे ई किला मिथिलाक प्राचीन राजधानी सेहो भऽ सकैत अछि।
एकर पाछू ओ ई तर्क दैत छथिन्ह, जे एखुनका जे जनकपुर अछि, ओ नव जगह अछि आ ओतुक्का मंदिर १८हम शताव्दीमे इंदौरक महाराणी दुर्गावतीक द्वारा बनबाएल गेल अछि। विद्वान लोकनि जनकपुरक ऐतिहासिकताक संदिग्ध मानैत छथि। हमरा एहि संबंधमे एकटा घटना मोन पड़ि रहल अछि। १० साल पहिने पटनामे वैशालीक एकटा सज्जन हमरा भेटलाह आ कहलन्हि जे बलिराज गढ़ वास्तबमे मिथिलाक प्राचीन राजधानी अछि। हुनकर कहब छलन्हि जे ह्वेनसांगक एकटा विवरणक मुताबिक पाटलिपुत्रँस एकटा खास दूरी पर वैशाली अछि, वैशालीसँ एतेक दूरीपर काठमांडू (काष्ठमंडप) अछि आ काठमांडूक दच्छिन आ पूब दिशामे मिथिलाक प्राचीन राजधानी छैक। एखुनका जनकपुर ओहि मापदंडपर सही नञि उतरि रहल अछि। पता नञि एहि बातमे कतेक सत्यता छैक। एकर अलावा, रामायणमे सेहो मिथिलाक प्राचीन राजधानीक संदर्भमे किछु संकेत छैक। रामायणक संकेत सेहो बलिराजपुरकेँ मिथिलाक राजधानी होएबाक संकेत कय रहल अछि।
सांसद भोगेन्द्र झाक मुताबिक, राजा बलिक राजधानी महाबलीपुरम भर सकैत अछि, जे दच्छिन भारतमे छैक। सभसँ पैघ बात ई जे पूरा मिथिलामे बलिराजपुरसँ पुरान कोनो किला नहि अछि, जे मिथिलाक प्राचीन राजधानी होएबाक दावा कय सकए। किलाक भीतर उबड़-खाबड़ मैदान छैक, जे राजमहलक जमीनक भीतर धँसि जएबाक प्रमाण अछि। एतय एकाध जगह खुदाई भेलैए आ ओहीमे काफी कीमती धातु आ समान भेटलैक अछि। अगर एकर ढ़ंगसँ खुदाई कएल जाय तँ नञि जानि कतेक रहस्य परसँ आवरण उठि जायत। एखन धरि सरकारक तरफसँ कोनो ठोस प्रयास नहि भऽ पाओल अछि, जञिसँ बलिराज गढ़क प्राचीनताकेँ दुनियाक सोझाँ रखबाक कोसीस कएल जाय। बस एकटा कामचलाऊ सड़कसँ एकरा बगलक गाम खोजपुरसँ जोड़ि देल गेलैक आ इतिश्री कय देल गेलैक।
यदि बलिराज गढ़क खुदाई ढ़ंगसँ कएल जाय आ एतय एकटा नीक संग्रहालय बना देल जाय तँ बढ़िया काज होयत। मिथिलांचलक हृदयस्थलीमे रहबाक कारणेँ एतय मिथिला पेंटिंगक कोनो संस्थान वा आर्ट गैलरी सेहो खोलल जा सकैत अछि। एकटा नीक(चाकर आ चिक्कन हाईवे) क संग नीक विज्ञापन बलिराजगढ़क पर्यटक सभकेँ निगाहमे आनि सकैत अछि। एहिसँ इलाकाक गरीबी दूर करबामे सेहो मदद भेटत। यदि एकरा बुद्धा सर्किट वा रामायण सर्किटक अंग बना लेल जाय तँ आर उत्तम।
२
मिथिला मंथन
मिथिलांचल क्षेत्र बिहार मे सबसँ पिछड़ल मानल जाइत अछि, अगर प्रतिव्यक्ति आय, साक्षरता और प्रसवकाल मे जच्चा-बच्चा के मृत्यु के मापदंड बनायल जाय तोप्रँ मिथिलांचल देश के सबस गरीब आ पिछड़ल इलाका अछि। एकर किछु कारण त अहि इलाका के भौगोलिक बनावट अछि लेकिन ओहियो सँ पैघ कारण एहि इलाका मे कोनो नीक नेतृत्व के आगू नै एनाई अछि। आजादी लगभग 60 वर्ष बीत गेलाक बाद देश में जहि हिसाब स आर्थिक असमानता बढ़ि गेलैक अछि ओहि में बिहार आ खासकए मिथिला सामने एकटा बड्ड पैघ संकट छैक जे ई आआंर पाछू नै फेका जाय। उदाहरण के लेल ई आंकड़ा आंखि खोलि दै बला अछि जे एकटा गोआ मे रहय बला औसत आदमी के प्रतिव्यक्ति आमदमी एकटा औसत बिहारी सं सात गुना बेसी छैक आ एकटा पंजाबी के आमदनी पांच गुना बेसी छैक। बिहारो मे अगर क्षेत्रबार आंकड़ा निकालल जाय त बिहार के दक्षिणी( एखुनका गंगा पार मगध आ अंग) एवम पश्चिमी ईलाका बेसी सुखी अछि, आ ओकर जीवनशैली सेहो दू पाई नीक छैक। त एहन में सवाल ई जे फेर रस्ता की छैक। की मिथिलांचल के लोक एहिना दर-दर के ठोकर खाईके लेल दुनियां में बौआईत रहता अथवा हुनको एक दिनि विकास के दर्शन हेतन्हि।
