विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका · VIDEHA · ISSN 2229-547X

‘विकीपीडिया’मे मैथिली बाद मैथिली ‘गूगल ट्रान्सलेट’मे

गजेन्द्र ठाकुर · 2022-05-15 · अंक 346

गजेन्द्र ठाकुर
"विकीपीडिया"मे मैथिलीकबाद मैथिली "गूगल ट्रान्सलेट"मे सेहो.. अगिला लक्ष्य "अमेजन अलेक्सा"
गूगल ट्रान्सलेट
गूगल ट्रान्सलेटक लिंक
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गूगल ट्रान्सलेटकेँ आर पुष्ट करबाक खगता छै तइ लेल अगिला काज अढ़ा रहल छी:
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प्रारम्भ:
विकीपीडिया ०१ फरबरी २००८ लिंक
https://books.google.co.in/books?id=VC-BD5Ad6z4C&lpg=PA1&pg=PA1#v=onepage&q&f=false (मैथिली देवनागरी)
https://books.google.co.in/books?id=cTezCU59bJwC&lpg=PP1&pg=PP1#v=onepage&q&f=false (मैथिली तिरहुता)
https://books.google.co.in/books?id=3zKudz6wAO8C&lpg=PP1&pg=PP1#v=onepage&q&f=false (मैथिली ब्रेल)
गूगल ट्रन्सलेट २३ जून २०११क लिंक
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गूगल ट्रांसलेशन टूलमे
"बिहारी" भाषाक बदलामे मैथिली लेल अलग ट्रांसलेशन टूल बनेबाक आवेदन विदेहक सदस्यगण द्वारा देल गेल अछि। अपन योगदान गूगल ट्रांसलेट लेल करू,
आ कएल सम्पादन बदलबा काल कारण मे (अंग्रेजीमे) "बिहारी" नाम्ना कोनो भाषा नै हेबाक चर्चा करू। ऐ लिंकपर अनुवाद करू; गूगल एकाउंटसँ लॉग इन केलाक बाद ।
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विकीपीडिया मैथिली लिंक
विदेह (पत्रिका) https://mai.wikipedia.org/s/kgv
इन्टरनेटक संसारमे मैथिली भाषा https://mai.wikipedia.org/s/s6h
भालसरिक गाछ https://mai.wikipedia.org/s/ipm
विदेह https://mai.wikipedia.org/s/ie1
विदेहक फेसबुक भर्सन https://mai.wikipedia.org/s/iu1
विदेह सम्मान https://mai.wikipedia.org/s/jc2
विदेह आर्काइभ https://mai.wikipedia.org/s/jc0
विदेह मिथिला रत्न https://mai.wikipedia.org/s/jc3
विदेह मिथिलाक खोज https://mai.wikipedia.org/s/jc4
विदेह सूचना संपर्क अन्वेषण https://mai.wikipedia.org/s/jc5
श्रुति प्रकाशन https://mai.wikipedia.org/s/iu7
अनचिन्हार आखर https://mai.wikipedia.org/s/ion
मैथिली गजल https://mai.wikipedia.org/s/idz
मैथिली बाल गजल https://mai.wikipedia.org/s/iex
मैथिली भक्ति गजल https://mai.wikipedia.org/s/if1
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http://translatewiki.net/wiki/Special:Translate?task=untranslated&group=core-mostused&limit=2000&language=mai
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अंतिम पाँचू साइट विकी मैथिली प्रोजेक्टक अछि। एहि लिंक सभ पर जा कय प्रोजेक्टकेँ आगाँ बढ़ाऊ। (links closed)
अमेजन अलेक्सा मैथिली (शीघ्र....)
