विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका · VIDEHA · ISSN 2229-547X

बीहनि कथाक विकासमे रचनाकारक योगदान

मुन्नाजी · 2021-11-15 · अंक 334

बीहनि कथाक विकास मे रचनाकारक योगदान
खगता सृजनक आधार होइछ।तकरे पूर्ति लेल गद्यक विकास क्रममें जुड़ल बीहनि कथा।सब पीढ़ीक नवका पीढ़ी,नव खगता पूर्ति लेल नव विचार ल' सोझां अबैए। कथा विकासक क्रममें उपन्यास( Novel) आ लघु कथा(कथा/ गल्प, Short stories)क पछाति अपन भाषा साहित्यमें कथाक परिष्कृत आ आधुनिक रूपमें एकटा स्वतंत्र विधाक खगता भेल।जकर खोराक थिक बीहनि कथा।
बीसम सदीक अन्तिम दशकमें तत्कालीन नवका पीढ़ी कान्ह उठेलनि ।संग एलाह साहित्यक अग्रज पीढ़ीक किछु अभिभावकीय दायित्व बला रचनाकार।ऐ तरहक अवधारणाक परिकल्पना जुलाई 1991मे पैटघाट मे भेल कथा गोष्ठी सं प्रेरित भ' सोझां आयल।एकरा मौखिक सहमति आ कि बल देलनि- डा. धीरेन्द्र आ जीवकान्तजी।करीब तीन चारि बरिख धरि ऐ पर विमर्ष/ घमर्थन चलैत रहल। पछाति 05मार्च 1995कें सहयात्री मंच लोहना( मधुबनी)क सामुहिक बैसारमें सर्वसम्मति सं स्वतंत्र विधाक मूर्त रूपमें सोझां आयल -' बीहनि कथा ' आ ओइ चारि वर्षक बीच भेल घोंघाउज सं निष्कर्षत: जे नाम निश्तुकी भेल ओ नामकरण कर्ता भेलाह श्रीराज‌
05मार्च 1995कें सर्वसम्मति सं ऐ नव विधाक जे शुरुआत भेल ताहिमें उपस्थित छलाह- श्रीराज, शैलेन्द्र आनन्द, डा.बी.के लाल,ललन प्रसाद,अमल झा ,मुन्नाजी, कुमार राहुल,विजयानन्द हीरा, सच्चिदानन्द सच्चू,करणजी,अखिलेश्वर झा,अतुलेश्वर झा ।एहि निर्णयक पछाति ऐ दिशामें जे पहिल काज भेल से छल-12मार्च1995कें मुन्नाजीक बीहनि कथा " नामर्द "केर पाठ आ विमर्ष संगहि ऐ विधाक भावी प्रारूप पर चर्चा।जाहि आयोजनक संयोजक वा कर्ता धर्ता रहथि श्री शैलेन्द्र आनन्द।एकरा एक डेग आओर आगू बढ़बैत 20मार्च 1995कें हटाढ़-रूपौली, झंझारपुर (मधुबनी) में भेल पहिल ' बीहनि कथा गोष्ठी' जकर संयोजनक श्रेय ऐछ तत्कालीन नवतुरिया रचनाकार मलयनाथ मिश्र,' मण्डन' जीकें।
आब अग्रज सं अनुज धरि उत्साहित भ' बीहनि कथा लिख' लगलाह।प्रारम्भमें हिन्दीक चिलका लघुकथा आ बीहनि कथा मे नामहिक अन्तर छल।ओइ तथाकथित लघुकथा सं बीहनि कथा के फुटेबा वा स्वतंत्र अस्तित्वमे एबा में करीब डेढ़ दशक संघर्षरत रह' पड़ल।
1995सं किछु रचनाकार बीहनि कथाक लेखन आ कथा गोष्ठी मे निरन्तर पाठ करब शुरू केलनि।एहेन रचनाकार में प्रमुख छलाह-मुन्नाजी, विजयानन्द हीरा, कुमार राहुल,मलयनाथ मिश्र, सचिदानंद सच्चू...आदि।इ स्थिति करीब 2000धरि यथावत रहल।तकर पछाति भहरव /भसड़ब शुरू भेल।किएक त' गोटा गोटी इ रचनाकार सब जत' तत' छिड़िया गेलाह।कियो अग्रिम शिक्षा लेल त' कियो रोजगारक खगता पूर करबा लेल।2000इ.सं2009धरिक सांच कहब त' हंसी लागत।