मिथिलांचलक ई दुर्भाग्य छैक जे एकर एकटा पैघ हमरा हिसाब सँ आधा सँ बेसी इलाका बाढ़ि में डूबल रहैत छैक। बाढ़ि के समस्या निदान सिर्फ राज्य सरकार के मर्जी सँ नहि भ सकैत बल्कि अहि में केंद्रसरकार के सहयोग चाही। पिछला साठि साल मे बिहार क नेतागण अहिपर कोनो गंभीर ध्यान नहि देलन्हि जकर नतीजा अछि जे बाढ़ एखन तक काबू मे नहि आबि रहल अछि। पछिला कोसी के आपदा एकर पैघ उदाहरण अछि, आब नेतासब के आँखि कनी खुललन्हि अछि, लेकिन एखन सँ मेहनत केल जायत त अहि मे कमस कम 20 साल लागत।
बाढ़ि सिर्फ संपत्ति के नाश नहि करैत छैक, बल्कि आधारभूत ढ़ांचा जेना सड़क, रक्षेवे आ पुल के खत्म क दैत छैक। एहन हालत मे कोनो उद्योग के लगनाई सिर्फ दिन मे सपना देखैक बराबर अछि।
किछु गोटाके कहब छनि जे बिहार मे उद्योग धंधा कएल जाल बिछाकएकर विकास केल जा सकैछ। लेकिन जखन सड़क आ विजलिये नहि अछि त केना उद्योग आओत। दोसर बात ई जे पछिला अविकासक चक्रक फलस्वरुप आबादीक बोझ एतेक बढ़िगेल अछि जे पूरा इलाका मे कोनो खाली जमीन नहि अछि जतय पैघ उद्योग लगायल जा सकय। सिंगूर के उदाहरण सामने अछि। महाशक्तिशाली वाममोर्चा के सरकार के जखन बंगाल मे 1000 एकड़ जमीन नै ताकल भेलैक त एकर कल्पना व्यर्थ जे दरभंगा आ मधुबनी मे सरकार कोनो पैघ उद्योग के जमीन दै। दोसर बात इहो जे पूरा मिथिला के पट्टी मे, मुजफ्फरपुर सँ ल क कटिहार तक कोनो पैघ संस्था-चाहे ओ शैक्षणिक होई या औद्योगिक- नै छै जे एकमुश्त 3-4 हजार लोक के रोजगार द सकै। हमरा इलाका मे शहरीकरण के घनघोर अभाव अछि। जतेक शहर अछि ओ एकटा पैघ चौक या एकटा विकसित गाँव स बेसी नहि।एकटा ढंग के इंजिनियरिंग या मेडिकल कालेज नहि, एकटा यूनिवर्सिटी नहि। कालेज सब केहन जे 4 साल में डिग्री द रहल अछि। एक जमाना मे प्रसिद्ध दरभंगा मेडिकल कालेज मे टीचर के अभाव छैक आ कालेज जंग खा रहल अछि। हम सब एहन अकर्मण्य समाज छी जे कोसी पर एकटा पुल बनबैक मांग तक नै केलहुँ,हमर नेता हमरा ठेंगा देखबैत रहला। आब जा क रेलवे आ रोड पुल के बात भ रहल अछि।कुल मिलाकरइलाका मे सिर्फ 8-10 प्रतिशत लोक शहर में रहैत छथि, ई ओ लोक छथि जिनका सरकारी नौकरी छन्हि। ई शहर कोनो उद्योग के बल पर नहि विकसित भेल। बाकी आबादी-लगभग 40 प्रतिशत दिल्ली आ पंजाब मे अपन कीमती श्रम औने-पौने दाम मे बेच रहल अछि। मिथिला के श्रम पंजाब मे फ्लाईओवर आ शापिंग माल बनाब मे खर्च भ रहल अछि, कारण कि हमसब एहेन माहौल नहि बनौलिएकि जे ओ श्रम अपन घर मे नहर या सड़क बनब मे खर्च होअए।
तखन सवाल ई जे फेर उपाय की अछि। हमरा ओतय पैघ उद्योग नहि लागि सकैछ, रोड नहि अछि बाढ़ि के समस्या विकराल अछि, त हमसब की करी। लेकिन नहि, मिथिला के विकास एतेक पाछू भ गेलाक बाद एखनों कयल जा सकैछ। आ अहि विषय मे कय टा विचार छैक।