"विकीपीडिया"मे मैथिलीकबाद मैथिली "गूगल ट्रान्सलेट"मे सेहो.. अगिला लक्ष्य "अमेजन अलेक्सा"
विदेहक तेसर अंकमे (०१ फरबरी २००८) जे खुशखबरी पाठक लोकनिकेँ मैथिली विकीपीडियाकसम्बन्धमे देल गेल छल तकर सुखद परिणति कएक साल पहिने भेटल छल।
मैथिली गूगल ट्रान्सलेटक सम्बन्धमे विदेहक फेसबुक पृष्ठपर २०११ मे देल गेल तकर सुखद परिणति ११ मई २०२२ केँ भेटल।
मैथिली अमेजन अलेक्साक सेहो आरम्भ शीघ्रे हएत।
(लिंक-स्क्रीनचित्र नीचाँ देल जा रहल अछि।)
https://books.google.co.in/books?id=VC-BD5Ad6z4C&lpg=PA1&pg=PA2#v=onepage&q&f=false
https://www.facebook.com/groups/videha/permalink/138489416229195/
ओहि समयमे विदेह सम्पादक मण्डलमे ई लोकनि रहथि: सह-सम्पादक: उमेश मंडल । सहायक सम्पादक: शिव कुमार झा आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण) । भाषा सम्पादन: नागेन्द्रकुमार झा आ पञ्जीकार विद्यानन्द झा । कला-सम्पादन: वनीता कुमारी आ रश्मि रेखा सिन्हा । सम्पादक-शोध-अन्वेषण: डॉ. जया वर्मा आ डॉ. राजीव कुमार बर्मा । सम्पादका नाटक-रंगमंच-चलचित्र: बेचन ठाकुर। सम्पादक सूचना-सम्पर्क-समाद: पूनम मंडल अ प्रियंका झा। सम्पादक अनुवाद विभाग: विनीत उत्पल । स्पष्ट अछि जे "सम्पादक अनुवाद विभाग" विनीत उत्पल (आब असिस्टेन्ट प्रोफेसर, आइ.आइ.एम.सी. जम्मू) क विशेष सहयोग रहल, आशीष अनचिन्हार सम्पादक मण्डल मे नहियो रहला उत्तर कोनो सम्पादकसँ कम काज नै करैत छथि। मैथिलीेक पाठक वर्ग सेहो अपन यथाशक्ति योगदान देलनि।
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https://books.google.co.in/books?id=-U04e5FfnTEC&lpg=PA1&pg=PA405#v=onepage&q&f=false
गूगल ट्रान्सलेटकेँ आर पुष्ट करबाक खगता छै तइ लेल अगिला काज अढ़ा रहल छी:
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गूगल ट्रान्सलेट कार्यक्रम देखू
https://youtu.be/nP-nMZpLM1A
Google Translate:04:45to06:25 (24 new languages at 06:00)
Detailed Description
Tune in to find out about how we're furthering our mission to organize the world’s information and make it universally accessible and useful. To watch this keynote with American Sign Language (ASL) interpretation, please click here: https://youtu.be/PeUXBvRExic
0:00 Opening Film
1:47 Introduction, Sundar Pichai
6:21 Knowledge
15:45 Knowledge&Search
27:15 Skin Tone Equity
32:00 Computing
33:08 Assistant
43:34 Computing: AI Test Kitchen
53:08 Safer with Google
1:04:38 Safer Way to Search
1:11:20 Android: Opening