एकरा हास्यास्पदक संज्ञा द' सकै छी।सांच इ जे श्रीराजक अतिरिक्त एकरा उघि आगू ल' जाइ बला मे मुन्नाजी एकसरूआ बांचल छलाह।एहि एक दशकक खालीपन में 2003में श्रीराजक पहिल बीहनि कथा ,बीहनि कथा नामे छपल। जकरा जनकपुर,नेपाल सं प्रकाशित मैथिली साप्ताहिक " गाम-घर " मे प्रकाशित करबाक श्रेय एकर संपादक श्री रामभरोस कापड़ि भ्रमरकें जाइत छनि। एहि तरहें श्रीराजक 'वात्सल्य ' भेल पहिल प्रकाशित बीहनि कथा(2003) एहि बीच किछु आओर रचना आ आलेख छपल त' मुदा संपादकक अज्ञानता ,पुर्वाग्रह वा हठधर्मिताक कारणे उधारक, तथाकथित विधा लघुकथा नामे यथा-' नवतुरिया, कानपुर,मिथिलांचल संपर्क,दरभंगा,पल्लव नेपाल.. आदि।
जुलाइ- 2010में डा.योगानन्द झाजीक संयोजन में कबिलपुर(दरभंगा) में भेल कथा गोष्ठी में उपस्थित छलाह मैथिली नवजागरणक अग्रदूत श्री गजेन्द्र ठाकुर।हमर बीहनि कथा पाठ पर हुनक प्रतिक्रिया छल-" बीहनि कथा, मैथिली कथा साहित्यक परिमार्जित,निश्शन आ समयानुकूल अवधारणा ऐछ!"एकरा सबलता देलक‌।तकर पछाति गजेन्द्र ठाकुरक संपादन मे प्रकाशित मैथिली इ पाक्षिक विदेहक( अंक 62,अगस्त2010)मे बीहनि कथा नामे छपल मुन्नाजीक रचना " निपुतराहा।( जे आब कथा रूपमें सेहो आबि गेल ऐछ)खूब चर्चित रहल।तकर पछाति विदेहक माध्यमे बीहनि कथा लेखक एकटा हुजुम ठाढ़ भेल।जाहि मे वर्तमान मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ साहित्यकार श्री जगदीश प्रसाद मण्डलक योगदान अविस्मरणीय ऐछ।हुनक अतिरिक्त शेफालिका वर्मा,रविभूषण पाठक,उमेश मण्डल,बेचन ठाकुर, विनित उत्पल, रामविलास साहु,जगदानन्द झा मनु,कपलेश्वर राउत,अमित मिश्रा,संदीप साफी, आशीष अन्चिन्हार,डा.भवनाथ झा,जवाहर लाल कश्यप,मुन्नी कामत,चन्दन झा,बिन्देश्वर ठाकुर,ओम प्रकाश झा,मनोज कुमार मण्डल.....आदि रचनाकार बीहनि कथा विधा मे अपन उपस्थिति बनौने रहलाह।जाहि सं इ विधा सबल होइत रहल।
बीहनि कथा मे सक्रिय सब रचनाकारक निरन्तर लेखनीक परिणाममे संग्रह सब आबय लागल।ऐ विधाक पहिल संग्रह देनिहार लेखक छथि-श्री जगदीश प्रसाद मण्डल।हिनकर ' तरेगण ' नामे अक्तुबर 2010मे बहरएल पहिल बीहनि कथा संग्रह।एखन धरि एकर तीन संशोधित संस्करण बहरा चुकल ऐछ।हिनक दोसर बीहनि कथा संग्रह छनि- " बजन्ता - बुझन्ता "(2013)तकर पछाति ऐ विधाक कतेको एकल संग्रह बहरएल।यथा- प्रतीक - मुन्ना जी,(2012), कपलेश्वर राउत,,संदीप साफी,राम विलास साहु(2013,).....आदि
2011मे ऐ विधाक एकटा महत्त्वपूर्ण उपलब्धि छल मुन्नाजीक एकल बीहनि कथाक पोस्टर प्रदर्शनी।जे आदरणीय कथाकार अशोक आ कमलमोहन चुन्नूजीक संयोजनमें भेल कथा गोष्ठी(पटना) में लगाओल गेल छल।जकर उद्घाटन वरिष्ठ कथाकार आदरणीय प्रदीप बिहारी आ श्रेष्ठ आलोचक,संपादक आदरणीय रमानन्द झा 'रमण' द्वारा कएल गेल छल।
