विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका · VIDEHA · ISSN 2229-547X

बिना बहर आ काफिया गजल कोना भेलै

जगदीश चन्द्र ठाकुर 'अनिल' · 2022-11-15 · अंक 358 · पृष्ठ 213–235

(ई आलेख साहित्य अकादेमीसँ मान्यता प्राप्त कथित लिटेरेरी एसोसियेशन चेतना समितिक पत्रिकामे काँट-छाँटक संग प्रकाशित भेल छल। एतऽ ओइ आलेखक मूल आ प्रामाणिक संस्करण देल जा रहल अछि।- सम्पादक)
साहित्यमे गद्यमे कथा, नाटक, उपन्यास, संस्मरण, जीवनी, आत्मकथा, समीक्षा, आलोचना आदि लिखल जाइत अछि, पद्यमे दोहा, कविता, गीत, गजल, खंड काव्य आ महाकाव्य आदि लिखल जाइत अछि। सभ विधाक अपन-अपन विशेषता छै, जाहि कारणे ओ अस्तित्वमे अछि।
बच्चा सभ अपन माय-बाबू,दादा-दादी,कक्का-काकी,टोल पडोसक आन बच्चा सभसँ बजनाइ सिखैत अछि । बादमे शुद्ध बजनाइ आ लिखनाइ सिखैत अछि । व्याकरणक उपेक्षा क'क' शुद्ध बाजब आ लीखब संभव नहि भ' सकैत छैक । साहित्य सृजनमे व्याकरणोक महत्वपूर्ण योगदान छै ।
गजल सेहो भारतीय भाषामे लोकप्रिय स्थान ग्रहण क' चुकल अछि । हिन्दीमे सेहो गजलक व्याकरण पचासो बरख पहिने आबि चुकल अछि ।
किछु पढ़िक' आ सूनिक' हम 1983 मे मैथिलीमे गजल कहब आरम्भ केलहुँ । किछु रचना मिथिला मिहिर आ माटि-पानिमे छपबो कएल, मुदा अपना संतुष्टि नै भेल । हिन्दीमे सेहो लिखय लगलहुँ । किछु रचना कोनो-कोनो पत्रिकामे छपबो कएल, मुदा व्याकरणक जानकारीक अभाव खटकैत रहल । आर.पी.शर्मा 'महर्षि'क लिखल हिन्दी गजलक व्याकरण देखलहुँ, मुदा मैथिलीमे गजलक जानकारी मैथिली गजल आ शेरो-शायरीक लेल समर्पित ब्लॉग 'अनचिन्हार आखर' पर पर्याप्त सामग्री देखि हर्षित भेलहुँ। एहि ब्लॉगपर एके ठाम तेरह खण्डमे गजेन्द्र ठाकुर द्वारा प्रस्तुत गजल शास्त्रमे गजलक विवेचन मैथिली भाषाक तत्वपर कएल भेटल । तकर बाद 22.07.2011 आ 21.09.2011 के बीचमे आशीष अनचिन्हार द्वारा पच्चीस खण्डमे मैथिली गजलक व्याकरण ओ इतिहास 'गजलक संक्षिप्त परिचय'क अंतर्गत प्रस्तुत कएल गेल । कतेक रास गजलकारकें एक मंचपर अनबाक काज केलक ई मंच। ई ब्लॉग मैथिली गजलक व्याकरणकें सहजतासँ लोकक समक्ष आनि शुद्ध गजल लिखबाक बाट प्रशस्त केलक।