1:45:45 Android: Wear OS&Tablet
1:25:32 Android: Better Together
1:31:22 Hardware: Opening
1:33:22 Hardware: Pixel Phone&Buds
1:45:44 Hardware: Ambient&Beyond the Phone
1:54:32 Augmented Reality&Close
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रबीन्द्र नारायण मिश्र
मातृभूमि (उपन्यास)- ५म खेप
मातृभूमि़

जयन्तक प्रतिभाक चर्चा त्रिकुट भवनमे होइते रहैत छल। कालीकान्त स्वयं हुनकासँ बहुत प्रभावित रहथि। शास्त्रक ज्ञानक संगे हुनका संगीतमे सेहो महारत छल। हुनकर स्वरसँ तँ लगैत छल जेना भगवती स्वयं प्रकट भए रहल छथि। सरस्वती पूजा दिन कालीकान्तक पाँजरमे बैसल हुनकर कन्या चंद्रिका तँ हुनकर गीत सुनि मंत्रमुग्ध भए गेल छलीह। तकर बाद संगीत सिखबाक बहाने चंद्रिका नित्य जयन्तलग पहुँचि जाइत छली। कालीकान्तकेँ सेहो एहिमे कोनो आपत्ति नहि रहनि अपितु हुनका सहमतिएसँ ओ शारदाकुंज आबि जयन्तसँ संगीत विद्या सिखैत छलीह। ई क्रम बहुत दिन धरि चलैत रहल । नित्य प्रतिक संपर्कसँ जयन्तक प्रति चंद्रिकाक आकर्षण बढ़ैत गेलनि। आचार्यजीकेँ तँ एहि बातक जानकारी रहनि मुद ाहुनका जयन्तपर पूर्ण विश्वास रहनि। ओ जनैत छलाह जे जयन्त सिद्धांतक पक्का छथि आ मर्यादाक प्रतिकूल किछु नहि करताह। कालांतरमे जयन्तकेँ चंद्रिका त्रिकुट भवन सेहो बजाबए लगलीह। जयन्तकेँ ई पसिन्न नहि पड़नि मुदा हठात मनो नहि कए पाबथि।
भादवक मास छल । नदीमे बाढ़ि आबि गेल छल । लग-पास जेम्हरे देखू पानिए-पानि देखाइत छल । एहनो समयमे जयन्त ओतए नित्य साँझमे पहुँचि जाइत छलाह । एकसरमे मनन-चिंतन करैत छलाह । ओहूदिन जयन्त चंद्रिकाकेँ संगीत शिक्षा दए धारक कात बिदा रहथि। चंद्रिकाकेँ त्रिकुट भवन लए जएबाक हेतु कार तैयार छल। मुदा ओ जयन्तक संगे जएबाक हेत ुअड़ि गेलीह।
"समय साल ठीक नहि छैक। नदीमे बाढ़ि से आएल अछि। एहन परिस्थितिमे अहाँक एमहर-ओमहर गेनाइ ठीक नहि होएत।"- जयन्त कहलखिन।
"मुदा हमरा तँ अहाँसँ फराक हेबाक मोने नहि करैत अछि।"
"ई कोनो नीक लक्षण नहि अछि। कहीं अहाँ परेसानीमे ने पड़ि जाइ। जँ अहाँक पिताक कान धरि ई बात सभ गेलनि तँ गेल घर छी। अहाँक तँ किछु नहि बिगड़त मुदा हमर तँ सत्यानाशे भए जाएत?"
"अहाँ सदरि काल एहने गप्प किएक करैत रहैत छी?हुनका सभ बात बूझल छनि। हुनका इहो बूझल छनि जे हम अहाँसँ प्रेम करैत छी।"
"ई तँ बड़ अनर्थ भेल। अहाँकेँ एहि बात सभक प्रचार नहि करक छल। एहिसँ अहाँकेँ सामाजिक अप्रतिष्ठा भए सकैत अछि।"
"हम सभ किछु गलत करितहुँ तखन ने? अहाँक उज्ज्वल चरित्रपर जानकी धामक कण-कणकेँ विश्वास छैक।"
"मुदा तकर माने की? लोकलाजो कोनो चीज होइत अछि। फेर हम अहाँक ेँकतेक दिन धरि संग दए सकैत छी?
