गजेन्द्र ठाकुर
शरदिन्दु चौधरीक संस्मरणात्मक हास्य-व्यंग्य संग्रह- 'जँ हम जनितहुँ'
हास्य-व्यंग्य संग्रह तँ फेर ई संस्मरण साहित्य केना भेल? एकर उत्तर शरदिन्दु स्वयं दैत छथि- "जँ हम जनितहुँ जे साहित्यिक क्षेत्रमे सेहो राजनीतिये जकाँ खेल होइत छैक तँ कथमपि एहि क्षेत्रमे पैर रखबाक दुस्साहस नहि करितहुँ मुदा आब तँ फँसि गेल छी आ दूध-माछ दुनू बांतरवला परि सन भऽ गेल अछि। ने उगिलते बनैछ आ ने घोँटिते।" आ आगाँ ओ लिखैत छथि- "... जनिक चरित्र, हमरा हास्य-व्यंग्यमे फर्क छैक से नहि बुझय देलक आ जनिक सम्भाषण हमर लेखनक कथ्य बनल।... हमर पत्रकार प्रवृत्ति जहिया जे देखलक से लिखलक।" से सिद्ध भेल जे ई संस्मरणक पोथी थिक आ कॉमाक भीतर देल वक्तव्यमे कोनो नोन मिर्च नै-छै, हँ संस्मरणक हेडिंगमे आ इनवर्टेड कॉमाक बाहर नोन-मिर्च छै मुदा सेहो कने मने।
ऐ पोथीमे ११ टा संस्मरण अछि जे पुरस्कार लोलुप मैथिलीक मूल धाराक साहित्यकार, जइमे सभ जातिक साहित्यकार छथि, केर किरदानीक कारण हास्य-व्यंग्य संग्रह बनि गेल अछि। साहित्यकार सभक असली साहित्यिक नाम ऐ संग्रहमे देल गेल अछि जे एकर प्रामाणिकताकेँ बढ़बैत अछि, ई पोथी २००२ मे प्रकाशित भेल मुदा २०२२मे सेहो ओइ वर्णित साहित्यकार सभक ओहने छिच्छा छन्हि।
१
अथ ऑपरेशन साहित्य अकादेमी
ऐ संस्मरणमे मात्र सम्वाद अछि, इनवर्टेड कॉमाक भीतर। से कोनो नोन मिर्च नै, हेडिंग सेहो कम नोन-मिर्चक, 'अथ' संस्कृतक शब्द छिऐ, बिस्म्मिल्लाहक पर्याय, से 'अथ ऑपरेशन साहित्य अकादेमी'मे के सभ कलाकार छथि? विवरण नीचाँ अछि-
मुख्य कलाकार- मोहन भारद्वाज (आब स्वर्गीय) आ रमानन्द झा 'रमण'
किरदानी- लोकक (साहित्यकारक साहित्यक कुण्डली बाचब) मुदा बेसी काल आपसेमे टाल-गुल्ली खेलायब।
सहायक कलाकार- एकटा 'साठा तब पाठा' कवि, एकटा ससुर-जमायक जोड़ी।
किरदानी- पहिलुके पोथीसँ पुरान कवि सभकेँ मूर्च्छित करब, साहित्य अकादेमीक अकासमे विचरण।
टेक्निक- एक दोसाराक पोथीक ढिलहो, चेतने समिति जकाँ कतबो कटाउझ होउ, राज कक्केक आकि भातिजेक।
२
अपील
मुख्य कलाकार- मोहन भारद्वाज (आब स्वर्गीय), बासुकीनाथ झा आ रमानन्द झा 'रमण'
