विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका · VIDEHA · ISSN 2229-547X

मैथिली माध्यमसँ प्राथमिक शिक्षा होइ सएह छलनि स्व. राजनन्दन लालदासक अंतिम इच्छा

दिलीप कुमार झा · 2021-11-01 · अंक 333

मैथिली माध्यमसँ प्राथमिक शिक्षा होइ सएह छलनि स्व. राजनन्दन लालदासक अंतिम इच्छा
राजनन्दन लालदास आइ हमरा सभक बीच नहि छथि। सबकें एक दिन एहि धराधामकें छोड़बाक छै। हुनका एतेक मातृभाषा सेवा क' क' एहि धराधामकें छोड़ब निश्चिते आजुक युगमे बहुत सुखद आश्चर्य अछि।अपन जीवनकें कृतार्थ करब थिक। मैथिलीमे समय -समयपर एहन -एहन मातृभाषा सेवी,मनीषी सब होइत रहलाह अछि ,हुनके सबहक सेवा आओर हठयोगक परिणामस्वरुप एतेक अन्हर- बिहारिक अछैतो मैथिली साहित्य फरि -फूला रहल अछि। जेना कि सर्वविदित अछि राजनन्दन लालदास कर्णगोष्ठीक कर्णामृत पत्रिकाक माध्यमसँ लगातार उनचालिस बर्षसँ मैथिली भाषा साहित्यक सेवा करैत रहलाह।रचनामे नब लोकक प्रवेशक आग्रही छलाह।समकालीन मैथिली साहित्यमे अनेको एहन रचनाकार छथि जिनक पहिल रचना कर्णामृतमे प्रकाशित भेल छनि। जहियासँ हम मैथिली जगतकें बुझ' लगलहुँ ,मैथिली माध्यमसँ शिक्षा हुए से जतय कतहुँ अवसर लागल उठबैत रहलहुँ अछि।एहि यात्रामे हमरा तीनटा एहन मनीषीसँ साक्षात्कार भेल जे ओ लोकनि कहलनि बिनु प्राथमिक पाठशालामे शामिल भेने मैथिलीकें भविष्यमे संरक्षित राखब संभव नहि अछि। ओहिमे हमरा सर्वप्रथम भेटलाह स्वनामधन्य डा.जयकान्त मिश्र जे स्वयं एहि अभियानक नेतृत्व करैत रहलाह आओर कतहुँ ने कतहुँ सम्प्रति जे आन्दोलन चलि रहल अछि तकर प्रेरणास्रोत छथि।दोसर,छथि राजनन्दन लालदास जे प्रेरित तँ करिते रहलाह।स्वयं अस्सी बर्षक अवस्थाक पार रहितो एहि मुद्दाकें सरकार समक्ष उठबैत रहलाह।पत्रिकामे एहि बिषयपर लगातार लिखैत रहलाह।तेसर छलाह पं.चन्द्रनाथ मिश्र 'अमर'।जिनकासँ हम जहिया- जहिया भेट कयल ओहो इएह बात कहलनि जे आब मात्र एक उपाय अछि,प्राथमिक शिक्षाक माध्यम बनय मैथिली।
राजनन्दन लालदास चौरासी बर्षक अवस्थामे १४फरवरी २०१७क' भारतक महामहीम राष्ट्पतिकें मैथिली माध्यमसँ शिक्षाक लेल पत्र लिखलनि।भारतक राष्ट्रपति बिहारक मुख्य सचिवकें एहि बिषयपर संज्ञान लेबाक आदेश देलनि मुदा बिहार सरकारक लेल धनसन।आदरणीय दासजी हमरा पत्रक प्रतिलिपि पठौलनि ।हम मैथिली साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समिति,मधुबनीक माध्यमसँ यथासंभव प्रयास कयल।बिहारक मुख्यमंत्रीकें सेहो सेवायात्राक क्रममे मधुबनीमे एहि पत्रक प्रतिलिपि आओर ज्ञापन हाथोंहाथ देलियनि।माननीय मंत्री विनोदनारायण झा ,विधायक श्री रामदेव महतोक माध्यमसँ सेहो प्रयास कयल।चेतना समितिक मंचपर सेहो उठायल गेल।मुदा धनसन।