"एना नहि बाजू जयन्त। अहाँकेँ साइत नहि पता अछि जे अहाँ कतेक संपन्न छी। हमर पिता तँ एक इसारापर अहाँकेँ हेतु सभ किछु करबाक हेतु प्रस्तुत छथि, ओ निरंतर अहाँक बारेमे पुछैत रहैत छथि। आग्रह करैत रहैत छथि जे अहाँक सुख-सुविधाक ध्यान राखल जाए।"
"मुदा अहाँकेँ ई नहि बिसरबाक चाही जे हम एहिठाम विद्याध्ययन हेतु आएल छी। हमर शोधप्रवंधक काज अंतिम चरणमे अछि आ एहन हालतमे हमरा अपनध्यानकेँ केन्द्रित राखब बहुत जरूरी अछि।"
"अहाँ हमरा ठकबाक प्रयास नहि करू। हम नीकसँ जनैत छी जे केओ अहाँक ध्यानकेँ बिचलित नहि कए सकैत अछि। अहाँ स्वय ंसेहो नहि।"
"एतेक प्रशंसा सुनि कए हम तँ आओर चिंतामे पड़ि गेल छी।"
दुनू गोटे गप्पमे तल्लीन छलाह। ओमहर सूर्यास्त कखन भेल सेहो हुनका सभकेँ पता नहि चललनि। एही बीचमे चंद्रिकाक पैर ससरि कए साँपक बिहरि पर पड़ि गेलनि। ओ चिचिआ उठलीह-
"लगैत अछि किछ ुकाटि लेलक। "
दहिना पैरक औंठा लगसँ खून बलबला कए निकलि रहल छल। जाबे-जाबे जयन्त किछु बुझितथि ताबे चंद्रिका ठामहि खसि पड़लीह। जयन्त चिचिआ उठलाह -
"दौड़ै जाउ। जुलुम भए गेल।चंद्रिकाकेँ साँप काटि लेलकनि।
लग-पासमे कतहु केओ नहि छल। बरखा से भए रहल छल। रहि-रहि कए मेघ आपसमे टकराइत भयानक गर्जना करैत छल। बिजलौंकाक प्रकाशमे फटकीमे नागबाबा देखेलखिन। हुनका देखितहि जयन्त जोर-जोरसँ चिकरए लगलाह-
"जुलुम भए गेल। चंद्रिकाकेँ साँप काटि लेलकनि।।'
जयन्तक चिकरब सुनि नागबाबा सावधान भेलाह।
"ई तँ जयन्तक आबाज बुझा रहल अछि। मुदा एहन बिकराल समयमे ओ एतए की कए रहल छथि?"-से सभ सोचैत नागबाबा ओतए पहुँचलाह। ताबे कालीकान्तक दूटा आदमी सेहो चंद्रिकाकेँ तकैत ओहिठाम पहुँचल। नागबाबा चंद्रिकाकेँ देखितहि बजैत छथि-
"एकर बाँचब मोसकिल अछि। लगैत अछि नाग डसि लेलकनि अछि।"
"किछु तँ करिऔक नागबाबा।"
"हिनका नागपर्वत स्थित हमरकुटीमे लेने चलू। ओतहि किछु भए सकैत अछि।"
नागबाबाक बात सुनि जयन्त माथ पकड़ि कए बैसि गेलाह।
"बेसी सोच-बिचार करबाक समय नहि अछि। चंद्रिका लग बहुत कम समय छनि। विलंब केलासँ हिनका बँचब मोसकिल भए जाएत। तेँ हुनका शीघ्रे नाग पर्वत पर लए चलू। हमहु ओतहि चलैतछी।"- नागबाबा बजलाह।
(अनुवर्तते)
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गढ़-नारिकेल उपन्यास-त्रयीक पहिल उपन्यास "सहस्रशीर्षा" क बाद दोसर उपन्यास
गजेन्द्र ठाकुर
द ........ फाइल्स
(पहिल खेप)

हमर नाम छी………..