जाहि समयमे मैथिली गजलक व्याकरण उपलब्ध नहि छल, तखनो शुरुआतमे स्वस्थ गजल कहल गेल छल जे कि ओहि समयक गजलकारक ज्ञानक परिचायक अछि। मुदा बीचमे किुछु बेसिए बर्ख मैथिली गजलक एहन अवस्था रहलै जाहिमे जकरा जाहि तरहे भेलै ओ गजलकेँ गीजि देलकै आ से केखनो क्रांतिक नापर, केखनो कथ्यक नामपर तँ केखनो प्रगतिशीलताक नामपर। आब जखन गत बारह बरखसँ मैथिलीमे गजलक व्याकरण उपलब्ध अछि, तखन आब गजलक स्वास्थ्य सुनिश्चित करबाक आवश्यकता अछि। काफिया आ बहरक लेल थोड़ेक अभ्यास आ सावधानी रखैत एहि लक्ष्यकें प्राप्त कयल जा सकैत अछि । हमरा गजलक व्याकरणक जे जानकारी अछि तकर मुख्य स्रोत मैथिली गजलक लेल समर्पित ब्लॉग 'अनचिन्हार आखर' अछि।
आशीष अनचिन्हार द्वारा प्रस्तुत 'मैथिली गजलक व्याकरण ओ इतिहास' और 'मैथिली गजलक रेडी रेकनर' मे सेहो विस्तारसँ मैथिली गजलक सभ पक्षपर विचार प्रस्तुत कएल गेल अछि । हमरा ओकर बहुत थोड़ जानकारी अछि ।
हमरा गजल लेखन लेल जे न्यूनतम जानकारी अपेक्षित लागल अछि से एतय प्रस्तुत कएल जा रहल अछि :
1. गजल लेल मूल तत्व अछि (i)सही काफिया (II) एक समान बहर आ (iii) दमदार कथन ।
बहर,काफिया आ रदीफ : एकटा गजलक शेर सभ देखू :
लोक नीचाँ उतरि जाइए
मारि सभठाँ बजरि जाइए
ई गजलक पहिल शेर अछि । एहि शेरक दूनू पाँतीक अन्तमे समान शब्द अछि 'जाइए' आ एहि शब्दक पाछाँ पहिल पाँतीमे अछि शब्द 'उतरि' आ दोसर पाँतीमे अछि शब्द 'बजरि' अर्थात दूनू शब्दमे 'रि' आ ओकरा पाछाँ 'अ' ध्वनि/ मात्रा समान अछि । अतः शब्द 'जाइए' भेल एहि गजलक रदीफ आ 'अ' ध्वनिक संग 'रि' भेल काफिया । पहिल शेरकें मतला कहल जाइत अछि, शेरक दूनू पाँतीकें अलग-अलग मिसरा कहल जाइत अछि ।
दूनू पाँतीमे मात्राक्रम अछि :
2122-12-212
यैह भेल एहि गजलक बहर अर्थात छंद । आ जे बहर मतलामे लेल गेल अछि तकरे निर्वाह पूरा गजलमे हेबाक चाही। तेनाहिते आन गजलमे जे बहर हो सएह बहरक निर्वाह हेतै। एकटा गजलमे एकसँ बेसी मतला भ' सकैत अछि । एहि गजलमे दोसर आ तेसर शेर सेहो पहिल शेर जकाँ दूनू पाँतीमे रदीफ, काफिया आ समान मात्राक्रमसँ युक्त अछि, आ तें ईहो दूनू शेर मतला अछि -
गाछ कहियो मजरि जाइए
फेर कहियो झखड़ि जाइए
आगि सभठाँ पसरि जाइए
खेल सभटा उसरि जाइए
आब नीचाँक शेर सबहक दोसर पाँतीमे समान रदीफ, काफिया आ सभ पाँतीमे समान मात्राक्रम देखल जाए :
पाइ राखू अहाँ बैंकमे
पाइ हाथसँ ससरि जाइए
मूनि राखब कथी कोनठाँ
मूस सभटा कुतरि जाइए
लोक कतबो हुए जोरगर
एक दिन सभ नचरि जाइए
अतः उपरोक्त गजलमे 'जाइए' शब्द रदीफ अछि, 'अ' ध्वनिक संग 'रि' काफिया भेल आ बहर भेल मात्राक्रम 21-22-12-212.
