डाॅ. किशन कारीगर-१. विलुप्त होइत मिथिला के लोक संस्कृति घोड़ा (कठघोड़वा) नाच २.कोन बिरड़ो मे उधिया गेल?कतअ हरा गेल मिथिला के नटुआ नाच?
१
विलुप्त होइत मिथिला के लोक संस्कृति घोड़ा (कठघोड़वा) नाच
आरौ तोरी के देखही रौ घोड़ा लथारो मारै छै? अच्छा चल त घोड़ावला के छू क देखबै? नै रौ अखनी खूब जोर स लथार फेकै हेलै बलू चोट लगतौ तब. इह कोनो देह टुटि जेतै की? कनि मनि चोट लगतै त कि हेतै रौ बाद मे देह झारि लेब कीने?
छै़डा मारेड़, धिया पूता, बुढ़ पुराण सब कोइ गाम घर दिस बेस मोन स घोड़ा नाच देखै जाइ छलै.
आब नै ओहेन घोड़े वला, नै ओहेन डफली बौंसली वला, आ नै ओहेन छमकी नटुए सब रहल आ नै आब तेहेन घोड़ीनाच रहलै? आ नै कतौ आब होइ छै. विलुप्त भेल जा रहलै घोड़ा नाच? पहिने गाम घर, छोट छिन बजार सब दिस घोड़ा (कठघोड़वा) नाच बेस लोकप्रिय रहै आ लोक मनोरंजन के सहज सोहनगर साधन रहै.
डफली वला डफ डफ करै, बौंसली वला बौंसरी बजबै, कैसियो वला धुन बजबै आ नटुआ मेकप केने डांर लचका के नचै आ बीच मे घोरा वला अपना कांख मे रस्सी काठ बत्ति स बनल सजल घोड़ा के टंगने नटुआ संगे रमैक रमैक के नचै.
घोड़ा वला नचैत नचैत बीच बीच धिया पूता दिसी हुड़ैक जाई, आस्ते स लथार फेकै आ छौंड़ा मारेर सब धरफरा के एक दोसर के देह पर खसै?
कोइ धांई भटका खसै त कखनो के छौंडा सब घोड़ा वला के लथारो छू के देखै त घोड़ा वला आरो हुमैक हुमैक के अपना ताले बैंड के धुन पर नचै आ धिया पूता सब घोड़ा के मुँह नांगैर छू के अपनो एक दोसरा के धकैल दै छेलै एना जेना घोड़े वला लथार फेकने होई.आ धिया पूता बुढ़ पुरान, जनिजाति सब भभा हँसै आ घोड़ा वला नचैत नचैत हुड़कैत हुड़कैत सब दिस घूमि घूमि नाच करै आ ओकरा संगे नटुआ सेहो खूब नचै आ लोक मनोरंजन होइ.
घोड़ा नाच काल लोक सब नटुआ आ घोड़ा वला के रूपैया पैसा दै, कतेक छौंड़ा सब त नटुआ के चोली मे आलपिन लगा दस पंच टकही खोंसि दै ताबे एम्हर घोड़ा वला हुड़ैक जाइ आ लोक धड़फरा के भगै आ उ ओकरा देह पर त कोइ ककरो देह पर धरफरा के खसै. नाच देखनिहार लोक सबहक किरमान लागल रहै आ लोक सब भभा भभा हंसै आ लोक सबहक नीक मनोरंजन होइत रहै. बुढ़ पुरान, जनिजाति, आ गामक गनमान्य लोक सब घोड़ा वला, नटुआ, डफली वला सबके हाथे मे रूपैया, खुदरा पाई द अशीरवादी बक्शीस दै जाइ छलै.
पहिने मिथिला मे गाम घर दिसी बियाह शादी, मूरन, मांगलिक काज सब मे घोड़ा नाच अब्बसे होइत रहै. गरीब, गिरहस्थ, लोक सब घोड़े नाच वला के बजबै आ घोड़ा नाच सब जाति वर्गक लोक देखै छलै आ लोक मनोरंजन के नीक साधन रहै घोड़ा नाच. लेकिन आब ई घोड़ा नाच बिलुप्त भेल जा रहलै? बड्ड चिंता के गप जे लोक मनोरंजक घोड़ा नाच आब कतौ देखबामे नै अबै हइ. एकरा सरंक्षित करै लै सरकार आ मिथिला समाज के आगू आबए पड़तै. आब त गामे गामे डी जे बजैए, बाई जी नचैए, अरकेसरा होइए? त के चिंता करतै केकरा बेगरता परतै आ के देखतै घोड़ा (कठघोड़वा) नाच?
