विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका · VIDEHA · ISSN 2229-547X

मुख्य पात्रक गौण व्यथा : अबारा नहितन

प्रदीप बिहारी · 2022-08-15 · अंक 352

मुख्य पात्रक गौण व्यथा : अबारा नहितन
केदारनाथ चौधरी एकटा एहन विरल लेखक छथि, जे मिथिला आ मैथिली हित लेल बताह होइत रहलाह। अपन छात्र-जीवनक आरंभहिसँ मैथिली हित लेल चिन्तनमे जीब' लगलाह। अपन शैक्षणिक कैरियरक बिनु परबाहि कयनहि मैथोलीक हितमे लगलाह आ लागल रहलाह। हुनक उपन्यास 'अबारा नहितन' पढ़लाक बाद हमरा से बुझायल। ई उपन्यास पढ़लाक बाद आर जे सभ बुझायल, से आगाँ कहब।
मैथिलीमे अपन पहिल उपन्यास 'चमेलीरानी'सँ चर्चित केदारनाथ चौधरी देखौलनि जे उपन्यास लिखबाक हिनक लूरि आ उपन्यासक भाषा पाठककें 'दीवाना' बना सकैत छै। ईहो उपन्यास मैथिलीक पाठककें मोहि लेबामे सफल भेल। एहि उपन्यासक विषय-वस्तु, एकर सहरजमीन मैथिलीक आन उपन्यास सभसँ फराक अछि, जे पाठककें आकर्षित करैत अछि। हमरा लगैत अछि जे चौधरी जी अपन भाषाक उन्नति आ साहित्यक कोषमे वंचित विषय सभकें चुनि क' आनबाक आ जमा करबाक आग्रही छथि। भाषाक सहजता आ चमकी हिनका लग छनिहें, अपन गप पाठकक हृदयमे साँठि देबाक अवगति तँ छनिहें आ तें एही क्रममे करार, माहुर, हीना आ अबारा नहितन सन उपन्यास अबैत छनि। प्रसन्नताक गप तँ ई जे हिनक पोथी सभक तीन-तीन, चारि-चारि संस्करण प्रकाशित भेलनि अछि। एकर माने ई जे मैथिलीमे हिनक पाठक छनि।
हमरा हिनक उपन्यास 'अबारा नहितन'क मादे गप करबाक मोन होइत अछि। एहि पोथीक मुखपृष्ठक बादक पृष्ठ पर लिखल छैक- मैथिलीक पहिल फिल्म 'ममता गाबय गीत' कोना बनल तकर रोचक कथा-संस्मरणात्मक उपन्यास। उपन्यासमे कथा आ संस्मरण तँ रहितहिं छैक, मुदा हमरा जनैत एहि उपन्यासकें कथा, संस्मरण आ फिल्म-निर्माणक 'रोमांच'कें मोनमे राखि पढ़ने बहुत रास साँचकें बुझबा-गुणबामे पाठक हुसि जयताह। फिल्म-निर्माणक कथाक संग मिथिला आ मैथिलीक समस्या आ विकास पर गंभीर चिन्तन एहि उपन्यासमे अछि। एहि उपन्यासमे मैथिलक विभिन्न चरित्रक गहन आ सूक्ष्म चित्रण अछि। उपन्यासमे एकठाम वर्णित अछि- लेखक अपन अध्ययनक क्रमक कालेजक तातिलमे गाम जयबालेल टेन पकड़' हावड़ा टीसन पर अबैत छथि, तँ ताहि समयक दृश्य देखि मोन द्रवित भ' जाइत छथि। जाइ बला एक, अरिआत' बला बीस जन। सबहक समाद, सबहक आह्लाद। अपने पोखरिमे नहैह', अपने इनारक जल पीबिह'। आदि-आदि। किनको बूढ़ गायकें कसाइसँ बचयबाक चिन्ता छनि, किनको भरना लागल ब्रम्होत्तरा बला खेतकें छोड़यबाक संघर्ष-गाथा छनि, तँ किनको कंटिरबी लेल अन्दाजेक नापसँ फ्राक पठयबाक स्नेह। पलायनजन्य विवशताक नीक चित्रण देखबामे अबैत अछि। एहि क्रममे ओही पृष्ठ 27 पर लिखैत छथि- गरीब, असहाय, निर्बल भेल मैथिलकें अपन जन्मभूमि छोड़लासँ कतेक पीड़ा भ' रहलैए। एकर निदान लेल किछु होयबाक चाही। जागू हे मिथिला! सभ किछुसँ परिपूर्ण रहितहुँ अहाँ दरिद्र किएक छी, निरुपाय किएक छी? आब तँ देश स्वतंत्र छै। तइयो की मिथिलाक समस्या मुँह बौने रहतैक? चौधरी जीक एहि प्रश्नक उतारा, हमरा जनैत, एखनो नहि भेटि सकलनि अछि। देशक स्वतंत्रताक भने अमृत महोत्सव मनाओल जाइक, चौधरी जीक प्रश्न ओहिना ठाढ़ अछि।