किछु गोटा के कहब छन्हि जे एखुनका बिहारक सरकार मगध आ भोजपुर के विकास पर बेसी ध्यान द रहल छैक। एकर वजह जे सत्ता मे पैघ नेता ओही इलाका के छथि, लेकिन दोसर कारण इहो जे ओ इलाका बाढ़िग्रस्त नहि छैक। पैघ प्रोजेक्ट के लेल ओ इलाका उपयुक्त छैक। उदाहरणस्वरुप-एनटीपीसी, नालंदा यूनिवर्सिटी आ आयुध फैक्ट्री-ई तमाम चीज मगध मे अछि। दोसर बात ई जे नीक कनेक्टिविटी भेला के कारणे भविष्य मे जे कोनो निवेश बिहार मे हेतैक ओ सीधे एही इलाका मे जेतैक। कुलमिलाक आबै बला समय मे बिहार मे क्षेत्रीय असमानता बढ़य बला अछि। एहि हालत मे किछु गोटा अलग मिथिला राज्यक मांग क रहल छथि, आ हमरा जनैत संस्कृति स बेसी-अपन आर्थिक विकास के लेल ई मांग उचित अछि।
मिथिला विकास माडेल की हुअके चाही।मिथिला के जमीन दुनिया के सबस बेसी उपजाऊ जमीन अछि। हमसब पूरा भारत के सागसब्जी आ अनाज सप्लाई क सकैत छी। लेकिन ओ सब्जी दरभंगा सं दिल्ली कोना जायत। एहिलेल फोरलेन हाईवे आ रेलवे के रेफ्रजेरेटर डिब्बा चाही। दोसर गप्प हमर इलाका के एकटा पैघ रकम दोसर राज्य मे इंजिनियरिंग आ मेडिकल कालेज चल जाईत अछि। हमरा इलाका मे 50 टा इंजिनीयरिंग कालेज आ 10 टा मेडिकल कालेज चाही। ई कालेज भविष्य में विकास के रीढ़ साबित होयत। हमरा इलाका मे छोट-छोट उद्योग जेना स़ाफ्टवेयर डेवलपमेंट या पार्टपुर्जा बनबै बला फैक्ट्री चाही जहि मे 100-200 आदमी के रोजगार भेटि जाय। लेकिन एहिलेल 24 घंटा विजली चाही। ई कतेक दुर्भाग्य के बात जे बगल के झारखंडक कोयला के उपयोग त पंजाब में बिजली बनबैक लेल भ जाय छैक लेकिन हमसब एकर कोनो उपयोग नहि क रहल छी। आई अगर हमरा अपन इलाका मे 24 घंटा बिजली भेटि जाय़ त पंजाब जाय बला मजदूर के संख्या में कम सं कम आधा कमी त पहिले साल भ जायत। भारत के दोसर राज्य सिर्फ आ सिर्फ अही इलाका के सस्ता श्रम के बले तरक्की क रहल अछि। हमसब ई जनितो किछु नहि क रहल छी, ई दुर्भाग्य के गप्प।
मिथिला मे पढ़ाई लिखाई के प्राचीन परंपरा रहलैक अछि लेकिन सुविधा के अभाव मे ई धारा हाल मे कमजोर भेल अछि। खासकए महिला शिक्षा के दशा-दिशा त आर खराब अछि। एकटा लड़की कतेको तेज कियेक ने रहेए ओ 10 सं बेसी नहि पढ़ि सकैत अछि कारण घरक क्षेत्र कालेज नहि छैक। हमरा अगर तरक्की करय के अछि त इलाका मे एकटा महिला यूनिवर्सिटी त अवश्ये हुअके चाही, संगहि सरकार के ईहो दायित्व छैक जे हरेक ब्लाक में कमस कम एकटा डिग्री कालेज के स्थापना होअए। देश के विकास मे अहि इलाका के संग कतेक भेदभाव कएल गेलैक आ हमर नेतागण कतेक निकम्मा छथि-एकर पैघ उदाहरण त ई जे इलाका मे एकहुटा केंद्रीय संस्थान नहि छैक। एकटा यूनिवर्सिटी नहि, एकटा कारखाना नहि। आब जा क कटिहार मे अलीगढ यूनिवर्सिटी, दरभंगा में आईआईटी आ बरौनी मे फेर सं खाद कारखाना के पुनर्जीवित करैक बात कयल जा रहल अछि। हमरा याद अछि जे साल 1996 तक दरभंगा तक मे बड़ी लाईन नहि छलैक। हमसब कुलमिलाकर, कोनो तरहक संपत्ति के निर्माण नहि करैत छी। हमसब अपन आमदनी दोसर राज्य भेज दै छियैक-बेटा के बंगलोर मे इंजिनीयरिंग करबै सँ ल क दियासलाई तक खरीदै मे। हमर पूंजी अपन राज्य, अपन इलाका के विकास में नहि लागि रहल अछि। एहि स्थिति के जाबत काल तक नहि बदलल जायत हम किछु नहि क सकैत छी।
(विदेह पेटारसँ)
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मनोज झा मुक्ति
निष्कर्षविहीन सम्मेलन !