गजलक अंतिम शेर जाहिमे गजलकारक नाम / उपनाम रहैत अछि ओकरा मकता कहल जाइछ । एखन धरि ई गजल बिना मकताक गजल अछि । मकताक रूपमे ई शेर लेल जा सकैत अछि :
मास अगहन अबै छै 'अनिल'
लोक कातिक बिसरि जाइए
उपरोक्त उदाहरणक संग रदीफ, काफिया आ बहरक निम्नलिखित परिभाषा देल जा सकैछ :
रदीफ़ : गजलक मतलाक दुनू पाँतीक अन्तमे आ बाद बला शेर सभक दोसर पाँतीक अन्तमे कोनो समान वर्ण अथवा शब्द अथवा शब्दक समूह होइत अछि ।
काफिया : गजलक मतलाक दुनू पाँती आ बादक सभ शेरक दोसर पाँतीमे रदीफसँ पहिने स्वर साम्य युक्त तुकान्तक होइत अछि काफिया । ई कोनो ध्वनि( मात्रा)क संग कोनो वर्ण अथवा किछु वर्णक समूहक रूपमे अथवा मात्र कोनो ध्वनिक रूपमे रहैत अछि ।
बहर : गजलक सभ पाँतिमे समान मात्राक्रमकें बहर अर्थात छंद कहल जाइत अछि ।
2. मात्राक गणना :
ह्रस्व अथवा लघु मात्राकें 1 आ दीर्घ अथवा गुरु मात्राके 2 सँ प्रदर्शित कएल
जाइत अछि ।
ह्रस्व वर्ण ( 1 मात्रा बला ): अ,इ,उ,
क सँ ङ,
च सँ ञ,
ट सँ ण,
त सँ न,
प सँ म,
य सँ ह धरि,
चंद्रविन्दु बला वर्ण ।
दीर्घ वर्ण ( 2 मात्रा बला ) : आ,ई,ए,ऐ,ओ,औ,अं,अ:,ऐकार,ओकार,औकार,अनुस्वार,विसर्ग बला वर्ण, संयुक्ताक्षरसँ पहिने बला वर्ण (से चाहे एक शब्दमे हो वा कि दू अलग-अलग शब्दमे)। एहिकेँ अरितिक्त गजलमे (मात्र गजलमे) कोनो शब्दमे एकै संग बाजल जाए बला दू टा लघुकेँ सेहो दीर्घ मानल जाइत छै जेना "गड़बड़" ई शब्द संस्कृतक हिसाबें 1111 छै मुदा गजलमे एकरा 22 मानल जाइत छै। संस्कृतक छंद एवं अन्य प्राचीन छंदमे गड़बड़ शब्दकेँ 22 मानब निषेध छै। गजलक अरूजी सभ गजलमे प्रवाह अनबाक लेल एहन व्यवस्था केने छथि।
3.सही काफिया-शब्दक उदाहरण :
पहिल शेर / मतलामे काफिया-शब्द अन्य शेर सभलेल उपयुक्त काफिया
पातक / बाटक बालक / पालक / चालक / हाथक
बाटपर / खाटपर हाटपर / घाटपर / टाटपर
पानिक / आनिक हानिक /
हाथमे / पातमे बाटमे / भातमे / कातमे / चासमे
कलमसँ / पतनसँ गगनसँ / चलनसँ / मननसँ /पवनसँ
बसन्त / अनन्त दिगन्त / भिड़न्त / चलन्त
जीवन / तीमन भोजन / पहिरन / अनमन
घर / डर हर / तर / चर /
अखबार / बाजार संसार / उपहार / लाचार / व्यापार
4. (i) मात्राक गणनाक उदाहरण :
कमल / कते / सुनू / कहू / चलू / अहाँ / बिना : 12
सदाशिव / महाजन / निशाकर / दनादन / चकाचक : 122