२
कोन बिरड़ो मे उधिया गेल?कतअ हरा गेल मिथिला के नटुआ नाच?
हौ कतए के नटुआ एलैइए? फलां ठाम के. इ कहू जे थेहगरीये टा की लटकियो नटुआ सब अएल छै? एह जेबै देखै ले तब ने? थेहगरही, लटकी, छमकी सबटा नटुआ एलैइए, ततेक नीक नचै जाइ हइ से छौंड़ा मारेर सब मारते रूपैया लूटबै जाइ छै आ नटुआ सब नाचै के त थैह थैह केने रहै छै. हं तब त हमहूँ जेबै नाच देखै लै एमकी मने नीक नटुआ सब एलैइए?
मिथिला के लोक संस्कृति मे रचल बसल रहै नटुआ नाच जे लोक मनोरंजक रूपे बेस प्रचलित रहै. मूरन, उपनेन, बिआह दान, नाटक, नाच, छकरबाजी, अल्ला रूदल, दिवाली, छैठ जे कोनो उत्सव होउ ओइ मे नटुआ नाच अब्बसे होइ. आ लोक नटुआ के साज सिंगार, लटक झटक, अदाकारी देख के ओकर नाचब देखै, नटुआ संगे नाइच के आनंदित होइत रहै आ लोक मनोरंजन के नीक साधन रहै.
हमरा मोन परैए जे हमर गाम मंगरौना के दुर्गा पूजा मे भटचौरा के नाटक पार्टी, विरदाबोन के नाच पार्टी सब अबै. दुनू के नटुआ सब तेहेन लटक झटक वला, रोल खेलै वला नटुआ सब रहै जे अपन अदाकारी स देखनिहार के मोन मोहि लै. आ लोक खुशी स झूमि के नटुआ के इनाम दैत रहै. अनदिना त मूरन, बिआह, सब मे बाबूबरही के फूल हसन बैंड पार्टी अबै . उ बैंड वला बेस नामी आ तेकर नटुआ उसमान हुसेन खूब नीक नटुआ रहै ओकर नाचब देखै ले त लोक सौंसे गामक लोक सब अबै.
नटुआ नाच के प्रचलित प्रकार..
1. रोल खेलिनहार नटुआ-
एकरे सब के बोल चाल मे लोक सब थेहगरी नटुआ कहै जाइ छै. इ सब अनुभवी आ उमेरगर कलाकार सब होइ जे अपना नाचब अभिनय आ बेहतर संवाद स लोक के बेस प्रभावित करै जाइ. नाटक देखनिहार लोक सब एकरा मे अपना समाजिक संबध माए, बहिन, भौजाइ, आदि के छवि देखै जाइत रहै.
पाठ (रोल) खेलाएब शुरू करै स पहिने इ नटुआ सब मेकअप, सैज धैज के स्टेज पर अबै आ कहै जाइ हे बाबू भैया सब, हे माता बहिन, अहाँ सब अशीरवाद करै जेबै. लोक इ संवाद सुनि के जोड़दार थौपड़ि तालि बजबै जाइ आ मोने मोन नटुआ के अशीरवाद दै लोक सब जे आइ नीक रोल खेलेतै. नीक नाटक, नाच देखब सुनै जाएब.
रोल खेलाइत खेलाइत उ थेहगरही नटुआ सब दर्शक बीच मे अशीरवादी मंगै ले अबै आ लोक सब के दस, बीस, पचास जे जुड़ै से नटुआ के चाबस्सी रूपे दै.
2. लटकी नटुआ-
नामक अनरूपे इ सब तेहेन सजल धजल रहै आ नचैत काल तेहेन लटक झटक करै जे छौंड़ा मारेर सब त एकरा पर फिदा भऽ जाइत रहै. एतेक फिदा जे नटुआ के कोरा मे उठा लेब, ओकर गाल छूअब, नटुआ के चोली मे आलपिन लगा रूपैया खोंसि देब आ लटकी नटुआ संगे छौंड़ा मारेर के खूब नाचब बेस रमनगर लगै.
बूढ़ पुरान सब सेहो तरे आंखि नटुआ सब पर मोहित होइत रहै आ छौंड़ा मारेर सब पर झूठो खिसियाइ जाइ जे हे तूं सब नटुआ के बेसी नंगो चंगो नै करै जाहि की ताबे छौंड़ा सब नटुआ के बुढ़ पुरान दिस हुलका दै आ खूब पिहकारी होइ. बुढ़ो पुरान सब नटुआ के नीसा मे डूबल देह हाथ डोला के थोड़ बहुत नाचै आ नटुआ के बक्शीस दै. अइ लटकी नटुआ सबहक साज सिंगार, इनाम भेटला पर शुक्रिया अदा करब के आगू त फिल्मी कलाकार सब फिका बूझना जइतै.