किरदानी- मैथिली अकादमी आ चेतना समितिक प्रकाशन गतिविधिपर कब्जा।
सहायक कलाकार- पाठकजी, दिनेशजी, इन्द्रकान्त जी।
किरदानी- क्रमसँ क्रोधी, भोगी आ लोभी।
टेक्निक- विद्वताक ढेकार करैत कठहँसी।
३
ईहो पुरुष अलबत्ते
मुख्य कलाकार- एकटा संस्थाक उच्चाधिकारी
किरदानी- काज बेरमे हाथ थरथरेनाइ।
सहायक कलाकार- रिक्त।
टेक्निक- कनफुसकीसँ प्रेरित भऽ समाज-सुधार आ भाषाक उद्धारक स्वांग।
४
देखल एकटा शूटिंग
मुख्य कलाकार- उपेन्द्रनाथ झा 'व्यास', मधुकान्त झा, मोहन भारद्वाज, रमानन्द झा 'रमण', रामदेव झा, पुर्णेन्दु चौधरी, चन्द्रनाथ मिश्र 'अमर'।
किरदानी- मैथिली अकादमी आ चेतना समितिक साहित्यक गतिविधिपर कब्जा। 'अंग्रेजी फूलक चिट्ठी' प्रसंग। सोमदेव, रमानन्द रेणु आ हंसराजकेँ बालिग नै होमऽ देब। चटिसारक चेला भीमनाथ, जयमन्त आ मदनेश्वर।
सहायक कलाकार- जयकान्त मिश्र, देवकान्त झा, कुलानन्द मिश्र, राजमोहन झा, उदय चन्द्र झा 'विनोद', अशोक, अग्निपुष्प, केदार, तारानन्द वियोगी, रमेश, शिवशंकर।
किरदानी- राजमोहन झा द्वारा भीम भाइसँ पहिने पुरस्कार प्राप्ति लेल अपन कोरपच्छु अशोक, अग्निपुष्प, केदारकेँ आगाँ करब। शरदूक एक्के बोलपर विजय कुमार मिश्र आ विवेकानन्द मैदानसँ बाहर, वीरेन्द्र झा द्वारा अमरेश पाठककेँ पानि पिआयब। गोकुलनाथ द्वारा प्रवासीकेँ लुढ़कायब।
मदारी- छत्रानन्द सिंह झा (बटुक भाइ), गोपेशजी।
नेपथ्यमे (संरक्षक)- उषाकिरण खान आ मंत्रेश्वर झा।
अन्तिम प्रस्तोता- गुंजनजी।
टेक्निक- मोहन भारद्वाज द्वारा भीम भाइ आ रामदेव झाकेँ लड़ायब आ स्वयं साहित्य अकादेमी परामर्शदातृ समितिमे घुसब, रमणजी द्वारा गोविन्द झा अभिनन्दन ग्रंथ सहित आन-आन ठाम ऐ कोठीक धान ओइ कोठीमे करब आ चेतना समितिकेँ सोधब।
पुरस्कार लोलुपक तीर्थ स्थल (सन २००२ धरि)- पटनाक गुरुद्वारा (आर-ब्लॉक), दरभंगाक श्यामा मन्दिर (राजकुमार गंज) आ प्रयाग (पी.सी. बनर्जी रोड)।
५
स्वास्थ्य-रक्षा पुरस्कार
कार्यक्रमक प्रेरणा- बिनाका गीतमाला।
उद्घोषक- मैथिलीक अमीन सयानी छत्रानन्द मुदा हुनकर बटुक हेबाक कारण ई भार अशोककेँ देल गेल।
प्रश्न- गोविन्द झाकेँ साहित्य अकादेमी पुरस्कार किए?
