विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका · VIDEHA · ISSN 2229-547X

गीतकार रामलोचन ठाकुर

प्रदीप पुष्प · 2021-04-01 · अंक 319

प्रदीप पुष्प- संपर्क-7903496553
गीतकार रामलोचन ठाकुर
मैथिलीक आने विधाक अनुरूप मैथिलीक गीतक उपर आलोचक लोकनि कम्म ध्यान देलनि अछि। कविताकें विशेष महत्व द' मैथिली गीतक उपेक्षा कयल गेल अछि। यद्यपि मैथिली गीतक परम्परामे महाकवि विद्यापति जकाँ गीति-काव्यक पुरोधा नीक जकाँ मुखर छथि आ हुनका बाद सेहो बहुत नीक गीतकारक श्रृंखला रहल अछि, तथापि ई कहबामे कोनो अशौकर्य नहिं जे मैथिली गीत-विधाकें ओतेक मूल्य नहि भेटि सकल जे ओकरा भेटबाक चाही। यद्यपि भिन्न- भिन्न कालमे गीतकार- कवि द्वारा रचल सुमधुर गीत मैथिल जनमानसक कंठमे अपन माधुर्य संग लोकप्रिय होइत रहल मुदा गीतक आलोचना पक्ष आ अइ वास्ते अकादमीक सहयोगक दृष्टिकोणसँ गीत विधा कविता जकाँ जगह नै बना सकल।
मैथिलीक प्रसिद्ध कवि, रंगकर्मी, आंदोलनी, पत्र-पत्रिकाक माध्यमे मैथिलीक जन- जागरण कएनिहार श्री रामलोचन ठाकुर जीक साहित्यिक अवदान बेस व्यापक अछि। एकटा समर्थ कवि, मातृभाषा अनुरागी, आन्दोलन कर्मी, पत्रकार इत्यादि विभिन्न भूमिकाक नीक जकाँ निर्वहन करितो ठाकुर जी मूलतः मैथिलीक सुंदर भविष्य लेल, मिथिलाक उत्थान लेल चिंतित स्वप्नद्रष्टा छथि।
रामलोचन जीक गीत मूलतः मिथिलाक छायाचित्र अछि। व्यापक उद्देश्य सँ रचल गेल गीतक कैनवास नमहर अछि आ आने गीतकार जकाँ वस्तुनिष्ठ आ सूक्ष्म नै भ' पबैत अछि। गीतकार ठाकुरजी निश्चित रूपेण प्रगतिशीलता प्रतिनिधि छथि। हिनक गीत यथार्थक भूमि पर ठाढ भेल मजगूत घर जकाँ अछि। अपना समयक समाज आ देशक समुचित चित्र उपस्थित करबाक सफल प्रयास ठाकुर जी कयने छथि। हिनक गीत समाजक वर्ग- संघर्ष केँ, असमानताकेँ प्रतिध्वनि थिक। ई अपन गीतमे क्रान्तिक आह्वान करैत छथि। हिनकामे समतामूलक समाजक प्रबल भावना देखाइत अछि। हिनक गीत कोनो नवयुवतीक प्रति रचल गेल उपमा- उपमेय आ श्रृंगारक वर्णमाला नै, अपितु हिनक गीत भूख, ब्याधि, बेकारी, शोषण आ अपन भाषा- संस्कृतिक प्रति हिनक अगाध अनुरागक गान थिक। श्रमिक- मजदूर वर्गक आक्रोश, पलायन, भूखमरी, कृषकको अधोगति हिनक मूल- विषय रहलनि अछि।