१९म् अन्तराष्ट्रिय मैथिली सम्मेलन वितलाहा चैतमासक २९ आ ३० गते नेपालक राजधानी काठमाण्डूमें सम्पन्न भेल । मूदा जाई तरहक उत्साह मोनमें छल, बहुत कचोट लागल सम्मेलनकेँ उद्घाटन आ समापन देखिकऽ । सम्मेलनक जिम्मा पओने वरिष्ट पत्रकार एवं राजनीतिकर्मी रामरिझन यादवक कार्यक्षेत्र काठमाण्डूसँ बाहर भेलाक कारणे आयोजन कठीन होएब निश्चिते छल । अखनधरि देखल जाएबला मैथिली कार्यत्रmम आयोजनाक खराब पक्ष सबसँ अछुत इ सम्मेलन नहि रहऽ सकल । कोनहुँ समिति बनएबाकालमे, समितिमे रहिकऽ जाइ तरहे बहुतोलोक सुति रहैत छथि सैह विडम्बना अहु सम्मेलनमें देखलगेल । अपन—अपन काज गछियोकऽ नई करबाक प्रवृति अखन अपना समाङ्गसँ नई हटल से प्रमाणित केलक अछि ई सम्मेलन । सम्मेलनमे नेपाल आ भारत दूनु देशक मिथिलाञ्चलसँ ३०० सहभागी होएबाक बात छल । सहभागिसब ऐलथि, मूदा निक जकाँ व्यवस्थापन नहि भऽ सकल । सम्मेलनमें मैथिली आ मिथिलाप्रति अनुरागी कम आ कोनो पार्टीक कार्यकर्ता सभक बेसी जमघट बुझाइत छल । २९ गते ९ बजे बसन्तपुरसँ धोती—कुर्ता आ पाग पहिरिकऽ झाँकी निकालबाक कार्यत्रmम छल, मूदा ११ बजेधरि एक डेढसय लोकक उपस्थिति मात्रे छल । मैथिली आ मिथिलासँ सम्वद्ध सँघ—संस्थासब काठमाण्डू उपत्यकामें ३ लाखसँ बेसी मैथिल रहल ठोकुवा दाबी कयल जाएत अछि । अपनाके मैथिलीक योद्धा कहऽबला किछु गोटे त उपराग देबऽमे सेहो पाछा नई परलथि "जे हमरा खबरि किया नई भेल" ? देखिकऽ अजगुत लागल आ दुःख सेहो जे जौ हम अपना आपके मैथिलीके योद्धा कहैत छी त कि व्यत्तिmगतरुपसँ खवरि केनाई जरुरिए छियै ? कोनो माध्यमसँ जानकारी होएब पर्याप्तता नहि छई ? हँ, कहुनाकऽ विलम्बेसँ सही बसन्तपुरसँ जाउलाखेलधरि धोती—कुर्ता त कमसम, मूदा पागक प्रदर्शन करैत जुलुश पहुँचल । जुलुश प्रदर्शन वास्तविकरुपमे एहि सम्मेलनक सबसँ नीक पक्ष रहल । एकरा नेपालमें मिथिला आ मैथिलक स्थानके प्रमाणित करबामे ठोस कदमके रुपमें अवश्य लेल जा सकैय । सम्मेलनके उद्घाटन कयलथि नेपालक प्रधान मन्त्री प्रचण्ड । ओ अपना भाषणसँ सहभागि सभक मोन जितलथि ताइमें कोनहुँ शंका नई । काठमाण्डू उपत्यकामे कवि कोकिल विद्यापतिक शालिक रखबाक बात सहभागि सबहक दवावपर त कहलथि मूदा राखि देताह ताइके बादेमे पतियाओल जाऽसकैय । तहिना सम्मेलनमे उपस्थित अतिथि फोरमक नेता जय प्रकाश प्रसाद गुप्ता त अन्तराष्ट्रिय विमानस्थलक नाम विद्यापति विमान स्थल होएबाक कहिकऽ प्रचण्डसँ भाषणमें एक कदम आगा रहल प्रमाणित कयलथि । ओ कहलथि जे "जौ काठमाण्डूक विमान स्थलक नाम विद्यापति विमान स्थल नई होएत त निजगढमे विद्यापति अन्तराष्ट्रिय विमान स्थल बेगर हमसब मानऽबला नई छी" । जे हुए बहुत निक गप्प जौं हुनक बात मात्र नेताक भाषण जौं नई होए । सम्मेलनमें नेपालक हिन्दी आन्दोलनके अगुवा आ अन्तराष्ट्रिय मैथिली परिषद् नेपालक अध्यक्ष राजेश्वर नेपाली अपनाके आसन ग्रहण नई कराओलगेल कहिकऽ सम्मेलन बहिष्कार करबाक घोषण त कएलथि मूदा