सबस पहिने त हम ई बात फरिछा दी जे हमरो विचार अछि की कला ,साहित्य आ फिल्म मे रचनाकार के किछु स्वतंत्रता देल जेबाक चाही नहि त नव विचार आ नव कला परंपरा के विकास समाप्त भय जायत l सब कलाप्रेमी लोकनि सों हमर आग्रह जे कोनो कलाकृति मे अश्लीलता अछि की नहि तेकरा ओहि कलाकृति के विषय के मांग , आकृति के भाव भंगिमा आ कलात्मककता देखलाक बादे तय करू l एकटा आधुनिक कलाकार भेला के कारण हमर विचार स अश्लीलता मात्र एकटा विचार छियैक l जेना एकटा गरीब के फाटल नुआ मे ओकर गरीबी देखाई दैत छैक मुदा किछु लोक के ओहि मे अश्लीलता सेहो देखाई छनि l भारत आ भारतीयता पर गर्व करैबला लोक राजकपूर सन फिल्मकार पर गर्व करैत छथि मुदा हुनक फिल्म राम तेरी गंगा मैली मे मन्दाकिनी के अपन बच्चा के दूध पियाबै काल मे किछु लोक के ओकर बेबसी देखाई पड़लै त किछु के अश्लीलता सेहो देखाई देलकनि l एखन धरि हम जे कला समाज स सिखलहुँ जे कला मे अश्लीलता नाम के कोनो विचार या कलाकृति नहि होइत छैक l जेना साहित्य मे पाठक तय करैत छथिन की कोन कलाकृति नीक छै आ की बेजाय तहिना कला मे दर्शक , कला समीक्षक आ बाज़ार l आब हमर प्रेरणा अमृता शेरगिल छथि से स्वयं अपन न्यूड चित्रण केने छलीह l आधुनिक कला के इतिहास मे कतेको नग्न चित्रण भेटत l बहुत रास भारतीय स्त्री कलाकार नग्न चित्रण करैत छथिन जेना अनुपम सूद अर्पिता सिंह ,मिथु सेन ,अंजलि इला मेनन l
आब अहाँ लोकनि सों एकटा सवाल कि गीत गोविन्द के अश्लील कहब ,विद्द्यापति के सब रचना के अश्लील कहब ,कोहबर के अश्लील कहब ,तंत्र कला के अश्लील कहब ,खजुराहो के अश्लील कहब एतबे नहि कतेक गैर सनातनी लोक त शिव लिंग के सेहो अश्लील कहैत छथि l सनातन धर्म के स्थापित करय बला शंकराचार्य ई कहि क जे अपनेक विषय अश्लील अछि मंडन मिश्र के स्त्री उभय भारती केँ मना नए केने रहथिन काम शास्त्र संवाद करय लेल । कृष्ण के बियाह त रुक्मिणी स भेल रहैन मुदा राधा कृष्ण नाम जपैत काल कोनो मैथिल लोक के मैथिल संस्कारक याद नहि अबैत छनि l चर्चित साहित्य खट्टर काका के तरंग मे सबस बेसी परंपरा के खिधांस कयल गेल छैक त कि ओ नीक साहित्य नहि l
हमर देश के चर्चित पत्रिका आउटलुक मे छपल किछु रेखांकन आ पेंटिंग मे मैथिल लोक के अश्लीलता देखाई दैत छनि मुदा ओकर विषय , भाव भंगिमा नहि , ओकर कलात्मकता नहि l एतय सबस पहिने हम अपन ओहि चित्र के चर्चा करय चाहब जेकरा एकटा साहित्यकार पद्मनाभ जी कला मे अश्लीलता कहि क सम्बोधित केलनि l एतबे नहि ओकरा ओ भगवती घर स सेहो जोड़ि के धार्मिक भावना भड़काबै के कोशिश केलनि l हमर चिंता मात्र ई अछि जे ओ बेसी पढ़ल लिखल विदेश मे नौकरी करय बला लोक छथि देश विदेश मे कतेको कलाकृति देखने हेताह l ओहि चित्र मे गोआ तट पर विदेशी पर्यटक के कोल्डड्रिक्स बेचैत एकटा स्त्री छैक l सनबाथ लेल बिकनी मे सुतल