अपूर्वाक भूमिकामे श्री नवीन चौधरी लिखैत छथि-"रामलोचन ठाकुर जीकेँ यशस्वी गीतकारक पतियानीमे देखब कोनो आलोचककेँ नै अघरतनि। एहि पोथीक गोटेक दर्जन गीतमे ओ सामर्थ्य छै।" हम आदरणीय चौधरी जीक एहि कथनसँ सहमति नै रखैत छी। यथार्थक तेहेन स्वर ठाकुर जीक गीतमे प्रमुखता सँ उपस्थित छन्हि जे निश्चित रूपेण हिनका अग्रणी गीतकारक रूपमे स्थापित करैत अछि। ठाकुर जीक गीत परम्परागत गीतसँ पृथक अछि। हिनक गीतक कथ्य आ शिल्प दुनू परम्परा सँ अलग अछि। उदाहरण लेल- हिनक गीत " उठ - उठ रओ बौआ"मे ठाकुर जी कहैत छथि-" काल्हि जनगणना थिक गामे पर रहब, ठीक - ठीक लिखाएब कने जेना - जेना कहब, माइक जे भाषा से मैथिली लिखाएब, देखब हिन्दी ने लिखए मुझौसा-"
एकटा दोसर गीतमे लोक गीतक शैली लिखल पर ई बेस चोटगर अछि_ " करिया झुम्मरि खेलै छी, ढील पटापट मारै छी, लीख पटापट मारै छी, शोणित पीबै जे मनुखकेँ, तकरे मारै - जारै छी,"
हिनक एकटा प्रसिद्ध गीत अछि-'बिढनी कटलकौ,तुम्मा फुलेलकौ, फेर कन्हुआइ छौ तोरे पर'। ई गीत पाँच बरख पर नेतालोकनि द्वारा चुनाओ जीत क' जन- समुदायक शोषण पर बेस धरगर प्रहार अछि। संगहि, गीतकार अइ गीतमे मतदान करय बला समुदायकेँ चेतौनी द' रहल छथि।
शिल्पक दृष्टिसँ गीत लेल आवश्यक छैक ओकर गेयता।ताहि लेल आवश्यक छैक जे ओकर अंतराक मीटरमे तारतम्य होइ जाहिसँ ओ प्रभावी रूपे गाओल जा सकय।मुदा ताहि दृष्टिकोणसँ हिनक गीत बेसी ठाम उपयुक्त नै लगैए।उदाहरण लेल-
"सखि हे हम की गायब गीत" शीर्षक मे कोनो अंतरा तीन पाँतीक अछि त' कोनोमे चारि -पाँच पाँतीक। तहिना -" इतिहास युग नवीन के" आ " क्रांतिक आह्वान " मे सेहो साम्यताक अभाव। हिनक बेसी गीतक शिल्प नजरिए ओतेक प्रभावी नै। पोथी 'अपूर्वा'क प्रारंभमे आदरणीय सुनील चौधरी ललन जीक ई कथन -" रामलोचन ठाकुर लग कतोक वस्तुक अभाव छनि। आलोचनाक निष्पक्ष कसौटी पर राखि क' देखल जाए त' किछु दोष अवश्य भेटत। ठाम - ठाम हुनकर मान्यतासँ सहमति होएब कठिनाह बुझि पड़त......। "सँ हमहुँ सहमति रखैत छी। प्रगतिशीलता आ यथार्थवाद केँ समेटैत,परम्परागत गीत-शैली केँ अनठबैत जँ अहाँ हिनक गीतक उद्देश्य आ विषय-वस्तुक प्रासंगिकता मात्र धरि ध्यान राखी त' हिनक गीतकारी नीक छनि आ मिथिला- मैथिल लेल प्रभावोत्पादक छनि। मुदा, ओइमे आन आवश्यक गुणक अभाव। रामलोचन जी बहुतो विधा पर अपन कलम चलौलनि।एकटा गीतकारक संभावनाक रूपमे जँ विचार करी त' ओ विषय - चयन आ तत्कालीन परिवेश ( अखनहुँ प्राय: ओहिना) केँ चित्र उपस्थित करबामे सफल छथि मुदा गीतक आन तत्वक अभाव कारणे ओ बेसी काल धरि गीतकारक रूपमे आकर्षक नै लगै छथि।

Suggested citation: प्रदीप पुष्प. “गीतकार रामलोचन ठाकुर.” Videha — First Maithili Fortnightly eJournal, issue 319, 2021-04-01. https://www.videha.co.in/research/2021/319/गीतकार-रामलोचन-ठाकुर.htm

मूल विदेह अंक / Original issue