किछुएकालकबाद ओ मञ्चपर आसीन भेल नजरि औलथि । पहिलदिनक कार्यत्रmम साँस्कृतिक कार्यत्रmम करैत सम्पन्न भेल । दोसर दिन अर्थात चैत ३० गते ९ बजेसँ विचार गोष्ठीक कार्यत्रmम छल, मूदा कार्यत्रmमक संयोजक बहुभाषाविद् गंगा प्रसाद अकेला अपने १० बजे एलाह । विचार गोष्ठीमे दूगोट कार्यपत्र प्रस्तुतक कार्यत्रmम छल, ताइमे नेपालदिससँ राम रिझन यादव आ भारतदिससँ डा धनाकर ठाकुरक कार्यपत्र रहनि । कोनो सम्मेलनमे विचार गोष्ठीक सत्रके बहुत पैघ महत्व देल जाइत छैक, मूदा एहि सम्मेलनमे विचार गोष्ठीक सत्र सबसँ महत्वहीन बुझि पडल । विचार गोष्ठीमे गन्थन क कऽ कोनो निष्कर्ष निकालि ताइपर कार्य आगु बढएबाक कोनो सम्मेलनके मुख्य उद्देश्य रहल करैत अछि । मूदा एतऽ अपन अपन कार्यपत्र प्रस्तुत कयलाकबाद प्रस्तोतासब आ अधिकाँश मञ्चपर आसिन व्यक्तिसब मञ्च छोडिकऽ निपत्ता भऽ गेलाह । ओना टिप्पणी करबाकलेल कुल २६ गोटे मञ्चपर गेलाह, मूदा कार्यपत्रपर बहुत कम आ प्रायःलोक अपने राग अलापि कऽ विचार गोष्ठीके अपन व्यक्तिगत विचारक मञ्च बनावऽमे सेहो पाछा नई परलाह । सम्मेलन कोन निष्कर्षपर पहुँचल कोनो सहभागिके मालुम नई भऽसकल । सम्मेलनमे विचार गोष्ठीक सत्रकबाद कवि गोष्ठीक आयोजना भेल छल । ताही बीचमे सम्मेलनक संयोजक रहल राम रिझन यादव अन्तराष्ट्रिय मैथिली परिषद् नेपालक समितिके नव कार्यकारिणीक घोषणा कएलथि । जाहिमे प्रमुख पदक अलावा जे जे मञ्चपर आबि बजने छलथि ओ सबगोटे कार्य समितिक सदस्य भेल घोषणा कएलथि । घोषणा कएल पश्चात किछु युवा एहन गलत प्रत्रिmयाके विरोध करैत हो—हल्ला करबाक शुरु कएलथि । ओना सम्भवतः ई पहिल एहन कार्यसमितिक निर्माण होएत जाहिमें मञ्चपर जे जे जाकऽ बजलाह ओ सबगोटे सदस्य बनाओलगेल होई । तहिना कवि गोष्ठीक सत्रमे सेहो तहिना देखलगेल । कवि गोष्ठीमें सोंचसँ बेसी कवि लोकनिकेँ कविता वाचनकलेल आओल मूदा समयक आभावके कारणे सभ कविके मौका नई देबऽ सकलाक कारणे किछु कविके मोनमे दुःख होएब अतिश्योत्तिm नहिं । काठमाण्डूमे सेहो एतेकरास मैथिली कविता आएब बहुत उत्साहक पक्ष कहल जाऽसकैया मैथिलीक लेल । सम्मेलनमें किछु गोटे सम्मेलनकेँ वास्ते अपन काठमाण्डू यात्राके व्यक्तिगत काजमें सेहो प्रयोग करैत देखलगेल । सम्मेलन छोडिकऽ काठमाण्डू घुमबाक वास्ते आएल जकाँ देखनिहार सहभागि सबहक सेहो कमी नई छल । समग्रमे मैथिलक वर्चश्वताके काठमाण्डूमे स्थापित करबाक पक्षमे सफल रहल १९म् अन्तराष्ट्रिय मैथिली सम्मेलन, उद्देश्य आ निष्कर्ष बिहीन बुझाएल ।काठमांडू नेपाल
(विदेह पेटारसँ)
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सुमित आनन्द
भारत-नेपालक मिथिला हस्तशिल्प कलामे असीम सम्भावना