आ गाम “गढ़ नारिकेल”
शुक्र दिन ऑफिससँ दस बजे रातिमे घुरलहुँ तँ डेरा पहुँचिते बेटी स्वागत केलक। बुझा गेल जे रूसल अछि। पुछलिऐ की भेल तँ ओ मोन पाड़लक जे अझुका सिनेमा देखबाक प्रोग्राम छलै। हमर एहि जवाबपर कि देरी भऽ गेल अछि, थाकल छी ओ सोफापर मुँह घुमा कऽ बैसि गेल आ कथुक उत्तरे नै दिअए। कनियाँकेँ कहलियन्हि जे काल्हि सिनेमा चलै चलब से नै हेतै, ८-११ बला शो तँ खतम भऽ गेलै। ओ बेटीसँ पुछि कऽ ओतहियेसँ चिकरि कऽ कहलन्हि जे अहाँ अझुका प्रोमिस केने रहिऐ। हँ प्रॉमिस तँ केने रहिऐ, तकरा पूरा तँ करैये पड़त। फेर मोन पड़ल जे सरकार नाइट शो देखेबाक अनुमति थियेटर सभकेँ देने छै, से आइ काल्हि ११ सँ २ बजेक शो देखि सकै छी। बूक माइ शो साइटपर ऑनलाइन टिकट कटेलौं आ से देखि बेटीक रुसब खतम भेलै। बेटा, कनियाँ आ माँ तीनू गोटे तैयार भऽ गेला आ सिनेमो जे पड़ि लागल से सनगर। सालमे एक्के दू टा तँ नीक सिनेमा बनै छै बॉलीवुडमे।
दू बजे रातिमे सिनेमा देखि कऽ घुरि रहल छी आकि गाड़ीक लाइट एकटा बड़का होर्डिंगपर पड़लै, आ ओहने बहुत रास होर्डिंग अबैत गेल।
ओइ होर्डिंग सभपर राज्यक महिला मुख्यमंत्रीक कनी अगरायल सन अभयमुद्राबला फोटो छलै। ओना तँ बेटीसँ बेशी रनिंग कमेण्ट्री हमहीं करै छै, रस्ताक सभटा चीजक विस्तृत विवरण दैत गाड़ी चलबै छी, कखनो काल जखन दुनू हाथ छोड़ि खिस्सा आगू बढ़बै छिऐ तँ ओ टोकितो अछि आ सड़कक सभटा कानून, रेड-लाइट, ग्रीन लाइट, जेब्रा क्रॉसिंग, सभटा ओ बुझबऽ लगैए। मुदा ऐ होर्डिंग सभकेँ हम अनठा देलिऐ जे कहबै तँ उनटे सुना देत जे ई सभ हमरा बुझले अछि। मुदा ऐबेर से नै भेल। शीसा खोलि कऽ ओ अचरजसँ हमरासँ पुछलक-
“ई ककर फोटो छिऐ डैडी?”
“ईहो नै बूझल अछि, फलना दीदी मुख्यमंत्रीक फोटो छियन्हि ई”।
“मरि गेलखिन्ह? कहिया?”
कनी काल तँ हमरा बुझबामे नै आएल आ जखन आयल तँ ततेक हँसी लागल जे गाड़ी चलेनाइ मुश्किल। माँ कनियाँ आ बेटाकेँ कहलियन्हि जे ई किताबमे पढ़ैए जे मुइलाक बाद बड़का फोटो आ मूर्ति बनै छै से एकरा भेलै जे मरि गेलीह मुख्यमंत्री आ स्कूलमे एक्को दिनक छुट्टी नै भेटल, आ हमरा संगे ओहो सभ पेट पकड़ि कऽ हँसऽ लगला। बेटी हतप्रभ सभकेँ देखैत रहल। ओ हमरा दिस इशारा कऽ कय स्टीयरिंगपर ध्यानदेबा लऽ कहलक तँ हम गाड़ीकेँ सड़कक कात लगा कऽ गाड़ी ठाढ़ कऽ लेलौं।
“सूतल छलौं की, उठा देलौं।”- फोन घनघनाइए आ ओइमेसँ अबाज बहराइए।
“नै, एते जल्दी कहाँ सूतै छी, कि कोनो जरूरी गप अछि की?”, दू बजे राति कऽ ऑफिसक हाकिम बिना काजेक फोन किए करत, से जकरा इंस्टिंक्ट कहै छै तहिना पुछा गेल छल।
“एम्सक ट्रॉमा सेन्टर आबि सकै छी, आउ तँ फेर आगाँ गप हेतै”।
डेरा पहुँचि, कपड़ा पहीरि कऽ ऊबरकेँ बजबै छी, अपन गाड़ी लऽ जायब तँ पार्किंग भेटत आकि नै से सोचि कऽ। गेटपर उतरि कऽ जखने ट्रॉमा सेन्टरक भीतर जाइ छी तँ अबाज अबैए-
“सर, एम्हर छी हम”। हमर इंस्पेक्टर सहैब गालकेँ हाथसँ साटने हमरा शोर करै छथि।
“अहूँ एतै छी, हाकिम बजेने अछि, तेँ हम आयल छी”।
“हमरे दुआरे बजेने छथि, अटैक कऽ देलक गुण्डा सभ”।
“कतऽ, कोना?”