देखल / सूनल / भागल / नोतल / कान्हा / सदिखन / निश्चित : 22
ध्यान / नाम / मेघ / राति / अन्त / धोन्हि / लोक / : 21
प्रत्यक्ष : 221 / आवश्यक : 222
(ii) मात्राक्रमक उदाहरण :
'सदाशिव'- एहि शब्दमे सदा आ शिव शब्दक स्थान परिवर्तन केलासँ कतेक शब्द अथवा शब्दक समूह बनि सकैत अछि आ तदनुसार ओते तरहक मात्राक्रम सेहो । जेना निम्नलिखित शब्द-समूह आ ओकर मात्राक्रमक अवलोकन कयल जाए :
शब्द समूह मात्राक्रम
सदा शिव शिव 1222
सदा शिव सदा 12212
सदा सदाशिव 12122
एहि शब्द समूहक कय बेर आवृति सेहो एहि प्रकारें भ' सकैत अछि :
सदा शिव सदा शिव 122-122
सदा शिव सदा शिव सदाशिव 122-122-122
सदा शिव सदा शिव सदाशिव सदाशिव 122-122-122-122
सदाशिव शिव-सदाशिव शिव 1222-1222
सदाशिव शिव-सदाशिव शिव सदाशिव शिव 1222-1222-1222
सदाशिव शिव-सदाशिव शिव सदाशिव शिव सदाशिव शिव 1222-1222-1222-1222
सदा शिव सदा- सदा शिव सदा 12212-12212
सदा शिव सदा- सदा शिव सदा- सदा शिव सदा 12212-12212-12212
सदा शिव सदा- सदा शिव सदा- सदा शिव सदा- सदा शिव सदा 12212-12212-12212-12212
सदा सदाशिव सदा सदाशिव 12122-12122
सदा सदाशिव सदा सदाशिव सदा सदाशिव 12122-12122-12122
सदा सदाशिव सदा सदाशिव सदा सदाशिव - सदा सदाशिव 12122-12122-12122-12122
ऊपर अंकित विभिन्न मात्राक्रममे अर्थात विभिन्न बहरमे गजल कहबाक अभ्यास कयल जा सकैत अछि ।
पहिनेसँ डेढ दर्जनसँ अधिक बहर चलनमे अछि ।
उदाहरण आ अभ्यास करबाक लेल किछु गजलक पहिल शेर प्रस्तुत अछि (उदहारण सभ देबासँ पहिने ई स्पष्ट कऽ दी जे गजलमे बहरकेँ पालन करैत काल जे अनुशासित रहैत छथि तिनका लेल किछु नियम शैथिल्य (वा कि छूट) सेहो भेटैत छनि आ एकर संपूर्ण जानकारी आशीष अनचिन्हारक "मैथिली गजलक व्याकरण ओ इतिहास" नामक पोथीमे भेटत। उदाहरण दैत काल हम ई नियम शैथिल्य केर सेहो उल्लेख केलहुँ अछि जाहिसँ पाठककेँ बुझबामे सुविधा होइन।) :
(1)
जखन घूरि पाछाँ तकै छी (122-122-122 )
अहाँ मोन हमरा पड़ै छी ( 122-122-122 )
( काफिया 'ऐ'क मात्रा अछि )
(2)
हसै छी कनै छी गजल गीतमे हम (122-122-122-122 )
अहीकें तकै छी गजल गीतमे हम ( 122-122-122-122 )
अथवा
हमर मैथिली ई हुनक मैथिली ई ( 122-122-122-122 )
अहँक मैथिली ई सभक मैथिली ई (122-122-122-122 )