भारत-नेपालक मिथिला हस्तशिल्प कलामे असीम सम्भावनापर संगोष्ठी बी.पी.कोइराला नेपाल-भारत प्रतिष्ठान, नेपाल राजदूतावास, नई दिल्लीक तत्वावधानमे मधुबनी नगर भवनमे भेल। आलेख वाचन सत्र १८.०९.१० केँ आयोजित भेल। उद्घाटन सत्रक प्रारम्भ १८.०९.१० केँ मधुबनीक जिलाधिकारी श्री संजीव हंस (आइ.ए.एस.) द्वारा दीप प्रज्वलितक संग भेल। श्री जयप्रकाश नारायण पाठक, नयन कुमार मांझी, मेधा कुमारी, आरती मिश्रा आ ज्योति द्वारा मंगलाचरण तथा ओडिसी नृत्य प्रस्तुत कयल गेल। अतिथि गण सभक सम्मान एवं स्वागत भाषण अध्यक्ष, विश्वविद्यालय संगीत एवं नाट्य विभाग डॉ. पुष्पम नारायण द्वारा कयल गेल। अंजली श्वेता आ तुलसी द्वारा स्वागतगान गाओल गेल। मंच संचालक डॉ. अमरनाथ सिंह बीजभाषण लेल विश्वविद्यालय इतिहास विभागक अवकाशप्राप्त विभागाध्यक्ष डॉ. रत्नेश्वर मिश्रकेँ आमंत्रित कयलनि। उद्घाटन भाषण जिलाधिकारी श्री संजीव हंस कयलनि। एहि कार्यक्रममे दुनू देशक कलाकारगण उपस्थित छलाह। मुख्य अतिथिक रूपमे श्री उमाकान्त पाराजुली, सांस्कृतिक परामर्शदाता, नेपाल राजदूतावास, नई दिल्ली छलाह। मुख्य अतिथि अधीक्षण पुरातत्वविद् डॉ. संजय कुमार मंजुल छलाह। अध्यक्षीय उद्बोधन विश्वविद्यालय हिन्दी विभागक अवकाश प्राप्त विभागाध्यक्ष डॉ. अजीत कुमार वर्मा कयलनि। कार्यक्रमक संचालन डॉ. अमरनाथ सिंह, अंग्रेजी विभाग, कुंवर सिंह महाविद्यालय, दरभंगा कयलनि। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. शम्भू कुमार साहू, अध्यक्ष, भूगोल विभाग, जे.एम.डी.पी.एल., महिला कॉलेज, मधुबनी कयलनि। प्रथम सत्र आलेख वाचन सत्रक शुभारम्भ अपराह्ण ०४.३० बजे भेल। कार्यक्रमक संयोजिका डॉ. पुष्पम नारायण पाग एवं चादरिसँ विद्वान आलेख वाचक एवं मंचस्थ अतिथि लोकनिक स्वागत कयलनि। एहि सत्रक अध्यक्षता श्री उमाकान्त पाराजुली कयलनि। एहि सत्रक आलेख वाचक लोकनि छलाह- श्री महेन्द्र मलंगिया, श्री कृष्ण कुमार कश्यप, श्रीमति मंजू ठाकुर, श्रीमति रानी झा, डॉ. सुरेन्द्र प्रसाद साहा एवं डॉ. कमलानन्द झा। हिनका लोकनिक व्याख्यानक विषय क्रमसँ छलनि: -भारत की मिथिला हस्तशिल्प कला की प्राचीनता एवं आज का स्वरूप -मिथिला हस्तशिल्प कला में बाजारीकरण की सम्भावना -मिथिला हस्तशिल्प और महिला रोजगार- नेपाल के सम्बन्ध में -मिथिला हस्तशिल्प कला और महिला रोजगार- भारत के सम्बन्ध में - मिथिला हस्तशिल्प कला की कठिनाइयाँ - मिथिला हस्तशिल्प कला में ह्रास- एक चिन्तन सांस्कृतिक कार्यक्रम सत्र १८.०९.१० सांस्कृतिक कार्यक्रमक अन्तर्गत डोमकछ आ पमरियाक प्रस्तुति कलाकार द्वारा कयल गेल। एहि सत्रक संचालक रंगकर्मी डॉ. सुनील कुमार ठाकुरजी रामचरित मानसक प्रथम श्लोकसँ वाणी आ विनायकक आराधना कयलनि। कार्यक्रमक अन्तमे डॉ. सुनील कुमार ठाकुर सत्रावसान “जय हिन्द, जय नेपाल” कहि कऽ कयलनि। द्वितीय सत्र १९.०९.२०१० केँ १०.३० बजे डॉ. नरेन्द्र नारायण सिंह निराला जीक अध्यक्षता तथा श्री सुनील मंजुल एवं श्रीमति रानी झा क मंच संचालनसँ सत्र प्रारम्भ भेल। एहि सत्रमे मुख्य अतिथिक रूपमे नेपाल राजदूतावासक सांस्कृतिक परामर्शदाता श्री उमाकान्त पाराजुली एवं श्रीमति शशिकला देवी छलथिन। हस्तशिल्प एवं वस्त्र मन्त्रालय, भारत सरकारक प्रतिनिधि विपन कुमार दास, चित्रकार कृष्ण कुमार कश्यप, रमेश झा (भारतीय स्टेट बैंक), प्रो. अरुण कुमार मिश्र, प्रो. ब्रज किशोर भंडारी, स्वैच्छिक संस्थाक सुनील कुमार चौधरी, महेन्द्र लाल कर्ण एवं प्रो. गंगा राम झा प्रश्न, समस्या एवं सुझाव प्राप्त कयलनि।।