ओ अपन गालपरसँ हाथ हटबै छथि तँ गाल दू टुकड़ी दुनू दिस भेल देखाइत अछि।
“हाँ, हाँ”।
ओ धड़फड़ा कऽ हाथसँ गालकेँ साटि लै छथि।
हम कहै छिएन्हि- “अहिना केने रहू, अहाँकेँ अपन गाल देखा नै पड़ि रहल अछि तेँ अहाँकेँ पता नै अछि जे ….”। चुप भऽ जाइ छी।
कते कालसँ एतऽ छी।
एक घण्टासँ छी। जखन आइ.जी., डी.आइ.जी. सहैब सभ कनी काल पहिने एला तखनसँ कनी ध्यान देलकहेँ। ईहो सभ की करतै, देखै नै छिऐ भीड़।
एकटा डॉक्टर हुनका बजाकेँ लऽ जाइ छन्हि एकटा कोठलीमे। ओइ कोठलीक बाहर सभ हाकिम जमा छथि, सभ गम्भीर मुद्रा बनेने छथि। लोकल थाना बला सभ सेहो आबि गेल अछि। थाना बला सभ सहटि कऽ हमरा लग आबि गेल।
दरोगाजी हमरा अपन मोबाइल निकालि एकटा वी.डी.ओ. देखबैत छथि।
“देखू ऐ गुण्डा सभकेँ, हमरेपर पाथर फेकि रहल अछि”।
हवलदार सहैब टिपलखिन्ह जे ओइ सारकेँ हुजूर जेल पठा देलखिन मुदा गजेरी-चरसी सभ छै। कोनो डरे-भर नै होइ छै। हुजूरे कऽ मोटरसाइकिल थानेपरसँ चोरा लेलकन्हि, ओकर अखनि धरि पते नै चलल छै।
हम दरोगाजीसँ पुछलियन्हि- “अहाँकेँ की लगैए, की ई लॉ एण्ड ऑर्डरक गप छै आकि ऑफिसक काजसँ एकर कोनो सम्बन्ध छै”?
ओ कहै छथि जे मामिलामे पेंच छै। तहकीकात तँ जबरदस्त ढंगसँ हेतै। मुदा ओ सेहो कहै छथि जे मोटा-मोटी ई लॉ-ऑर्डरेक समस्या छिऐ। मुदा देखू…
गाल सीबि देल गेल छन्हि। इन्सपेक्टर साहेब हमरा कहै छथि जे गाल तँ दू टुकड़ी भऽ गेल छलै। सीलाक बाद डॉक्टर एना देखेने छलन्हि।
सभ हाकिम अपना-अपना घर दिस बिदा भेला। सरकारी गाड़ी इंस्पेक्टर साहैब कऽ लऽ गेलन्हि आ हम ऊबरकेँ फोन लगेलौं।
………………………………………………………………………………………………………….
अगिला दिन भोरे-भोर ऑफिस गेलौं तँ अर्दली इशारामे कहलक जे एकटा इनफॉर्मर आयल अछि। हम कहलिऐ जे ककरोसँ भेँट किए नै करा देलिऐ, एतेक गोटे ऑफिसमे अछि तँ कहलक जे कहैए जे अहींसँ भेँट करत, कहैए जे हमर इलाकाक हाकिम छथि, अनकापर ओकरा भरोस नै छै।
“हमर इलाकाक छी, कतुक्का छी, नामो-गाम बता देलक की?”
“नाम तँ नै बतेलक मुदा कहलक जे गामक नाम कहि दियौन्ह हाकिमकेँ, अपने बजा लेता। गामक नाम कहलक विचित्रे…. किदन तँ “गढ़ नारिकेल”!”
(अनुवर्तते)

Suggested citation: गजेन्द्र ठाकुर. “‘विकीपीडिया’मे मैथिली बाद मैथिली ‘गूगल ट्रान्सलेट’मे.” Videha — First Maithili Fortnightly eJournal, issue 346, 2022-05-15. https://www.videha.co.in/research/2022/346/विकीपीडिया-मे-मैथिली-बाद-मैथिली-गूगल-ट्रान्सलेट-मे.htm

मूल विदेह अंक / Original issue