विदेशी स्त्री आ अपन आजीविकाक लेल कोल्डड्रिक्स बेचैत मैथिल स्त्री l आइयो धरि बेसी लोक मिथिला पेंटिंग के मात्र देवी देवता के चित्रण बला परंपरागत शिल्प बुझैत छथिन एकटा कला नहि l जखन कि आब मिथिला पेंटिंग विश्व प्रसिद्ध कला थिक जाहि मे आठ टा स्त्री के पद्मश्री सेहो भेटल छनि l कोनो कला व साहित्य जा धरि समकालीनता के समावेश नहि करैत छैक ता धरि ओकरा मे जीवंतता नहि आबि सकैत छै l पुष्पा देवी ,संतोष दास ,अविनाश कर्ण ,अमृता झा आर कतेको नव कलाकार सब एहि बात के नीक जकाँ बुझैत छथि l हुनका जानकारी लेल हम बता दी जे सबस पहिने पद्मश्री गंगा देवी गैर पारम्परिक विषय सब के मिथिला कला मे जगह देलनि रोलर कोस्टर ,हॉस्पिटल के दृश्य ,ट्रेन के दृश्य ई सब हुनक गैर पारम्परिक विषय छलनि l पद्मश्री गोदावरी दत्त जे जीवन भरि पारम्परिक विषय बनबैत रहलीह एकटा अपन कलाप्रेमी ग्राहक लेल बुद्धा कार्निवाल सेहो बनौलनि l
कतेक मैथिल लोक कहैत छथि एकटा मैथिल भय क अहाँ मिथिला पेंटिंग कियैक नहि करैत छी l हम मैथिल छी त की मात्र मिथिले पेंटिंग करी , मॉडर्न पेंटिंग नहि कय सकैत छी l हमहू शुरुआत मे पारम्परिक मिथिला पेंटिंग करैत छलहुँ मुदा बियाह के बाद आधुनिक पेंटिंग करय लगलहुँ l आब हमर पेंटिंग मे आधुनिक कला आ समकालीन कला के विषयवस्तु आ तकनिकी सेहो देखाई देत l
किछु गोटे कहैत छथि आई धरि कोनो आन ख्याति प्राप्त कलाकार मिथिला पेंटिंग मे बिकनी पहिरल स्त्रीक चित्र नहि बनाओलनि. मिथिला पेंटिंग मे अहाँ जिनकर नाम सुनने छी ओ सब बूढ़ पुरान लोक सब छथिन पहिने मिथिला पेंटिंग मात्र पारम्परिक बनैत छलै मुदा आब किछु परिवर्तन भय रहल छैक जेना पुष्पा देवी ,अविनाश कर्ण ,संतोष दास l हमहू अपन रेखांकन मे कोनो मैथिल महिला के बिकनी मे नहीं देखाउने छी हमर चित्र जाहि मे अश्लीलता के आरोप लगाओल गेल अछि ताहि मे .गोआ समुद्र तट के दृश्य छै कोनो विदेशी पर्यटक के एकटा मिथिल स्त्री कोल्डड्रिक्स बेचीं रहल छथिन l पलायन के शिकार मैथिल ललना मानसिक वर्जना के तोड़ि क अपन रोजगार मे लागल छथि l
अहीं सब जबाब दिय जे विदेशी पर्यटक की कम्बल ओढिक सनबाथ लेतीह ? असल मे लोक परम्परा के ताबीज़ जकाँ गर्दैन मे टांग नेने छथि परम्परा बनैत बिगरैत रहलैया उदाहरण के लेल जयमाल अपन सबहक परंपरा नहि छल मुदा आब समाज अपना लेलक l
अपन समाज मे आई जे नकली संस्कारवान लोक छथि ओ सब छद्म लबादा ओढ़ेने छथि l साहित्य, कला आ संस्कृति के नाम पर पुराणपंथी दुकान चला रहल छथि सबके कलई खुजि रहल छनि ।
सोसल साईट पर विरोध के हम सामान्य रूप मे लेलहुँ कियैक त कोनो रचनाकार के ई सब सहय के क्षमता जरूर हेबाक चाही l गीत गोविन्द ,कालिदास आ विद्यापति के सौन्दर्य वर्णन पर बहुत लोक विरोध करैत छथिन । राजकमल चौधरी आ खट्टर कका के सेहो विरोध भेलै l
-संजू दास मो 9899242017