विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका · VIDEHA · ISSN 2229-547X

कथेतर गद्यक लेखक अशोक

गजेन्द्र ठाकुर · 2023-05-01 · अंक 369 · पृष्ठ 130–134

ओना तँ अशोक अपनाकेँ आब कथाकार अशोक कहै छथि (हुनकर फेसबुक प्रोफाइलक यएह नाम छन्हि) मुदा हुनकर पहिल प्रकाशित पोथी अछि एकटा कविता संग्रह 'चक्रव्यूह' जे प्रकाशित भेल १९८६ केर जनवरी मासमे। ओही वर्ष अशोक, शिवशंकर श्रीनिवास आ शैलेन्द्र आनन्दक सम्मिलित कथा संग्रह 'त्रिकोण' प्रकाशित भेल, नवम्बर मासमे, जइमे तीनू गोटेक ५-५ टा कथा छलन्हि।
अशोक कम लिखै छथि, कविता तँ आरो कम। मूलधाराक लेखकमे कम लिखबाक फैशन छै। जखन प्रेमचन्द तीन सय कथा लीखि लेलन्हि तखन जा कऽ ओ एकटा संग्रह बहार केलन्हि- 'मेरी प्रिय कहानियाँ' सन् १९३३ मे। ऐ पोथीमे प्रेमचन्द ई स्वीकार करै छथि जे नै चाहियो कऽ लेखकक सभ रचना नीक नै भऽ पबै छै। आ ईहो जे जँ पाठक एक लेखकक सभ रचना पढ़ि जाय तखन ओ जिन्दगी मे पाँचो छह टा लेखककेँ नै पढ़ि सकत। से हुनकापर दवाब पड़लन्हि जे ओ पाठक लेल ऐ तीन सयमे सँ किछु कथा चुनि कऽ अपन प्रिय कथाक रूपमे प्रस्तुत करथि। हमरो विचारे जहिया एकटा लेखक तीन सय कथा लिखि लिअय तखने ओकरा अपनाकेँ कथाकार घोषित करबाक चाही। ओना ओतऽ प्रेमचन्द ईहो कहि जाइ छथि जे लोककथामे मात्र उड़ैबला घोड़ा आदि होइ छै से कथाक महत्व लोककथासँ बेशी छै। प्रेमचन्दक ऐ गपसँ हम भिन्न विचार रखै छी आ फिराक गोरखपुरीक कथनसँ सहमत छी। फिराक गोरखपुरी अपन रुबाइक संग्रह 'रूप' मे लिखै छथि जे 'हिन्दू लोक गीत' जे हमरा दैत अछि से ओकरा मानवीय आ स्वर्गीय संगीत बना दइ छै, आ से गालिब, इकबाल आ चकबश्त सेहो हमरा नै दऽ सकला। ओ उदाहरण दइ छथि-
"बाबुल मोरा नैहर छूटल जाय,
ऊ ड्योढ़ी पर्वत भयी, आङन भयो विदेश।"
महाभारत आब लोकगीत बनि गेल अछि, लोकगाथा बनि गेल अछि, 'भील महाभारत' तकर उदाहरण अछि। अशोकक 'चक्रव्यूह' महाभारत आधारित किछु कविता अछि, से ओ लोकगीत आधारित अछि, लोकगाथा आधारित अछि।
से हमरा नजरिमे रचनाकार अशोक तीन टा छथि- कवि अशोक, कथाकार अशोक आ कथेतर गद्यक लेखक अशोक। अरविन्द ठाकुर अपन पोथी रोशनाइक लोकपक्षकेँ कथेतर गद्य कहै छथि, से निबन्ध-प्रबन्ध-समालोचना लेल हमहूँ ऐ शब्दावलीकेँ प्रयुक्त कऽ रहल छी।
कथेतर गद्यक लेखक अशोक
अशोकक कथेतर गद्यमे छन्हि मैथिल आँखि (२००७), संवाद (साक्षात्कार संग्रह) (२००७), कथाक उपन्यासःउपन्यासक कथा (२०१२), आँखिमे बसल (यात्रा कथा) (२०१३), बात-विचार (आलोचना) (२०१५), नीक दिनक बाइस्कोप (व्यंग्य संग्रह)(२०१८), राजमोहन झा (विनिबन्ध, २०१९) आ कथा-पाठ (२०२२)। संगमे किछु विदेह आ अन्यत्र छिड़िआयल समालोचना आ आन कथेतर गद्य सेहो छन्हि जेना 'बनैत कम बिगड़ैत बेसी' (सुभाष चन्द्र यादवक 'बनैत बिगड़ैत' पर), सम्पादक राजनन्दन लाल दास आ कर्णामृत, रामलोचन ठाकुरक कविता पढ़ैत, केदार नाथ चौधरीक उपन्यास, शरदिन्दुजी आदि।
संवाद (साक्षात्कार संग्रह) मे अशोक साक्षात्कार लेने छथि राजमोहन झा, धूमकेतु, कुलानन्द मिश्र आ मोहन भारद्वाजसँ। एक्को गोटेसँ ओ असहज प्रश्न नै पूछि सकला, राजमोहन झा द्वारा सुभाष चन्द्र यादवक राजकमल चौधरी मोनोग्राफ प्रसंगमे साहित्य अकादेमी पुरस्कार लेल कएल कम्प्रोमाइज हुअय (देखू हमर पोथी नित नवल सुभाष चन्द्र यादव, गजेन्द्र ठाकुर, २०२२ विदेह आर्काइवमे उपलब्ध), धूमकेतुक लाल झण्डाक सोंगर लऽ साहित्य रचब हुअय बा मोहन भारद्वाजक मैथिल ब्राह्मणक संस्कार गीतकेँ मिथिलाक संस्कार गीत कहब (देखू हुनकर सम्पादित मैथिली अकादेमीसँ प्रकाशित पोथी। बादमे जा कऽ उमेश मण्डलक सभ जातिक संस्कार गीत उमेश मण्डल द्वारा संकलित भेल आ विदेहमे ई-प्रकाशित भेल, जे असली मिथिला संस्कार गीत अछि।) आदि आदि। हँ 'छुट्टीक एक दिन' (डैडीगाम, २०१७) कथामे ओ अपना मोनक सभ सवाल जे ओ नै पुछि सकला, से उठा लेने छथि। प्रभास कुमार चौधरीसँ साक्षात्कार हुनकर मृत्युक कारण नै भऽ सकल आ तकर एवजमे ओ सन्धान अंक-३ प्रभास विशेष निकाललनि।