बीहनि कथाक दू टा महत्त्वपूर्ण कथाकारक पदार्पण 2014मे भेल। पहिल-आठम दशकक चर्चित आ वरिष्ठ कथाकार आदरणीय घनश्याम घनेरो,दोसर-नवतुरिया रचनाकार श्री विद्याचन्द्र झा बम-बम जीक। घनश्यामजी अपन चोखगर कलम आ फरिछएल विचारें जन जन मे बीहनि कथाक प्रति जिज्ञासा जगौलनि। आ लोकक ठोढ़ पर बीहनि कथा शब्द साटि सन देलनि।तकरे फलस्वरूप एलनि पहिल बीहनि कथा संग्रह-" उपरान्त "(2016)
बम-बमजी अपन समतुरियाक अनेको अवरोध/बाधा सहि आत्मविश्वासक संग आगां बढ़ैत ऐ सात बरखमें करीब चारि सए सं बेशी रचना ऐ विधाक केलनि।जाहि में करीब 200 वा बेसी प्रेम परक रचना छनि।तीन गोट पोथी प्रकाशनक बाट जोहै छनि।
2015ई.,मिसिदा आ कल्पना झा दुनू प्रबुद्ध रचनाकारक प्रवेश ऐ विधा में भेल।दुनू गोटे कतेको बाधक तत्व( लेखक) द्वारा बहटारल जेबाक पछातियो ऐ विधाक विकास मे अविस्मरणीय योगदान देलनि।मिसिदा,ऐ विधाक प्रत्येक रचना पर गहींर आ गम्भीर नजरिये पड़ताल करैत निछरल / निश्शन बनौलनि।कल्पनाजी,अपन फरिछएल आ निश्शन उपस्थिति दैत कतेको लेखिकाकें निर्देशित करैत सोझां अनलनि।हिनक बीहनि कथाक एकल सङोर सेहो अबैया छनि। इ वर्ष (2015) बीहनि कथा लेल ग्रह सं ग्रसित सन छल।जे वृहस्पति वा शनि बनि ठाढ़ छलाह स्वघोषित विद्वान कहेबाक भ्रम सं ग्रसित अग्रज कथाकार।हुनकर विक्षिप्तावस्था सं प्रभावित भ' कतेको रचनाकार बीहनि कथा सं स्वयंकें विलगा लेलनि।इ स्वघोषित विद्वान बीहनि कथाकें रोकबा लेल एकटा हिन्दी पत्रकारक आत्म संस्मरण( छात्र जीवनक प्रसंग)कें नकल करबा आ करेबा लेल अगिया बेताल भ' गेला।मुदा ओ कर्म (जाहिमें कु उपसर्ग लागल छल )के फल धुंआ- धुंआ भ' उड़ि गेल। आ ओ विद्वान आ हुनकर कृत्रिम अनुयायी सब प्रसन्न जे- " नै उठलह त' भारी लगलह ने " एहेन कुवृति सं प्रभावित भेलीह कोसिकन्हाक आंखिगर युवा लेखिका जे बीहनि कथा त' दुर जे साहित्यें सं दुर भ' गेलीह।आब इ विधा अपन रंगत पकड़ि लेने छल।चारु भ'र सबतुरिया लेखक ऐ विधा में तल्लीन भ' गेलाह।जे निस्वार्थ लेखन करथि से अटल आ डटल छथि।जिनका लाभक लोभ रहनि ओ द्वन्द में पड़ि आइयो ओझरएल छथि।ने घरकें ने घाटकें सन भेल बुझू।
2016मे नव प्रवेशी भेलाह-राजीव कर्ण,महाकान्त कामत,नीरज कर्ण,इन्द्रकान्त लाल, अरूण कुमार लाल हिनका सबहक प्रयास सं इ विधा आओर आगां बढ़ल।
2019मे मैथिली-भोजपुरी अकादमी, दिल्ली द्वारा आयोजित " अखिल भारतीय बीहनि कथा सम्मेलन" रचनाकारक दृष्टि फरीछ आ नव बाट पर चलबाक श्रेष्ठ साधनक रूपें सहयोगी भेल।ऐ आयोजनक पछाति ऐ विधाक रचना सृजनक उत्सुकतावश रचनाकारक एकटा हुजुम ठाढ़ भेल।एकर सब पक्षकें अकानैत डा.आभा झा,सोनी नीलू झा, धर्मवीर कुमार,सबिता झा सोनी,अमरेश चौधरी,सान्त्वना मिश्रा,डा.प्रमोद कुमार,मिन्नी मिश्र,डा.रॉबिन खान,पूनम झा,डा.कैलाश कुमार मिश्र,मोहन झा गगन,राम कुमार मिश्र, अमरकांत लाल, प्रभाष अकिंचन, विनीता ठाकुर,ज्ञानवर्द्धन कंठ,वीरेन्द्र झा,....आदि रचनाकार जुड़िकें/ जुटिकें एकर तत्कालीन स्थिति आ अस्तित्वकें आओर निश्शन ,फरीछ आ सुरेबगर बना आगूक बाट प्रशस्त केलनि।आब विश्व भरिमें पसरल मैथिल रचनाकार जन द्वारा सृजित आ चर्चित भ' रहल ऐछ।
