बीहनि कथाक दशा- दिशा
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पौराणिक उत्सें( स्रोतें) बहरएल कथाक ,संशोधित ,संबर्द्धित ओ परिष्कृत आधुनिक संस्करण थिक " बीहनि कथा"! जकरा स्पष्ट कथ्य आ गसल शिल्पें न्यूनतम बीस आ अधिकतम डेढ़ सए शब्द धरि लिखबाक प्रावधान ऐछ! इ आन कोनो विधाक विधान्तरण, नामान्तरण वा कायान्तरण नै, संपुष्ट कथाक एकटा स्वतंत्र विधा थिक!
वर्तमान स्थिति:-
गद्य लेखन उपन्यास( नोवेल) सं शुरू भ' लघुकथा (शॉर्ट स्टोरी) होइत बीहनि कथा ( सीड स्टोरी) धरि पहुंचल. वर्तमान मैथिली कथा साहित्य मध्य पूर्ण प्रासंगिक , सर्व परिचित आ लोकप्रिय विधा भ' स्थापित भेल.
लघुकथा छल त' बीहनि कथाक खगता ? :-
समयान्तरे ,विकासक क्रमे खगताक जन्म होइछ. से समयावधिक अनुसारे प्रासंगिक होइछ आ तखने ओकर पूर्ति सेहो आवश्यक. जेना जहन चलनसारि मे समाद लेल चिट्ठी छल त' तार ( टेलिग्राम)किए आयल? चिट्ठी मे लोक अपन मोनक बात खुलि के लिखै छल, कोनो बन्हन आ नियम/ प्रावधान सं मुक्त! मुदा तार? तार( टेलिग्राम) मे अपन बातक निचोड़ किछु सिमित शब्दें कहि पाठक/ पावककें पूर्णत: क्रियाशील बना दै छल. त' ' लघुकथा' चिट्ठी भेल जकरा लिखबाक कोनो सिमाना/ विधान नै, आ बीहनि कथाकें तार बुझू जे अल्प शब्दक स्पष्ट कथ्य आ गसल शिल्पें संपुष्ट कथाक खगतापूर्तिक निश्शन माध्यम भेल.
अन्य पक्ष देखू :-
भाषण- कोनो बात बजैत चलू... कोनो लगाम नै!
मुदा कोनो निश्चित विषय- बस्तु पर विद्वतापूर्ण विचार कहाइछ- बीज भाषण!
एहिना संस्कृत मे शुद्धिकरण वा सशक्तिकरण लेल रचल गेल मन्त्र( श्लोक नै) आ तकरो सक्षम वा प्रभावी बनेबाक खगतापूर्तिक लेल आयल बीज मन्त्र! जेना बीहनि कथाक कथ्यकें ( शब्द नै) विस्तार दैत शाॉर्ट स्टोरी सं नॉवेल धरि रचि सकै छी तहिना एकटा बीजमंत्र ( ऊं.. हीं.. क्लीं...) सं अनेको मंत्र जन्म लेने ऐछ! ओहिना बहुत रास कथा रहितो ओकर सशक्त वा परिष्कृत रूपमें उपस्थित ऐछ बीहनि कथा!
वैश्विक स्थिति :-
जहन हम सब विश्व विधाकें अंगिकार क' अंगेजने छी तहन अपन एकमात्र विधा " बीहनि कथा "कें विश्व भरिमें किए नै पसारि सकै छी? मुदा ताहि लेल पहिने बराबरी त' क' ली!
विश्व कथा साहित्य उपन्यास सं चलि- वॉन्डर स्टोरीज, हण्ड्रेड वर्ड स्टोरीज, फिफ्टी फाइव वर्ड स्टोरीज, वन लाइनर होइत सिक्स वर्ड स्टोरीज पर अंटकि प्रकाशन आ विमर्श मे लागल ऐछ आ हम सब एकैसम सदीमे आइयो छी बीहनि कथाकें बढ़बाक- रोकबाक घोंघाउज मे फंसल!
बीहनि कथा मैथिली कथा साहित्यक चर्चित, परिचित आ लोकप्रिय विधाक रूपें भलहिं ख्यात भेल हुअए मुदा वैश्विक परतर मे पांति सं बाहर.से अदौ काल सं! विश्व साहित्यक मुकाबले भारतीय साहित्य बड्ड पछुएल, आ भारतीय साहित्य मध्य मैथिली साहित्य मात्र पछुएलटा नै वरन् विकासक क्रम में क्रम सं बाहर हेरएल- भुतिएल!हं मौखिक आ फेसबुक पर वैश्विक सं उपर.
बीहनि कथा भलहिं मैथिली कथा साहित्यक संशोधित, परिमार्जित आ परिष्कृत आधुनिक संस्करण भ' उभरल मुदा आन भाषाक समकक्ष विधा सं बड्ड पछुएल सन! जेना बीस सं एकसए पचास शब्दमे अनबाक कारण लेखककें लघुकथाक मानसिकता सं उबारि मानस पटल पर बीहनि कथाकें समाहित करबाक उद्देश्य छल. एकरामे एखनहु कतेको दोष ऐछ जकरा आओर परिष्करणक खगता ऐछ विश्व साहित्यक धारा मे अनबाक लेल. समवेत प्रयास चलि रहल... सबहक सहयोग सादर अपेक्षितअपेक्षित!
(5 मार्च " बीहनि कथा " दिवसक शुभकामना क संग -मुन्नाजी)
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