विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका · VIDEHA · ISSN 2229-547X

आधुनिकताक परिवेश मे आधुनिक चित्रकला

सोनी नीलू झा · 2023-04-15 · अंक 368 · पृष्ठ 15–18

मिथिलाक अनूठा चित्रकार छथि रविन्द्र दास जी आ संजु दास जी। जतय मधुबनी पेंटिंग चारु कात भेट जाएत हमरा अहाकें, ओतए हिनकर आधुनिक चित्रकला एकटा फराक शैली में भेटत मुदा बहुत कम देखैत होएब, से नहिए सन।

ई कला कोनो नव थिक से नहि अपना ओत लोक लेल नव भ' सकैछ।
ओना जतय स्त्रीक मूक रहबाक परम्परा हो, ओहि ठामक ओहि परम्परा कें सभ्यता बुझनाहर लेल ई चित्र सभ अवश्य खटकतनि मुदा तखन, जखन ओ अर्थ बुझथिन।
आ जा धरि ओ लोकनि बुझताह/ बुझतीह ता धरि ई आधुनिक चित्रकला बहुत आगु ल' गेल रहतीह संजु जी, से विश्वास अछि।

एहि बीच, बिहार सरकार द्वारा आयोजित "बिहार म्यूजियम पटना" मे "हर महिला कुछ खास" प्रदर्शनी सेहो चलि रहल छैक। जतय दर्शक लेल एकटा अद्भूत प्रदर्शनीक केन्द्र बनल छनि हिनक चित्र सभ।

बिहार संस्कृति विभाग पटना सहित आर आन-आन क्षेत्र सँ हिनक कला कें पुरस्कृत कएल गेल अछि।
प्रत्येक क्षेत्र मे दर्जन सँ बेसी प्रदर्शनी मे हिनक सहभागिता छनि आ एकल प्रदर्शनी सेहो।
दर्जन भरि सँ बेसी मैथिली, हिन्दी पोथी,पत्रिकाक कवर पर हिनक बनाओल चित्र अपन स्थान सुनिश्चित कएने अछि।

कला कें कलाकार जँ अपन जीवनक अध्याय बना लैत अछि तँ ओकर चित्र बजैत अछि,अपन परिचय दैत अछि।
हँ ई सत्य गप जे ओहि लेल हमरा सभकेँ ओकर भाषा बुझबाक क्षमता होबाक चाही।

ओना तँ हिनका लोकनिक परिचय देबाक बेगरता नहि,
प्रख्यात कलाकार छथि लेकिन तैयो हमरा लगैत अछि जे
मिथिलाक लोक कें, कलाप्रेमी कें, हिनकर चित्रकला कें
कनेक अपन दृष्टि कें विस्तार क' देखबाक बेगरता अछि। "साहित्य,कला" कखनो अश्लील नहि होइत छैक अश्लील होइत छैक, नजरि आ सोच।

कतेको अवार्ड पुरस्कार सँ पुरस्कृत आ सम्मान कएल गेल छनि संजुजी आ रविन्द्र दास जीकें। हमरा गर्व होइत अछि हम हिनका आस-पास रहैत छी हमर अपन मिथिलाक छथि, हम एकदोसरकेँ चिन्हैत छी।

संजु जीक चित्र मे गामक परिवेश मे ग्रामीन स्त्रीक जीवन शैली भेटैत अछि, हिनक कलाक माध्यम सँ हुनका लोकनिक विचार बुझैत छी।
हिनक बनाओल बहुत रास एहन चित्र अछि जाहि चित्र कें हम सभ बैठक हॉल मे, सयनकक्ष मे,लगा सकैत छी।

सभसँ खुशीक गप जे एहि शैलीक चित्रक स्वप्रशिक्षित छथि एहि शैली मे चित्र बनाएब पुरुष प्रधान समाज मे ठीके एकटा चुनौती थिक। जतय सिखबैत हो सभ्यता मे, झांप-तोप आ अपन इच्छा कें दबा देबाक लेल, ओहन समाज मे ओहि ठाम हिनकर चित्र अनघोल करैत अछि, बहुत रास गप कहैत अछि।

हमरा मोन अछि हम सभ एकटा
पुरस्कार प्रदान सभागार मे बैसल रही, हमरा बगल मे चित्रकला आदरणीय रविन्द्र दास जी आ संजु दास जी बैसल रहथि आ सामने मंचपर गंभीर विमर्श चलैत छल जतय, आदरणीय भैरव लाल दास जी संग आर भी बहुत गणमान्य व्यक्तिव सभ उपस्थित रहथि। हमरा प्रसन्नता भेल जखन सौ - दू सौ दर्शक आ स्रोता सँ भरल सभागार मे, आदरणीय गंगेश गुंजन जीक वक्तव्य चलि रहल छल सभ सुनि रहल छलथि, ई गप कतेक गोटेकें धिआन हेतनि से नहि कहि सकब। गंगेश गुंजन जीक कहब रहनि जे जखन कोनो कलाकार आ साहित्यकारकेँ अभिनय कला व लेखन लेल पुरस्कृत कएल जाइत छैक तँ अर्थक स्थान पर संजु दास आ रविन्द्र दास जी इशारा करैत ओ
संकेत केलथिन जे हमरा सोझां प्रसिद्ध चित्रकार बैसल छथि हुनका लोकनिक चित्र सँ सेहो पुरस्कृत कएल जा सकैछ। ई गप हुनकर ठीके बहुत दूरक आ गहींर गप छल। ई बात मैथिल लोककें मोन रखबाक चाहियैन।

एत' हम हुनक दुनू गोटेक गप कहय चाहब, रविन्द्र जी आ संजु जी,मिथिला मे एकटा नव चीज सिखबाक परम्परा ठाढ़ करैत छथि।

हमरा सभकें दोसर पेंटिंग सभ जकाँ आधुनिक चित्रकला सेहो सिखबाक, बुझबाक चाही।
दर्शक केँ सेहो कला, चित्रकला बुझब, सिखब चाही,हम सभ तखने आलोचना आ समीक्षा करबाक योग्य बनब।
आलोचना आ समीक्षा सेहो आवश्यक मुदा तखने ने जखन बुझब,गुणब।

हमरा लगैत अछि मैथिली मिडिया लोकनिकेँ हिनका सभ
संँ साक्षात्कार करबाक चाहियैन। एहि सभ विषय पर
फैल सँ विमर्श होबाक चाहियै।

Suggested citation: सोनी नीलू झा. “आधुनिकताक परिवेश मे आधुनिक चित्रकला.” Videha — First Maithili Fortnightly eJournal, issue 368, pp. 15–18, 2023-04-15. https://www.videha.co.in/research/2023/368/आधुनिकताक-परिवेश-मे-आधुनिक-चित्रकला.htm

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