प्रश्नमंचमे के सभ शामिल नै?- रमानन्द रेणु, हंसराज, पूर्णेन्दु चौधरी, आ रहिकाक दुलहा उदयचन्द्र झा 'विनोद'।
एक सदस्यीय निर्णायक मण्डल- सुमनजी।
के सभ बहिष्कार केलन्हि?- उपेन्द्रनाथ झा व्यास, डॉ. अमरेश पाठक आ आनन्द मिश्र (एक सदस्यीय निर्णायक मण्डलमे नै रखबाक कारणसँ)।
सुमनजी द्वारा जारी १६ सदस्यीय प्रतियोगीक सूची- सुरेश्वर झा, राजमोहन झा, मार्कण्डेय प्रवासी, मोहन भारद्वाज, भीमनाथ झा, प्रभास कुमार चौधरी, जीवकान्त, शेफालिका वर्मा, कीर्तिनारायण मिश्र, मन्त्रेश्वर झा, अग्निपुष्प, सुभाषचन्द्र यादव, मायानन्द मिश्र, डॉ धीरेन्द्र, सोमदेव आ केदार कानन।
स्वागत गीत- बुद्धिनाथ मिश्र आ शान्ति सुमन।
उत्तर- राजमोहन झा- गोविन्द झा द्वारा हिन्दीमे लिखल जयबाक आशंकाक (धमकीक) कारण।
घोषणाक उपरान्त- विनोद कुमार झा, अग्निपुष्प आ वियोगीक राजमोहन झाक कनहापर खुशीसँ झूमब। सुरेश्वर झा- जेँ हम प्रतिनिधि तेँ गोविन्द झाकेँ पुरस्कार। रवीन्द्रनाथ ठाकुर द्वारा महेन्द्रकेँ तलाक दऽ अशोक संग झूमब। प्रभास कुमार चौधरी- जेँ गोविन्द बाबू मनि लेलनि जे हुनकर कथा हमर आ मामा (गुंजन) सँ घटिया छनि, तेँ। अक्कूक ब्लड-प्रेसरक हाइ होयब, लटुआ कऽ खसब। विभारानीक आँचरसँ हवा करब, किशोर, रमेश आ कुमार शैलेन्द्रक ईर्ष्या। अशोक लंगूरभक्त भीमनाथकेँ आकृष्ट करैत छथि।
सुमनजी द्वारा अशोककेँ कहब- जयकान्त बाबूक जमाना नहि छनि जे सब काज पाइयेपर हेतै, आब किछु पैरबीयोपर हेतै।
अशोक- उमानाथ बाबू, चेतकर बाबू, सुभद्र बाबूकेँ देखिकेँ डरा जायब आ स्वास्थ्य रक्षा पुरस्कारक गप कहब। ई उत्तर ककर से लेखनाथ मिश्र आ डॉ. बासुकीनाथ झा द्वारा पूछब। मोहन भारद्वाज द्वारा आत्मप्रशंसा आ सुमनजी सँ फगुआ शिरोमणिक पुरस्कार। कुलानन्द मिश्र प्रतिज्ञा पूरा भेलापर अपन दाढ़ी छटयबाक लेल उपेन्द्र ठाकुरक घर दिस बिदा होइत छथि।
६
धन्य लालूजी जे आइ..
पं. ताराकान्त झा द्वारा मैथिलीकेँ बिहार लोक सेवा आयोगमे फेर सँ शामिल करबाबैले पटना उच्च न्यायालयमे जीत मुदा लालूजी द्वारा तकरा सर्वोच्चा न्यायालयमे लसकायब।
७
सम्पादकक नाम...
फचांड़ि मिसरक पत्र
८
एकालाप
मोहन भारद्वाजक साहित्य अकादेमी पुरस्कार नै भेटलापर आर्त्तनाद- राजमोहन झा अहाँक रक्षा ने गौरीनाथ ने अग्निपुष्प ने सुभाषचन्द्र यादव कऽ सकत।
भांग पिबैत शिष्य सभ: अशोकक नेतृत्वमे रमेश, वियोगी आ श्रीनिवास।
तारानन्द वियोगी (अशोककेँ)- लड़ाइये देलिअइ अशोक भाइ अहाँ दुनू पीठाचार्यकेँ (मोहन भारद्वाज आ राजमोहन झा)।
पुनश्च: बादमे विद्यानाथ झा 'विदित'क उपन्यास 'विप्लवी बेसरा'क कलमतोड़ (गदगदी आ पलंगतोड़ समीक्षाक पर्याय) समीक्षाक बादो ओ हुनका पुरस्कार नै दियेलखिन्ह।
९
सफेदपोशक भतार
हवाला, यूरिया, वर्दीकाण्ड, पशुपालन, अलकतरा आदि घोटालाक वर्णन।
१०
जँ हम जनितहुँ
मूलधाराक मैथिलीक साहित्यकारकेँ देखबाक, चिन्हबाक आ भजारबाक अवसर।
११
प्लेटोक सपना, भारत आ कौमार्य-राजनीति
प्लेटोक रिपब्लिकक फिलास्फर किंग आ आइ-काल्हिक अविवाहित व्यक्तिक आचरणपर मनन।
अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ।
२.१९.गजेन्द्र ठाकुर- शरदिन्दु चौधरीक तीनटा व्यंग्य संग्रह- 'बड़ अजगुत देखल..', 'गोबरगणेश' आ 'करिया कक्काक कोरामिन'