मैथिली शिक्षाक माध्यम बनय।से विचार राजनन्दन लालदासक मोनमे कियै अबैत रहलनि? राजनन्दन लालदास मैथिलीक अनन्य उपासक छलाह.बंगालमे रहैत छलखह।ओतय बंगभाषीक मातृभाषा प्रेम देखि क' अभिभूत छलाह। बंगभाषी समुदाय अपना भाषाक विकासक प्रति सदति साकांक्ष रहलाह अछि।जे हमरा सबहक लेल प्रेरक अछि।अनेक बंगभाषी विद्वान मैथिली भाषा साहित्यक हित चिंतक रहलाह।मैथिली भाषा साहित्यक विकासमे सेहो सहयोग केलनि। देखि - देखि क' बहुतो मैथिल जे मातृभाषा प्रेमी रहथि ओहो सब अपना मातृभाषाक सम्मान लेल अनेक तरहक काज सब कयलनि।जाहिमे साहित्य लेखन ,नाटक मंचन,सांस्कृतिक कार्यक्रमक आयोजन, प्रकाशन, महाविद्यालय ओ विश्वविद्यालय सबमे मैथिलीक पढ़ाइ।ज्ञातव्य अछि जे सर्वप्रथम कोलकाता विश्वविद्यालयमे 1919ई. मे मैथिलीक पढ़ाइ आरंभ भेल।ओतय बाबू साहेब चौधरी,मिथिलेन्दुजी,प्रबोध नारायण सिंहक प्रभाव राजनन्दन लालदासपर पड़लनि ओ कर्णामृत पत्रिका प्रकाशन करय लगलाह संगहि प्राथमिक शिक्षामे मैथिली लागू होअए सेहो ध्यान देबय लगलाह।एहि सम्बन्धमे हमर विचार अछि मैथिल सब पछता रोटी खयने छथि।पहिने प्राथमिक पाठशालामे मैथिली लागू होअए से कोनो प्रयास नहि कयलनि।तें मैथिली विश्वविद्यालयमे तँ लागू भ' गेल मुदा प्राथमिक शिक्षामे आइ धरि उपेक्षिय अछि।एहि सम्बन्धमे बादेमे सही डा.जयकान्त मिश्र बहुत प्रयास कयलनि बादमे राजनन्दन लालदासक सेहो एहि अभियानमे योगदान छनि।हमसब जे 'मधुबनीसँ पाठशालामे मैथिली'अभियान आरंभ कयलहुँ तखनो ओ उत्साह बढ़बैत रहलाह।आइ डा.जयकान्त मिश्र ओ राजनन्दन लालादासक प्रेरणासँ हमसब एहि अभियानमे लागल छी एहि विश्वासक संग जे हमर पूर्बज सब भाषाक लेल जे त्याग तपस्या कयने छथि तकर प्रतिफल भटबे करत।जरुरति अछि सकल समाज एहिमे योगदान देथि।राजनन्दन लालदासक सपनाकें साकार करथि।वैश्वीकरण ओ बजारबादक एहि आन्हर दौरमे लोक भाषा ,लोक संस्कृति तेजीसँ विलोपित भ' रहल अछि।संसारक अनेक भाषा लुप्त भ' गेल।मैथिलियोपर गंभीर संकट उत्पन्न छैक।अनेक रंगक षडयंत्र मैथिली भाषाक संग भ' रहल छैक।हिन्दी भाषाक साम्राज्यवादी स्वरुप मैथिलीकें घोटि जयबापर विर्त अछि।जखन कि हिन्दी स्वयं अनेक लोकभाषाक मिश्रण अछि। लोकभाषाक तिरोहित भेनाय हिन्दियोक तिरोहित भेनाय छी।से एखन भाषाविद नहि बुझि रहल छथि।खैर जे से ।नीतिक कहब छैक जखन सबटा डुबैत हुए तँ जैह बचा लेब सै बहुत तें मातृभाषाक लेल जे गोटे जाहि मोर्चापर काज क' रहल छथि सब प्रणम्य छथि।हम आदरणीय दासजीक मातृभाषाक लेल कयल गेल काजक लेल श्रद्धा निवेदित करैत छियनि।हमरा लेल सब दिन प्रणम्य रहताह।
दिलीप कुमार झा, आदर्शनगर,नवटोली रोड, मधुबनी मो.6207627509

Suggested citation: दिलीप कुमार झा. “मैथिली माध्यमसँ प्राथमिक शिक्षा होइ सएह छलनि स्व. राजनन्दन लालदासक अंतिम इच्छा.” Videha — First Maithili Fortnightly eJournal, issue 333, 2021-11-01. https://www.videha.co.in/research/2021/333/मैथिली-माध्यमसँ-प्राथमिक-शिक्षा-होइ-सएह-छलनि-स्व-राजनन्दन-ल-bfd4be996c.htm

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