(काफिया 'अ' ध्वनिक संग 'क' अछि )
(3)
मोनमे गाम अछि गाममे आम अछि ( 212-212-212-212 )
गाछपर आम अछि देहपर घाम अछि (212-212-212-212 )
(काफिया 'आ' मात्राक संग 'म' अछि )
(4)
गामो कहय जय मैथिली ( 2212-2212 )
शहरो कहय जय मैथिली ( 2212-2212 )
( काफिया 'ओ'क मात्रा अछि )
उपयुक्त काफियाक संग एहि चारू पहिल शेरक अनुसार अन्य कम-सँ-सम चारिटा शेर कहि गजल पूर्ण कयल जा सकैत अछि । मने गजलमे कमसँ कम 5 टा शेर रहबाक चाही।
5. मीर-बहर : ई बहर एकटा नियम शैथिल्य केर तहत बनल छै जकर उद्येश्य छै नव गजलकारकेँ सुविधा होइन। उर्दू आ हिंदी दूनूमे सेहो एहि बहरक प्रयोग कएल जाइत छै। एहिमे गजलक पहिल शेरक दुनू पाँतीमे दूटा अलग-अलग शब्दक लघु वर्णकें मिलाक' एकटा दीर्घ मानल जा सकैए यदि आन सभ शेरक सभ पाँतिमे सेहो दीर्घक संख्या पहिल शेरक दुनू पाँतिक दीर्घक संख्याक समान भ' जाइ । एहि बहरकें मीर-बहर कहल जाइत अछि । अहिना और बहर अथवा छन्द और काफियाक जानकारीक लेल 'अनचिन्हार आखर'ब्लॉगपर स्थित गजल शास्त्र आ व्याकरणक अध्ययन कयल जेबाक चाही ।
6. अपन पसंदक बहर :
अपन पसंदक बहरमे सेहो गजल कहल जा सकैत अछि । अपना पसंदक एक पाँती लिखू जाहिमे रदीफ़ आ काफिया हो, ओकर मात्राक्रम देखू, ओही मात्राक्रममे दोसर पाँती सेहो लिखू । गजलक पहिल शेर भेल । आब अही मात्राक्रममे कम-सँ-कम और चारिटा शेर लिखिक' गजल पूर्ण क' सकैत छी । उदाहरण :
माटि-पानि मिथिला केर बाजय जय मिथिला जय मैथिली
21 21 22 21 22 2 22 2 212
गाछ-पात मिथिला केर गाबय जय मिथिला जय मैथिली
बाजय आ गाबय केर अनुरूप पाबय, मानय,जानय, लाबय आदि शब्दक उपयोग काफियाक लेल कय 'जय मिथिला जय मैथिली' रदीफ रखैत अही मात्राक्रममे और चारिटा शेर पूर्ण कय गजल पूर्ण कएल जा सकैत अछि ।
7. बिना रदीफक गजल भ' सकैत अछि । उदहारण लेल एकटा गजलक पहिल शेर देखल जाए :
कौआकें कौआ कहि देल
बूझू बड़का गलती भेल
एहिमे 'देल' आ 'भेल' काफियाक शब्द अछि । दूनू पाँतीमे मात्रा क्रम 22222221 अछि । यैह भेल बहर । एहिमे रदीफ नहि अछि । आब आगाँ एहि गजलक दोसर,तेसर,चारिम,पंचम शेर अर्थात चारिम छठम,आठम,दसम आदि पाँतीमे काफिया 'देल' आ 'भेल' सँ मिलैत-जुलैत शब्द हेबाक चाही । एकर संगहि सभ पाँतीमे मात्रा क्रम 22222221 रहबाक चाही । जेना
मुइला बहुतो जन महगीसँ