जिन बलमा ने दिया रूपैया मैं रखूंगी चोली मे सम्हाइर के, अठ्ठनी हमरा गाल पर आ रूपैया हमरा माल पर.आ तेहेन ने लटक झटक स लोक के मोन मोहि लै जे नवयुबक सब फिदा भऽ जैत रहै. छौंड़ा मारेर सब त अइ लटकी नटुआ सब मे अप्पन प्रेमिका, बहुरिया, भौजाइ आदि के छवि देखै आ बेस लोक मनोरंजन मे डूबल रहै. इ नटुआ सब नाटक, नाच, बैंड पार्टी मे रहैत रहै जे सब गेबो करै आ खूब नचबो करै जाइ.
3. छमकी नटुआ-
इ छमकी सब त रेकार्डिंग डांस कला फिल्मी गीत पर तेना छमा छम नचै जे लोक सब सुइध बुइध बिसरा जाइ. एना एकटिंग करै जे लोक के होइ फिलिम देखै छि. कोठे उपर कोठरी उस पर रेल चला दूंगी, बस एक को कुंवारा रखना, मैने जो घूंघरू बांध लिए सब पर तेहेन रिकार्डिंग डांस होइ से छौंड़ा सब सेहो नचै लगै, खूब पिहकारी सिटी बजै आ लोक रूपैया इनाम दै.शेरो शायरी. रेकोडिंग डांस के जमाना एला पर छमकी नटुआ सब बेस लोकप्रिय भेल रहै. इ सब सब तरहक गीत पर मनमोहक डांस करै जाइ छलै.
4. नटुआ-
इ नटुआ सब बैंड पार्टी, छकरबाजी, नाच पार्टी, ढोल पिपही पार्टी, अल्ला रूदल सबमे रहैत रहै जे पारंपरिक वेश भूसा, पारंपरिक नाच लेल बेस प्रचलित रहै. सजल धजल मेकअप केने चोली पर रूपैया टंगने समाजिक लोक मर्यादा के मान रखने इ नटुआ सब नचै आ लोक के मनोरंजन करै जाइ.
हमरा मोन परैए स्कूलि जीवन मे गाम घर दिस प्रसिद्ध नटुआ सब जेना रामउदगार, रामदुलार पासवान (दुनू सहोदर रहै), सीरिदेब पंडित, उसमान हुसैन, बनैया राम, बबलू मंडल आदि लोक कलाकार सब जेकर नटुआ नाच देखै लेल लोक दूर दूर स अबै. कतेक कलाार सब त अाब अइ दुनिया मे नै रहलै तइयो जे कलाकार सब बांचल छै हुनका प्रति आदर दिर्घायु हेबाक कामना करैत छि.
गाम घर मे नटुआ त सब के मन मोहि लै जेना? नटुआ सबके मेकअप करैत काल धिया पूता के हुलुक बुलुक करब, छौंड़ा मारेर सब के नटुआ मेकअप रूम के पहरेदारी करब, बुढ पुरान सब तकतान करै मे जे नटुआ सबके बेसी नंगों चंगो नै करै जाही, फेर पिहकारी हंसि ठहक्का जे लोकरंग रहै से नटुआ नाच के आरो जीवंत बना दै.
मिथिला समाज लोक कलाकार प्रति सब दिन उदास रहल. बात बात मे दुत्कारि देब जे पढबें लिखमै की नचनीया बजनिया बनमैं? त एना मे के अइ कला सबके जियाअ कए के राखत? भोजपूर वला सब नटुआ नाच (लौंडा डांस) के जियाअ के रखलक त देखियौ जे रामचंद्र मांझी के पद्मश्री अवार्ड भेटलै. आ अपना मिथिला वला सब नटुआ के हेय दृष्टिये देखलक ओहेन प्रोत्साहन नै देलक त आब नटुआ नाच कलाकार नैंहे भेटत? बड्ड भेल त नेपाल,बंगाल,यू पी स बाई जी मंगा के लोक नचा लैइए सैह टा?