(विदेह पेटारसँ)
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उमेश कुमार महतो
(पुत्र श्री केशव महतो, बहादुरगंज स’ रिपोर्ट)
बाढक स्थिति बडे खतरनाक रहल, आब कोना के ओ बीत गेल। हमर सभक गाममे कोनो राहत कर्मी नै अएला, नेता सभ चुनाव मे अबै छथ, मुदा रौदी दाही मे नै। गाममे सरकारी स्कूल अछि, सप्ताहमे दू दिन खुजल रहै ये, कशीबारी मे। चारि दिन बन्दे रहै ये। गामक लोक खेती बारी करै ये , धान,गेहूँ परवल खीरा, करैला, कद्दू ,तारबूज ,गोभी, बैगन आ मछली मारै ये। विराटनगर नेपाल मे सेहो लोक सभ सम्बन्धी सभ छथि, 20 किमी दूर बहादुरगंजमे हास्पीटल अछि, गाममे झोलाछाप हास्पीटल अछि जे झोलाछाप डाक्टरक झोरामे रहै ये। पिछला साल एक गोटे के बहादुर गँज हास्पीटल् ले गेलौ, डाक्टर सभ पानी चढा देलकै , तीन दिन तक पानी चढैते रहलै, कियो खेनाइ नै देलकै, ओ पेट फूलि क मरि गेल। घर सभ फूसक आ घासक, धानक पुआरक बनल छै, अगिलग्गेमे से सभ जरैत रहैत छै। एक-एक्अ आदमी के 5-6 टा बच्चा जिबैत रहैत छै, 9-10 बच्चामे। विराटनगर लग गाम मे मौसाक घर गेलौ, ओतए सरकार मैथिली या नेपाली बाजय लेल कहने अछि, सभ गोटे ओत मैथिली बाजै छथि, भारतमे स्थिति खराप।
नेपालमे घर फूसोके छै मुदा बेसी लकडी आ टीना के छै। ओत खेती बारी भारते जेका छै। ओतहुओ हास्पीटल दूरे छै। ओते रिक्शा टेम्पू नै चलै छै, खाली बस चलै छै। ओत गाम्मे सेहो बिज्ली छै, गाममे मुदा रोड नै छै, ऊबर खाबर छै, बरसातमे कीचड्क्ष भे जाइ छै। शहरमे रोड ठीक छै। विराटनगर से 20 किलोमीटर दूर नया बजार हटियामे आधा बजार मे बजार आ आधामे दारू बिकाइत छै, जतए छोट से पैघ बच्चा सभी दारू पीबै छै। आर समाचार बाद मे।
(विदेह पेटारसँ)
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गजेन्द्र ठाकुर
मैथिली सी.डी. एल्बम
धनीराम महतो (सल्हेश आदि दरभंगा रेडियो स्टेशन- आब अनुपलब्ध- दरभंगा रेडियो स्टेशन अपन आर्काइवसँ एकरा निकालत तहूपर संदेह)
कारिक झूमर- जागे महतो आ जागे राउत (गंगा कैसेट्स)
सोखा झूमर- जागे महतो आ जागे राउत (टी सीरीज)
गोविन्द झूमर- जागे महतो आ जागे राउत (गंगा कैसेट्स)
गहील माता के पूजा- बिरासी सदा (गंगा कैसेट्स)
काली माइ के पूजा- बिरासी सदा (गंगा कैसेट्स)
भुइंया बाबा के पूजा- बिरासी सदा (गंगा कैसेट्स)
गंगा माइ के पूजा- बिरासी सदा (गंगा कैसेट्स)
भुइया बाबा -भगैत प्रसंग- रमाकान्त पजियार (गंगा कैसेट्स)
बाबा बख्तौर भुइया बाबा- सकलदेव दास आ साथी (सुप्रीम वीडियो)
भक्त ज्योति (भगैत प्रसंग)- रंजीत पजियार (नीलम वी.सी.डी.)