आ हुनकर वेतन बढ़ि गेल
उपरोक्त दुनू पाँतीमे सेहो मात्रा क्रम अछि : 22222221
अहिना सभ शेरमे समान मात्रा क्रम रखैत काफियाक लेल खेल / जेल / तेल राखि गजल पूर्ण कएल जा सकैत अछि ।
आब एकटा दोसर गजलक पहिल शेर देखल जाए :
अपन-अपन लाचारी छै
दुख सबहक बड़ भारी छै
एहिमे दुनू पाँतीक अंतिम शब्द 'छै' अछि । यैह 'छै' रदीफ अछि । दुनू पाँतीमे 'छै' सँ पहिने 'आ' मात्राक संग 'री' अक्षरबला शब्द अछि, ई काफिया भेल । आब दोसर,तेसर,चारिम,पांचम शेरक दोसर पांतीमे रदीफ 'छै' रहबाक चाही और 'आ' उच्चारणक संग री' अक्षर बला शब्दक काफिया हेबाक चाही जेना सरकारी / सबारी / अनारी / उधारी आदि । आब एहि शेरमे बहर देखू :
अपन-अपन लाचारी छै (12-12-2222)
दुख सबहक बड भारी छै (222-2222)
पहिल पाँतिक मात्रा क्रम अछि : 12-12-22-22 एहिमे दूटा लघु छै(1-1) जकरा एक दीर्घ ( 2 ) मानल जा सकैत अछि । तखन एकरो मात्रा क्रम 222-2222 भ' जाएत । अहिना शेष सभ शेरक दूनू पाँतीमे मात्राक्रम 222-2222 रखैत गजल पूर्ण कएल जा सकैत अछि ।
8. मैथिलीमे 'ग' आ 'ज' आदिमे नुक्ता नहि लगैत छैक, तें मैथिलीमे गजल शब्दमे 'ग' आ 'ज' मे नुक्ता नै देल जाइ छै ।
9. गजलमे अर्द्ध-विराम अथवा विरामक उपयोग नै होइत अछि ।
10. गजलक कोनो शीर्षक नहि रहैत अछि ।
11.पत्रिका सभमे गजलकें गजल जकाँ छापल जेबाक चाही, कविता जकाँ नहि । दूटा शेरक बीच स्थान रहबाक चाही ।
12. बहरक नाम अथवा मात्राक्रमक उल्लेख रहबाक चाही ।
13.अनुभवी लोक सभक कहब छन्हि जे शब्द सबहक संग किछु दिन खेलाइत-धुपाइत एहेन स्थिति अबैत छैक, जे जे पाँती मोनमे उतरैत छै सभ बहरमे रहैत छै ।
निम्नलिखित गजल सभमे आवश्यक तत्वक उपस्थितिक समीक्षा कयल जा
सकैत अछि ।
(1)
दूभि और धान छी अहाँ
पान आ मखान छी अहाँ
कूदि-फानि थाकि गेल छी
दूर आसमान छी अहाँ
बेर-बेर गाबि देखलौं
वेद आ पुराण छी अहाँ
भोरकेर सूर्य छी अहीं
रातिकेर चान छी अहाँ
पैघ-पैघ बात मोनमे
एकटा निदान छी अहाँ
आँखि मूँह कान छी अहीं
देह हम परान छी अहाँ
एहि गजलमे
(i) रदीफ़ अछि 'छी अहाँ'
(ii) पहिल शेरक दुनू पांति आ शेष सभ शेरक दोसर पांतिमे काफिया अछि 'आ' ध्वनिक संग 'न' / 'ण' वर्णसँ अन्त बला शब्द धान, मखान,आसमान,पुराण,चान,निदान,परान ।
(iii) बहर अर्थात मात्राक्रम अछि 21-21-21-21-2
2.