एहि उपन्यासमे चौधरी जीक एकटा पात्र छथिन- वैद्यनाथ बाबू। ओ कहैत छथि जे मिथिला आ मैथिलीक पहचान लेल जँ मिथिलाक्षरकें आवश्यक मानैत छी तँ स्कूल खोलू। एहिठाम (पृष्ठ 35) एकटा आर चिन्ता छैक। ओ ई जे जँ मिथिलाक्षरक बले मैथिली पढ़निहार, मैथिली बजनिहारक फौज तैयार नहि कयल जेतै तँ कालक्रममे मैथिली भाषा विलुप्त भ' जेतै। जेना, ब्रजभाषा आ अवधी भाषाक कविक रचनाकें हिन्दी भाषा अपनामे आत्मसात क' लेलक, तहिना विद्यापतियोक कविता हिन्दी भाषाक अंग बनि जायत। आधुनिक शिक्षाक विस्तार भेने मैथिल परिवारक भाषा मैथिलीसँ हिन्दी आ अंग्रेजी भ' गेलैए। एकरा रोकल नहि जा सकैत अछि। मुदा, सावधान भेल जा सकैत अछि।
एहिना मिथिलाक पंडित लोकनिक प्रतिस्पर्धा, केओ किनकोसँ कम नहि होयबाक दंभ आ किछु जाति आ क्षेत्र विशेषक भाषाक ढोलहोकें मिथिलाक सामाजिक, आर्थिक आ राजनीतिक प्रगतिक बाधक मानैत चिंता व्यक्त करैत छथि। एहि सभसँ निवारणक बाट ताकबाक प्रयासमे कतोक रचनाकार आ मैथिलीक हित चिंतक सभसँ भेंट करैत छथि आ अंतत: महंथ मदन मोहन दासक संग तय करैत छथि जे मैथिलीमे फिल्म बनाओल जाय। फिल्मेसँ मैथिल सभकें एकत्रित कयल जा सकैत अछि। भाषाकें आमलोक धरि पहुँचाओल जा सकैत अछि। आ फिल्म निर्माणक घुरघुरा दुनू मित्र महंत जी आ चौधरी जीक माथमे पैसि जाइत छनि।
पहिने दुनू तय करैत छथि जे मैथिलीक पहिल फिल्म धार्मिक होअय। फिल्म-निर्माणक क्षेत्रमे दुनूक अनुभव शून्य बटा शून्य बराबर शून्य। मुदा, हिआउ बड़ी टा, संकल्प बड़ी टा, अनुराग बड़ी टा। चलि जाइत छथि बम्बई । ओत' भेंट होइत छथिन उदय भानु सिंह। ओ हिनका दुनूक संग सह निर्माता बनैत छथिन आ बम्बईमे फिल्म जगतमे कार्यरत आ प्रयासरत मैथिली-अमैथिल सभसँ भेंट करबैत छथिन आ फिल्ममे अपन अभिनयक भूमिका ओगरि लैत छथि। मैथिलीमे फिल्म-निर्माण हेबनिमे बढ़ल अछि। लोक प्रयासरत छथि। मुदा, एकटा लसेढ़ एखनो बेसी फिल्ममे पाओल जाइत अछि जे पूँजी लगौनिहार अपन अभिनयक भूमिका ओगरितहिं छथि। एहन फिल्म सभक दशा सबहक सोझाँ अछि। प्रोफेसनलिज्मक अभाव एखनुक बनैत फिल्म सभमे झलकैत अछि। हँ, एहि सभसँ फराक किछु फिल्मकार छथि, जे अपन प्रतिभा आ इमानदार प्रयासक संग मैथिली फिल्मकें उँचाइ धरि ल' जा रहल छथि। हिनकालोकनिक प्रयाससँ जखन राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय परिदृश्यमे मैथिली फिल्मकें देखैत छी, तँ करेज सूप सन होइत रहैत अछि।