नटुआ नाच के पारंपरिक रूप आ उत्सव बला सुआद डीजे, बाई जी मे किन्नौ ने भेटत? असली आनंद त नटुआ नाच मे देखाएत यदि तकियौ त? मिथिला समाजक लोक चिंता कए के देखियौ जे नटुआ नाच के जिआ के राखै परत. नटुआ कलाकार के प्रोत्साहन देबाक अभाव मे,
बड्ड दुखक आ चिंता के गप जे एहेन लोकरंग वला नटुआ नाच आब कतौ हेरा गेल जेना? डी जे, अरकेसरा बाइ जी के बिरड़ो मे कतौ उधिया गेल नटुआ नाच?
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डाॅ. किशन कारीगर
पोसलाहा छागर सब आई गेले घर छह?
(हास्य कटाक्ष)
बाबा बड़बड़ाइत चल जाइत रहै जे हे पोसलाहा खस्सी सब? आई त गेले घर छह? पूजा होइ टा के देरी छै? तकरा बाद खरांस स गर्दैन उड़ा देल जेतह? ताबे भागेसर पंडा बमैक गेल जे अहां किए एना खस्सी सबके मोन भांगठ करै पर लागल छियै? भगवति स्थान मे ज खस्सी मूड़ि नै डोलबै त बैइल कोना चढ़तै? बाबा सेहो तामसे तमतमा क तामसे फाइर भेल बजलै अईं हौ भागेसर इ कहअ त भगवति ई कहै छथुन जे बैइल चढाबह? की अपनामने तूं सब तितमहा करै जाइ छह जे भगवति नाम पर पोसलाहा खस्सी के चढ़ा सांझे स माउस गबर गबर भोकसब की ने? आ बहन्ना जे भगवति के बैइल चढाएब. कहअ त भगवति कहूं कहथिदिन जे हमरा बैइल चढाबह? एतेक कहूँ बैइल चढाएब भेलैए जे दुर्गा स्थान मे लाइन लागल रहै छै?
बाबा आ भागेसर मे कहा कहि होइत रहै. भागेसर कहै बाबा अहाँ के एको रति धर्म कर्म दिया नै बुझै छियै? बाबा बजलै हौ ताबे तोंही कोन बड्ड नेहाल कए देलहक आ समाज स अंधविश्वास के हटा देलहक? भागेसर बाजल यौ बाबा सब दिन स जे होइत एलैए से लोक केना छोइड़ देतै? बाबा कहलकै हौ भागेसर जा जा कि बेमतलबक हमरा संगे डिस्कस करै मे लागल छहअ? जल्दी दुर्गा स्थान जा नै त छागरक सीरा कमीटी वला ध रखतअ त तोरा कीछो फैबो ने लगतह? जा तंहू छागर पोसनहे छह त लगले दुर्गा स्थान भऽ आबह? भागेसर बाजल हम जाएब सै अपना मने की अंहा मने?
एम्हर कहा कही होइते रहै बाबा के मोन रंज भेल रहै की ताबे हमहूँ बाबा लक पहुँचलौ आ एक लोटा जल चढा देलियैन? की बाबा आरो अघोर भेल बजलै कोन उलुआ सब छी जे बेरो कुबेरो जल चढा दैइए? अखैन लोक बैइल चढबै लै जाइए आ एकरा जल ढारबाक तार छै? के छियअ हौ? हम बजलहुँ यौ बाबा हम छि कारीगर. ई सुनि बाबा के कनी तामस कम भेलै कहलकै जे अच्छा तूं छियअह तोरो अखुनके बड्ड तार लागल छेलह? एकटा काज करह कनी एक बाल्टी पाइन आनि के बसहा बरद के पिया दहक आ कनि एक जूम तमाकुल खुआबह. भागेसर पंडा त अपने एक बाकुट तमाकुल खा गेल आ हम मंगलियै त कहलक जे आब चुनैटी मे तमाकुले नै अछि? ई सुनि भागेसर फेर बमैक गेल जे बाबा अहाँ खाली हमरा बेज्जैत करै पर लागल रहै छी की? बाबा बजलै एह हमरा कहबाक भावार्थ बुझलहक नैहें? कहबाक ई जे जहिना एक बाकुट तमाकुल एक्के बेर नै खेबाक चाही तहिना ओतेक छागर के बैइल नै देबाक चाही? भागेसर तैइओ बाजल बैइल हेबाके चाही की आ डिस्कस करअ लागल.