बैताली यादव- तपेश्वर यादव आ कामेश्वर यादव (गंगा कैसेट्स)
कुँवर बृजवान- (गंगा कैसेट्स) [गीत मैथिली संवाद हिन्दी]
भुखना-भुखनी- राम खेलावन महतो, नेथल मण्डल, महीन्दर यादव, राम असेश्वर दास, हेमू मुखिया आ बिल्टु मुखिया [गीत मैथिली संवाद मैथिली]
रेशमा चूहड़मल- रामवृक्ष ठाकुर एण्ड पार्टी (गंगा कैसेट्स) [गीत मैथिली संवाद मैथिली आ हिन्दी]
राजा सल्हेश- विदेशिया नाच पार्टी, देवेन्द्र साहनी आ पार्टी (गंगा कैसेट्स) [गीत मैथिली संवाद हिन्दी]
आल्हा रुदल झगरू बध- - विदेशिया नाच पार्टी, देवेन्द्र साहनी आ पार्टी (गंगा कैसेट्स) [गीत मैथिली संवाद हिन्दी]
संत बाबा करू खिरहरी- रुदल पजियार (जयश्री कैसेट्स) [गीत मैथिली आ हिन्दी संवाद हिन्दी]
(विदेह पेटारसँ)
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३. पद्य
३.१.जगदीश चन्द्र ठाकुर ‘अनिल’- २ टा बाल गजल
३.२.आनन्द कुमार झा- दुर्दशावस्था
३.३.आनन्द कुमार झा- एकटा नव कहानी गढबाक अछि
३.४.प्रदीप पुष्प- २ टा रुबाइ
३.५.रमन कुमार झा- केबार(पराती)
३.६.रमन कुमार झा- हमरा आंगन
३.७.रमन कुमार झा- टपटप नोर चुबैय
३.८.रमन कुमार झा- मनभावन मइया मोरी
३.९.अशोक दुलार- परतारब फेर
जगदीश चन्द्र ठाकुर ‘अनिल’
२ टा बाल गजल
१
राति सकाले सुतबै हम
भोरे-भोरे उठबै हम
नमस्कार करबै सभकें
सबहक आदर करबै हम
आसन-प्राणायाम करब
तन-मन निरोग रखबै हम
नहि ककरो हम दुख देबै
मधुर सत्य टा बजबै हम
हम छी सबहक सभ हमर
अहिना सभ दिन बुझबै हम
मेल-जोल राखब सभसं
नहि ककरहुसं लड़बै हम
जहिना रहला राम-लखन
तहिना सभदिन रहबै हम
( मात्रा-क्रम : 2 2 2 2 2 2 2 )
दू टा लघुकें एक दीर्घ मानल गेल अछि |
छठम शेरमे एक-एक टा लघुकें दीर्घ मानल गेल अछि |
२.
आखर अकानिक’ चलू
लक्ष्य संधानिक’ चलू
एलहुँ कतयसं कोना
पहिने इ जानिक’ चलू
खेल थीक जीवन ई
आबो त मानिक’ चलू
अहूँ छी हनुमानजी
सागर इ फानिक’ चलू
काज देत बरखामे
छत्ता इ तानिक’ चलू
( मात्रा-क्रम : 2 2 2 2 2 2 )
दू टा लघुकें एक दीर्घ मानल गेल अछि |