फिल्म बनायब सरल काज नहि छैक। बहुत रास बाधा एहि मार्गमे छैक, जकर सांगोपांग वर्णन उपन्यास 'अबारा नहितन'मे कयल गेल अछि। फिल्म-निर्माण प्रक्रिया पाठकक मोनमे कौतुक जगबैत छैक, मुदा संगहि आरंभिक दुनू निर्माताक पीड़ा सेहो झलकैत छैक। फिल्मक वितरक ताकबाक लेल जे संघर्ष छैक, से पढ़िते बनैत छैक। मैथिल आ मैथिलीक संस्था सभक अपरूप-कुरूप चेहरा सभसँ पाठककें साक्षात् करबैत अछि ई उपन्यास। छगुन्ताक बात ई जे एतेक बरखक बादो चौधरी जी जे चेहरा देखलनि, से बदलल नहि अछि। अपन एहि क्रममे मैथिलीक दधीचि नामसँ विख्यात बाबू साहेब चौधरी हिनका लोकनिक मदति करबा लेल दुआरिए दुआरि हिनका सभक संग जाइत छथि आ अपमान सहैत रहैत छथि।
हँ, एहि उपन्यासक एकटा विशेषता इहो अछि जे मैथिलीक प्रख्यात लोक सभ एकर पात्र छथि। लेखकक ई एकटा साहसिक काज सेहो छनि। सामान्यतः रचनाकार कोनो पात्रक मूल नामसँ सृजन करबासँ परहेज करैत छथि, मुदा चौधरी जीक साहस देखबा योग्य अछि जे मैथिली आ मिथिलाक काजमे बौअएबाक क्रममे नीक आ अधलाह, मृदुल आ कुटिल, जे सभ भेटलखिन, सभके बिनु कोनो आवरणक पाठकक सोझाँ रखलनि अछि।
अबाराक उपाधि पौलाक बाद 'ममता गाबय गीत' बाकसमे बन्न भ' गेल आ कतोक बरखक बाद प्रसिद्ध गीतकार रवीन्द्र (रवीन्द्रनाथ ठाकुरक सत्प्रयासें रिलीज भेल। उपन्यास कहैत अछि जे फिल्म बाकसमे बन्न भेलाक बाद चौधरी जी उच्च शिक्षा लेल कलकत्तेसँ कैलिफोर्निया जाइत छथि आ 1977 ई मे अपन देश घुरैत छथि। 2001ई मे लहेरियासरायमे घर बनबैत छथि आ रह' लगैत छथि। 2003 ई मे एकटा पत्रकार 'ममता गाबय गीत' फिल्मक कब्र खुनि बहार करैत छनि आ पुछैत छनि- 'की अहाँ मैथिली भाषामे बनल 'ममता गाबय गीत' फिल्मक कर्ताधर्ता छी? अगर 'हँ' तँ अहाँ मैथिल समाजमे अपरिचित किएक छी?
ई प्रश्न चौधरी जीकें आहत कयने होयतनि। हुनका लग एहि प्रश्नक उत्तर उपन्यासक अंत धरि नहि छनि। उपन्यासक अंतिम पाराग्राफमे ओ लिखैत छथि - 'फिल्म पूरा भ' गेलै तकर सूचना पाबि हमरा दुख नहि प्रसन्नता भेल छल। मुदा एकटा जिज्ञासा मोनमे रहिए गेल रहए। की हम आ मदन भाइ मैथिल समाजमे अपरिचितसँ परिचित भेलहुँ? जवाबक प्रतीक्षामे मदन भाइ संसार त्यागि बिदा भ' गेला। मुदा हम एखन तक प्रतीक्षा मे जिविते घुमि-फिरि रहलहुँ अछि।'
एहि समाजकें अपन नायककें चिन्ह' नहि अयलैक अछि। 'अपना'सँ पैघ केओ देखाइते ने छैक। विभिन्न क्षेत्रमे चौधरिए जी सन सेवारत बहुत रास मुख्य पात्र सभ छथि, जिनक परिचितिजन्य गौण व्यथा एखनहुँ प्रश्नक संग ठाढ़ अछि। मुदा, ई प्रश्न मिथिलाक समाज लेल धनि सन। हमरालोकनि ने अपन चश्मा साफ करैत छी आ ने बदलिते छी।
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Suggested citation: प्रदीप बिहारी. “मुख्य पात्रक गौण व्यथा : अबारा नहितन.” Videha — First Maithili Fortnightly eJournal, issue 352, 2022-08-15. https://www.videha.co.in/research/2022/352/मुख्य-पात्रक-गौण-व्यथा-अबारा-नहितन.htm

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