आँखिमे बसल (यात्रा कथा) (२०१३) अछि एकटा नैरेटिवक विवरण जे अशोकक पीढ़ीकेँ परसल गेल रहै, जतऽ सोवियत संघक बड़ाइ आ अमेरिकाक खिधांश कएल जाइत रहै, आ जे से करैत रहथि ओ अपन बाल-बच्चाकेँ पढ़ैले अमेरिका पठबैत रहथि। हमरा मोन पड़ैए जे एकटा हमर संगी कोनो परीक्षा दइले दरभंगा गेल आ यूनिवर्सिटी एरिया घूमि कऽ चलि आयल, कहलक जे दरभंगासँ नीक शहर तँ पूरा बिहारमे कोनो नै छै।यात्रा कथाक अतिरिक्त 'सोवियत रूस सँ' कवितामे सेहो अशोक सएह केने छथि (चक्रव्यूह, १९८६)।
मैथिल आँखि (२००७), कथाक उपन्यासःउपन्यासक कथा (२०१२) बात-विचार (आलोचना) (२०१५) आ कथा-पाठ (२०२२) हुनकर निबन्ध आ निबन्धात्मक आलोचनाक आलेख सभक संग्रह छियन्हि।
अशोकक आलोचना आ निबन्ध विधाक पक्ष आ विपक्षमे निम्न तथ्य सोझाँ अबैत अछि:
(१) हुनकर रचनामे मात्र मूल धाराक लेखकक अध्ययनक प्रमाण भेटैत अछि, समानान्तर धाराक गत १५ बर्खक अवदानसँ ओ अनभिज्ञ बुझाइत छथि, बा डेराइत छथि जे ओकर चर्चा हुनका मूलधारासँ काटि देत। 'मैथिली कथाक विकास: बदलैत स्वर एवं प्रवृत्ति' मे ओ लिखैत छथि जे मैथिलीमे सभसँ बेशी कथा जीवकान्त लिखलन्हि आ तकर संख्या ओ दू सय गनबैत छथि, ऐ आलेखकेँ ओ नव तथ्यक आलोकमे सुधारबाक अखन धरि आवश्यकता नै अनुभव केलनि, जखन कि जगदीश प्रसाद मण्डल अखन धरि ८५० कथा लिखि चुकल छथि।
(२) हुनकर जीवित रचनाकारक समालोचनामे आह-बाह आ विवरण मात्र भेटत। जीवित रचनाकारक समालोचनामे जँ ओकर कमजोर पक्षकेँ नै देखाओल जाय तँ फेर ओ अपन रचनामे सुधार केना कऽ सकता, उदाहरणक रूपमे 'दूर देस पलायनक मृगतृष्णा आ श्रमशील स्त्रीक संघर्षगाथा- हसीना मंजिल' देखल जा सकैए। मृत साहित्यकारक आलोचनामे ओ कने हिम्मत देखबैत छथि, जेना 'ललितक पृथ्वीपुत्र', मुदा ओत्तऽ ओ आर गड़बड़ कऽ दै छथि, ओ पुछै छथि- 'एतऽ ई स्वाभाविक प्रश्न उठैत अछि जे ललित खेतिहरक जीवन-संघर्षक उपन्यास रचैत काल कलपू आ बिजलीक प्रेम-प्रसंग के बीच मे किएक अनलनि? ब्राह्मण आ अछोपक बियाह-सम्बन्ध सन सामाजिक समस्या के उठायब किएक जरूरी लगलनि हुनका? ललित सन चेतना सम्पन्न लेखक अनेरे ढाही किए लेलनि?' अशोक आलेखक अन्तिम पाँतिमे तकर कारण बतबैत छथि- 'वस्तुतः ललितक मैथिल संस्कारक ई अवधारणा वर्णवादी वैचारिकताक देन थिक।' आ ऐ लेल ओ रामदेव झा संगे ललितक कोनो गपक सोंगर लेलनि, जकर आवश्यकता नै छल। प्रेम आ सेक्स एकटा शाश्वत विषय अछि आ अकाल हुअय आकि प्लेग ओ खतम नै भऽ सकैए, अशोककेँ ऐ लेल कोनो सोंगरक जरूरी नै छलन्हि। गैब्रियल गार्सिया मार्क्विसक 'लव इन द टाइम ऑफ कोलेरा' तकर प्रमाण अछि।
(३) नीक दिनक बाइस्कोप (व्यंग्य संग्रह) मे हुनका अपन सभ गप रखबाक अवसर छलन्हि, होलीक जोगीरा सन मुदा ओतऽ सेहो ओ चूकि गेला।

Suggested citation: गजेन्द्र ठाकुर. “कथेतर गद्यक लेखक अशोक.” Videha — First Maithili Fortnightly eJournal, issue 369, pp. 130–134, 2023-05-01. https://www.videha.co.in/research/2023/369/कथेतर-गद्यक-लेखक-अशोक.htm

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