2020 वैश्विक संकट सं दबल लोक घरे में बन्न रहि समय कटबा पर बाध्य छल।ओइ समयक उपयोग करैत ऐ विधाक रचना आ सृजनकर्ता दुनूक श्री वृद्धि एकरा आओर भरल-पुरल बनेलक।
आनो विधाक सृजन आसान नै,मुदा विनाशक कोनो बन्हन नै रहला सं लिखबा में तर'दुत नै। बीहनि कथा में शब्द सीमा निर्धारित रहला सं एकर सृजन कने बेसी दुरूह। एको टा अतिरिक्त शब्द भात में आंकड़ सन।तें ऐ विधा में उएह ठठै,बढ़ै छथि जे अपनाकें परिश्रम बलें एकर विधानक योग्य स्वयं के सधबा में सक्षम होइ छथि।दोसर महत्त्वपूर्ण बात जे ऐ विधा लेल मंच पर स्वतंत्र रूपें एखन जगह खतियाओल नै छै।जाहि सं मंच,माला,माइक,धोती,तौनी,लिफाफ सनक लाभक लोभ निर्लोभ में परिवर्तित।जाहि कारणे इ विधा एखन निश्शन भ' उच्च मानकताक संग आगू बढ़ि रहल।ओना आगू दसगरदा भेने इहो ओहोन रोग सं ग्रसित भ' जएत से असंभव नै।
2020 ,घरे मे रहू।के आह्वान बीहनि कथा विधा लेल सकारात्मक रहल।ऐ बीच नव आंखि-पांखि बला रचनाकारक प्रवेश भेल जेना कि-अभिलाषा मिश्रआकांक्षा,रूचि स्मृति,सुभाष कामत,गुफरान जिलानी,कंचन कंठ,कुंदन कर्ण,चन्दना दत्त,प्रियंवदा तारा झा,अनिता मिश्र,इरा मल्लिक,कल्पना झा पटना,कल्पना झा बोकारो।
कुल मिला क' कुशल / साधल रचनाकारों संग नव सिखुआ रचनाकारक उपस्थिति आ रचनात्मक सक्रियता सुखद भविष्यक संकेत ऐछ।ऐ बीच मोकामक बाटकें आओर सघन सबल बनेबा में दि
जिनकर उल्लेखनीय योगदान रहलनि ओ दू टा प्रमुख नाम ऐछ- डा. आभा झा, दिल्ली आ डा.प्रमोद कुमार, पांडिचेरी।जकर बानगी ऐछ 2020ई.क अन्तमें आयल डा.आभा झाजीक बीहनि कथा संग्रह-" सिनेहक दाम आ डा.प्रमोदजीक " कनकिरबा"
बीहनि कथाक बढ़ैत डेग आ विकास वा पसारक क्रमकें किछु निश्शन संपादक,लेखक,आलोचकक उपस्थिति सुखद ऐछ! आदरणीय डा. रमानन्द झा रमण,आ उदयचन्द्र झा विनोदजीक समीक्षकीय विचार आ आदरणीय सतीरमण झा,रेवती रमण झा एवं डा. नारायणजीक प्रायोगिक रूपें ऐ विधामे उपस्थिति ऐ विधा,रचना आ रचनाकार सबकें सबलता देबा में अग्रसर भेल।बीहनि कथा विधाकें स्थापनामें प्रत्यक्ष/परोक्ष रूपें सहयोगी सब रचनाकारक कें शुभकामना!
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Suggested citation: मुन्नाजी. “बीहनि कथाक विकासमे रचनाकारक योगदान.” Videha — First Maithili Fortnightly eJournal, issue 334, 2021-11-15. https://www.videha.co.in/research/2021/334/बीहनि-कथाक-विकासमे-रचनाकारक-योगदान.htm

मूल विदेह अंक / Original issue