आनन्दित राखय जे सदिखन से रस्ता नहि देखल छल
दुखमे सुख छै सुखमे दुख छै से हमरा नहि बूझल छल
नीके सोची नीके बाजी नीके देखी से सिखलौं
नीकक फल नीके नहि होइछ से दुनियाँमे सूनल छल
हमरा भाग्यक निरमाता दोसर नै क्यो अपनहि छी हम
जै पोखरिमे डूबल छी से अपनहि हाथें खूनल छल
ध्यानी ग्यानी आ विज्ञानी केलनि लोकेलय सभटा
से सभटा पौलक जीवनमे जे जै खातिर भूखल छल
जैलय सदिखन झगड़ा-झाँटी से गाछी हमरो सबहक
किछु हमरो सबहक रोपल अछि किछु बाबाके रोपल छल
अपने चुनलौं हम अपनालय आमक टिकुला सन जीवन
सीखै छी सभदिन किछु नव-नव जे पहिने नहि सीखल छल
एहि गजलमे-
(i) रदीफ़ अछि 'छल'
(ii) पहिल शेरक दुनू पाँती आ शेष सभ शेरक दोसर पाँतीमे काफिया अछि 'अ' ध्वनिक संग 'ल' वर्णसँ अन्त बला शब्द सभ - देखल / बूझल / सूनल / खूनल भूखल / रोपल / सीखल ।
(iii) बहर अर्थात मात्राक्रम अछि 2222 2222 2222 222
3.
कखनो लाठी कखनो भाला कखनो तीर-कमान गजल
कखनो लागय ईंटा-पाथर कखनो पान-मखान गजल
कखनो खुरपी कुडहरि खंती ऊखड़ि और समाठ बनल
कखनो बाड़ी कखनो गाछी कखनो भेल मचान गजल
कखनो आङनमे अरिपन-सन कखनो नार-पुआर जकाँ
कखनो बाढ़नि कखनो चालनि कखनो सूप समान गजल
कखनो गामक चौबटिया लग मंदिर और इनार जकाँ
आ कखनो सीमापर लडइत देशक वीर जवान गजल
कखनो मौनी आ पौतीमे साँठल जीर-मरीच जकाँ
कखनो कोसीमे हलचल आ छटपट कोटि परान गजल
किनको खातिर मुरही कचरी जामुन आम लताम 'अनिल'
हमरा खातिर दीयाबाती छठि आ देव-उठान गजल
एहि गजलमे
(i) रदीफ़ अछि 'गजल'
(ii) पहिल शेरक दुनू पांति आ शेष सभ शेरक दोसर पांतिमे काफिया अछि 'आ' ध्वनिक संग 'न' वर्णसँ अन्त बला शब्द :
कमान / मखान / मचान / समान / जवान / परान / उठान ।
(iii) बहर अर्थात सभ पाँतीमे मात्राक्रम अछि : 2222- 2222 - 22-21-121-12
(iv) एहिमे दू टा लघु (1-1) क बदला एक दीर्घ (2) सेहो लीखल जा सकैत अछि । तखन मात्राक्रम भ' जाएत 2222 2222 2222 222
(v) एहि गजलक अंतिम शेरमे गजलकारक नाम अछि । एहि अंतिम शेरकें मकता कहल जाइत अछि ।
4.
ताम-झाम आ तड़क-भड़क चलिते रहलै
अहंकार नव कीर्तिमान गढ़िते रहलै
छिति जल पावक गगन पवन सभ ठाँ धूआँ
ऐ दुरदिनमे सभकें सभ ठकिते रहलै
ख़तम ने कहियो भेल महाभारत जगमे
पाण्डव आ कौरवक युद्ध चलिते रहलै
जकर पसेनासँ होइए धरती हरियर
से हकन्न अहिना सभ दिन कनिते रहलै
महिषासुरके भेष मात्र बदलैत रहल
नयनसँ नोरो निरभयाक झड़िते रहलै
लाल किला तँ सभदिन ताल ठोकैत रहल
जन्तर-मन्तरपर धरना पड़िते रहलै
काँपय धरती नव नव असली रावणसँ
नकली रावण त सभ साल जरिते रहलै
एहि गजलमे
(i) रदीफ़ अछि 'रहलै'