हम भागेसर के समझा बुझहा के शांत करौलहुँ आ फेर तमाकुल चुना एक एक जूम बाबा आ भागेसर पंडा के देलियै. बाबा स पुछलहुँ जे की भेल जे अहाँ भागेसर संगे डिस्कस मे लागल छी बेमतलबो. बाबा बजलौ हौ कारीगर हम त सुप्पत गप कहै छियैअ त भागेसर बेमतलबो डिस्कस मे लागल यै? हम बजलहुँ यौ बाबा सोझ साझ फरिछा के कहू जे भेल की? बाबा हां हां क हँसैत बजलै हौ कारीगर तहूं पत्रकार भऽ एते खाने बुझहै छहक? आईं हौ आई सतमी मेला छियै त गाम घर दिस दरबज्जे दरबज्जे पोसुआ छागर देखलहक की ने? हम कहलियै जे हँ देखलियै त कएटा दरबज्जा पर दू दू चारि टा के? बाबा बजलै देखिहक जे अष्टमी नौमी दिन त आरो ततेक बैइल चढबै जेतै से दुर्गा स्थान खूने खूनाम अनपट लागल रहतै?
बाबा कहैअ लागल एह अखैन देखबहक जे सब खस्सी के खूब मान दान करतह की, कटहर पत्ता, घास, जिमरक पत्ता, की की ने खुएतह? एतेक दिन लोक डाइलोक माइरतह जे बकरी खस्सी छोटका जाइत सब पोसै जाइए आ अखनी त बड़को जाइत सब बैल चढबै दुआरे छागर पोसअ लागल. अइ गप के फेर जातिवादी नै बना दिहक, तूं सब यथार्थ बुझने बिना अकानह नै लगिहअ?
हे देखहक त भागेसरो पंडा दू टा छागर पोसने अछि आ दुनू भगवति के चढौतै. एकटा अपना आ दोसर बेटा साति. कहअ त भगवति कहूं कहथिहिन जे हमरा बैल चढाबह? दरबज्जा पर खस्सी देख हम एतबा त बाजल रही जे हे छागर आई तों सब गेल घर छह? पूजा होइतै मातर खरांस स गर्दैन उड़ा देल जेतह? यैह गप सुनि देखै छहक भागेसर के बेटा सरवेसर हूर उठा देलकै आ भागेसरो हमरा स लड़ै लै एलैह जे अहां छागर के भरकबै मे लागल छियै?
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३. पद्य
३.१.ज्ञानवर्द्धन कंठ- गजल
३.२.आशीष अनचिन्हार- २ टा गजल
ज्ञानवर्द्धन कंठ
गजल
एक बेरि सभ संगे कहियौ जय जय सीताराम
बेरि बेरि सभ संगे बजियौ जय जय सीताराम
पाँच बर्ख जे सूतल रहला तकला नहि घुरि गाम
फेर आइ ओ जितला नचियौ जय जय सीताराम
एक बेरि नहि सूतल खटिया जिनगी मे ओ प्रेत
दान आइ खटिया नव करियौ जय जय सीताराम
मूर्ति माइ दुर्गा केँ पुजिकय कन्या पूजी सात
मारि पेट मे कन्या कहियौ जय जय सीताराम
भाव भेस भाषा केँ बिसरी कहबाबी स्मार्ट
आन नीक अपना केँ दुसियौ जय जय सीताराम
(21 21 222 22 22 2221)
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आशीष अनचिन्हार
२ टा गजल
१
बाहर बाहर जोड़ल भतार
भितरे भीतर टूटल भतार
छै मृगतृष्णा सन के विकास
इम्हर उम्हर दौड़ल भतार
इच्छा माने पूरा समान
किम्हर जेतै परिकल भतार
लेने हेतै सभटा हिसाब
चुप्पे रहि रहि कानल भतार
हमरा आने देलक समाद
अपने लोकक दागल भतार
सभ पाँतिमे 22-22-22-121 मात्राक्रम अछि।
२
निशानापर बूढ़ संगे बच्चा छै
देशमे आब युवा केर सत्ता छै
दर्दक अनुभव होइतो नोर रोकब
ईहो एक तरहँक गर्भहत्या छै
सत्य हुनकर ठोरक चुप्पी जगतमे
बाद बाँकी बात मिथ्ये मिथ्या छै
केकरो हाथमे भरलाहा भारी
केकरो हाथमे खाली डिब्बा छै
लोहा के हो प्लास्टिक के या काठक
कोनो कुर्सी अपनामे सत्ता छै
सभ पाँतिमे 22-22-22-22-22 मात्राक्रम अछि। दू टा अलग-अलग लघुकेँ दीर्घ मानबाक छूट लेल गेल अछि। ई बहरे मीर अछि।