(ii) पहिल शेरक दुनू पाँती आ शेष सभ शेरक दोसर पाँतीमे काफिया अछि 'इ' ध्वनिक संग 'ते' सँ अन्त बला शब्द सभ --------- चलिते / गढिते / ठकिते / चलिते / कनिते / झड़िते / पड़िते / जरिते ।
(iii) बहर अर्थात मात्राक्रम अछि 2222 2222 222
(iv)दू टा अलग-अलग लघुकें एकटा दीर्घ मानल गेल अछि ।
(v)तेसर शेरक पहिल पाँतिक अंतिम दीर्घक गिनती लघुमे भेल अछि ।
(vi)अंतिम शेरक पहिल पाँतिक अंतिम लघुक गिनती दीर्घमे कएल गेल अछि ।
(5)
माछ-दही जतरालय की
ई दुनिया ककरालय की
जे दै छै देबे करतै
नै कहतै हमरालय की
किछु बाजत आ नठि जायत
बिपटा आ लबरालय की
कतहु बैसिकय खा लेतै
ठाँ-पीढ़ी बगड़ालय की
एके ठाँ सुतबो करतै
मारि-गारि झगड़ालय की
देशक खातिर लडू-मरू
भैयारी बखरालय की
दुनियाँलय फगुआ आ ईद
बकरी आ बकरालय की
अहाँ भोज कय नाम करू
जे मुइलै तकरालय की
एहि गजलमे
(i) रदीफ अछि 'की'
(ii) पहिल शेरक दुनू पाँति आ शेष सभ शेरक दोसर पाँतिमे काफिया अछि 'अ' ध्वनिक संग 'रालय' सँ अन्त बला शब्द सभ । (iii) बहर अर्थात मात्राक्रम अछि 2222 222
(iv)दू टा अलग-अलग लघुकें एकटा दीर्घ मानल गेल अछि ।
(6)
नक्षत्र-ग्रहक फेरमे पड़बाक काज नै छै
भदबा आ दिगशूल सँ डरबाक काज नै छै
सभ शास्त्र आ पुराणक अमृत बचाक' राखू
तन-मनमे थाल-कादो भरबाक काज नै छै
सभ थिकाह अपने सदिखन से ध्यान राखी
नामपर जाति-धर्मक लड़बाक काज नै छै
परमातमाक संतति अहीं देवता आ देवी
धन लेल मारबाक आ मरबाक काज नै छै
पावन ई भूमि मिथिला ई मैथिलीक नैहर
एहि ठाँ कोनो मोकदिमा करबाक काज नै छै
तप त्याग और शीलक संस्कार अछि जरूरी
ई स्वर्ण वस्त्र भोज और मड़बाक काज नै छै
विष थीक मांस-मदिरा पापड़ अँचार चिन्नी
तिलकोरकेर तड़ुआ तड़बाक काज नै छै
शब्दक नशामे भेटत आनन्दकेर खजाना
संगति शराब भाङक धरबाक काज नै छै
ज्ञानेक गंग-धारा तन-मन करैछ पावन
थिक आगि भय आ चिन्ता जरबाक काज नै छै
एहि गजलमे
(i) रदीफ अछि 'काज नै छै'
(ii) काफियाबला शब्द सभ अछि जकर अन्तमे 'अ' उच्चारणक संग 'रबाक' अथवा 'ड़बाक' वर्ण-समूह अछि : पड़बाक / डरबाक / भरबाक / लड़बाक / मरबाक / करबाक / मडबाक / तरबाक / धरबाक / जरबाक ।
(iii) बहर अछि : सरल वार्णिक बहर, प्रत्येक पाँतिमे वर्णक संख्या अछि : 17
उपरोक्त सभ उदाहरणसँ स्पष्ट अछि जे व्याकरण-सम्मत मैथिली गजल कहबाक मार्ग सामान्य अछि, जटिल नहि।
संपर्क : 8789616115

Suggested citation: जगदीश चन्द्र ठाकुर 'अनिल'. “बिना बहर आ काफिया गजल कोना भेलै.” Videha — First Maithili Fortnightly eJournal, issue 358, pp. 213–235, 2022-11-15. https://www.videha.co.in/research/2022/358/बिना-बहर-आ-काफिया-गजल-कोना-भेलै.htm

मूल विदेह अंक / Original issue